विक्रमादित्य ने क्या कभी अपने पिता वीरभद्र सिंह से ये सवाल पूछे हैं?

आई. एस. ठाकुर।। राजनीति में दोहरे मापदंड होना नई बात नहीं है। लेकिन दोहरी बातें चुपके से बचते-बचाते करने के बजाय खुलेआम की जाएं तो इसे बेशर्मी ही कहा जा सकता है। पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अस्वस्थ हुए तो उन्हें पीजीआई से शिमला लाने के लिए हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ने अपना हेलिकॉप्टर भेज दिया।

इससे कुछ दिन पहले वीरभद्र सिंह के बेटे और शिमला ग्रामीण से कांग्रेस के विधायक विक्रमादित्य सिंह ने जयराम ठाकुर को ‘हेलिकॉप्टर’ वाला सीएम कहा था और सरकारी पैसे के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। मगर जब सीएम ने विक्रमादित्य के पिता को लाने के लिए वही हेलिकॉप्टर भेजा तो जनाब ने विरोध करना तो दूर, मुस्कुराते हुए हेलिकॉप्टर से सेल्फ़ी खींची और फ़ेसबुक पर शेयर की।

जब अपनी बारी आती है और सरकारी पैसे से ख़ुद को लाभ मिलने लगते हैं तो विक्रमादित्य की सारी चिंताएँ दूर हो जाती हैं। इसीलिए जयराम को हेलिकॉप्टर वाला सीएम कहने वाले विक्रमादित्य भूल गए कि कैसे उनके पिता ने निजी कामों के लिए हेलिकॉप्टर इस्तेमाल किया था। वह भूल गए कि वह उनके पिता की ही सरकार ने उन्हें कौशल विकास निगम का डायरेक्टर बना दिया। यह सरकारी पैसे की बेक़द्री और अपने पद को इस्तेमाल करते हुए परिजन को फ़ायदा पहुँचाना नहीं था?

विक्रमादित्य का वह पोस्ट जिसमें सीएम को ‘नाटी किंग’ कहते हुए सवाल उठाए गए हैं।

ऐसा नहीं है कि विक्रमादित्य की स्मृति कमजोर है और इसलिए वह भूल जाते है कि अपने परिवार के सदस्य के राज्य के सत्ता के शीर्ष पर होने के दौरान उन्हें कितने सरकारी लाभ मिले। दरअसल उन्हें मुग़ालता है। मुग़ालता यह कि उनके पिता ने प्रदेश की कई सालों तक सेवा की है, प्रदेश पर उनके पिता के बड़े अहसान हैं, इसलिए जो कुछ सरकार उनके लिए या उनके परिवार के सदस्यों के लिए करती है, वह सरकारी पैसे की बेक़द्री नहीं बल्कि एक तरह का रिटर्न है।

शायद उन्हें लगता है कि क्या हुआ जो सरकार थोड़ा बहुत पैसा अब खर्च कर दे उनके ऊपर, विशेष सुविधाएँ दे दे। विक्रमादित्य मानते होंगे कि भले ही नियमों और क़ानूनों में प्रावधान नहीं है मगर उनका परिवार आज भी सरकारी सुविधाओं के लिए अघोषित रूप से एनटाइटल्ड है। और यह मुग़ालता इस आधार पर कि उनके पिता ने प्रदेश को बहुत कुछ दिया है।

लेकिन सवाल उठता है कि उनके पिता ने प्रदेश को वैसे दिया क्या है? इसमें कोई शक नहीं कि वीरभद्र सिंह इस प्रदेश के सम्मानित नेता रहे हैं और लंबे समय तक हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। मगर उन्होंने राजनीतिक उठापटक, टांग-खिंचाई से अतिरिक्त कुछ भी अभूतपूर्व काम नहीं किया। न तो उनकी योजनाओं में कोई विजन दिखा, न उन्होंने हिमाचल प्रदेश में कुछ ऐसा ला दिया कि प्रदेश उस क्षेत्र में सबसे आगे खड़ा हो गया।

आज विक्रमादित्य सवाल उठा रहे हैं कि प्रदेश 60 हज़ार करोड़ के क़र्ज़ में हैं। क्या उन्होंने अपने पिता से पूछा कि आप इतने समय तक सीएम रहे, क्यों नहीं प्रदेश के लिए रेवेन्यू के स्रोत जेनरेटर कर पाए कि राज्य को चलाने के लिए क़र्ज़ लेना पड़े? क्या उन्होंने अपने पिता से पूछा कि क्यों 45000 करोड़ से अधिक रुपये का क़र्ज़ छोड़कर 2017 में सत्ता से हटे?

