बाहर फंसे हिमाचलियों के लिए सरकार ने जारी की हेल्पलाइन

शिमला।। कोरोना लॉकडाउन के चलते बाहरी राज्यों में फँसा हुए महसूस कर रहे हिमाचल प्रदेश वासियों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। इन नंबरों को जारी करते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि सरकार अन्य राज्यों में फँसे हिमाचलियों तक पहुँचने के लिए हर संभव कोशिश करेगी।

हालाँकि, इस पोस्ट में नंबर तो दिए गए हैं मगर यह नहीं बताया गया है कि किस तरह की सहायता मुहैया करवाई जाएगी और सरकार कैसे लोगों तक पहुँचेगी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपने फ़ेसबुक पेज पर भी इस हेल्पलाइन के संबंध में पोस्ट डाला है।

सरकार की ओर से जारी हेल्पलाइन नंबर इस तरह से हैं-

इससे पहले सरकार ने दिल्ली और चंडीगढ़ के हिमाचल भवनों को ऐसे ही मुश्किल में फँसे हिमाचलियों के खोलने का एलान किया था।

कोरोना लॉकडाउन से चारे की कमी, गोसदनों में मर रहे पशु

तबलीगी जमात: दिल्ली और केंद्र; दोनों सरकारें क्यों सोई रहीं?

शिमला।। दिल्ली में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों और उनके ज़रिये बड़े पैमाने पर कोरोना संक्रमण फैलने के कारण बीजेपी के संस्थापक सदस्य और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कड़ी नाराज़गी जताई है। उन्होंने सख़्त लहजे में कहा है कि अगर इस प्रकरण के कारण मासूम लोगों की मौत होती है तो यह हत्या से कम नहीं होगा। इसके लिए उन्होंने दिल्ली और केंद्र, दोनों सरकारों पर सवाल खड़े किए हैं।

वरिष्ठ बीजेपी नेता शांता कुमार ने अपने फ़ेसबुक पेज पर लिखा है कि इस प्रकरण से पूरा देश शर्मसार हुआ है। उन्होंने यह भी कहा है कि इस पूरे मामले में ईमानदारी से कर्तव्य का पालन नहीं हुआ।

शांता कुमार ने इस मामले पर जो कुछ लिखा है, आगे पढ़ें उन्हीं के शब्दों में-

“पूरा देश शर्मसार। तबलीगी जमात का पूरे देश में कोरोना कहर। सोलह दिन बीत जाने के बाद भी आज तक कोई सख्त कार्यवाही नहीं।

दिल्ली में दो सरकारें हैं। तीन हज़ार लोग बाहर के देशों के भी दोनों सरकारों की नाक के नीचे इकट्ठे होते रहे, मस्जिदों में लोगों को इकट्ठा करने के लिए भाषण होते रहे, पता तब लगा जब कोरोना कहर से लोग मरने लगे। उस कार्यक्रम से एक दिन में रोगियों की संख्या 373 बढ़ गई और पूरे देश में कोरोना फैल गया। इस एक भयंकर गलती से सैकड़ों लोग मरेंगे। यह हत्याएं हैं। कौन है इनके लिए जिम्मेदार?

सरकार भाषण रोक सकती थी, हजारों लोगों को जमात में आने से रोक सकती थी, क्यों सोई रही दो सरकारें? बदहवास गरीब प्रवासी सड़कों पर रोक दिए गए परंतु देश की राजधानी में तबलीगी जमात द्वारा इतना गंभीर अपराध क्यों होने दिया गया? इस प्रकार की कुछ गलतियां देश को बर्बाद कर सकती हैं।

निजामुद्दीन इलाके के लोग भी क्यों चुप देखते रहे? एकदम शिकायत करते, शोर मचाते, सरकार के सोए अधिकारियों को जगाते।

फिर वही बात- ईमानदारी से कर्तव्य पालन नहीं हुआ।”

