पुलिस भर्ती का रिटन टेस्ट देने जाने पर HRTC नहीं लेगी किराया

शिमला।। हाल ही में रद्द पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा जब फिर से आयोजित करवाई जाएगी, तब उसमें भाग लेने जाने वाले अभ्यर्थियों से एचआरटीसी किराया नहीं लेगी।
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने पुलिस कांस्टेबल भर्ती के लिए शीघ्र आयोजित होने वाली लिखित परीक्षा में भाग लेने वाले उम्मीदवारों की सुविधा के लिए उन्हें हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क परिवहन सुविधा प्रदान करने की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभ्यर्थी को परीक्षा में बैठने के लिए जारी किया गया अपना प्रवेश पत्र ही दिखाना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए हाल ही में कांस्टेबल पदों के लिए आयोजित लिखित परीक्षा रद्द कर दी थी।
(प्रेस विज्ञप्ति)

कैबिनेट में 495 पद भरने और बजट घोषणाओं को मंजूरी, जानें अन्य फैसले

शिमला।।  मंत्रिमंडल ने डॉक्टरों, फार्मासिस्ट सहित विभिन्न विभागों में 495 पद भरने की मंजूरी प्रदान की है। इसके साथ ही विभिन्न विभागों में अन्य आवश्यक पद भरने की स्वीकृति दी गई है। कैबिनेट मीटिंग में कई बजट घोषणाओं को भी मंजूरी दी गई है।

अपग्रेड होंगे स्वास्थ्य केंद्र
सोमवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में आयुष विभाग में आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों के 200 पद भरने का निर्णय लिया गया। इनमें से 100 पद सीधी भर्ती के माध्यम से और शेष 100 पद बैचवार आधार पर भरे जाएंगे। बैठक में आयुष विभाग में अनुबंध आधार पर आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट के 100 पद भरने का भी निर्णय लिया गया। इन 100 पदों में से 52 पद सीधी भर्ती के माध्यम से और शेष 48 पदों को बैचवार आधार पर भरा जाएगा।

सिरमौर जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रामपुर भरापुर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्तरोन्नत करने को स्वीकृति प्रदान की गई। इस केंद्र के प्रबंधन के लिए विभिन्न श्रेणियों के पांच पदों के सृजन और भरने को भी मंजूरी प्रदान की गई। लाहौल-स्पीति जिले के केमो में स्वास्थ्य उप केंद्र और बिलासपुर जिला के जबालियां में स्वास्थ्य उप केंद्र खोलने का भी निर्णय लिया गया। मंत्रिमंडल ने मंडी जिले के केओलीधार एवं सहज, कुल्लू जिले के गांव कराड़सू में नए आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने को स्वीकृति प्रदान की गई। प्रत्येक आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र में विभिन्न श्रेणियों के तीन-तीन पदों के सृजन के साथ उन्हें भरने को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

नए स्कूल खुलेंगे, कुछ अपग्रेड होंगे
मंत्रिमंडल बैठक में सोलन जिले के कंडाघाट, धर्मपुर और कुठाड़ के प्रारंभिक शिक्षा खंडों से निकालकर नया खंड शिक्षा कार्यालय खोलने का भी निर्णय लिया गया। इसके सुचारू संचालन के लिए आवश्यक पदों के सृजन के साथ उन्हें भरने की स्वीकृति प्रदान की। मंत्रिमंडल ने शिक्षा खंड औट के गांव रैहन में नया प्राथमिक विद्यालय खोलने को स्वीकृति प्रदान की। मंडी जिले के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल भंगरोटू में विज्ञान की कक्षाएं आरम्भ करने का भी निर्णय लिया गया।

मंत्रिमंडल ने जिले सिरमौर के राजकीय उच्च स्कूल बोहोलियन, नेहरस्वर, टोक्यां, जगला-भूद और बड़थल मधाना और कुल्लू जिला की राजकीय उच्च स्कूल मलाणा को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल और सिरमौर जिले के राजकीय माध्यमिक स्कूल, देवका, नालका, कोडेवाला, पन्याली और सत्तार भदोन को राजकीय उच्च स्कूल में स्तरोन्नत करने का निर्णय लिया गया। नव स्तरोन्नत स्कूलओं के सुचारू प्रबंधन के लिए विभिन्न श्रेणियों के 56 पदों के सृजन और भरने को स्वीकृति प्रदान की गई।

मंत्रिमंडल ने मंडी जिले की राजकीय उच्च स्कूल खौली को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, राजकीय माध्यमिक स्कूल चुलाथाच व योरना और कुल्लू जिला के राजकीय माध्यमिक स्कूल पिपलेज और सरसारी को राजकीय उच्च स्कूल में स्तरोन्नत करने तथा राजकीय प्राथमिक स्कूल बिहार और सुजैणी को माध्यमिक स्कूल में स्तरोन्नत करने के साथ विभिन्न श्रेणियों के 27 पदों को सृजित कर भरने का भी निर्णय लिया।

मंत्रिमंडल ने जिला सिरमौर के नौहराधार में नया राजकीय स्नातक महाविद्यालय खोलने के साथ-साथ इसमें संचालन के लिए विभिन्न श्रेणियों के 18 पद सृजित कर भरने को अपनी स्वीकृति प्रदान की।मंत्रिमंडल ने हमीरपुर जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल कुलेहड़ा और धबीड़ी में विज्ञान की कक्षाएं और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल कोहारली में वाणिज्य कक्षाएं शुरू करने का निर्णय लिया गया ताकि इन क्षेत्रों के छात्रों की सुविधा हो सके।

मंडी विश्वविद्यालय के अधीन होंगे 137 कॉलेज
मंत्रिमंडल ने हाल ही में खोले गए सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के क्षेत्राधिकार के निर्धारण को अपनी स्वीकृति प्रदान की। मंडी, कांगड़ा, चंबा, लाहौल-स्पीति और कुल्लू जिले के 137 महाविद्यालय सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के अन्तर्गत, जबकि शिमला, सिरमौर, सोलन, किन्नौर, बिलासपुर, हमीरपुर और ऊना जिलों के 165 महाविद्यालय हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के अंतर्गत आएंगे।

अन्य विभाग : नया विकास खंड बनाने के लिए मंजूरी
मंत्रिमंडल ने कांगड़ा जिला के खुंडियां में नया विकास खंड कार्यालय खोलने और इसके सुचारू संचालन के लिए विभिन्न श्रेणियों के 14 पद सृजित कर उन्हें भरने का निर्णय लिया। इस विकास खण्ड के अधीन 20 पंचायतें होंगी। मंत्रिमंडल ने पंचायती राज विभाग के सुचारू संचालन के लिए विभिन्न श्रेणियों के 32 पदों को भरने का निर्णय लिया। राज्य निर्वाचन आयोग में हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से अनुबंध आधार पर कनिष्ठ कार्यालय सहायक (आईटी) के छह पद भरने को स्वीकृति प्रदान की गई।

