हिमाचल: कोका कोला ने नहीं किया लॉकडाउन का पालन, FIR

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में कोरोना वायरस के ख़तरे को टालने के लिए उठाए गए एहतियाती कदमों को नज़रअंदाज़ करने के लिए कोका कोला के प्लांट पर एफआईआर की गई है। आवश्यक चीज़ों और सेवाओं के अलावा अन्य सभी चीज़ों को बनाने वाले प्लांट लॉकडाउन के कारण बंद रखने होते हैं मगर अधिकारियों का कहना है कि कोका कोला का संयंत्र चल रहा था।

सोलह के बद्दी के पुलिस अधीक्षक रोहित मालपानी ने कहा कि नालागढ़ में कृष फ्लैक्सीपैक्स की ओर से चलाई जा रही कोका कोला फैक्ट्री का सोमवार रात को अचानक निरीक्षण किया गया, जिसमें इसे खुला पाया गया।

पंजाब केसरी की ख़बर के अनुसार, रोहित मालपानी ने कहा कि नालागढ़ पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 188 (सार्वजनिक सेवक के विधिवत आदेश की अवज्ञा) के तहत कारखाने और उसके मालिकों के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।

पुलिस की ओर से की गई इस कार्रवाई पर कंपनी की आधिकारिक प्रतिक्रिया ख़बर लिखे जाने तक सार्वजनिक नहीं हुई है।

हिमाचल में सरकारी दफ्तर 26 मार्च तक बंद, कर्मचारियों को विशेष निर्देश

कोरोना वायरस की ज़रूरी बातें जो आपको मालूम होनी चाहिए

हिमाचल में सरकारी दफ्तर 26 मार्च तक बंद, कर्मचारियों को विशेष निर्देश

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में लॉकडाउन के चलते सरकारी कार्लाययों को 26 मार्च तक बंद रखने का फ़ैसला किया गया है। राज्य सरकार की ओर से ज़रूरी सेवाओं के लिए जिन कार्यालयों को अधिसूचित किया गया है, वे खुले रहेंगे। सीएम जयराम ठाकुर ने अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद यह फ़ैसला लिया है।

सीएम कर्मचारियों से अपील की है कि वे अपने परिजनों के साथ घरों पर रहें और वे स्टेशन से दूर न जाए क्योंकि किसी भी समय उन्हें कार्यालय बुलाया जा सकता है। यानी अगर मूल रूप से मंडी का कोई शख़्स शिमला में नौकरी कर रहा है तो उसे मंडी नहीं जाना होगा। शिमला में ही रहना होगा।

लॉकडाउन के चलते किराना, दवाई और सब्ज़ियों जैसी ज़रूरी चीज़ों की दुकानें ही खुली रहेंगी, इसके अलावा अन्य कारोबारी गतिविधियों पर रोक है। राज्य की सभी सीमाओं को सील कर दिया गया है और परिवहन सेवाएँ भी निलंबित हैं।

कोरोना वायरस की ज़रूरी बातें जो आपको मालूम होनी चाहिए

कोरोना वायरस से पीड़ित मिले दो हिमाचली, टांडा में इलाज शुरू

धर्मशाला।। हिमाचल प्रदेश में कोरोना वायरस के दो मामलों की पुष्टि हुई है। इनमें एक महिला है और एक पुरुष। दोनों काँगड़ा ज़िले के हैं मगर दोनों की ट्रैवल हिस्ट्री अलग है।

शुक्रवार को 63 वर्षीय महिला और 32 वर्षीय युवक को पॉजिटिव पाया गया। यह महिला 19 मार्च को दुबई जाकर लौटी थीं और युवक सिंगापुर से भारत आया था। दोनों ही संक्रमित लोगों को कांगड़ा स्थित डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

इसके अलावा प्रदेश के अलग-अलग अस्पतालों में कोरोना वायरस संक्रमण के पांच संदिग्ध मरीजों को भर्ती किया गया है। ये संदिग्ध मामले सोलन और ऊना ज़िले के हैं, पुष्टि होना बाकी है।

इन लोगों की ट्रैवल हिस्ट्री और लक्षणों को देखते हुए माना जा रहा है कि इन्हें कोरोना वायरस संक्रमण हो सकता है। मगर जांच की रिपोर्ट के बाद ही पता चल पाएगा कि वाक़ई ऐसा है या नहीं।

