50 बीघा वनभूमि कब्ज़ाई, सेब बेचकर शिमला में खड़ी की 5 इमारतें

शिमला।। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला और अन्य इलाकों में सरकारी जमीन पर कब्जा करके सेब की बागवानी करने के खेल की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक परिवार ने कथित तौर पर 50 बीघा सरकारी वन भूमि कब्जाकर उसपर सेब के बागीचे तैयार कर दिए थे। यही नहीं, आरोप है कि इस जमीन पर इस परिवार ने सरकारी सब्सिडी पर ग्रेडिंग और पैकिंग सेंटर तक खोल दिए।

आरोप है कि इस तरह पूरे अवैध खेल से यह परिवार करोड़पति बन गया और इसने इस कमाई से शिमला में पांच बड़ी इमारतें खड़ी कर दीं। इन इमारतों की कीमत करोड़ों रुपये है। सोचिए, इतना बड़ा खेल हो गया और पूरा का पूरा प्रशासनिक अमला सोया रहा।

सेब के कारोबार से जेबें भरने के चक्कर में कुछ लोगों ने हिमाचल को खोखला कर दिया।

यह मामला भी सामने नहीं आता अगर हाई कोर्ट ने सरकारी जमीन पर अवैध ढंग से सेब के पेड़ लगाने के मामले में सख्ती न बरती होती। यह मामला शिमला के चैंथला गांव का है। हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त न्याय मित्र ने शुक्रवार को अदालत में एक लेटर दिया जिसके मुताबिक राज्सव और वन विभाग के अधिकारी अवैध कब्जाधारियों से मिले हुए हैं और अब भी ये लोग कब्जाधारियों की मदद कर रहे हैं।

न्याय मित्र के लेटर में किस-किस का नाम है और किसने ये जमीन कब्जाई है, जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें और पेज नंबर 3 पढ़ें।

Reference of letter handed over by Amicus Curiae

यही ऐसा इकलौता मामला नहीं है, शिमला के बाघी, चिड़गांव, जुब्बल और रतनाड़ी के साथ-साथ कुल्लू जिले के दशाल में भी ऐसा खेल हुआ है। यहां पर बड़े-बड़े कब्जाधारी अब भी कार्रवाई से बचे हुए हैं। रसूखदारों के खिलाफ कार्रवाई न होने से खफा हाई कोर्ट ने अब कब्जे हटाने का जिम्मा सेना को सौंपा है। अधिकारी के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

रसूखदारों से कब्जे नहीं छुड़ा पाई सरकार, हाई कोर्ट ने सेना को सौंपा जिम्मा

कम जगह में कई फल उगाकर पिता-पुत्र की जोड़ी ने पेश की मिसाल

प्रशांत सेहता।। एक तरफ राज्य के युवा नौकरी की तलाश में बाहरी राज्यों की तरफ पलायन कर रहे है। वहीं कुछ ऐसे युवा बागवान है जो बागवानी के क्षेत्र में अपनी मेहनत, लगन और हुनर के दम पर अपनी अलग पहचान बना रहे है। नावर क्षेत्र के कशैणी गांव से संबंध रखने वाले युवा बागवान कृष जनारथा ने भी विरासत में मिली बागवानी को आधुनिक ढंग से अपनाकर अनपी विशेष पहचान बनाई है।

कृष को बागवानी पिता प्रेम जनारथा से विरासत में मिली है। लेकिन चार साल पहले जब उन्होने 21 बरस की उम्र में बागीचे संभाले थे तब वह बिल्कुल खस्ताहालत में थे। इस हालत में साठ साल पुराने बागीचे से पैदावार लेना मुश्किल था। क्वॉलिटी फ्रूट लेना इससे भी कठिन। लिहाज़ा कृष ने आधुनिक बागवानी की तरफ कदम बढ़ाया।

