किन्नौर हादसा : पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण फिर रुका रेस्क्यू ऑपरेशन

किन्नौर।। किन्नौर जिले के निगुलसरी में रेस्क्यू ऑपरेशन रोक दिया गया है। पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने के कारण पिछले एक घंटे से आईटीबीपी ने रेस्क्यू ऑपरेशन रोक दिया है। पहाड़ी से लगातार पत्थर गिर रहे हैं। एनडीआरएफ के जवान लाऊड स्पीकर के जरिए लोगों को घटनास्थल की ओर न जाने के लिए आगाह कर रहे हैं।

बता दें कि गुरुवार को सीएम जयराम ठाकुर ने किन्नौर जिले का दौरा किया है। सीएम ने किन्नौर पहुँचकर निगुलसरी में हुए भूस्खलन का हवाई निरीक्षण किया। इसके बाद एसजेवीएनएल के झाकड़ी स्थित हेलीपेड पर सीएम हेलीकॉप्टर उतरा और वे सड़क मार्ग से घटनास्थल के लिए रवाना हुए।

फिलहाल मौके पर से 15 शव बरामद किए गए हैं। बुधवार को 10 शव मिले थे। वहीं गुरुवार को 5 और शव मिले हैं। एचआरटीसी की बस को भी मलबे से बरामद कर लिया गया है। बस सड़क से 500 मीटर और सतलुज नदी से 200 मीटर की दूरी पर मिली है।

सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से निगुलसरी में मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए एनडीआरएफ व जिला प्रशासन की टीम अथक प्रयास कर रही है। कई लोगों को सुरक्षित निकालने में हमें सफलता प्राप्त हुई है, लेकिन कई अमूल्य जिंदगियों को हम नहीं बचा सके जिसका हमें अत्यंत दुख है।

वॉकआउट विपक्ष का रोज़ का काम, एक दिन जनता ही कर देगी वॉकआउट : सीएम

शिमला।। सदन से वॉकआउट करना विपक्ष का रोज का काम हो गया है। विपक्ष को समझाने वाला अब कोई नहीं रह गया है। सीएम जयराम ठाकुर ने यह बात बुधवार को सदन में विपक्ष के हंगामे के बाद किए वॉकआउट पर कही।

सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि सदन में मंगलवार को भी विपक्ष की तरफ से गैर जिम्मेदाराना व्यवहार देखा गया और बुधवार को भी इसी प्रकार का व्यवहार देखने को मिला है। मंगलवार को भी विपक्ष के सदस्य तीन बार सदन से बाहर गए और बुधवार को भी ऐसा ही हुआ।

सीएम ने कहा कि विपक्ष के नेता सदन में गुंडागर्दी की बात कर रहे हैं। विपक्ष के नेता चिल्लाने की कोशिश कर रहे हैं। जब चिल्लाने से काम नहीं चल रहा है तो धमकी दे रहे हैं। उन्होंने कहा इस प्रकार वे अखबारों में खबरें बनाने में कामयाब हो जाते हैं। लेकिन इस प्रकार के व्यवहार से सदन की परंपराओं को ठेस पहुंचती है।

सीएम ने कहा कि विपक्ष का इस प्रकार का व्यवहार बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। विपक्ष के नेता चर्चा के विषय से हटकर जनसंघ और हमारी पार्टी का ज़िक्र करने लगे। इससे भी आगे बढ़ते हुए वे महारानी विक्टोरिया तक जा पहुंचे। यह सब होने के बावजूद भी लंबे समय तक उनकी बातों को सुना गया। लेकिन उन्होंने लगातार ऐसे विषय पर बोलना शुरू कर दिया जिसकी कोई जरूरत ही नहीं थी।

सीएम ने विपक्ष के ऐसे रवैये की निंदा करते हुए कहा कि विपक्ष के पास सार्थक चर्चा के लिए विषय है तो चर्चा करें। अन्यथा भविष्य में यही स्थिति रही तो इन्हें जनता ही भेज देगी।