वीरभद्र सिंह

वीरभद्र ने तो हिमाचल प्रदेश में शिक्षण संस्थानों को लाने में देरी की। हिमाचल प्रदेश के लोग मामूली कोर्सो के लिए कई सालों तक चंडीगढ़, दिल्ली और यहाँ तक कि श्रीनगर जाते रहे। फिर एक समय ऐसा आया जहां मन आया वहाँ स्कूल खोल दिए, भले अध्यापक हों न हों, इन्फ़्रास्ट्रक्चर हो न हो। नए-नए नियम लाकर बिना टेस्ट वग़ैरह के नए-नए ढंग से टीचर रख दिए। हालत यह हो गई कि प्राइमरी स्कूल वाले इन्फ्रास्ट्रक्टर में कॉलेज तक खोल दिए।

ख़ुद अस्वस्थ होने पर इलाज के लिए वीरभद्र चंडीगढ़ से लेकर चेन्नई के अस्पतालों में जाते रहे मगर यह सुध नहीं ली कि हिमाचल प्रदेश में ढंग का संस्थान खोल दिया जाए। आज बेरोज़गारी पर शोर कर रहे विक्रमादित्य ने क्या कभी वीरभद्र सिंह से पूछा कि आपकी सरकार कितने लोगों को रोज़गार दे गई? क्या विक्रमादित्य के पास देने को आँकड़ा है कि उनके पिता की सरकार के दौरान कितने लोगों को निजी क्षेत्र में नौकरियाँ सरकार की पहल से दी गईं? क्या वह बता सकते हैं कि 2012-17 तक उससे पिछली सरकार की तुलना में कितनी सरकारी नौकरियाँ दी गईं?

आज विक्रमादित्य आरोप लगाते हैं कि ‘शिखर की ओर सिराज।’ यानी सिराज का ही विकास हो रहा है। सिराज प्रदेश के सबसे पिछड़े इलाक़ों में है। वहाँ विकास हुआ न हो, मगर होना चाहिए और प्रदेश के बाक़ी हिस्सों की तरह बराबरी से होना चाहिए। अगर इस टिप्पणी से विक्रमादित्य का इरादा पक्षपात करके सिराज को अधिक सुविधाएँ देने के आरोप से है तो उन्हें पहले अपने पिता से पूछना चाहिए कि पिछली सरकार में क्यों शिमला रूरल इलाक़े में योजनाओं और घोषणाओं की झड़ी लगा दी थी? क्या यह सब इसलिए नहीं किया गया क्योंकि वीरभद्र अपने पुत्र यानी आपको वहाँ से चुनाव लड़वाना चाहते थे?

और पक्षपात की ही बात है, यह तथ्य है कि सचिवालयों के से लेकर शिमला के अहम पदों पर वीरभद्र के सत्ता में रहते किस क्षेत्र से संबंध रखने वाले लोगों और किन उपनाम वाले लोगों को अधिक नौकरियाँ दी गईं, किन्हें अहम पदों पर नियुक्तियाँ दी गईं। आज सरकारी पैसे से शिमला की रैली के लिए सरकारी बसों के दुरुपयोग का आरोप लगाने वाले विक्रमादित्य ने कभी अपने पिता से पूछा कि 2017 में मंडी में हुई राहुल गांधी की रैली के लिए एचआरटीसी की बसों का किराया उन्होंने अपने जेब से भरा है या नहीं?

और तो और, जब वीरभद्र सरकार के आख़िरी दिन थे तो एक नई पॉलिसी को मंज़ूरी दे दी गई थी।इसके तहत रियासत काल की धरोहरों, जिनमें भवन, किले, महल, लॉज और हवेलियां शामिल हैं, को संजोना जाना था और इन इमारतों के रखरखाव के लिए प्रदेश सरकार की ओर से भवन या महल के मालिक को 50 फीसदी रकम मिलनी थी। इसका सीधा लाभ वीरभद्र और अन्य राजघरानों को हुआ जिनके पूर्वज रियासतों के राजा था। यानी अपने महल, जिसकी फ़ोटो विक्रमादित्य शान से डालते हैं, उनकी मैनेटेनेंस का इंतज़ाम भी भी वीरभद्र सरकारी पैसे से करवा गए थे। (आगे दिए गए लिंक पर क्लिक करें)