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अनुराग ठाकुर से पत्रकारों ने किए तीखे सवाल, हुए असहज

चंडीगढ़।। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर रविवार को चंडीगढ़ में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में अपने विवादित ‘गोली मारो’ बयान पर जवाब देने से कतरा गए। पत्रकारों ने जब दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान उनके भड़काऊ बयान पर सवाल किया तो वे कन्नी काट गए। उल्टा मीडिया को ही उन्होंने नसीहत दे दी कि उनके सवाल उनके विभाग से ही जुड़े होने चाहिए। वह सवालों से असहज भी नजर आए।

अनुराग ठाकुर ने कहा, “ऐसा है भाई साहब ,अगर आपके पास इकोनॉमी को लेकर कोई प्रश्न है तो जरूर पूछिए क्योंकि जब डिपार्टमेंट की प्रेस कॉन्फ्रेंस है तो आपको उस तक सीमित रहना पड़ेगा।” अनुराग ठाकुर से पूछा गया कि उनको अपने बयान पर कोई सफाई देनी है तो क्या कहना चाहेंगे। इस पर उनका जवाब था कि जो लोग दंगे भड़काने के आरोपी हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

अनुराग ठाकुर ने कहा, “इस पर क्लेरिफिकेशन क्या चाहिए .जो दंगे भड़काने में या जो दंगे में शामिल होंगे उनके ऊपर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। इसमें सोचने वाली बात ही नहीं है।” अनुराग ठाकुर जवाब देने से कतराते रहे और पत्रकार सवाल दागते रहे। जब उनसे सवाल किया गया कि उन्होंने ऐसा भड़काऊ बयान क्यों दिया तो अनुराग ठाकुर ने सीधे तौर पर कहा कि पत्रकार झूठ बोल रहे हैं।

'देश के गद्दारों को' वाले नारे पर सवाल पूछा तो केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के चेहरे का रंग उड़ा। पत्रकारों को ही दे दी नसीहत, कहा- अपनी जानकारी बढ़ाओ।

In Himachal ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಭಾನುವಾರ, ಮಾರ್ಚ್ 1, 2020

आखिर में पत्रकारों के लगातार आ रहे सवालों जे अनुराग के चेहरे का रंग बदल गया। अनुराग ठाकुर ने कहा, “क्या कहा मैंने? यह आप बिल्कुल झूठ बोल रहे हैं। इसलिए मैं तभी कहता हूं कि मीडिया की जानकारी जितनी है। पहले अपनी जानकारी में सुधार कीजिए।”

सवाल पूछने पर अनुराग ने मीडिया को ही सलाह दे डाली। लेकिन अनुराग ठाकुर पर सवालों की बौछार जारी रही। जब उनसे यह कहा गया कि अगर मीडिया के पास अधूरी जानकारी है तो आखिर सच है क्या तो अनुराग ने यह कहकर बात टाल दी कि मामला अब न्यायालय के विचाराधीन है।

अनुराग ठाकुर ने कहा, “मैटर सब-जुडिस है इसलिए मैं ज्यादा नहीं बोल रहा। ठीक है ना! इसलिए आप अपनी जानकारी में भी सुधार लाइए। आपको पूरी जानकारी रहनी चाहिए। आधी जानकारी किसी के लिए भी घातक है। वह मीडिया का दुष्प्रचार हो या किसी और का हो। आपको मुझे लगता है जानकारी पूरी होनी चाहिए।”

विक्रमादित्य ने जयराम को कहा- वीरभद्र से सीखो सरकार चलाना

शिमला।। विधायक विक्रमादित्य सिंह ने कहा है कि ‘गुटबाजी में बंटी भाजपा के आगे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बेबस नजर आ रहे हैं।’

शिमला ग्रामीण के विधायक और पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के बेटे ने कहा कि इस गुटबाजी के कारण मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल विस्तार नहीं कर पा रहे हैं।

कांग्रेस विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री को सार्वजनिक मंचों पर कहना पड़ रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार जल्द होगा मगर इस पर वह कोई निर्णय नहीं ले पा रहे हैं।

विक्रमादित्य ने सरकार पर अफसरशाही के दबाव में आकर काम करने का आरोप भी लगाया जिससे प्रदेश के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को शासन और प्रशासन चलाने की कुछ सीख पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से लेनी चाहिए।

