स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री ने घटाई 495 कैदियों की सजा

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, शिमला।। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य सरकार ने जेलों में बंद सैकड़ों कैदियों की सजा को कम किया है। जेलों में बंद उन 495 कैदियों की सजा कम की गई है, जिनके आचरण को अच्छा माना गया है। इन 495 कैदियों की 15 दिनों से लेकर दो महीने तक की सजा को सरकार ने माफ किया है। जेल विभाग ने सभी जेलों को आदेश जारी किया है।

 

हिमाचल प्रदेश पुलिस महानिदेशक सोमेश गोयल के मुताबिक पांच साल से अधिक और दस वर्ष तक के कारावास कैदियों को दो माह, तीन वर्ष से अधिक और पांच वर्ष तक कारावास कैदियों को 45 दिन, एक वर्ष से अधिक और तीन वर्ष तक के कारावास कैदियों को एक माह तथा तीन माह से अधिक और एक वर्ष तक के कारावास कैदियों की सजा में 15 दिनों की कटौती कर दी है।

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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बताया कि जेल विभाग की तरफ से जिन कैदियों की सिफारिश प्राप्त होने के बाद उनको यह राहत दी जा रही है। कैदियों का चाल चलन ठीक होने पर उन्हें रिहा किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि स्वतंत्रता दिवस एवं गणतन्त्र दिवस पर कैदियों की रिहाई और सजा राहत दी जाती रही है। पिछले साल मुख्यमंत्री ने अपनी शक्तियों को इस्तेमाल करते हुए विभिन्न जेलों में बंद 428 कैदियों की सजा में कटौती की थी।

भूस्खलन से बचाई जा सकती थीं 48 जिंदगियां, अगर…

मंडी।। हिमाचल प्रदेश के मंडी में 48 लोगों की जिंदगी छीनने वाले भूस्खलन को लेकर पता चल रहा है कि इस मामले में प्रशासन की भी लापरवाही रही है। भूस्खलन होने की आशंका के चलते गांव खाली हो गए थे मगर नैशनल हाइवे 154 को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया था। यह दावा हिंदी अखबार अमर उजाला ने किया है।

कोटरोपी में पहाड़ दरकने से यात्रियों से भरी दो बसें मलबे में दब गई थीं। एक बस पहले ही भूस्खलन की चपेट में आ गई थी मगर अन्य गाड़ियों को आगाह करने और उन्हें रोकने वाला कोई नहीं था। अगर वहां पुलिस वैन ड्यूटी पर होती तो अन्य वाहनों को रोका जा सकता था।

लोगों का दावा- प्रशासन को दी थी सूचना
अखबार के मुताबिक मलबे में दबे रवां गांव के बाशिंदों का कहना है कि पिछले साल भी जिला प्रशासन को उन्होंने इस बारे में सूचित किया था। पिछले दिनों बरसात में पहाड़ियों से पत्थर गिरने पर उन्होंने कई बार जंगल में शरण ली थी। यहां तक कि वन विभाग ने भी उन्हें कई बार यहां से हटाया है।

एनएच पर ट्रैफिक रोकना संभव नहीं: प्रशासन
लोगों के दावे से साफ़ है कि प्रशासन को भी जानकारी थी यहां क्या हो सकता है। मगर यहां पर संजीदगी नहीं बरती गई।  हालांकि जिला प्रशासन का तर्क है कि एनएच पर यातायात को रोका नहीं जा सकता है और यह एनएच तो सामरिक रूप से भी महत्व है। मगर क्या सगजता नहीं बरती चाहिए?

 

मगर ऐसा क्यों नहीं किया गया?
हिमाचल प्रदेश में जहां पर भी आशंका होती है बड़ा भूस्खलन हो सकता है, वहां पर पुलिस के जवान तैनात रहते हैं। वे नजर रखते हैं कि कहीं कोई हलचल तो नहीं हो रही। इसी आधार पर वे सीटी बजाकर दूसरी तरफ से आ रहे वाहनों को रोक देते हैं। मनाली जाने वाली राजमार्ग पर भी इन्हीं दिनों यही व्यवस्था की गई है। मगर कोटरोपी में ऐसा नहीं हुआ।

मंडी जिले के पद्धर के पास कोटरोपी में बहुत बड़े भूस्खलन से भारी नुकसान हुआ है। घटना रात करीब साढ़े 12 बजे की है।