जिस तरह ‘हेलिकॉप्टर वाला सीएम’ कहने के बाद विक्रमादित्य को ख़ुद बैकफ़ुट पर आना पड़ा था, उसी तरह उन्हें ‘नाटी किंग’ वाले बयान पर भी आना पड़ेगा, जब वह अपने पिता से हिसाब लेंगे कि उन्होंने सबसे लंबे समय पर हिमाचल का मुखिया रहकर प्रदेश के लिए नाटी डालने के अलावा क्या किया। क्योंकि नाटी तो वीरभद्र भी डालते थे और जयराम ठाकुर से बढ़िया डालते थे। हो सकता है आधुनिक होने के कारण विक्रमादित्य को संस्कृति और परंपराओं से लगाव न हो। मगर वीरभद्र सिंह इसे हिमाचल प्रदेश की शान मानते थे।

बहरहाल, विक्रमादित्य अपने पिता से हिमाचल के हितों को लेकर सवाल पूछें या न पूछें, ज़रूरी है कि वह मौजूदा सरकार से पूछते रहें और विपक्ष में होने के नाते उनका यह काम भी है। मगर हिमाचल की जनता तो जयराम से भी सवाल पूछेगी कि आप अभी क्या कर रहे हैं और प्रेम कुमार धूमल व वीरभद्र सिंह से पूछेगी कि आपने क्या किया। ऐसा वह करती भी रही है और आगे भी करेगी। क्योंकि नेता कोई भी हो, प्रदेश के लिए जो कुछ करता है अपनी जेब से नहीं, जनता के ही पैसे से करता है।

बहरहाल, चलते-चलते वीरभद्र सिंह का एक नाटी देखिए।

जब वीरभद्र सिंह ने डाली नाटी

उम्र 81 साल, फिर भी जोश और उत्साह में कमी नहीं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री Virbhadra Singh कुछ इस तरह नाटी डालते नजर आए…

In Himachal ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಶುಕ್ರವಾರ, ಜೂನ್ 3, 2016

(लेखक लंबे समय से हिमाचल प्रदेश से जुड़े विषयों पर लिख रहे हैं। उनसे kalamkasipahi @ gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है)

ये लेखक के निजी विचार हैं

जनमंच में गुस्सा दिखाकर, डांट-डपटकर प्रपंच क्यों कर रहे मंत्री

सेल बढ़ाने और तस्करी रोकने के लिए शराब से टैक्स घटाएगी सरकार

शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य में शराब की खपत को बढ़ाने और अन्य राज्यों से होने वाली तस्करी रोकने के लिए टैक्स घटाने जा रही है। प्रदेश आबकारी विभाग अगले वित्त वर्ष की नई आबकारी नीति के लागू होने से पहले इस प्रस्ताव को सरकार को भेजने की तैयारी कर रहा है। माना जा रहा है कि अगर टैक्स में कमी की गई तो चंडीगढ़ से हिमाचल आने वाली अवैध शराब की तस्करी कम हो जाएगी।

इसके साथ ही सरकार को उम्मीद है कि वर्तमान में प्रदेश में विभिन्न श्रेणी की शराब की बोतलों की बिक्री भी 75 लाख से बढ़कर 1.50 करोड़ पहुँच सकती है। प्रदेश के राजस्व को लक्ष्य से एक हजार करोड़ तक बढ़ाने के बाद अब प्रदेश कर एवं आबकारी विभाग ने अगले साल की कवायद भी शुरू कर दी है। प्रमुख सचिव आबकारी संजय कुंडू ने बताया कि इस संबंध में प्रस्ताव बनाया जाएगा ताकि प्रदेश में राजस्व को बढ़ाया जाए।

इसके तहत प्रदेश के लिए सबसे बड़ी समस्या बनी चंडीगढ़ से आ रही अवैध शराब से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। चंडीगढ़ की तर्ज पर प्रदेश सरकार भी शराब पर लगने वाले टैक्स में भारी कटौती करने पर विचार कर रही है।

प्रदेश आबकारी विभाग इस संबंध में एक प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजने जा रहा है। एक पक्ष यह था कि अगर टैक्स कम हुआ तो प्रदेश को होने वाले राजस्व में भी कमी आएगी। लेकिन आला अधिकारियों का दावा है कि टैक्स कम होने और तस्करी पर सख्ती के बाद चंडीगढ़ से शराब की तस्करी पर रोक लगेगी। साथ ही शराब की प्रदेश में होने वाली बिक्री 75 लाख से बढ़कर 1.50 करोड़ तक पहुंच जाएगी।

