विधानसभा में बीजेपी विधायकों ने छीने माइक, किया हंगामा

शिमला।। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र का पहला दिन शोरशराबे, हंगामे, नारेबाजी और वॉकआउट की भेंट चढ़ गया। वैसे तो हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पिछले पौने पांच साल में बीजेपी अक्सर वॉकआउट करने के लिए ही चर्चा में रही, मगर इस बार तो मर्यादाएं भी तार-तार होती नजर आईं। भाजपा के विधायकों ने माइक तक छीन लिए और उन माइकों पर ही नारेबाजी कर दी। विपक्ष कोटखाई के गुड़िया मामले और प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर नियम-67 के सारा काम रोककर चर्चा करवाने की जिद पर अड़ा हुआ था।

बीजेपी विधायकों ने छीने माइक
पहले दिन खराब कानून व्यवस्था को लेकर चल रही नारेबाजी के दौरान बीजेपी के विधायकों ने वक्ताओं के माइक तक छीन लिए। यही नहीं, जब विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल के कहने पर ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया बोलने के लिए उठे और अपना माइक ऑन किया तो बीजेपी के विधायकों ने उनके आगे से माइक हटा दिया और उसी माइक से सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

 

आवाज दबाने के लिए जोर से की नारेबाजी
इस तरह के अजीब व्यवहार का सिलसिला जारी रहा। इसके बाद राकेश कालिया बोलने के लिए उठे। कालिया की सीट पीछे थी तो बीजेपी के विधायकों ने जोर-जोर से नारेबाजी ताकि वह अपनी बात न रख सकें। इसके बाद विधायक कुलदीप कुमार उठे तो उनके माइक को छीनकर भी विधायकों ने नारेबाजी की।

 

चंबा के चुराह के एमएलए और संसदीय कार्यमंत्री में बहस
विधानसभा में जबरदस्त हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्रवाई को दिन के लिए स्थगित कर दिया। बीजेपी के विधायक वेल में नारेबाजी कर रहे थे। उनके साथ संसदीय कार्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के बीच बहस हो गई। चंबा के चुराह से विधायक हंसराज और मुकेश में तो जमकर नोकझोंक हुई। बाद में हालात खराब हुए तो बीजेपी और कांग्रेस के विधायकों ने बीचबचाव करके विवाद सुलझाया।

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मंडी: कार में किडनैप करके नाबालिग छात्रा से रेप का आरोप

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, मंडी।। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के धर्मपुर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत नाबालिग को कार में अगवा करने के बाद बलात्कार का मामला सामने आया है।

 

इस वारदात में तीन आरोपी शामिल है, जिसमें एक के खिलाफ दुराचार का मामला दर्ज हुआ है। जबकि अन्य के खिलाफ अगवा व साजिश करने का मामला आईपीसी की धारा 363 व 120बी के तहत दर्ज हुआ है। बलात्कार के आरोपी के खिलाफ पुलिस ने पोक्सो एक्ट को भी शामिल किया है।

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दरअसल बीती रात नाबालिग घर जा रही थी। आरोप है कि इसी दौरान सड़क से रात 9 बजे के आसपास काले रंग की कार में उसे अगवा कर लिया गया और एक कमरे में ले जाकर एक व्यक्ति ने उसके साथ बलात्कार किया।

उपनिरीक्षक जयलाल को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। एसपी अशोक कुमार ने मामला दर्ज होने की पुष्टि की है।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव की पत्नी मीरा वालिया को हाई कोर्ट का नोटिस

शिमला।। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के प्रधान निजी सचिव सुभाष आहलुवालिया की पत्नी मीरा वालिया, चीफ़ सेक्रेटरी हिमाचल प्रदेश और हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग पब्लिक सर्विस कमिशन को नोटिस जारी करके 12 सितंबर तक जवाब मांगा है। दरअसल एक प्रार्थी ने मीरा वालिया को पब्लिक सर्विस कमिशन की सदस्य नियुक्त करने को चुनौती दी है। आरोप है कि उन्हें नियुक्ति देने में नियमों को दरनिकार किया गया है

 

