गुड़िया केस: अनुराग ने CM और उनके परिवार पर लगाए गंभीर आरोप

शिमला।। गुड़िया केस को लेकर एक बार फिर राजनीति तेज हो गई है। सीबीआई द्वारा आईजी समेत 8 अधिकारियों को गिरफ्तार करने के बाद हमीरपुर से बीजेपी सांसद और हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के बड़े बेटे अनुराग ठाकुर ने अपने फेसबुक पेज पर वीडियो डाला है। इसमें उन्होंने मुख्यमत्री के परिवार और सरकार पर सबूत मिटाकर अमीर परिवार के बच्चों को बचाने का आरोप लगाया है। साथ ही मीडिया को कोसते हुए इस बात का श्रेय लेने की भी कोशिश की है कि मीडिया ने मुद्दा नहीं उठाया, जनता ने और विपक्ष ने सड़कों पर उतरकर और “मैंने लोकसभा में मामला उठाकर दबाव बनाया।”

 

पढ़ें, क्या कहा उन्होंने इस वीडियो में। साथ ही वीडियो भी देखें: “जिन लोगों ने यह काम किया, उसे प्रदेश की सरकार बचाने में लगी थी। प्रशासन की सहायता से सबूत मिटाने में लगी थी। न्याय तो गुड़िया को क्या दिलाना था, मुख्यमंत्री की पत्नी पीड़ित परिवार के पास जाकर चंद हजार रुपये देकर कहती हैं, कि सीबीआई जांच क्यों मांगते हो, प्रदेश पर विश्वास करो। लेकिन कल जो सीबीआई ने हिमाचल पुलिस के आईजी और अन्य पुलिसवालों ंको गिरफ्तार किया, यह अपने आप दिखाता है कि सीएम के परिवार से लेकर पूरी सरकार सबूत मिटाने और दबाव मिटाने में लगी थी, गुड़िया को न्याय नहीं बल्कि सबूत मिटाकर अमीर परिवारों के बच्चों को बचाने में लगी थी।”

“मीडिया उस समय भी शायद नहीं जागा था, यह तो आपने, आम जनता ने सड़क पर उतरकर, छात्र संगठनों ने सड़क पर उतरकर, विपक्ष ने सड़कों पर उतरकर और मैंने लोकसभा में इस विषय को उठाकर दबाव बनाकर सीबीआई जांच करवाई, फिर राष्ट्रीय मीडिया में आया। आईजी समेत अधिकारी गिरफ्तार होते हैं, देश का मीडिया नहीं जागता है, अब जागने की जरूरत है। जगाना पड़ेगा। इसे शेयर कीजिए और लोगों को जगाइए। वीरभद्र सिंह जो वापस मुख्यमंत्री बनने के लिए दिल्ली में लॉबीइंग कर रहे हैं, वह गुड़िया को न्याय दिलाने की कोशिश नहीं कर रहे। न्याय आपको और हमें दिलाना है और ऐसी सरकार से मुक्ति दिलानी है।”

साफ है कि आईजी समेत अन्य अधिकारियों की गिरफ्तारी से इस मामले में फिर से राजनीति तेज हो गई है। पिछले दिनों जब जनता इंसाफ की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही थी, उस वक्त भी बीजेपी ने इस आंदोलन को राजनीतिक दिशा दी थी। इससे सरकार को यह कहने का मौका मिला था कि आक्रोश जनता का नहीं है, बल्कि बीजेपी इसे भड़काने में लगी है। दरअसल बीजेपी के नेता को सचिवालय की तरफ पत्थर फेंकते हुए भी देखा गया था। बाद में अनुराग के छोटे भाई और पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल के छोटे बेटे अरुण धूमल ने 10 अगस्त को हमीरपुर में कानून व्यवस्था को  लेकर आक्रोश रैली का आयोजन किया था जिसमें उन्होंने ताला लगाकर अफसरों को ही बंधक बना दिया था(यहां क्लिक करके पढ़ें)।

पूछताछ के लिए पुलिसवालों को हिमाचल से बाहर ले गई CBI

शिमला।। कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस के सिलसिले में पकड़े गए नेपाली मूल के आरोपी की हिरासत में मौत को लेकर अरेस्ट किए गए पुलिसकर्मियों को सीबीआई प्रदेश से बाहर ले गई है। खबर है कि आईजी जहूर जैदी समेत 8 अफसरों को चंडीगढ़ या दिल्ली ले जाया गया है, जहां पर उनसे पूछताछ चल रही है।

