‘फेक’ निकली दिल्ली से घूमने आए कपल की कोरोना रिपोर्ट, पुलिस ने दर्ज किया मामला

कांगड़ा।। दिल्ली से घूमने आए पति और पत्नी पर छह जुलाई की कोरोना की फर्जी निगेटिव रिपोर्ट बनाकर कांगड़ा में प्रवेश करने का आरोप लगा है। दोनों की पहचान 25 वर्षीय अंकित चौधरी और उनकी पत्नी निकिता निवासी दिल्ली के रूप में हुई है। हालांकि, उनका कहना है कि रिपोर्ट असली है।

एसपी कांगड़ा विमुक्त रंजन को कुछ शक हुआ तो उन्होंने इस कपल की कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट को क्रॉस चेक करने के लिए दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भेजा। अस्पताल की ओर से कहा गया कि कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट फर्जी है।

इसके बाद एसपी कांगड़ा विमुक्त रंजन ने तुरंत पर्यटक पति और पत्नी को पालमपुर के भवारना के गुग्गा सलोह के एक होटल में ढूंढा और परौर स्थित क्वारंटीन केंद्र में भेज दिया। दोनों पर नूरपुर पुलिस थाने में धोखाधड़ी और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

अपनी गाड़ी में दिल्ली से आए इन पति और पत्नी ने मंगलवार को भी कांगड़ा जिले में एंट्री करने की कोशिश की थी। दोनों को नूरपुर के पास कंडवाल बैरियर पर पुलिस ने रोक लिया था। दोनों ने पुलिस को कहा कि उन्होंने टेस्ट करवाया है। पुलिस ने इस रिपोर्ट को नहीं माना और कोरोना का आरटी पीसीआर टेस्ट करवाने के लिए कहा। उसके बाद बुधवार सुबह को कंडवाल बैरियर पर दंपती फिर से पहुंच गया। दोनों ने पुलिस को आरटी पीसीआर टेस्ट की निगेटिव रिपोर्ट दिखाई।

इसके बाद दोनों को जिले में एंटी दे दी गई। दोनों ने पालमपुर के होटल में पांच दिन के लिए बुकिंग करवाई थी। दोनों होटल में किसी कारणवश नहीं ठहरे। दोनों भवारना के पास सलोह पैलेस में ठहरे। एसपी विमुक्त रंजन को शक हुआ और उन्होंने दिल्ली में रिपोर्ट क्रॉस चेक करवाई। हालांकि, इस कपल का कहना है कि रिपोर्ट असली है।

बहरहाल,अब इन पति और पत्नी का गुरुवार को परौर में कोरोना का टेस्ट होगा। अगर रिपोर्ट निगेटिव आई तो दोनों को पालमपुर पुलिस गिरफ्तार कर सकती है।

बिना रोक-टोक, बिना कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट हिमाचल पहुँच रहे पर्यटक

नियम तोड़ने वालों को जेल और जुर्माने की तैयारी में हिमाचल सरकार

शिमला।। अनलॉक 2 के बाद लोगों के रवैये में लापरवाही बढ़ती देख सरकार अब एक अध्यादेश लाने पर विचार कर रही है जिसके तहत नियमों को सख्ती से लागू किया जा सके। इस प्रस्ताव को अगली कैबिनेट बैठक में लाया जा सकता है। इसके बाद नियम तोड़ने वालों को जुर्माने से लेकर जेल तक की सज़ा हो सकती है।

हिमाचल के अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य आरडी धीमान ने पत्रकारों से कहा, ‘कोरोना से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार करोड़ों खर्च कर रहा है मगर लोग लापरवाही बरत रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि सब ठीक हो गया है। मगर ऐसी लापरवाही भारी पड़ सकती है। इसीलिए अध्यादेश लाने की तैयारी की जा रही है।”