हिमाचल कांग्रेस के अध्यक्ष कुलदीप राठौर बोले- अंग्रेजों के मुखबिर थे भाजपाई

शिमला।। शनिवार को शिमला में कांग्रेस के 134वें स्थापना दिवस के मौक़े पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप राठौर ने कहा कि ‘भाजपाई अंग्रेजों के मुखबिर थे।’ पार्टी मुख्यालय राजीव भवन में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “स्वतंत्रता आंदोलन में भाजपा के किसी भी नेता का कोई योगदान नहीं रहा। कांग्रेस ने भारत का निर्माण किया है। केंद्र सरकार इस सच्चाई को दबाने में जुटी है।”

राठौर ने कहा, “सरकार संविधान के साथ छेड़छाड़ कर रही है। मूलभूत समस्याओं से जनता का ध्यान भटकाने को सोची समझी चाल के तहत देश में माहौल खराब किया जा रहा है। इसके चलते कांग्रेस ने भारत बचाओ, संविधान बचाओ अभियान चलाने का फैसला लिया है।” राठौर ने नागरिक संशोधन कानून को देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा बताया।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “भाजपा नेताओं की देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल से गृह मंत्री अमित शाह की तुलना करना दुर्भाग्यपूर्ण है। पटेल ने देश को आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। टुकड़ों में बंटे देश को जोड़ा था। अमित शाह के गुजरात का गृह मंत्री रहते वहां दंगे हुए। अब केंद्र में गृह मंत्री बनने पर देश में माहौल खराब किया जा रहा है। कल को भाजपा के लोग महात्मा गांधी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना शुरू कर देंगे।”

जयराम सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महिलाओं की फीस माफ की

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने 15 अगस्त को की गई घोषणा को पूरा कर दिया है। जयराम सरकार ने देवभूमि की लाखों महिलाओं को नए साल की सौगात दी है। महिलाओं को हिमाचल में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवेदन करते समय फीस नहीं भरनी होगी।

शनिवार कोई हुआ जयराम सरकार की कैबिनेट बैठक में राज्य लोकसेवा आयोग और राज्य कर्मचारी अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं के लिए महिलाओं की फीस माफ कर दी गई।

कैबिनेट के अन्य फैसले पढ़ने के लिए नीचे टैप करें-

हिमाचल में भरे जाएँगे सैकड़ों ख़ाली पद, जानें कैबिनेट के अहम फ़ैसले

हिमाचल में भरे जाएँगे सैकड़ों ख़ाली पद, जानें कैबिनेट के अहम फ़ैसले

शिमला।। शनिवार को हुई जयराम सरकार की कैबिनेट बैठक में नौकरियों को लेकर कई निर्णय लिए गए। इससे पहले बैठक में सरकार के दो साल पूरे होने के मौके पर शिमला में आयोजित कार्यक्रम को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा का धन्यवाद किया गया।

जयराम सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महिलाओं की फीस माफ की

आगे पढ़ें, कैबिनेट के कुछ मुख्य फ़ैसले-

  • 9वीं, 10वीं में पढ़ रहे बच्चों को मिलेंगी किताबें
  • योजनाओं के तहत दी जाने वाली राशि में इजाफा
  • 10 सब्जी मंडियों को e-NAM से लिंग किया जाएगा, इसके तहत किसानों को सही दाम मिलने की संभावना रहेगी
  • HAS की 10 पोस्टें भरी जाएंगी
  • 174 पोस्टें पुलिस विभाग में भरी जाएंगी
  • मंडी मेडिकल कॉलेज में अलग अलग विभाग की 7 पोस्टें भरी जाएंगी
  • IGMC शिमला में 2 पोस्टें भरी जाएंगी
  • चच्योट के बैला गांव में खुलेगा हेल्थ सेंटर, साथ में 6 पोस्टें भी भरी जाएंगी
  • मंडी के नगवां में CHC खुलेगा और साथ ही 19 पोस्टें भरी जाएंगी और 50 बेड भी दिए जाएंगे
  • एक्साइज एंड टैक्सटेशन विभाग में 50 पोस्टें भरी जाएंगी
  • डीसी शिमला में JoA की 25 पोस्टें भरी जाएंगी
  • सराली स्टेशन सोलन में 13 पोस्टें भरी जाएंगी
  • खालिनी शिमला और लोहारा मंडी में हेल्थ सब सेंटर खुलेंगे
  • IPH विभाग में 5 पोस्टें भरी जाएंगी
  • जिला पर्यटन विभाग का चंबा में ऑफिस खुलेगा, साथ ही 23 पोस्ट भी भरी जाएंगी

