मुख्यमंत्री जी! हमें मुआवजा नहीं, सुरक्षित यात्रा की गारंटी चाहिए

आई. एस. ठाकुर।। कुल्लू के बंजार में हुए दुखद हादसे ने एक बार फिर हिमाचल प्रदेश के उस जख्म को हरा कर दिया है जो ठीक नहीं हो पा रहा। और यह ठीक इसलिए नहीं हो रहा क्योंकि इसके इलाज के लिए दवा नहीं लगाई जाती बल्कि इस जख्म के ऊपर सीधे नोट ही चिपका दिए जाते हैं। जी हां, मरने वालों के परिजनों और घायलों को मुआवजे के तौर पर कुछ पैसे देकर नेता औऱ सरकारें अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेती हैं। जिस समस्या को सुलझाया जा सकता है, अगर उसे सुलझाया न जाए और उसके कारण लोगों की मौत हो जाए तो इसे हादसा नहीं बल्कि हत्या करना उचित होगा।

अगर आप हिमाचल प्रदेश से हैं तो बचपन से आपने असंख्य बस हादसों की खबरें सुन ली होंगी जिनमें दर्जनों लोगों की मौत हुई होगी। आए दिन होने वाले कार, ट्रक और बाइक हादसों का तो कोई हिसाब ही नहीं है। हेड ऑन कलिज़न यानी आमने-सामने की टक्कर से ज्यादा जानें यहां पर वाहनों के खाई में गिर जाने सो होती है। बहुत कम मामले ऐसे होते हैं जिनमें सीधी और अच्छी सड़क पर कोई लापरवाही के कारण शराब या नींद के प्रभाव में नीचे उतर गया हो। अधिकतर मामलों में ये हादसे होते हैं मोड़ों पर या ऐसी जगहों पर जहां सड़क की स्थिति खराब होती है।

कैसे होते हैं हादसे
इसके अलावा हिमाचल प्रदेश की सड़कों पर दौड़ते खटारा वाहन, अनाड़ी चालक और ओवरलोडिंग भी लोगों की जान असमय लेने के लिए जिम्मेदार है। खटारा वाहन मोड़ों पर या तो स्पीड कम नहीं कर पाते या फिर उनके स्टीरिंग जाम हो जाते हैं। एचआरटीसी की बसों से ही स्टीरिंग जाम होने की खबरें कतनी बार आ चुकी हैं। अनाड़ी चालक अक्सर बाहरी राज्यों के होते हैं जो छुट्टी मनाने के इरादे से पहाड़ी सड़कों पर अडवेंचर के लिए निकल आते हैं और फिर या तो खुद खाई से बाहर निकल जाते हैं या फिर ऐसा कट मारते हैं कि बचने-बचाने के चक्कर में कोई और गाड़ी हादसे की शिकार हो जाती है।

ओवरलोडिंग बड़ा कारण
जो सबसे बड़ा कारण है, वह है वाहनों की ओवरलोडिंग और ऊपर से ओवरस्पीडिंग। जी हां, चाहे छोटी गाड़ियां हों या बड़ी, मालवाहक गाड़ियां हों या यात्री वाहन,  हर गाड़ी बारीक इंजीनियरिंग से तैयार की गई होती है। एक-एक हिस्सा, एक-एक नट-पेंच, एक-एक स्क्रू निश्चित आकार का होता है, निश्चित वजन का होता है। वाहन की स्टेबिलिटी के लिए उसमें बैठने वाले लोगों की सीटें भी इस हिसाब से बनाई जाती हैं ताकि उनका बैलंस बना रहे। उनके पुर्जे इस हिसाब से बने होते हैं ताकि मोड़ों पर या झटके लगने पर पैदा होने वाली ताकत कैसे वाहन को अनियंत्रित न कर दे।

मगर हम न बारीक बातों पर ध्यान नहीं देते। ट्रकों और टिप्परों को ओवरलोड कर देंगे या फिर बेतरतीबी से लोड करेंगे और नतीजा यह होगा कि मोड़ पर गाड़ी नियंत्रित नहीं होगी और सीधे बाहर गिरने का खतरा होगा। कारों और बसों में भी ऐसा होता है। पहाड़ी सड़कों पर तो यात्रियों को ढंग से बिठाना चाहिए। यात्री एक ही तरफ बैठ जाएंगे और दूसरी तरफ कम लोग होंगे तो इससे भी उस बस या गाड़ी के पलटने का खतरा होगा और मोड़ों पर उसके अनियंत्रित होने की आशंका बढ़ जाएगी। ओर अगर तय क्षमता से अधिक लोग बैठेंगे तो हादसे का खतरा और हो जाएगा।

