कंगना रनौत के लिए संसद में भी उठेगी आवाज: रामस्वरूप शर्मा

मंडी।। हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से सांसद राम स्वरूप शर्मा ने कहा है कि वह कंगना रनौत के मामले को संसद में उठाएंगे। 14 सितंबर से संसद का मॉनसून सत्र शुुरू होने जा रहा है।

सांसद ने कहा कि वहबमंडी जिले के भांबला क्षेत्र से संबंधित इस अदाकारा के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार और बीएमसी के ‘कायरता पूर्ण कृत्य’ को लेकर लोकसभा में आवाज उठाएंगे।

उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र सरकार ने सभी मान मर्यादाओं को भूलकर अनैतिक काम किया है। हिमाचल की बेटी ने महाराष्ट्र में सुशांत मामले में आवाज बुलंद की है और फिल्मी दुनिया में हो रहे शोषण को उजागर किया है।”

रामस्वरूप शर्मा ने कहा, “सुशांत मामले को उठाना महाराष्ट्र सरकार को पसंद नहीं आया और इसको लेकर कंगना का उत्पीड़न किया जा रहा है। 14 तारीख से दिल्ली में शुरू हो रहे लोकसभा सत्र में इस मामले को संसद में भी उठाया जाएगा।”

मंडी के सांसद ने कहा कि राष्ट्रपति से भी महाराष्ट्र सरकार को बर्खास्त करने की भी मांग की जाएगी।

हिमाचल में गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन महंगा हुआ, विधानसभा में बिल पास

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में अब गाड़ियों का पंजीकरण महंगा होने जा रहा है। हिमाचल सरकार ने शुक्रवार को सदन में नया विधेयक पारित कर दिया। इसके तहत गाड़ियों का पंजीकरण शुल्क वाहन की कीमत से छह प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक कर दिया गया है। इनमें दो पहिया वाहनों से लेकर लग्जरी गाड़ियां भी शामिल होंगी।

हालांकि, विपक्ष ने इस बिल का विरोध किया। विपक्ष का कहना था कि कोरोना काल में इसका जनता पर बोझ पडे़गा। चर्चा में हुए विपक्ष के विरोध के बीच इस बिल को सत्तारूढ़ दल के विधायकों के ध्वनिमत से पारित कर दिया।

इस बारे में परिवहन मंत्री बिक्रम ठाकुर ने कहा कि इस बिल का लाना आवश्यक था। उन्होंने कहा, “देश भर में एकरूपता लाई जा रही है। परिवहन परिषद की बैठक में केंद्रीय स्तर पर फैसला हुआ है।”

परिवहन मंत्री बिक्रम ठाकुर ने कहा कि विपक्ष कोरोना के साथ विषय को जोड़कर बोल रहा है। उन्होंने कहा, “पूरे देश में इस तरह की व्यवस्था हो रही है। इससे टैक्स की लीकेज भी रुकेगी। मोटर व्हीकल एक्ट में गाड़ियां डिफाइन हैं, इन्हें अलग से भी राज्य के नियमों में किया जा सकता है।”

कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी ने एक संशोधन प्रस्ताव रखना चाहा था मगर सत्ता पक्ष के अनुरोध के बाद उन्होंने इसे वापस ले लिया।

कोरोना काल में 30 प्रतिशत कटेगा हिमाचल के विधायकों का वेतन

शिमला।। शुक्रवार को हिमाचल विधानसभा ने विधायकों का वेतन कोरोना संकट को देखते हुए 30 फीसदी काटने का विधेयक पारित कर दिया गया। इस बीच कांग्रेस विधायक सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा था कि विधायकों का वेतन 50 फीसदी काटना चाहिए। सीपीएम विधायक राकेश सिंघा ने भी इसका समर्थन किया मगर योजना सिरे नहीं चढ़ पाई।

सुक्खू ने कहा कि वेतन भले ही 50 फीसदी काट दिया जाए मगर विधायक निधि पूरी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वेतन का मामला बार-बार उछलने से जनता में गलत संदेश जाता है। उधर सीपीएम विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि सुक्खू का प्रस्ताव अच्छा है और कोरोना से लड़ना है तो बड़ी कुर्बानी की जरूरत है। उन्होंने कहा, “हम भगत सिंह चाहते हैं मगर पड़ोसी के घर में। खुल बलिदान नहीं देना चाहते। अगर हम प्रतिनिधि सही पहल नहीं करेंगे तो इसका सही संदेश नहीं जाएगा।”

हिमाचल विधानसभा (File Photo)