प्रदेश सरकार का मानना है कि भले ही हिमाचल की स्थिति अभी बेहतर है मगर जरा सी लापरवाही बरतने पर कोविड-19 ख़तरनाक साबित हो सकती है। अगर लोग सोशल डिस्टैंसिंग की धज्जियाँ उड़ाकर बिना मास्क पहने घूमेंगे और एक-दूसरे के गले मिलेंगे तो मामले बढ़ सकते हैं।

बिना रोक-टोक, बिना कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट हिमाचल पहुँच रहे पर्यटक

देश के विभिन्न भागों से लौटे लोगों के कारण बढ़े कोरोना के मामले: सीएम

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि प्रदेश एक समय कोरोना मुक्त बनने की ओर बढ़ रहा था लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों से लौटे लोगों के कारण संक्रमितों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है। हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों को चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि सरकार किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

मुख्यमंत्री ने मंगलवार को शिमला में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मंडी जिले के सुंदरनगर विधानसभा क्षेत्र में 45 करोड़ रुपये की विभिन्न योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। सीएम ने इस दौरान विपक्ष पर भी निशआना साधा। उन्होंने कहा कि इस महामारी में सरकार का साथ देने की जगह विपक्ष राजनीति करने से बाज नहीं आ रहा है।

जयराम ठाकुर ने शहीद परमवीर कैप्टन विक्रम बत्रा को याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने चीन के दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब दिया है। सीएम ने कहा कि देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुरक्षित हाथों में हैं।

बिना रोक-टोक, बिना कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट हिमाचल पहुँच रहे पर्यटक

बिना रोक-टोक, बिना कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट हिमाचल पहुँच रहे पर्यटक

शिमला।। एक ओर जहां अनलॉक 2 के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों को इंटरस्टेट मूवमेंट के लिए ई-पास व्यवस्था ख़त्म करने को कहा है, दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश ने अपने दरवाज़े कुछ दिशानिर्देशों के साथ पर्यटकों के लिए भी खोल दिए हैं। इससे हुआ यह है कि टूरिज़्म विभाग के दिशानिर्देशों की धज्जियाँ उड़ाते हुए पड़ोसी राज्यों के पर्यटक हिमाचल के अंदरूनी इलाक़ों तक पहुँच जा रहे हैं।

लोग आशंका जता रहे हैं कि अगर इनमें से कोई कोरोना संक्रमित हुआ तो बाक़ी लोगों को भी ख़तरा हो सकता है। इस बात को लेकर भी लोगों में ग़ुस्सा है कि जब हिमाचल प्रदेश में बाहर से लौट रहे लोगों को संस्थागत और होम क्वॉरन्टीन किया जा रहा है तो ये पर्यटक कैसे हर जगह घूम पा रहे हैं। कम से कम प्रदेश के प्रवेश द्वारों पर क्यों नहीं उन्हें रोका जा रहा?

हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कहा है कि जो भी व्यक्ति पर्यटन के लिए हिमाचल आना चाह रहा है, उसके पास हिमाचल में मान्यता प्राप्त होटल में कम से कम पाँच दिन की बुकिंग का सबूत और साथ में कोरोना के नेगेटिव टेस्ट की रिपोर्ट होनी चाहिए। और यह रिपोर्ट एक वाहन में सवार सभी के पास अपनी होनी चाहिए। मगर सोमवार को कुल्लू में हुई एक घटना ने प्रदेशवासियों की चिंता बढ़ा दी है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर

स्वारघाट से सीधे कुल्लू पहुँच गए
कुल्लू के बजौरा मे लगाए गए नाके से सोमवार को पंजाब, हरियाणा एवं चंडीगढ़ से आए 19 पर्यटकों को लौटाया गया है। इन लोगों के पास कोविड-19 नेगेटिव होने की रिपोर्ट नहीं थी। इनमें हरियाणा के दस और पंजाब और मोहाली से नौ पर्यटक आए थे। हालाँकि, नाके से लौटाए जाने के बाद वे लौटे हैं या हिमाचल में ही कहीं और रुके हैं, इसकी पुष्टि करने का पुलिस के पास और कोई तरीक़ा नहीं है। इस बीच सोमवार शाम को ही काँगड़ा ज़िले के पर्यटन स्थल बीड़ में स्थानीय लोग हरियाणा नंबर की गाड़ी पर सवार लोगों को देख चिंता में जताते पाए गए।