परियोजना निदेशक कार्यालय में भरे जाएंगे 25 पद
राज्य के प्रत्येक जिले में ग्रामीण विकास कार्यालय के परियोजना निदेशक के कार्यालय को सुदृढ़ करने के लिए ग्रामीण विकास में विभिन्न श्रेणियों के 25 पदों को भरने को स्वीकृति प्रदान की गई। मंत्रिमंडल ने क्षेत्र के लोगों की सुविधा के लिए आवश्यक पदों के सृजन के साथ मंडी जिले के धर्मपुर में श्रम मंडल कार्यालय एवं उप रोजगार कार्यालय खोलने को भी स्वीकृति प्रदान की। मंत्रिमंडल ने उद्यमियों को उद्योग अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए राज्य की बड़ी औद्योगिक इकाइयों को विद्युत शुल्क में रियायत देने का निर्णय लिया है।

अनुबंध कर्मियों और दिहाड़ीदारों से जुड़ा फैसला
मंत्रिमंडल ने अनुबंध पर नियुक्त व्यक्ति, दिहाड़ी श्रमिक/कंटींजेंट वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने और अंशकालिक कामगारों की सेवाओं को दिहाड़ीदार में बदलने के लिए मौजूदा कट ऑफ तिथि 31.03.2022 और 30.09.2022 को तय करने के लिए मंजूरी दे दी है। लोगों की सुविधा के लिए कांगड़ा जिले की उप तहसील सुलह में पटवार वृत्त वोडा का पुनर्गठन करते हुए नया पटवार वृत्त सिहोटू बनाने का निर्णय लिया गया।

पशुपालन विभाग : कहां-कहां अपग्रेड होंगे पशु औषधालय
मंत्रिमंडल ने सिरमौर जिले में पशु औषधालय चाड़ना को पशु अस्पताल में स्तरोन्नत करने को अपनी स्वीकृति प्रदान की गई। अस्पताल के सुचारू संचालन के लिए विभिन्न श्रेणियों के तीन पदों के सृजन के साथ उन्हें भरने को स्वीकृति प्रदान की। इससे क्षेत्र की पांच से अधिक पंचायतों के लोगों को लाभ होगा। बैठक में कुल्लू जिला के हरिपुर पशु औषधालय को तीन पदों के सृजन के साथ पशु अस्पताल में स्तरोन्नत करने का निर्णय लिया गया। इससे क्षेत्र की आठ पंचायतों को लाभ होगा।

बैठक में सिरमौर जिला की नाहन विधानसभा क्षेत्र के देवका पुडल्ला, कियारी और संभालका गांवों में आवश्यक पदों के सृजन के साथ पशु औषधालय खोलने का भी निर्णय लिया गया। बैठक में शिमला जिला में पशु औषधालय पुलवाहल को पशु अस्पताल में स्तरोन्नत करने का भी निर्णय लिया गया। अस्पताल के सुचारू संचालन के लिए विभिन्न श्रेणियों के तीन पदों के सृजन व इन्हें भरने की स्वीकृति प्रदान की गई। इससे क्षेत्र की तीन से अधिक पंचायतों के लोगों को सुविधा प्राप्त होगी। मंत्रिमंडल ने गौ अभ्यारण्य/गौसदनों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को प्रति गाय प्रति माह 500 रुपये से बढ़ाकर 700 रुपये करने का निर्णय लिया।

लता मंगेशकर स्मृति पुरस्कार
बैठक में प्रदेश में हिमाचली लोक संगीत और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए लता मंगेशकर स्मृति पुरस्कार आरम्भ करने का निर्णय लिया गया।

चुवाड़ी में नया लोक निर्माण विभाग
मंत्रिमंडल ने चंबा जिले के चुवाड़ी में नया लोक निर्माण विभाग का मंडल खोलने को स्वीकृति प्रदान की।

पुलिस भर्ती पेपर लीक: अच्छी कार्रवाई मगर स्थायी समाधान जरूरी

कुमार अनुग्रह।। न कोई बड़े-बड़े धरने प्रदर्शन न कोई कोर्ट के आदेश प्रशासन ने जांच की और शासन ने तुरंत प्रभाव से हिमाचल प्रदेश पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा को रद्द करने के आदेश दे दिए। कारण था भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने का अंदेशा। 27 मार्च, 2022 को लिखित परीक्षा का आयोजन किया गया था। अब इसी महीने के अंत तक फिर से परीक्षा का आयोजन करवाने के निर्देश दिए गए हैं।

भर्ती पेपर लीक और रद्द होने के बाद कई तरह के सवाल सरकार पर दागे जा रहे हैं जो लाजिमी भी हैं। एक ओर तो सिस्टम की नाकामी दिखती है कि कानून व्यवस्था संभालने वाले महकमे का ही पेपर लीक हो गया। दूसरी ओर सिस्टम की पारदर्शिता और कार्यकुशला भी दिखती है समय रहते मामले को पकड़ लिया गया।

किसी मामले में स्वत: एफआईआर दर्ज होना एक तरह से राहत भी देता है। उदाहरण के तौर पर देशभर में केरल में सबसे ज्यादा क्राइम रेट है। इसका मतलब क्या यह हुआ कि केरल जिसे सबसे शिक्षित राज्य होने का दर्जा प्राप्त है वहां बहुत ज्यादा अपराध हो रहे हैं। नहीं, इसका अर्थ यह है कि वहां पर ज्यादा मामले रिपोर्ट होते हैं उन्हें दबाया नहीं जाता। ठीक उसी तरह पुलिस भर्ती पेपर लीक का पर्दाफाश होना हिमाचल में कानून व्यवस्था की संजीदगी और तत्परता को दर्शाता। वरना बेहत महत्वपूर्ण माने जाने वाले चुनावी वर्ष में कोई लीपापोती भी हो सकती थी।

सिस्टम में सुधार जरूरी
इस पूरे मामले को लेकर एक बात तो साफ है कि भर्तियों को लेकर बने सिस्टम को लेकर एक बार फिर से गौर करने की जरूरत है कि कैसे इसे फूल-प्रूफ किया जा सके ताकि कोई भी वयक्ति किसी अभ्यर्थी की मेहनत में सेंध न लगा सके। इस पुलिस भर्ती को लेकर ऐसा नहीं देखा गया कि बड़े पैमाने पर युवा सड़कों पर उतरकर गड़बड़ी के आरोप लगा रहे हों, जबकि 74 हज़ार से ज्यादा अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा दी थी। हां कुछ छोटे समूहों ने आशंका जताई थी और उस पर जांच भी हो चुकी थी।

पिछली विभिन्न सरकारों की बहुत सारी भर्तियों के उदाहरण हैं जिन मामलों में अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी का अंदेशा हुआ और फिर मामले को परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों ने ही कोर्ट पहुंचाया। हिमाचल में लोगों ने वह दिन भी देखा जब एक विवादित बाबा के यहां रेड डालने और प्रतिबंधित चीजें पकड़े जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री ने रातों-रात थाने के पूरे स्टाफ का ट्रांसफर करवा दिया था। संयोग से यह घटना भी चुनावी वर्ष की थी।

