कबड्डी के शौकीन राजिंदर गर्ग ने मंत्री बन चौंकाया

शिमला।। घुमारवीं से विधायक राजिंदर गर्ग हिमाचल सरकार में मंत्री बनाए गए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के करीबी माने जाने वाले गर्ग लंबे समय से संगठन से जुड़े हैं। उनके अलावा पावंटा के विधायक सुखराम चौधरी और नूरपुर के एमएलए राकेश पठानिया को भी मंत्री बनाया गया है।

30 मई 1966 को बिलासपुर के ठंडोड़ा में जन्मे राजिंदर गर्ग बॉटनी में एमएससी हैं। उन्होंने एचपीयू और जीवाजी यूनिवर्सिटी ग्वालियर से पढ़ाई की है। परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं। पेशे से वह राजनीतिक कार्यकर्ता, कृषक और बागवान हैं।

गर्ग छात्र जीवन से राजनीति से जुड़ गए थे। 1982 में वह आरएसएस के स्वयंसेवक बने और 1983 में सक्रिय रूप से एबीवीपी की गतिविधियों में हिस्सा लेने लगे। पहले एबीवीपी के बिलासपुर जिले के संयोजक रहे, फिर हिमाचल एबीवीपी के सचिव बने, मध्य प्रदेश में परिषद के पूर्णकालिक संगठन सचिव रहे।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के करीबी हैं राजिंदर गर्ग

कुछ समय के लिए वह पत्रकारिता से भी जुड़े थे। 2000 से लेकर 2006 तक दैनिक भास्कर के लिए स्थानीय संवाददाता के तौर पर काम किया। फिर बीजेपी के ट्रेनिंग सेल के संयोज ने। 2006 से 10 तक हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड और तकनीकी शिक्षा बोर्ड के सदस्य और निदेशक रहे. 2009 से 2011 तक बीजेपी के नेशनल ट्रेनिंग सेल के सदस्य भी रहे।

2012 चुनाव में जब उन्हें पहली बार टिकट मिला तो 2500 वोटों से हार गए। इसके बाद उन्हें बीजेपी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में दोबारा घुमारवीं से उतारा। इस बार उन्होंने कांग्रेस के राजेश धर्माणी को पराजित किया। लोगों से मिलना-जुलना उन्हें पसंद है और कबड्डी का शौक़ है। भले ही कई लोग उनके मंत्री बनने से हैरान हैं मगर राजनीतिक विश्लेषक मान रहे थे कि राजिंदर गर्ग का नंबर लग सकता है क्योंकि कई हालात उनके पक्ष में थे।

दरअसल हमीरपुर-बिलासपुर जैसे अहम ज़िलों से कोई भी मंत्री नहीं था। इन ज़िलों में बीजेपी के धुरंधर नेता, जिनमें प्रेम कुमार धूमल भी शामिल हैं, चुनाव हार चुके हैं। बीजेपी के चुने गए विधायक फ़र्स्ट टाइमर ही थे। इनमें नरिंदर ठाकुर अपवाद थे जो इस बार हमीरपुर से चुने जाने से पहले सुजानपुर उपचुनाव में जीत हासिल कर चुके थे। मगर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि धूमल ख़ेमा उन्हें मंत्री नहीं बनने देगा। उधर नड्डा की बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही राजिंदर गर्ग की क़िस्मत के तारे भी चमकते हुए दिखने लगे थे।

