चंडीगढ़ में फँसे हिमाचली छात्रों के लिए खोला गया हिमाचल भवन

शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार ने कोरोना के कारण पैदा हुए हालात के कारण चंडीगढ़ के हिमाचल भवन को छात्रों के लिए खोलने का फ़ैसला किया है।

सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि चंडीगढ़ में काम करने वाले या पढ़ाई करने वाले लोगों को कुछ मकान मालिकों और पीजी वालों ने जाने के लिए कहा है। इन छात्रों को हिमाचल लाना संभव नहीं है, ऐसे में उन्हें ठहराने के लिए और भोजन की व्यवस्था के लिए हिमाचल भवन को खोला जाएगा।

बता दें कि देश के अधिकतर राज्यों में सरकार ने मकान मालिकों से कहा है कि वे अपने यहाँ किराये पर रह रहे लोगों को परेशान न करें और उनसे पैसे न लें। मगर कुछ मकान मालिक ऐसे हैं जो पीजी और किराए के कमरों को ख़ाली करवा रहे हैं।

चंडीगढ़ से हिमाचल की ओर भागे होम क्वॉरन्टीन किए गए तीन लोग

चंडीगढ़।। कोरोना संकट को देखते हुए होम क्वॉरन्टीन किए गए तीन लोगों के चंडीगढ़ से हिमाचल प्रदेश की ओर फ़रार होने की ख़बर है। इन लोगों को चंडीगढ़ प्रशासन ने होम क्वॉरन्टीन किया था और इनके इधर-उधर जाने पर पाबंदी थी।
बता दें कि कोरोना संकट को देखते हुए विदेश से लौटे या संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों को एहतियातन आइसोलेशन में रखा जा रहा है। अब पुलिस ने आदेश दिया है कि ये फ़रार हुए लोग पकड़े जाएं तो पहले तुरंत इनकी जाँच करवाई जाए।
कहां हो सकते हैं ये लोग
एक ही मकान में रह रहे ये लोग 22 मार्च को बिना किसी सूचना के हिमाचल की ओर निकल गए थे। इस संबंध में एसपी कार्तिकेयन गोकुलचंद्रन ने सभी एसएचओ को आदेश जारी करके इनकी तलाश करने के आदेश दिए थे।
फ़रार हुए इन लोगों को लेकर पंजाब केसरी ने अपने सूत्रों के हवाले आशंका जताई है कि ये हिमाचल प्रदेश के ऊना ज़िले में किसी होटल में छिपे हो सकते हैं।

फेक न्यूज़ पर घिरे तो विक्रमादित्य ने गोलमोल बातें करके दी सफ़ाई

शिमला।। अख़बारों से कोरोना वायरस फैलने को लेकर WHO का सहारा लेकर भ्रामक पोस्ट डालने की आलोचना होने के बाद शिमला ग्रामीण से कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह ने सफाई दी है। उनके इस दावे की वैधता को लेकर ‘इन हिमाचल’ ने सवाल उठाए थे। अब उन्होंने फेसबुक पेज पर अपनी मूल पोस्ट को तो नहीं हटाया है मगर एक फेसबुक वीडियो डाला है।

पिछले पोस्ट में जहां उन्होंने WHO की रिपोर्ट का हवाला देकर कहा था कि अखबारों से कोरोना फैल सकता है, अब इस वीडियो में उनका कहना है कि उन्होंने ‘मेडिकल एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात की थी जिनका मानना था कि WHO का भी मानना है कि इससे वायरस फैल सकता है।” विक्रमादित्य ने कहा है, “हमने केवल प्रीकॉशनरी नोट पर जनता से निवेदन किया था कि जब इतनी सारी सावधानियां बरत रहे हैं तो यह भी बरतें।”

इस बार उन्होंने कहा है कि मेडिकल एक्पर्ट्स का मानना है कि WHO का भी मानना है। यानी उनके पास पुख्ता जानकारी नहीं थी और अभी भी नहीं है। अगर उन्होंने सिर्फ सावधानी बरतने का आग्रह किया होता तो बात अलग थी मगर उन्होंने निराधार जानकारी फैलाते हुए यह कह दिया था कि ‘अखबार अपने व्यावसायिक हितों के लिए लोगों की जान खतरे में डाल रहे हैं।’