उन्होने पुराने पौधों को उखाड़कर उनकी जगह क्लोनल रूटस्टॉक लगाए और नए पौधों को टाॅप ग्राॅफ्ट कर उन्हें आधुनिक स्पर किस्मों में बदल दिया। उन्होने पिछले साल इटली से एम 9 रूटस्टाक पर सेब की किंग राॅट और गाला किस्मों के दो सौ पौधे मगवाकर अपने बागीचे में लगाए। इन पौधों पर इस बार फसल भी तैयार हुई है। आधुनिक तकनीक पर आधारित यह बागीचा नावर क्षेत्र के बागवानों में चर्चा का विषय बना हुआ है। गांव व आस पास के क्षेत्र के युवा बागवान कृष की मेहनत और लगन से प्रभावित होकर उनसे आधुनिक बागवानी के गुर सिखने उनके बगीचे पहुंच रहे हैं।

कृष के बागीचे में सेब की 120 से अधिक किस्में लगी हुई है। इनमें से राॅयल डेलिश्यिस के अलावा विदेशों से आयातित किंग राॅट, स्कारलेट स्पर टू, जैरोमाइन, रेडविलौक्स, सुपर चीफ़, ग्रेनी स्मिथ, गाला और फ्यूजी किस्मों पर व्यावसायिक तौर पर काम कर रहे है।

बागीचे में एक साथ कई तरह के फलदार पौधे लगे हैं।

कृष को रिपलंटेशन वाली जगहों पर सेब के नए बागीचे तैयार करने में कई दिक्कते पेश आई। सबसे ज्यादा नुकसान नए पौधों की जडों पर फंगस लगने से हुआ जिसके चलते पौधों में जड़ सड़न से कई पौधे मर गए या ठीक से ग्रोथ नहीं ले पाए। आधुनिक तरीकों और रिप्लांटेशन वाली जगहों के लिए उप्युक्त रूटस्टाॅक से उन्होने इस समस्या पर काबु कर लिया।

यंग एंड युनाईटेड ग्रोवर्स एस्सोसिएशन के वित्त सचिव कृष जनारथा का कहना है कि रूटस्टाक पर स्पर किस्में लगाने से पुरानी किस्मों के मुकाबले जल्दी और बेहतर क्वालिटी का उत्पादन लिया जा सकता है। उनका मानना है कि आधुनिक बागवानी कर बागीचों में अलग अलग किस्मों के फल लगाने से भी आमद में दो से तीन गुणा इज़ाफा किया जा सकता है। उनके बागीचे अभी सैंपल दे रहे है लेकिन आमद पुराने बागीचों के जितनी ही है। आगामी तीन से चार सालों में यह बढ़कर दो से तीन गुणा होने की उम्मीद है। कृष पिता प्रेम जनारथा और माता लीला जनारथा को अपनी सफलता का श्रेय देते हैं।

नाशपाती, प्लम और चेरी के बागीचे भी तैयार
कृष ने पुराने बागीचों की जगह पर नाशपाती, चेरी और प्लम के नए बागीचे तैयार किए हैं। यह सभी किस्में विदेशों से मंगवाई गई है और इनमें सैंपल आ गया है। कृष के बागीचे में इन फलों के 1500 से अधिक पौधे तैयार है। इन फलों को भी आधुनिक तकनीक के ज़रिए उच्च सघनता पर लगाया गया है, ताकि कम ज़मीन से अधिक पैदावार ली जा सके। इस समय उनके बागीचे से नाशपाती की 10, प्लम की चार और चेरी की 6 किस्मों का उत्पादन हो रहा है।

(लेखक शिमला के जुब्बल के रहने वाले हैं। बाग़वानी और लेखन में उनकी रुचि है। उनसे prashantsehta89 @ gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

केंद्र से वापस लौट रहे हैं संजय कुंडू, हिमाचल में मिलेगी अहम ज़िम्मेदारी

शिमला।। दो साल तक केंद्र में डेप्युटेशन पर रहने के बाद 1989 के आईपीएस ऑफिसर संजय कुंडू हिमाचल प्रदेश लौट रहे हैं। वह केंद्र में जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय में बतौर जॉइंट सेक्रेटरी महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी संभाल रहे हैं।

जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी भी कुंडू काम से प्रभावित थे और वह चाह रहे थे कि कुंडू केंद्र में ज़िम्मेदारी संभालते रहें। मगर मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने नितिन गडकरी से मुलाकात की थी। चर्चा है कि इसी दौरान जयराम ठाकुर के आग्रह पर कुंडू को वापस हिमाचल प्रदेश भेजा जा रहा है।

कौन हैं संजय कुंडू
संजय कुंडू तेज़-तर्रार अधिकारी माने जाते हैं। फिलहाल संजय कुंडू जल संसाधन और नदी विकास मंत्रालय में जॉइंट सेक्रेटरी (पॉलिसी ऐंड प्लैनिंग) हैं। वह ब्रह्मपुत्र बोर्ड और पेनिंसुलर रिवर्स का अतिरिक्त प्रभार भी संभाले हुए हैं।

1989 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के इस अधिकारी की वापसी की खबर से प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में खासी हलचल मची हुई है। माना जा रहा है कि उन्हें सरकार में अहम ज़िम्मेदारी सौंपी जा सकती है। पिछले दिनों चर्चा थी कि उन्हें डीजीपी भी बनाया जा सकता है।

दिल्ली से हिमाचल के लिए 1131 करोड़ लेकर लौट रहे सीएम जयराम

नई दिल्ली।। देश की राजधानी दिल्ली की यात्रा पर गए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर प्रदेश के लिए 1131 करोड़ रुपये लेकर आ रहे हैं।

केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के लिए पिछले महीने मंजूर की गई 4751 करोड़ रुपये के प्रॉजेक्ट की पहली किश्त अप्रूव कर दी है। किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के तहत हिमाचल प्रदेश को पहली किश्त के रूप में 708 करोड़ रुपये मंजूर किए गए है।

ग़ौरतलब है कि पिछले महीने ही जयराम सरकार ने केद्र के सामने 4751 करोड़ की परियोजनाओं का खाका रखा था और उसे मंजूरी भी मिली थी। अभी जारी हुई पहली किश्त के तहत सिंचाई के लिए चेक डैम, नहरें और तालाब आदि बनाए जाएंगे।

केंद्र सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है और इसी के तहत हिमाचल प्रदेश के किसानों को सिंचाई के लिए खास सुविधाएं मिलेंगी।

मशरूम के लिए 423 करोड़
वित्त मंत्रालय में हुई एक बैठक के बाद हिमाचल प्रदेश के लिए एक और अच्छी खबर आई है। राज्य में मशरूम का उत्पादन बढ़ाने के लिए 423 करोड़ रुपये मंज़ूर हुए हैं।

यह रकम एशियन डिवेलपमेंट बैंक फंड करेगा। यह राशि भी किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के तहत मंजूर हुई है।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में अभी मशरूम का अच्छा-खासा उत्पादन हो रहा है। इसके प्रोत्साहन के से न सिर्फ हिमाचल में स्वरोज़गार के नए अवसर खुलेंगे बल्कि प्रदेश की भी आय बढ़ेगी।

पुलिस ने ही कथित तौर पर वायरल किया नशा करते पकड़े बच्चों का वीडियो

कुल्लू।। पिछले दिनों कुल्लू में कुछ लोगों ने कथित तौर पर नशा करती एक लड़की को पकड़कर पूछताछ की थी और वीडियो वायरल कर दिया था। उस समय ‘इन हिमाचल’ ने मांग की थी कि इस तरह से नाबालिग बच्चों का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। मगर इस बात को कथित तौर पर नशा करते हुए पकड़े गए बच्चों का वीडियो खुद ही पुलिस विभाग ने वायरल कर दिया है।

इस वीडियो में तीन लड़के और एक लड़की है और वे सभी नाबालिग हैं। वीडियो सार्वजनिक हो जाने के बाद लड़की मां ने कथित तौर पर खुद पर मिट्टी का तेल छिड़कर आग लगाने की कोशिश भी की जिसे पड़ोसियों और परिजनों ने रोका। लड़की की मां का कहना था कि मेरी बेटी की जिंदगी पुलिस ने वीडियो शेयर करके बर्बाद कर दी है।

