सुषमा स्वराज: इन बातों के लिए हमेशा याद की जाएंगी

इन हिमाचल डेस्क।। भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है। उनका 67 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। मंगलवार शाम को उन्हें बेचैनी की शिकायत के बाद दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

पिछले ही साल सुषमा स्वराज ने ये ऐलान किया था कि वो साल 2019 का चुनाव नहीं लड़ेंगी। इसके बाद वह मंत्री भी नहीं बनी थीं। इसके बाद कई बार उनके निधन की अफवाहें फैलीं जिनका उन्होंने खुद ट्वीट करके खंडन किया। इस बार भी सबको लग रहा था कि वह खुद कहेंगी कि अफवाहें न फैलाएं। मगर अफसोस, होनी को कुछ और ही मंजूर था।

राजनीति की शुरुआत
4 फरवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला शहर में जन्मीं सुषमा स्वराज मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में विदेश मंत्री थी। वह 7 बार सांसद और 3 बार एमएलए रह चुकी हैं। 1977 में जब वह 25 साल की थीं तब वह भारत की सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री बनी थीं। 1998 में वह दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी थीं।

सुषमा स्वराज ने 1970 में छात्र नेता के रूप में राजनीति में प्रवेश किया। 1975 में देश में आपातकाल लगाए जाने के बाद उनकी सक्रियता बहुत बढ़ गई। उन्होंने इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ कई विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। इसके बाद राजनीति में उनका कद तेजी से बढ़ा। महज 27 साल की उम्र में उन्होंने जनता पार्टी का हरियाणा में अध्यक्षा का पद संभाला था। सुषमा स्वराज स्कूल के दिनों में एनसीसी से भी जुड़ी रहीं।

सुषमा स्वराज

पेशे से वकील सुषमा स्वराज ने अंबाला के एसडी कॉलेज और पंजाव विश्वविद्यालय के कानून विभाग से पढ़ाई की थी। अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत इन्होंने 1970 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की थी। वह 1977 में अंबाला छावनी विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुनी गईं। चौधरी देवी लाल की सरकार में वह श्रम मंत्री बनीं और 25 साल की उम्र में कैबिनेट मंत्री बनने का रेकॉर्ड बनाया था।

सन 1990 में सुषमा स्वराज राज्यसभा की सदस्य चुनी गईं और 1996 में लोकसभा चुनावों में वो दक्षिण दिल्ली से 11वीं लोकसभा के लिए सांसद बनीं। उन्होंने संसद में कई मौकों पर जोरदार भाषण दिए, जिन्हें आज भी याद किया जाता है।

सुषमा स्वराज को 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्रालय दिया गया और कैबिनेट में शामिल हुईं। सन 1998 में सुषमा स्वराज 12वीं लोकसभा के लिए दोबारा दक्षिणी दिल्ली से चुनी गईं। 2014 में 16वीं लोकसभा में सुषमा स्वराज विदिशा से जीतकर आईं। यूपीए दो सरकार में सुषमा स्वराज विपक्ष की नेता थीं।

इसके बाद नरेंद्र मोदी सरकार में विदेश मंत्री बनने के बाद वह ट्विटर पर तुरंत लोगों की सहायता करने वालीं मंत्री के तौर पर लोकप्रिय हुईं। उनका संयुक्त राष्ट्र में दिया गया भाषण आने वाले कई सालों तक याद किया जाता रहेगा।

‘एक रुपया ले लो’
सुषमा स्वराज ने मंगलवार को अपने निधन से महज चंद मिनट पहले ही इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में कुलभूषण जाधव का केस जीतने वाले वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे से बातचीत की थी। उनसे आखिरी बातचीत को याद कर साल्वे काफी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि सुषमा जी ने उन्हें कल यानी बुधवार को मिलने के लिए बुलाया था और कहा था कि अपनी 1 रुपये की फीस आकर ले लो।

बता दें कि पूर्व सॉलिसिटर जनरल साल्वे ने जासूसी के आरोप में पाकिस्तान में मौत की सजा का सामना कर रहे कुलभूषण जाधव केस को ICJ में लड़ने के लिए महज रुपये की प्रतीकात्मक फी ली थी, जबकि पाकिस्तान ने 20 करोड़ रुपये खर्च किए थे। ICJ में साल्वे की दलीलों से भारत के पक्ष में फैसला आया तो पाकिस्तान को जाधव तक कंसुलर ऐक्सेस देने का आदेश पारित हुआ।

