30 हजार रुपये किलो बिकती है हिमाचल में उगने वाली गुच्छी

0

विवेक अविनाशी।। गुच्छी सिर्फ प्राकृतिक तौर पर उगती है। इसकी खेती करने में अभी वैज्ञानिकों को सफलता नहीं मिली है। इसके न तो आज तक बीज तैयार हो पाए और न ही उगाने की कोई और विधि का पता चल पाया। यही कारण है कि इसकी कीमत 20 से 30 हजार रुपए प्रति किलो तक है।

 

वैज्ञानिकों के अनुसार गुच्छी में कार्बोहाईड्रेट की मात्रा शून्य होती है। यह हृदय रोग, नियूरेपिक, मोटापा और सर्दी-जुखाम जैसी बीमारियों से लड़ने में रामबाण साबित होती है। इसका इस्तेमाल कई घातक बीमारियों को ठीक करने वाली दवाइयों के निर्माण में भी होता है। इसीलिए डॉक्टर भी इसे संजीवनी मानते हैं।

Image result for gucci mushroom

हिमाचल में कुल्‍लू, शिमला के उपरी इलाकों, सोलन, सिरमौर में कई लोग इसे बेचकर लाखों रुपया तक कमा लेते हैं। बादलों से गहरा रिश्ता है हिमाचल की गुच्छियों का हिमाचल के उपरी पहाड़ी इलाकों में पैदा होने वाली गुच्छियों का बादलों और आसमानी बिजली से गहरा रिश्ता है। कहते हैं जितने अधिक बादल गरजते हैं और बिजली चमकती है उतने ही अधिक मात्र में यह गुच्छियाँ धरती से फूटती हैं।

 

पैदा होने के तीन-चार दिन में यह गुछियाँ तीन से चार इंच तक लम्बी हो जाती हैं। इनका रंग गहरा भूरा या फिर हल्का भूरा होता है। प्रायः यह गुच्छियाँ देवदार और कैल के जंगलों के इलावा सेब, नाशपाती के पुराने बागीचों और कैंथ के पेड़ों के पास मिलती हैं। हिमाचल के पहाड़ी इलाकों में 5000 फीट से दस हजार फीट की उंचाई वाले क्षेत्रों में यह गुच्छियाँ उंचाई वाले क्षेत्रों में मिल जाती हैं।

Image result for gucci mushroom

बुजर्गों का कहना है गुच्छियाँ अमूमन पाक़-साफ़ दिलवालों को ही मिलती हैं। कुछ का तो यह भी कहना है कि सांवले चेहरे वालों को ही गुच्छियां जंगलों में नज़र आती हैं। जंगलों में इन गुच्छियों को तलाश करने के लिए काफ़ी मशक्कत करनी पडती है। कुल्लू जनपद के एक महाशय के अनुसार डेढ़ किलो गुछियां बटोरने के लिए 100 से अधिक गांवों की ख़ाक छाननी पडती है। ये गुच्छियां जंगलों में दरख्तों के नीचे या पुराने ठूंठों के के साथ भी पैदा होती है। जंगलों में आग के बाद बचे अवशेषों पर भी यह गुच्छियाँ पैदा होती हैं।

 

पहाड़ों में ताज़ी गुच्छियों को इकट्ठा कर सुखाया जाता है ताकि विशेष अवसरों पर इस का व्यंजन के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। पहाड़ की शाही दावतों में “गुच्छी वाली मदरे” और “गुच्छी पुलाव” का विशेष स्थान है। काबुली चना युक्त गुच्छी वाला मदरा पहाड़ का अति स्वादिष्ट व्यंजन है। गुछियों में आयरन, कैल्शियम और विटामिन”बी” तथा “डी” की भारी मात्र होती है। सुखी गुच्छियों का बाज़ार भाव 15,000 रूपये से लेकर 25,000 रूपये प्रति किलो तक है। हिमाचल प्रदेश में गुच्छियों का व्यापार 30 करोड़ रुपये से भी अधिक का होता है।

Image result for gucci mushroom

प्रायः प्रदेश के प्रसिद मेलों- कुल्लू का दशहरा, रामपुर के लवी, मंडी की शिवरात्री और चंबा के मिंजर मेले में लोग इन सुखी गुच्छियों को बेचने आते हैं।