इस वीडियो में कथित तौर पर कुछ पुलिसकर्मी इन बच्चों से पूछताछ करते नजर आ रहे हैं और यह सब कार्यालय में हो रहा है। एसपी ने संबंधित ब्रांच के पुलिसकर्मियों से इस संबंध में पूछताछ की है मगर खबर है कि इस संबंध में संतोषजनक जवाब न मिलने पर जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो सकती है।

इस बीच एसपी शालिनी अग्निहोत्री ने मामले की जांच की बात कही है। उन्होंने कहा है कि वीडियो सार्वजनिक करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एसपी ने लोगों से अपील की है कि कहीं किसी को नशा करते हुए देखें तो पुलिस को जानकारी दें, उनके वीडियो न बनाएं।

खली: अग्निहोत्री कर रहे विरोध, कौल खिंचवा रहे फोटो

मंडी।। ‘द ग्रेट खली’ नाम से पहचाने जाने वाले डब्ल्यूडब्ल्यूई के पूर्व रेसलर दलीप सिंह की कंपनी द्वारा हिमाचल में करवाए जा रहे रेसलिंग इवेंट्स को लेकर राजनीतिक का दौर जारी है।

जहां इस इवेंट को लेकर विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने सरकार पर सवालों की बौछार की थी, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेताओं ने खुद को इस बहस से दूर रखा। अब वरिष्ठ कांग्रेस नेता ठाकुर कौल सिंह की एक तस्वीर सामने आई है, जिसमें वह ‘खली’ और राखी सावंत के साथ नजर आ रहे हैं।

गौरतलब है कि मुकेश अग्निहोत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए इस आयोजन के पीछे की मंशा पर सवाल उठाए थे। मगर जिस दौरान वह इस तरह के हमले कर रहे थे, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू, पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं की इस संबंध में कोई टिप्पणी सामने नहीं आई थी।

सोशल मीडिया पर शेयर तस्वीर।

अब कौल सिंह ठाकुर की एक तस्वीर सामने आई है जिसमें वह खली, राखी सावंत और एक अन्य शख्स के साथ खड़े हैं। यह तस्वीर मंडी की बताई जा रही है जहां पर खली से कौल सिंह ने न सिर्फ मुलाकात की थी बल्कि बताया जा रहा है कि दोनों ने काफी समय साथ भी बिताया था।

खली के साथ कांग्रेस नेता कौल सिंह की तस्वीर सामने आने पर भारतीय जनता पार्टी भी हमलावर हो गई है। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर यह कहते हुए शेयर की जा रही है कि अगर कांग्रेस को खली या राखी सावंत आदि से इतनी ही दिक्कत है तो उसके नेता किस आधार पर इनके साथ फोटो खिंचवा रहे हैं।

गौरतलब है कि कई मुद्दों पर हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बयान एक-दूसरे से अलग होते रहे हैं। ऐसे में खली की फाइट को लेकर उठे विवाद में भी कांग्रेस के नेताओं के बीच तारतम्य न होने के संकेत उभरकर सामने आए हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि खली के विरोध को लेकर अग्निहोत्री अकेले पड़ गए हैं क्योंकि अन्य किसी बड़े कांग्रेस नेता ने इस मामले पर खुलकर कुछ नहीं कहा है।

रोते हुए बोले गुड़िया के पिता- मेरी बेटी को गरीब होने की सजा मिली

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, शिमला।। शिमला के बहुचर्चित कोटखाई गुड़िया रेप और हत्या के मामले को उठे आज एक साल पूरा हो गया है। आज ही के दिन ठीक एक साल पहले दांदी के जंगल में गुड़िया का शव मिला था। मगर एक साल बीत जाने के बाद भी अभी तक कानून प्रक्रिया चल रही है और गुड़िया के परिजन इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं।