सामने आया विधायक राकेश पठानिया और महिला कॉन्स्टेबल की बहस का वीडियो

कबड्डी के शौकीन राजिंदर गर्ग ने मंत्री बन चौंकाया

सुखराम चौधरी: ’21 हजार के शगुन’ के बदले मिला मंत्री पद

शिमला।। पांवटा के विधायक सुखराम चौधरी मंत्री बनने जा रहे हैं। सिरमौर जिला कांग्रेस का गढ़ रहा है पांवटा सीट कांग्रेस की पारंपरिक सीट थी। मगर 2003 में पहली बार सुखराम चौधरी ने बीजेपी के लिए ये सीट निकली थी। 2017 चुनाव में भी जब वह जीते थे, मंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी बन रही थी। मगर जिले की ही नाहन सीट से जीते राजीव बिंदल भी मंत्री पद के दावेदार थे जिन्हें विधानसभा अध्यक्ष बना दिया गया था। इसके साथ ही चौधरी की दावेदारी खत्म हो गई थी।

जब 2019 में लोकसभा चुनाव हो रहे थे, तब मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने संकेतों में बात की थी कि सबसे ज़्यादा लीड दिलाने वाले की मंत्री बनने की दावेदारी मजबूत होगी। उस दौरान विधायक सुखराम चौधरी और पांवटा भाजपा मंडल ने 21 हजार का शगुन देने का वादा किया था। यानी शिमला सीट से बीजेपी उम्मीदवार को अपने विधानसभा क्षेत्र से 21 हजार से ज्यादा वोट दिलाने की बात कही थी। मगर पांवटा में इस शगुन से भी कहीं अधिक 27517 मतों की बढ़त मिली थी। सुरेश कश्यप को सबसे ज़्यादा लीड पांवटा सीट से ही मिली थी।

सुखराम चौधरी

इसके बाद से ही पांवटा के लोगों को उम्मीद थी कि सुखराम को मंत्री बनाया जाएगा। कयास तो पिछले साल से ही चल रहे थे मगर अब जाकर चौधरी के मंत्री बनने का रास्ता खुल है। क्योंकि बिंदल न तो विधानसभा अध्यक्ष हैं और न ही प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हैं। सिरमौर को सरकार में प्रतिनिधित्व देना जरूरी था और अब यह जिम्मेदारी सुखराम चौधरी निभाएंगे।

सिरमौर के कई इलाके बहुत ही पिछड़े हुए हैं। अब उम्मीद है कि चौधरी अब कैबिनेट को अपने इलाके की दिक्कतों से अवगत करवाकर विशेष योजनाएं बनवाने की दिशा में कोशिश कर सकते हैं।

सामने आया विधायक राकेश पठानिया और महिला कॉन्स्टेबल की बहस का वीडियो

सामने आया विधायक राकेश पठानिया और महिला कॉन्स्टेबल की बहस का वीडियो

राकेश पठानिया: जानें, कौन हैं जयराम सरकार में नए मंत्री

इन हिमाचल डेस्क।। आखिरकार नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया का मंत्री पद का इंतजार खत्म हो गया है। तेज-तर्रार नेता माने जाने वाले पठानिया जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री बनने जा रहे हैं। उनके साथ पांवटा विधायक सुखराम चौधरी और घुमारवीं के एमएलए राजिंदर गर्ग को भी मंत्री बनने का मौका मिला है।

15 नवम्बर 1964 को कांगड़ा के लदोरी गांव में जन्मे राकेश पठानिया के पिता सेना थे। उनके पिता काहन सिंह कर्नल के पद पर रहते हुए रिटायर हुए थे। बचपन में खेल-कूद में रुचि रखने वाले कुलदीप ग्रैजुएट हैं। उन्होंने पुणे, इलाहाबाद (प्रयागराज) और अमृतसर से पढ़ाई की है।

राकेश पठानिया

राजनीति के इतर खुद को समाजसेवी मानने वाले पठानिया के परिवार में पत्नी, एक बेटी और एक बेटा है।

राजनीतिक करियर
पठानिया के राजनीतिक सफर की शुरुआत 1991 में हुई थी। वह भारतीय जनता किसान मोर्चा जैसे संगठनों में भी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।