न्यूज चैनल टाइम्स नाउ के साथ बातचीत में हरीश साल्वे ने कहा कि उनकी मंगलवार को ही रात 8 बजकर 50 मिनट पर सुषमा स्वराज से बातचीत हुई थी। उन्होंने याद किया, ‘आज (सोमवार) 8:50 पर मैंने उन्हें फोन किया था। अब जब यह खबर सुना तो मैं सन्न रह गया। बहुत ही भावुक बातचीत हुई। उन्होंने मुझे कहा कि तुम कल 6 बजे आओ अपना एक रुपये का फीस लेने के लिए।’

टीम इन हिमाचल की ओर से सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि।

कांग्रेस सरकार के दौरान खुला था गैर-हिमाचलियों की भर्ती का रास्ता

शिमला।। हिमाचल प्रदेश सचिवालय में बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों की भर्ती को लेकर सवाल उठा रही कांग्रेस पर खुद ही सवाल उठने लगे हैं। यह जानकारी सामने आई है कि हिमाचल के अलावा अन्य राज्य के लोगों को नौकरी देने वाले नियम में पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान बदलाव हुआ था।

2015 में तत्कालीन राज्यपाल ने संविधान के अनुछेद 309 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए ‘हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के परामर्श’ से प्रदेश क्रार्मिक विभाग (सचिवालय प्रशासन सेवाएं) में लिपिक वर्ग के पद के लिए भर्ती और पदोन्नति के नियम बनाए थे।

नियमों वाला डॉक्यूमेंट देखने के लिए टैप करें (14 नंबर कॉलम देखें)

इन नियमों के अनुसार भारत का कोई भी नागरिक इन पदों के लिए आवेदन कर सकता है। 14 नंबर कॉलम में दर्शाया गया है कि इन पदों पर आवेदन करने के लिए अभ्यर्थी का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य होना चाहिए। यानी हिमाचली होने की बाध्यकारी शर्त का इसमें कोई जिक्र नहीं है।

ये नियम उस समय बने थे जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी। ऐसे में कांग्रेस पर अपने कार्यकाल में हुए बदलाव को लेकर ही सवाल उठाना चर्चा का विषय बन गया है।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश सचिवालय में हाल ही में 155 पदों की भर्ती हुई है, जिसमें 16 पद बाहरी राज्यों  बिहार, झारखंड, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब से संबंध रखने वाले अभ्यर्थियों को मिले हैं। बताया जा रहा है कि ये अभ्यर्थी मेरिट में थे। इनकी नियुक्ति पर प्रदेश कांग्रेस ने कड़ा का विरोध जताया है।

चंबा: चुराह के इन गांवों में बरसाती नाला रोक रहा है बच्चों की पढ़ाई

चंबा।। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के विधानसभा क्षेत्र चुराह में आने वाले मलवास गांव के बच्चों को पढ़ाई के लिए बरसाती नाले को पार करना पड़ता है। बरसात के इस मौसम में जूनास पंचायत के अभिभावकों को हर दिन इस बात का डर रहता है कि उनके बच्चे स्कूल से लौटेंगे या नहीं।

चुराह क्षेत्र की जुनास पंचायत के मलवास एक और मलवास दो गांवों में रहने वाले 40 परिवारों को राशन लाने या अन्य कामों के लिए भी इसी नाले को पार करना पड़ता है। यह विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज का चुनाव क्षेत्र है। बरसाती नाले के तेज बहाव को देखकर यही कहा जा सकता है कि बच्चे स्कूल न जाएं तो ही बेहतर होगा क्योंकि जान ज्यादा कीमती है।

ऐसा नहीं है कि क्षेत्र के लोगों ने अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति चिंता जताते हुए सरकार व प्रशासन से इस नाले पर पैदल पुल बनाने की गुहार न लगाई हो। मगर लोगों का कहना है कि इनकी एक नहीं सुनी गई। शायद इसीलिए चम्बा जिला विकास की दृष्टि से पिछड़े देश के 115 जिलों की सूची में शुमार है।

डीसी चम्बा विवेक भाटिया के अनुसार उन्होंने आदेश दे दिए हैं कि बारिश में अगर छुट्टी करनेकी आवश्यकता हो तो ऐसे स्कूलों में छुट्टी भी कर दी जाएगी। लेकिन सवाल उठता है कि ऐसी व्यवस्था कब तक जारी रहेगी? यह वीडियो उन दावों की पोल खोलता है जिनके दम पर सरकारें और स्थानीय नेता खुद को विकास का मसीहा बताने का कोई भी मौका नहीं चूकते।