परीक्षार्थियों की ओर से भर्ती प्रक्रिया में सवाल उठाना सामान्य सा चलन हो चुका है। उदाहरण के दौर पर इसी सरकार में पटवारी भर्ती को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। मामला कोर्ट भी पहुंचा। कोर्ट के आदेश पर सीबीआई से भी जांच करवाई गई, लेकिन मामले में कुछ भी नहीं निकला।

बहुत सारी बातें हो रही हैं होती भी रहेंगी, लेकिन सरकार ने चुनावी साल होने के बावजूद इस मसले पर तुरंत बड़ा फैसला लिया। परीक्षा तो रद्द की ही गई साथ ही नई परीक्षा भी इसी महीने के अंत तक आयोजित करवाने के लिए भी कहा गया है। हां इतना जरूर है कि जिन परीक्षार्थियों ने कड़ी मेहनत से परीक्षा पास की थी उन्हें फिर से उस लिखित परीक्षा की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। लेकिन यह भी सही है कि जब सच्चाई का पता चल चुका था तो कानून के मुताबिक जो त्वरित फैसला लेना एक अच्छी मिसाल है। बावजूद इसके ऐसी व्यवस्था हर हाल में बनाई जानी चाहिए कि बेरोजगार युवाओं की मेहनत पर पानी न फिरे। क्योंकि पेपर लीक, नकल आदि करने वाले चंद लोग होते हैं और भर्ती रद्द होने या दोबारा होने से हजारों ईमानदार युवाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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धर्मशाला विधानसभा परिसर के गेट पर खालिस्तान के झंडे, SIT करेगी जांच

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला तपोवन में विधानसभा गेट पर खाली स्थान के झंडे लगाने के मामले की जांच एसआईटी करेगी। प्रदेश पुलिस ने इस अतिसंवेदशील मामले की जांच करने के लिए छह सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है।

एसआईटी डीआईजी संतोष पटियाल के नेतृत्व में गठित की गई है, जिसमें एएसपी कंगड़ा पुनीत रघु, एसडीपीओ ज्वालाजी चन्द्र पाल, शुशांत शर्मा डीएसपी सीआईडी मंडी, सिद्धार्थ शर्मा एसडीपीओ ज्वाली, एसएचओ धर्मशाला राजेश कुमार, एसआई नारायण सिंह के कमेटी के सदस्य होंगे।

डीजीपी संजय कुंडू ने कहा कि एसआईटी खालिस्तान का झंडा लगाने के मामले की जांच करेगी और समय समय पर जांच की रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजती रहेगी।

प्रदेश धर्मशाला तपोवन में विधानसभा के मुख्य द्वार और चारदीवारी पर रविवार सुबह खालिस्तान के झंडे लगे मिले थे। इन झंडों पर खालिस्तान लिखा हुआ था। मामला सामने आने के बाद इन्हें पुलिस ने मौके पर जाकर उतार दिया। पुलिस ने बताया कि यहां के स्थानीय लोगों ने अल सुबह विधानसभा के मेन गेट पर काले झंडे लगने की सूचना दी। मामले की जांच जारी है।

HRTC की दशा ही नहीं, दिशा सुधारने की भी होनी चाहिए कोशिश

आई.एस. ठाकुर।। हिमाचल प्रदेश सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि सरकारी यानी एचआरटीसी की बसों में महिलाओं को सामान्य के मुकाबले आधा किराया ही देना होगा। पहले महिलाओं को किराये में 25 प्रतिशत की छूट थी, जिसे जयराम सरकार ने बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। इससे रोज बस यात्रा करने वाली कामकाजी महिलाओं को तो राहत मिलेगी ही, साथ ही उन गृहिणियों को भी कुछ बचत होगी जो एचआरटीसी की बसों से यात्रा करेंगी।

जिन परिवारों के पास निजी वाहन नहीं हैं, उन परिवारों को कुछ राहत मिलेगी क्योंकि महिलाएं तो लगभग हर परिवार में हैं। सरकार का कहना है कि उसने यह फैसला महिला सशक्तिकरण के लिए किया है। यह ठीक है कि बचत होने से महिलाओं के पास जो कुछ पैसा बचेगा, उसे वो अपने हिसाब से इस्तेमाल कर सकेंगी। हो सकता है कि अब महिलाएं निजी बसों के बजाय सरकारी बसों में यात्रा करने लगे और एचआरटीसी को पहले की तुलना में कुछ और लाभ हो जाए। लेकिन इससे एचआरटीसी की दशा में सुधार हो पाएगा, ऐसा होना संभव नहीं दिखता।

खस्ताहाल एचआरटीसी बसें
हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से एचआरटीसी को लेकर नकारात्मक खबरों की बाढ़ सी आई हुई है। पंडोह में बस हादसे में ड्राइवर की जान चली गई, चंबा में चलती बस में आग लग गई, कहीं बस को छह की जगह पांच टायरों के सहारे चलाया जा रहा है तो कहीं चलती बस से डीजल का टैंक गिर जा रहा है। बसों को धक्का लगाकर स्टार्ट करना या अचानक कहीं पर ठप हो जाना तो एचआरटीसी के लिए आम बात हो गई है।

ऐसा नहीं है कि सारी बसें ही खराब हैं, लेकिन हर रोज बसों के खराब होने या हादसे की खबरें आना यह तो दिखाता ही है कि निगम के बेड़े की हालत ठीक नहीं है। सरकार नई बसें भी खरीद रही है लेकिन पूरे बेड़े को रीप्लेस कर पाना तो संभव नहीं। पहाड़ी इलाकों में कच्ची-पक्की सड़कों पर भी एचआरटीसी सेवाएं देती है और ऐसे में उनका मैदानी इलाकों की तुलना में पहले खराब हो जाना लाजिमी है। लेकिन इस संबंध में कोई नीति नहीं दिखती कि बसों को कब बदला जाना है, कब उन्हें स्क्रैप करके नई बसें खरीदनी हैं।

तय किलोमीटर चलने के बाद बदली जाएं बसें
जिस तरह से विभिन्न विभागों के सरकारी वाहनों को निश्चित समय या किलोमीटर चल जाने के बाद बदला जाता है, उसी तरह एचआरटीसी की बसों को भी बदलना चाहिए। जुगाड़ से मरम्मत करके चलाते रहना लोगों की जान से खिलवाड़ करना है। माना कि एकदम से ऐसा करना संभव नहीं हैं, लेकिन भविष्य के लिए तो ऐसी नीति अपनाई ही जा सकती है। और किसी न किसी को तो शुरुआत करनी ही चाहिए। एकसाथ सैकड़ों बसें खरीदने और फिर उनके एकसाथ खराब होने का इंतजार करने के बजाय नई बसों की खरीद और पुरानी बसों को हटाने की प्रक्रिया लगातार चलती रहनी चाहिए।

