पढ़ें, बाहर फँसे हिमाचलियों के मार्मिक ख़त, सरकार से अब भी है आस

प्रतीकात्मक तस्वीर

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोरोना लॉकडाउन के कारण बाहरी राज्यों में फँसे लोगों को बाहर निकालने का उसका कोई प्लान नहीं है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी अपील की है कि जो लोग फँसे हैं, वो कुछ दिनों के लिए वहीं पर रहें। ऐसे में उन लोगों को हताशा हुई है, जो लोग बाहरी राज्यों में किसी कारण फँसे हैं और घर आने के इच्छुक हैं। हालाँकि, सरकार ने चंडीगढ़ और दिल्ली में लोगों की मदद के लिए हिमाचल भवन खोल दिए हैं।

शनिवार को ‘इन हिमाचल’ ने ऐसे ही कुछ लोगों से बात की थी। इस आर्टिकल  के आख़िर में हमने अपनी ईमेल आईडी देकर लोगों से कहा था कि वे अगर बाहर फँसे हैं तो अपने अनुभव और विचार हमारे साथ साझा कर सकते हैं। उसके बाद से हमें बहुत सारे ईमेल आए हैं। फ़ेसबुक पर भी कुछ लोगों ने मेसेज भेजकर अपनी बातें लिखी हैं।

कुछ लोगों ने बताया है कि कैसे वे अपने परिजनों को लेकर चिंतित हैं। इनमें कुछ लोग वो हैं जो परीक्षा देने के लिए कहीं गए थे, कुछ इलाज के लिए गए थे तो कुछ कारोबार के सिलसिले में। इसी बीच लॉकडाउन हो गया और परमानेंट ठिकाना न होने के कारण उनकी हालत ख़राब हो गई है। अब घर लौटने का कोई साधन नहीं दिख रहा। कुछ लोग हिमाचल से लिख रहे हैं कि उनके परिजन बाहर फँसे हुए हैं।

आगे पढ़ें, हमें मिले संदेशों में से कुछ-

सरिता मल्होत्रा, सोलन से
मेरी बेटियां गुड़गांव में हैं और उनमें से एक की तबीयत ठीक नहीं है। उसे उल्टियाँ हो रही हैं दो दिनों से। उसे अचानक, पहली बार भयंकर माइग्रेन का अटैक पड़ा है। उसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ा जहां 25,000 रुपये ले लिए गए। मेरी गुज़ारिश है कि उन्हें सोलन के बड़ोग लाने का कुछ इंतज़ाम किया जाए।

श्रेय सूद, गुड़गाँव से
हम इस समय गुड़गांव में फंसा हूं और दुविधा और पैनिक की स्थिति होने के कारण घर आना चाहता हूं। मैं नौकरी के सिलसिले में यहां पर हूं। हिमाचल से और भी कई लोग हैं जो लॉकडाउन के कारण फंसे हैं। मैं गुजारिश करता हूं कि हमें वापस लाने के लिए कुछ पहल करें क्योंकि यहाँ हम हताश महसूस कर रहे हैं। खाने का सही इंतज़ाम भी नहीं है। हम दिन ब दिन उम्मीद खोते जा रहे हैं।

अगर लॉकडाउन बढ़ा तो हम हम यहाँ सर्वाइव नहीं कर पाएँगे। हम किराया नहीं दे पाएँगे और अन्य खर्च नहीं उठा पाएँगे क्योंकि आर्थिक संकट के कारण नौकरियों की गारंटी नहीं है। यहाँ खर्च ज़्यादा होता है और रोज़ हमारा पैसा खर्च होता जा रहा है। अगर हम घर पहुँच जाएं तो सब ठीक हो सकता है। मैं आपसे गुज़ारिश करता हूँ कि इस संबंध में कुछ करें। कुछ सहयोग करने का मौक़ा मिला तो उसमें भी ख़ुशी होगी।

रजनीश और राहुल शर्मा, जयपुर से
हम अभी जयपुर शहर में हैं और हिमाचल में अपने होमटाउन जाना चाहते हैं। अगर घर पहुंचाने का कोई तरीका है तो कोई बस या कार का इंतजाम करवा दीजिए। प्लीज हमें 70***** और 78***** पर संपर्क करें।

वीपन सिंह, भोपाल से
मैं हिमाचल के कुल्लू से हूं और भोपाल में टाटा मोटर्स में काम करता हूं। लॉकडाउन के कारण यहां फंसा हुआ हूं। मेरा परिवार मेरे लिए चिंतित है और मैं उनके लिए। अगर यह जारी रहा तो लॉकडाउन को बढ़ाया जा सकता है। मैं हिमाचल प्रदेश सरकार से गुजारिश करता हूं कि कुछ करे वरना आगे हमें बहुत दिक्कत होगी। हिमाचल सरकार को इस संबंध में जरूरी कदम उठाने चाहिए। हिमाचल से बाहर और भी बहुत से लोग फंसे हुए हैं। प्लीज हमें हमारे घर लेकर जाइए।