बीच रास्ते में रुकी खटारा दिल्ली-केलांग-लेह बस, यात्री हुए परेशान

इन हिमाचल डेस्क।। एक ओर जहां हिमाचल प्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर गुरुवार को लाहौल स्पीति जिले के केलॉन्ग बस अड्डे और वर्कशॉप का निरीक्षण कर रहे थे, दूसरी ओर उसी सुबह यहीं के लिए आ रहे यात्री एचआरटीसी की खटारी बस में बैठने के लिए खुद को कोस रहे थे। मगर करते भी क्या, इस बस के अलावा उनके पास कोई विकल्प भी तो नहीं है।

दरअसल दिल्ली से केलॉन्ग के लिए चली सरकारी बस का इंजन ओवरहीटिंग के कारण समस्या पैदा करने लगा। बता दें कि यह वही बस रूट है, जिसके लिए एचआरटीसी की काफी तारीफ हुई थी। यह “दिल्ली-केलॉन्ग-लेह” रूट वाली बस थी जो अडवेंचर पसंद लोगों के लिए शुरू की गई थी। लगभग 33 घंटे की यात्रा वाले इस रूट को देश का सबसे लंबा रूट कहा गया था।

मगर गुरुवार सुबह इस यात्रा के दौरान ही हालात ऐसे हो गए कि पुराने दौर की तरह चालक-परिचालक को पानी डाल-डालकर बस को चलाना पड़ा। केलॉन्ग निवासी और ट्राइबल टुडे के संपादक और पीटीआई संवाददाता शाम चंद आजाद ने इस संबंध में वीडियो शेयर किए हैं और बताया है कि बीच रास्ते में यात्रियों को कितनी असुविधा का सामना करना पड़ा।

ओवरहीट हो रहे इंजन में एक बार पानी डालने पर भी हालात नहीं सुधरे। बस हांफने लगी और कई बार बस को रोककर पानी डालने की यही प्रक्रिया दोहरानी पड़ी। ऐसे में लगने लगा कि शायद ही बस रोहतांग भी पहुंच पाए।

आखिरकार यह बस कोठी में बंद हो गई। इसके बाद कुल्लू से एचआरटीसी ने वैकल्पिक बस भेजकर यात्रा पूरी करवाई।

इस बस पर 42 यात्री सवार थे, जिनमें बच्चे, बूढ़े और बुजुर्ग भी शामिल थे। एक पोस्ट में शाम चंद आजाद ने लिखा, “18 मील के पास अब तक तीन बार पानी डाल चुके हैं। पुरानी खटारा बसें जो आठ लाख किलोमीटर तक चली हैं, ऐसी बसें जनजातीय इलाकों की कच्ची और खराब सड़कों पर रेंग रही हैं। किलाड़ और काज़ा की सड़कों की दयनीय स्थिति से कौन अवगत नहीं है। क्या हम किसी बड़े हादसे के इंतजार में हैं?”

परिवहन मंत्री आए थे केलॉन्ग
गौरतलब है कि गुरुवार को ही परिवहन मंत्री जनजातीय जिले लाहौल स्पीति के दौरे पर थे। उन्होंने फेसबुक पर इसकी तस्वीरें भी शेयर की हैं और लिखा है कि उन्होंने हिमाचल पथ परिवहन निगम उदयपुर बस स्टैंड, केलांग बस स्टैंड एवं कर्मशाला का निरीक्षण किया। उन्होंने उदयपुर-घारी-चिमरेट बस शुरू होने पर जनता को बधाई दी और कहा कि प्रदेश सरकार चालक-परिचालक, पीसमील वर्करों को हर सुविधाएं प्रदान करने के प्रति कृतसंकल्प है।

बदहाल डिपो
पत्रकार शाम आजाद केलॉन्ग डिपो की बदहाली की दशा पर लिखते हैं, “जिस केलांग डिपो का एक समय मे नाम होता था, आज उसके 28वें पायदान पर पहुंच जाने की खबर है। जिन बसों में यात्रा करने के लिए यात्री घण्टों इंतजार करते थे, आज उनका जी मिचलता है। मगर जनजातियों का मुकद्दर तो इन्ही अर्धश्वासित बसों के साथ माथापच्ची करने का है।”

आगे वह लिखते हैं, “कई जरूरी रूट बन्द करवा चुका यह डिपो अब लोकल तथा कम दूरी के लिए भी पिछड़ता जा रहा है। आखिर क्यों इन दुर्गम इलाकों के साथ भद्दा मजाक? क्यों प्रतिनिधि खामोश? मात्र छह साथ महीने मिलने वाली इस सेवा से भी बेहाल हो रही है जनजातीय अवाम?”

