उपचुनाव: विकलांग और बुजुर्ग मतदाताओं के लिए होगी वाहन की व्यवस्था

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में उपचुनाव का बिगुल बज चुका है। एक लोकसभा और तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। उपचुनाव में विकलांग मतदाताओं को वोटर हेल्पलाइन नंबर 1950 से हर प्रकार की सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी।

जानकारी देते हुए विकलांग मतदाताओं के लिए बाधा रहित चुनाव के स्टेट कोऑर्डिनेटर प्रो.अजय श्रीवास्तव और चुनाव विभाग के राज्य नोडल अधिकारी नीरज शर्मा ने बताया कि उपचुनाव में दृष्टिबाधित मतदाता ब्रेल के जरिये वोट दे सकेंगे। वहीं, चलने फिरने में असमर्थ और 80 साल से अधिक आयु के बुजुर्ग मतदाताओं को घर से मतदान केंद्र तक लाने और वापस छोड़ने के लिए वाहन की व्यवस्था भी की जाएगी।

उन्होंने बताया कि विकलांग और 80 साल से अधिक आयु के बुजुर्ग मतदाता व्हीलचेयर और घर से मतदान केंद्र तक जाने-आने के लिए वाहन व्यवस्था की मांग कर सकते हैं। दृष्टिबाधित मतदाताओं के लिए मतदान केंद्रों पर ब्रेल में वोटर स्लिप और वोटर गाइड उपलब्ध रहेगी, जिसे पढ़कर वे ब्रेल के माध्यम से ईवीएम में अपना वोट डाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मतदाताओं को कोई भी परेशानी न हो, इसके लिए मतदान अधिकारी उन्हें जागरूक करेंगे।

प्रो. अजय श्रीवास्तव ने बताया कि विकलांग मतदाता प्राथमिकता के आधार पर मतदान करेंगे, उन्हें लाइनों में लगने की आवश्यकता नहीं होगी। जिन मतदाताओं को बोलने-सुनने में दिक्कत हैं, उनका विशेष ध्यान रखा जाएगा। ऐसे मतदाताओं को सभी सूचनाओं की जानकारी मिल सके, इसके लिए मतदान केंद्रों पर पोस्टर भी लगाया जाएगा।

कुल्लू दशहरा: देवी-देवताओं के नजराने पर प्रशासन ने खड़े किए हाथ

कुल्लू।। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरे के लिए अब मात्र दो हफ्ते का समय ही शेष बचा है। अब दशहरा उत्सव समिति का फोकस देवी-देवताओं को निमंत्रण देने पर है। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में देवी-देवताओं को बुलाने पर सहमति बन गई है। प्रशासन की ओर से 300 देवी-देवताओं को निमंत्रण दिया जाएगा। लेकिन देवी-देवताओं को दिए जाने वाले नजराने पर प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए हैं।

इस बार 15 अक्तूबर से 21 अक्तूबर तक अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव आयोजित किया जा रहा है, जिसके लिए मात्र दो हफ्ते का समय शेष है। दशहरा उत्सव समिति द्वारा देवी-देवताओं तक दशहरा के निमंत्रण पत्र पहले की तरह जिला के संबंधित एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदार के माध्यम से पहुंचाए जाएंगे।

बता दें कि इस बार दशहरा उत्सव कोविड प्रोटोकॉल के तहत आयोजित होगा। इस बार दशहरे में देव समागम के अलावा कोई अन्य गतिविधि नहीं होगी। ऐसे में इस बार देवी-देवताओं को नजराना भी नहीं मिलेगा। देवताओं को नजराना देने के लिए प्रशासन को 60 से 70 लाख की जरूरत पड़ती है। कोरोना काल में प्रशासन ने नजराना दिए जाने को लेकर हाथ खड़े कर लिए हैं।

दशहरा उत्सव में देवी-देवताओं को निमंत्रण दिए जाने पर जिला देवी-देवता कारदार संघ ने आभार जताया है। संघ के महासचिव नारायण चौहान ने कहा कि दशहरा की तिथि नजदीक आते ही देव समाज भी तैयारियों में जुट गया है। देवी-देवताओं के मुख-मोहरों को सजाने का काम भी शुरू कर दिया है।

वहीं, डीसी कुल्लू एवं दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष आशुतोष गर्ग ने बताया कि दशहरा की तैयारियां शुरू कर दी हैं और अक्तूबर के पहले हफ्ते में सभी देवी-देवताओं को निमंत्रण पत्र पहुंच जाएंगे। उन्होंने कहा कि दशहरा में लोग देव संस्कृति के दर्शन कर सकेंगे।