वालिया पर लग चुके हैं करप्शन के आरोप: प्रार्थी
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की बेंच ने हेमराज की तरफ से दायर याचिका की शुरुआती सुनवाई के दौरान यह आदेश जारी किया है। हेमराज ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव की पत्नी मीरा वालिया पर आय से अधिक सम्पत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लग चुके हैं। उन्होंने कहा कि इसे लेकर 22 मई 2008 को एफआईआर दर्ज हुई थी और स्पेशल जज शिमला के कोर्ट में चालान भी पेश हुआ था।

 

‘नियमों को दरकिनार करके दी गई नियुक्ति’
याचिका में कहा गया है कि कानून के प्रावधानों को दरकिनार रखकर वालिया को नियुक्ति दी गई है. याचिका मे कहा गया है कि लोक सेवा आयोग जैसे संघ के सम्माननीय पद पर ऐसे उम्मीदवार की नियुक्ति करनी होती है जोकि पूरी तरह से ईमानदार व सक्षम हो। ऐसे संघ में इस तरह के उम्मीदवार को लगाना किसी भी तरीके से न्यायोचित नहीं है। मीरा वालिया की नियुक्ति करने के लिए कोई भी कानूनी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।

 

कोर्ट ने कहा- जनहित का है मामला
कोर्ट के सामने राज्य सरकार की तरफ याचिका की मैंटेनबिलिटी पर सवाल उठाया गया। मगर हाईकोर्ट ने  स्पष्ट किया कि यह मामला जनहित से जुड़ा है और प्रार्थी को इस तरह के मामले को उठाने का अधिकार है क्योंकि वह विधि स्नातक है। उन्होंने कहा कि यह याचिका मैंटेनेबल है। गौरतलब है कि बीजेपी ने इस साल मई में मीरा वालिया की नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े किए थे।

मंडी: सरेआम किडनैप हुआ युवक, देखते रहे लोग

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, मंडी।। सोमवार को हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर में दिनदिहाड़े एक युवक को गाड़ी में ठूंसकर उसका अपहरण कर लिया गया। लोग देखते रहे और उन्होंने अपहरण की कोशिश कर रहे लोगों को रोकने की कोशिश नहीं की। वैसे कुछ ही देर में पुलिस ने अपहरणकर्ताओं को पकड़ लिया। घटना मंडी शहर में एचडीएफसी बैंक के बाहर की है। इससे शहर की मुख्य जगह पर सुरक्षा व्यवस्था के इंतज़ामों की भी पोल खुल गई।

 

यहां कुछ युवकों ने एक युवक को जबरदस्ती गाड़ी में डाला और उसे अपने साथ ले गए। यहां मौजूद लोगों से इसका वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। इसके बाद पुलिस को इसकी सूचना मिली और पुलिस ने तुरंत प्रभाव से कार्रवाही करते हुए मात्र 30 मिनट में सभी को अपनी हिरासत में ले लिया।

पुलिस ने किडनैप किए गए युवक अंशु ठाकुर की शिकायत पर मामला दर्ज करके हैप्पी ठाकुर नामक युवक को गिरफ्तार कर लिया है जबकि चालक रविंद्र और कुलदीप से पूछताछ की जा रही है। दो युवक इस मामले में फरार बताए जा रहे हैं।

 

मिली जानकारी के अनुसार बीती रात को यह सभी युवक एक साथ थे। अंशु ठाकुर और एक अन्य युवक रात को अलग हो गए। इनमें से एक युवक किसी को बताए बिना अपने घर चला गया। बाकी युवक अंशु ठाकुर को इसीलिए पकड़ कर ले जा रहे थे कि उससे यह पता कर सके कि जो घर जा चुका है वह कहां पर है। क्योंकि बाकी युवकों ने यह जानने का प्रयास नहीं किया कि वह युवक पहले ही घर पहुंच चुका है।

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पुलिस ने प्रथम दृष्टि में पाया है कि इन सभी ने नशा कर रखा था। अभी इन सभी का मेडिकल करवाया जा रहा है और उसके बाद ही आगामी कार्रवाही की जाएगी। एसपी अशोक कुमार ने कहा कि सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करने के बाद यह वीडियो वारयल हो गया और शहर में दिन दिहाड़े अपहरण की चर्चा होने लगी।