प्रशासन ने कहा- इतनी बड़ी आपदा की आशंका नहीं थी
अखबार के मुताबिक डीसी मंडी संदीप कदम ने भी माना है कि यहां पर लैंडस्लाइड की जानकारी थी, मगर इतनी बड़ी त्रासदी का अंदाजा नहीं था। एसपी अशोक कुमार का कहना है कि न तो जिला प्रशासन और न ग्रामीणों की तरफ से उन्हें भूस्खलन की आशंका की सूचना मिली थी। ऐसी सूचना होती तो रात को जरूर वहां फोर्स लगाई जाती।

अपनी गाड़ी निकालने के लिए बस पर चढ़ गया था टैक्सी वाला

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, कुल्लू।। हिमाचल पुलिस ने खनाग के माशनूनाला में बस दुर्घटना को अंजाम देने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उसे औट के पास गिरफ्तार किया है। इसे भी हादसे के दौरान चोटें पहुंची है जिसे एक निजी वाहन में कुल्लू लाया जा रहा था।

पढ़ें: सड़क किनारे खड़ी बस से की छेड़छाड़, खाई में गिरी

अपनी गाड़ी निकालने के चक्कर में छीन ली कई जिंदगियां
पुलिस ने व्यक्ति को गिरफ्तार कर क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में उपचार के लिए पहुंचा दिया है। पुलिस ने बंजार निवासी इंद्र सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इंद्र सिंह टैक्सी चालक है और बताया जा रहा है कि उक्त टैक्सी चालक ने अपनी टैक्सी को यहां से आगे निकालने के लिए बस को आगे करने की कोशिश की और इस दौरान बस में ब्रेक नहीं लगी और बस सडक़ से नीचे जा गिरी। उस वक्त ड्राइवर और कंडक्टर बस में नहीं थे।

मदद करते स्कूली बच्चे

हादसा होता देख वह बस से कूद गया इस दौरान उक्त टैक्सी चालक को भी चोटें पहुंची और बस करीब एक किलोमीटर सडक़ से नीचे जा गिरी। लिहाजा घटना को अंजाम देने के बाद उक्त व्यक्ति को टैक्सी में कुल्लू लाया जा रहा था और पुलिस ने उसे औट के पास से गिरफ्तार कर लिया है।

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एसपी कुल्लू शालिनी अग्निहोत्री ने बताया कि पुलिस ने घटना को अंजाम देने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है और उसे उपचार के लिए क्षेत्रीय अस्पताल में भर्ती कर दिया गया है जहां उसका उपचार चल रहा है।

परिवहन मंत्री ने दिए जांच के आदेश
नाहन में एमबीएम न्यूज नेटवर्क के सवाल के जवाब पर परिवहन मंत्री जीएस बाली ने जांच के आदेश जारी होने की बात कही है। उन्होंने कहा कि चालकों व परिचालकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि जब भी बस को कहीं पार्क करें तो टायर में गुटका जरूर लगाएं। बाली ने हादसे के मृतकों के प्रति संवेदनाएं भी प्रकट की हैं। उन्होंने कहा कि हादसे के पीछे किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कोटरोपी भूस्खलन पर टिप्पणियां कर फंसे डिप्टी एडवोकेट जनरल विनय शर्मा

शिमला।। शिमला के गुड़िया केस को लेकर मीडिया और जनता की भागीदारी पर व्यंग्य करने में हिमाचल प्रदेश सरकार के डिप्टी एडवोकेट जनरल विनय शर्मा सीमाओं को लांघते नजर आए। उन्होंने कोटरोपी में आए भूस्खलन को लेकर एक व्यंग्यात्मक पोस्ट डाली जिसमें उन्होंने हिमाचल प्रदेश के मीडिया और जनता पर प्रहार करने की कोशिश की। उन्होंने एक फेसबुक लाइव में यह भी कहा कि बीजेपी द्वारा प्रदेश को बदनाम करने से नाराज देवताओं के गुस्से की वजह से कोटरोपी में घटना हुई है।

 

जिस हादसे में 40 से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं, उसे लेकर ऐसी पोस्ट डालना और ऐसी टिप्पणियां करना आलोचना का विषय बन गया है। गौरतलब है कि इससे पहले उन्होंने मीडिया के एक हिस्से और गुड़िया के परिजनों पर प्रदेश को बदनाम करन का आरोप लगाते हुए केस करने की बात भी कही थी।