विक्रमादित्य ने कहा कि वीरभद्र सिंह ने अपने शासनकाल में जिस प्रकार से बिना किसी भेदभाव के प्रदेश का विकास किया, उससे लोग आज भी उनके मुरीद हैं।

हिमाचल पर लघुकथा: बेटा, पहले ये करो फिर काशीफल खाएंगे

मुक्तकंठ कश्यप।।

गुरु : बेटा सुबह हो गई है। जाओ जंगल से लकड़ियां बटोर कर लाओ फिर काशीफल खाएंगे। समझो कि यह लोकसभा चुनाव है।चेला: जी गुरु जी ले आया। लाइये काशीफल!
गुरु: बेटा अब आग जलाओ। इसे इन्वेस्टर्स मीट समझो फिर काशीफल खाएंगे।
चेला: गुरु जी कर दिया जी।
गुरु: बेटा अब बैठने का स्थान साफ कर दो, समझो कि यह उपचुनाव है।
चेला: गुरु जी, दो स्थान साफ कर दिए जी। लाइये काशीफल!
गुरु: अब पहाड़ पर खड़े होकर मेरे सुर में मिलाओ, प्रदेश के सुर में सुर मिलाओ। समझो कि यह हवाई अड्डे का विस्तार है। फिर काशीफल खाते हैं।
चेला: गुरु जी कर दिया। लेयाओ काशीफल!
गुरु: अब मैं ध्यान लगा रहा हूं, अपने गुरुओं को याद कर रहा हूं, किचन गार्डन में कुछ उत्पाती प्राणी आ गए हैं जो काशीफल की बेल को खींच रहे हैं। साथ दो। फिर खाएंगे काशीफल।
चेला: गुरु जी ठीक है लेकिन ये तो बताओ कि काशीफल होता क्या है?
गुरु: बेटा इसे कद्दू कहते हैं।

(लेखक साहित्य और समाज से जुड़े विषयों पर तीखी टिप्पणियों के लिए सोशल मीडिया पर चर्चित हैं)

नेताओं का दुलारा, हिमाचल का विवादित बाबा- अमरदेव

सोलन।। राजनीति और तथाकथित धर्मगुरुओं का मेल कितना खतरनाक साबित हो सकता है, यह हमें कई बार देखने को आया है। हिमाचल के कुछ अखबारों ने हाल के दिनों में सोलन के साधुपुल के मंदिर के बारे में और यहां के संस्थापक बाबा अमरदेव के बारे में लंबे लंबे आर्टिकल छापे हैं। वे बता रहे कि कैसे यहां बड़े-बड़े नेता आ रहे। मगर पहले काफी खुलकर रिपोर्टिंग करने वाले कुछ अखबार अब इसका जिक्र नहीं कर रहे कि इस मंदिर और बाबा के साथ क्या विवाद जुड़े हैं। यानी वे सिर्फ इस मंदिर का विज्ञापन कर रहे। हम बताते हैं इस मंदिर का और इसके बाबा से जुड़े विवाद का इतिहास

सोलन के रामलोक आश्रम के विवादित बाबा ‘अमरदेव’ जानवरों की खालों की तस्करी से लेकर तलवार से महिला को जख्मी करने जैसे मामलों में अभियुक्त रहे हैं। मगर पहुंच ऐसी कि रातो-रात पूरा पुलिस स्टेशन ट्रांसफर हो जाता है। नज़र डालते हैं, क्या हैं बाबा को लेकर अब तक के प्रमुख घटनाक्रम। जानिए, किस दिन बाबा को लेकर क्या खबर छपी थी। साथ में हाइपरलिंक पर क्लिक करके आप उस संबंध में पूरी खबर पढ़ सकते हैं:

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22 अप्रैल, 2016: आश्रम से खालें बरामद, बाबा अरेस्ट
साधुपुल के समीप रामलोक मंदिर में रहने वाले हाई प्रोफाइल बाबा अमरदेव के पास तेंदुए की चार खालें मिलने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। प्रदेश सीआईडी की टीम ने साधुपुल के समीप रूढ़ा में रामलोक मंदिर से चार तेंदुए की खालें बरामद की थीं। ‘दिव्य हिमाचल’ अखबार ने लिखा था– ‘अमरदेव की गिरफ्तारी से कई मंत्रियों व अधिकारियों में भी हड़कंप मच गया है। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री धनीराम शांडिल, एसपी प्रदेश विजिलेंस रमेश छाजटा भी बाबा अमरदेव के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए अकसर आते रहते थे।’