आपदा में घरों को जितना नुकसान, उतनी राशि दे पाना संभव नहीं : महेंद्र सिंह

शिमला।। आपदा के दौरान घरों को हुए नुकसान के लिए सहायता राशि केंद्र सरकार की गाइडलाइन के तहत ही जारी की जाती है। इसमें बदलाव नहीं हो सकता है। घरों की जितना नुकसान हुआ होता है, उतनी राशि दे पाना संभव नहीं है। यह बात जल शक्ति एवं राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने विधानसभा सत्र के दौरान कही।

विधायक विक्रम जरयाल और प्रकाश राणा द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में जल शक्ति मंत्री ने कहा कि सरकार अन्य तरीकों से नुकसान को पूरा करने की कोशिश करेगी। घरों को हुए नुकसान के लिए मनरेगा के तहत पैसा दिया जाएगा।

मंत्री ने आगे कहा कि गौशालाओं के मरम्मत के लिए केस जल्दी सेंक्शन हो जाता है, लेकिन घरों के मरम्मत को मनरेगा में स्वीकृति नहीं मिलती है। ऐसे में मनरेगा के तहत घरों को हुए नुकसान की मरम्मत के लिए विशेष शेल्फ तैयार किया जाएगा। मनरेगा के माध्यम से कार्यों के लिए जिला के उपायुक्तों को कहा जाएगा।

राजस्व मंत्री ने आगे बताया कि प्रदेश में अभी 773.25 करोड़ रुपए का बरसात से नुकसान हुआ है, जिसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी गई है। 43 पक्के और 81 कच्चे घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसके अलावा करीब 600 घरों को आंशिक नुकसान हुआ है। इसमें लोक निर्माण विभाग को करीब 400 करोड़ और जल शक्ति विभाग को 285 करोड रुपए का नुकसान हुआ है।

छात्रवृत्ति घोटाले के चलते रुकी छात्रवृत्तियां देगी सरकार

शिमला।। छात्रवृत्ति घोटाले के चलते रुकी छात्रवृत्तियां विद्यार्थियों को मिल जाएंगी। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने विधानसभा में माकपा विधायक राकेश सिंघा द्वारा पूछे सवाल के जवाब में यह बात कही है।

राकेश सिंघा ने सदन में सवाल उठाया था कि प्रदेश के विभिन्न आरक्षित वर्गों के छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति का भुगतान नहीं हुआ है, जिस कारण छात्रों को कई समस्याएं आ रही हैं। 2017 के बाद छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई है।

सिंघा ने कहा कि इस बारे में जब विभाग से पूछा जाता है तो सीबीआई जांच का हवाला देकर टाल दिया जाता है। छात्रों ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से भी मुलाकात की है, लेकिन उन्हें मात्र आश्वासन ही मिला है।

सिंघा ने यह भी कहा कि छात्रवृत्ति घोटाले की सूचना छात्रों ने पहले ही प्रशासन को दे दी थी। बावजूद इसके यह धोखाधड़ी चलती रही। उन्होंने कहा कि आरक्षित वर्ग के छात्रों को प्रमाण पत्र भी नहीं मिल रहे हैं। इस वजह से वे नौकरी भी नहीं कर पा रहे हैं। सिंघा ने सरकार को इस मामले पर जल्द कार्रवाई करने और छात्रों को छात्रवृत्ति देने की बात कही।

इसके जवाब में शिकायत मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मिलकर इस सम्बंध में अपनी मांगें रखी थी। उन्हें जल्द यह समस्या सुलझाने का आश्वासन दिया गया है।

शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि यह घोटाला कांग्रेस की सरकार के समय हुआ है। जैसे ही जयराम सरकार सत्ता में आई दोषियों पर कार्रवाई कर गिरफ्तार किया गया। गोविंद ठाकुर ने कहा कि 2017 से पहले की जो छात्रवृत्तियां रुकी हुई हैं, वे भी विद्यार्थियों को दी जाएंगी।

किन्नौर भूस्खलन : एचआरटीसी बस समेत कई वाहनों के दबे होने की आशंका

किन्नौर।। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में एक और बड़ा भूस्खलन हुआ है। भूस्खलन की इस घटना में एचआरटीसी बस समेत कई छोटे वाहनों के मलबे की चपेट में आने की सूचना है। जिले के निगुलसेरी में नेशनल हाईवे-5 पर यह भूस्खलन हुआ है।