लोग बड़ी संख्या में उनके इन पोस्ट और वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं।

अनिल अंबानी और 6 टावर लाइन कम्पनियों पर एफआईआर

सुंदरनगर।। हिमाचल प्रदेश के मण्डी जिला के चचोयट क्षेत्र के अंतर्गत 24 प्रभावित किसानो द्वारा अनिल अंबानी सहित रिलायंस एनर्जी लिमिटेड के 8 बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर सतीश सेठ,एस.एस कोहली,पी.आर रॉय,वी.के. चतुर्वेदी, के. रविकुमार,वी.एल. गलकार,रैना कर्णी व सात अन्य सहयोगी कम्पनियो के डायरेक्टर राम तीर्थ अग्रवाल,अलोक रॉय,लष्मी नारायण मिश्रा,सागर कुमार, पीकेटीसीएल ,केईसी इंटरनेशनल ,टाटा पॉवर, ज्योति स्ट्रक्चर लिमिटेड ,कलपातरू कम्पनी के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 156(3) सेक्शन के तहत गोहर थाना में एफआईआर दर्ज हुई है।

एफआईआर दर्ज करने के आदेश गोहर न्यायलय में याचिका की सुनवाई उपरांत वत्सला चौधरी की अदालत ने करते हुए गोहर थाना को जारी किए । जिस पर पुलिस द्वारा आई.पी.सी की धारा 120 बी145, 182.351, 464.420, 452,283,271,341, 379, 392,506,147,148 व एनवायरनमेंट व इंडियन फारेस्ट एक्ट 1986 की धारा 15,41,42 व भ्र्ष्टाचार निरोधक कानून की धारा 4 के तहत एफ आई आर दर्ज की गई।

क्या है मामला
जिला मंडी के गोहर सब डिवीजन के अंतर्गत आने वाले बहुत से गावो में बिजली की ट्रांसमिशन लाईने बिछाई गई। किसानो का आरोप है कि ट्रांसमिशन लाइन बिछाने में भारी अनियमितताएं बरती गई और अनिल अंबानी व अन्य सहयोगी कम्पनियो ने प्रभावित किसानों को उनके मकानों,दुकानों,जमीनों और पशु शालाओं का मुआवजा नहीं दिया।

इस सन्दर्भ में डिप्टी कमिश्नर मंडी के पास कोई भी रिकॉर्ड ,दस्तावेज मौजूद नही है ।जमीनो के सर्कल रेट वैल्यू के हिसाब से कोई भी मूल्यांकन इत्यादि नहीं किया गया ।जो कि गंभीर लापरवाही थी लाइनो को बिछाने में हिमाचल के चार जिलों के किसान प्रभावित हुए जिन्हें कोई मुआवजा नहीं दिया गया है।

जिस पर किसानों की शिकायतों पर वर्ष 2017 में मैजिस्ट्रेट इंक्वायरी हुई जिसकी रिपोर्ट राघव शर्मा एसडीएम गौहर द्वारा 237 (2017)को उपायुक्त मंडी के पास जमा करवा गया। जिसमें कंपनी के द्वारा टावर निर्माण के समय बरती गई अनियमितताओं व किसानों के नुकसान जिसमें मकानों, वन,कृषि विभाग व उद्यान विभाग के अंतर्गत आने वाले पेड़ों का मूल्यांकन निर्धारण नियमों के अनुरूप ना करने के बारे सभी अनियमितताओं को मजिस्ट्रेट इंक्वायरी में उल्लेख किया गया।

इस रिपोर्ट को उपायुक्त मंडी द्वारा हिमाचल सरकार को भेजा गया जिस पर आज दिन तक किसानो के संवैधानिक अधिकारों को लेकर कोई भी उचित हल नहीं निकाला गया है। जबकि यह सारा काम प्राइवेट कंपनी द्वारा मुनाफा कमाने के लिए किया गया था।