 

(लेखक हिमाचल प्रदेश के हितों के पैरोकार हैं और जनहित के मुद्दों पर लंबे समय से लिख रहे हैं। इन दिनों ‘इन हिमाचल’ के नियमित स्तंभकार हैं। उनसे vivekavinashi15@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है)

देखें और जानें, कैसे बनाएं अरबी के पत्तों के पतरोड़े

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश का शायद ही कोई बाशिंदा ऐसा होगा जिसे अरबी के पत्तों से बनाए जाने वाले स्नैक्स ‘पतरोड़े’ या ‘पतरोड़ू’ पसंद न हों। इन्हें आप तलने के बाद पकौड़ों के रूप में भी खा सकते हैं और सिर्फ उबालकर घी या मक्खन के साथ रोटी के साथ भी खा सकते हैं। कुछ लोग कढ़ी में भी पतरोड़ू को ठीक उसी तरह से डालते हैं, जैसे पकौड़े डाले जाते हैं।

 

बहरहाल, पतरोड़े या पतरोड़ू देखने में जितने आकर्षक लगते हैं, खाने में उतने ही लजीज होते हैं। अगर आपको नहीं पता कि कैसे इन्हें तैयार किया जाता है तो नीचे वीडियो देखें और आसानी से सीखें:

वीडियो: समाचार फर्स्ट से साभार

इंटरव्यू में बाहर हुई रिटन की ‘सेकंड टॉपर’ ने PM को लिखी चिट्ठी

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, शिमला।। हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (HPPSC) के काम करने के तौर-तरीकों को लेकर अभ्यर्थियों द्वारा सवाल उठाने का सिलसिला जारी है। साक्षात्कार के आधार पर ही स्कूल और कॉलेजों में लेक्चरर्स की भर्ती की जा रही है। मगर अभ्यर्थी सवाल उठा रहे हैं कि छंटनी परीक्षा के टॉपर्स को साक्षात्कार में कम अंक देकर बाहर का रास्ता क्यों दिखाया जा रहा है।

 

ताजा मामला धर्मशाला की 34 साल की मोनिका डोगरा से जुड़ा है। मोनिका का कहना है कि वह पीजीटी पद के इंग्लिश सब्जेक्ट की छंटनी की परीक्षा में सेकंड टॉपर बनती हैं मगर इंटरव्यू में मुझे सिर्फ 52 अंक दिए गए। उनका कहना है कि एक तरफ तो सरकार इंटरव्यू खत्म करने की बात कर रही है मगर यहां इंरटव्यू में कम अंक मिलने पर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

 

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि आयोग ने जब पदों के लिए विज्ञापन निकाला था तो स्पष्ट किया था कि अंतिम चयन साक्षात्कार के आधार पर ही होगा। मगर अभ्यर्थियों का आरोप है कि सबकुछ सोची-समझी नीति के तहत हो रहा है। आरोप है कि अंतिम रिजल्ट पहले जारी कर दिया गया और उसके दो-तीन हफ्ते बाद बताया गया कि इंटरव्यू और रिटन में किसके कितने नंबर आए। आरोप है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि चुने गए उम्मीदवारों की जॉइनिंग हो जाए।

भर्ती का विज्ञापन (Image: MBM News Network)

अभ्यर्थी आरोप लगा रहे हैं कि अगर आयोग पारदर्शिता बरत रहा है तो छंटनी परीक्षा के साथ-साथ साक्षात्कार में हासिल किए गए अंकों को चंद रोज में ही क्यों नहीं जारी कर किया जा रहा।

एमबीएम न्यूज नेटवर्क का फेसबुक पेज लाइक करें

34 वर्षीय मोनिका सामान्य वर्ग में तीसरी बार इंटरव्यू में अपीयर हुई थीं। एमबीएम न्यूज नेटवर्क को मोनिका डोगरा ने अपनी आपबीती सुनाने के लिए संपर्क किया। उन्होंने बताया कि तकरीबन एक सप्ताह पहले प्रधानमंत्री कार्यालय को भी आयोग की धांधली बारे अवगत करवाया गया था, जहां से फिलहाल कोई जवाब नहीं मिला है।

पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी (Image: MBM News Network)

मोनिका ने बताया कि जून महीने में साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था, लेकिन लिखित परीक्षा में सेकंड टॉपर होने के बावजूद पद के लिए अयोग्य करार दे दिया गया। 34 वर्षीय मोनिका बताती हैं कि उन्होंने सामान्य वर्ग के तमाम चयनित प्रत्याशियों की सूची अपने स्तर पर तैयार की हैं, जिसमें दूध का दूध, पानी का पानी हो रहा है।

मोनिका

मोनिका ने कहा कि इस बाबत वह कानूनी राय भी ले रही हैं। पूछे जाने पर मोनिका ने बताया कि साक्षात्कार के दौरान 10-12 सवाल पूछे थे, जिसमें से केवल एक का जवाब नहीं दे पाई थी। अब ऐसा लग रहा है कि राजनीतिक सिफारिश न होने की वजह बाहर कर दिया गया।

यह भी पढ़ें:

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

हिमाचल में बन रही 16 दवाइयों के सैंपल फेल

सोलन।। हिमाचल प्रदेश में बन रही 16 दवाइयों के सैंपल फेल हो गए हैं। इन दवाइयों में ऐंटी-बायोटिक, ऐंटी-एलर्जी और आयरन की गोलियां शामिल हैं।

 

खास बात यह है कि इन 16 में से 12 दवाइयां बद्दी इंडस्ट्र्लियल एरिया की कंपनियों में बन रही थीं। बद्दी के अलावा काला अंब, नालागढ़, पावंटा साहिब और कुमारहट्टी की एक-एक कंपनी के सैंपल फेल हुए हैं।

 

केन्द्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की तरफ से पूरे देश के लिए जुलाई महीने के ड्रग अलर्ट में कुल 41 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। इनमें से 16 हिमाचल से होना बताता है कि यहां की कंपनियों कितनी लापरवाही बरत रही हैं। पिछले एक साल में जिन 267 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं उनमें से 88 दवाओं का उत्पादन हिमाचल में हुआ है।

 

इस बीच राज्य दवा नियंत्रक बद्दी नवनीत मागवाह का कहना है कि हिमाचल में मौजूद उन सभी दवा उद्योगों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं जिनकी गुणवत्ता खराब पाई गई है। इन कंपनियों को अब इन दवाओं के बैच देश भर के बाजारों से वापस मंगवाकर नष्ट करने होंगे।

CBI जांच में खुली पुलिस की लापरवाही की पोल: मीडिया रिपोर्ट

शिमला।। शिमला के बहुचर्चित गुड़िया रेप ऐंड मर्डर केस की जांच में पुलिस द्वारा इन्वेस्टिगेशन में लापरवाही बरतने की बात सामने आ रही है। हिंदी अखबार पंजाब केसरी की रिपोर्ट का कहना है कि पुलिस ने गुड़िया के शव का पोस्टमॉर्टम कराने के बाद सैंपल्स को अस्पताल से फरेंसिक लैब तक पहुंचाने में 4 दिन लगा दिए। वह भी तब, जब आईजीएमसी शिमला से जुन्गा फरेंसिक लैब तक गाड़ी से जाने में सिर्फ 1 घंटे का टाइम लगता है।

 

इतना बड़ा मामला होने के बावजूद अधिकारी शायद 2 दिन की छुट्टियां बीतने का इंतजार करते रहे। दो दिन छुट्टियों के बाद भी दूसरे वर्किंग डे पर ये सैंपल लैब में पहुंचे। जानकारों का कहना है कि इस तरह की देरी की वजह से सैंपल्स के नेचर में बदलाव आ सकता है यानी जांच में दिक्कत आ सकती है और इस केस में भी ऐसा ही हुआ।

 

अखबार ने लिखा है कि  विशेष परिस्थितियों में प्रयोगशाला में अवकाश वाले दिन भी जांच होती है। फरेंसिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतने वक्त में नमूने अपने नेचर को बदल भी सकते हैं। इससे सही रिजल्ट नहीं आ सकता है। इसी से फोरेंसिक विशेषज्ञों को काफी मुश्किल आई।