आत्मनिर्भर बन सकती है एचआरटीसी
एचआरटीसी की बसों की हालत खराब होने के पीछे तर्क दिया जाता है कि निगम के पास फंड की कमी है। एचआरटीसी का घाटे में रहना चिंता की बात नहीं है। घाटा होना लाजिमी है क्योंकि एचआरटीसी सजग साधना, सविनय सेवा के ध्येय पर काम करती है। एचआरटीसी का काम उन इलााकों में भी बस सेवा देना है, जहां इक्का-दुक्का यात्री ही होते हैं। एचआरटीसी का काम मुनाफा कमाना नहीं बल्कि जनता को सुविधा देना है। लेकिन घाटे को कैसे कम किया जाए, इस पर विचार होना चाहिए। आप अपने आसपास किसी भी प्राइवेट बस को देख लीजिए। उनके रूट और टाइमिंग पर ध्यान दीजिए, दोनों ही मुनाफे वाले हैं। ये मुनाफे वाले रूट एचआरटीसी अपने पास क्यों नहीं रख सकती?

एक नीति बननी चाहिए कि एचआरटीसी की बसें मुनाफे वाले रूट्स पर चलें और उससे होने वाले मुनाफे को घाटे वाले रूटों की भरपाई में खपाएं। अभी हो यह रहा है कि दूर-दराज के इलाकों में सेवा देने के अलावा एचआरटीसी की कुछ बसें ऐसे समय पर मुख्य रूट्स पर चलती हैं, जब सवारियां होती ही नहीं। ऐसी बस सेवाओं का क्या लाभ? उदाहरण के लिए देखिए, शिमला से धर्मशाला वाया मंडी रूट पर अच्छी डीलक्स बच चलाई जा सकती है। लेकिन एचआरटीसी ने कभी ऐसी कोई बच नहीं चलाई। इस रूट पर निजी बसें बेशक धड़ल्ले से चलती हैं। ऐसा क्यों है? यह सोचने वाली बात है।

दिशा सुधरेगी, तभी दशा सुधरेगी
एचआरटीसी बेशक के कॉर्पोरेशन है लेकिन इसके काम करने का तरीका कॉर्पोरेट वाला नहीं है। कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलता, राजनीतिक दखल के हिसाब से रूट्स तय किए जाते हैं, मरम्मत के लिए स्टाफ और उपकरणों की कमी रहती है। क्या ऐसी अव्यवस्था आप किसी प्राइवेट कॉर्पोरेशन में सोच सकते हैं? जरूरत है कि एचआरटीसी यानी निगम की ओवरहॉलिंग की। इसके संस्थागत और प्रबंधकीय ढांचे में बड़ा परिवर्तन करने की जरूरत है। सरकारी अधिकारियों को इसका जिम्मा देने के बजाय प्राइवेट सेक्टर से प्रोफेशनल लोग उठाए जाने चाहिए।

चआरटीसी के कर्मचारी मांग कर रहे हैं कि निगम को रोडवेज बनाया जाए। रोडवेज बनाने से भले उनके वेतन और पेंशन की समस्या सुलझ जाए, लेकिन बस सेवाओं की हालत तो सुधरने से रही। निगम रहकर भी यह अच्छा काम कर सकती है। पहले तो योग्य और अनुभवी एजेंसी से अध्ययन करवाना चाहिए कि एचआरटीसी पिछड़ क्यों रही है और कैसे वह और अच्छा कर सकती है। फिर उस हिसाब से सही दिशा में सही तरीके से चलने के कदम उठाने चाहिए। अगर एक बार यह काम हो गया तो न कर्मचारियों की वेतन आदि की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा, न यात्रियों को असुविधा होगी और न खटारा होने की वजह से हादसे होने का डर रहेगा। लेकिन सवाल वही है, क्या सरकार ऐसा करेगी? क्या सरकार में ऐसा करने की इच्छाशक्ति है? फिलहाल तो इसका जवाब में ही मिलता नजर आता है।

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

लेखक लंबे समय से हिमाचल प्रदेश संबंधित विषयों पर लिख रहे हैं। उनसे kalamkasipahi@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

महिलाओं का बस किराया आधा, 125 यूनिट बिजली निशुल्क, गांवों में नहीं आएगा पानी का बिल

चंबा।। चंबा के चौगान में 75वें हिमाचल दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कई बड़ी घोषणाएं की। इनमें महिलाओं के लिए बस किराये में रियायत, निशुल्क बिजली की सीमा बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी का बिल माफ करना अहम है। 81 दिनों के अंतराल बाद यह दूसरा मौका है जब मुख्यमंत्री ने आम जनता को सीधी राहत देने वाली बड़ी घोषणाएं की हैं।

महिलाओं का बस किराया आधा
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अब हिमाचल प्रदेश में महिलाओं को बसों में आधा ही किराया देना होगा। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल की कुल आबादी में महिलाओं की आबादी करीब आधी है। बड़ी संख्या में माताएं-बहनें रोजगार और अन्य कार्यों के लिए बसों से यात्रा करती हैं। अब उन्हें बस किराये में 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी। मुख्यमंत्री के इस फैसले से 32 लाख से ज्यादा महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा। इसके लिए सरकार 60 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

अब 125 यूनिट तक निशुल्क बिजली
मुख्यमंत्री ने हिमाचल के 11 लाख से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं को भी बड़ी राहत दी है। चंबा के चौगान में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल पावर सरप्लस स्टेट है, ऐसे में जनता की ओर से सुझाव आ रहे थे कि हिमाचल प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को और राहत दी जा सकती है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने 25 जनवरी को ही 60 यूनिट तक बिजली बिल माफ करने का एलान किया था। इसमें एनर्जी चार्ज के साथ ही फिक्स्ड चार्ज और मीटर रेंट भी माफ किया गया था। इसके अलावा 61 यूनिट से 125 यूनिट तक बिजली खपत पर एक रुपया प्रति यूनिट बिजली एनर्जी चार्ज लेने की घोषणा की गई थी। लेकिन जनता सुझावों को देखते हुए, एक पावर सरप्लस स्टेट होने के नाते हमने अब 125 यूनिट तक बिजली बिल माफ करने का फैसला लिया है। प्रदेश सरकार की इस घोषणा से प्रदेश के साढ़े 11 लाख परिवार होंगे लाभान्वित होंगे। इस पर सरकार 250 करोड़ रुपये व्यय करेगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में पानी भी निशुल्क
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इसके अलावा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने घोषणा करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब पानी का बिल नहीं आएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं का पानी का बिल बहुत ज्यादा नहीं आता है लेकिन फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को ज्यादा सुविधाएं मिलें, इसलिए यह फैसला लिया जा रहा है। हिमाचल की आबादी का एक बड़ा हिस्सा गांव में रही रहता है। ऐसे में लाखों लोगों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। सरकार इस पर 30 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