विक्रमादित्य का वह पोस्ट जिसके आख़िर में उन्होंने लिखा है कि पब्लिशिंग हाउस अपने फ़ायदे के लिए लोगों की जान ख़तरे में डाल रहे हैं।

विक्रमादित्य का यह भी कहना है कि ‘पत्रकारों के उन्हें फ़ोन आए कि कुछ पत्रकारों में उनके बयान को लेकर ग़लत धारणा बनाई जा रही है।’ यानी वह नहीं मान रहे कि उन्होंने कुछ ग़लत कहा बल्कि कह रहे हैं कि कोई उनके बयान को ग़लत ढंग से पेश कर रहा है। जबकि ख़ुद उन्होंने साफ़ क्या लिखा था, वह ऊपर पोस्ट में स्पष्ट है।

आगे विक्रमादित्य कहते हैं, “हम कभी पत्रकार मित्रों की भूमिका को कमतर करने का प्रयास नहीं करेंगे, यह ग़लत धारणा बनाई गई है। ज़िम्मेदार होने के कारण मैंने स्थिति को स्पष्ट करना उचित समझा। मैं मेडिकल एक्सपर्ट नहीं हूँ, जो बात मेडिकल एक्सपर्ट्स ने हमसे की थी, वह आपसे शेयर की थी और मैं इसके साथ खड़ा हूँ कि जिससे लोगों का संपर्क होता है, उस चीज से बचने की ज़रूरत है।”

विक्रमादित्य ने क्या दावा किया था और उस दावे के संबंध में WHO का क्या कहना था, आप नीचे दी गई खबर पर टैप करके विस्तार से पढ़ सकते हैं।

कोरोना लॉकडाउन के चलते बाहर फँसे हिमाचलियों का दर्द

कोरोना लॉकडाउन के चलते बाहर फँसे हिमाचलियों का दर्द

इन हिमाचल डेस्क।। कोरोना वायरस का फैलाव रोकने के लिए घोषित पाबंदियों के कारण पूरे देश में परिवहन के साधन ठप हो गए हैं। इस कारण लोग जहां-तहां फँस गए हैं। मुश्किल दौर में आदमी अपने घर का रुख़ करता है। परिवार सामने होता है तो हिम्मत मिलती है। मगर यह ऐसा संकट है कि लोग अपने घरों तक नहीं पहुँच पा रहे।

देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसी तस्वीरें और वीडियो आ रहे हैं कि लोग बेबस हैं और कुछ जगह तो पैदल ही अपने घरों की ओर निकल पड़े हैं। मगर राज्यों की सीमाएँ सील होने के कारण वे न तो घर के रहे, न घाट के। ऊपर से बॉर्डर पर इतने लोग जमा हो गए हैं कि जिस सोशल डिस्टैंसिंग को कोरोना को रोकने के लिए अहम समझा जा रहा है, उसी की ऐसी-तैसी हो गई है।

हिमाचल प्रदेश के बहुत सारे लोग देश-दुनिया के विभिन्न हिस्सों में फँसे हैं। उन्हें लग रहा है कि जब कार्यस्थल या पढ़ाई वाले शहर में यूँ इनडोर लॉक्ड ही रहना है तो बेहतर होता कि समय पर अपने गाँव, अपने घर, हिमाचल पहुँच जाते। इस तरह से अपने घर और परिवार से दूर फँसे लोगों से इन हिमाचल ने बात की और जानना चाहा कि उनके मन में क्या चल रहा है।

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कहां गए हिमाचल के विधायक?’

आशीष भरमौरिया, मंडी निवासी, इस समय हैदराबाद में लॉक्ड।। हैदराबाद में डिजिटल मीडिया में कार्यरत हूं। हमें भी छुट्टी नहीं है, रोज़ ऑफिस जाना होता है। लेकिन परिस्थितियां देखते हुए अब घर की चिंता होती है। मम्मी को मेरी चिंता ज़्यादा होती है क्योंकि मैं तेलंगाना में हूँ जहां अब तक 59 केस सामने आ चुके हैं।

शुक्र है कि हिमाचल में हालत ठीक है। मगर स्थिति और ज़्यादा बिगड़ी तो तनाव बढ़ जाएगा। मेरी परेशानी भी बढ़ेगी और घरवालों की भी। बेबसी ये है कि हालात ख़राब हुए तो मैं घर नहीं पहुँच पाऊँगा।