दशहरा उत्सव समिति द्वारा दशहरे में आने वाले देवी-देवताओं को हर सुविधा प्रदान की जाएगी। समिति देवी-देवताओं को ठहरने की जगह, टेंट, बिजली और पानी टेंट आदि प्रदान करेगी। वहीं, देवी-देवताओं के देवलुओं को समिति द्वारा सस्ते रेट पर लकड़ी, राशन, सिलिंडर और अन्य खाद्य सामग्री भी उपलब्ध करवाई जाएगी।

बता दें कि हिमाचल प्रदेश में उपचुनावों की घोषणा हो चुकी है। जिस कारण मंडी लोकसभा उपचुनाव के चलते दशहरा उत्सव में भी आचार संहिता रहेगी। ऐसे में मुख्यमंत्री व अन्य मंत्री भी दशहरा उत्सव से दूर रहेंगे। इस दौरान किसी भी तरह की घोषणा भी नहीं ही सकेगी।

राजेंद्र राणा के बेटे अभिषेक पर RTI के नाम पर भ्रम फैलाने का आरोप

शिमला।। कांग्रेस विधायक राजेंद्र राणा के बेटे और हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के सोशल मीडिया प्रभारी अभिषेक राणा पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगा है। दरअसल, अभिषेक राणा ने कुछ दिन पहले पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज करवाने वाले हिमाचलियों की एक जानकारी साझा की थी। अब कांग्रेस विधायक के पुत्र पर इसी जानकारी को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगा है।

विधायक के बेटे ने क्या किया था शेयर
राजेंद्र राणा के बेटे अभिषेक राणा ने फेसबुक पर आरटीआई से जानकारी लेने का हवाला देते हुए एक पोस्ट किया। साथ ही साथ इस पोस्ट में उन्होंने एक ऐसा दावा भी कर दिया, जिस दावे पर अब सवाल उठ रहे हैं। अभिषेक राणा ने फेसबुक पोस्ट पर लिखा “आज हिमाचल कांग्रेस के सोशल मीडिया विभाग द्वारा इस आरटीआई का खुलासा किया गया जिसमें यह ब्यौरा शामिल है कि हिमाचल से लाखों लोग चंडीगढ़ पीजीआई में रेफर कर दिए जाते हैं।“

उसके आगे उन्होंने कुछ आंकड़े लिखे और अंत में लिखा कि “संदेश साफ है कि हिमाचल प्रदेश पूर्णत: एक रेफर प्रदेश बन चुका है।” लेकिन अभिषेक का दावा भ्रामक है और आरटीआई से मिली सूचना को गलत संदर्भ में पेश किया गया है।

अभिषेक राणा द्वारा शेयर किए गए आंकड़े और उनका स्क्रीन शॉट नीचे दिया गया है।

2018 से 2021 तक का डाटा
2018 में 2,27,576 मरीज़
2019 में 2,35,657 मरीज़
2020 में 75,407 मरीज़ (लॉक्डाउन में)
2021 (जुलाई तक)- 40,152 मरीज़

दरअसल इसी जानकारी में खेल है। इसी को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि अभिषेक राणा क्यों गलत जानकारी साझा कर रहे हैं। कांग्रेस विधायक के पुत्र ने जिस सूचना का हवाला देते हुए लिखा है कि ‘हिमाचल एक रेफर प्रदेश बन चुका है’ वो जानकारी दरअसल आरटीआई में दी ही नहीं गई है।

आरटीआई में सवाल पूछा गया था कि “हिमाचल प्रदेश से जनवरी 2018 से जुलाई 2021 तक कितने मरीज रेफर होकर एमर्जेंसी वार्ड में आए हैं। इस संबंध में जो जवाब पीजीआई चंडीगढ़ द्वारा दिया गया उसमें लिखा गया है कि “यह जानकारी मांगे गए प्रारूप में उपलब्ध नहीं है।“

अब जिस जानकारी का हवाला अभिषेक ने दिया है, वह अलग सवाल के जवाब से ली गई है। ये दरअसल उन लोगों की संख्या है जो जनवरी 2018 से जुलाई 2021 तक हिमाचल प्रदेश से कितने मरीज जनरल ओपीडी में चेकअप या इलाज करवाने आए हैं। यह आरटीआई में पूछा गया दूसरा सवाल है।