सड़कों की खराब हालत- नीम पर चढ़ा करेला
अनाड़ी और लापरवाह चालक अगर मोड़ पर स्पीड कम नहीं करेगा तो यह ओवरलोडेड वाहन हादसे का शिकार होगा ही। दुख की बात ये है कि अधिकतर सड़कों पर मोड़ों में बैंकिंग नहीं की गई है। बैंकिंग यानी मोड़ पर एक कोण में झुकाव बनाना ताकि सेंट्रीफ्यूगल फोर्स के कारण गाड़ियां स्किड न हो जाएं। ऐसे समझिए कि अगर बाईं ओर का मोड़ है तो सड़क दाईं ओर से ऊंची और बाईं ओर से नीची होनी चाहिए। मगर ऐसा होता कहां है? कई जगह तो उल्टी ही बैकिंग कर दी गई है।

नैशनल हाइवेज़ पर तो बैंकिंग है मगर अन्य सड़कों की बुरी हालत है।

लापरवाह अधिकारी, बेपरवाह सरकार
समस्या पूरे सिस्टम में है। सड़कों को ढंग से बनाने और खतरनाक जगहों पर बैरियर आदि लगाने जैसे काम शुरू में ही हो जाने चाहिए और बजट में ही इसका प्रावधाना होना चाहिए। ऐसा न कर पाने वाले पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। खटारा बसों और वाहनों को पास कर देने वाले ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही साथ पुलिस को भी कसा जाना चाहिए और ट्रांसपोर्ट विभाग को भी कि वे समय समय पर चेकिंग करें कि कौन सा वाहन ओवरलोडिंग कर रहा है, कौन सा ड्राइवर नियम तोड़ रहा है, कहां क्या कमी है।

ट्रांसपोर्ट मंत्रालय का काम है कि वह विभिन्न विभागों से फीडबैक ले। जहां सड़कें ठीक नहीं हैं वहां पर संबंधित विभाग से संपर्क करके उन्हें ठीक करवाए। जहां बसें कम हैं, वहां बसें चलाए। जहां नियमों का पालन नहीं हो रहा, वहां नियमों का पालन करने के लिए पुलिस की मदद ले। मगर जब बयानों से काम चल जाता है तो काम की क्या जरूरत? शायद इसी बात ने हमारे नेताओं को संवेदनहीन बना दिया है। वे नहीं सोचते कि इन हादसों से मरने वालों की जान को वे बचा सकते हैं अगर अपना काम गंभीरता से करें।

फरवरी 2018 की खबर जिसमें लोग मांग कर रहे है कि निजी बसों से यात्रा करनी पड़ती है, अधिक बसें चलाई जाएं।

फिर दे दिया जाएगा मुआवजा और होगा अगली दुर्घटना का इंतजार?
सबसे बड़ी बात, हर हादसे पर जांच होनी चाहिए और जांच की रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए और एक संदेश मिलना चाहिए। खटारा वाहन हो तो पासिंग करने वाले अधिकारी को रगड़ा जाए, सड़क खराब हो तो पीडब्ल्यूडी को पूछा जाए। मगर इतनी सरकारें आई, इतनी सरकारें गई, इतने हादसों की जांच हुई पर ऐक्शन किसी पर नहीं लिया गया। नेताओं ने बस एक ही मंत्र अपनाया है- हादसों पर दुख के दो बोल कहते हैं, मुआवजे का मरहम चिपकाते हैं और फिर हमारी कमजोर यादाश्त का फायदा उठाकर चार दिन बाद फिर राजनीति में मशगूल हो जाते हैं।

पैसा लोगों की जान बचाने में लगाया जाए तो बेहतर

अब तक हुए हादसों में दिए गए मुआवजे की रकम के बारे में सोचिए। कितना बेहतर होता अगर वह रकम हिमाचल की सड़कों को सुरक्षित बनाने पर खर्च होती। ऐसा होता तो परिजन घर पर इंतजार न करते रहते और उनके अपने किसी हादसे का शिकार होकर चीथड़ों में तब्दील न हुए होते। सरकार की बाकी योजनाएं तो तब काम आएंगी जब जिंदा रहेंगे। घर से कहीं जाते हुए बिना वजह मारे जाएंगे तो योजनाएं किस काम की? तो मुख्यमंत्री जी, हिमाचल के लोग सुरक्षित यात्रा की गारंटी चाहते हैं। क्या आप दे सकते हैं?