‘देवताओं के गुस्से से हुई कोटरोपी में घटना’
उनका दावा है कि कोटरोपी का हादसा देवताओं के गुस्से की वजह से हुआ है क्योंकि वह बीजेपी द्वारा हिमाचल बदनाम करके यूपी बिहार बनाने की कोशिशों से नाराज हैं। एक फेसबुक लाइव में उन्होंने कहा कि इसलिए बेहतर होगा कि प्रदेश की जनता ‘देव तुल्य राजा वीरभद्र सिंह’ को फिर से मुख्यमंत्री बनाएं। उनके वीडियो का इस बयान वाला हिस्सा नीचे है, पूरा फेसबुक लाइव आप यहां क्लिक करके देख सकते हैं

कोटरोपी के बहाने कोटखाई पर उठाए सवाल
अक्सर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल करने के लिए पहचाने जाने वाले सीपीएस नीरज भारती के बचाव में पोस्टें लिखने वाले विनय शर्मा ने इस पोस्ट के जरिए यह जताने की कोशिश की थी कि मीडिया और लोगों ने बिना वजह कोटखाई केस में सनसनी बनाई है। कोटखाई केस में पुलिस की जांच पर सवाल उठाए जाने की तर्ज पर उन्होंने कुछ मनगढंत सवाल कोटरोपी की घटना को लेकर बनाए थे। उन्होंने यह पोस्ट डाली तो भारी आलोचना होने पर डिलीट करनी पड़ी। मगर ‘In Himachal’ के पास इसका स्क्रीनशॉट है और कुछ पाठकों ने भी इस संबंध में जानकारी दी है।

आलोचना के बाद यह पोस्ट हटा दी गई.

गुड़िया के परिजनों पर भी की थी टिप्पणी
कोटखाई के गुड़िया प्रकरण में मीडिया की सक्रियता पर प्रश्न उठाए जा सकते हैं और कुछ पत्रकारों द्वारा किए गए शुरुआती हवा-हवाई दावों की भी आलोचना की जा सकती है। लोकतंत्र में अगर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने का अधिकार है तो ऐसा करने वालों की आलोचना भी की जा सकती है। अपनी बात रखने में कोई बुराई नहीं है मगर इस तरह से संवेदनहीनता बरतना लोगों को रास नहीं आया है। लोग मुख्यमंत्री के खास समझे जाने वाले अधिवक्ता की इस पोस्ट की तुलना मुख्यमंत्री के ही उन बयानों से कर रहे हैं जिसमें उन्होंने सीबीआई जांच की मांग करने वाली जनता को जरूरत से ज्यादा होशियार बताया था। अगर आप नीचे दी गई पोस्ट को नहीं पढ़ पा रहे हैं तो यहां क्लिक करें

वीडियो आदि के जरिए विनय शर्मा का कहना है कि कोटखाई केस को लेकर इसलिए माहौल बनाया गया ताकि वीरभद्र सरकार के लिए मुश्किलें पैदा की जा सकें। बहरहाल, यह उनकी सोच हो सकती है और इसमें कुछ गलत नहीं, मगर फिलहाल वह अपनी संवेदनहीन पोस्ट की वजह से चर्चा मे हैं।

गुड़िया केस में संतरी बोला- मेरे सामने राजू ने सूरज को नहीं मारा: मीडिया रिपोर्ट

शिमला।। कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस में नेपाली मूल के आरोपी सूरज की पुलिस हिरासत में संदिग्ध हालात में हुई मौत को लेकर नई जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि कोटखाई थाने में तैनात रहे संतरी ने सीबीआई को बयान दिया है कि राजू ने लॉकअप में सूरज को मेरे सामने नहीं मारा।

 

हिंदी अखबार अमर उजाला की मंगलवार को पहले पन्ने पर छपी रिपोर्ट कहती है कि यह संतरी उस रात तीन घंटों के लिए राजू और सूरज पर निगरानी के लिए तैनात था। अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि संतरी ने बताया है कि थाना प्रभारी ने मुंशी से लॉकअप खुलवाया था और वह सूरज को बाहर लेकर गया था। उसके बाद जब तक वह ड्यूटी पर रहा, राजू वहां अकेला ही था।

 