 

लैब से एक्सपर्ट को नहीं बुलाया गया था
अखबार का कहना है कि जांच मे एक लापरवाही यह भी सामने आई है जकि जब आईजीएमसी के स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमॉर्टम किया, उश दौरान पुलिस के जांच अधिकारी मौके पर थे। मगर जहां पर आगे की जांच होनी थी, उस लैब से एक्सपर्ट को नहीं बुलाया गया था। जो एक्सपर्ट 6 जुलाई को दांदी के जंगल में था, वह भी पोस्टमॉर्टम के दौरान वहां नहीं था। अखबार का कहना है कि फरेंसिक निदेशालय के विशेषज्ञ का कहना है कि विसरा और अन्य जरूरी हिस्सों को लैब में भेजा जाता तो जांच में आसानी होती।

बंदरों के हमले में घायल हुए बुजुर्ग की मौत

मंडी।। हिमाचल प्रदेश में बंदरों के हिंसक व्यवहार की खबरें नई नहीं हैं। ताजा मामले में बंदरों से हमले से एक बुजुर्ग की मौत हो गई। मामला हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले का है।

 

पैलेस कॉलोनी में रहने वाले 62 साल अमरजीत सिंह घर से दुकान के लिए निकले थे। जैसे ही वह घर की सीढ़ियां उतरने लगे, बंदर उनके चेहरे पर झपट पड़े। बंदर के नाखून चुभने से अमरजीत का संतुलन बिगड़ा और वह सीढ़ियों से गिर गए।

 

जख्मी हालत में उन्हें मंडी अस्पताल पहुंचाया गया मगर डॉक्टरों ने वहां उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस तरह के कई मामले अब तक सामने आ चुके हैं। करीब चार साल पहले समखेतर मोहल्ले में किराये के मकान में रह रही कॉलेज छात्रा निशा छत पर कपड़े सुखाने गई थी। इस दौरान बंदरों ने उस पर हमला कर दिया। वह भी सीढ़ियों से सिर के बल गिर गई थी और उसकी आंखों की रोशनी चली गई थी।

 

अप्रैल 2015 में कांगड़ा के नूरपुर में एक बुजुर्ग पर बंदरों के झुंड ने हमला कर दिया था। बुरी तरह से जख्मी होने के बाद उन्होंने पीजीआई चंडीगढ़ में दम तोड़ दिया था। इसी तरह विभिन्न इलाकों में लोग गंभीर रूप से जख्मी होते रहे हैं।

 

इस मामले में सरकारें वादे तो करती हैं मगर अब तक कुछ होता नजर नहीं आया है।

HRTC के RM का आरोप- शिमला पुलिस ने सोडे को हेरोइन बता किया ब्लैकमेल

शिमला।। पिछले दिनों शिमला के शोघी में एचआरटीसी के आरएम को चिट्टे की तस्करी में पकड़े जाने की खबर आई थी। अब नया मोड़ आया है। एचआरटीसी के सस्पेंड किए गए आरएम ने सफाई देते हुए कहा कि पुलिस ने झूठी एफआईआर बनाकर मामला प्लांट कर उन्हें फसाया है। उन्होंने दावा किया है कि जिसे पुलिस ने चिट्टा बताया, वह फरेंसिक जांच में बेकिंग सोडा निकला।

 

राणा ने शिमला में प्रेसवार्ता का आयोजन करके आरोप लगाया कि तत्कालीन एसपी शिमला ने उन्हें सोची समझी साजिश के तहत फंसाया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने उन्हें 13 जुलाई को बरी कर दिया था और पुलिस जिसे चिट्टा बता रही थी, वह सोडा निकला।

 

राणा ने कहा कि वह पुलिस पर उनके ऊपर झूठी एफआईआर दर्ज करने के मामले में कोर्ट में केस करेंगे और एसपी शिमला रहे डी.डब्ल्यू. नेगी के खिलाफ 50 लाख का मानहानि का मुकदमा करेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों बाद वो जीपीएस की फुटेज और एसएचओ द्वारा उनसे मांगे गए 5 लाख रुपये की वीडियो जारी करेंगे और बड़ा खुलासा करेंगे।