1996 में बीजेपी के टिकट पर राकेश पठानिया ने पहली बार विधानसभा उपचुनाव लड़ा था मगर उसमें उन्हें सफलता नहीं मिली थी। पहली बार वह 1998 में बीजेपी के टिकट पर ही जीतकर विधानसभा पहुंचे। 2003 तक वह पर्यटन विकास निगम के चेयरमैन रहे। अगले चुनाव में उन्हें हार मिली। फिर 2007 में जब बीजेपी ने टिकट नहीं दिया तो निर्दलीय चुनाव लड़े और जीते भी।

राकेश पठानिया

2012 में उन्हें निर्दलीय लड़ते हुए हार मिली मगर 2017 में बीजेपी का टिकट मिलने पर तीसरी बार विधानसभा के लिए चुने गए। अभी वह लोक प्रशासन समिति व कुछ अन्य समितियों के सदस्य हैं।

तेज-तर्रार माने जाने वाले पठानिया विधानसभा में अपनी ही सरकार के मन्त्रियों से जनता से जुड़े सवाल पूछकर उन्हें असहज करते रहे हैं। हालांकि, ऐसे मौके भी कई बार आए जब सीएम पर हमलावर विपक्ष से पठानिया अकेले ही भिड़ गए।

विवादों से भी उनका नाता रहा है। पिछले वर्ष वह तब चर्चा में आए थे जब शिमला के सील्ड रोड पर उनकी एक महिला कॉन्स्टेबल से बहस का वीडियो सामने आया था।

नूरपुर की जनता को पठानिया से काफी उम्मीदें रही हैं। कांगड़ा की जनता पहले के मंत्रियों से निराश रही है। ऐसे में देखना होगा कि पठानिया मंत्री बनकर क्या अलग करते हैं।

कबड्डी के शौकीन राजिंदर गर्ग ने मंत्री बन चौंकाया

कबड्डी के शौकीन राजिंदर गर्ग ने मंत्री बन चौंकाया

सामने आया विधायक राकेश पठानिया और महिला कॉन्स्टेबल की बहस का वीडियो

हिमाचल: वॉलीबॉल टूर्नामेंट में पहुंचे मंत्री के बेटे ने एकसाथ तोड़े कई नियम

शिमला।। एक ओर जहां हिमाचल सरकार सुझाव मंगवा रही है कि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए लॉकडाउन लगाया जाए या नहीं, दूसरी ओर नेता, मंत्री और उनके परिजन नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। आपने सांसदों, मंत्रियों को नियमों का उल्लंघन करते तो देखा ही होगा, अब मंत्री पुत्र का एक काम चर्चा का विषय बन गया है।

शिमला सिटी से विधायक और शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज के बेटे पर आरोप लगा है कि उन्होंने भमनोली गांव में वॉलीबॉल टूर्नमेंट में मुख्यातिथि के तौर पर शिरकत की थी। भमनोली सुरेश भारद्वाज का पैतृक गाँव है। अनुराग भारद्वाज पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने मास्क भी नहीं लगाया था और लोगों से खुलकर मिले।

ये सब तब हुआ जब पहले से ही पूरे प्रदेश (देश में भी) समूह में होने वाले खेलों पर रोक है। न तो खिलाड़ी ऐसे जुट सकते हैं और न दर्शक। मगर अनुराग भारद्वाज जहां पर दिखे, वहां इन सभी नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। इस पूरे वाक़ये की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं।

इस प्रतियोगिता में कई टीमों ने हिस्सा लिया। शिक्षा मंत्री के पुत्र कह रहे हैं कि वह तो अपने बगीचे को देखने गए थे, वह तो तब वहां गए जब पता चला कि गांव में मास्क बांटे जा रहे हैं। उन्होंने ये भी कहा कि टूर्नमेंट नहीं हो रहा था, कुछ स्थानीय बच्चे खेले जा रहे थे। उनका यह बयान कई अखबारों में भी छपा है। मगर सोशल मीडिया पर आई तस्वीरें उनके दावे की पोल खोल देती हैं।