आज शिमला के रिज मैदान में गुड़िया के पिता ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी और उन्होंने सीबीआई द्वारा अब तक की जांच पर असंतोष जताया। गौरतलब है कि पहले जहां इस मामले को गैंगरेप माना जा रहा था, मगर बाद में सीबीआई ने इसमें सिर्फ एक चरानी को पकड़ा है और उसे ही आरोपी बनाया है।

गुड़िया के पिता ने कहा कि गुड़िया को गरीब होने की सजा मिली है। उन्होंने कहा, “वह गरीब घर में पैदा हुई थी और पैसे के बल पर इस मामले को दबा दिया गया। यदि वह किसी विधायक की बेटी होती, तो पता नहीं आज क्या होता।”

रुंधे हुए गले से गुड़िया के पिता ने कहा कि पहले पुलिस ने इस मामले में लापरवाही बरती और अब सीबीआई की जांच भी गले नहीं उतर रही। उन्होंने कहा कि सीबीआई जिस आरोपी को इस मामले का सूत्रधार बता रही है, वह अकेला इस वारदात को अंजाम नहीं दे सकता था।

6 जुलाई 2017 को यहीं मिला था गुड़िया का शव

सीबीआई पर उठाए सवाल
गुड़िया के पिता ने पूछा कि पेशे से चरानी आरोपी अनिल 9 माह तक सीबीआई से कैसे बच सकता था और इससे भी बड़ी बात कि गुड़िया के लापता होने के बाद अढ़ाई दिन तक उसने शव को कहां छिपा कर रखा होगा। उन्होंने कहा कि आरोपी चरानी अनिल की गुड़िया के शव को ठिकाने लगाने में संलिप्तता हो सकती है, लेकिन वह यह मानने को तैयार नहीं हैं कि उसने बलात्कार किया होगा और अकेले पूरी वारदात को अंजाम दिया होगा।

सीबीआई जांच पर सवाल उठाते हुए गुड़िया के पिता ने आगे कहा कि जिस दिन गुड़िया गायब हुई उस दिन वह परिवार के सदस्यों सहित दांदी के जंगल में बेटी को तलाशने गए और वहां मौजूद चरानियों व खच्चर वालों से बात की। लेकिन उस दौरान नीलू चरानी वहां नहीं था। उन्होंने कहा कि गुडिया के शव में मिट्टी का एक कण तक नहीं लगा था। शव पूरी तरह से साफ सुथरा था तथा कपड़े साथ पड़े थे। दरिंदों ने शव में एक भी कपड़ा नहीं रखा था। उन्होंने यह भी सवाल किया कि गुड़िया की जुराबें और दो क्लिप गायब क्यों थे।

गुड़िया के पिता ने कहा कि इस मामले में न्याय मिलना चाहिए और इस मामले की दोबारा जांच होनी चाहिए। दरिंदों को किसी भी सूरत में फांसी से कम सजा नहीं मिलनी चाहिए।

गुड़िया को इंसाफ दिलाने के लिए पूरे प्रदेश में प्रदर्शन हुए थे।

क्या है गुड़िया मामला
गौरतलब है कि 6 जुलाई 2017 को कोटखाई के जंगल में गुड़िया का शव निर्वस्त्र पाया गया था। दुष्कर्म के बाद गुड़िया को बड़ी बर्बरता से मौत के घाट उतार दिया गया था। गुड़िया दसवीं कक्षा की छात्रा थी और 4 जुलाई को रहस्यमयी हालात में गायब हो गई थी।

इस मामले की प्रारंभिक जांच हिमाचल पुलिस की एसआईटी ने की और 12 जुलाई 2017 को छह लोगों को आरोपी बताकर गिरफ्तार कर लिया। 18 जुलाई की मध्यरात्रि एक कथित आरोपी सूरज की कोटखाई थाने के लाॅकअप में हत्या हो गई है। पुलिस पर साक्ष्य मिटाने के लिए सूरज की सुनियोजित हत्या करने का आरोप लगा। अगले दिन प्रदेश हाईकोर्ट ने गुड़िया व सूरज मामलों की जांच सीबीआई के सुपूर्द कर दी।