कुल्लू से लौटाए गए पर्यटक स्वारघाट नाके से आए थे और बिलासपुर से मंडी होते हुए कुल्लू पहुंचे थे। यह दिखाता है कि रास्ते में उन्हें कहीं पर भी चेक नहीं किया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर चेकिंग ही नहीं करनी है तो फिर कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट और बुकिंग जैसे अन्य तामझाम जैसे नियम बनाने का मतलब क्या है? इससे पहले कुछ पर्यटकों के बड़ोग और कसौली घूमकर लौटने की भी ख़बरें आई थीं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर

पर्यटन विभाग की बनती है ज़िम्मेदारी
हिमाचल के लोग कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट की शर्त पर इसलिए भी सवाल उठा रहे हैं क्योंकि फोटोशॉप जैसे सॉफ़्टवेयर के ज़रिये आसानी से लोग अपना नाम बदलकर किसी भी रिपोर्ट में अपना नाम लिखकर फ़र्ज़ी रिपोर्ट बना सकते हैं। यही नहीं, मेरठ की एक लैब में पैसे लेकर फ़र्ज़ी नेगेटिव रिपोर्ट बनाए जाने की ख़बर भी हिमाचल प्रदेश यूज़र्स द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है।

फ़िलहाल देशभर में सरकारी स्तर पर कोरोना के टेस्ट विदेश से या फिर बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों के ही किए जा रहे हैं। निजी लैब्स उन्हीं मरीज़ों का टेस्ट करने के लिए अधिकृत हैं, जिन्हें किसी डॉक्टर ने टेस्ट के लिए लिखा हो। और डॉक्टर तभी किसी को कोरोना टेस्ट की सलाह दे सकते हैं जब मरीज़ में कोरोना के लक्षण हों। ऐसे में पर्यटक घूमना आना चाहेगा तो सिफ़ारिश लगवाकर ही ऐसा टेस्ट करवा सकता है।

मान लीजिए कि वह कोरोना का टेस्ट नेगेटिव की रिपोर्ट लेकर आ रहा है तो क्या गारंटी है कि वह हिमाचल पहुँचने के रास्ते में कहीं संक्रमित नहीं होगा? और फिर उसे कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट होने के आधार पर घूमने की छूट दी जा रही है तो किस आधार पर हिमाचल में बाहर से लौटे प्रदेशवासियों को 14 दिन तक क्वॉरन्टीन किया जा रहा है और रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद भी होम क्वॉरन्टीन रहने को कहा जा रहा है?

प्रतीकात्मक तस्वीर

क्या है सही तरीक़ा?
अभी हिमाचल कोविड ई-पास पर पास देने की व्यवस्था बंद है और सिर्फ़ पंजीकरण करवाने पर आपको अकनॉलेजमेंट मिल जाता है, जिसे आपको लेकर आना होता है। पर्यटकों के लिए पर्यटन विभाग अलग से व्यवस्था करे जिसमें ऐसी अकनॉलेजमेंट देने से पहले आधार नंबर माँगा जाए। उस आधार नंबर को आईसीएमआर के संबंधित सर्वर से जोड़ा जाए ताकि उसके आधार पर देखा जाए कि पर्यटक ने कोरोना का टेस्ट करवाया है या नहीं।

चूँकि कोरोना का टेस्ट करवाए जाने से पहले फ़ॉर्म में आधार का नंबर डालना अनिवार्य है, ऐसे में सरकार चाहे तो उस आधार नंबर के आधार पर चेक कर सकती है कि उस व्यक्ति ने वाक़ई टेस्ट करवाया है या नहीं और रिपोर्ट क्या है। ऐसे में टेस्ट करवाने और रिज़ल्ट नेगेटेवि होने की पुष्टि होने पर ही पर्यटक को अनुमति दी जाए अन्यथा उसका आवेदन रद्द किया जाए। जितने भी लोग साथ आ रहे हों, सबके लिए यही प्रक्रिया होनी चाहिए।