सवाल था-  “जनवरी 2018 से लेकर जुलाई 2021 तक हिमाचल प्रदेश से कितने मरीज चंडीगढ़ पीजीआई में जनरल ओपीडी में चेकअप/इलाज करवाने आए।” यानी ये रेफर किए गए लोगों की नहीं बल्कि उन लोगों की संख्या है जो किसी भी वजह से इलाज करवाने पीजीआई पहुंचे और उनका स्थायी पता हिमाचल प्रदेश का है। इसमें केवल उन लोगों की संख्या भी शामिल है जिनका स्थायी पता हिमाचल का है मगर रहते चंडीगढ़ में है। वे लोग भी हैं जो बिना कहीं से कंसल्ट किए सीधे पीजीआई जैसे संस्थान के सुपर स्पेशलिस्ट से इलाज करवाने खुद आए।

हिमाचल से काफी बड़ी संख्या में लोग चंडीगढ़ में रोजगार और अन्य दसरे सिलसिलों में रहते हैं। इनमें भी कई ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने चंडीगढ़ में घर तक बना लिए हैं मगर स्थायी पता हिमाचल का है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि इस दस्तावेज में जानकारी जनवरी 2018 के बाद मांगी गई है। अगर इससे पहले का डेटा होता तो यह भी पता चलता कि कांग्रेस सरकार के दौरान क्या स्थिति थी। और तो और, हिमाचल के लोगों की संख्या भी इस आंकड़े में साल दर साल घटती दिख रही है।

कांग्रेस सरकार के दौरान वीरभद्र भी जाते थे इलाज को चेन्नई

गौरतलब है कि खुद कांग्रेस सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह खुद अपने दांतों के इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ तो आंखों के इलाज के लिए चेन्नई तक जाते रहे हैं। इसके अलावा पिछली कांग्रेस सरकार में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर टेप कांड के बाद सीने में दर्द होने पर पीजीआई चंडीगढ़ में दाखिल हो गए थे। अन्य कई मंत्री भी इलाज के लिए प्रदेश और देश से बाहर जाते रहे हैं।

अभिषेक राणा की योग्यता पर उठे थे सवाल

खास बात यह है कि अभिषेक राणा को हिमाचल कांग्रेस सोशल मीडिया का प्रभारी बनाया गया है। उन्हें जब यह दायित्व सौंपा गया था तो खुद कांग्रेस के भीतर कई युवा नेताओं ने सवाल खड़े कर दिए थे। इन युवाओं नेताओं का सीधा सा सवाल उस दौरान यह था कि क्या राजेंद्र राणा के बेटे होने पर उन्हें औहदा दे दिया गया। आखिर उनके पास इस पद को लेकर क्या अनुभव और क्वालिफिकेशन है। अब फिर कांग्रेस के ही लोग अभिषेक राणा की इस जानकारी पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। राजनीतिज्ञ तो यहां तक बताते हैं कि राजेंद्र राणा अपने बेटे के लिए टिकट के चाहवान हैं।

हिमाचल में पहली बार ऑनलाइन पोर्टल से होगी धान की खरीद

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में पहली बार धान की खरीद ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। इससे किसानों की फसल की कीमत सीधे उनके खाते में पहुंच जाएगी। इसके लिए कृषि विभाग ने ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया है। किसान को इसमें पंजीकरण करने के बाद अपनी जमीन का ब्यौरा दर्ज करना होगा।

पोर्टल पर पंजीकरण के बाद किसान नजदीकी बिक्री केंद्र पर जाकर अपनी फसल को उचित मूल्य पर बेच सकेगा। इस बिक्री के बाद फर्सल के पैसे सीधे उसके बैंक खाते में आएंगे।

माना जा रहा है कि विभाग की इस पहल से बिचौलियों का खेल पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। क्योंकि किसान अब खुद ही अपनी फसल बेच सकेगा। पहले बिचौलिए किसान से फसल खरीदते थे और खुद उसे आगे बेचते थे।

इस बारे में जानकारी देते हुए खाद्य विभाग के निदेशक केसी चमन ने बताया कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग और फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया कांगड़ा के फतेहपुर, सिरमौर के पांवटा साहिब, सोलन के नालागढ़ और ऊना में स्थित खरीद केंद्रों पर खरीद करेंगे। खरीद प्रक्रिया अक्तूबर महीने के तीसरे हफ्ते से शुरू हो जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी केंद्रों को तैयार किया जा रहा है। इस महीने के अंत तक इसे पूरा कर लिया जाएगा।