 

इस बीच खबर यह भी आ रही है कि इनका लाइ डिकेक्टर और नार्को टेस्ट भी करवाया जा सकता है। हालांकि कानून के जानकार कहते हैं कि नार्को टेस्ट करवाना हो तो सीबीआई को इसके लिए कोर्ट से परमिशन मांगनी पड़ेगी।

 

बहरहाल, कोर्ट ने हिमाचल पुलिस के जिन अधिकारियों को 4 सितंबर तक हिरासत मे ंभेजा है, वे उस एसआईटी का हिस्सा थे जिसने कोटखाई केस को सुलझाने का दावा किया था। सीबीआई ने आईजी जहूर एच. जैदी, डीएसपी मनोज जोशी, एसआई राजिंदर सिंह (एसएचओ), एएसआई दीप चंद, हेड कॉन्स्टेबल सूरत सिंह, हेड कॉन्स्टेबल मोहन लाल, हेड कॉन्स्टेबल रफीक अली और कॉन्स्टेबल रणजीत सतरेता को गिरफ्तार किया है।

रिलायंस टावर लाइन: हाई कोर्ट सख्त, डीसी से मांगा शपथपत्र

बिलासपुर।। हिमाचल प्रदेश के चार जिलों से गुजरने वाली हाई टेंशन इलेट्रिक टावर लाइन की वजह से इसके नीचे के इलाकों में होने वाले धमाकों पर शिमला हाई कोर्ट ने संज्ञान ने लिया है। गौरतलब है कि कोल डैम से पंजाब और अन्य राज्यों की ओर बिजली ले जाने के लिए रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और उसकी सहयोगी कंपनी​ पार्वती कोल डैम ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (पीसीटीएल ) ने जब टावर लाइन बिछाए थे, तब बिलासपुर के लोगों ने कंपनी के बोर्ड आफ डायरेक्टर्स के खिलाफ पुलिस में दर्ज करवाई गई थी।

 

चार जिलों के याचिकाकर्ता किसानों ने टावर लाइन जागरूकता मंच के बैनर तले हाई कोर्ट में अपना पक्ष रखा है कि कोल डैम के निर्माण के साथ बिजली को पंजाब और अन्य राज्यों में ले जाने के लिए रिलायंस की सहयोगी कंपनी पीसीटीएल ने बिलासपुर, कुल्लू, मंडी और सोलन जिलों से होते हुए टावर लाइन बिछाई है। किसानों का आरोप है कि इस टावर लाइन के निर्माण के समय कंपनी ने किसानों को विश्वास में नहीं लिया और न ही सही मुआवजा दिया गया। कंपनी ने उनके सैकड़ों फलदार पेड़ भी काट डाले थे।

 

इन्ही अनियमितताओं का हवाला देते हुए ग्रामीणों​ ने 3 अलग-अलग एफआईआर सदर पुलिस थाना और बरमाणा पुलिस थाना में रिलायंस व पीसीटीएल के खिलाफ दर्ज करवाई। इनमें ग्रामीणों ने कहा कि कंपनी के पास इस टावर लाइन को बिछाने की उचित अनुमति नहीं है। न तो उसके पास विभाग का एनओसी है और न ही किसानों को मुआवदिया है, जो कि बड़ा गड़बड़झाला है।

 

इसमें लिखा गया है कि इस टावर लाइन की जद में आने वाले गांवों में बीते रसे से हाई वोल्टेज के कारण धमाके हो रहे हैं। कई घरों में आग लगने के मामले भी सामने आए हैं। जांच में क्या पाया गया था, इसकी रिपोर्ट इस आर्टिकल के आखिर में पढ़ी जा सकती है।

 

कंपनी ने हाई कोर्ट में तीनों FIR को खत्म करने की अपील की थी । इस अपील पर हाईकोर्ट के न्यायाधीश संदीप शर्मा ने डीसी बिलासपुर को आदेश दिए हैं कि 2015 में मजिस्ट्रेट की निगरानी में टावर लाइनों पर जो जांच रिपोर्ट बनाई गई थी, जिसमें टावर लाइन के निर्माण में कम्पनी द्वारा नियमों को ताक पर रखते हुए अनियमितताएं बरतने का मामला पाया गया था, उस जांच रिपोर्ट पर आज दिन तक सरकार द्वारा क्या कार्रवाई की गई है। हाई कोर्ट ने डीसी बिलासपुर से इस पर चार हफ्ते में शपथपत्र देकर जानकारी देने के आदेश दिए है।