कोरोना लॉकडाउन से चारे की कमी, गोसदनों में मर रहे पशु

तलबीगी जमात: निजामुद्दीन मरकज से हिमाचल लौटे 167 क्वॉरन्टीन

शिमला।। दिल्ली के निज़ामुद्दीन में हुए तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल लोगों में कोरोना संक्रमण फैलने से पूरे देश में हड़कंप मच गया है। इनमें से कुछ, जो वापस अपने-अपने राज्यों को लौटे हैं, की बीमारी के चलते मौत भी हुई है। अब ऐसी जानकारी मिली है कि पिछले एक महीने में 200 से अधिक लोग इस जलसे में शामिल होकर हिमाचल प्रदेश लौटे हैं। ऐसे में सावधानी बरतते हुए ऐसे 167 लोगों को क्वॉरन्टीन किया गया है।

हिमाचल पुलिस ने ऐसे लोगों की पहचान करना शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों के साथ मिलकर ऐसे लोगों का पता लगाया जा रहा है और उन्हें क्वॉरन्टीन सेंसरों में भेजा जा रहा है। हिमाचल प्रदेश पुलिस महानिदेशक सीताराम मंडी ने जानकारी दी है कि ऐसे 167 लोगों की पहचान की गई है।

इसके साथ ही इस जलसे में शामिल हुए सात लोगों के ख़िलाफ़ शिमला के नेरवा पुलिस स्टेशन में मामला भी दर्ज किया गया है। इन लोगों को बिना कर्फ़्यू परमिट के पकड़े गया था। ये एक गाड़ी पर सवार थे और जब पुलिस ने इनसे पूछताछ की थी तो इनका कहना था कि वे पावंटा साहिब से आ रहे हैं। यानी इन्होंने ग़लत जानकारी दी थी। पुलिस ने इन्हें पकड़ने के साथ ही गाड़ी को भी क़ब्ज़े में ले लिया है।

गाड़ी पर फ़र्ज़ी स्टिकर लगा हिमाचल में दाखिल हुए यूपी के तीन लोग

तबलीगी जमात: दिल्ली और केंद्र; दोनों सरकारें क्यों सोई रहीं?

पुलिस को ख़ास निर्देश
हिमाचल प्रदेश पुलिस प्रमुख ने सभी ज़िलों के एसपी को निर्देश दिए हैं कि वे सभी मदरसों वग़ैरह में ऐसे लोगों की पड़ताल करें जो हाल ही में हिमाचल से बाहर (देश के अन्य हिस्सों या विदेश) से लौटे हैं। ऐसे लोगों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के साथ साझा की जाएगी ताकि इन्हें क्वॉरन्टीन किया जा सके और इनके कोरोना के लिए टेस्ट लिए जा सकें।

अभी तक विभिन्न ज़िलों के लोगों के दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने की ख़बर है। इनमें चबा, काँगड़ा, कुल्लू, शिमला, सिरमौर और मंडी के निवासी भी हैं। ऐसे में सरकार ने अतिरिक्त सावधानी बरतना शुरू कर दिया है। अब तक हिमाचल प्रदेश के विभिन्न ज़िले से जलसे में शामिल हुए और अब क्वॉरन्टीन किए गए लोगों की लिस्ट (ख़बर लिखे जाने तक उपलब्ध) इस तरह से है-

  • ऊना- 35
  • शिमला- 23
  • सोलन (बद्दी)- 53
  • काँगड़ा- 10
  • चबा- 10
  • सिरमौर- 32
  • मंडी- 4

हिमाचल में कुल कितने लोग क्वॉरन्टीन
हिमाचल में अब तक बाहर से लौटे और संक्रमण की आशंका को टालने के लिए पाँच हज़ार से अधिक लोगों को क्वॉरन्टीन किया गया है यानी अलग-थलग रखा गया है। इनमें से लगभग 2000 लोगों को घर पर ही अलग-थलग रहने के लिए कहा गया है।

कोरोना लॉकडाउन से चारे की कमी, गोसदनों में मर रहे पशु

गाड़ी पर फ़र्ज़ी स्टिकर लगा हिमाचल में दाखिल हुए यूपी के तीन लोग

सोलन।। नालागढ़ पुलिस ने फ़र्ज़ी स्टिकर लगाकर हिमाचल पहुँचे उत्तर प्रदेश के तीन लोगों को पकड़ा है। यूपी के शामली से मोहम्मद अंसार, नदीम अहमद और नवाब एक गाड़ी पर सवार होकर आए थे। इन्हें पकड़ने के बाद नालागढ़ में बनाए गए क्वॉरन्टीन सेंटर में भेज दिया गया है।