 

हालांकि पुलिस ने अब इसे पूरे मामले का सुलझा दिया है, मगर आम जनता का रवैया हैरान करने वाला भी है। साथ ही शहर के मुख्य स्थान पर सुरक्षा व्यवस्था का आलम ऐसा होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वैसे हो सकता है कि लोगों ने बचाने की कोशिश इसलिए न की हो क्योंकि जिस शख्स का अपहरण हो रहा था, वह मदद के लिए पुकार नहीं रहा था और अपरहरण करने की कोशिश करने वाले लोगों से बात कर रहा था। हो सकता है कि इसीलिए भ्रम की स्थिति पैदा हो गई हो।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

गुड़िया केस: थाने में आरोपी की हत्या पर फंसी शिमला पुलिस

शिमला।। कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस में पुलिस हिरासत के दौरान नेपाली मूल के आरोपी सूरज की हत्या के मामले में शिमला पुलिस फंसती नज़र आ रही है। पुलिस को सीबीआई के कहने पर कोटखाई थाने में संतरी रहे पुलिसकर्मी को सुरक्षा देनी पड़ी है। संतरी को सीबीआई असुरक्षित मान रही है क्योंकि उसके बयान से शिमला पुलिस की थ्योरी पर सवाल खड़े हो गए हैं।

 

ख़बर है कि संतरी ने कहा कि राजू नाम के आरोपी ने मेरे सामने सूरज की हत्या नहीं की। उसने कहा है कि थाना प्रभङारी सूरज को कहीं और ले गया था जिसके बाद लॉकअप के अंदर राजू अकेला था मैं उसकी सुरक्षा में तैनात था। उसने यह भी कहा कि सूरज को लॉकअप में वापस लाने से पहले उसकी ड्यूटी ऑफ हो गई थी।

 

इससे पुलिस की उस थ्योरी पर सवाल खड़े हो गए हैं जिसमें उसने दावा किया था कि राजू और सूरज को एक ही हवालात में बंद कर दिया था और इस बीच किसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हुई और राजू ने सूरज को पटक दिया। इससे चोट लगने और खून बहने से सूरज की मौत हो गई।

 

वैसे पुलिस की थ्योरी पर पहले ही सवाल उठ रहे थे। प्रश्न यह था कि जब छोटे से थाने में एक आरोपी ने दूसरे आरोपी की हत्या कर दी तो बाकी पुलिस अधिकारियों या कर्मियों को शोर क्यों नहीं सुनाई दिया। पोस्टमॉर्टम में मृतक आरोपी के शरीर पर पिटाई के निशान मिलने की रिपोर्ट्स भी सामने आई थी। मृतक के गुप्तांग पर भी चोट पाई गई थी। मगर अब संतरी के बयान के बाद पुलिस की पूरी थ्योरी और ज़्यादा शक के घेरे में है।

गुड़िया केस: सीबीआई ने तीन लोगों के घर की छापेमारी

शिमला।। शिमला के कोटखाई के चर्चित रेप ऐंड मर्डर केस में जांच का दायरा बढ़ाते हुए सीबीआई ने 1 आरोपी और 2 कथित संदिग्धों के घरों पर छापा मारा है। इनमें एक आशीष चौहान वही है जो मामले में आरोपी है और न्यायिक हिरासत में है जबकि दो कथित संदिग्ध वे बताए जा रहे हैं, जिनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर आशीष के साथ अपलोड की गई थी। सीबीआई ने हलाइला इलाके में ही यह कार्रवाई की है।

 

सीबीआई की यह छापेमारी यह अहम है क्योंकि इससे यह पता चलेगा कि इस मामले के सिलसिले में जिन लोगों के फोटो वायरल हुआ थे, उनका इस केस से कोई संबंध है या नहीं। फेसबुक पर वैसे तो कुछ और भी लोगों के फोटो शेयर किए गए थे मगर छापेमारी इन तीन लोगों के यहीं हुई है। यहां पर क्या बरामद किया गया या क्या कब्जे में लिया गया, यह साफ नहीं हो पाया है। मगर हो सकता है कि कुछ दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज को लिया हो। हालांकि चर्चा यह भी है कि कुछ के दांतों के नमूने भी लिए गए है।