कोरोना संकट की इस घड़ी में हिमाचल के 67 विधायकों का कोई अता पता नहीं है तो कम से कम सरकार से यही आशा है कि सभी मंत्रियों और बंद विभागों की सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल दूसरे राज्यों में फंसे लोगों को वापस हिमाचल तक पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जाए।

‘स्पेशल बसें चलाए हिमाचल सरकार’

अनुज चौधरी, काँगड़ा निवासी, इस समय चंडीगढ़ में लॉक्ड।। हमें तो अभी कोई समस्या नहीं हो रही मगर मेरे कुछ परिचित हैं जो इलाज के लिए पीजीआई आए थे। वे इलाज करवा चुके हैं मगर लॉकडाउन के कारण परेशान हैं। वे हिमाचल प्रदेश नहीं लौट पा रहे और सही से देखरेख न होने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने की आशंका बनी हुई है। ऐसे और भी लोग होंगे जो इलाज के लिए बाहर निकले मगर अब फँस गए हैं।

सरकार को चाहिए कि कम से कम बीमार लोगों (कोरोना के अलावा अन्य बीमारियों का इलाज करवाए आए) और बुजुर्गों को हिमाचल लाने का इंतज़ाम करे वरना लॉकडाउन और खिंचा तो उन्हें दिक़्क़त हो सकती है। हम तो जैसे तैसे अपना इंतज़ाम कर लेंगे, मगर सरकार को इस बारे में सोचना होगा।

हिमाचल सरकार को पंजाब और उत्तर प्रदेश की तरह कम से कम चंडीगढ़ और दिल्ली में फंसे हिमाचलियों के लिए स्पेशल बसें चलवानी चाहिए और उन्हें हिमाचल लाकर 14 दिनों के लिए निगरानी में रखना चाहिए। प्राथमिकता बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और मरीजों को मिलनी चाहिए।

‘मुश्किल तो है मगर जहां हैं, वही रहना ठीक’

श्रद्धा परमार, मंडी निवासी, दिल्ली में लॉक्ड।। कोरोना संकट चिंता की बात तो है मगर इस दौरान ख़ुद को पॉज़िटिव रखना ज़रूरी है। मेरे ख़्याल से ये लॉकडाउन खुद के साथ समय बिताने का अच्छा मौका है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में आदमी इतना उलझ कर रह गया है कि उसे परिवार के साथ तो बहुत दूर की बात है पर खुद के लिए भी समय निकालने नहीं मिलता।

अब अच्छा मौका है परिवार और स्वयं के साथ समय बिताने का। पर कुछ लोग तो परिवार के पास पहुंच गए हैं और कुछ मेरी तरह जहां थे, वहीं के वहीं रह गए। ऐसा भी नहीं है कि मौका नही मिला घर जा पाने का। मगर घर ना जाने के अपने कारण हैं।
अब कुछ सोच समझ कर ही घर न जाने का निर्णय लिया था जबकि पता था कि लॉकडाउन की स्थिति हो सकती है।

घर की अभी उतनी याद भी नहीं आ रही क्योंकि पिछले महीने ही हो आई थी। पर लॉक डाउन होने पर कुछ समय तो अजीब लगा क्योंकि अब तो बिल्डिंग से बाहर निकले भी एक हफ्ता हो गया। तो लॉक डाउन का पहला व दूसरा दिन थोड़ा तनावपूर्ण रहा। घर से फोन आने लगे की अब क्या खाएगी, कैसे रहेगी, कैसे लेने आएं? तो थोड़ा तनाव हुआ क्योंकि घर वाले परेशान हो गए थे। पर खुद को संभाला और घरवालो को यही तसल्ली दी कि अरे कोई बात नहीं मुझे कोई दिक्कत नहीं और भी लड़कियां हैं यहां, सब साथ हैं और खाने पीने की कोई दिक्कत नहीं है। तब जा कर घर वाले थोड़े निश्चिंत हुए। मगर रोज़ वीडियो कॉल और ऑडियो कॉल के माध्यम से सबसे बात होती है।