गौरतलब है कि टावर लाइन की जद में आए गाँवों में आए दिन धमाके होने की खबरें भी खबरों में छपती रहीं हैं। इनमें बिलासपुर जिला के धौन कोठी गाँव में पशुशाला और लोगों के घरों में आग लगने के मामले भी सामने आए हैं।

पुलिसवालों को देना पड़ सकता है इन सवालों का जवाब

एमबीएम न्यूज नेवटवर्क, शिमला।। मंगलवार शाम सीबीआई ने आईजी समेत कुल 8 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर प्रदेश में बड़ी हलचल मचा दी। यह साफ हो चुका है कि गिरफ्तारियों की वजह गुड़िया गैंगरेप के आरोपी सूरज की हिरासत में हुई मौत सवालों के घेरे में है। सूरज के शव की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह सामने आया था कि पुलिस की कस्टडी में सिर पर चोट लगने, गला दबने के अलावा प्राइवेट पार्ट पर वार होने से हुई थी। बता दें कि सीबीआई ने सूरज का पोस्टमॉर्टम दूसरी बार करवाया था।

 

18 जुलाई की रात पुलिस कस्टडी में आरोपी सूरज की मौत हो गई थी। सवाल इस बात पर उठ रहा था कि क्या सूरज कोई ऐसा राज जानता है जिससे कोई रसूखदार सलाखों के पीछे पहुंच सकता है। निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर एक आईपीएस अधिकारी समेत गिरफ्तार पुलिस कर्मियों से सीबीआई क्या-क्या सवाल पूछ सकती है। जानें, क्या-क्या सवाल पूछे जा सकते हैं एसआईटी के सदस्यों से

– गुडिया गैंगरेप की जांच सही दिशा में आगे चल रही थी तो क्यों अचानक एसआईटी का गठन कर दिया गया। क्या गैंगरेप के किसी गुनाहगार को बचाने के लिए एसआईटी बनाई गई थी?

– सूरज की मौत की रात डयूटी पर संतरी के बयान पर सीबीआई का बड़ा सवाल यह रह सकता है कि सूरज की मौत का असल गुनाहगार कौन है?

– क्या कोटखाई थाना के तत्कालीन एसएचओ आरोपी को कहीं बाहर लेकर गया था या नहीं?

– अगर हत्यारा कोई पुलिस कर्मी ही था तो दूसरे आरोपी राजू के खिलाफ ही हत्या का मामला क्यों दर्ज कर दिया गया?

– आरोपी सूरज की हत्या अगर साजिश थी तो क्या पुलिस के अन्य आला अधिकारी भी इसमें शामिल थे?

– तूल पकड़ चुके गुडिय़ा गैंगरेप के मामले में राजू व सूरज को एक ही जगह क्यों रखा गया?

– अगर राजू ने ही सूरज की हत्या की है तो डयूटी पर तैनात पुलिस कर्मचारी कहां थे?

– क्या सूरज सरकारी गवाह बनने के लिए तैयार था?

– सूरज की हत्या व पुलिस थाना का रिकॉर्ड जलने में कोई संबंध है या नहीं?

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(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क का आर्टिकल है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित किया गया है)

खाई में गिरी HRTC की बस; 2 की मौत, 23 ज़ख्मी

चंबा।। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में एचआरटीसी की एक बस खाई में गिरने से 2 लोगों की मौत हगो गई जबकि 25 यात्री जख्मी हो गए। जिस वक्त यह हादसा हुआ, बस पर 45 यात्री सवार थे। मंगलवार देर रात करीब डेढ़ बजे यह हादसा हुआ। खाई में गिरते ही एक पेड़ से टकराकर बस रुक गई वरना नुकसान ज्यादा हो सकता था।

 

एचआरटीसी की बस (HP-68-4434) धर्मशाला जा रही थी। पठानकोट एनएच पर नैनी खड्ड के पास यह हादसे की शिकार हुई। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