संतरी ने कहा कि सूरज को कब वापस लाया गया, इसकी जानकारी नहीं है क्योंकि तब तक मेरी ड्यूटी खत्म हो गई थी। जब उससे पूछा गया कि पुलिस को अलग बयान क्यों दिया तो संतरी ने कहा कि पुलिस ने पहले से ही लिखे बयान पर मेरे हस्ताक्षर करवाए हैं।

 

गौरतलब है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सूरज के शव पर बेल्ट और डंडों के निशान मिले थे। उसके प्राइवेट पार्ट पर भी चोट की गई थी। अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि संतरी के बयान के बाद सीबीआई अब थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों से कड़ी पूछताछ कर रही है।

कुल्लू के आनी में खाई में गिरी एचआरटीसी की बस, 5 की मौत

कुल्लू।। प्रदेश में लगातार हो रही दुखद घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। स्वतंत्रता दिवस की सुबह एचआरटीसी की एक बस खाई में लुढ़कने से 5 लोगों की मौत और करीब एक दर्जन के घायल होने की ख़बर है। हैरानी की बात यह है कि बताया जा रहा है कि किसी शख्स ने बस खाई में लुढ़काई है।

 

जानकारी के मुताबिक खड़ी बस पर चढ़कर ड्राइविंग सीट पर जाकर छेड़छाड़ करने के आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने उसे भुंतर से गिरफ्तार किया है और उससे पूछताछ की जा रही है। इस बीच मौके से लोगों ने शवों को उठाने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि आरोपी को उनके बवाले किया जाए।

 

घटना कुल्लू जिला के आनी के माशणू नाला के पास की है। नाले में पानी ज्यादा होने की वजह से यहां पर बसों की अदला बदली की गई थी। जिस वक्त ड्राइवर और कंडक्टर चाय पी रहे थे, किसी शख्स ने बस चला दी और यह हादसा हो गया। नीचे देखें पाठक द्वारा भेजा गया वीडियो, जो विचलित कर सकता है।

अभी तक 5 लोगों की मौत की ही खबर है। प्रशासनिक अमला घटनास्थल के लिए रवाना हो गया है। इससे पहले स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर बचाव की कोशिशें शुरू कर दी थीं।

मदद करते स्कूली बच्चे

बस खाई में ऐसे लुढ़क रही थी मानो पत्थर पलटियां खाते हुए गिर रहा हो। कई मीटर तक पलटियां खाने की वजह से बस की छत छिटककर दूर जा गिरी। इस वजह से नुकसान ज्यादा हो गया।

बस की छत

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कुछ लोग गंभीर रूप से जख्मी हैं और मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। घायलों को ऐंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया।

‘अब तो जमीन भी दे दी, AIIMS क्यों नहीं बनवा रहे नड्डा?’

रामपुर बुशहर।। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने एम्स मामले पर आक्रामक होते हुए कहा कि हिमाचल में एम्स का शिलान्यास लटकने के पीछे केंद्र सरकार और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा जिम्मेदार हैं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में एम्स स्थापित करने को केंद्र राज्य सरकार को कोसता रहा कि सहयोग न मिलने से बिलासपुर में एम्स लटका है, मगर केंद्रीय मंत्री स्वास्थ्य मंत्री नड्डा के गृहक्षेत्र में भूमि उपलब्ध करवा दी गई, फिर भी वह रुचि नहीं दिखा रहे।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बात समझ से परे है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा अपने गृह विधानसभा क्षेत्र बिलासपुर में एम्स का कार्य शुरू करने में रुचि क्यों नहीं दिखा रहे। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार अपना पूरा सहयोग देने को तैयार है।

 

गौरतलह है कि ‘इन हिमाचल’ ने भी प्रश्न उठाया था कि आखिर एम्स के लिए बजट से लेकर जमीन तक अलॉट होने के बावजूद काम शुरू क्यों नहीं हो रहा। इसके बाद जब पत्रकारों ने इसे लेकर नड्डा से सवाल किए थे तो उन्होंने कहा था- इस मामले में कुछ टेक्निकैलिटीज़ हैं, जिनपर मैं जाना नहीं चाहता। वह इस सवाल को सीधे-सीधे टाल गए थे।

 

पढ़ें: हिमाचल में बनने वाले AIIMS पर बात क्यों नहीं करते जेपी नड्डा?