25 जुलाई, 2016: बाबा के अवैध कब्जे को नियमित करने की तैयारी
‘हिमाचल अभी अभी’ ने लिखा– बाहरी राज्य के बाबा पर वीरभद्र सरकार भी मेहरबान दिख रही है। अवैध रूप से बनकर तैयार श्री रामलोक मंदिर को नियमित करने पर कैबिनेट में सहमति बनती दिख रही है। जिस भूमि को दबाकर मंदिर बनाया गया है, वह कभी पंचायत के सामुदायिक भवन के लिए सरकार ने पंचायती राज विभाग को दी थी। इस पर कब्जे के बाद विवाद बढ़ा तो डीसी सोलन को कब्जा छुड़ाने की प्रक्रिया चलानी पड़ी। मगर जैसे ही सरकार के कुछ मंत्री इस सारे खेल में पड़े, वैसे ही जिला प्रशासन सोलन को कब्जा छुड़ाने की प्रक्रिया रोकनी पड़ी।

26 अप्रैल, 2017: तलवार के वार से महिला ज़ख्मी, बाबा की धुनाई
बाबा अमरदेव पर आरोप एक महिला पर तेजधार हथियारों से हमला करने का। महिला के पेट में गहरा ज़ख्म आया उसे अस्पताल में भर्ती किया गया। लोग भड़क गए और उन्होंने बाबा की धुनाई कर दी।

पुलिस आई और बाबा को थाने ले जाकर बयान दर्ज किया गया। पंजाब केसरी अखबार ने दावा किया कि बाबा के बड़े लिंक हैं। मंत्री धनी राम शांडिल, कौल सिंह और ठाकुरसिंह भरमौरी यहां हाजिरी भरते हैं। इससे पहले बाबा ने पत्रकारों के गले काटकर माला बनाने की धमकी भी दी थी। बाबा ने कहा मुझे जलाने की कोशिश हुई।

7 मई, 2017: आईजीएमसी जाकर बाबा से मिले वीरभद्र
रविवार के दिन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह शिमला के आईजीएजी जाकर मिले और हालचाल पूछे।

9 मई, 2017: पूरे कंडाघाट पुलिस स्टेशन का तबादला
सीएम से मुलाकात के 48 घंटों के अंदर ही कंडाघाट पुलिस स्टेशन पर तैनात 18 पुलिसकर्मियों का तबादला कर दिया गया। पूरे इलाके में लोग पुलिसकर्मियों के इस तबादले को बाबा अमरदेव के हिमाचल सरकार के एक मंत्री से रिश्ते और मुख्यमंत्री से मुलाकात के साथ जोड़ रहे हैं। अमर उजाला के मुताबिक एसपी सोलन ने कंडाघाट के एसएचओ दलीप सिंह समेत 18 पुलिस कर्मियों का तबादला किया है। एसआई संदीप कुमार को एसएचओ कंडाघाट लगाया गया।

14 मई, 2017: कंडाघाट के 35 गांवों की महापंचायत
35 गांवों की महापंचायत ने फैसला किया है कि बाबा को गांव में घुसने नहीं दिया जाएगा। इस बीच सोलन के उपायुक्त राकेश कंवर ने रामलोक मंदिर का जायजा लिया। उपायुक्त ने विश्वास दिलाया कि मसले का सौहार्दपूर्ण तरीके से हल निकाला जाएगा। इस दौरान ग्रामीणों ने डीसी से आग्रह किया कि सरकार को अवगत करवाया जाए कि रूढ़ा गांव में बाबा अमरदास को स्थानीय लोग नहीं रखना चाहते।

17 मई, 2017: बाबा की गाड़ी में मिला वायरलेस सेट
दिव्य हिमाचल अखबार ने लिखा– बाबा अमरदेव की लग्जरी गाड़ी में वायरलेस सेट पाया गया है। इस प्रकार का वायरलेस सेट केवल सरकारी वीआईपी गाडि़यों में ही होता है। बाबा की निजी गाड़ी में इस सेट के मिलने के बाद जांच एजेंसियों के भी कान खड़े हो गए हैं।