वहीं, कृषि निदेशक डॉ. आरके प्रुथी ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में विभिन्न जिलों में हर साल करीब डेढ़ लाख टन धान की पैदावार होती है। इसमें हिमाचल प्रदेश की खपत से 54 हजार टन धान सरप्लस होता है। पिछले साल की खरीद ऑफलाइन ही थी, लेकिन इस बार पहली बार ऑनलाइन खरीद की जाएगी।

हिमाचल: सभी कॉलेजों में बनेंगे प्लेसमेंट और करियर गाइडेंस सेल

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के सभी डिग्री कॉलेजों के विद्यार्थियों को रोजगार पाने में मदद मिले, इसके लिए सभी कॉलेजों में प्लेसमेंट और करियर गाइडेंस सेल बनाए जाएंगे। यह फैसला हायर एजुकेशन काउंसिल की बैठक में लिया गया है।

शिमला में काउंसिल की बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता काउंसिल के अध्यक्ष प्रो. सुनील गुप्ता ने की। बैठक में कॉलेजों को नैक मान्यता लेने के लिए आवश्यक कागजात तैयार का प्रशिक्षण देने का फैसला लिया गया।

वहीं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने के लिए आठ से दस सदस्यों की कमेटी गठित करने की सिफारिश भी सरकार को भेजी जाएगी। इसके अलावा कॉलेजों का शैक्षणिक ऑडिट करवाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजने का फैसला भी लिया गया।

इस बारे हायर एजुकेशन काउंसिल के सचिव और उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने बताया कि हिमाचल के सभी डिग्री कॉलेजों में प्लेसमेंट और कैरियर गाइडेंस सेल बनाया जाएगा। इसके लिए काउंसिल सरकार को प्रस्ताव भेजेगी। हर महीने इन सेल के कामकाज की रिपोर्ट भी मांगी जाएगी।

उन्होंने बताया कि यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि कॉलेज के विद्यार्थियों को रोजगार के अवसर मुहैया करवाए जा सकें। इसके अलावा उच्च शिक्षण संस्थानों का शैक्षणिक ऑडिट भी करवाया जाएगा, ताकि संस्थाओं के कामकाज में पारदर्शिता लाई जा सके।

उन्होंने कहा कि इस समय राज्य में 41 नए कॉलेज हैं, जिनका पहली बार नैक एक्रीडेशन होना है। उन्होंने बताया कि इन कॉलेजों को नैक एक्रीडेशन के बारे में उचित प्रशिक्षण और सुझाव देने का फैसला लिया गया है, ताकि नैक से बेहतर ग्रेड लिया जा सके।

शिमला: 9000 करोड़ के हेरोइन मामले में दो अफगान नागरिक गिरफ्तार

शिमला।। रविवार-सोमवार की रात राजधानी शिमला के एक होटल से राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने दो अफगान नागरिक गिरफ्तार किए हैं। गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से जब्त की गई हेरोइन की खेप से दोनों के तार जुड़ रहे हैं। हेरोइन की बड़ी खेप को भारत पहुंचाने में सीधे तौर पर दोनों की अहम भूमिका मानी जा रही है। जांच के सम्बंध में दोनों को गिरफ्तार किया गया है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रात करीब ढाई बजे डीआरआई की दिल्ली की एक टीम ने छोटा शिमला स्थित एक होटल में दबिश दी। टीम ने यहां पहले से मौजूद दो अफगान नागरिकों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। दोनों से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की गई। उसके बाद टीम ने कागजी कार्रवाई पूरी की और दोनों को लेकर सुबह साढ़े छह बजे दिल्ली रवाना हो गई।

जानकारी के मुताबिक, करीब दस दिन पहले डीआरआई ने गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से हेरोइन की बड़ी खेप पकड़ी थी। तीन हज़ार किलो हेरोइन कंटेनर में छुपाकर लाई जा रही थी। पकड़ी गई हेरोइन की खेप की कीमत नौ हजार करोड़ बताई जा रही है।

डीआरआई इस मामले की जांच में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक, डीआरआई ने पिछले तीन दिन में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। जिनसे पूछताछ में दो अफगान नागरिकों के शिमला में छुपने की जानकारी डीआरआई को मिली थी।