सियाज पंचायत के लगभग 24 प्रभावित परिवारों के किसानों ने उक्त कंपनी के द्वारा बरती गई अनियमितताओं व आपराधिक षडयंत्र धोखाधड़ी वह फर्जीवाड़े के खिलाफ न्यायालय में 156 (3) के तहत शिकायत दायर की थी जिसमें केस 246 (2019 )को वत्सला चौधरी जेएमआईसी के गौहर के द्वारा अपने आदेश में में यह स्पष्ट किया गया है कि उक्त उक्त अनिल अंबानी की कंपनी सहित अन्य कॉन्ट्रैक्टर कंपनियों के द्वारा राजस्व उद्यान वन विभाग व कृषि विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी नियमों व उप नियमों की अवहेलना करने बारे पुलिस पुलिस एफआईआर दर्ज कर छानबीन करें तथा उक्त निजी कंपनियों के द्वारा किस आधार पर लोगों की जमीन से इलीगल फैलिंग जोकि बिना एसेसमेंट व अनिमिनेशन किया गया है के बारे भी विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जांच करें।

बिलासपुर व बरमाणा में भी एफआईआर
वर्ष 2015 में जिला बिलासपुर के सदर थाना व बरमाना थाना में बिलासपुर न्यायालय के आदेश पर उक्त निजी कम्पनियो के खिलाफ अनियमितताएं बरतने व लोगों को ठगने और धोखाधड़ी करने इत्यादि संबंध में एफआई आर दर्ज की गई थी जिसके खिलाफ उक्त निजी कंपनियो ने हिमाचल प्रदेश के हाइकोर्ट में जाकर याचिका दायर की ।जिस पर लगभग 4 वर्षों तक मामला विचाराधीन रहने के बाद उच्च न्यायालय ने उक्त कंपनियों की याचिका को निरस्त कर दिया और मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए पुलिस को आदेश जारी किए।

अधिवक्ता रजनीश शर्मा बे बताया, “टावर लगाने व लाईन बिछाने में इंडियन इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 व इंडियन टेलीग्राफ एक्ट 1884 व तमाम कानूनो की अवेहलना की गई।पार्वती कोल डैम ट्रांसमिशन कम्पनी लिमिटिड, अनिल अम्बानी व अन्य कम्पनियो द्वारा उच्च स्तर पर राजनेताओ, अधिकारियो से साठ गाठ कर किसानो को ठगा गया उनसे धोखा किया गया। गोहर अदालत के फैसले पर अब टावर लाईन कम्पनियो पर एफआईआर हुई है।”

मोदी की तरह ओबामा भी दिख चुके हैं बेयर ग्रिल्स के शो में

नई दिल्ली।। पुलवामा हमले वाले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा डिस्कवरी चैनल के कार्यक्रम मैन वर्सेज वाइल्ड के लिए शूटिंग करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने एक बार फिर इस मामले को उठाया है। कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने ट्वीट में में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है “पुलवामा में जब हमला हुआ था, उस वक्त प्रधानमंत्री मोदी न केवल शूटिंग कर रहे थे बल्कि हमले की जानकारी मिलने के बाद भी वह शूटिंग कर रहे थे।”

इस शो में कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियां गेस्ट अपीयरेंस दे चुकी हैं जिनमें अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भी शामिल हैं। लेकिन भारत में यह शो विवादों में इसलिए है क्योंकि इसकी शूटिंग उसी दिन हुई थी, जिस दिन पुलवामा में भीषण हमला हुआ था। उस हमले एक हफ्ते के बाद कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने शूटिंग करते हुए प्रधानमंत्री की फोटो जारी की थी। सुरजेवाला ने आरोप लगाया था “जब सारा देश पुलवामा हमले के शहीदों पर शोक मना रहा था, उस समय प्रधानमंत्री जिम कॉर्बेट में शूटिंग करने में व्यस्त थे और नाव की सवारी कर घड़ियालों को निहार रहे थे।”

बीजेपी ने किया था खंडन
उस वक्त कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी कहा था कि हमले के तीन घंटे बाद भी प्राइम टाइम मिनिस्टर शूटिंग में व्यस्त थे। बीजेपी ने इसके लिए राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा था कि फेक न्यूज फैलाना बंद करें। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों को गलत बताते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री बाघ संरक्षण के लिए पूर्व निर्धारित आधिकारिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए उत्तराखंड के रामनगर गए थे। रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि ऐसे में किसी पता था कि पुलवामा में ऐसा हादसा होगा। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि क्या कांग्रेस के सूत्रों को पहले से ही पता था कि ऐसा हमला होने वाला है।