चील जंगल के पास पहाड़ी से चट्टानें गिरने से एचआरटीसी की बस मलबे में दब गई है। कई छोटे वाहनों की भी मलबे में दबने की खबर है। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम घटनास्थल के लिए रवाना हो गई है।

मिली जानकारी के अनुसार यह बस किन्नौर जिले में मूरंग-हरिद्वार रूट की है। लेकिन अभी तक इसकी प्रशासन की ओर से कोई पुष्टि नहीं हो पाई है। बस में कितने लोग सवार थे इसकी भी पुष्टि नहीं हो पाई है। लेकिन 35 से 40 लोगों के सवार होने की जानकारी है। इसके अलावा अन्य कितने वाहन दबे हैं और उनमें कितने लोग सवार थे, फिलहाल इसकी कोई जानकारी नहीं है।

अब दोबारा नहीं देनी पड़ेगी टेट परीक्षा

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में अध्यापक बनने के लिए अध्यापक पात्रता परीक्षा (टेट) की वैधता को आजीवन कर दिया गया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला हुआ है। इसका लाभ उन अभ्यर्थियों को मिलेगा जिन्होंने अगस्त 2011 के बाद टेट पास किया है।

टेट की वैधता आजीवन करने का फैसला केंद्रीय कैबिनेट का था, जिसे मंगलवार को प्रदेश कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी गई। कैबिनेट के इस फैसले का लाभ प्रदेश के लाखों अभ्यर्थियों को होगा।

इससे पहले टेट पास करने पर अभ्यर्थी केवल सात साल तक ही नौकरी के लिए पात्र होता था। इसके बाद अध्यापक बनने के लिए अभ्यर्थी को दोबारा परीक्षा देनी पड़ती थी।

बता दें कि केंद्र और राज्य एनसीटीई नियमों से टेट करवाते हैं। केंद्र सरकार के लिए सीबीएसई परीक्षा करवाता है, जबकि राज्य अपनी परीक्षा खुद करवाते हैं। टेट की वैधता आजीवन करने के लिए कुछ दिन पहले नेशनल काउंसिल फ़ॉर टीचर एजुकेशन राज्यों को लिखित निर्देश जारी किए थे। जिसके बाद मंगलवार को प्रदेश सरकार ने भी इसे लागू करने का फैसला किया है।

माना जा रहा है कि महिलाओं को सरकार के इस फैसले का सबसे अधिक लाभ होगा। दरअसल, शादी और बच्चों के चलते कई बार उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ती थी। अब टेट के वैधता आजीवन होने से वे दोबारा आसानी से नौकरी पा सकेंगी।

इसके अलावा प्रदेश सरकार टेट परीक्षा में भी बदलाव करने पर विचार कर रही है। इस बदलाव के बाद टेट की दो परीक्षाएं लेने की तैयारी है। पहली परीक्षा प्रदेश से संबंधित जानकारियों, सामान्य ज्ञान और बीएड की पढ़ाई पर आधारित होगी। जबकि दूसरी परीक्षा सिलेबस से संबंधित होगी। इसमें स्नातक और स्नातकोत्तर में की गई विषय वार पढ़ाई को शामिल किया जाएगा। प्रदेश में अभी टेट परीक्षा का जिम्मा राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड के पास है।

अनुबंध कर्मियों को नियुक्ति से वरिष्ठता देना संभव नहीं: सीएम

शिमला।। अनुबंध कर्मचारियों पर सेवा संबंधी विभिन्न नियम लागू नहीं होते हैं, जो नियमित कर्मचारियों पर होते हैं। अनुबंध कर्मचारियों और नियमित कर्मचारियों के नियमों और शर्तों में भी असमानता है।

इसलिए अनुबंध कर्मचारियों को नियमितीकरण के बाद उनकी नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता लाभ दिया जाना सही नहीं है। यह जानकारी विधानसभा के मॉनसून सत्र में सीएम जयराम ठाकुर ने दी है।