बस अभी यही चिंता है कि कोरोना के मामले और न बढ़ें व मरीजों की सेहत में सुधार हो जाये। हिमाचल सरकार ने कोरोना की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं जो सराहनीय हैं। और मेरी तो यही सलाह है कि अब 15 दिनों की ही तो बात है, जहां हैं वही रहेंगे तो ज़्यादा सुरक्षित हैं। सफ़र करना बिल्कुल सुरक्षित नहीं है। इस समय ये बात खुद भी समझें और अपने परिवार को भी यही समझाए। सरकार भी यही समझा रही है। तो जागरूक नागरिक बनें और कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में स्वयं व अपने परिवार की सुरक्षा के लिए सरकार का सहयोग दें।

‘समय रहते लोगों की सुध ले राज्य सरकार’

आशीष नड्डा, बिलासपुर निवासी, इस समय दिल्ली में लॉक्ड।। घर जाने का मन कर रहां है लेकिन देश और वायरस की स्थिति को देखते हुए सरकार द्वारा लगाई गई पाबंदी के पालन के लिए भी पूरा संकल्प है। हम उन लोगों में हैं जिन्हें घर से दूर यहाँ भी किसी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ रहा। मगर सभी व्यक्ति कंफर्ट में रह रहे हैं, यह सच नहीं है। ग़रीब और दिहाड़ीदार तबके की स्थिति ख़राब है और उसके सामने गुजर-बसर का संकट खड़ा हो गया है।

आशंका ऐसी है कि 14 अप्रैल के बाद हालात औ बिगड़ेगी और कहीं लॉकडाउन की अवधि न बढ़ानी पड़े। हिमाचल सरकार को ऐसी स्थिति का ध्यान रखते हुए इधर-उधर फँसे प्रदेश के लोगों के लिए अभी से इंतज़ाम करने होंगे। लंबे समय तक घर-परिवार से दूर रहना और वो भी संकट वाले हालात में, संभव नहीं है।

सरकार को अभी से घर आने के लिए प्रयास कर रहे और घर आने के इच्छुक लोगों का डेटाबैंक बनाने का काम शुरू कर देना चाहिए ताकि भविष्य में आपात स्थिति में उनती राहत पहुँचाने के लिए ही सही, कुछ इंतज़ाम किया जा सके। अभी मेडिकल टेस्ट वग़ैरह करके लोगों को सावधानी के साथ घर पहुँचाने के प्रयास करने चाहिए।

(अगर आप भी बाहर फँसे हैं और अपनी बात कहना चाहते है तो inhimachal.in@gmail.com पर अपनी बात रख सकते हैं।)

कोरोना वायरस की ज़रूरी बातें जो आपको मालूम होनी चाहिए

कोरोना पर WHO का नाम लेकर झूठ फैला रहे विक्रमादित्य

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे और शिमला ग्रामीण से विधायक विक्रमादित्य सिंह ने फ़ेसबुक पर कोरोना वायरस को लेकर भ्रामक दावा किया है। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन के हवाले से वादा किया कि कुछ दिनों के लिए अख़बार न पढ़ें क्योंकि यह बहुत संक्रामक है।

हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से अखबारों से कोरोना संक्रमण फैलने को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं हुई है। मगर विक्रमादित्य लिखते हैं कि कुछ समय के लिए अखबार न पढ़ें क्योंकि ये ‘बहुत अधिक संक्रामक’ हैं। उन्होंने लिखा है कि अखबार झूठी जानकारी दे रहे हैं।

उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन की किसी स्टडी के हवाले से ये बातें कही हैं और कहा कि अख़बार सभी तरह से संक्रमण कैरी करते हैं और उनमें कोरोना भी है। हालाँकि, उन्होंने यह नहीं बताया है कि कब की स्टडी है, न ही उसका कोई लिंक दिया है।

विक्रमादित्य ने अपने वेरिफाइड फ़ेसबुक पेज पर डाला है यह पोस्ट

ग़ौरतलब है कि सरकार ने अख़बारों को ज़रूरी सेवाओं में शामिल किया है। अगर अख़बार संक्रामक होते तो 21 दिनों के लॉकडाउन जैसा बड़ा फ़ैसला लेने वाली सरकार सबसे पहले अख़बारों पर रोक लगाती। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी स्पष्ट किया है कि अखबारों से कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के मामले सामने नहीं आए हैं और इसकी आशंका भी बहुत कम है।