मृतक आरोपी की पत्नी और दोस्त ने किए थे कुछ दावे

शिमला।। गुड़िया मामले में एसआईटी द्वारा पकड़े गए नेपाली मूल के आरोपी सूरज की हिरासत में मौत होने के मामले में सीबीआई ने हिमाचल के पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एसआईटी के 8 सदस्य शामिल हैं। यानी सीबीआई को पुलिस की उस थ्योरी पर शक है कि सूरज की हत्या हवालात में ही बंद अन्य आरोपी राजू ने कर दी। चूंकि पोस्टमॉर्टम में सूरज के शव पर पिटाई के निशान मिले थे और बाद में संतरी ने बयान दिया था कि मेरे सामने राजू द्वारा सूरज को पीटने की की कोई घटना नहीं, इससे भी संदेह यही हो रहा था कि कहीं सूरज की मौत पुलिसवालों की पिटाई से तो नहीं हो गई। अगर ऐसा हुआ है तो सवाल और भी गंभीर यह उठता है कि जब पुलिस पहले ही मामले को सुलझाने का दावा कर चुकी थी, उसके 5 दिन बाद सूरज को क्यों पीटा जा रहा था, क्यों टॉर्चर किया जा रहा था?

गुड़िया केस: CBI ने अरेस्ट किए IG जैदी समेत 8 पुलिसकर्मी

इन सवालों का जवाब कुछ दिन में आ जाएगा और सीबीआई शायद दूध का दूध और पानी का पानी कर दे। मगर पहले नज़र डालते हैं मृतक आरोपी सूरज की पत्नी और सूरज के दोस्त के बयानों पर, जिन्होंने कई सवाल खड़े कर दिए थे।

मारे गए आरोपी की पत्नी का ‘दैनिक भास्कर’ को सनसनीखेज बयान

 

सूरज के दोस्त ने भी उठाए थे सवाल
सूरज के दोस्त ने चौंकाने वाला बयान दिया था। उसने कहा था कि सूरज पर इस अपराध को स्वीकार करने के लिए बहुत प्रेशर था। उसने तो यहां तक कहा था कि एक पुलिसकर्मी ने सूरज की कनपटी पर बंदूक तान दी थी और पंचायत प्रधान ने थप्पड़ मार दिया था।

कोर्ट ने 4 सितंबर तक हिरासत में भेजे हिमाचल के पुलिसकर्मी

पंजाब केसरी में छपी खबर के मुताबिक सूरज के एक दोस्त ने दावा किया था कि ये लोग कह रहे थे कि अगर तुम केस को अपने सिर पर नहीं लोगे तो मार दिए जाओगे। सनसनीखेज बातें करने वाला दोस्त नेपाल का रहने वाला है। उसका कहना था कि सूरज ही उसे लेकर आया था। पहले वे दिल्ली में रहते थे। अखबार के मुताबिक सूरज के दोस्त को दुख है कि उसका इस दोस्त दुनिया में नहीं। मगर उसका कहना है कि मरने से पहले उसने पुलिस द्वारा की गई पूछताछ की कहानी बयां की थी।

कोर्ट ने 4 सितंबर तक हिरासत में भेजे हिमाचल के पुलिसकर्मी

एमबीएम न्यूज़ नेटवर्क, शिमला।। शिमला के कोटखाई में हुए रेप ऐंड मर्डर केस में पकड़े गए नेपाली मूल के आरोपी सूरज की हवालात में मौत के मामले में सीबीआई द्वारा अरेस्ट किए गए हिमाचल पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने इन 8 पुलिसकर्मियों को 4 सितंबर तक हिरासत में भेज दिया है।

 

कोर्ट में पेश होने के बाद आईजी के चेहरे पर कोई भी शिकन नहीं थी। संभवत: मुस्कुरा कर अपनी परेशानी को छिपाने की कोशिश की हो। सीबीआई के मुताबिक सूरज की पुलिस कस्टडी में हत्या के मामले में गिरफ्तारियां हुई हैं। सीबीआई ने प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर 19 जुलाई को दो अलग-अलग मामले दर्ज किए थे। पहला मामला गुडिया गैंगरेप से जुड़ा हुआ था, जबकि दूसरा सूरज की हत्या का था।