पर्यटन विभाग होटलों को भी अपने साथ जोड़े ताकि बुकिंग की पुष्टि की जा सके। सिर्फ़ नियम बनाकर बैठ गए पर्यटन विभाग के अधिकारियों को चाहिए कि प्रदेश के नाकों पर अपने विभाग के कर्मचारियों को तैनात करे और फिर देखे कि पर्यटकों के पास वैध अकनॉलेजमेंट या अनुमतियाँ है या नहीं। वे अपने डेटाबेस से मिलान करने के बाद ही लोगों को प्रवेश की अनुमति दे। जिसके दस्तावेज फ़र्ज़ी हों, उस पर तुरंत कार्रवाई की जाए।

जब सख़्त नियम हिमाचल प्रदेश वासियों के घर लौटने पर लागू किए जा रहे हैं तो पर्यटकों पर भी होने चाहिए। पर्यटकों का स्वागत है, उनसे कोई दिक़्क़त नहीं। मगर इस दौर में फ़ोकस कारोबार या आय बचाने का नहीं, जान बचाने का होना चाहिए। ये महामारी का दौर है, कोई मज़ाक़ नहीं चल रहा। मामले कम होने का मतलब यह नहीं है कि ख़तरा टल गया है।

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महिलाओं को नामज़द करने पर कांग्रेस बोली- लाहौल में भी गिरफ़्तारियाँ देंगे कार्यकर्ता

काजा।। हिमाचल प्रदेश के कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा का रास्ता रोकने पर 123 लोगों को नामजद करने के विरोध में अब और लोग आए हैं। इस संबंध में पुलिस ने 80 महिलाओं समेत 100 को गिरफ्तार किया था जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। मगर अब कुछ और महिलाएं इसके विरोध में खुद गिरफ्तारी देने की योजना बना रही हैं। हिमाचल कांग्रेस ने कहा है कि अगर मामले को वापस न लिया गया तो लाहौल में भी कांग्रेस कार्यकर्ता गिरफ्तारी देंगे।

कृषि मंत्री पिछले महीने की नौ तारीख को ग्रांफू-काजा-समदो मार्ग को बीआरओ से PWD को देने के फैसले के विरोध में प्रदर्शन कर रहे मजदूरों से मिलने जा रहे थे। मगर बीच में महिलाओं ने उनका रास्ता रोक लिया था। महिलाओं का कहना था कि वह कोविड-19 के रोकने के लिए बनाए गए नियमों का पालन नहीं कर रहे।

बड़ी संख्या में जुटी महिलाओं ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया था। इसके बाद पुलिस ने 123 लोगों पर सीआरपीसी की धारा 41 A के तहत नामजद किया था। एसपी लाहौल-स्पीति का कहना है कि इनमें 60 फीसदी महिलाएं हैं। उनका कहना है कि जांच के बाद इस संबंध में कोर्ट में चालान पेश किया जाएगा।

इस मामले में आरोप लग रहे हैं कि मंत्री का रास्ता रोकने के पीछे कांग्रेस का हाथ है। कृषि मंत्री ने भी अपने विरोध को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा था कि वह कोविड-19 नियमों का पालन कर रहे थे और जब वह काजा गए थे तो हिमाचल के अंदर मूवमेंट पर किसी तरह की रोक नहीं थी। मारकंडा स्थानीय विधायक भी हैं।

कांग्रेस बोली- लड़ेंगे क़ानूनी लड़ाई
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि महिलाओं ने कोई क़ानून नहीं तोड़ा है और उन्होंने तो कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए क़ानून की रक्षा की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिलाओं की क़ानूनी लड़ाई लड़ेगी। वहीं, लाहौल स्पीती कांग्रेस के पूर्व विधायक रवि ठाकुर ने कहा है कि लोकतंत्र में जनता से विरोध का अधिकार भी छीन लिया गया है। उन्होंने कहा कि सत्ता के खिलाफ आवाज उठाने पर महिलाओं पर मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता अनिल सहगल का कहना है कि सरकार मामला वापस नहीं लेगी तो कार्यकर्ता लाहौल में भी गिरफ्तारी देंगे।