पुलिस का कहना है कि कोई भी शख़्स प्रदेश की सीमा पार नहीं कर सकता। इस बीच एसपी रोहित मालपानी ने कहा है कि यूपी से आए तीन लोगों को शेल्टर होम भेजा गया है। एसपी ने कहा, “किसी भी शख़्स को प्रदेश की सीमा पार करने की इजाज़त नहीं है। सीमाओं पर आने वाले लोगों को रोककर शेल्टर होम में क्वॉरन्टीन किया जा रहा है। पुलिस ने 32 लोगों को बॉर्डर से वापस भी भेजा है।”

इस बीच पुलिस विभाग ने एलान किया है कि किरायेदार और लेबर मकान खाली करके वापस जाते हैं तो मकान मालिक पर भी कार्रवाई होगी। पुलिस के अनुसार, यदि किरायेदारों और लेबर को किसी भी मकान मालिक ने किराया देने के लिए परेशान किया और यदि कोई कमरा खाली करते हुए सड़क पर पाया गया तो ऐसे मकान मालिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

यह आदेश पूरे प्रदेश के लिए लागू है।

(कवर इमेज प्रतीकात्मक है)

कोरोना वायरस की ज़रूरी बातें जो आपको मालूम होनी चाहिए

कोरोना संकट को देखते हुए हेड कॉन्स्टेबल मनोज ठाकुर फिर बहाल

मंडी।। कोरोना लॉकाउन और कर्फ़्यू के दौरान डंडों को सैनिटाइज़ करने वाला वीडियो वायरस होने के बाद सस्पेंड किए गए हेड कॉन्स्टेबल मनोज ठाकुर को फिर से बहाल कर दिया गया है। हालाँकि, मनोज ठाकुर के ख़िलाफ़ शुरू की गई विभागीय जाँच जारी रहेगी और वह पुलिस लाइन मंडी में ही तैनात रहेंगे।

एसपी मंडी गुरुदेव ने बताया कि आपात स्थिति में पुलिस फ़ोर्स की कमी को देखते हुए मनोज ठाकुर की सेवाओं को बहाल कर दिया है। इस दौरान विभागीय जाँच जारी रहेगी। सदर थाने में तैनात रहे मनोज ठाकुर का वीडियो वायरल होने के बाद एसपी ने उन्हें लाइन हाज़िर करके सस्पेंड कर दिया था और जाँच बिठा दी थी।

क्या किया था मनोज ने
मनोज ठाकुर ने ‘लठ तो बजेगा लेकिन कोरोना न होगा’ बोलते हुए एक वीडियो बनाया गया था। सदर मंडी थाने में इसे शूट किया था। इसमें मनोज लाठियों को सैनीटाइज करते दिख रहे थे और कह रहे थे कि कर्फ्यू का उल्लंघन करने वालों के लिए इन्हें सैनीटाइज किया जा रहा है। ऐसे में एसपी मंडी गुरदेव शर्मा ने वीडियो को विभागीय नियमों के खिलाफ मानते हुए मनोज पर कार्रवाई की थी।

कौन हैं मनोज और वीडियो में क्या-क्या था, जानने के लिए पूरी ख़बर आप विस्तार से नीचे दिए लिंक पर टैप करके पढ़ सकते हैं

कोरोना वायरस की ज़रूरी बातें जो आपको मालूम होनी चाहिए

 

कोरोना लॉकडाउन से चारे की कमी, गोसदनों में मर रहे पशु

मनाली।। कोरोना संकट के कारण इंसानों को तो परेशानी हो रही है, सबसे ज़्यादा समस्या हो रही है गोसदनों में रखी गई गायों को। बेसहारा पशु तो इधर उधर घूमकर कुछ न कुछ खा ले रहे हैं मगर गोसदन चलाने वालों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। पहले से ही कई सारे गोसदन चारे की कमी से जूझ रहे थे, कोरोना लॉकडाउन के चलते यह संकट और बढ़ गया है।

हिमाचल प्रदेश के मनाली में गोसदन में चारे की कमी के कारण एक हफ़्ते में 30 गायों से जान चली गई। चारे की कमी बरकरार रही तो आगे और मौतें हो सकती हैं। पंजाब और अन्य राज्यों से भूसा न आ पाने के कारण ऐसे हालात पैदा हुए हैं। स्थानीय प्रशासन भी चारे का इंतज़ाम नहीं कर पा रहा।