हिमाचल दिवस पर पीएम ने दी बधाई, सीएम जयराम को भी सराहा

शिमला।। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 75वें स्थापना दिवस पर हिमाचल प्रदेश की जनता को बधाई दी है। हिमाचल दिवस के मौके पर प्रदेश को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के मेहनतकश लोगों की तारीफ की और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के प्रयासों को भी सराहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं को सीएम जयराम और उनकी पूरी टीम ने बहुत विस्तार दिया है। विशेष तौर पर सामाजिक सुरक्षा के मामले में हिमाचल में प्रशंसनीय काम हो रहा है। प्रधानमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के लोगों की भी जमकर तारीफ की। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें भी इस पहाड़ी राज्य के मेहनतकश लोगों के बीच रहने का अवसर मिला था।

प्रधानमंत्री ने हिमाचल की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि यह सुखद संयोग है कि देश की आजादी के 75वें वर्ष में हिमाचल प्रदेश भी अपना 75वां स्थापना दिवस मना रहा है। आजादी के अमृत महोत्सव में हिमाचल प्रदेश में विकास का अमृत हर प्रदेशवासी तक निरंतर पहुंचता रहे, इसके लिए हम सभी के प्रयास जारी है। हिमाचल के लिए अटल जी ने कभी लिखा था- बर्फ ढकी पर्वत मालाएं, नदियां, झरने, जंगल किन्नरियों का देश, देवता डोले पल-पल।

मेहनती हैं हिमाचली: पीएम
प्रधानमंत्री ने कहा, “सौभाग्य से मुझे भी प्रकृति के अनमोल उपहार, मानवीय सामर्थ की पराकाष्ठा और पत्थर को चीर कर अपना भाग्य बनाने वाले हिमाचलवासियों के बीच रहने का और उनके दर्शन करने का बार-बार अवसर मिला है।”

उन्होंने कहा, “1948 में जब हिमाचल प्रदेश का गठन हुआ था, तब पहाड़ जितनी चुनौतियां सामने थी। छोटा पहाड़ी प्रदेश होने के कारण, मुश्किल परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण भूगोल के चलते संभावनाओं के बजाय आशंकाएं अधिक थीं, लेकिन हिमाचल के मेहनतकश, ईमानदार और कर्मठ लोगों इस चुनौती को अवसर में बदल दिया।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बागवानी, पावर सरप्लस राज्य, साक्षरता दर, गांव गांव तक सड़क सुविधा, घर-घर पानी और बिजली सुविधा जैसे अनेक मानक इस पहाड़ी राज्य की प्रगति को दिखाते हैं। बीते सात-आठ सालों में केंद्र सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि हिमाचल के सामर्थ्य को, वहां की सुविधाओं को और बेहतर बनाया जाए।

सीएम जयराम को भी सराहा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि डबल इंजन की सरकार ने हमारे युवा साथी, हिमाचल के जनप्रिय मुख्यमंत्री जयराम के साथ मिलकर ग्रामीण सड़कों, हाईवे के चौड़ीकरण और रेल नेटवर्क के विस्तार का बीड़ा उठाया। इसके परिणाम अब दिखने लगे हैं। जैसे-जैसे कनेक्टिविटी बेहतर हो रही है, वैसे-वैसे हिमाचल का टूरिज्म नए क्षेत्रों, नए अंचलों में प्रवेश कर रहा है। हर नया क्षेत्र पर्यटकों के लिए, प्रकृति, संस्कृति और अडवेंचर के नए अनुभव लेकर आ रहा है। साथ ही, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार की अनंत संभावनाओं के द्वार खोल रहा है।

पीएम ने दिया 25 वर्षों का विजन
प्रधानमंत्री ने कहा कि हिमाचल में स्वास्थ्य सुविधाओं को जिस प्रकार सुधारा जा रहा है, उसका परिणाम कोरोना के तेज टीकाकरण के रूप में हमें दिखा है। हिमाचल में जितनी संभावनाएं हैं उन्हें सामने लाने के लिए हमें अब तेजी से काम करना है। आने वाले 25 वर्ष में हिमाचल की स्थापना और देश की आजादी के 100 वर्ष पूरे होने वाले हैं। ये हमारे लिए नए संकल्पों का अमृतकाल है। इस कालखंड में हमें हिमाचल को टूरिज्म, उच्च शिक्षा, रिसर्च, आईटी, बायोटेक्नोल़ॉजी, फूड प्रोसेसिंग और नेचुरल फार्मिंग जैसे क्षेत्रों में और तेजी से आगे ले जाना है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस साल के बजट में घोषित वाइब्रेंट विलेज स्कीम और पर्वतमाला योजना से भी हिमाचल प्रदेश को बहुत लाभ होगा। ये योजनाएं हिमाचल प्रदेश में दूर-सूदर में कनेक्टिविटी बढ़ाएंगी, टूरिज्म को बढ़ावा देंगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेंगी।

पीएम ने कहा, “हमें हिमाचल की हरियाली का विस्तार करना है। जंगलों को अधिक समृद्ध करना है। शौचालयों को लेकर हुआ बेहतरीन काम अब स्वच्छता के दूसरे पैमानों को भी प्रोत्साहित करे इसके लिए जनभागीदारी को और बढ़ाना होगा।” नरेंद्र मोदी ने कहा कि ईमानदार नेतृत्व, शांतिप्रिय वातावरण, देवी-देवताओं का आशीर्वाद और परिश्रम की पराकाष्ठा करने वाले हिमाचल के लोग सभी अतुल्नीय हैं। हिमाचल के पास तेज विकास के लिए जरूरी हर चीज मौजूद है। समृद्ध और सशक्त भारत के निर्माण में हिमाचल अपने योगदान का निरंतर विस्तार करता रहे यही मेरी शुभकामनाएं हैं।

 

1948 में ही हिमाचल का भविष्य बता चुके थे राहुल सांकृत्यायन

आशीष नड्डा।। 21वीं सदी के इस दौर में जब संचार-क्रान्ति के साधनों ने समग्र विश्व को एक ‘ग्लोबल विलेज’ में परिवर्तित कर दिया हो एवं इंटरनेट द्वारा ज्ञान का समूचा संसार क्षण भर में एक क्लिक पर सामने उपलब्ध हो, ऐसे में यह बात बड़ी रोमांचित करती है कि एक व्यक्ति दुर्लभ ग्रन्थों की खोज में हजारों मील दूर पहाड़ों और नदियों के बीच भटका और उन ग्रन्थों को खच्चरों पर लादकर अपने देश ले आया। भले आपको यकीन न हो, मगर भारतीय मनीषा के अग्रणी विचारक, साम्यवादी चिन्तक, सामाजिक क्रान्ति के अग्रदूत, सार्वदेशिक दृष्टि एवं घुमक्कड़ी प्रवृत्ति के महान पुरुष राहुल सांकृत्यायन ऐसे ही थे।