(लेखक हिमाचल प्रदेश से जुड़े विषयों पर लिखते रहते हैं, उनसे kalamkasipahi @ gmail. com पर संपर्क किया जा सकता है)

ये लेखक के निजी विचार हैं

हिमाचल में हो रहे हादसों के लिए आम जनता भी है जिम्मेदार

मुकेश सिंह ठाकुर।। हिमाचल प्रदेश में होने वाले बस हादसों के लिए बस ऑपरेटर और ड्राइवर तो जिम्मेदार हैं ही साथ ही आम जनता यानी सवारियाँ भी कम जिम्मेवार नहीं है। एक सच्ची घटना आपसे शेयर कर रहा हूं जो पिछले साल यानी 2018 के सितंबर महीना में मेरे साथ हुई। मैं अपनी टीम के साथ एक विशेष रिपोर्ट बनाने कुल्लू से लगते पनारसा में नाउ नाम की जगह जा रहा था।

यहां पर हर साल एक बहुत बड़ा धार्मिक आयोजन होता है। हम मंडी से कुल्लू की तरफ जा रहे थे और ओट की सुरंग पार कर चुके थे। हमारी कार की स्पीड 60-70 के आस पास थी जो कार के हिसाब से ठीक-ठाक थी। तभी पीछे से तेज़ रफ्तार बस ने (कनिका नाम की बस) हमें 60-70 की स्पीड पर ओवरटेक किया। बाकी जगह चलो ये स्पीड मान लेते हैं ठीक है लेकिन मंडी से मनाली हाईवे की सड़क इतनी भयावह है कि जरा सी चूक आपको ब्यास के गर्त में ले जाएगी या सामने से आ रहे वाहन से भिड़ा देगी।

कुछ किलोमीटर आगे जाम लग चुका था और उस बस के और हमारी कार के बीच 6-7 गाड़िया भी जाम में थी। मुझसे रहा नहीं गया और मैं खुद कैमरा ऑन कर के उस बस की तरफ बढ़ गया। मैं सीधा बस के ड्राइवर के पास पहुंचा जो अपनी साइड वाला दरवाजा खोल के आगे देख रहा था कि जाम कब खुलेगा। मैंने कैमरा उसकी तरफ किया और कहा “भाई आपको इतना तेज़ चलाने के एक्स्ट्रा पैसे मिलते हैं या आप यूँ ही अपनी मस्ती में तेज़ चलाते हैं या आपके मालिक का ये आर्डर होता है बस तेज़ चलानी है?”

ड्राइवर एकाएक मेरा सवाल सुनकर सन्न रह गया और उससे कुछ ना बोला गया। दो चार बार फिर पूछने पर ड्राइवर ने कहा कि हमारी स्पीड तेज़ कहाँ थी। तो मैंने कहा कि भाई अगर 70 की स्पीड पर हमारी कार थी तो आपकी बस कितने पर होगी जो हमें उस स्पीड पर ओवरटेक करके चली गई। ड्राइवर ने बाहर खड़े कंडक्टर की तरफ इशारा किया और कहा कि उनसे पूछो। मैंने कंडक्टर से भी वही सवाल किया और कंडक्टर का जबाव भी यही था कि बस नॉर्मल स्पीड पर थी।

बस की सवारियाँ ये सब तमाशा खिड़की में से चुप चाप देख रही थीं। तभी मैंने सोचा क्यों ना सवारियों से पूछा जाए। मैंने दो चार लोगो से पूछा तो ऐसा लगा उन्हें सांप सूंघ गया हो। ऐसा लगा ये लोग गूंगे हो गए हों। तभी कैमरा एक 46-48 साल के व्यक्ति पर मैंने किया जो ड्राइवर की सीट से पिछली सीट पर बैठा था। मैंने कहा आप समझदार लग रहे हो, आप ही बताएं कि क्या बस की स्पीड नॉर्मल थी। तो उस सवारी ने जबाव दिया कि नॉर्मल ही थी साहब।