अब क्या है मामला
मैन वर्सेज वाइल्ड में नजर आने वाले सर्वाइवल एक्सपर्ट बेयर ग्रिल्स और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर एक वीडियो शेयर किया गया है। यह 12 अगस्त को दिखाए जाने वाले कार्यक्रम का प्रोमो है। बेयर ग्रिल्स ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा है “180 देशों के लोग जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनदेखे पहलू से परिचित होंगे। मोदी दिखाएंगे कि कैसे भारत में वन्य जीवों के संरक्षण के लिए जागरुकता अभियान और भौगोलिक परिवर्तनों के लिए काम हो रहा है। मैन वर्सेज वाइल्ड में मेरे साथ प्रधानमंत्री मोदी को डिस्कवरी पर 12 अगस्त को देखें।”

ओबामा भी दिख चुके हैं इस शो में
कई भाषाओं में डब किए जाने वाले बेयर ग्रिल्स के कार्यक्रम में बराक ओबामा ने भी भाग लिया था। उस समय वह अमरीका के राष्ट्रपति थे। ‘रनिंग वाइल्ड बेयर ग्रिल्स’ में ओबामा और ग्रिल्स ने अलास्कन फ्रंटियर पर चढ़ाई करते हुए जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों और वन्य जीवों के संरक्षण जैसे मुद्दों पर चर्चा की थी। पीएम मोदी भी वन्य जीवों के संरक्षण पर इस कार्यक्रम में बात करेंगे।

लीक हुआ वीडियो शेयर करने के मामले में 10 के खिलाफ एफआईआर

कुल्लू।। हिमाचल प्रदेश में दो लोगों के अंतरंग पलों के लीक हुए वीडियो को शेयर करने और इसे लेकर सोशल मीडिया पर टिप्पणियां करने को लेकर कुल्लू पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

इस वीडियो को लेकर हिमाचल प्रदेश पुलिस के गुप्तचर विभाग की साइबर क्राइम शाखा और कुल्लू पुलिस ने लोगों से कहा था कि इस तरह का कॉन्टेंट रखना और उसे शेयर करना अपराध है। इस चेतावनी के बाद यह कार्रवाई की गई है।

कुल्लू के एसपी गौरव सिंह ने अमर उजाला अखबार से केस दर्ज करने की पुष्टि करते हुए कहा है कि इस मामले की जांच की जा रही है।

चंबा का मिंजर मेला: सुख-समृद्धि, प्रेम और भाईचारे का उत्सव

चंबा।। हिमाचल प्रदेश अपने मेलों और त्योहारों के लिए भी पहचाना जाता है। इन्हीं मेलों में से एक है चंबा का मिंजर मेला, जिसका हर साल लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं। रविवार से इस मेले का आगाज हो गया है। यह मेला बहुत खास है क्योंकि यह कई सालों से हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक भी बना हुआ है। वैसे माना जाता है कि इस फसल का संबंध मक्की की फसल से रहा था क्योंकि इलाके के लोग मक्की का व्यापक स्तर पर उत्पादन करते थे और उस फसल के अच्छी रहने के लिए पूजा अर्चना करते थे। जानें, क्या हैं इस मेले से जुड़ी दंतकथाएं और कैसे मनाया जाता है मेला:

मिंजर क्या है?
मक्की, गेहूं, धान और जौ आदि की बालियों को स्थानीय लोग मिंजर कहते हैं। तो मिंजर मेले के दौरान जरी या गोटे से बनाई गई मिंजर को कमीज के बटन पर लगाया जाता है और मेले के दौरान पहना जाता है। आखिर में मेले के समापन पर इसे रावी नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है। मिंजर का आदान-प्रदान करना शुभ माना जाता है और इसे समृद्धि का प्रतीक समझा जाता है।

मेले की शुरुआत को लेकर हैं कई कहानियां
मिंजर मेला क्यों मनाया जाता है, इसकी शुरुआत कैसे हुई, इसे लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं। एक मान्यता तो यह है कि 10वीं सदी में रावी नदी चंबा से होकर बहती थी। यहां पर नदी के दाएं छोर पर चंपावती मंदिर था और बाएं किनारे पर हरिराय मंदिर। उस दौर में चंपावती मंदिर में एक संत रहते थे और वह हर सुबह हरिराय मंदिर की पूजा अर्चना करने नदी पार करके दूसरे किनारे में जाते थे।