हिमाचल के मंडी में ऐसे मनाया गया था आज़ादी का जश्न

चिरंजीत परमार।। भारत की स्वतन्त्रता की घोषणा 14 अगस्त 1947 रात के ठीक बारह बजे हुई थी और इसी के साथ भारत एक आज़ाद देश बन गया था। सारे भारत में उस दिन समारोह हुए थे। उस ऐतिहासिक दिन हमारे शहर मंडी में भी एक समारोह हुआ था जो मुझे अच्छी तरह याद है। मेरी उम्र तब आठ साल थी।

 

आज का मंडी शहर पर इस समारोह के बारे में बताने से पहले मैं अपने उन मित्रों को जो मंडी के निवासी नहीं हैं, मंडी के बारे में कुछ जानकारी देना चाहूँगा. मंडी हिमाचल प्रदेश का एक छोटा शहर है और अब जिला भी है. स्वतन्त्रता से पहले मंडी एक रियासत हुआ करती थी जिस पर उस समय राजा जोगेंद्र सेन राज किया करते थे. स्वतंत्रता के बाद इस रियासत का हिमाचल प्रदेश में विलय कर दिया गया और इस के साथ एक अन्य रियासत सुकेत को मिला कर आज के मंडी जिले कया गठन किया गया.

मंडी शहर
आज ऐसा है मंडी शहर

मंडी उस समय की काफी प्रगतिशील रियासतों में एक थी. यहाँ बिजली थी, दो तीन हाई स्कूल थे, हॉस्पिटल था, टेलीफोन भी थे. उस समय मंडी में हिमाचल के सबसे ज्यादा पढ़े लिखे लोग थे. मंडी के तत्कालीन शासक राजा जोगिन्द्र सेन रियासत के दिनों हमारा परिवार पैलेस (जहां अब सोल्जर बोर्ड तथा फौजी केंटीन है) के स्टाफ क्वार्टरों में रहता था। मेरे स्वर्गीय पिता मियां नेतर सिंह राजा मंडी के निजी स्टाफ में थे. निजी स्टाफ के लगभग सारे कर्मचारी उन स्टाफ क्वार्टरों में रहा करते थे।

मंडी की पुरानी तस्वीर
पहले ऐसा था मंडी

उस दिन क्वार्टरों के निवासियों में कुछ विशेष हलचल थी और सब बड़े आपस में यह कह रहे थे की आज रात को आज़ादी आएगी। हमारे साथ वाले क्वार्टर में मिस्त्री शेर सिंह रहते थे। पैलेस के बिजली से जुड़े सारे काम उनके जिम्मे थे। पैलेस के तमाम बिजली के उपकरणों का रख रखाव भी उन्हीं ज़िम्मेदारी थी। इन उपकरणों में दो सिनेमा प्रॉजेक्टर भी थे जिन पर कभी कभी वो हमको कार्टून फिल्मे दिखाया करते थे जो शायद पैलेस में राजकुमार (आज के मंडी के राजा अशोक पाल सेन, जो शाम को अक्सर राजमहल होटल में टीवी देखते रहते हैं) और राजकुमारी के देखने के लिए मंगाई हुई होती थीं। इस कारण मिस्त्री जी (उनको हम इसी नाम से संबोधित किया करते थे, उन दिनों अंकल आंटी का रिवाज अभी नहीं चला था) हम बच्चों में बहुत लोक प्रिय थे।

मंडी के राजा जोगिंदर सेन

हम बच्चों को वह ऐतिहासिक क्षण दिखाने वाले मिस्त्री शेरसिंह अपनी धर्मपत्नी जसोदा के साथ आज़ादी का समारोह चौहटे में आयोजित किया जा रहा था। शायद आयोजकों की इच्छा हुई होगी की इस विशेष दिन पर समारोह में लाउड स्पीकर भी लगाया जाए। मेरा अंदाजा है कि उस वक़्त मंडी में एक ही लाउडस्पीकर सिस्टम था और वह भी केवल पैलेस में। इसलिए पैलेस से यह साउंड सिस्टम माँगा गया. पैलेस की और से मिस्त्री जी को यह काम सौंपा गया और उन्होंने साउंड सिस्टम तैयार करना शुरू किया। मिस्त्री जी के मन में अचानक यह विचार यह आया कि क्यों न बच्चों को भी आज़ादी आने का यह जश्न दिखाया जाये और उन्होंने मेरी ही उम्र की अपनी बेटी चंद्रा, भतीजे रूप सिंह और मुझे भी साथ चलने को कहा। हम तीनों बहुत ही प्रसन्न थे।