विधायक पवन कुमार काजल और विनय कुमार ने यह सवाल पूछा था जिसके जवाब में सीएम ने लिखित में यह जानकारी दी है। सीएम ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में अनुबंध कर्मचारियों की संख्या लगभग 8900 है।

हिमाचल प्रदेश लोकसेवा आयोग व हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग की ओर से यह कर्मचारी चयनित किये गए हैं। सीएम ने बताया कि सरकारी सेवा में कार्यरत सभी कर्मचारियों को वरिष्ठता उनकी नियमितीकरण की तिथि से दिया जाता है।

हिमाचल में फिर डराने लगा कोरोना, दो हफ्ते में डबल हो गए एक्टिव केस

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में कोरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं। बीते दो हफ्ते में प्रदेश में कोरोना के एक्टिव केस डबल हो गए हैं। कोरोना संक्रमितों के बढ़ते आंकड़े कहीं न कहीं सरकार व प्रशासन की चिंता को भी बढ़ा रहे हैं।

प्रदेश में कई बच्चे भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। वैज्ञानिकों ने यह अनुमान लगाया गया है कि कोरोना की तीसरी लहर बच्चों को अपना शिकार बनाएगी। ऐसे में बच्चों का संक्रमित पाया जाना अच्छा संकेत नहीं है।

आंकड़ों के अनुसार 28 जुलाई तक प्रदेश में कुल 953 एक्टिव केस बचे थे। वहीं, 9 अगस्त तक आते-आते यह आंकड़ा बढ़ कर 2,086 हो गया है। यानी दो हफ्ते में ही प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले दोगुना से ज़्यादा हो गए हैं।

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लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों के बीच एम्स ऋषिकेश ने भी लोगों को चेताया है। एम्स ने बढ़ते आर नॉट काउंट को लेकर चेतावनी दी है। एम्स के मुताबिक कोरोना संक्रमण को लेकर लोग लापरवाह हो गए हैं। एम्स का कहना है कि अगर लोगों ने अपने रवैये में बदलाव नहीं किया तो कोरोना की तीसरी लहर आने में देर नहीं लगेगी। जो बड़ी तबाही ला सकती है।

क्या होता है आर नॉट काउंट

आर नॉट काउंट ही यह दर्शाता है कि एक कोरोना संक्रमित व्यक्ति कितने व्यक्तियों को कोरोना फैला रहा है। इससे यह भी पता चलता है कि समाज में कोरोना कितनी तेजी से फैल रहा है।

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मिशीगन यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन का हवाला देते हुए एम्स ने कहा है कि भारत के आठ राज्यों में आर नॉट काउंट एक से ऊपर चला गया है। जिसमें हिमाचल भी शामिल है। हिमाचल में आर नॉट काउंट 1.17 है।

एम्स ऋषिकेश का कहना है कि आर नॉट काउंट बढ़ने के साथ संक्रमण की दर और कोविड की लहर की अवधि में भी इजाफा होगा। आर नॉट काउंट एक से कम होना चाहिए तभी कोरोना का प्रसार काबू में रहेगा और उसका अंत हो सकेगा।

छिड़काव किसका करें, कैसे करें और कहां पर करें, कहां नहीं

नाबालिग युवक से मिलने 700 किमी दूर जा पहुंची युवती, बहन को भी ले गई साथ

कांगड़ा।। आपने अक्सर प्यार में कुछ भी कर गुजरने की बातें सुनीं होंगी। सोशल मीडिया पर हुए प्यार के किस्से भी सुनें होंगे। सोशल मीडिया पर हुए प्यार का एक ऐसा ही मामला हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से सामने आया हैं। वैसे तो यह बात किसी से भी छिपी नहीं है कि प्यार में लोग क्या-क्या कर गुजरते हैं। लेकिन यह मामला थोड़ा हैरान कर देने वाला है।

कांगड़ा जिले के बैजनाथ में रहने वाली एक युवती की पहले सोशल मीडिया पर एक युवक से दोस्ती हुई। फिर यह रिश्ता प्यार में बदल हो गया। इसके बाद युवती युवक से मिलने 700 किलोमीटर दूर उत्तराखंड के चमोली जा पहुंची।