गांव के प्रधान ने भी मामले से कन्नी काट ली है और कहा कि न तो उन्होंने ऐसे किसी आयोजन को स्वीकृति दी थी और न वह वहां पर उपस्थित थे। अब इस पूरे मामले को लेकर जागरूक लोग नाराज़गी जता रहे हैं। कांग्रेस ने भी इस बात को लेकर सवाल उठाए हैं कि जनता और सत्ताधारी नेताओं, दोनों के लिए अलग नियम क्यों हैं।

मास्क न पहनने के लिए पहले खुद पर जुर्माना लगाएं हिमाचल के नेता

इंटरनेट यूज़र्स से पूछ रही हिमाचल सरकार- लॉकडाउन लगाएं या नहीं?

शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में लॉकडाउन लगाने को लेकर अब जनता की राय मांगी है। इसके लिए हिमाचल सरकार के पोर्टल पर एक पोल शुरू किया है जिसमें लोगों से कंप्लीट लॉकडाउन और वीकेंड में लॉकडाउन लगाने को लेकर सवाल पूछा गया है। एक अगस्त तक दोनों सवालों पर लोग अपना वोट देकर राय रख सकते हैं।

बताया जा रहा है कि हिमाचल सरकार इस पोल के नतीजों के आधार पर फैसला लेगी कि लॉकलाउन लगाया जाएगा या नहीं। और अगर लगाया जाता है तो कंप्लीट लॉकडाउन होता या फिर आंशिक। सरकार इसे ‘प्रदेश हित में किसी फैसले को लेने के लिए जनता की सहभागिता के लिए अनूठी पहल’ करार दे रही है मगर इसे लेकर कुछ सवाल भी खड़े हो गए हैं।

राय देने वाले कौन हैं?
सवाल ये कि सरकार ख़ुद स्थिति का आकलन क्यों नहीं कर रही और अगर एक्सपर्ट्स की जगह जनता की राय क्यों ले रही है। क्या ऐसे संवेदनशील विषयों पर जनता की राय के आधार पर फ़ैसला लिया जाएगा, ख़ासकर तब जब वह ख़ुद नियमों का पालन नहीं कर रही। आधे से ज़्यादा लोग मास्क से नाक बाहर लटकाए घूम रहे हैं और गाँवों में टूर्नामेंटों का आयोजन हो रहा है।

यही लोग लॉकडाउन की वकालत भी कर रहे हैं जबकि आर्थिक गतिविधियाँ शुरू करने के लिए प्रदेश के बाग़वानों, किसानों, कॉन्ट्रैक्टरों और कारोबारियों ने कमर कस ली है और बाहर से प्रवासी मज़दूरों का लौटना भी शुरू हो गया है। इसके साथ ही बहुत से लोगों ने सीमित मेहमानों के साथ विवाह आदि अन्य कार्यक्रमों की भी तैयारियाँ शुरू की हैं क्योंकि कोरोना संकट का अंत होता नहीं दिख रहा।

अचानक लॉकडाउन लगाया तो होगा नुकसान
अब अगर सरकार बिना प्लैनिंग के अचानक फिर जन भावनाओं के आधार पर लॉकडाउन लगा देगी तो नुक़सान जनता का ही होगा। उस जनता का नुक़सान होगा, जिसके पास करने के लिए काम है। लॉकडाउन का सुझाव देने वाले उन लोगों का कोई नुक़सान नहीं होगा जो पहले भी ख़ाली बैठ इंटरनेट पर समय गंवाते थे और लॉकडाउन के दौरान भी यही कर रहे हैं।

सरकार ने एक अगस्त तक पोल रखा है। अगर वह उसके बाद लॉकडाउन लगाने पर विचार कर रही है तो अभी से सूचित करे ताकि लोग उस हिसाब से अपने तय कार्यक्रमों की योजना बनाएं। वरना पहले की तरह अचानक कंप्लीट लॉकडाउन लगा तो उसके झटके से सूबा कभी उबर नहीं पाएगा। ‘विकास के शिखर पर हिमाचल’ का जो लक्ष्य सरकार ने रखा है, वह भी पूरा नहीं होगा क्योंकि सड़कें बनाने, पक्की करने, इमारतें बनाने आदि का काम पहले से ही लटका हुआ है।