मैंने फिर वही लाईन दोहराई कि कैसे हवा में उड़ते हुए धूल का गुबार उड़ाते आपकी बस ने हमारी कार को ओवरटेक किया जो 70 की स्पीड पर थी। इस पर  वो जनाब बोले “भाई टाइम पर पहुंचना होता है सबको, थोड़ी स्पीड ज्यादा भी थी तो क्या हुआ।” मुझे गुस्सा आया और मैंने उस सवारी से कहा “सर आपको टाइम पर कुल्लू पहुंचना है या ऊपर?” मैंने आँखों से आसमान की तरफ इशारा भी किया, इस बात पर बाकी सवारियां हंसने लगी।

उस 46-48 साल के शख्स को मेरी बात चुभ गई और वो मुझे बोला “तू कैमरा पकड़ के बाहर खड़ा है, कोई गाड़ी साइड से आकर तुझे मार के चली जाए तो इसमें तेरी क्या गलती होगी? ये तो तेरी किस्मत होगी, जिसकी जब लिखी होती है वो तभी जाता है।” मैंने उससे और बाकी सवारियों से कहा “मुझे कोई शौक नहीं था अपनी गाड़ी से उतर कर आपकी बस का वीडियो बनाने का। ना ही सरकार मुझे पैसे देती है ये सब करने का। आप लोगों की भलाई की ही बात कर रहा था। मीडिया का काम है समाज में हो रहे गलत को गलत दिखाना।”

फिर मैंने उस बंदे की तरफ देखा जो किस्मत पर लेक्चर दे रहा था और कहा “भाईसाब गणित में probability नाम का कॉन्सेप्ट होता है यानी संभावना का। तेज़ बस के दुर्घटना होने की संभावना ज्यादा होती है और आपकी जैसे सवारी की मरने की संभावना बढ़ जाती है, किस्मत की बात तब करना। आप लोगो को शर्म आनी चाहिए कि एक शख्स आपके ही भले की बात कह रहा है और आधी सवारियां होंठो को सिलकर बैठी है और जो बोल भी रहा है उसके पास कमाल के उलटे सीधे तर्क हैं।”

इतना कहकर मैं वहां से अपनी कार की तरफ चला गया। मन तो किया था कि इस वीडियो को अपने चैनल पर दिखाऊं लेकिन फिर दूसरा मन किया कि जब जनता को ही मरने की पड़ी है तो मैं क्यों इनका ठेका लूँ। एक और बात, इस कनिका ऑपरेटर की बस का हादसा मंडी में पहले हो चुका था जिसमे 18 लोगो की मौत हुई थी।

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अफ़सोस की बात यह है कि जिस ड्राइवर से मैंने बात की थी, उसकी भी मृत्यु अभी 2 हफ्ता पहले करनाल हरियाणा में हुई जो उस वक्त वॉल्वो चला रहा था। यह बस रात के समय सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से टकरा गई थी। दिवंगत चालक मंडी के ही रहने वाले थे।

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आज बंजार में हुए हादसे के बाद मैंने उस वीडियो को ढूंढ़ने का प्रयास किया जो मैंने उस वक्त रिकॉर्ड किया था मगर लगता है वो डिलीट कर दिया गया है क्योंकि हम 3 महीने पहले का डेटा मिटा देते हैं। मेरा यह लिखने का उद्देश्य यही बताना था कि इन बेलगाम बस ड्राइवर और ऑपरेटर के ऊपर नकेल कसने की जरूरत तो है ही, साथ ही आम जनता या सवारियों को भी होश में आने की जरूरत है। जहाँ आपको गलत होता दिखे, तुरंत ड्रायवर या कंडक्टर से बोलें और उनकी बेवकूफियों का विरोध करें। नहीं तो ऐसे दुखद हादसे होते रहेंगे।

(लेखक युवा पत्रकार हैं और हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से संबंध रखते हैं। यह लेख उन्होंने अपनी फेसबुक टाइमलाइन पर भी पोस्ट किया है।)

नोट- ये लेखक के निजी विचार हैं, वह उनके लिए खुद उत्तरदायी हैं।

कुल्लू बस हादसे में 35 की मौत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी ने जताया शोक

कुल्लू।। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में बंजार के पास हुए भीषण बस हादसे में मरने वालों की संख्या 35 हो गई है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर ट्वीट करके शोक जताया गया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट करके दुख जाहिर किया है।