बताया जा रहा है कि अधिक पशु होने के कारण छोटे बड़े पशु साथ रहने के कारण छोटे पशुओं की जान चली जा रही है। एक साल पहले यहाँ 300 के आसपास पशु रखे गए थे मगर संख्या लगातार घट रही है।

मनाली के एसडीएम रमन घरसंगी ने पत्रकारों को बताया कि गाँव के लोगों ने अपनी तरफ़ से पहल करते हुए कुछ घास गोसदन पहुँचाने का काम शुरू किया है। उन्होंने बताया, “कुल्लू फ्रूट ग्रोअर असोसिएशन पतली कूहल की ओर से भी घास दी जा रही है।सरकार ने पंजाब से घास लाने की इजाजत दे दी है और नियमित रूप से घास के ट्रक पहुंच रहे हैं।”

लोगों से अपील है कि अगर आपके आसपास कहीं गोसदन है तो कृपया सामर्थ्य के हिसाब से वहाँ चारा आदि पहुँचाने की कोशिश करें।

हिमाचल के डीजीपी अपनी टीम से बोले- पीटना और गालियां देना बन्द करो

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के डीजीपी एस.आर. मरडी ने पुलिसकर्मियों से कहा है कि वे कर्फ्यू और लॉकडाउन के दौरान लोगों को पीटना, मुर्गा बनाना और गालियां देना बंद करे।

हिमाचल पुलिस के चीफ ने अपनी टीम से कहा है कि लोगों से विनम्रता के साथ व्यवहार करे।  हिमाचल पुलिस ने अपने फेसबुक पेज पर डीजीपी के संदेश वाला एक वीडियो भी शेयर किया है।

Appeal by DGP HP Sh Sita Ram Mardi

HP Police ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಸೋಮವಾರ, ಮಾರ್ಚ್ 30, 2020

डीजीपी ने कहा, “देखने को आया है कि कुछ पुलिसकर्मियों का व्यवहार लोगों के प्रति सही नहीं है। इस दौर में लोग परेशान हैं। किसी की नौकरी चली गई है तो किसी की पढ़ाई रुक गई है।”

उन्होंने कहा, “अगर कोई इन्सान को दुख पहुंचाएगा तो वह भगवान को दुख पहुंचाएगा। प्रदेश के लोग कानून का पालन कर रहे हैं। ऐसे में पुलिसकर्मी गुस्से में न आएं।”

कोरोना: मोदी सरकार की खास टीम में हैं हिमाचल के ये अफसर

शिमला।। कोरोना वायरस के कारण पैदा हुए संकट से निपटने के लिए भारत सरकार ने 11 विशेष एम्पॉवर्ड ग्रुप्स बनाए हैं ताकि विभागों और मंत्रालयों के बीच समय ख़राब न हो। विशेष शक्तियों वाले इन समूहों का काम विभिन्न इलाक़ों में ज़रूरतों का पता लगाना और उन्हें पूरा करना होगा।

नीतियाँ बनाने, योजनाएं पेश करने, रणनीति बनाने और समय पर उन्हें पूरा करने-करवाने का काम इन्हीं समूहों का होगा। गृह मंत्रालय के आदेश पर आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए बनाए गए इन समूहों में हिमाचल प्रदेश कैडर के अधिकारी भी हैं, जो इन दिनों केंद्र की प्रतिनियुक्ति पर हैं।

डॉक्टर वी पॉल, नीति आयोग के सदस्य

डॉक्टर विनोद पॉल हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के रहने वाले हैं। वह 2017 में नीति आयोग के सदस्य बने थे। वह मेडिकल इमर्जेंसी मैनेजमेंट प्लान समूह का नेतृत्व करेंगे और स्ट्रैटिजिक इशूज़ रिलेटिंग टु लॉकडाउन यानी लॉकडाउन संबंधित रणनीतिक समस्याओं के समाधान के लिए बने समूह में भी शामिल रहेंगे।