नेपाल से लाई गई 15 किलो चरस के साथ दो महिलाएँ गिरफ्तार

कुल्लू।। हिमाचल प्रदेश पुलिस ने कथित तौर पर नेपाल से मणिकर्ण लाई गई 15 किलो चरस के साथ दो नेपाली महिलाओं को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये महिलाएँ इसे कसोल में बेचने की तैयारी में थीं। दोनों महिलाओं ने चरस कपड़ों के अंदर शरीर से बांधकर रखी थी, जिससे कोई इन पर शक न कर सके।

कुल्लू पुलिस की ओर से इस वर्ष एक ही मामले में पकड़ी गई यह चरस की सबसे अधिक खेप है। पुलिस का कहना है कि उसे सूचना मिली थी कि दो नेपाली महिलाएं पार्वती घाटी में नशे की बड़ी खेप लेकर आ रही हैं। पुलिस ने महिलाओं को सर्विलांस पर लगाकर ट्रेस करना शुरू किया। शुक्रवार को दोनों हरिद्वार से भुंतर पहुंचीं।

यहां उन्होंने एक हजार रुपये भाड़े पर एक टैक्सी मणिकर्ण के लिए बुक की। मणिकर्ण में पंजाबी चूल्हा नामक जगह के पास पहुंचीं तो एएसआई भूप सिंह, हेड कॉन्स्टेबल संजय कुमार, एलएचसी मुरलीधर, कांस्टेबल मनोज, होमगार्ड हेमराज, एलसी नंदिनी और वर्षा की टीम ने टैक्सी को रात पौने दो बजे रोका।

तलाशी के दौरान महिला श्रेया थापा (26), कपिलवस्तु, लुंबिनी (नेपाल) से दस किलो 190 ग्राम, विशुन कला (32), कपिलवस्तु, लुंबिनी (नेपाल) से पांच किलो 212 ग्राम चरस बरामद हुई। बताया जा रहा है कि पिछले दो माह में मणिकर्ण घाटी में करीब डेढ़ दर्जन एनडीपीएस के मामले दर्ज किए गए हैं।

चरस की इतनी बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है। उधर, पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने कहा कि पुलिस ने मणिकर्ण में 15 किलो चरस के साथ दो नेपाली महिलाओं को गिरफ्तार किया है। यह एक केस में पकड़ी गई वर्ष 2019 की सबसे बड़ी खेप है। आरोपी महिलाएं नेपाल से नशे की खेप लाई थीं। इसे कसोल में बेचा जाना था।

इंटरनेट पर डाल दिए सहेली के फोटो और नंबर, मामला दर्ज

शिमला।। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक युवती ने अपने सहेली के आपत्तिजनक फोटो वेबसाइट पर अपलोड कर दिए। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उसकी सहेली ने उसका चरित्र हनन करने के लिए इस तरह की घिनौनी हरकत की है।

युवती ने आरोप लगाया है कि सहेली ने उसकी बेइज्जती करने के इरादे से उसका मोबाइल नंबर भी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया। युवती के मुताबिक़, उसे इस बात का पता तब चल जब उसके नंबर पर अनजान नंबरों से फोन आना शुरू हुए। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस को इसकी सूचना दी।

पीड़िता की शिकायत पर ढली पुलिस ने युवती की सहेली के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री के राज में नंबर 1 बनेगा हिमाचल: अनुराग ठाकुर

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में जयराम सरकार के दो साल पूरे होने के मौक़े पर शिमला के रिज में आयोजित रैली के दौरान केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री ने प्रदेश सरकार को 2 साल के जश्न पर बधाई दी।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि 2 सालों में प्रदेश सरकार का कार्य उपलब्धियों भरा रहा। उन्होंने कहा, “अगले 3 सालों में प्रदेश नम्बर 1 राज्य बनेगा। हिमाचल देश का ऐसा पहला राज्य है जहां हर घर में गैस का कनेक्शन है। हिम केयर लोगों के लिए बेहतर साबित हो रहा है। राइजिंग हिमाचल से प्रदेश के युवाओं को रोजगार मिलेगा।”