कंप्लीट लॉकडाउन से बेहतर होगा कि नियमों को सख़्त किया जाए और जो नियम तोड़े, उसपर जुर्माना हो। और इससे भी पहले नेता, ख़ासकर मंत्री और सांसद ख़ुद उदाहरण पेश करें जो लॉकडाउन के दौरान इधर-उधर घूमते रहे हैं, मजमा लगाते रहे हैं और वो भी सोशल डिस्टैंसिंग व मास्क के बिना।

मास्क न पहनने के लिए पहले खुद पर जुर्माना लगाएं हिमाचल के नेता

स्मार्टफोन तीन महीने पहले लिया था, गाय इसी महीने बेची थी इस परिवार ने

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी के उस परिवार की कहानी आपने भी सुनी होगी जिसने बच्चों की पढ़ाई के लिए गाय बेचकर स्मार्टफ़ोन खरीद लिए। इस मामले में स्थानीय विधायक, समाजसेवियों से लेकर कोरोना काल में प्रवासी श्रमिकों के लिए मददगार बने अभिनेता सोनू सूद तक मदद के लिए आगे आए। मगर अब ऐसी खबर आई है कि मामला पूरी तरह वह नहीं है, जैसा एक खबर के आधार पर सोशल मीडिया पर फैल गया।

एक खबर आई थी कि ज्वालामुखी के गुम्मर गांव के कुलदीप ने प्राइमरी में पढ़ने वाले अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए स्मार्टफोन खरीदा ताकि वे ऑनलाइन क्लासेज़ अटेंड कर सकें। कहा जा रहा था कि इस स्मार्टफोन को खरीदने के लिए कुलदीप ने गाय बेच दी। इसके बाद कई हाथ मदद के लिए आगे आए।

हालांकि, ऐसी खबरें सामने लगीं कि परिवार में किसी तरह के विवाद के कारण कुलदीप के परिवार को पशुशाला में रहना पड़ रहा है। तमाम अटकलों के बाद अब यह पता चला है कि प्रशासन ने जब कुलदीप के घर जाकर पड़ताल की तो कथित तौर पर कुलदीप ने यह कहते हुए गाय लेने से इनकार कर दिया कि उसे गाय की जरूरत नहीं है और गाय बांधने के लिए उसकी जगह भी नहीं है।

कुलदीप अभी भी पशुशाला में रह रहा है। प्रशासन का कहना है कि चार से पांच हज़ार रुपये कीमत का स्मार्टफोन कुलदीप ने तीन पहले ही ले लिया था, जबकि गाय उसने पिछले सप्ताह ही बेची है। प्रशासन के ऐसे दावों के बाद अब पूरे मामले में कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं।

इस तस्वीर से कुलदीप की ख़राब आर्थिक स्थिति की झलक नज़र आती है।

हालाँकि, कुलदीप की जो तस्वीरें आपने देखी होंगी, उनसे पता चलता है कि जहां वह रहता है, उस जगह की हालत कैसी है। इस बात में कोई शक नहीं कि उसकी आर्थिक हालत कमजोर है और उसे मदद की दरकार थी।

नहीं थम रहे मामले, बीबीएन में मंगलवार सुबह 6 बजे तक पूरी तरह लॉकडाउन

सोलन।। हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक केंद्र बीबीएन में कोरोना के नए मामले सामने आने का सिलसिला नहीं रुक रहा है। इन हालात में सोलन प्रशासन ने बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ में पूरी तरह लॉकडाउन घोषित कर दिया है। यह लॉकडाउन शनिवार आधी रात से मंगलवार सुबह छह बजे तक रहेगा।