सीबीआई (File Photo)

ग़ौरतलब है कि आशीष नाम के आरोपी को पुलिस ने 12 जुलाई को गिरफ्तार किया था। उसके बाद 5 और आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें से आरोपी नेपाली मूल के सूरज की कोटखाई थाने में हत्या हो गई थी। पुलिस ने राजू नाम के आरोपी पर हत्या का मामला दर्ज किया था मगर सीबीआई जांच में पुलिस की कहानी पर सवाल खड़े हो गए हैं।

 

इस बीच मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार गोकुल से भी सीबीआई ने इस मामले को लेकर पूछताछ होने की खबर है। दरअसल मुख्यमंत्री के फेसबुक पेज पर कुछ तस्वीरें पोस्ट हुई थीं जिनमें कहा गया था कि पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुछ लोगों को पकड़ा है। बाद में इन तस्वीरों को हटा लिया गया था। कहा जा रहा है कि इन तस्वीरों को देखकर लोगों को लगा कि यही आरोपी हैं, मगर बाद में जब पुलिस ने अन्य लोगों को पकड़ा तो इससे लोगों में गलत संदेश चला गया। हालाकि गोकुल बुटेल पहले ही साफ कर चुके हैं कि मुख्यमंत्री के पेज पर तस्वीरें अपलोड होने से उनका कोई नाता नहीं है।

एम्स को लेकर अनुराग ठाकुर ने जे.पी. नड्डा पर की टिप्पणी

बिलासपुर।। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की प्रतिद्वंद्विता किसी से छिपी नहीं है। मगर पिछले कुछ समय से हमीरपुर से बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर भी नड्डा से होड़ लगाते दिख रहे हैं। एम्स को लेकर पिछले कई भाषणों में दबे स्वर में उन्होंने यह जताने की कोशिश की थी कि हिमाचल को अगर एम्स मिला है तो वह नड्डा की वजह से नहीं, बल्कि मेरी वजह से मिला है। मगर अब उन्होंने खुलकर एम्स को लेकर नड्डा पर टिप्पणी की है। इससे पता चलता है कि बीजेपी में बड़े स्तर पर कितनी अंतर्कलह है।

 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने एम्स को लेकर बयान दिया था कि अभी निश्चित नहीं हुआ है कि एम्स कहां खुलेगा। इस पर अनुराग ने कहा है कि एम्स को बिलासपुर लाने में नड्डा का कोई योगदान नहीं है। उन्होंने कहा, ‘एम्स को बिलासपुर लाने में नड्डा का कोई योगदान नहीं है और न ही इसे यहां से ले जाने में होगा। एम्स हर हाल में हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में ही बनेगा। इसके लिए चाहे फिर किसी भी स्तर पर लड़ाई क्यों न लड़नी पड़े।’ अमर उजाला के मुताबिक अनुराग ने कहा कि मैं नहीं जानता कि केंद्रीय मंत्री ने किस मजबूरी में आकर बयान दिया कि एम्स के लिए अभी जगह पक्की नहीं हुई है।

 

बिलासपुर में अनुराग ठाकुर ने कहा कि साल 2014 में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल को एम्स का तोहफा दिया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने इसे टांडा या नेरचौक में खोलने की बात की थी। अनुराग ने कहा, ‘मेरे पत्र लिखने पर हुआ सब कुछ। मैंने तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्द्धन से मिलकर प्रदेश सरकार को नया स्थान तय करने बारे पत्र लिखवाया। मेरे ही प्रयास से ही एम्स हमीरपुर संसदीय क्षेत्र को मिला। इसके लिए बिलासपुर के कोठीपुरा में जगह का चयन किया गया।’

 

अनुराग ठाकुर ने कहा कि अगर कोठीपुरा में जमीन की कमी है तो प्रदेश और केंद्र सरकार को बात कर इसे दूर करना चाहिए। लोगों को भी इस बारे में पूरी जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह एम्स के जल्द से जल्द शिलान्यास की मांग करते हैं। उन्होंने कहा कि एम्स बनाने के लिए केंद्र के पास पैसे की कमी नहीं है।