पढ़ें: गुड़िया केस में CBI ने अरेस्ट किए IG जैदी समेत 8 पुलिसकर्मी

माना जा रहा है कि हिमाचल पुलिस के इतिहास में यह सबसे शर्मनाक घटना हो सकती है, जब आईजी (इंस्पेक्टर जनरल) स्तर के अधिकारी को ही सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया हो। गौरतलब है कि सीबीआई की जांच को एसपी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में आगे बढ़ाया जा रहा है।

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साफ है कि जूनियर रैंक के अधिकारी पूछताछ करेंगे। उधर सीबीआई ने अपनी अधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में आईजी समेत 8 को 4 सितंबर तक पुलिस रिमांड मिलने की पुष्टि की है।

इससे पहले सीबीआई द्वारा अधिकारियों को गिरफ्तार किए जाने को लेकर जारी की गई प्रेस रिलीज़ की प्रतियां नीचे हैं:

गुड़िया मामले में पुलिस ने बहुत अच्छा काम किया था: वीरभद्र

शिमला।। कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस में सीबीआई द्वारा एसआईटी के अधिकारियों को गिरफ्तार करने से पूरी की पूरी जांच पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। इससे पहले मंगलवार को हिंदी अखबार ‘दैनिक जागरण’ में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का इंटरव्यू छपा है, जिसमें सीएम से सवाल किया गया था कि विपक्ष ने पुलिस की नाकामी को लॉ ऐंड ऑर्डर की नाकामी बताया है, इस पर क्या कहेंगे। इसके जवाब में मुख्यमंत्री का कहना था कि गुड़िया मामले में पुलिस ने बहुत अच्छा काम किया था और अगर मामला पुलिस के पास रहता तो अब तक जांच पूरी हो गई होती।

 

अखबार में छपा है कि लॉ ऐंड ऑर्डर पर विपक्ष के आरोपों को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हरियाणा में एक बार नहीं तीन-तीन बार कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ी हैं। मुङो बताइए, देश में ऐसा कौन सा राज्य है जहां पर अपराध नहीं होता। दूसरे राज्यों की तुलना में हमारे प्रदेश में अपराध बहुत कम है। गुड़िया मामले में पुलिस ने बहुत अच्छा काम किया था, लेकिन इस मामले को भाजपा ने राजनीतिक तौर पर भुनाने का काम किया। भाजपा के साथ-साथ सीपीएम ने भी राजनीति की है।’

 

आगे मुख्यमंत्री के हवाले से छपा है, ‘गुड़िया दुष्कर्म एवं हत्या मामले में उसी रात पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। यदि मामला पुलिस के पास रहता तो जांच अभी तक पूरी हो जानी थी। अब सब देख रहे हैं कि उच्च न्यायालय ने सीबीआई को फटकार लगाई है।’

 

यह बयान सुबह छपा है मगर शाम होते-होते तस्वीर बदल गई। सीबीआई ने कोटखाई केस में एसआईटी द्वारा पकड़े गए नेपाली मूल के आरोपी की हवालात में मौत के मामले में आईजी समेत 8 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया। इससे पुलिस की पूरी जांच पर ही प्रश्न उठ गए हैं।

 

इंटरव्यू के इस हिस्से को यहां क्लिक करके पढ़ा जा सकता है।

गुड़िया केस: CBI ने अरेस्ट किए IG जैदी समेत 8 पुलिसकर्मी

शिमला।। कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस की जांच कर रही केंद्रीय जांच एंजेसी सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की है। जानकारी मिली है कि गुड़िया केस के नाम से पहचाने जाने वाले इस मामले की शुरुआती जांच करने वाली हिमाचल प्रदेश पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) में शामिल रहे 8 पुलिसकर्मियों को सीबीआई ने अपनी हिरासत में लिया है। इनमें आईजी ज़हूर ज़ैदी भी शामिल हैं जो इस एसआईटी का नेतृत्व कर रहे थे। साथ ही डीएसपी मनोज कुमार जोशी भी शामिल हैं।

 

आईजी और डीएसपी के अलावा कोटखाई पुलिस थाना के तत्कालीन एसएचओ राजेंद्र सिंह, एएसआई दीप चंद शर्मा, हेड कॉन्स्टेबल सूरत सिंह, मोहन लाल, रफीक अली और कॉन्स्टेबल रंजीत सिंह को गिरफ्तार किया है। कोटखाई रेप ऐंड मर्डर मामले में पकड़े गए नेपाली मूल के आरोपी सूरज की जेल में हत्या के मामले में यह ऐक्शन लिया गया है।