जिला प्रशासन का कहना है कि इस दौरान कोई नागरिक बाहर नहीं घूम पाएगा। एसडीएम नालागढ़ को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कहा गया है।

अब तक बीबीएन में 380 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। वहीं पूरी हिमाचल में एक्टिव केस 781 हैं और 1149 मरीज़ ठीक होकर घर लौट चुके हैं। अब तक कोरोना संक्रमित 11 लोगों की जान गई है।

वनमहोत्सव के तामझाम पर फिजूलखर्ची क्यों नहीं रोक रही सरकार

इन हिमाचल डेस्क।। वन विभाग हर साल लाखों पौधे तैयार करता है और रोपता भी है। उसमें उतना खर्च नहीं आता जितना हमारे नेता वन महोत्सव करवाने के नाम पर कर देते हैं।

सारा प्रशासनिक अमला पहुंचता है, टेंट-माइक-एलसीडी-कुर्सियां लगतीं हैं, लोहे के बोर्डों पर पेंटर से पौधा लगाने वाले नेता का नाम लिखा होता है। अगले साल बोर्ड वहीं होता है और पौधा सूखा मिलता है। ये सब होता है जनता के पैसे से।

सरकारी पैसे पर अपनी छवि चमकाने की कोशिशों के अलावा ये और क्या है? कर्ज पर चल रही सरकार जनता पर तो आर्थिक बोझ थोप देती है लेकिन खुद एक पैसे की बचत करने को तैयार नहीं।

नेता ये दिखावा करते किसलिए हैं? क्या जनता को समझ नहीं आता कि वो क्या कर रहे हैं? आप 15 लाख पेड़ लगाने का दावा करो या 15 करोड़ का, वह आपकी उपलब्धि नहीं है। आपका मूल्यांकन आपके विजन और नीतियों के आधार पर किया जाएगा।

बाकी, द ग्रेट खली की मनोरंजक रेसलिंग को खेलों को बढ़ावा देने की पहल बताकर प्रचारित करने से ही पता चल गया था कि सरकार में बैठे कुछ लोगों का एक्सपोजर कितना है और कैसे वो स्टंट करके जनता को लुभाने की रणनीति बना रहे थे।

उस समय भी जनता ने संदेश दिया था कि उसे काम चाहिए, शिगूफे नहीं। अफसोस, उससे भी कुछ सबक नहीं लिया गया।

वन विभाग हर साल लाखों पौधे तैयार करता है और रोपता भी है। उसमें उतना खर्च नहीं आता जितना हमारे नेता वन महोत्सव करवाने के…

Posted by In Himachal on Tuesday, July 21, 2020

जो गोविंद सिंह ठाकुर परिवहन मंत्री हैं, वही हिमाचल के वन मंत्री भी हैं। एक तरफ तो आर्थिक नुकसान की बात करके वह बसों का किराया बढ़ा देते हैं, दूसरी तरफ अनावश्यक खर्च करके वन महोत्सव के नाम पर प्रदेश भर में लाखों खर्च करते हैं और इसे बड़ी पहल दिखाते हैं।

कल प्रदेश के हर डिवीजन में यह ऐक्टिविटी की गई। वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिए कहीं एलसीडी लगाया गया कहीं टेंट लगाए गए तो कहीं माननीयों के नाम वाली पट्टी। इसका पैसा सरकारी खाते से ही तो जाएगा। पिछले 2 बार सालों में लगे पौधों का हिसाब कौन देगा? 2018 में 15 लाख पौधे लगाए गए थे, उनका क्या हुआ?