मिस्त्री शेरसिंह अपनी धर्मपत्नी जसोदा के साथ
मिस्त्री शेरसिंह अपनी धर्मपत्नी जसोदा के साथ

मंडी के वर्तमान राजा श्री अशोक पाल सेन समारोह के लिए चौहटे की भूतनाथ वाली साइड पर एक मंच बनाया गया था जिस पर दरियाँ बिछायी गई थी। मंच के एक कोने पर मिस्त्री जी ने अपना साउंड सिस्टम सेट किया और लाउड स्पीकर भी लगा दिया। स्टेज पर ही एक छोटा मेज़ रखा गया जिस पर एक रेडियो सैट लगा दिया गया। फिर इस रेडियो के आगे माइक्रोफोन रख दिया गया और इस के साथ ही रेडियो में चल रहा प्रसारण लाउड स्पीकर में आने लगा। मंच के आगे कुछ दरियाँ बिछा दी गई थीं जिस पर लोग आ कर बैठने शुरू हो गए थे। क्योंकि हम तीनों मिस्त्री जी के साथ थे जो अपने लाउडस्पीकरों के कारण उस समारोह के बहुत महत्त्वपूर्ण व्यक्ति थे, इसलिए हम तीनों को को भी वी आई पी ट्रीटमेंट मिला। हम तीनो को आम पब्लिक के साथ नीचे दरियों के बजाय स्टेज पर बिठाया गया, हालांकि बैठे हम वहाँ भी नीचे ही थे।

अशोक पाल सेन
मंडी रियासत के वर्तमान ‘राजा’ अशोक पाल सेन

उस समय तो मेरी समझ में कुछ नहीं आया था पर अब में समझ सकता हूँ। रेडियो पर शायद कमेंटरी किस्म का प्रोग्राम आ रहा था। स्वतन्त्रता की घोषणा रात को बारह बजे दिल्ली में होनी थी। दिल्ली में चल रहे समारोह की जानकारी वहाँ उपस्थित जन समूह को रेडियो के माध्यम से दी जा रही थी। फिर अचानक जनसमूह में जोश आ गया और लोग खुशी के मारे झूम उठे और नारे लगाने लग गए। ध्वजारोहण भी हुआ था। मुझे याद नहीं कि मंडी में उस रात झंडा किसने फहराया था. शायद स्वामी पूर्णानन्द ने यह काम किया था.

 

उस क्षण शायद दिल्ली में भारत के आज़ाद होने की घोषणा हुई होगी। चौहटे के कोर्ट वाले सिरे पर पटाखे छोड़े जाने लगे। 5-6 हॉट एयर बैलून, जिन्हें बच्चे उस वक़्त “पेड़ू” कहा करते थे, भी छोड़े गए। फिर आया हम लोगों के लिए सबसे बढ़िया क्षण। बड़ी बड़ी परातों में गरम गरम हलुआ आया और लोगों में बांटा जाने लगा। आज़ादी क्या होती है इसकी तो हमको समझ नहीं थी, पर उस दिन के हलुए का स्वाद आजतक भी नहीं भूला है। क्यों कि हम मिस्त्री जी के साथ थे और स्टेज पर थे, इसलिए हमको सामान्य दर्शकों से ज्यादा, दोनों हाथों की हथेलियाँ भर के हलुआ मिला और हमने पेट भर के खाया। तो ऐसे हुआ था मंडी शहर में भारत आज़ाद।

(लेखक चिरंजीत परमार हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से हैं जाने-माने फ्रूट साइंटिस्ट हैं। पूरी दुनिया में विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय उनकी सेवाएं ले चुके हैं। यह लेख उनकी फेसबुक टाइमलाइन और ब्लॉग से साभार लिया गया है।)

वायरल हो रहा ‘वनरक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा’ का कथित प्रश्नपत्र

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, नाहन।। हिमाचल प्रदेश में वनरक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। एक प्रश्नपत्र की तस्वीर वायरल हो रही है जिसे रविवार को हुई लिखित परीक्षा का प्रश्नपत्र बताया जा रहा है। तस्वीर से साफ नहीं है कि यह किस सीरीज का प्रश्नपत्र है। मगर इस परीक्षा में हिस्सा लेने वाले उम्मीदवार इसे वनरक्षक भर्ती का ही प्रश्नपत्र करार दे रहे हैं।