डॉ. अमनदीप गर्ग, जॉइंट सेक्रेटरी, कैबिनेट सचिवालय

अमनदीप गर्ग 99 बैच के हिमाचल कैडर के अधिकारी हैं और केंद्र की प्रतिनियुक्ति यानी डेप्युटेशन पर हैं। वह मेडिकल इमर्जेंसी मैनेजमेंट प्लान समूह में शामिल होंगे। जब जेपी नड्डा स्वास्थ्य मंत्री बने थे, तब अमनदीप गर्ग केंद्र के डेप्युटेशन पर गए थे।

भरत एच. खेड़ा,  जॉइंट सेक्रेटरी, कैबिनेट सचिवालय

Image Courtesy: Indian Bureaucracy

भरत खेड़ा 1995 बैच के हिमाचल कैडर के अधिकारी हैं। वह टेक्नॉलजी एंड डेटा मैनेजमेंट समूह में शामिल हैं।

मीरा मोहंती, निदेशक, कैबिनेट सचिवालय

9th MCTP, Phase-III for IAS Officers : LBS National Academy of ...

मीरा मोहंती 2005 बैच की हिमाचल कैडर की आईएएस अधिकारी है। उन्हें पब्लिक ग्रीवैंसेज़ एंड सजेशंस समूह में जगह दी गई है।

कोरोना वायरस की ज़रूरी बातें जो आपको मालूम होनी चाहिए

पढ़ें, बाहर फँसे हिमाचलियों के मार्मिक ख़त, सरकार से अब भी है आस

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोरोना लॉकडाउन के कारण बाहरी राज्यों में फँसे लोगों को बाहर निकालने का उसका कोई प्लान नहीं है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी अपील की है कि जो लोग फँसे हैं, वो कुछ दिनों के लिए वहीं पर रहें। ऐसे में उन लोगों को हताशा हुई है, जो लोग बाहरी राज्यों में किसी कारण फँसे हैं और घर आने के इच्छुक हैं। हालाँकि, सरकार ने चंडीगढ़ और दिल्ली में लोगों की मदद के लिए हिमाचल भवन खोल दिए हैं।

शनिवार को ‘इन हिमाचल’ ने ऐसे ही कुछ लोगों से बात की थी। इस आर्टिकल  के आख़िर में हमने अपनी ईमेल आईडी देकर लोगों से कहा था कि वे अगर बाहर फँसे हैं तो अपने अनुभव और विचार हमारे साथ साझा कर सकते हैं। उसके बाद से हमें बहुत सारे ईमेल आए हैं। फ़ेसबुक पर भी कुछ लोगों ने मेसेज भेजकर अपनी बातें लिखी हैं।

कुछ लोगों ने बताया है कि कैसे वे अपने परिजनों को लेकर चिंतित हैं। इनमें कुछ लोग वो हैं जो परीक्षा देने के लिए कहीं गए थे, कुछ इलाज के लिए गए थे तो कुछ कारोबार के सिलसिले में। इसी बीच लॉकडाउन हो गया और परमानेंट ठिकाना न होने के कारण उनकी हालत ख़राब हो गई है। अब घर लौटने का कोई साधन नहीं दिख रहा। कुछ लोग हिमाचल से लिख रहे हैं कि उनके परिजन बाहर फँसे हुए हैं।

आगे पढ़ें, हमें मिले संदेशों में से कुछ-

सरिता मल्होत्रा, सोलन से
मेरी बेटियां गुड़गांव में हैं और उनमें से एक की तबीयत ठीक नहीं है। उसे उल्टियाँ हो रही हैं दो दिनों से। उसे अचानक, पहली बार भयंकर माइग्रेन का अटैक पड़ा है। उसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ा जहां 25,000 रुपये ले लिए गए। मेरी गुज़ारिश है कि उन्हें सोलन के बड़ोग लाने का कुछ इंतज़ाम किया जाए।

श्रेय सूद, गुड़गाँव से
हम इस समय गुड़गांव में फंसा हूं और दुविधा और पैनिक की स्थिति होने के कारण घर आना चाहता हूं। मैं नौकरी के सिलसिले में यहां पर हूं। हिमाचल से और भी कई लोग हैं जो लॉकडाउन के कारण फंसे हैं। मैं गुजारिश करता हूं कि हमें वापस लाने के लिए कुछ पहल करें क्योंकि यहाँ हम हताश महसूस कर रहे हैं। खाने का सही इंतज़ाम भी नहीं है। हम दिन ब दिन उम्मीद खोते जा रहे हैं।