चंबा के राजा और चंबा में रहने वालों ने इन संत से गुजारिश की कि कुछ ऐसी व्यवस्था कीजिए कि हर कोई हरिराय मंदिर के दर्शन आसानी से कर सके। कहते हैं कि संत ने राजा और प्रजा को चंपावती मंदिर में इकट्ठा होने को कहा। बताते हैं कि 7 दिन तक बनारस के ब्राह्मणों ने यज्ञ का आयोजन किया। इस दौरान ब्राह्मणों ने सात रंगों की रस्सी बनाई जिसे मिंजर नाम दिया गया। यज्ञ पूरा होते ही रावी नदी उफान पर आई और उसने अपना रास्ता बदल लिया। अब हरिराय मंदिर तक जाना भी आसान हो गया।

एक अन्य दंतकथा ऐसी है कि चंबा के राजा साहिल बर्मन जब कांगड़ा के राजा को पराजित करके लौट रहे थे तो नलोहरा पुल पर स्थानीय लोगों ने मक्की की मिंजर के साथ उनका भव्य स्वागत किया था। ऐसे में हर साल इसी याद में मिंजर मेला मनाया जाने लगा। कुछ लोग इस मेले को वरुण देवता के लिए समर्पित उत्सव के तौर भी मानते हैं। मगर इस मेले से जुड़ी एक खास रस्म पर ध्यान दें तो एक नई कहानी मालूम होती है।

भगवान रघुवीर को लेकर भी है एक कथा
दंतकथाओं के अनुसार 17वीं सदी की बात है। शाहजहां ने एक प्रतियोगिता का आयोजन किया जिसमें हिस्सा लेने के लिए चंबा के राजा पृथ्वी सिंह भी पहुंचे। वह विजयी रहे और पुरस्कार के तौर पर उन्होंने भगवान रघुवीर की प्रतिमा मांग ली। दिल्ली के शासकों ने उन्हें यह भेंट कर दी।

बताते हैं कि चंबा के राजा जब भगवान रघुवीर को यहां लेकर आए तो उनके साथ सफी बेग मिर्जा को भी भेजा गया। मिर्जा जरी-गोटे के काम में माहिर थे और उन्होंने जरी से मिंजर बनाकर रघुवीर जी, लक्ष्मी नारायण और राजा पृथ्वी सिंह को भेंट किया। और तब से लेकर आज तक 300 साल से ज्यादा का वक्त गुजर गया है लेकिन इसी परिवार के वंशज (परिवार का मुखिया) आज सबसे पहले रघुवीर जी को जरी गोटे से बनी मिंजर अर्पित करते हैं और तभी मेले की शुरुआत होती है।

इस परिवार के सदस्य मिंजर करीब आते ही मिंजर बनाने लग जाते हैं। आज भी इस काम में परिवार की तीन पीढ़ियां जुटी हुई हैं। इनके द्वारा बनाई गई मिंजर ही मेले के दौरान बाजार में बिकती हैं और उन्हें बहनें अपने भाइयों की रक्षा के लिए बांधती हैं। लोग एक दूसरे को भी मिंजर देते हैं।

मेले का आगाज और समापन
मिंजर मेला जुलाई माह के आखिरी रविवार से शुरू होता है और एक हफ्ते तक चलता है। इसे चंबा के ऐतिहासिक चौहान मैदान में नाया जाता है। इस दौरान लक्ष्मी-नारायण मंदिर में पूजा-अर्चना की जाती है। कुंजरी-मल्हार गाए जाते हैं। मिंजर विसर्जन इस त्योहार की महत्वपूर्ण रस्म है और इसके साथ ही मेले का समापन होता है। ऐसा करने से पहले चंबा के राजा के अखंड चंडी महल में स्थित भगवान रघुवीर के मंदिर से शोभा यात्रा निकाली जाती है। साथ में अन्य देवी-देवताओं की पालकियां भी चलती हैं।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि मंत्रोच्चारण के बीच मिंजर, एक रुपया, नारियल, दूब और फूल को नदी में प्रवाहित करते हुए उन्हें वरुण देवता को अर्पित करते हैं। इसी के साथ मिंजर मेला समाप्त हो जाता है। देवी-देवताओं की प्रतिमाओं और शाही ध्वज को वापस महल में ले जाया जाता है। इसके बाद फिर इंतजार शुरू होता है अगले साल का।