शुक्रवार को इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूह बीबीसी को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया है- “अगर कोई कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति अख़बार को छूता है तो अख़बार में ये वायरस कुछ देर के लिए आ सकता है। हालांकि अख़बार से संक्रमण होना का ख़तरा बेहद कम है। क्योंकि संक्रमण कई फ़ैक्टर पर निर्भर करता है। जैसे कि आप तक वायरस कितनी मात्रा में पहुंचा, किसी सतह पर वायरस कब तक एक्टिव रहा साथ ही वातावरण भी इसमें ख़ास भूमिका निभाता है।”

ऐसे में बिना प्रामाणिक स्टडी का ज़िक्र करके शिमला ग्रामीण के विधायक ने इस संबंध में WHO का नाम लेकर लोगों में भ्रम फैलाया है। इस बात को लेकर लोग उनके फेसबुक पोस्ट पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं और पूछ रहे है कि किस आधार पर आप यह दावा कर रहे हैं। लोग यह भी पूछ रहे है कि WHO की किस रिपोर्ट में ऐसा लिखा है, यह भी बताएं।

पढ़ें- कोरोना वायरस की ज़रूरी बातें जो आपको मालूम होनी चाहिए

विक्रमादित्य सिंह

सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने भी इसे बताया था अफवाह
चूंकि अखबारों में छपाई का काम ऑटोमैटिक मशीनों में होता है, ऐसे में उस दौरान इसमें संक्रमण की आशंका नहीं है। इसके अलावा विभिन्न अखबारों ने ढुलाई से लेकर बांटने तक की प्रक्रिया को सैनिटाइज़ किया हुआ है।

अख़बारों से संक्रमण फैलने को लेकर प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को एक प्रेस क्रॉन्फ्रेंस के दौरान बताया था कि पेपर से कुछ नहीं होता। उन्होंने  कहा था, “आज मेरे घर भी पेपर नहीं आया. मैंने इसका पता लगाने को कहा तो पता चला कि बहुत ग़लत अफ़वाह फैली है कि पेपर छूने से भी कुछ हो जाएगा। सोसाइटी के लोगों में भी ये अफ़वाह फैली है। कुछ लोगों ने ख़ुद पेपर वाले को पेपर देने से मना कर दिया। मैं आपको बता देना चाहता हूं पेपर से कुछ नहीं होता इससे आपको सही जानकारी मिलेगी। आपको पेपर पढ़ कर हाथ धो लेना है।”

वैसे भी अख़बार क्या, कोई भी बाहर से आया सामान छूने के बाद हाथ धोने में कोई बुराई नहीं ताकि किसी भी तरह का ख़तरा न हो।

सस्पेंड होने के बावजूद भ्रम फैलाने में जुटे हेड कांस्टेबल मनोज

सस्पेंड होने के बावजूद भ्रम फैलाने में जुटे हेड कांस्टेबल मनोज

शिमला।। एक कविता पढ़ने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चित हुए हिमाचल प्रदेश पुलिस के कर्मचारी मनोज को सस्पेंड कर दिया गया है। ‘लठ तो बजेगा लेकिन कोरोना न होगा’ बोलते हुए एक वीडियो बनाया गया था। सदर मंडी थाने में इसे शूट किया था। इसमें मनोज लाठियों को सैनीटाइज करते दिख रहे थे और कह रहे थे कि कर्फ्यू का उल्लंघन करने वालों के लिए इन्हें सैनीटाइज किया जा रहा है।

एसपी मंडी गुरदेव शर्मा ने वीडियो को विभागीय नियमों के खिलाफ माना और मनोज को सस्पेंड कर दिया। एसपी मंडी ने बताया कि मनोज को लाइन हाजिर करके विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

‘हिंदुस्तान तो होगा मगर पाकिस्तान नहीं होगा’ नाम की किसी की लिखी कविता को पढ़ रहे मनोज का वीडियो कुछ साल पहले वायरल हो गया था। उसके बाद से चर्चा में आए मनोज लोकप्रियता के लिए अक्सर अपने सोशल मीडिया हैंडल्स में पोस्ट्स डालते हैं और वीडियो पोस्ट करते हैं। इनमें से कई वीडियो ड्यूटी के दौरान और वर्दी में बनाए होते हैं। ये वीडियो कई बार भ्रामक, फेक न्यूज और अल्प ज्ञान से भरे और राजनीति से प्रेरित भी होते हैं।