 

बता दें कि इसी साल 30 अप्रैल को पुलिस ने एचआरटीसी के आरएम को 4 किलो चिट्टे के साथ पकड़ने का दावा किया था। मगर राणा ने बताया कि पुलिस के अनुसार 30 अप्रैल की रात 12: 45 बजे जब वह सोलन से शिमला आ रहे थे तो शोघी में पुलिस ने नाका लगा कर उनकी गाड़ी में से चिट्टा पकड़ा और गाड़ी चालक ने कहा कि बैग आरएम का है। राणा ने कहा कि यह पुलिस ने मंगगढ़ंत कहानी बनाई है।

 

उन्होंने कहा- वास्तविकता यह है कि 30 अप्रैल को सायं 7 :30 बजे वह अपनी गाड़ी में उनके दोस्त राजीव और एक अन्य जो राजीव का दोस्त है उसके साथ शिमला से सोलन जा रहे रहे थे, तभी सीआईए के स्टाफ ने शोघी में उन्हें गाड़ी रोक कर उनके साथ मारपीट की और जो बैग तीसरे व्यक्ति के पास था, जिसका नाम विकास था उसे उनका बैग बताकर कहा कि इसमें चिट्टा है और उन्हें बालूगंज थाना ले गए।

 

राणा का कहना है कि वहां पर डीएसपी रतन नेगी ने उनके साथ मारपीट की और 5 से 7 लाख रुपये की मांग की। उन्होंने कहा कि उनकी गाड़ी में जीपीएस लगा है जो सही लोकेशन बताता है उनकी गाड़ी 10 बजे बालूगंज थाना में खड़ी हो गई थी जो कई दिन तक हिली नहीं तो पुलिस ने 12:45 बजे पर कैसे शोघी में नाका लगाकर पकड़ लिया।

 

राणा के आरोपों से पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई है।

अनसेफ थी HRTC की बिल्डिंग, लिखे थे 20 लेटर: मीडिया रिपोर्ट

शिमला।। शिमला के ठियोग में 4 अगस्त को एचआरटीसी के बस अड्डे की पुुुरानी बिल्डिंग ढह गई थी। इस घटना में 4 लोगों की मौत हो गई थी और 6 जख्मी हो गए थे। इस मामले में ‘न्यूज 18’ ने बड़ा खुलासा किया है।

 

‘न्यूज 18’ के मुताबिक ठियोग हादसे में 4 जिंदगियां बच जाती और 6 लोगों को कभी न भरने वाले जख्म न मिलते, अगर एचआरटीसी और बीएसएमडीए प्रबंधन घोर लाहपरवाही न करते। अखबार के मुताबिक एचआरटीसी का यह जर्जर भवन वर्ष 2013 में ही गिरा दिया जाना चाहिए था, मगर लापरवाह अफसरशाही 4 साल तक भवन के गिरने का इंतजार करती रही।

हादसे के बाद की तस्वीर

‘न्यूज-18’ ने दावा किया है कि उसके हाथ लगे अहम दस्तावेज तो यहीं दासतां बयां कर रहे हैं कि ठियोग बस अड्डा की जर्जर हालत और इसको गिराने के लिए अधिनस्थ अधिकारियों ने प्रबंधन और शीर्ष अधिकारियों को 20 पत्र लिखे थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

 

इनमें से कुछ पत्रों में क्या लिखा था, यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

पैसे लेकर सवाल पूछने में फिर मुश्किल में सुरेश चंदेल

इन हिमाचल डेस्क।। संसद में सवाल पूछने के बदले कैश लेने के मामले में दिल्ली की अदालत ने सुरेश चंदेल समेत 11 पूर्व सांसदों के खिलाफ मामला चलाने के लिए कहा है।

 

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 2005 में प्रश्न के बदले नोट स्टिंग ऑपरेशन में धरे गए 11पूर्व सांसदों के खिलाफ ट्रायल चलाने के लिए आरोप तय करने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश पूनम चौधरी ने आपराधिक साज़िश और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत आरोप तय करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए अदालत ने 28 अगस्त का दिन तय किया है।