चंबा: सिर्फ तीन दिनों में टूट गया 11 लाख रुपये में बना पुल

भटियात।। चम्बा जिले के खण्ड भटियात की ग्राम पंचायत गोला में भियोरा के स्थानीय लोगों के सपने झूला पुल टूटने के साथ चूर-चूर हो गए। भटियात के विधायक विक्रम जरियाल ने आज से तीन साल पहले विधायक निधि में से 11 लाख रुपये झूला पुल निर्माण के लिए दिये थे।

झूला पुल का निर्माण कार्य लगभग तीन साल पहले ग्राम पंचायत प्रधान कुशमा देवी को भटियात विधायक बिक्रम जरियाल द्वारा सौंपा गया था। ज्ञात हो कि भयोरा के स्थानीय लोगों की मांग थी कि गोला से भयोरा, काथला धुलारा, द्रम्मनाला हजारों राहगीरों को भारी बरसात में जान जोखिम में डाल कर आना-जाना पड़ता है। इसलिए यहां बराहल खड्ड में पुल होना बहुत ही जरूरी है। मगर तीन साल से केवल नाम मात्र दो पिल्लर ही लगाए गए थे जो कि आज गिरने के कगार पर हैं।

इन पिल्लरों की नींव पत्थरों के उपर रखी गई थी। 8 एम॰एम॰ व 10 एम॰एम॰ सरिये का इस्तेमाल किया गया था। स्थानीय लोगों द्वारा वर्तमान विधायक व विभाग से शिकायत की गई कि पुल की नींव अच्छी नहीं बनाई गई है। यहां पर लोकल मटीरियल का प्रयोग किया गया है। 8mm व 10mm सरिये का प्रयोग किया गया है। विभाग ने छानबीन किए बगैर झूला पुल का निर्माण कार्य स्वयं करवाने का निर्णय लिया।

पुल की नींव को न देखते हुए पुल बना दिया गया। मात्र तीन दिन के बाद झूला पुल टूट गया। जिसमें जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ। स्थानीय लोगों ने पुल की जांच उच्च स्तरीय कमेटी से करवाने की भी मांग की। मगर फिर भी विभाग ने दूसरी बार गिरने वाले पिल्लरों के ऊपर पुल बना दिया गया।

तीन दिनों में धराशायी हो गया 11 लाख से बना पुल।पढ़ें: https://bit.ly/317wcFP

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लोगों द्वारा यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि पंचायत, विभाग और सरकार की मिलीभक्त से यहां झूला पुल कार्य में धांधली हो रही है। स्थानीय लोग बी॰ डी॰ सी॰ सदस्य उतम चंद, दुलो राम, चमन सिंह, प्यार चंद, बलदेव सिंह, चूड़ा राम, प्रकाश आदि का कहना है कि यहां भयोरा में ही लगभग 500 के करीब आबादी है। पुल न होने की बजह से स्थानीय लोगों को भारी बरसात के समय जान-माल की भारी किम्मत चुकानी पड़ती है। इस बरसात में तो गाय, भैंस व अन्य मवेशी इस खड्ड में बह चुके हैं।

फेसबुक और व्हाट्सऐप से बचकर रहें कांग्रेस कार्यकर्ता: सुधीर शर्मा

धर्मशाला।। प्रदेश में बैकफुट पर चल रही कांग्रेस ने धर्मशाला उपचुनाव की रणनीति बनाने के लिए बैठक का आयोजन किया। इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर, नेता विपक्ष मुकेश अग्रिहोत्री व धर्मशाला के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा सहित जिला भर के कांग्रेस नेता उपस्थित रहे।

इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भगवान ने कांग्रेस को उपचुनाव का मौका दिया है, जिसे हमें भुनाना है। सुधीर शर्मा ने कहा कि कार्यकर्ता फेसबुक व व्हटसएप से बचकर रहें। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया एक धोखा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकारी तंत्र का जमकर दुरुपयोग होता है, ऐसे में कार्यकर्ता अपनी जानकारी किसी से साझा न करें।

सुधीर ने कहा, “उपचुनाव को गुम होकर लडऩे का मौका है और इसी तरह चुनाव लड़ते हुए हमें चुनाव लड़ना है। साल 1998 में मैंने उपचुनाव लड़ा था और अब 21 साल बाद पुन: भगवान ने मुझे उपचुनाव लडऩे का मौका दिया है।”

राठौर ने किया सुधीर शर्मा का समर्थन
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर ने भी पूर्व विधायक सुधीर शर्मा की सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखने की बात का समर्थन करते हुए कहा कि यह समय एकजुट होकर चुनाव लड़ने का है। सभी एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे तो जीत निश्चित है।