क्या बोले पीएम
हालांकि प्रधानमंत्री के अपने ट्विटर हैंडल ‘नरेंद्र मोदी’ से ऐसा कोई ट्वीट नहीं किया गया है। उस हैंडर पर खबर लिखे जाने तक उनका लेटेस्ट ट्वीट शिखर धवन के वर्ल्ड कप से बाहर होने पर था, जिसमें उन्होंने दुख जाहिर करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।

पढ़ें- मुख्यमंत्री जी! हमें मुआवजा नहीं, सुरक्षित यात्रा की गारंटी चाहिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से डाले गए संदेश में लिखा गया है, “कुल्लू में बस हादसे से गहरा दुख पहुंचा है। जिन लोगों की जानें गई हैं उनके परिजनों को सांत्वना। घायलों के जल्द स्वस्थ होने की आशा करता हूं। हिमाचल प्रदेश सरकार हर तरह की जरूरी सहायता मुहैया करवा रही है।”

गौरतलब है कि 2014 के चुनावों के दौरान प्रचार करते हुए जब नरेंद्र मोदी हिमाचल प्रदेश के सुजानपुर आए थे तब उन्होंने हादसों का मुद्दा उठाया था और इनका समाधान तलाशने का वादा किया था।

वहीं कांग्रेस अध्यश्र राहुल गांधी ने हादसे की खबर शेयर करते हुए दुख जताया है और स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं से पीड़ितों की मदद करने की अपील की है।

इस बीच हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी घटना पर शोक जताया है। उन्होंने लिखा है, “ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति तथा शोकग्रस्त परिवारों को इस असहनीय दुख सहने की शक्ति प्रदान करें। घायलों को बेहतर उपचार एवं पीड़ित परिवारों को फौरी राहत दी जा रही है। घायलों को स्वास्थ्य लाभ शीघ्र प्राप्त हो, ईश्वर से ऐसी कामना करता हूं।”

इस दुर्घटना पर उन्होंने पत्रकारों से क्या कहा, जानने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें-

जानें, कुल्लू बस हादसे पर क्या बोले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर

जानें, कुल्लू बस हादसे पर क्या बोले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर

शिमला।। कुल्लू में हुए बस हादसे को लेकर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि अब तक 20 लोगों की मौत हुई है और 25 लोग घायल हैं। उन्होंने कहा कि अभी सही आंकड़े नहीं मिले हैं मगर मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। सीएम ने कहा कि यह बस कुल्लू से गाड़ागुशैणी होते हुए उनके विधानसभा क्षेत्र में पड़ने वाले एक गांव की ओर जा रही थी।

कुछ देर पहले शिमला में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि घटना की जानकानरी मिलते ही प्रशासन मौके पर पहुंच गया, आसपास से ऐंबुलेंस वहां भेजी गईं और छह डॉक्टर भी तुरंत भेजे गए। उन्होंने कहा कि परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर शिमला से बंजार के लिए रवाना हो चुके हैं और स्थानीय विधायक पहले से वहां पर मौजूद हैं।

घायलों का इलाज कुल्लू अस्पताल में किया जा रहा है। सीएम ने कहा कि अभी तक मिली जानकारी के अनुसार 50 सवारियां बस में सवार थीं। उन्होंने कहा कि हादसे के कारणों की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

ओवरलोडिंग पर क्या बोले सीएम
इस हादसे को लेकर उन्होंने कहा कि इस ओर बहुत ज्यादा बसें नहीं जाती हैं और शाम का समय था तो संभव है कि लोग बंजार में काम करने के बाद घर लौटते हैं, इसलिए बस भरी हुई थी। उन्होंने कहा कि इस तरह के हादसों को रोकने के लिए समय-समय पर जरूरी कदम उठाए हैं मगर फिर भी ऐसा हादसा होना दुखद है और जांच के बाद और कदम उठाए जाएंगे।

कुल्लू के बंजार में गहरी खाई में गिरी निजी बस, 20 की मौत

कुल्लू के बंजार में गहरी खाई में गिरी निजी बस, 20 की मौत

कुल्लू।। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के बंजार में एक निजी बस खाई में गिर गई है। अभी तक प्राप्त जानकारी की अनुसार इस हादसे में कम से कम 20 लोगों की मौत हुई है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक तीन यात्रियों की मौत की ही पुष्टि हुई है।