 

गौरतलब है कि एक न्यूज़ चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में बीजेपी के सुरेश चंदेल समेत 11 तत्कालीन सासंद सवाल पूछने के बदले घूस लेते दिखाए गए थे। इनमें सुरेश चंदेल के अलावा छत्रपाल सिंह लोढ़ा (बीजेपी), चंद्र प्रताप सिंह (बीजेपी), वाईजी महाजन (बीजेपी), अन्ना साहेब एमके पाटिल (बीजेपी), राम सेवक सिंह (कांग्रेस), मनोज कुमार (आरजेडी), नरेंद्र कुमार कुशवाहा (बीएसपी), राजा रामपाल (बीएसपी), लाल चंद्र कोल (बीएसपी) के नाम शामिल हैं।

 

हिमाचल में आने वाले दिनों में सुरेश चंदेल के भी दिन फिरने के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन, माना जा रहा है कि स्टिंग कांड में दोबारा ट्रायल चलने से उनके अंकुरित होते अरमानों पर अमित शाह पानी फेर सकते हैं।

HPPSC से अभ्यर्थी का सवाल- 113 अंक मिले तो 111 वाले का चयन कैसे?

एमबीएम न्यूज, शिमला।।  शिलाई के कांडो भटनोल की रहने वाली 29 वर्षीय ममता शर्मा की बात पर यकीन किया जाए तो हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग में सब गोलमाल है, नजर आता है। एमबीएम न्यूज नेटवर्क ने जब शिमला की योगिता के साथ हुई कथित ज्यादती की खबर प्रकाशित की तो फोन नंबर तलाश कर ममता शर्मा ने भी एमबीएम न्यूज नेटवर्क को संपर्क साधा। अपनी बात बताते-बताते ममता लगातार रोती रही।

पढ़ें: लेक्चरर भर्ती की टॉपर को इंटरव्यू में कम अंक मिलने से नहीं मिली जॉब

दरअसल 8 महीने की गर्भावस्था के दौरान ओबीसी वर्ग में इतिहास प्रवक्ता (पीजीटी) की लिखित परीक्षा ममता ने 10 दिसंबर 2016 को दी थी। 11 जुलाई को साक्षात्कार आयोजित हुए। चंद रोज पहले आयोग ने वैबसाइट पर लिखित व साक्षात्कार के अंक दर्शाए हैं। इसे देखकर ममता चौंक गई। लिखित परीक्षा में 73 अंक हासिल कर अपने वर्ग में दूसरा स्थान मिला था। साक्षात्कार में उसे 40 अंक दिए गए। ममता का चौंकना इस कारण भी लाजमी था, क्योंकि उसके कुल अंकों का योग 113 बन रहा था, जबकि आयोग ने 111 व 112 अंक हासिल करने वालों को ही चयनित घोषित कर दिया।


ममता का आरोप है कि 111 अंक हासिल करने वाले उम्मीदवार ने लिखित परीक्षा में 64 अंक पाए थे, जबकि साक्षात्कार में उसे 47 अंक मिले। इसी तरह 63 अंक हासिल करने वाले को साक्षात्कार में 49 अंक हासिल हुए हैं। ममता कहती हैं कि वह इस बात को नहीं समझ पा रही थी कि कम अंक वाले उम्मीदवार का चयन कैसे किया गया।

एमबीएम न्यूज नेटवर्क का फेसबुक पेज लाइक करें

विशेष बातचीत के दौरान ममता ने कहा कि इस बारे फोन कर बार-बार आयोग से स्पष्टीकरण मांगा गया तो कोई भी जवाब देने को तैयार नहीं हुआ। लिहाजा उसने अपने एक रिश्तेदार को आयोग के कार्यालय में भेजा, जहां से जवाब दिया गया कि केवल साक्षात्का के अंकों के आधार पर चयन हुआ है। इसी हिसाब से उम्मीदवारों का चयन किया गया है। ममता का कहना है कि अगर आयोग ने अगर साक्षात्कार के आधार पर ही उम्मीदवारों का चयन करना है तो लिखित परीक्षा क्यों आयोजित की गई।

 

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और इसे सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित किया गया है)