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सूरज लाॅकअप केस में सीबीआई ने 29 अगस्त 2017 को एसआईटी के प्रमुख व पुलिस के आईजी जहूर जैदी सहित 9 पुलिस वालों को गिरफतार किया। 16 नवंबर 2017 को शिमला के पुर्व एसपी डीडब्लयू नेगी गिरफतार हुए। दूसरी तरफ गुड़िया प्रकरण में सीबीआई ने करीब 9 माह की पडताल के बाद 13 अप्रैल 2018 को पेशे से चिरानी अनिल को शिमला जिले के कोटखाई से दबोच कर गुड़िया मामले को सुलझाने का दावा किया।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

अध्यापकों ने हाजिरी से बचने के लिए खराब कर दीं बायोमीट्रिक मशीनें?

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के कुछ स्कूलों में अध्यापकों और अन्य कर्मचारियों की हाजिरी के लगाई गईं बहुत सी बायोमीट्रिक मशीनें कुछ ही समय में खराब हो गई हैं।

ट्रायल के आधार पर लगाई गई इन मशीनों के खराब होने के कारणों की शुरुआती जांच के बाद शक जताया जा रहा है कि इसे स्कूलों के स्टाफ ने ही जानबूझकर छेड़छाड़ की है ताकि वे रोज समय का लेखा-जोखा रखने वाले इस सिस्टम पर हाजिरी लगाने से बच सकें। हालांकि शिक्षा निदेशालय के सूत्रों के मुताबिक यह सिर्फ एक संभावना है और असल बात का पता जांच के बाद ही चलेगा।

बता दें कि कुछ स्कूलों में इन मशीनों को इसलिए लगाया गया था कि गैरहाजिर रहने वाले या समय पर न आने वाले अध्यापकों पर लगाम लगाई जा सके। मगर इनके खराब होने के कारण इस ट्रायल को आगे बढ़ाने पर भी सवाल खड़ा हो गया है।

आगे ऐसी लगभग 10 हजार मशीनें खरीदी जानी थीं मगर उनपर रोक लग गई है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों से खराब हुई मशीनों को मंगवाकर कंपनी को सौंप दिया है ताकि वह इनके खराब होने के कारणों की जांच कर सके। लेकिन सवाल उठता है कि अगर ये मशीनें तकनीकी खराबी या घटिया क्वॉलिटी के कारण खराब हुई होंगी तो क्या कंपनी इस बात को स्वीकार करेगी?

मान लें कि खराब क्वॉलिटी के कारण ये मशीनें खराब हुई हों और कंपनी अपने सिर से बला टालने के लिए यह कहे कि अध्यापकों ने छेड़छाड़ की थी तो निदेशालय के पास यह पता करने का क्या तरीका होगा कि कंपनी सच बोल रही है या झूठ। बेहतर होता जांच किसी तटस्थ एजेंसी को सौंपी जाती।

पिता ने कथित तौर पर नौ साल की बेटी के साथ किया रेप

हमीरपुर।। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक शख्स पर अपनी नौ साल की बेटी के साथ बलात्कार करने का आरोप लगा है। पुलिस ने बच्ची की मां की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है।

जानकारी के मुताबिक नादौन इलाके के तहत आने वाले एक गांव में कथित तौर पर यह घटना हुई है। लड़की की मां ने  पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है कि कथित तौर पर तीन जुलाई को यह वारदात हुई।

डीएसपी रेणु शर्मा के अनुसार लड़की की मां ने कहा है कि 3 जुलाई को वह कुछ सामान लेने के लिए बाजार गई थी, उसी समय उसके पति ने बेटी के साथ गलत हरकत को अंजाम दिया।

महिला का दावा है कि शाम को जब वह घर लौटी तो बेटी ने उसे पूरी बात बताई। इसके बाद महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने मामला दर्ज करके छानबीन शुरू कर दी है।

आनंद शर्मा और विप्लव ठाकुर से हिसाब क्यों नहीं मांग रही कांग्रेस?