राहुल सांकृत्यायन के जीवन का मूलमंत्र ही घुमक्कड़ी यानी गतिशीलता रही है। घुमक्कड़ी उनके लिए वृत्ति नहीं वरन् धर्म था राहुल सांकृत्यायन को महापंडित की उपाधि दी जाती है। हिंदी साहित्य के पितामह राहुल ने बाद में बौद्ध धर्म को अपना लिया था परन्तु सोच से वो नास्तिक थे। मांस के बहुत बड़े शौकीन थे दिन में तीन बार भी खाने को मिल जाए तो पीछे न हटें। राहुल सांकृत्यायन उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में जन्मे केदारनाथ पांडे नाम के इस महान साहित्यकार का हिमाचल प्रदेश से गहरा नाता रहा है। सम्पूर्ण विश्व को सैर सपाटे से देखने वाले इस यायावर लेखक ने हिमाचल प्रदेश की धरती पर भी आजादी से पूर्व और बाद में कदम रखे। हिमाचल प्रदेश का शायद ही ऐसा कोई कोना जिला तहसील रही हो जहाँ इतिहास को तलाशते हुए राहुल सांकृत्यायन न गुजरे हों।

पहाड़ के रहस्यों देव परम्पराओं के बारे में जांनने की ललक ऐसी कि डायबिटीज़ मरीज होने के बावजूद इन्सुलिन साथ में रखकर यह घुमक्कड़ महापंडित पैदल ही हिमालय को नाप गया। कोठी की देवी की शादी करवाने की कोशिश भी राहुल जैसा व्यक्तित्व ही कर सकता है। वरना किन्नौर की सबसे ग़ुस्सैल देवी से भला कौन पंगा ले? सांकृत्यायन के लेखन की खासियत यह रही की इन्होने कभी भी जजमेंटल लेखन नहीं किया। अपने लेखन और वृतांतों संस्मरणों में सांकृत्यायन कभी किसी रिजल्ट या कन्क्लूज़न पर नहीं आये उन्होंने जो देखा पाया उसे कलम से कागज़ पर समेटते चले गए। हिंदी के इस साहित्यकार को आप पढ़ेंगे तो पाएंगे इनके लॉजिक साइंस के रिसर्चर की तरह स्ट्रॉन्ग और फैक्टफुल हुआ करते थे। व्यक्ति का चेहरा मोहरा देखकर सांकृत्यायन बता सकते थे की किस रेस का है। दूसरी बार राहुल हिमाचल तब आये जब देश को आजाद हुए मुश्किल से एक वर्ष बीता था। उस यात्रा में राहुल शिमला से होते हुए किन्नौर, स्पीति और तिब्बत के बॉर्डर तक गए थे। हिमाचल प्रदेश उस समय टुकड़ों में बंटा हुआ आधा अधूरा राज्य था। शिमला सिटी पंजाब में थी तो कुल्लू और कांगड़ा भी पंजाब का पार्ट था। श्री NC मेहता उस समय हिमाचल प्रदेश के प्रशासक थे जो केंद्र द्वारा नियुक्त किये गए थे। मेहता जी को जैसे ही पता चला की राहुल सांकृत्यायन हिमाचल आ रहे हैं उन्होंने इस यायावर लेखक के लिए पूरी यात्रा के दौरान जंगलात और PWD के बंगलों में रहने का जुगाड़ करवा दिया।

सांकृत्यायन आज के हिमाचल प्रदेश की कल्पना 1948 में ही कर चुके थे , थानेदार कोटगढ़ से आगे सांकृत्यायन पैदल और घोड़े पर किन्नौर के लिए जब निकले तो उन्होंने किन्नौर की विकास गाथा और संभावनाओं को कागज़ में पिरोना शुरू कर दिया। सांकृत्यायन की किताब का यह अंश उस समय की कहानी को ब्यान करता है रामपुर पहुँच कर संकृत्यायन वहां की राजमाता यानी आज के मुख्यमंत्रीं वीरभद्र सिंह की माँ से भी मिले थे। उस समय शिमला किन्नौर कैसे थे सांकृत्यायन के लिखे यह शब्द असल में बया करते हैं “1948 तक शिमला से आगे वैसे तो थानेधार तक मोटर योग्य रोड़ बन गया था छोटी गाडी पहुँचने का जुगाड़ हो चूका था पर बरसात और बर्फबारी के समय जीप नहीं आ पाती थी वहीँ बड़ी कैलाश ट्रांसपोर्ट की बस दिन में दो बार सिर्फ ठीयोग तक आ पाती थी। ठियोग से शिमला का किराया डेढ़ आने रखा गया था वहीँ आलू की बोरी छत पर चार आने में जाती थी। सवारी बस में आलू की बोरी अंदर भरना वैसे तो अवैध था परंतु मनमर्जी से उस्ताद लोग सवारी को वहीं छोड़कर आलू बोरियां अपने फायदे के लिए ज्यादा ले जाते थे।

सत्यानन्द स्टोक्स के लिए स्वर्ग में भी यह खुशी की बात थी की थानेधार तक मोटर योग्य सड़क पहुंचने से कोटगढ़ बेल्ट से सेब सही समय पर मार्केट में आने लगा था इससे पहले घोड़ो से शिमला या ठियोग तक पहुंचाया जाता था। लेकिन अभी भी किन्नौर उस दौर में इन सब चीजों से अछूता था। आजादी का एक वर्ष बीत जाने पर भी किन्नौर के लोग यह नहीं समझ पाए थे की रजवाड़ा शाही जा चुकी है और प्रजातंत्र आ गया है। किन्नौर के लोग अभी भी बुशहर के स्वर्गीय राजा पदम् सिंह के पुत्र युवराज वीरभद्र सिंह के कामरु और रामपुर में राज्याभिषेक होने की राह देख रहे थे। रामपुर के बुद्धिजीवी लोगों को जब पता चला की महपंडित राहुल सांकृत्यायन उनके शहर में हैं तो बाकायदा एक सम्मान सभा का आयोजन स्कूल में कर दिया गया। मिठाई बांटी गयी छात्रों से स्वागत करवाया गया और राहुल जी से रिक्वेस्ट की गयी की दो शब्द कहें। राहुल सांकृत्यायन को संबोधन देने के लिए आमंत्रित किया जाता है। असमंजस में पड़ा ये घुमंतू फक्कड़ सोचता है मैं क्या बात कहूँ । आगे राहुल लिखते हैं मैंने सोचा चलो अपने स्वप्न के हिमाचल की जो कल्पना जो मेरी है वही सुना देता हूँ। और उन्होंने अपना स्वप्न कुछ इन्ही शब्दो में सुनाया-

‘हिमाचल प्रदेश में गांव-गांव में स्कूल खुलेंगे। कोई अनपढ़ नहीं होगा। सारा पहाड़ मेवो (फलों) से ढक जाएगा और प्रदेश मालामाल होगा। घर-घर बिजली जलेगी, पर्वत स्थली इधर से उधर से मोटरों के भोम्पू से गूंजेंगी।”