अगर लॉकडाउन बढ़ा तो हम हम यहाँ सर्वाइव नहीं कर पाएँगे। हम किराया नहीं दे पाएँगे और अन्य खर्च नहीं उठा पाएँगे क्योंकि आर्थिक संकट के कारण नौकरियों की गारंटी नहीं है। यहाँ खर्च ज़्यादा होता है और रोज़ हमारा पैसा खर्च होता जा रहा है। अगर हम घर पहुँच जाएं तो सब ठीक हो सकता है। मैं आपसे गुज़ारिश करता हूँ कि इस संबंध में कुछ करें। कुछ सहयोग करने का मौक़ा मिला तो उसमें भी ख़ुशी होगी।

रजनीश और राहुल शर्मा, जयपुर से
हम अभी जयपुर शहर में हैं और हिमाचल में अपने होमटाउन जाना चाहते हैं। अगर घर पहुंचाने का कोई तरीका है तो कोई बस या कार का इंतजाम करवा दीजिए। प्लीज हमें 70***** और 78***** पर संपर्क करें।

वीपन सिंह, भोपाल से
मैं हिमाचल के कुल्लू से हूं और भोपाल में टाटा मोटर्स में काम करता हूं। लॉकडाउन के कारण यहां फंसा हुआ हूं। मेरा परिवार मेरे लिए चिंतित है और मैं उनके लिए। अगर यह जारी रहा तो लॉकडाउन को बढ़ाया जा सकता है। मैं हिमाचल प्रदेश सरकार से गुजारिश करता हूं कि कुछ करे वरना आगे हमें बहुत दिक्कत होगी। हिमाचल सरकार को इस संबंध में जरूरी कदम उठाने चाहिए। हिमाचल से बाहर और भी बहुत से लोग फंसे हुए हैं। प्लीज हमें हमारे घर लेकर जाइए।

अरुण शर्मा, कोलकाता से
हम हिमाचल सरकार से गुजारिश कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हम 10 लोग हैं। जैसा कि आप जानते हैं, यहां हमें कोई उम्मीद नहीं है। हमें लॉकडाउन के कारण बहुत समस्याएं हो रही हैं। इसलिए हम घर आना चाहते हैं।

अरविंद सिंह, जालंधर से
मेरा नाम अरविंद सिंह है, धर्मशाला से हूं। मैं पिछले 15 दिनों से जालंधर में एक दोस्त के पास रुका हूं। मैं किसी काम से जालंधर आया था। मैंने बीते दिन डीजीपी सर की बात सुनी। वो कह रहे थे कि हिमाचल बाहर किसी और राज्य में किसी कारण फंसे लोगों को 31 मार्च के बाद हिमाचल लेकर आएंगे। गुजारिश है कि स्पेशल बसें चलाकर लोगों को हिमाचल में लाने की कोशिश की जाए। मेरी सरकार से विनम्र गुजारिश है।

अभिनव अवस्थी, पंजाब के बरनाला से

मैं एक प्रॉडक्शन प्लांट में काम कर रहा हूं। 25 को लॉकडाउन की घोषणा हुई मगर मैं 23 में ही यहां फंसा हूं क्योंकि पंजाब ने कर्फ्यू घोषित कर दिया था। मैं अपने परिवार के पास जाने के लिए बेचैन हूं। मेरे पास अपनी गाड़ी है और इसके जरिये पंजाब से आ सकता हूं मगर मुझे नहीं मालूम कि पुलिस मुझे हिमाचल में दाखिल होने देगी या नहीं। मेरे पापा चंबा में फंसे हैं और मेरी मां-बहन बैजनाथ में घर पर अकेले हैं। मैं बरनाला में फंसा हूं। काश हमारा परिवार जल्द साथ मिले। 🙁