गौरतलब है कि इसी दिन से आईजी दक्षिण रेंज जहूर हैदर जैदी ने जांच शुरू की थी। इसके बाद से जांच की दिशा ही बदल गई। कैसे, जानने के लिए आगे पढ़ें।

25 मई, 2017: पुलिस की मौजूदगी में बाबा की गाड़ियां रवाना
हिंदी अखबार पंजाब केसरी ने लिखा– बाबा अमरदेव की महंगी गाड़ियां उनके ही समर्थक ले गए हैं। बुधवार को बाबा के समर्थक यहां पहुंचे और मंदिर के आंगन में खड़ी गाड़ियों को ले गए। अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि यह गाड़ियां कहां ले जाई गई हैं। बताया जाता है कि गाड़ियां पुलिस की मौजूदगी में ले जाई गईं।

3 जून, 2017: पुलिस ने बाबा को किया गिरफ्तार
जमानत रद्द होने से पहले ही बाबा के वकील ने जमानत की अर्जी वापस ले ली। इस वजह से बाबा को पुलिस के सामने सरेंडर करना पड़ा। बाबा को अब कोर्ट में पेश किया जाएगा। हिंदी अखबार पंजाब केसरी की रिपोर्ट के मुताबिक बाबा की गिरफ्तारी पर लोगों ने खुशी जताई।

6 जून, 2017: बाबा को न्यायिक हिरासत
एमबीएम न्यूज नेटवर्क ने लिखा, ‘अदालत में सीआईडी ने कहा था कि बाबा अपना असली नाम तथा पता नहीं बता रहा है। इसकी गहनता से जांच हो सके इसलिए सीआईडी ने अदालत से बाबा के रिमांड की मांग की थी। सीआईडी की मांग पर अदालत ने बाबा को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया था। मगर फिर बाबा को अदालत ने 14 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।’ 15 जून, 2017 को बाबा की न्यायिक हिरासत 24 जून तक बढ़ाई गई।

17 जून, 2017: बाबा को वीआईपी ट्रीटमेंट
24 जून तक न्यायिक हिरासत में चल रहे बाबा को 8 जून को क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में भर्ती करवाया गया था। बाबा ने जोड़ों में दर्द, बाईं ओर सुन्नपन और बार-बार उल्टियां आने की शिकायत की थी। पंजाब केसरी ने लिखा– इस बाबा का शिमला रेफर कर दिया गया है मगर वह यह पिछले 3 दिन से वीआईपी विशेष कक्ष नंबर 1 में रह रहा है और वीआईपी सेवाएं ले रहा है। 20 जून को बाबा को जमानत मिली।

111 करोड़ खर्च
इस मंदिर पर 111 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई। इस राम लोक मंदिर में जो अष्टधातु से निर्मित भगवान राम की मूर्तियां स्थापित की गई हैं, दावा है कि वह विश्व में सबसे बड़ी मूर्तियां है। (स्रोत)

जेल से छूटते ही ज़ैदी ने लगाई हाजिरी
गुड़िया मामले में जेल में बंद आईजी ज़हूर जैदी ने जमानत मिलते ही सबसे पहले रामलोक मन्दिर में हाजिरी लगाई।

ध्यान रहे कि जैदी ने ही 2017 में बाबा अमरदेव पर लगे आरोपों की जांच की थी और उनके हाथ में मामला आने के बाद अचानक पुलिस कथित तौर पर नरम हो गई थी। तब सवाल उठे – आम आदमी अगर इतनी गड़बड़ियां करता पाया जाता तो शायद ही पुलिस इतनी नरमी से पेश आती।

यह रही सोलन जिला के रूढ़ा गांव में अवैध ढंग से रामलोक आश्रम बनाने के आरोपी बाबा अमरदेव की अब तक की टाइमलाइन। वैसे इस आश्रम में करोड़ों की कीमत की मूर्तियां बताई जाती हैं। कहां से आई हैं, क्या सीन है। महंगी गाड़ियां कहां से आईं बाबा के पास और फिर कौन ले गया। सरकार से क्यों इतनी पहुंच है कि मुख्यमंत्री खुद हाल पूछने आईजीएमसी जाते हैं, जबकि स्थानीय लोगों में गुस्सा था। चुनावी सीजन में ही नेताओं का इस मंदिर में आने का सिलसिला कैसे बढ जाता है, ये सवाल अनसुलझे हैं।