1948 में भविष्य के हिमाचल की यह कल्पना राहुल करते हैं। उनके शब्दों से आप अंदाजा लगा सकते हैं वो कितने बड़े वो बड़े दूरदर्शी थे। आज हिमाचल प्रदेश देश के टॉप शिक्षित राज्यों में शुमार है। सेब के ऊपर टिकी ऊपरी हिमाचल की इकॉनमी। पूर्ण रूप से इलेक्ट्रिफाइड सरप्लस बिजली राज्य। सांकृत्यायन की जुबान पर शायद साक्षात सरस्वती उस समय विराजमान रहीं होंगी। उसके बाद वो रामपुर छोड़ किन्नौर के लिए आगे बढ़ते हैं सांकृत्यायन रामपुर से घोड़े पर और पैदल सफर करते हुए निचार वांगतू टापरी होते हुए कल्पा के पास एरिहासिक चैनी गांव में डेरा जमाते हैं। खाने के लिए शाक सब्जी की भारी कमी है। आटा भी रामपुर से खच्चर पर लाद के लाये हैं। भेड़ का सूखा मांस खाकर ऊब गए हैं परंतु वहां की अंगूरी शराब और अखरोट आदि के लिए उनके मन में बहुत प्लान हैं। हालाँकि खुद वो शराब नहीं पीते 1948 में वो किन्नौर में तरक्की की संभावनाओं पर लिख रहे हैं कि सैलानियों को हिमाचल सरकार विज्ञापन बाज़ी से नहीं बुला सकती। निचार तक मोटर के लिए सड़क बनानी होगी आगे घोड़े लायक अच्छा रोड बनाना पड़ेगा। उनका कहना है निचार तक जब मोटर आ जाएगा तो यहाँ के मेवे नीचे ढुलना शुरू हो जाएंगे और यहाँ अन्न की बाढ़ आ जायेगी । यहाँ के मेवे सारी दुनिया में घर बैठकर खाये जाएंगे । अब आज के किन्नौर को देखे किन्नुरी सेब खुमानी अखरोट बादाम विदेशों तक निर्यात होता है। राहुल सांकृत्यायन ये भविष्य 1948 में ही बता चुके थे।

ऐसा नहीं है उन्होंने बस लिखा और किया कुछ नहीं। उस समय अभी तक वही तहसीलदार सेवा दे रहे थे जो राजा द्वारा नियुक्त थे। और देश नया नया आजाद हुआ था तहसीलदार को चिंता थी की आजाद भारत और हिमाचल की सरकार अब उन्हें नौकरी से न निकाल दे। कल्पा में जब वहां के तहसीलदार को पता चला की राहुल यहाँ आये हैं तो वो उनसे मिलने पहुंचे। तहसालदार चाहते थे सांकृत्यायन मेहता जी से उनकी सिफारिश कर दे और उनकी नौकरी पक्की करवा दें। सांकृत्यायन ने कहा मैं मेहता जी से बात करूँगा लेकिन पहले आप पुरे किन्नौर कल्पा तहसील के सेबों, खुमानी आदि के पौधों की गिनती का डाटा ग्रामीण स्तर पर इकठा करें और उसे सरकार सरकार को भेजें। यह किन्नौर और अपर हिमाचल की बागवानी क्रान्ति का रोडमैप था जो सांकृत्यायन ने बिना किसी स्वार्थ के तैयार किया उसे कागजों में समेटा और पत्रों के माध्यम से प्रदेश के प्रथम चीफ कमिश्नर एन.सी. मेहता को अवगत करवाया। इसके लिए हिमाचल प्रदेश सदैव उनका ऋणी है। फल संपदा मेवों से भरपूर हिमाचल कभी नहीं हो पाता अगर काशी का ये फक्कड़ घुमन्तु महापंडित किन्नर की यात्रा के दौरान इस प्रदेश का भविष्य यहीं के संसाधनों के नजरिये से न देखता।

नीवं मजबूत पड़ी तो कम से कम पहाड़ आज खुशहाल है दूसरों से बेहतर है। सांकृत्यायन कुल्लू स्पीति मंडी शिमला कांगड़ा चम्बा सिरमौर नाहन याहं तक की भरमौर भी पैदल घूम कर आये। 1948 में बिलासपुर रियासत में विलय के लिए बिअलसपुर के राजा आनंद चंद को जब दिल्ली बुलाया गया उस से पिछली शाम सांकृत्यायन बिलासपुर में ही आनंद चंद के साथ थे। नगरोटा बगवां के पठयार गाँव में खेतों के बीच एक सदियों पुराना शिलालेख है, यह बात भी राहुल के वहां जाने के बाद दुनिया को पता चली। राहुल सांकृत्यायन के बारे में जितना लिखा जाए उतना कम है। मैं भला उनके लिए क्या लिख सकता हूं मगर जो भी है, हिमाचल प्रदेश उनका हमेशा ऋणी है। उन्होंने यहां की विरासत लोक संस्कृति को सरल भाषा में पिरोकर किताबों के रूप में अजर अमर कर दिया। आज उनकी जयंती पर इस लेख को मैं उन्हें सपर्पित करता हूं।

(लेखक हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर से हैं और आईआईटी दिल्ली से रिन्यूएबल एनर्जी पर डॉक्टरेट के बाद वर्ल्ड बैंक से जुड़े हैं। उनसे aashishnadda@gmail.com के माध्यम से संपर्क किया सकता है)

हिमाचल का अर्थ ‘हिम का आँचल’ नहीं है | जानें 20 खास बातें

इन हिमाचल डेस्क।। आज हिमाचल प्रदेश का पूर्ण राज्यत्व दिवस है। आजादी के बाद 15 अप्रैल, 1948 को 28 पहाड़ी रियासतों को मिलाकर नया प्रांत बनाया गया था। मगर साल 1971 में इसे ‘हिमाचल प्रदेश राज्य अधिनियम-1971’ के अन्तर्गत 25 जनवरी को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया और यह भारत का 18वां राज्य बना। अब इसके 50 साल पूरे हो गए हैं।

प्राकृतिक सौंदर्य और लोगों की सादगी के अलावा कुछ ऐसी बातें भी हैं, जिनकी वजह से हिमाचल पूरे देश में सबसे आगे है। इनमें से बहुत सी बातें प्रदेश की अच्छी राजनीति की वजह से संभव हो पाई है और उसका श्रेय भी प्रदेश की जनता को जाता है। कुछ कमियां भी हैं और उनका दोष काफी हद राजनीति को दिया जा सकता है। बहरहाल, आज जानते हैं कि हिमाचल प्रदेश के बारे में कुछ ऐसी बातें, जो आपको मालूम होनी चाहिए। इनमें से कुछ बातें किसी जीके के टेस्ट में काम आ सकती है तो कुछ किसी और राज्य के दोस्त के सामने शेखी बघारने के लिए ;