शिल्पा कुमारी
मेरा भाई नोएडा में फंसा है। वह अपनी बिल्डिंग में अकेला है। इस कारण मेरी मां का बीपी बढ़ गया है। वह रात को सो नहीं पा रहीं। मेरी हिमाचल सरकार से गुजारिश है कि कुछ करे। आज दिल्ली की हालत खबरों में देखकर लगा कि आने वाले दिन बहुत बुरे हो सकते हैं। प्लीज़, हमारे लिए कुछ करो।
पंकज धीमान, अहमदाबाद से
हम अहमदाबाद में फंसे हैं। यहां हिमाचल के और भी परिवार हैं और कई बैचलर हैं। लगभग 30 लोग होंगे। हम घर आना चाहते हैं मगर संभव नहीं है। मैं फोर्ड इंडिया में काम करता हूं जरूरी सेवाओं में कार्यरत हूं। मेरा परिवार रोज कॉल करके पूछ रहा है कि सेफ हूं या नहीं। अभी तक तो सब ठीक है मगर आने वाले दिनों में जाने क्या होगा क्योंकि अहमदाबाद में और केस सामने आए हैं। हम भी परिवार की याद में बेहाल हैं मगर उनके पास जा पाना संभव नहीं।
विकास कटोच, गुजरात से
हम चार लोग एग्ज़ाम के लिए गुजरात आए थे। हमारा एग्जाम कैंसल हो गया और यातायात के साधन रुक गए। हम यहां एक महीने से अधिक समय से आए हुए हैं। अगर सरकार किसी तरह से बाहरी राज्यों में फंसे लोगों को निकालना चाह रही है तो उन लोगों को भी निकाले जो यहां पर अकेले बिना पर्याप्त साधनों के फंसे हुए हैं।
तमन्ना सिंह ठाकुर, दिल्ली से
मैं छात्रा हूं, दिल्ली में हूं. अगर सरकार बसों की सेवा उपलब्ध करवाती है तो कृपया मुझे बताएं। मैं मंडी जिले से हूं।

नारायण ठाकुर, दिल्ली से
मेरा नाम नारायण ठाकुर है, शिमला से हूं। मैं और मेरी पत्नी कुछ इलाज के लिए दिल्ली आए थे। वह प्रेगनेंट हैं। कर्फ्यू के काऱण हम दिल्ली में फंस गए हैं। अभी किराए का घर लेकर रह रहे हैं। मगर हम ज्यादा नहीं रह सकते। जानना चाहता हूं कि क्या हिमाचल प्रदेश सरकार ने रेस्क्यू करने के लिए कोई प्लान या हेल्पलाइन बनाई है ताकि अन्य राज्यों में फंसे लोगों को निकाला जा सके?

(आप भी अपने अनुभव और विचार inhimachal.in@gmail.com पर भेज सकते हैं)

कोरोना वायरस की ज़रूरी बातें जो आपको मालूम होनी चाहिए

बाहर फँसे हिमाचलियों से बोले CM- जहां हैं, कुछ वक्त वहीं रुकें

शिमला।। कोरोना संकट के कारण प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहे हिमाचलियों में बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जो घर आना चाहता है। इस संबंध में सरकार से लगातार गुजारिश की जा रही है वह अन्य राज्यों की तर्ज पर बसें आदि चलाए। मगर हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसा नहीं किया जाएगा। सरकार ने लोगों से ‘जहां हैं, वहीं रहने’ की अपील की है।

शनिवार को इस संबंध में सीएम जयराम ठाकुर ने एक वीडियो जारी करके संदेश दिया है और लोगों से अपील की है। इसमें सीएम ने कहा कि बाहर फंसे लोगों को कुछ समय तक वहीं रुकना चाहिए ताकि वो खुद और उनका परिवार सुरक्षित रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा, “हिमाचल प्रदेश के जितने भी लोग लॉकडाउन से बाहर हैं, वे परेशान हैं, परिवार परेशान है, हम भी चिंतित हैं। सब लोग घर आना चाहते हैं और हमसे व परिवार से संपर्क कर रहे हैं। उनकी परेशानी जायज है मगर मैं निवेदन करना चाहता हूं कि जब आपका इस दौर में इतना सहयोग मिला है तो कुछ वक्त के लिए और इंतजार करना चाहिए। वो इसलिए, क्योंकि इस महामारी से आपका और आपके परिवार का सुरक्षित रहना जरूरी है इसलिए दायित्व का पालन करें। जहां हैं, कुछ वक्त वहीं रुकें।”

मुख्यमंत्री का पूरा संबोधन आप नीचे देख सकते हैं-

कोरोना लॉकडाउन के चलते बाहर फँसे हिमाचलियों का दर्द