इस बीच, फ़रवरी 2020 में वीरभद्र पत्नी के साथ रामलोक मंदिर पहुँचे। ये संबंध बताता है कि वीरभद्र जब सत्ता में थे तो हर मामले में बाबा अमरदेव क्यों बचते रहे और क्यों वीरभद्र के चहेते अधिकारी आईजी जहूर जैदी ने ही बाबा के मामले की जांच की थी। यही नहीं, गुड़िया मामले में बेल मिलने के बाद जहूर जैदी सबसे पहले इन्हीं बाबा के यहां आए थे।

बाबा पर मनी लॉन्डरिंग और अमीर लोगों के पैसे को इधर से उधर करने के आरोप लगे। कहा गया कि बड़े कारोबारी, नेता और अधिकारी बाबा के माध्यम से ही अपने पैसे को अजस्ट करते हैं, इसीलिए उनकी इतनी करीबी है। हालाँकि, ये आरोप मात्र हैं और इस संबंध में कभी जाँच नहीं हुई। लेकिन करता भी कौन?

यहां क्लिक करके In Himachal पर बाबा के मामले की मुख्य खबरें पढ़ सकते हैं

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शहरी विकास मंत्री का परिवार होटल के लिए कर रहा अतिक्रमण

धर्मशाला।। प्रदेश में जहां गरीब लोगों को सरकारी जमीन से बाहर करने में वन विभाग और प्रशासन के अन्य अधिकारी देर नहीं लगाते, वहीं प्राइम लोकेशन पर रसूखदारों पर लग रहे अतिक्रमण के आरोपों पर सब आंख मूंदकर बैठ गए हैं।

मामला है धर्मशाला के भागसूनाग का जहां प्रदेश की शहरी विकास मंत्री के परिजनों पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। सरवीण चौधरी के परिवार द्वारा ली गई ज़मीन पर नगर निगम के वार्ड नंबर 1 अप्पर भागसूनाग में बनाए जा रहे होटल को मुख्य सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए वन विभाग की जमीन को कब्जाने का आरोप लग रहा है।

ऐसा संभव नहीं कि अधिकारियों को इस बारे में कोई जानकारी न हो क्योंकि जिस स्थान पर इस होटल का निर्माण किया जा रहा है, उस के आसपास की सारी जमीन वन विभाग की ही लगती है। ऐसे में इलाके में चर्चा है कि होटल के नाम पर इस सरकारी जमीन को कब्जाने का काम प्रदेश की शहरी विकास मंत्री कर रही हैं।

पहले इस होटल को बनाने के लिए साथ लगते नाले को कब्जे में लिया गया और अब मुख्य रास्ता लेने के लिए नाले के दूसरी तरफ लगती जमीन पर कब्जा जमा लिया है। यही नहीं, जिस नाले पर अतिक्रमण करने का काम जारी है उस नाले में बरसात के दिनों में पानी काफी मात्रा में बहता है और नाला छोटा होने के कारण साथ लगते अन्य होटलों को भी खतरा बढ़ गया है। मगर होटल वाले कुछ कह नहीं पा रहे क्योंकि मामला खुद प्रदेश की शहरी विकास मंत्री से जुड़ा है।

पेड़ कटान को लेकर चर्चा में आई थी ये जगह
समार्ट सिटी के वॉर्ड नंबर 1 में बन रहे इस होटल की जगह पहले से ही विवादों में रही है। 2015 में इस जमीन पर पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलने के बाद यह जमीन विवादों में चल रही थी। उस पेड़ कटान की जांच अब तक चल रही है। आप तस्वीरों में भी देख सकते हैं इस निर्माण के आसपास पेड़ हैं।

किसकी कितनी ज़मीन
जानकारी के अनुसार इस होटल के लिए शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी के पति व बेटे के नाम पर कुल जमीन 2 कनाल 3 मरले ली गई थी। पवन कुमार के नाम पर 1.3 मरले जबकि सरवीण चौधरी के बेटे पुरषार्थ के नाम पर 1 कनाल जमीन खरीदी गई थी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या नाला उसी जमीन में आता है। हालांकि, मंत्री पर परिजनों के नाम पर अन्य जगहों में भी बड़ी मात्रा में जमीन लेने का भी आरोप है जिसपर अलग से जांच की जरूरत है।