कुल्लू: 13 साल के किशोर पर 5 साल की बच्ची के रेप का आरोप

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, कुल्लू।। घटना कुल्लू जिले की मणिकर्ण घाटी के पाथला गांव की है। यहां पर एक किशोर पर पांच साल की बच्ची का रेप का आरोप लगा है। आरोपी फरार बताया जा रहा है। बाया जा रहा है कि पीड़ित और आरोपी नेपाली मूल के हैं और काम की तलाश में आए परिजनों संग यहां पहुंचे हैं।

 

बताया जा रहा है कि परिजन जब पाथला गांव में सेब तोड़ रहे थे, उसी दौरान इस वारदात को अंजाम दिया गया। पीड़ित के  चाचा ने इसकी शिकायत जरी पुलिस को की । पुलिस मौके पर पहुंचकर मासूम को परिजनों के साथ क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू ला रही है।

 

एएसपी कुल्लू निश्चिंत सिंह नेगी ने बताया कि पुलिस दुष्कर्म की पीडित मासूम को मेडिकल जांच के लिए ला रही है और फरार किशोर की तलाश में भी जुट गई है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने प्राथमिक छानबीन में पाया है कि नेपाल से आए हुए लोग पाथला गांव में सेब ढुलाई का काम करते हैं और इस दौरान मौके का फायदा उठाकर 13 वर्षीय किशोर ने मासूम को हवस का शिकार बनाया है।

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उन्होंने बताया कि मेडिकल जांच के बाद दुष्कर्म का असल में पता चलेगा। फिलहाल पुलिस ने धारा 376 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

(यह एमबीएम न्यूज़ नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

कोटरोपी: मुख्यमंत्री के बेटे के लिए छाता पकड़े दिखे पुलिस अधिकारी

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे और प्रदेश यूथ कांग्रेस प्रेजिडेंट विक्रमादित्य सिंह नए विवाद में फंस गए हैं। वह कोटरोपी में हुए भूस्खलन वाली जगह पर गए थे और वहां जिस वक्त मुआयना कर रहे थे, कुछ तस्वीरों में एक पुलिस अधिकारी उनके लिए छाता पकड़कर खड़ा नज़र आ रहा है, जबकि वह कमर पर हाथ रखकर खड़े हैं। तस्वीर में देखा जा सकता है कि कुछ अन्य बिना छाते के भी हैं। प्रश्न उठाया जा रहा है कि अगर बारिश में छाते की ज़रूरत थी तो क्या उसे ख़ुद नहीं पकड़ा जा सकता था।

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ग़ौरतलब है कि भारत में नेता और बड़े पदाधिकारी इन छोटी बातों पर ध्यान नहीं देते। छाता तो फिर भी अलग बात है, कई नेता अपने सुरक्षा अधिकारियों से जूते उठवाने और जूते पहनवाने जैसा काम कर चुके हैं। मगर विदेशों में सारे काम दूसरों से करवाने के बजाय खुद करने को सम्मानजनक समझा जाता है और नेता भी इसमें यकीन रखते हैं। मगर भारत में ऐसा नहीं है।

नड्डा
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा के लिए छाता उठाकर चलता सुरक्षा अधिकारी। भारतीय नेताओं को अपने काम खुद करने की आदत नहीं है।

जब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत आए थे उन्होंने अपना छाता ख़ुद पकड़ा था। मगर विक्रमादित्य ने जो तस्वीरें शेयर की हैं, उनमें से कुछ में और लोग भी उनके लिए छाता पकड़े खड़े हैं। कहीं भी वह खुद छाता पकड़े नजर नहीं आए।

Obama holding umbrella
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा (File Pic) Courtesy: DD

कुछ लोगों का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री के बेटे से छाता खुद नहीं पकड़ा जाता वह इसके लिए निजी स्टाफ रख सकते हैं। उनका कहना है कि हिमाचल प्रदेश पुलिस का काम नेताओं के बच्चों के लिए छाता पकड़ना नहीं है, पुलिस तो राज्य की सेवा के लिए है, राज या सत्ता की नहीं।