इस संबंध में इन हिमाचल ने पहले भी मामला उठाया था मगर विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। दो साल पहले हमने लिखा था-

ड्यूटी कोड का उल्लंघन कर रहा एक जवान, पुलिस महकमा खामोश

 

अब सस्पेंशन के बावजूद मनोज अपने वेरिफाइड फेसबुक पेज पर भ्रामक पोस्ट्स डाल रहे हैं। इनमें एक वीडियो है जिसमें अज्ञात स्रोत के वीडियो के आधार पर दावा किया गया है कि चीनी महिला दूसरे देश में कोरोना फैला रही है।

आगे वह लिखते हैं कि चीनी एजेंटों ने सिस्टमैटिक तरीके से पूरी दुनिया में वायरस फैलाया है।

मनोज ठाकुर द्वारा शेयर ताजा पोस्ट

गौरतलब है कि मनोज सरकारी कर्मचारी हैं और पुलिस जैसे अहम विभाग में है। ऐसे में उनके द्वारा पोस्ट्स की गई भ्रामक और अधकचरी जानकारियां पूरे समाज में फैल रही हैं।

शायद विभाग को प्रतीक्षा है कि और कोई भ्रामक वीडियो पोस्ट हो, जिससे महकमे और प्रदेश की छवि धूमिल हो।

कोरोना लॉकडाउन के चलते बाहर फँसे हिमाचलियों का दर्द

हिमाचल का वो ‘मूर्ख’ दुकानदार, जिसे गालियां दे रहे घरवाले

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यतिन पंडित।। लोग 2 रुपये वाला शैम्पू लेने दौड़े हुए हैं दुकान पर, हद है। बच्चों को गुबारे लेने भेज रहे हैं। कोई 10-10 रुपये की सिंगल पीस आइटम्स के लिए, जो ज़रूरी भी नहीं है, उसके लिए दुकानों पर भेज रहे हैं।

गलियों की छोटी-छोटी दुकानों पर हालात ज़्यादा खराब हैं। एक से एक मूर्ख हैं यहां गलियों में फैले हुए, जो बार-बार फालतू की चीज़ों के लिए दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं।

उधर विदेश से आने वाले अधिकतर संदिग्धों पर कोई निगरानी नहीं है। अभी पता चला कि कुछ लोग हैं ऐसे भी जिन्होंने खुद को सेल्फ क्वारनटाइन किया हुआ है।

यतिन की दुकान

गांव से दूध सप्लाई करने वाले पीठ में कैनियां डालकर बेधड़क बाज़ार के घरों में चक्कर लगा रहे हैं। कर्फ्यू के बावजूद लोगों की मूर्खता में कोई कमी नहीं आई है।

सिर्फ मैं एक मूर्ख हूँ जिसे घरवाले परसों से सिर्फ इसलिए गालियां दे रहे हैं क्योंकि मैं दुकान सिर्फ ज़रूरतमंदों के लिए खोल रहा हूँ। अगर आप भी दुकानदार हैं, तो आप भी कृपया मेरी तरह मूर्ख बनिये, ज़्यादा बनिये ना बनिये और दुकान सिर्फ ज़रूरत मंदों के लिए खोलिए। सबके लिए अच्छा रहेगा।

प्रशासन सुस्त, गधे चुस्त…..

यतिन पंडित

(कुल्लू जिले से संबंध रखने वाले यतिन पंडित हिमाचल प्रदेश के इतिहास और कला एवं संस्कृति में गहरी दिलचस्पी रखते हैं और प्रदेश व देश से जुड़े विषयों पर लिखते रहते हैं। वह दुकान भी चलाते हैं, ऐसे में कोरोना के चलते पाबंदियों के इस दौर में बने हालात पर उन्होंने अपनी बात फेसबुक पर रखी है, जिसे यहां साभार प्रकाशित किया गया है)

लॉकडाउन को लेकर न घबराएं, 21 दिनों में ये सब खुला रहेगा

इन हिमाचल डेस्क।। मंगलवार को जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिनों के लॉकडाउन का एलान किया, बहुत से लोगों ने घबराकर दुकानों का रुख़ किया और ज़रूरत से ज़्यादा सामान लेने लगे। जिस तरह से प्रधानमंत्री ने ठहरकर और बार-बार दोहराकर लोगों से कहा कि 21 दिन तक लॉकडाउन रहेगा, उस तरह अगर वह यह कह देते कि इस दौरान राशन और अन्य चीजें आपको मिलती रहेंगी, तो यह घबराहट न फैलती।

मगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लंबे वीडियो संदेश में एक बार भी इसका ज़िक्र नहीं किया। हालाँकि इसके बाद उन्होंने ट्वीट करके ज़रूर कहा कि ज़रूरी वस्तुएँ उपलब्ध रहेंगी और उन्होंने घबराकर अतिरिक्त ख़रीददारी (पैनिक बाइंग) न करने की अपील भी की। दरअसल देश के कई हिस्सों में लोगों को लगा कि 21 दिनों तक उन्हें चीज़ें नहीं मिल पाएगी, इसलिए वे दुकानों में जाकर पहले ही सामान ख़रीद लेना चाह रहे थे।

बाद में सरकार की ओर से एक पत्र जारी हुआ जिसमें कहा गया है कि लॉकडाउन के दौरान क्या खुला रहा, क्या बंद। मगर यह बात ध्यान देने लायक़ है कि हर कोई सोशल मीडिया पर नहीं है। इसलिए बेहतर होता कि प्रधानमंत्री ख़ुद इसका ऐलान करते ताकि लोगों तक यह संदेश पहुँचता। अब बहुत सारे लोगों ने ज़रूरी वस्तुओं की दुकानें तक बंद रखी है।

ध्यान दें, हिमाचल में कर्फ़्यू है। इस दौरान किराना और अन्य ज़रूरी वस्तुओं की चीजें सुबह 10 से दिन में 2 बजे तक ही खुलेंगी और इस दौरान वहाँ भीड़ लगाने की इजाज़त नहीं होगी। बाक़ी, जिन सेवाओं और प्रतिष्ठानों को 21 दिन तक खुला रहना है, उनकी सूची आगे है-

  • केंद्र सरकार के ये प्रतिष्ठान खुले रहेंगे- रक्षा, सीआरपीएफ़, ट्रेज़री, पेट्रोलियम, सीएनजी, एलपीजी, पीएनजी, आपदा प्रबंधन, बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन यूनिट, डाकघर, एनआईसी के दफ़्तर।
  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के ये प्रतिष्ठान खुले रहेंगे- पुलिस, होमगार्ड, सिविल डिफ़ेंस, अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं, आपदा प्रबंधन और जेलें, ज़िला प्रसासन और ट्रेज़री, म्यूनिसिपल बॉडीज़ में स्वच्छता और जल आपूर्ति जैसी आवश्यक सेवाओं का स्टाफ़।
  • अस्पताल और अन्य संबंधित मेडिकल संस्थान, उत्पादन और आवंटन यूनिट, निजी और सरकारी क्षेत्र की डिस्पेंसरियां, केमिस्ट, लैब, क्लीनिक, नर्सिंग होम और ऐंबुलेंस वगैरह काम करते रहेंगे. स्वास्थ्य कर्मियों, नर्सों, पैरा मेडिकल स्टाफ़ और अन्य कर्मचारियों को लाने-ले जाने की इजाज़त रहेगी।
  • खाद्य सामग्री, राशन फल, सब्ज़ियों, डेयरी, दध, मीट, मछली और चारे वगैरह की दुकानें और सरकारी राशन की दुकानें खुली रहेंगी. ज़िला प्रशासन होम डिलीवरी को बढ़ावा दे सकता है ताकि लोग घर से बाहर न निकलें. (हिमाचल में सिर्फ़ सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक खुली रहेंगी)।
  • बैंक , इंश्योरेंस ऑफिस और एटीएम, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, टेलिकम्यूनिकेशंस, इंटरनेट सर्विसेज, ब्रॉडकास्टिंग और केबल सर्विसेज. आईटी और आईटी से संबंधिक सेवाएं (संभव हो तो वर्क फ्रॉम होम)।
  • सभी ज़रूरी वस्तुओं, जैसे खाना, दवाओं, मेडिकल उपकरणों की ई कॉमर्स के माध्यम से डिलीवरी चालू रहेगी।
  • पेट्रोल पंप, एलपीजी, पेट्रोलियम और गैस आउटले, पावर जेनरेशन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन यूनिट, कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउसिंग सेवाए, निजी सुरक्षा सेवा।
  • ज़रूरी वस्तुओं का उत्पादन करने वाली फैक्ट्रियां, ज़रूरी वस्तुओं की ढुलाई, अग्निशमन, क़ानून व्यवस्था और आपातकाल सेवाओं से जुड़े वाहन।
  • वे होटल, लॉज, होमस्टे जहां लॉकडाउन के कारण लोग फँसे हैं या मेडिकल स्टाफ़, क्रू मेंबर रह रहे हैं. वो जगहें जो क्वॉरनटाइन करने के लिए चिह्नित हैं।