डीआरआई की शिमला में हुई इस कार्रवाई की जानकारी बहुत ही कम लोगों को थी। डीआरआई की टीम ने छोटा शिमला पुलिस के कुछ कर्मियों के साथ मिलकर इस कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस के उच्च अधिकारियों को भी कार्रवाई पूरी होने के बाद ही इसकी जानकारी दी गई।

नेता के खिलाफ गवाही दी तो बीपीएल सूची से काट दिया नाम

ऊना।। ऊना जिला के बहुचर्चित नशा मुक्ति मामले में विवाद थम नहीं रहा। मामले में अभी एक और विवाद सामने आया है। एक भाजपा नेता पर आरोप लगा है कि उन्होंने इस मामले में सरकारी गवाह युवक के परिवार का नाम ही बीपीएल सूची से काट दिया। महिला ने डीसी ऊना राघव शर्मा से इसकी शिकायत की है। डीसी ने नायब तहसीलदार को जांच के आदेश दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, गगरेट के वार्ड दो की राकेश कुमारी ने डीसी को शिकायत सौंपी है। महिला ने बताया है कि उसके पति की मौत हो चुकी है और उसका एक लड़का है जो गलत संगत के कारण नशे की लत में पड़ गया था। इस वजह से उसे स्थानीय नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करवाया था।

नशा मुक्ति केंद्र में एक की व्यक्ति की मौत हुई थी, जिसके बाद खुलासा हुआ था कि यह नशा मुक्ति केंद्र अवैध है और गलत तरीके से इसका संचालन हो रहा है। इस मामले में महिला का लड़के ने गवाही दी थी और सरकारी गवाह बन गया था।

अब महिला ने आरोप लगाया है कि उक्त नेता ने इसी मामले की वजह से उसका नाम बीपीएल सूची से कटवा दिया। महिला का कहना है कि उसकी जगह जिस महिला को बीपीएल सूची में शामिल किया गया है वह एक निजी स्कूल में अध्यापिका है। वहां से उसे अच्छी तनख्वाह मिलती है।

महिला का कहना है कि उसके पास आय का कोई भी साधन नहीं है। इसलिए उसने डीसी ऊना से मामले की जांच करने की गुहार लगाई है। महिला की शिकायत पर डीसी ऊना ने नायब तहसीलदार गगरेट को जांच के आदेश दिए हैं।

इस बारे नायब तहसीलदार गगरेट परीक्षित कुमार ने बताया कि उन्हें डीसी ऊना की ओर से मामले की जांच करने के लिए पत्र मिला है। दो-तीन दिन में मामले की जांच पूरी करके डीसी को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

11 वर्षीय बच्ची के साथ अश्लील हरकतें, युवक के खिलाफ मामला दर्ज

एमबीएम न्यूज़, ऊना।। ऊना जिला के अम्ब उपमंडल के तहत एक युवक पर 11 वर्षीय बच्ची के साथ अश्लील हरकतें करने के आरोप लगे हैं। बच्ची की माँ की शिकायत पर पुलिस ने युवक के खिलाफ विभिन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

महिला ने पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि उसकी बेटी गांव के मंदिर में गई हुई थी। मंदिर से वापस आते समय गांव का एक युवक बहला-फुसलाकर खेतों में ले गया। वहां पर युवक ने पैसे का लालच देकर बच्ची से छेड़खानी और गलत हरकत की।

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बेटी ने घर आकर अपनी माँ को पूरी बात बताई। उसके बाद माँ ने पुलिस को मामले की शिकायत दी। एएसपी ऊना प्रवीण धीमान ने मामले की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जांच की जा रही है।

(यह खबर एमबीएम न्यूज नेटवर्क के साथ सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

हिमाचल में अक्तूबर में होंगे सभी उपचुनाव, जानें तारीख

नई दिल्ली।। हिमाचल प्रदेश सहित देश भर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रस्तावित उपचुनावों की स्थिति अब साफ हो गई है। चुनाव आयोग ने उपचुनावों की घोषणा कर दी है। 30 अक्तूबर को देशभर में संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होंगे।

बता दें कि हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश राज्यों के अलावा केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली व दमन और दीव में संसदीय उपचुनाव होने हैं। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के 30 विधानसभा क्षेत्रों में भी उपचुनाव होने हैं। चुनाव आयोग ने उपचुनाव की घोषणा कर दी है। देशभर में 30 अक्तूबर को उपचुनाव होंगे।