नीचे दी गई तस्वीरें उदाहरण हैं। हमीरपुर के विधायक ने एक पौधा लगाया और उसके लिए कितना तामझाम किया गया। ये दिखाता है कि सरकार खुद तो फिजूलखर्ची रोकना नहीं चाहती और उसका पैसा जनता से निकलवाना चाहती है। ऊपर से इस फिजूलखर्ची को भी उपलब्धि दिखाया जाता है।

आप 15 लाख पौधे लगाएं या डेढ़ करोड़, इस स्टंट से जनता प्रभावित नहीं होने वाली। बात तो तब है जब आप नेता और खासकर वन मंत्री अपने इलाके में पहले से लगे वनों को कटने से बचाएं।

किराया बढ़ने से आम लोगों में गुस्सा नहीं, कांग्रेस ही कर रही है विरोध: सीएम

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि बसों के किराए में बढ़ोतरी लो लेकर आम लोगों में किसी भी तरह का गुस्सा नहीं है। सीएम ने इस मामले पर विरोध कर रही कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को निशाने पर लेते हुए कहा कि कुछ लोग राजनीतिक कारणों से विरोध कर रहे हैं और इसका आने वाले वक़्त में जवाब दिया जाएगा।

किराये में 25% की वृद्धि को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि वह सरकार इस तरह का निर्णय नहीं करना चाहती थी लेकिन भारी मन से बस किराया बढ़ाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा सरकार के पास दूसरा कोई रास्ता नहीं था।

सीएम ने कहा, “देश और प्रदेश कोरोना के कारण आर्थिक नुकसान के दौर से गुजर रहा है। लोग कोरोना के दौर से बाहर निकलने के लिए सहयोग कर रहे हैं। बस किराये को लेकर भी आम लोगों में किसी भी तरह का गुस्सा नहीं है। केवल कुछ लोग राजनीतिक मकसद से इसका विरोध कर रहे हैं जिसका जवाब आने वाले समय में दिया जाएगा।”

सीएम ने क्या कहा, देखें-

किराया बढ़ोतरी को लेकर सीएम ने भी दिया बाकी राज्यों में किराया बढ़ने का हवाला, कहा- संकट के दौर में जनता ने मदद का मन बनाया है।

Posted by In Himachal on Tuesday, July 21, 2020

 

बसों में यात्रियों को चिपकाकर बिठा परिवहन मंत्री दे रहे 2 गज दूरी का संदेश

शिमला।। सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर की उनके फेसबुक पेज पर किराया बढ़ोतरी के सम्बंध में कोई टिप्पणी अब तक नहीं आई है। गौरतलब है कि हिमाचल कैबिनेट ने आज बसों का किराया 25 प्रतिशत बढ़ा दिया है। इसके बाद लोग सोशल मीडिया पर परिवहन मंत्री के पेज पर जा रहे हैं ताकि इसकी कोई एक्सपलनेशन मिल सके।

इस सम्बन्ध में तो गोविंद ठाकुर ने कुछ नहीं लिखा है मगर एक तस्वीर शेयर की है जिसमें दो गज की दूरी का महत्व बताया जा रहा है। यह संदेश हास्यास्पद है क्योंकि उनके विभाग ने बसों को पूरी क्षमता से चलाने का फैसला किया है।

कोरोना काल में हिमाचल में लोग बसों में चिपककर बैठ रहे हैं जिससे दो गज क्या, एक फुट की दूरी भी नहीं बन पा रही। फिर वे बाहर निकलकर सोशल डिस्टेंसिंग का क्या पालन करें, जब बसों में चिपककर बैठना पड़ रहा है।

हिमाचल में किराया बढ़ाते हुए सरकार ने पंजाब और उत्तराखंड का उदाहरण दिया। जबकि उत्तराखण्ड में दोगुना किराया तब हुआ है जब बसें आधी क्षमता पर चल रही हैं। हिमाचल में बसें पूरी क्षमता से चलाई जा रही हैं, फिर भी किराया बढ़ाया गया। वहीं पंजाब ने प्रति किलोमीटर चंद पैसे बढ़ाए हैं।

किराया बढ़ोतरी: जनता को भरोसे में लिए बिना क्यों किए जाते हैं फैसले