हिमाचल: कोरोना से जान गंवाने वाले तिब्बती बुजुर्ग ने छिपाई थी ट्रैवल हिस्ट्री

धर्मशाला।। सोमवार रात को हिमाचल प्रदेश में कोरोना वायरस के कारण पहली मौत की ख़बर आई। 69 वर्षीय एक तिब्बती बुजुर्ग की टांडा मेडिकल कॉलेज की मौत हो गई। इसके बाद प्रशासन ने मैक्लोडगंज में कर्फ़्यू लगा दिया है और जिस निजी अस्पताल में इस शख्स का इलाज हो रहा था, उसे भी बंद कर दिया गया है।

प्रशासन को जानकारी मिली है कि यह बुजुर्ग 15 मार्च को अमरीका से भारत आए थे। 21 मार्च तक यह दिल्ली में रहे और फिर वहाँ से टैक्सी लेकर मैक्लोडगंज पहुँचे।

नियमों के अनुसार इस संबंध में उन्हें प्रशासन को सूचित करना चाहिए था मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया। अमरीका से दिल्ली आने, दिल्ली से धर्मशाला आने और मैक्लोडगंज में अपने परिजनों तक पहुँचने के बीच में इस बुजुर्ग का कोई लोगों से संपर्क हुआ होगा। इस कारण वे लोग भी करते में हो सकते हैं।

फ़िलहाल जिला प्रशासन इस शख़्स के संपर्क में आए लोगों को चिह्नित कर रहा है। इस प्रक्रिया को कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग कहा जाता है। सीएमओ जीडी गुप्ता का कहना है कि अभी तक जिन लोगों के इस शख्स के संपर्क में आने के बारे में पता चला है, उन्हें आइसोलेशन में भेजा गया है और सैंपल लेकर जाँच करने की प्रक्रिया जारी है।

निजी अस्पताल भी बंद
21 मार्च को दिल्ली से धर्मशाला पहुँचे बुजुर्ग की तबीयत ख़राब हुई तो उन्हें 23 मार्च को काँगड़ा के बालाजी अस्पताल पहुँचाया गया। यहाँ उनका इलाज किया गया मगर 23 तारीख़ को तबीयत बिगड़ी तो टांडा मेडिकल कॉलेज भेजा गया जहां उनकी मौत हो गई। अब प्रशासन ने अस्पताल को 15 दिनों के लिए बंद किया है और स्टाफ़ के 100 लोगों को आइसोलेशन में भेजा है।

मुनाफ़ाख़ोरी पर लगाम लगाने के लिए दुकानों से सब्ज़ियां ज़ब्त

हमीरपुर।। लॉकडाउन के दौरान जहां समाज को एकजुट होकर एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए, वहीं कुछ लोग इस दौर में फ़ायदा कमाने के चक्कर में हैं। बड़सर में प्रशासन ने मुनाफ़ाख़ोरों पर नकेल कसते हुए 396 किलो सब्ज़ियाँ ज़ब्त की हैं।

एसडीएम प्रदीप कुमार ने सोमवार को अलग अलग बाज़ारों का निरीक्षण किया और दुकानदारों के पास बिल और रेट लिस्ट न होने पर कार्रवाई की। इस दौरान बड़सर इलाक़े में सब्ज़ियों और किराने की लगभग 30 दुकानों की चेकिंग की। 22 दुकानों से 396 किलो सब्ज़ियाँ ज़ब्त की गईं।

सिविल सप्लाई विभाग की इंस्पेक्टर रिचा कुमारी ने पत्रकारों को जानकारी दी कि दुकानदारों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि वे दुकानों में रेट लिस्ट लगाकर रखें और ग्राहकों को अधिक मूल्य में सब्ज़ियाँ न बेचें।

कोरोना वायरस की ज़रूरी बातें जो आपको मालूम होनी चाहिए