हिमाचल में यहाँ होंगे उपचुनाव

हिमाचल में मंडी संसदीय क्षेत्र और फतेहपुर, जुब्बल-कोटखाई व अर्की विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होने हैं। मंडी संसदीय सीट पूर्व सांसद रामस्वरूप के निधन के बाद खाली हुई थी। वहीं, फतेहपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक सुजान सिंह पठानिया का निधन होने से हिमाचल में पहली विधानसभा सीट खाली हुई थी। उसके बाद जुब्बल-कोटखाई विधानसभा सीट से भाजपा विधायक नरेंद्र बरागटा का निधन हुआ था और अगस्त में अर्की विधानसभा सीट से विधायक व पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन के बाद अर्की विधानसभा सीट खाली हुई थी।

चुनाव आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार एक अक्तूबर से राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। आठ अक्तूबर को प्रत्याशी अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। उसके बाद 11 अक्तूबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। लोकसभा व विधानसभा में प्रत्याशियों के लिए नामांकन पत्र वापस लेने के दिन अलग-अलग हैं।

मंडी लोकसभा सीट से प्रत्याशी 13 अक्तूबर को अपना नामांकन पत्र वापस ले सकेंगे, वहीं तीन विधानसभा क्षेत्रों के प्रत्याशी 16 अक्तूबर को अपना नाम वापस ले सकेंगे। 30 अक्तूबर को एक साथ सभी सीटों पर मतदान होगा। वहीं, दो नवंबर को मतगणना होगी।

कोविड प्रोटोकॉल के तहत होगा कुल्लू दशहरे का आयोजन

विनोद भार्गव, फ़ॉर इन हिमाचल, शिमला।। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का आयोजन कोविड-19 के नियमों को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। दशहरा उत्सव आयोजन से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर चर्चा के लिए राज्य स्तरीय कुल्लू दशहरा समिति की बैठक आज यहां मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित हुई।

इस वर्ष अन्तर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा 15 से 21 अक्तूबर तक आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने दशहरा उत्सव के लिए सभी तैयारियां समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने उत्सव के दौरान उचित सुरक्षा व्यवस्था व निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा कोविड-19 महामारी से सुरक्षा के लिए समय- पर जारी विभिन्न दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेले व त्योहार हमारी संस्कृति के द्योतक हैं। इनका संरक्षण एवं सवंर्धन सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार कृतसंकल्प है और इस दिशा में समय-समय पर विभिन्न कदम उठाए गए हैं। कुल्लू दशहरा की प्रदेश ही नहीं बल्कि विश्व में एक अलग पहचान है। यह हमारी धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक कोरोना महामारी ने सम्पूर्ण विश्व को प्रभावित किया है। इससे सामान्य जनण्जीवन ही नहीं बल्कि विभिन्न गतिविधियों, मेलों, त्योहरों और अन्य आयोजनों को भी प्रभावित किया है।

शिक्षामंत्री ने कारदार संघ के साथ हुई बैठक की जानकारी दी

शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने दशहरा उत्सव आयोजन सम्बन्धी जिला स्तरीय समिति तथा जिला कारदार संघ के साथ आयोजित बैठकों की जानकारी दी। उन्होंने उत्सव के आयोजन से सम्बन्धित विभिन्न सुझाव दिए। बैठक में निर्णय लिया गया कि दशहरा उत्सव में आने के लिए सभी देवी-देवताओं को निमंत्रण दिया जाएगा। उत्सव के दौरान धार्मिक अनुष्ठान परंपरागत ढंग से आयोजित होंगे, लेकिन इस वर्ष मेले में सांस्कृतिक तथा व्यावसायिक गतिविधियां नहीं होंगी।

मेले के शुभारंभ अवसर पर राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर जबकि समापन अवसर पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर मुख्य अतिथि होंगे। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि भाषा एवं संस्कृति विभाग मेले के आयोजन के लिए 10 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि जिला प्रशासन कुल्लू को प्रदान करेगा।

ये रहे बैठक में रहे मौजूद

विधायक सुरेन्द्र शौरी, एचपीएमसी के उपाध्यक्ष राम सिंह, पूर्व सांसद महेश्वर सिंह, महासचिव कारदार संघ नारायण चौहान, मुख्य सचिव राम सुभग सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव भाषा, कला एवं संस्कृति आरडी धीमान, उपायुक्त कुल्लू आशुतोष गर्ग, पुलिस अधीक्षक कुल्लू गुरूदेव शर्मा, निदेशक भाषा एवं संस्कृति पंकज ललित तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित रहे।