उपमंडल मुख्यालय से लगभग दो किलोमीटर दूर भियोठ मोड़ के पास यह हादसा हुआ है। यह निजी बस कुल्लू से गाड़ागुशैणी जा रही थी। हादसा कैसे हुआ, इस बारे में अभी कुछ साफ नहीं हो पाया है।

कुल्लू में घायलों को ले जाते लोग

लोगों का कहना है कि यह बस यात्रियों से भरी हुई थी। अचानक यह सड़क से बाहर निकलकर बेहद गहरी खाई में लुढ़क गई। हालत इतनी खराब है कि नीचे पहुंचने तक इसकी छत अलग हो चुकी थी।

अभी तक घायलों और मृतकों की पहचान नही हो पाई है। आशंका है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है।

कुल्लू के बंजार में गहरी खाई में गिरी निजी बस, 20 की मौत

अनंतनाग हमले में हिमाचल प्रदेश के अनिल जसवाल शहीद

ऊना।। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में हुए आतंकवादी हमले में हिमाचल प्रदेश से संबंध रखने वाले एक जवान की भी शहादत हुई है। हमले में घायल हुए 26 साल के अनिल जसवाल पुत्र अशोक कुमार ने बीती रात आखिरी सांस ली।

दुख की बात यह है कि दो दिन पहले ही उनका जन्मदिन था। ऊना के बंगाणा में सरोह के अनिल की दो साल पहले शादी हुई थी और उनका पांच महीने का एक बच्चा है। 10 दिन पहले ही अनिल अपने घर आए थे और सात जून को ड्यूटी पर लौटे थे।

मूल रूप से 13 जैक राइफल्स में तैनात रहे अनिल जसवाल इन दिनों राष्ट्रीय राइफल्स-3 में सेवारत थे।

सोमवार को अनंतनाग में हुए आतंकवादी हमले में एक मेजर भी शहीद हुए थे। इस घटना में अनिल समेत पांच जवान जख्मी हुए थे। मगर इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने ‘बड़े भाई’ जेपी नड्डा को दी बधाई

शिमला।। विदेश दौरे से लौटे हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जगत प्रकाश नड्डा को भारतीय जनता पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनने पर बधाई है। अपने आधिकारिक फेसबुक पेज और ट्विटर अकाउंट पर बधाई संदेश देते हुए मुख्यमंत्री ने खुशी जताई है।

अपने संदेश में सीएम ने लिखा है, “हमारे बड़े भाई एवं हिमाचल की शान आदरणीय जगत प्रकाश नड्डा जी को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त होने पर हिमाचल के सभी भाजपा कार्यकर्ताओं एवं प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक बधाई एवं ढेर सारी शुभकामनाएँ। आपके नेतृत्व में निश्चित रूप से भाजपा प्रदेश एवं देश में नए कीर्तिमान स्थापित करेगी।”

बता दें कि विदेश दौरे पर जाने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा था कि जेपी नड्डा जल्द ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। जयराम ठाकुर और जेपी नड्डा दोनों ही पार्टी की शांता कुमार वाली विचारधारा के नेता माने जाते हैं।

पढ़ें- जगत प्रकाश नड्डा: एबीवीपी कार्यकर्ता से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक

धूमल बोले- नड्डा के अध्यक्ष बनने से और मजबूत होगी पार्टी

शिमला।। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने एक समय अपनी सरकार में मंत्री रहे जेपी नड्डा को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनने पर बधाई और शुभकामनाएं दी है। धूमल ने कहा कि छोटे से राज्य से जेपी नड्डा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना खुशी की बात है।

धूमल ने एक अखबार से बात करते हुए कहा कि जिस तरह से नड्डा ने संगठन में काम किया है, पूरा विश्वास है कि इससे पार्टी की स्थिति और मजबूत होगी।

पूर्व सीएम ने कहा, “अभी वह पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बने हैं और समने आने पर निश्चित तौर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। उन्हें प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह का मार्गदर्शन मिलता रहेगा।”

एक समय अपने प्रतिद्वंद्वी रहे नड्डा की ताजपोशी पर धूमल ने कहा कि इससे देश और प्रदेश में पार्टी आने वाले समय में और मजबूत होगी।

पढ़ें- जगत प्रकाश नड्डा: एबीवीपी कार्यकर्ता से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक

 