आई.एस. ठाकुर।। 2019 का चुनाव नजदीक आते देख कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी के सांसदों को घेरने की रणनीति बनाई है। वे भारतीय जनता पार्टी के सांसदों से पिछला चार साल का हिसाब मांग रहे हैं कि आपने क्या किया। चलिए, राजनीति में यह घेराव, विरोध, नारेबाजी चलती है। मगर समय आ गया है जब इन पारंपरिक और अप्रासंगिक हो चुके तरीकों से राजनेताओं को किनारा कर लेना चाहिए।

ऐसा इसलिए क्योंकि सांसदों से हिसाब तो तब मांगा जाए जब उनके द्वारा किए गए कामों की जानकारी गोपनीय हो और वे देने से इनकार कर रहे हों। लेकिन आज के दौर में सांसदों की हाजिरी, उनके द्वारा पूछे गए सवाल, उनके द्वारा पेश किए गए बिल तक की जानकारी राज्यसभा और लोकसभा की वेबसाइट या अन्य डेटा प्रोवाइडर वेबसाइट्स मिल जाती है।

लॉजिक क्या है?
रही बात कि सांसद निधि इन सांसदों ने कहां खर्च की, इसका हिसाब लेना भी मुश्किल नहीं। पहली बात तो यह कि आजकल ट्रेंड चला है कि सांसद पहले ही अपने खर्च की जानकारी सार्वजनिक कर रहे हैं कि कहां उन्होंने कितने पैसे खर्च किए। उदाहरण के लिए मंडी के ही सांसद ने अपनी सांसद निधि के व्यय की जानकारी सार्वजनिक कर दी थी।

बावजूद उसके कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उनके कार्यालय के बाहर हंगामा किया और घर का भी घेराव करने की कोशिश की। इसी तरह हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर के व्यय की जानकारी सार्वजनिक थी, फिर भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके घर को घेरने की कोशिश की और जब पुलिस ने रोका तो कहने लगे कि पुलिस ने धारा 144 लगाकर गलत किया।

घर का घेराव गलत
पहली बात तो यह कि सब जानकारियां और जवाब सार्वजनिक होने के बावजूद हिसाब मांगने के नाम पर हो-हल्ला करना दिखाता है कि राजनीतिक पार्टियों के नेतृत्व के पास विजन नहीं है। कार्यकर्ताओं को एकजुट करना है तो कोई और आयोजन करें, निराधार मुद्दे पर प्रदर्शन करके और अखबारों पर एक खबर लगवाने से कुछ नहीं होगा।

अब वह दौर नहीं रहा कि जनता अखबारों के आधार पर अपनी राय बनाया करती थी। हिमाचल में अब साक्षरता के साथ लोगों की समझ और जागरूकता भी बढ़ी है। वे जानते हैं कि कौन सी पार्टी कौन सा धरना या प्रदर्शन किस मकसद से कर रही है। ऊपर से घर का घेराव करना गलत है।

नेताओं और जन प्रतिनिधियों से कड़े सवाल पूछे जाने चाहिए। उनसे पूछा जाना चाहिए कि भई, आप जो बड़ी-बड़ी बातें करते थे, उन्हें जब चार साल में पूरा नहीं कर पाए तो अब कब करोगे। लेकिन इसके लिए सार्वजनिक मंचों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। कार्यालय तक तो ठीक, मगर घर पर जाकर प्रदर्शन करना गलत है।

दरअसल हिमाचल प्रदेश में क्या, देश में कहीं भी ऐसी परंपरा नहीं रही है कि राजनीति को किसी के घर तक ले जाया जाए। सरकारी आवासों पर जाकर सांकेतिक विरोध तो चलता था, मगर गांव के पैतृक घरों में जाकर राजनीति हुड़दंग की पंरपरा नई है। कहने का मतलब यह है कि जन प्रतिनिधियों आदि को जहां सरकारी आवास मिलते हैं, उस एरिया में सुरक्षा होती है। मगर नेताओं के जो घर गांव-देहात में हैं, वहां पर चौकीदार तक की व्यवस्था नहीं है।