क्या कहते है डीएफओ
इस बारे में जब विभाग के डीएफओ संजीव कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वन विभाग की जमीन अगर संबंधित होटल के आसपास पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। लेकिन उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है।

क्या कहते है मेयर
इस बारे में नगर निगम के मेयर देवेन्द्र जग्गी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनके ध्यान में यह मामला नहीं है और जांच के बाद ही इस पर कुछ कहा जा सकता है।

महेंद्र सिंह ठाकुर पर फिर लगा सरकारी गाड़ियों के दुरुपयोग का आरोप

सरकाघाट।। धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक व वर्तमान सरकार के वरिष्ठ मंत्री के परिवार के लिए प्रदेश सरकार खासी मेहरबान नज़र आ रही है। सूचना के अधिकार क़ानून के तहत पता चला है कि हिमाचल सरकार के वरिष्ठ मंत्री महेंद्र सिंह को जो चार सरकारी गाड़ियां मुहैया कराई गई हैं, उनमें से एक गाड़ी नंम्बर एच पी-63डी 0001 बागवानी विभाग ने उपलब्ध करवाई है। इस गाड़ी की लॉग बुक की दैनिक डिटेल आरटीआई के तहत ज़िला पार्षद भूपेंद्र सिंह ने हासिल की है।

इससे पता चला है कि लॉग बुक पर इस गाड़ी का उपयोग मन्त्री के स्टाफ़ के नाम से दर्शया गया है और लॉग बुक को मंत्री के निजी सचिव द्वारा सत्यापित किया गया है। इस तरह देखा जाए तो मन्त्री के स्टाफ़ ने इस गाड़ी से 29 दिसंबर 2018 से लेकर 5 जनवरी 2020 तक 12 महीने आठ दिन में कुल 59251 किलोमीटर सफ़र किया है। सरकार के नियमों के आधार पर तेल व गाड़ी की रिपेयर पर पांच लाख रुपये से अधिक खर्च हुए हैं।

इसके अलावा मन्त्री के पास दो गाड़ियां जिनके नम्बर एच पी 07ई -0006 और एच पी 07 एच 0006 हैं, वे हिमाचल सरकार के जीएडी विभाग की हैं। इनके अलावा एक और गाड़ी आईपीएच विभाग की भी है। आरोप है कि जीएडी विभाग की गाड़ियों के नंम्बर एक जैसे ही हैं ताकि देखने वालों को इसकी पहचान न हो सके।

भूपेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि वास्तव में बागवानी विभाग की गाड़ी मन्त्री के बेटे के दैनिक प्रयोग व अन्य राजनीतिक कार्यो के लिए इस्तेमाल हो रही है जिसके बारे पहले भी मुद्दा उठा है औऱ मीडिया में भी सार्वजनिक हुआ है। उन्होंने कहा, “आर्थिक रूप से तंगी झेल रही सरकार ने एक मन्त्री को नियमों के विपरीत इतनी गाड़ियां क्यों दी हैं, इसका कोई कारण नहीं बताया जा रहा है। बागवानी विभाग की गाड़ी की लॉग बुक स्टाफ़ के नाम पर भरी गई है जबकि गाड़ी का इस्तेमाल मन्त्री का परिवार करता है।”

भूपेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि उन्होंने मंत्री को दी गई दूसरी गाड़ियों की लॉग बुक की डिटेल भी आरटीआई से हासिल की है और पता चलता है कि उनका इस्तेमाल भी सरकार की शर्तों के अनुसार नहीं हुआ है।

दरअसल किसी भी मन्त्री को हिमाचल प्रदेश सरकार की तरफ़ से एक सरकारी और एक सबन्धित विभाग की गाड़ी इस्तेमाल करने की ही अधिसूचना जारी हुई है। भूपेंद्र ने कहा, “आईपीएच व बागवानी तथा सैनिक कल्याण मंत्री को मुख्यमन्त्री जयराम ठाकुर ने दो सरकारी तथा दो विभगीय गाड़ियां क्यों दी हैं, इस बारे उन्हें सार्वजनिक तौर पर जनता को बताना चाहिए। सरकारी गाड़ियों के प्रयोग के बारे में जो नियम निर्धारित हैं, उनके अनुसार ही आवंटन किया जाना चाहिए और ये जो दुरुपयोग किया जा रहा है इसपर रोक लगनी चाहिए।”

युवाओं को बैंकों के क़र्ज़ न लौटाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे उद्योग मंत्री?

शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार ने ‘मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना’ को लेकर बैंकों से पूछा है कि जब सरकार ख़ुद गारंटी दे रही है तो युवाओं को क़र्ज़ देने में क्यों आनाकानी की जा रही है। बैंकों के प्रतिनिधियों के साथ राज्य सचिवालय में हुई बैठक में सरकार ने बैंकों से पूछा कि जब वह ख़ुद गारंटर बन रही है तो लोन देने में देरी करने का कोई मतलब नहीं है।

बैंकों से यह भी कहा गया है कि अगर किसी का लोन का आवेदन रद्द किया जाता है तो वजह क्या है, साफ़ लिखा जाना चाहिए; ऐसा नहीं होना चाहिए कि ‘औपचारिकताएँ पूरी नहीं हैं’ लिख दिया जाए। इस संबंध में उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा, “सरकार इस बात की गारंटी दे चुकी है कि बेरोज़गारों को दिया गया क़र्ज़ नहीं डूबेगा और अगर यह फँसा तो सरकार इसका भुगतान करेगी।”

सवाल उठ रहा है कि उद्योग मंत्री क्या कहना चाह रहे हैं-
1. बैंक आँख मूँदकर किसी को भी लोन दे दें?
2. युवाओं को अगर लोन मिल जाए तो वापस करने की चिंता छोड़ दें?

क्या है यह योजना
मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना हिमाचल सरकार की स्कीम है जिसके तहत बेरोजगारों को 60 लाख रुपये तक का काम शुरू करने के लिए सब्सिडी देने की व्यवस्था है। इसके तहत युवा जेसीबी मशीन खरीदने, शटरिंग, टेंट हाऊस, इक्को टूरिज्म, एप्पल ग्रेडिंग मशीन, डायग्नोस्टिक सिस्टम, प्रिटिंग प्रेस सहित कई और कामों के लिए भी लोन और सब्सिडी ले सकते हैं।

ग़ौरतलब है कि कोई भी बैंक लोन देने से पहले देखता है कि सामने वाला इसे चुका पाने की स्थिति में होगा या नहीं। यह भी देखा जाता है कि जिस कार्य के लिए लोन लिया जा रहा है, उससे रिटर्न की संभावनाएँ कितनी हैं। ऐसे में बैंक फूंक-फूंककर कदम रखते हैं ताकि ऐसा न हो कि दिए गए लोन वापस मिल ही न पाएं। ऐसी स्थिति में बैंकों को घाटा उठाना पड़ता है और हालात बेहद ख़राब हों तो इससे बैंकों में पैसे जमा करवाने वाले लोग तक प्रभावित हो सकते हैं।

सरकार की ओर से प्रोत्साहन देना सही है मगर खुलेआम कहना और बैंकों पर दबाव बनाना कि आप लोन दो, गारंटी हम देंगे और लोन लेने वाला चुका न पाए तो सरकार चुकाएगी, बेहद ग़लत है। वह इसलिए क्योंकि सरकार खुले तौर पर संदेश दे रही है कि लोन लीजिए और चुकाने के बारे में भूल जाइए। वह भी तब, जब हाल ही में उसने एससी-एसटी वर्ग का पाँच साल पुराना 50 हज़ार रुपये तक का क़र्ज़ माफ़ किया है।

अगर हिमाचल प्रदेश संपन्न राज्य होता तो बात और होती। जो सरकार ख़ुद ही 50 हज़ार करोड़ के क़र्ज़ में है, वह कैसे गारंटी दे रही है? वह कहीं और से क़र्ज़ लेकर युवाओं का क़र्ज़ चुकाएगी? आज भले ही सरकार में बैठे कुछ लोग लोक लुभावन बातें कर रहे है मगर बैंड लोन्स का पूरा बोझ आख़िर में प्रदेश पर आएगा जो उसकी आर्थिक हालत को और ख़राब कर देगा।