 

स्वास्थ्य निदेशक ऑडियो मामला: जानें, कहां तक पहुँची विजिलेंस जाँच

शिमला।। पीपीई खरीद मामले में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही विजिलेंस को पता चला है कि रिश्वत की आधी रकम स्वास्थ्य निदेशक को दी गई थी। यह पूरा मामला स्वास्थ्य निदेशक और पृथ्वी सिंह नाम के शख्स के बीच लेन-देन का एक ऑडियो वायरल होने के बाद सामने आया था। इस पूरे मामले में पर उठ रहे सवालों के बीच राजीव बिंदल ने बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष पद से ‘नैतिक मूल्यों का ध्यान रखते हुए’ इस्तीफा दे दिया था जिसे आलाकमान ने मंज़ूर कर लिया था।

बताया जा रहा है कि विजिलेंस द्वारा अब तक की गई पूछताछ में घूस की आधी रकम निदेशक को दिए जाने की जानकारी मिली है। अमर उजाला ने अपने सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट में लिखा है कि यह जानकारी फर्म मालिक और एजेंट से हुई पूछताछ के बाद सामने आई है। इसमें कहा गया है कि दोनों से अलग-अलग और एक साथ बिठाकर की गई पूछताछ में पचास हजार रुपये चंडीगढ़ में और बाकी दो लाख रुपये दो बार में देने की जानकारी मिली है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘पचास हजार रुपये दिए जाने की बात तो खुद पीपीई किट सप्लाई करने वाली फर्म के एजेंट और भाजपा नेताओं के क़रीबी पृथ्वी सिंह ने कबूल की है। साथ ही हाल ही में दो दिन हुई लंबी पूछताछ में फर्म मालिक जीएस कोहली से भी कई ऐसी अहम जानकारियां मिली हैं, जिनसे साफ हुआ है कि फर्म से ही पैसा लेकर निदेशक को पहुंचाया गया।’

हालांकि, इस बात को लेकर अभी भी बयानों में विरोधाभास है ढाई लाख रुपये दिए गए या फिर पांच लाख। अब विजिलेंस का फोकस इस बात पर है कि कितना लेन-देन हुआ और कैसे-कैसे हुआ।

ब्यूरो ने मामला दर्ज कर सबसे पहले पूर्व स्वास्थ्य निदेशक डॉ. एके गुप्ता से पूछताछ के दौरान सहयोग न करने पर गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पृथ्वी की भी गिरफ्तारी की गई। फिलहाल दोनों जमानत पर चल रहे हैं। ऐसी ख़बरें आई थीं कि पृथ्वी सिंह को सेवा विस्तार करने के लिए एक बीजेपी नेता की ओर से सरकार को सिफ़ारिश का नोट भेजा गया था। बाद में यह भी साफ़ हुआ था कि पृथ्वी सिंह नाम का अभियुक्त पहले राजीव बिंदल की बेटी और दामाद की कंपनी के लिए काम करता था।

स्वास्थ्य निदेशक केस: बेटी की कंपनी के कर्मचारी की गिरफ्तारी के बाद बिंदल ने दिया इस्तीफा

 

क्वॉरन्टीन सेंटर्स और हिमाचल के बॉर्डर नाकों पर ड्यूटी देंगे अध्यापक

ऊना।। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में क्वॉरन्टीन सेंटर्स और इंटरस्टेट बैरियर्स पर अध्यापकों की भी ड्यूटी लगेगी। रेलवे स्टेशन ऊना में भी अध्यापकों को तैनात किया जा रहा है। ऊना उपमंडल में इस काम के लिए 50 से अधिक अध्यापकों की ड्यूटी लगेगी।

जिन अध्यापकों को यह काम करना है, सोमवार को उनकी एक बैठक बचत भवन ऊना में हुई। उपायुक्त संदीप कुमार ने इस दौरान अध्यापकों को कोरोना संबंधित नियम कायदों की जानकारियां दीं।