हालांकि एक कॉमेंट का जवाब देते हुए विक्रमादित्य ने लिखा – दोस्त यह मेरा छाता नहीं था। वहां पर मौजूद पुलिसकर्मी का था जिसमें मैंने बारिश के कारण पनाह ली थी। मुझे अपना छाता उठाने में कोई समस्या नहीं है।

प्रशासन पर भी उठे सवाल
जानकारों का कहना है कि छाता उठाने की बात बाद की है, विक्रमादित्य सरकार के कोई मंत्री या प्रतिनिधि नहीं हैं कि वह इस तरह से किसी घटनास्थल का दौरा करें और इस मौके पर प्रशासनिक अमला उनके साथ रहे। वह चुने हुए जनप्रतिनिधि भी नहीं हैं। ऐसे में प्रशासन को बिना चुने हुए प्रतिनिधि के साथ इस तरह से आना लोक सेवकों के नियमों का उल्लंघन और अपमान है। जानकारों का कहना है कि प्रशासन को ध्यान रखना चाहिए कि वे कहीं किसी की निजी महत्वाकांक्षाओं को बढ़ावा तो नहीं दे रहे।

जो बात चर्चा का विषय बनी हुई है, वह है मुख्यमंत्री के बेटे के लिए पुलिस अधिकारी का छाता पकड़ना। क्या पुलिस के पास और काम नहीं कि वह हर छोटे-बड़े नेता के साथ कहीं भी चल सकती है? और अगर वे घटनास्थल पर ही थे तो क्या अपना काम छोड़ना चाहिए था? अगर किसी के घटनास्थल पर जाने से प्रशासन को अपना काम छोड़कर उनके साथ चलना पड़ता हो तो उसे भी सोचना चाहिए कि मेरा जाना ज़रूरी है या नहीं।

एम्स कहां खुलेगा, अभी यह निश्चित नहीं हुआ है: जे.पी. नड्डा

बिलासपुर।। हिमाचल में एम्स कहां बनेगा? इस सवाल को अगर पूछा जाए तो सबका जवाब यही होगा कि हिमाचल में एम्स का बनना बिलासपुर में प्रस्तावित है। प्रदेश सरकार और खुद मुख्यमंत्री वीरभद्र भी कह चुके हैं कि राज्य सरकार की तरफ से औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं, बस केंद्र की तरफ़ से देरी हो रही है। मगर केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा अब कहा है कि यह संस्थान कहां खुलेगा, यह निश्चित होना अभी बाकी है।

 

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश में एम्स खोलने का ऐलान किया था। इसके लिए हिमाचल सरकार ने बिलासपुर में जगह मुहैया करवाई थी। बाद में ख़बर आई कि वन विभाग की कुछ जमीन के लिए एनओसी लेने का काम अभी पूरा नहीं हो पाया है। मगर एम्स को लेकर ख़ूब राजनीतिक बयानबाजी हुई।

 

एक तरफ बीजेपी नेताओं का कनहा था कि राज्य सरकार की तरफ से जमीन पूरी न देने की वजह से निर्माण कार्य लटका है, जबकि मुख्यमंत्री वीरभद्र का कहना था कि नड्डा जानबूझकर काम को लटका रहे हैं ताकि शिलान्यास की पट्टिका में मेरा नाम न आ जाए। पिछले दिनों जब नड्डा से इस संबंध में सवाल किया गया था तो उन्होंने कहा था कि इस मामले में कुछ टेक्निकैलिटीज़ हैं।

 

मगर अब उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने हिमाचल के लिए एम्स दिया है और यह हिमाचल में खुलना तय है। मगर कहां खुलेगा यह निश्चित होना अभी बाकी है। उन्होंने यह भी कहा कि जनभावनाओं की कद्र करते हैं मगर इसे खोलने के स्थान का चुनाव करने का फ़ैसला करना मंत्रिमंडल के अधिकार क्षेत्र में है।

इससे पहले चर्चा थी कि 10 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिलासपुर आ रहे हैं और इस दौरान एम्स का शिलान्यास भी होगा और हिमाचल के चुनावी अभियान का आगाज भी। मगर नड्डा ने बयान ने भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।