 

दरअसल समूचे प्रदेश में रविवार को वनरक्षकों की भर्ती की लिखित परीक्षा आयोजित हुई है। सवा घंटे की इस परीक्षा में किसी भी अभ्यार्थी को मोबाइल व घड़ी के अलावा कोई भी इलैक्ट्रोनिक्स उपकरण ले जाने की इजाजत नहीं थी। ऐसे में सवाल इस बात पर उठता है कि फिर यह प्रश्नपत्र कैसे वायरल हो रहा है।

प्रश्नपत्र
Image: MBM News Network

नाम गोपनीय रखने की शर्त पर एक उम्मीदवार ने एमबीएम न्यूज नेटवर्क को दावे से कहा कि आज की परीक्षा का ही प्रश्रपत्र है। यह तो विभाग ही जांच के बाद पता लगा सकता है कि किस सीरीज का प्रश्नपत्र वायरल हुआ। उम्मीदवार ने यह भी कहा कि जैसे ही वह परीक्षा देकर बाहर निकले तो मोबाइल ऑन करते ही व्हाटसएप ग्रुप में प्रश्रपत्र की फोटो आने लगी।

 

इस खबर में यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि कई बार शरारत की नीयत से भी ऐसा काम किया जाता है। बहरहाल आवेदकों में प्रश्नपत्र लीक होने से हडकंप मचा हुआ है। उधर वन अरण्यपाल वाईपी गुप्ता का कहना है कि शहर में प्रश्रपत्र के वायरल होने का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि परीक्षा के आयोजन के लिए फुल प्रूफ इंतजाम किए गए थे। यहां तक की इनविजीलेटर्स को भी मोबाइल ले जाने की इजाजत नहीं थी।

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उन्होंने कहा कि ऐसा भी तो हो सकता है कि किसी बाहर के परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र की तस्वीरों को वायरल किया गया हो। साथ ही यह भी सवाल उठाया कि पुराने प्रश्नपत्र को ही जानबूझ कर शरारत की नीयत से वायरल किया जा रहा हो। गौरतलब है कि इस परीक्षा में प्रश्नपत्र वापस लेने का प्रावधान होता है।

 

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत पब्लिश की गई है)

ग्रामीणों ने कहा- जमीन में पहले ही आ गई थी दरार: मीडिया रिपोर्ट

मंडी।। मंडी जिले के कोटरोपी में जहां पर भूस्खलन हुआ है, वहां पर कुछ परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उनका कहना है कि गांव के पीछे की जमीन पर पहले ही दरारें आई गई थीं मगर न तो प्रशासन ने उनकी सुध ली और न ही उनके विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने फरियाद सुनी। ग्रामीणों ने ये बातें पंजाब केसरी अखबार से बातचीत के दौरान कहीं (पढ़ें)।

 

 

जहां पर भूस्खलन हुआ है, वह इलाका द्रंग विधानसभा सीट में पड़ता है। यहां से ठाकुर कौल सिंह लंबे समय से जीतते आए हैं और कई बार मंत्री रहे हैं। हिंदी अखबार पंजाब केसरी से बात करते हुए स्थानीय निवासी चौबेराम ने बताया कि दो दशक पहले उन्होंने अपने भाइयों के साथ एक मुस्लिम परिवार से यह जमीन खरीदी थी।

 

इनका कहना है कि यहां पर पांच अलग मकान और गऊशालाओं बनाई गई थीं। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले गांव के पीछे की ज़मीन पर दरारें आ गई थीं और इस वजह से उन्होंने यहां से कहीं और जाने का मन बना लिया था। उन्होंने कहा कि मांग के बावजूद न तो प्रशासन ने जमीन में आई दरारों का संज्ञान लिया और न ही उनके विधायक और कैबिनेट मंत्री कौल सिंह ने फरियाद सुनी।

 

अगर गांव वालों की बातें सच हैं तो प्रशासन पहले हरकत में आ सकता था। दरअसल हमारे देश में व्यवस्था ऐसी है कि जब तक कुछ हो नहीं जाता, तब तक किसी को होश नहीं आता। न तो किसी को ऐसी चीज़ों की चिंता होती है और न ही वे इतने सक्षम हैं कि कोई उपाय कर सकें। इसी रवैये का खामियाजा हमें अक्सर मासूमों की जान गंवाकर भुगतना पड़ता है।