उपायुक्त ने कहा कि कोरोना संकट की शुरूआत से राजस्व अधिकारियों की ड्यूटी लगी थी मगर अब राजस्व कार्यालय खुलने के कारण उन्हें वापस अपनी रूटीन ड्यूटी में लौटना पड़ रहा है। ऐसे में उनकी जगह अध्यापकों को तैनात किया जा रहा है क्योंकि अभी स्कूल खुले नहीं हैं।

इससे पहले बिलासपुर के नयनादेवी से नाकों पर अध्यापकों की तैनाती की शुरुआत हुई थी।

कोरोना के कारण घर पर बैठे अध्यापकों की नाकों पर लगी ड्यूटी

बॉर्डर पर लगने लगा जाम, ‘कसौली-बड़ोग घूमकर लौट रहे कई टूरिस्ट’

शिमला।। पर्यटकों के लिए दरवाजे खुलते ही हिमाचल आने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी है। परवाणु में पंजाब और हरियाणा से आ रही गाड़ियों का तांता देखने को मिल रहा है। हिमाचल सरकार की ओऱ से पर्यटकों को आने की इजाजत देने चंद घंटों के बाद ही परवाणु बैरियर पर जाम जैसी स्थिति देखने को मिली थी।

इस संबंध में परवाणु के डीएसपी योगेश का कहना है कि पहले जहां आठ पुलिसकर्मी ही एक शिफ्ट में काम संभाल रहे थे मगर वाहनों की बढ़ी हुई संख्या देखने के बाद छह और पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। कुछ पुलिसकर्मियों की छुट्टियां भी रद्द करनी पड़ी हैं।

हालांकि, परवाणु से हिमाचल प्रदेश आने वाले लोगों में सोलन, शिमला, सिरमौर और किन्नौर जिलों के निवासी भी हैं जो घर आने का इंतज़ार कर रहे थे। साथ ही दिल्ली, चंडीगढ़ और पंजाब में रहने वाले वो लोग भी हैं जिनके शिमला और अन्य पहाड़ी इलाकों में बंगले हैं।

भले ही हिमाचल प्रदेश सरकार का कहना है कि पर्यटकों को तभी हिमाचल आने दिया जाएगा जब उन्होंने कम से कम पांच दिनों की बुकिंग हिमाचल के होटल में करवाई हो। मगर अंग्रेज़ी अखबार ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चंडीगढ़, पंचकुला और मोहाली से कई सारे पर्यटक कसौली और बड़ोग आए औऱ कुछ घंटों बाद वापस चले गए। हालांकि, वे गए या नहीं या कब गए, इसका पता करने का प्रशासन के पास कोई तरीका नहीं है।

पर्यटकों के आने का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। हालांकि, 500 के लगभग गाड़ियां ऐसी थीं जिसपर सवार पर्यटकों को जरूरी नियम पूरे न करने के कारण लौटा दिया गया।

सोलन के परवाणू में रविवार को 1700 के ज्यादा गाड़ियां पहुंची। इनमें हिमाचल प्रदेश के लोग भी थे और पर्यटक भी। जिन पर्यटकों के पास कोविड ई-पास वेबसाइट पर पंजीकरण की अकनॉलेजमेंट या कोरोनो नेगेटिव रिपोर्ट नहीं थी, उन्हें वहीं से लौटा दिया गया। बताया जा रहा है कि ऐसे वाहनों की संख्या 500 के करीब ती।

आगे जानें, पर्यटकों और होटल वालों के लिए हिमाचल प्रदेश पर्यटन विभाग ने क्या दिशानिर्देश जारी किए हैं-

हिमाचली घर लौटेगा तो होगा क्वॉरन्टीन, लेकिन पर्यटक मस्त नाचेगा वादियों में?