अरुण शर्मा, कोलकाता से
हम हिमाचल सरकार से गुजारिश कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हम 10 लोग हैं। जैसा कि आप जानते हैं, यहां हमें कोई उम्मीद नहीं है। हमें लॉकडाउन के कारण बहुत समस्याएं हो रही हैं। इसलिए हम घर आना चाहते हैं।

अरविंद सिंह, जालंधर से
मेरा नाम अरविंद सिंह है, धर्मशाला से हूं। मैं पिछले 15 दिनों से जालंधर में एक दोस्त के पास रुका हूं। मैं किसी काम से जालंधर आया था। मैंने बीते दिन डीजीपी सर की बात सुनी। वो कह रहे थे कि हिमाचल बाहर किसी और राज्य में किसी कारण फंसे लोगों को 31 मार्च के बाद हिमाचल लेकर आएंगे। गुजारिश है कि स्पेशल बसें चलाकर लोगों को हिमाचल में लाने की कोशिश की जाए। मेरी सरकार से विनम्र गुजारिश है।

अभिनव अवस्थी, पंजाब के बरनाला से

मैं एक प्रॉडक्शन प्लांट में काम कर रहा हूं। 25 को लॉकडाउन की घोषणा हुई मगर मैं 23 में ही यहां फंसा हूं क्योंकि पंजाब ने कर्फ्यू घोषित कर दिया था। मैं अपने परिवार के पास जाने के लिए बेचैन हूं। मेरे पास अपनी गाड़ी है और इसके जरिये पंजाब से आ सकता हूं मगर मुझे नहीं मालूम कि पुलिस मुझे हिमाचल में दाखिल होने देगी या नहीं। मेरे पापा चंबा में फंसे हैं और मेरी मां-बहन बैजनाथ में घर पर अकेले हैं। मैं बरनाला में फंसा हूं। काश हमारा परिवार जल्द साथ मिले। 🙁

शिल्पा कुमारी
मेरा भाई नोएडा में फंसा है। वह अपनी बिल्डिंग में अकेला है। इस कारण मेरी मां का बीपी बढ़ गया है। वह रात को सो नहीं पा रहीं। मेरी हिमाचल सरकार से गुजारिश है कि कुछ करे। आज दिल्ली की हालत खबरों में देखकर लगा कि आने वाले दिन बहुत बुरे हो सकते हैं। प्लीज़, हमारे लिए कुछ करो।
पंकज धीमान, अहमदाबाद से
हम अहमदाबाद में फंसे हैं। यहां हिमाचल के और भी परिवार हैं और कई बैचलर हैं। लगभग 30 लोग होंगे। हम घर आना चाहते हैं मगर संभव नहीं है। मैं फोर्ड इंडिया में काम करता हूं जरूरी सेवाओं में कार्यरत हूं। मेरा परिवार रोज कॉल करके पूछ रहा है कि सेफ हूं या नहीं। अभी तक तो सब ठीक है मगर आने वाले दिनों में जाने क्या होगा क्योंकि अहमदाबाद में और केस सामने आए हैं। हम भी परिवार की याद में बेहाल हैं मगर उनके पास जा पाना संभव नहीं।
विकास कटोच, गुजरात से
हम चार लोग एग्ज़ाम के लिए गुजरात आए थे। हमारा एग्जाम कैंसल हो गया और यातायात के साधन रुक गए। हम यहां एक महीने से अधिक समय से आए हुए हैं। अगर सरकार किसी तरह से बाहरी राज्यों में फंसे लोगों को निकालना चाह रही है तो उन लोगों को भी निकाले जो यहां पर अकेले बिना पर्याप्त साधनों के फंसे हुए हैं।
तमन्ना सिंह ठाकुर, दिल्ली से
मैं छात्रा हूं, दिल्ली में हूं. अगर सरकार बसों की सेवा उपलब्ध करवाती है तो कृपया मुझे बताएं। मैं मंडी जिले से हूं।

नारायण ठाकुर, दिल्ली से
मेरा नाम नारायण ठाकुर है, शिमला से हूं। मैं और मेरी पत्नी कुछ इलाज के लिए दिल्ली आए थे। वह प्रेगनेंट हैं। कर्फ्यू के काऱण हम दिल्ली में फंस गए हैं। अभी किराए का घर लेकर रह रहे हैं। मगर हम ज्यादा नहीं रह सकते। जानना चाहता हूं कि क्या हिमाचल प्रदेश सरकार ने रेस्क्यू करने के लिए कोई प्लान या हेल्पलाइन बनाई है ताकि अन्य राज्यों में फंसे लोगों को निकाला जा सके?

(आप भी अपने अनुभव और विचार inhimachal.in@gmail.com पर भेज सकते हैं)

कोरोना लॉकडाउन के चलते बाहर फँसे हिमाचलियों का दर्द

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