हमने शुरुआत में इसे हैरान कर देने वाला मामला इसलिए कहा क्योंकि प्यार में डूबी यह युवती खुद तो घर से गई, लेकिन अपने साथ अपनी बहन को भी साथ ले गई। हिमाचल पुलिस ने मोबाइल फोन सर्विलांस पर लगाकर दोनों बहनों को उत्तराखंड के चमोली से बरामद कर लिया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, 21 जुलाई को एक युवक ने बैजनाथ थाने में अपनी दो बहनों के गुमशुदा होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसके बाद से पुलिस युवतियों की तलाश कर रही थी। दोनों युवतियों का फोन सर्विलांस पर लगाया गया तो उनकी लोकेशन चमोली जिले के एक क्षेत्र में मिली।

लोकेशन के आधार पर हिमाचल से पुलिस टीम रविवार देर शाम को चमोली पहुंची। पुलिस ने बताया कि दोनों युवतियों को सकुशल बरामद कर लिया गया है। पुलिस के अनुसार युवक और युवती की शादी नहीं हो सकती है क्योंकि युवती जिस युवक से प्यार करती है वह नाबालिग है।

दृष्टिहीनों पर विक्रमादित्य सिंह की ‘सहानुभूति’ पर उठे सवाल

शिमला।। शिमला ग्रामीण से विधायक विक्रमादित्य सिंह ने फेसबुक पोस्ट डालकर बीजेपी सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया है। उन्होंने लिखा है कि ‘दृष्टिहीन और विकलांग विधानसभा में मुख्यमंत्री से मिलने आए थे मगर उन्हें पुलिस फोर्स के माध्यम से ऐसे रोका गया जैसे वे आतंकवादी हों।’

विक्रमादित्य लिखते हैं कि ये लोग अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए वहां पहुंचे थे तो इन्हें मुख्यमंत्री से मिलने की इजाजत दी जानी चाहिए थी। हालांकि, उनकी इस पोस्ट को लेकर कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर कॉमेंट और पोस्ट डालकर सवाल उठाए हैं।

कुछ यूजर्स ने अपनी पोस्ट्स में उस समय की घटनाओं का जिक्र किया है जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और दिवंगत वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री थे। इन घटनाओं के दौरान पुलिस को दृष्टिहीनों को हटाने के लिए हल्का बलप्रयोग करना पड़ा था। ऐसी ही एक घटना में विधानसभा के बाहर आए दृष्टिहीनों को सुरक्षाकर्मियों ने हटा दिया था।

दरअसल, 29 मार्च 2017 को दृष्टिहीन कुछ मांगों को लेकर विधानसभा पहुंचे मगर उन्हें यहां से हटा दिया गया। इसके बाद वे परेशान होकर सड़क पर बैठ गए। पुलिस ने उन्हें उठाया, जीप में भरा और पुलिस स्टेशन ले गई। इसके बाद वे जमानत पर छोड़े गए।

protest outside himachal vidhan sabha by visually challenged people

इससे पहले 27 सितंबर 2016 को दृष्टिहीन छोटा शिमला में सचिवालय के बाहर सड़क पर लेट गए थे। उनका कहना था कि वीरभद्र सरकार उनकी सुनवाई नहीं कर रही। बाद में पुलिस ने किसी तरह उन्हें हटाया।

Blind People Protest At Chotta Shimla, Chakka Jam. - नहीं सुन रही सरकार, सड़क पर लेट गए दृष्टिहीन लोग, तस्वीरें - Amar Ujala Hindi News Live

सभी सरकारों पर अनदेखी का आरोप
विकलांग कर्मचारी और आम नागरिक अपनी मांगों को लेकर मौजूदा बीजेपी सरकार के कार्यकाल के दौरान भी कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं। दरअसल, प्रदेश में विकलांगों और दृष्टिहीनों की पुरानी शिकायत है कि सरकार कोई भी हो, वह उन्हें नजरअंदाज करती है। उनका कहना है कि सरकारें और नेता आश्वासन तो देते हैं मगर उन्हें पूरा नहीं करते।