 

काँगड़ा: चौकी प्रभारी पर हमला करने के आरोप में 12 महिलाएं अरेस्ट

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के डाडासीबा की टिप्परी पंचायत के लुसियार गांव में पुलिसकर्मी पर हमला करने के आरोप में 12 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है। इन महिलाओं ने गाँव के 35 वर्षीय मिस्त्री की संदिग्ध हालात में मौत होने के बाद पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए चौकी प्रभारी से मारपीट की थी। इस घटना का एक वीडियो वायरल हो गया था।

मिस्त्री की मौत के बाद गाँव के लोग पुलिस थाने में जाना चाहते थे मगर कोरोना संकट को देखते हुए पुलिस ख़ुद गाँव की ओर चली गई ताकि भीड़ न लेग। मगर महिलाओं ने चौकी प्रभारी को घेरकर धक्कामुक्की की थी, कुछ ने वार किए थे तो कुछ ने उनकी वर्दी फाड़ दी थी।

अब पुलिस ने वायरल वीडियो में दिख रही महिलाओं की पहचान करने के बाद उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज करके गिरफ़्तारियाँ की हैं। हालाँकि, अन्य महिलाओं की पहचान अभी नहीं हो पाई है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार की गई महिलाओं से पूछताछ के बाद ही उनके साथ मौजूद रही महिलाओं की पहचान की जाएगी।

इन महिलाओं पर पुलिस ने ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी से मारपीट करने और सरकारी काम में बाधा पहुँचाने का मामला दर्ज किया है।

डाडासीबा में महिलाओं ने किया पुलिसकर्मी पर हमला, वीडियो वायरल

हिमाचल: पर्यटकों और स्थानीय होटल-टैक्सी वालों के लिए ये हैं नियम

शिमला।। अनलॉक 2.0 के बाद कोरोना संकट के बीच पर्यटकों के लिए हिमाचल प्रदेश के दरवाज़े खोल दिए गए हैं। पर्यटक कैसे हिमाचल आ सकते हैं और यहाँ आने के बाद उन्हें क्या करने की इजाज़त होगी, इसे लेकर पर्यटन विभाग की ओर से SOP यानी दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

पर्यटकों के स्मार्टफ़ोन पर आरोग्य सेतु ऐप होना चाहिए और 72 घंटों के अंदर आईसीएमआर अप्रूव्ड लैब से कोरोना टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट होनी चाहिए। उनके अलावा टैक्सी चालकों आदि के लिए भी कुछ नियम तय किए गए हैं। पर्यटकों को हिमाचल आने के बाद भी सोशल डिस्टैंसिंग और कोरोना संकट के इस दौर के लिए तय किए गए नियमों का पालन करना होगा।

क्या करना होगा पर्यटकों को?
हिमाचल प्रदेश में प्रवेश करने नाकों या एंट्री पॉइंट्स पर तैनात जिला प्रशासन द्वारा नियुक्त कर्मचारियों को देखना होगा कि पर्यटकों के पास 72 घटों के अंदर जारी कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट, हिमाचल के होटल पर कम से कम पाँच दिन की बुकिंग और कोविड कपास पर पंजीकरण का अकनॉलेजमेंट है या नहीं।

इसके बाद पर्यटकों को हिमाचल के अंदर प्रवेश करने की इजाज़त मिलेगी। लेकिन उन्हें ये सारे दस्तावेज हर समय अपने पास करने होंगे। जब वे होटल पहुँचेंगे तो चेक इन करने से पहले रिसेप्शन पर दोबारा ये डॉक्युटमेंट चेक होंगे और उनकी थर्मल स्क्रीनिंग भी की जाएगी।

टैक्सियाँ कैसे चलाई जाएँगे, अडवेंचर वाली जगहों में क्या होगा, इसे लेकर भी दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। यहाँ पर उचित दूरी बनाए रखनी होगी। साथ ही सभी लोगों की ज़िम्मेदारी होगी कि वे किसी को भी लापरवाही न करने दें। होटलों को अपने यहाँ साफ़ सफ़ाई और सैनिटाइजेशन का ध्यान रखना होगा, टैक्सी चालकों को भी सावधानी बरतनी होगी।

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