1. ‘हिमाचल प्रदेश’ नाम संस्कृत के विद्वान आचार्य दिवाकर दत्त शर्मा ने दिया था। हिमाचल दो शब्दों से मिलकर बना है- हिम+अचल। ‘हिम’ यानी बर्फ और ‘अचल’ यानी पहाड़। अगर यह ‘हिम’ और ‘आँचल’ (या अंचल) से बना होता तो इसका नाम ‘हिमाँचल’ होता न कि ‘हिमाचल।’ वैसे कुछ लोग हिमाचल को हिमांचल बोलते हैं जो कि गलत है। वैसे हिमाचल शब्द पहले से ही चलन में था मगर वह मध्य हिमालय के लिए इस्तेमाल होता था। इसे हिस्से को हिमाचल हिमालय भी कहा जाता है।

2. भारत का 18वां राज्य बना था हिमाचल प्रदेश। शुरू में इसमें 28 पहाड़ी रियासतें मिलाई गई थीं।

3. हिमाचल की इकॉनमी पूरे देश की तीसरी सबसे तेजी से बढ़ती इकॉनमी है।

4. हिमाचल प्रदेश में कई छोटी-बड़ी नदियां हैं। चंद्रभागा, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलुज और यमुना नदियां इनमें प्रमुख हैं। इन नदियों को बर्फ और बारिश का पानी मिलता है।

5. प्रदेश की इकॉनमी तीन चीज़ों पर निर्भर करती है- 1 बिजली 2. पर्यटन और 3. खेती/बागवानी।

6. पॉलिथीन और तंबाकू पर बैन लगाने के बाद उसे सही तरीके से लागू करने में हिमाचल प्रदेश सबसे आगे है। खासकर पॉलिथीन के मामले में तो पूरा देश हिमाचल से सीख सकता है।

7. पूरे देश के मुकाबले हिमाचल प्रदेश में अपराध की दर बेहद कम है। कानून-व्यवस्था के साथ इस बात का श्रेय यहां के निवासियों को भी जाता है।

8. हिमाचल की 90 फीसदी आबादी गांवों और छोटे कस्बों में रहती है। प्रकृति की गोद में रहने का सुख हिमाचल से बढ़कर कहीं और नहीं मिल सकता।

9. कागजों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में हर घर में टॉइलट है। वैसे बहुत कम देखने को मिलता है कि लोग खुले में शौच के लिए जाते हों।

10. साल 2005 में आई ट्रांसपैरंसी इंटरनैशनल की रिपोर्ट कहती है कि हिमाचल केरल के बाद देश का दूसरा सबसे कम करप्ट राज्य है।

11. प्रदेश की आबादी 6,856,509 है। यानी हमारे प्रदेश की आबादी पूरे देश की आबादी की 0.57 फीसदी है। इसका फायदा यह है कि सरकारी योजनाओं और अन्य नीतियों का लाभ जनता को अच्छी तरह से मिलता है।

12. हिमाचल प्रदेश में 32 ऐसी बोलियां हैं, जिनमें एक-दूसरे से अच्छा खासा फर्क हैं मगर सांस्कृतिक रूप से ओवरऑल हिमाचल एक ही है।

13. प्रदेश की 95 आबादी हिंदू है और अन्य धर्मों के लोगों के साथ किसी तरह के भेदभाव की खबरें यहां कम ही आती हैं। सांप्रदायिक सौहार्द्र के मामले में हिमाचल पूरे देश के लिए मिसाल है।

14. UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल शिमला-कालका रेलमार्ग और पठानकोट-जोगिंदर नगर मार्ग काफी फेमस हैं।

15. हिमाचल प्रदेश देवभूमि कहलाता है, क्योंकि यहां गांव-गांव में देवता व मंदिर हैं। साथ ही हर जगह लोकप्रिय मेले और त्योहार आदि मनाए जाते हैं। सांस्कृतिक रूप से बहुत समृद्ध है हिमाचल।

16. हिमाचल 8,418 MW बिजली पैदा करता है। देश का मेगावॉट क्षमता का पहला हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर स्टेशन आजादी से पहले हिमाचल के जोगिंदर नगर में शुरू हुआ था।

17. कांगड़ा का बिलिंग (बीड़) पूरी दुनिया में पैराग्लाइडिंग के लिए मशहूर है। यहां से उड़ान भरने के लिए देश-दुनिया से हर साल सैकड़ों पायलट आते हैं।

18. हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक भोज को धाम कहा जाता है। विशेष ढंग से बनाए गए व्यंजनों को पत्तों की थाली में परोसकर जमीन पर बैठकर खाते हैं।

19. धर्मशाला स्थित HPCA क्रिकेट स्टेडियम दुनिया के सबसे सुंदर क्रिकेट स्टेडियम्स मे से एक है। सबसे ऊंचा क्रिकेट मैदान चायल में है।

20. हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा की चित्रकारी जिसे ”कांगड़ा चित्रकला” या ”कांगड़ा कलम” कहते हैं, दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

हिमाचल प्रदेश में गिनाने के लिए इतना कुछ है कि लिखते-लिखते थक जाएंगे मगर सिलसिला खत्म नहीं होगा। अभी सिर्फ 20 बातें ही हम दे पाए हैं और बहुत सी बातों का जिक्र नहीं कर पाए। आप कॉमेंट करके बता सकते हैं कि और क्या-क्या बातें खास हैं हिमाचल की। हम उसके अगले आर्टिकल में जगह देंगे।

नोट: कवर इमेज Royal Photo Studio, Vittu Thakur से इजाजत के साथ प्रकाशित।

भिंडरावाले सिखों के कौमी शहीद हैं, सीएम जयराम का बयान आपत्तिजनक: SGPC अध्यक्ष

डेस्क।। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के उस बयान पर आपत्ति जताई है जिसमें उन्होंने कहा था कि जरनैल सिंह भिंडरावाला की तस्वीरें और झंडे लगाकर हिमाचल आना स्वीकार्य नहीं होगा।

एडवोकेट धामी ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी हर समुदाय की रक्षा करना है और उनका बयान सांप्रदायिक है जिससे देश की शांति और सौहार्द को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि भारत कई धर्मों, कई भाषाओं का देश है और हर नागरिक धार्मिक स्वतंत्रता है।

धामी ने कहा, “संत जरनैल सिंह खालसा भिंडरावाले सिखों के कौमी शहीद हैं श्री अकाल तख्त साहिब ने उन्हें शहीद का दर्जा दिया है।”

धामी ने कहा, “हिमाचल प्रदेश में बहुत से सिख रहते हैं और पंजाब से भी बड़ी संख्या में हर साल वहां सिख तीर्थयात्री पहुंचते हैं। कुछ असमाजिक तत्व हिमाचल पुलिस की मदद से उनका रास्ता रोक रहे हैं और कानून अपने हाथ में लेकर निशान साहिब और सिख शहीदों की तस्वीरें उतार रहे हैं।”

एसजीपीसी अध्यक्ष ने कहा कि सिखों ने हमेशा देश की प्रगति में योगदान दिया है और संकट के समय हर समुदाय की सहायता की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को नहीं भूलना चाहिए कि आज अगर देश आजाद है तो उसमें सिखों का भी महान योगदान है।