पढ़ें: शिमला केस: जेल में मारे गए नेपाली आरोपी के दोस्त ने दिया सनसनीखेज बयान

गौरतलब है कि आरोपी सूरज की जेल में मौत हो गई थी। पुलिस ने इसका आरोप अन्य आरोपी राजू पर लगाया था। मगर जब मामला सीबीआई के पास पहुंचा तो थाने में तैनात संतरी ने गवाही दी थी कि मेरे सामने राजू ने सूरज को नहीं मारा। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी मृतक आरोपी के शरीर पर पिटाई के निशान पाए गए थे। सीबीआई ने सूरज के शव को दोबारा पोस्टमॉर्टम करवाया था (पढ़ें)। इसके बाद पुलिस की थ्योरी सवालों में थी।

पढ़ें: गुड़िया केस में संतरी बोला- मेरे सामने राजू ने सूरज को नहीं मारा

इस मामले में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा क्योंकि अरेस्ट होने से कोई दोषी नहीं बन जाता। फिर भी सवाल तो उठे ही हैं। साफ होता दिख रहा है कि इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में है। यानी अगर सीबीआई के हाथ मामला नहीं जाता तो नेपाली राजू की मौत रहस्य बनकर रह जाती। अब तो यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि पुलिस ने इस मामले में सही आरोपियों को पकड़ा है या नहीं।

पढ़ें: सीबीआई जांच की मांग करने पर लोगों को सीएम ने बताया होशियार

हिमाचल के पालमपुर में भी है डेरा सच्चा सौदा का एक ‘डेरा’

पालमपुर।। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के पालमपुर के पास चच्चियां नाम की जगह पर गुरमीत राम रहीम के डेरा सच्चा सौदा का एक डेरा है। यह चाय के बागानों के बीच 175 कनाल में फैला है और इस जमीन की कीमत ही 9 करोड़ है। सबसे खास बात यह है कि इस संपत्ति को 2007 में कांगड़ा के तत्कालीन डीसी भरत खेड़ा ने अवैध घोषित कर दिया था। दरअसल इस जमीन को खरीदने में हिमाचल प्रदेश भू अधिग्रहण अधिनियम 1968 की धारा 118 के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया था।

 

दरअसल हिमाचल प्रदेश में बाहरी लोग जमीन नहीं खरीद सकते। मगर आरोप है कि रेवेन्यू विभाग के कर्मचारियों से सांठगांठ करके इस ज़मीन को खरीद लिया गया था। वैसे यह डेरा राम रहीम का पसंदीदा रहा है। चर्चा है कि सिरसा के बाद किसी और डेरे में राम रहीम ने वक्त बिताया है तो वह यही है। पिछले दिनों बाबा ने जो फिल्में बनाईं, उनकी शूटिंग ज्यादातर पालमपुर के आसपास हुई। उस दौरान भई काफी समय राम रहीम यहां ठहरे थे।

हिमाचल: डेरा सच्चा सौदा नगरी में पुल‍िस तैनात

फिर वापस आते हैं डेरे की जमीन को लेकर हो रहे विवाद पर। तो इस डेरे की जमीन के सौदे को जब 2007 में डीसी ने अवैध बताया, डेरे वालों ने डिविज़नल कमिश्नर के पास अपील की मगर उन्होंने भी डीसी के फैसले को बरकरार रखा गया था। इसके बाद रिव्यू के लिए रेवेन्यू सेक्रेटरी के पास डेरे वालों ने अपील की। मामला चल रहा है। चूंकि पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने बाबा की सारी संपत्तियां अटैच करने का आदेश दिया है, यह डेरा भी अटैच हो सकता है।

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नीचे देखें बाबा के आश्रम की तस्वीरें। चूंकि अभी वहां पुलिस का पहरा है, इसलिए 2011 की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। अब वहां शायद और डिवेलपमेंट हो गया हो।:
Heaven

Dera Sacha Sauda, Chachian

Kiwi Fruit's Garden at Dera Sacha Sauda,Chachian

Way to heaven

Green Green

Fish Shaped Lake View

Heaven

Great View of Ashram