हिमाचल प्रदेश के जेपी नड्डा बने बीजेपी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष

जेपी नड्डा को लेकर हिमाचल बीजेपी फेसबुक पेज का अजीब अपडेट चर्चा में

इन हिमाचल डेस्क।। जगत प्रकाश नड्डा को भारतीय जनता पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष चुने जाने पर बधाइयां दिए जाने का सिलसिला जारी है। इस बीच हिमाचल प्रदेश बीजेपी के फेसबुक पेज ने कुछ ऐसा पोस्ट कर दिया जो चर्चा का विषय बन गया है। पोस्ट करने वाले ने जेपी नड्डा का नाम लिखने में बड़ी गलती कर दी और ‘नड्डा’ को ‘अड्डा’ लिख दिया।

बाद में पेज एडमिन ने गलती सुधारते हुए ‘अड्डा’ को ‘नड्डा’ कर दिया। यही नहीं, इस पोस्ट के साथ लिखा हुआ वाक्य भी बेहद कमजोर है। अभी पोस्ट में लिखा नजर आता है- “श्री जे पी नड्डा जी के नेतृत्व में पार्टी और भारत, दोनो को आगे ले जाने में यह निर्णय महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”

इससे पहले एडिट हिस्ट्री में जाने पर क्या नजर आता है, नीचे देखें। (हिस्ट्री चेक करने के लिए किसी भी पोस्ट के सामने नजर आने वाले तीन बिंदुओं पर टैप या क्लिक करें, नीचे View edit History का ऑप्शन आता है। इसपर टैप या क्लिक करने से पता चल जाता है कि इस पोस्ट में कोई बदलाव किया गया है या नहीं और अगर किया गया है तो कब।)

पोस्ट की एडिट हिस्ट्री पर नजर आ रही चूक

हालांकि इस तरह की गलती, खासकर टाइपो होना सामान्य बात है मगर इस तरह की चूक को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि ऐसी भी क्या जल्दी थी। दरअसल अब भले ही पेज पर नाम को एडिट करके भूल को सुधार दिया गया है मगर बहुत सारे यूजर्स ने पहले ही इसके स्क्रीनशॉट ले लिए थे जो अब वॉट्सऐप और फेसबुक मेसेंजर पर शेयर किए जा रहे हैं।

बहरहाल, इस घटना से यह भी सबक मिलता है कि डिजिटल एज में कैसे एक छोटी सी गलती आपको मुश्किल में डाल सकती है।

पढ़ें- जगत प्रकाश नड्डा: एबीवीपी कार्यकर्ता से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक

हिमाचल प्रदेश के जेपी नड्डा बने बीजेपी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष

नई दिल्ली।। पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बन गए हैं। सोमवार को बीजेपी संसदीय बोर्ड की हुई बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में नड्डा के नाम पर सहमति बनी।

पढ़ें- जेपी नड्डा: ABVP कार्यकर्ता से BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक

आपको बता दें कि इन हिमाचल ने इस बार मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह से पहले ही जानकारी दे दी कि वह नरेंद्र मोदी कैबिनेट में शामिल नहीं होंगे और बीजेपी के अध्यक्ष बनेंगे।

जेपी नड्डा को बधाई देते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

ध्यान देने की बात यह है कि अमित शाह अगले 6 महीने तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहेंगे। उनके मार्गदर्शन में ही जेपी नड्डा कामकाज देखेंगे। माना जा रहा है कि दिसंबर में जब संगठन के चुनाव होंगे, उसके बाद नड्डा पार्टी के अध्यक्ष चुने जाएंगे और पूरी तरह संगठन की कमान अपने हाथ में ले लेंगे। फैसले की जानकारी देते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता और देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि बीजेपी संसदीय बोर्ड ने जेपी नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष चुना है।

जेपी नड्डा हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर से हैं।

उन्होंने पत्रकारों को बताया, ‘बीजेपी ने अमित शाह के नेतृत्व में कई चुनावों में शानदार सफलता हासिल की है लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा उन्हें गृह मंत्री नियुक्त किए जाने के बाद उन्होंने (अमित शाह) ने खुद कहा था कि वह पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी किसी और को दी जानी चाहिए।’

पढ़ें-हिमाचल की बढ़ी धाक, मंत्री नहीं बीजेपी अध्यक्ष बनेंगे जेपी नड्डा