अगर आप गांव में पैतृक घरों में जाकर राजनीतिक प्रदर्शनों की परंपरा शुरू करेंगे तो कल को आपकी और पुलिस की अनुपस्थिति में कोई भी वहां पहुंच सकता है। इससे नेता से नाराजगी के शिकार उनके परिजन हो सकते हैं। वे बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे हो सकते हैं जिनका आपके नेता या राजनीति से कोई संबंध नहीं है।

फेसबुक पर ही एक मित्र ने इस संबंध में टिप्पणी की थी, जिन्होंने लिखा था कि इस तरह की पंरपरा गलत है क्योंकि कल को आप भी इसके शिकार हो सकते हैं। विरोधी पार्टी के लोग जब आपके घर पर आकर हंगामा करें तो आपके परिजन परेशान होंगे या नहीं?

राज्यसभा सांसदों से हिसाब क्यों नहीं
कांग्रेस के कार्यकर्ता लोकसभा के सांसदों से तो हिसाब मांग रहे हैं मगर राज्यसभा के सांसदों से नहीं। इसलिए क्योंकि लोकसभा की चारों सीटों पर भाजपा के सांसद हैं जबकि राज्यसभा की तीन में से दो सीटों पर कांग्रेस के सांसद हैं। इसीलिए कांग्रेस कार्यकर्ता जेपी नड्डा से भी हिसाब नहीं मांग रहे क्योंकि ऐसा किया तो आनंद शर्मा और विप्लव ठाकुर से भी हिसाब मांगना पड़ेगा।

बता दें कि राज्यसभा सांसदों के पास भी सांसद निधि खर्च करने का अधिकार है। आनंद शर्मा 3 अप्रैल 2016 से हिमाचल से राज्यसभा के लिए चुने गए हैं जबकि विप्लव ठाकुर 10 अप्रैल 2014 से सांसद हैं। यानी आनंद शर्मा 2 साल और विप्लव 4 साल से सांसद हैं।

क्या इन सांसदों से पूछा नहीं जाना चाहिए कि आपने हिमाचल के संबंध में कितने सवाल पूछे, कितनी सांसद निधि कहां खर्च की और हिमाचल की जनता का वहां पर क्या प्रतिनिधित्व किया? बात यह नहीं है कि चुनाव तो लोकसभा के हैं, इसलिए क्यों राज्यसभा वालों से पूछा जाए। बात यह है कि आप ये सवाल शायद इसीलिए उठा रहे हैं न कि हिमाचल के लिए, यहां की जनता के लिए सांसदों ने क्या किया। तो फिर आपके लोकसभा ही नहीं, राज्यसभा के सांसदों का भी हिसाब लेना चाहिए क्योंकि राजनीति सिर्फ वोट लेने के लिए नहीं होती।

राजनीति दमदार होनी चाहिए। अपने गिरेबान को साफ करने के बाद ही दूसरे को घसीटना चाहिए। बीजेपी से जरूर सवाल पूछे जाने चाहिए। मगर कांग्रेस का इन सवालों को पूछना तब तारीफ के काबिल होगा, जब पहले उसके सांसद अपना हिसाब किताब जनता के सामने रखेंगे और बोलेंगे, ये देखिए, हमने अपने कार्यकाल में विकास के ये ये कार्य किए हैं, अब बीजेपी वाले बताएं कि उन्होंने क्या किया है।

मगर अफसोस, न तो पत्रकार ये सवाल कांग्रेस के नेताओं से पूछते हैं और न ही बीजेपी के नेता इस सवाल को लेकर कांग्रेस को घेर रहे हैं। क्योंकि अगर बीजेपी वालों ने बदले में आनंद शर्मा और विप्लव शर्मा का हिसाब मांगा तो उन्हें पहले अपनी पार्टी के राज्यसभा सांसद जेपी नड्डा का हिसाब देना होगा। यानी अपनी मजबूरियों के आधार पर इन राजनीतिक पार्टियों के फ्रेंडली मैच आगे भी जारी रहेंगे।

(लेखक हिमाचल प्रदेश से जुड़े विषयों पर लिखते रहते हैं, उनसे kalamkasipahi @ gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है)

ये लेखक के निजी विचार हैं