इस दौरान अनुराग ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देश के गृहमंत्री अमित शाह की भी तारीफ़ की। उन्होंने कहा, “देश में प्रथम गृहमंत्री पटेल के बाद मौजूदा गृहमंत्री ने देश की एकता और अखंडता के लिए काम किया। 370 और 35A को हटाया, तीन तलाक खत्म किया, राम मंदिर बनाने का रास्ता भी साफ़ किया।”

राठौर को नेता मानने को तैयार नहीं कांग्रेसी: सत्ती

शिमला।। [responsivevoice_button] हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने दावा किया है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर को कांग्रेसी नेता मानने के लिए तैयार नहीं हैं।

सत्ती ने कहा कि बिना सेना के राठौर इस समय महज अखबारी नेता बनकर रह गए हैं।

उन्होंने बयान जारी करके आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता नागरिकता संशोधन अधिनियम को धर्म से जोड़कर लोगों में फूट डालने का प्रयास कर रहे हैं।

सत्ती ने कहा कि राठौर सुर्खियां बटोरने के लिये अनाप शनाप बयानबाजी कर रहे हैं।

मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर को क्यों मिली हैं 4 सरकारी गाड़ियां, कौन कर रहा सैर?

मंडी।। मंडी में हुए कार्यक्रम में भाषण देते हुए धर्मपुर के विधायक और राज्य सरकार में मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि ‘सीएम का पद महालक्ष्मी’ का पद होता है। बाकियों का पता नहीं, महेंद्र के लिए मंत्री पद जरूर साधन और सुविधाओं वाला पद बन गया है।

अक्सर चर्चा में रहने वाले आईपीएच और बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर को सरकार की ओर से चार गाड़ियां मिली हैं। इनमें एक सरकार की ओर से मंत्री को मिलने वाली गाड़ी है। इसके अतिरिक्त जीएडी ने उन्हें एक और गाड़ी दी है। इसके अलावा महेंद्र ठाकुर के लिए बागवानी और आईपीएच की भी एक-एक गाड़ियां दी गई हैं। यानी चार।

बात सिर्फ गाड़ियों की नहीं, इनके ड्राइवर्स की सैलरी भी सरकार देती है और ईंधन का खर्च भी। ये सब जानकारियां पिछले दिनों भूपेंद्र सिंह की ओर से डाली गई आरटीआई से मिली हैं। भूपेंद्र का दावा है आईपीएच से मिली गाड़ी(HP63D0001) को मंत्री की बेटी इस्तेमाल करती हैं जबकि एक अन्य गाड़ी को बेटा।

भूपेंद्र कहते हैं, “इनकी यात्राओं पर लाखों रुपये सरकारी विभाग खर्च कर रहे हैं। इस परिवारराज और फिजूलखर्ची के बारे प्रदेश के मुख्यमंत्री मूक दर्शक बने हुए हैं जबकि जनता के पैसे का दुरुपयोग मन्त्री के परिवार द्धारा किया जा रहा है।”

आरटीआई से पता चला है कि इस वर्ष जनवरी से सितंबर तक जीएडी ने आईपीएच मन्त्री की गाड़ियों के ईंधन आदि पर ही 6 लाख रुपये खर्च कर दिए। जाहिर है विभाग से जारी दो गाड़ियों के ईंधन का खर्च अलग होगा।

आरोप लग रहे हैं कि दो गाड़ियों को मंत्री के परिवार के सदस्य निजी और राजनीतिक कामों में इस्तेमाल करते हैं। इसलिए इनसे पिछले दो सालों में हुआ खर्च वापस लेना चाहिए। गौरतलब है कि मंत्री पर अपनी जगह बेटे से उद्घाटन आदि करवाने के आरोप भी लगे हैं। उनकी चिठ्ठियां भी वायरल हुई थीं जिनमें उन्होंने अपने क्षेत्र के लोगों को नौकरियों के लिए आवेदन करने को कहा था और हर सम्भव मदद का भरोसा दिलाया था।

यह भी कमाल है कि कई विवाद जुड़ने के बावजूद सीएम का ध्यान इस बात पर नहीं जाता कि महेंद्र क्या कर रहे हैं, क्या कह रहे हैं और उन्हें लेकर कौन सी खबरें मीडिया में छाई हैं। बहरहाल, सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक मंत्री को चार गाड़ियों की क्या जरूरत?

महेंद्र सिंह ठाकुर को ‘क्षमतावान’ बताने वाले सर्वे पर उठे सवाल