उधर सरकाघाट से बीजेपी विधायक कर्नल इंद्र सिंह ने कहा कि जो विधायक संपन्न हैं, वे ज्यादा पैसा कटवा सकते हैं। लेकिन जिनके पास आय के और साधन नहीं, उनके बारे में विचार किया जाना चाहिए। वहीं जगत सिंह नेगी ने कहा कि इस मामले को सिलेक्ट कमेटी में भेजा जाए।

सीएम ने आधा वेतन काटने की मांग उठने पर कहा कि अगर विधायकों को आपत्ति न हो तो इस प्रस्ताव को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा जा सकता है। मगर इसका विरोध हुआ। सीएम ने कहा कि जो विधायक चाहें, वे अपनी मर्जी से आधा वेतन खुद कटवा सकते हैं। इसके बाद 30 प्रतिशत वेतन काटने के विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।

नियम तोड़ जगह-जगह भीड़ जुटाने वाले मंत्री महेंद्र सिंह कोरोना पॉजिटिव

शिमला।। कोरोना काल में सरकार की ओर से बनाए गए नियमों को ताक पर रखकर जगह-जगह जनसभाएं करने वाले हिमाचल प्रदेश के जलशक्ति, बागवानी एवं राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।

उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि कोरोना के शुरुआती लक्षण दिखने पर उन्होंने टेस्ट करवाया था जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। महेंद्र सिंह ने कहा है कि जो भी लोग उनके संपर्क में आए हैं वह खुद को आईसोलेट कर कोरोना जांच करवा लें।

महेंद्र सिंह ठाकुर प्रदेश में कई जगहों पर घूमते रहे हैं और नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। इस दौरान ही वह कहीं और से संक्रमित हुए होंगे और संभव है कि बाकी कई लोगों को संक्रमित कर दिया होगा।

20 घंटे पहले महेंद्र सिंह ठाकुर के फेसबुक पेज पर डाली गई पोस्ट। बगल वाले अधिकारी का मास्क उतरा है, महेंद्र सिंह का भी। कई लोग खतरे में।

बता दें कि जब राजनीतिक सभाएं करने की इजाजत नहीं थी और विवाह शादियों तक में सीमित संख्या में लोगों को बुलाए जाने की इजाजत थी, तब भी महेंद्र सिंह पूरे प्रदेश में घूमकर भारी भीड़ के बीच जाते रहे। इस दौरान कभी उन्होंने मास्क पहना होता तो कभी नहीं। कभी मास्क के ऊपर से नाक बाहर झांकती रहती थी।

चार दिन पहले सरकाघाट के चोलथरा की यह तस्वीर महेंद्र सिंह ठाकुर के फेसबुक पेज पर डाली गई है। इसमें किसी के चेहरे पर मास्क नहीं है।

यही नहीं, कई मौकों पर वह गुलदस्ते स्वीकार करते भी दिखे थे, जिनके आदान-प्रदान पर रोक लगाई गई है। पिछले दिनों मंडी जिले के जोगिंदर नगर में स्थानीय विधायक प्रकाश राणा ने उनके लिए भारी भीड़ जुटाई थी जिसमें सीमित जगह में लोग सटकर खड़े थे।

अब महेंद्र सिंह के संपर्क में आए असंख्य लोगों पर कोरोना का खतरा मंडरा रहा है। इनमें नेताओं से लेकर अधिकारी और आम लोग तक शामिल हैं। मंडी के सांसद रामस्वरूप शर्मा भी खतरे में हो सकते हैं। पांच दिन पहले की दोनों नेताओं की तस्वीर देखें जिसमें मास्क के ऊपर से दोनों ने नाक को बाहर निकाला हुआ है।

हिमाचल पुलिस ने इस साल कम सड़क हादसे होने पर थपथपाई अपनी पीठ

शिमला।। हिमाचल प्रदेश पुलिस का वह ट्वीट चर्चा में आ गया है जिसमें उसने इस साल कम सड़क हादसे होने पर अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश की है। पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से सोमवार को किए गए ट्वीट में लिखा गया है कि एक स्टडी के अनुसार, हिमाचल पुलिस को इस साल सड़क हादसों को कम रखने में सफलता मिली है।

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को टैग करके किए गए इस ट्वीट में लिखा गया है, “एक स्टडी में पता चला है कि हिमाचल प्रदेश पुलिस इस साल 31-07-2020 तक पिछले साल इसी अवधि की तुलना में हादसों और मौतों के आंकड़े को कम रखने में सफल रही है।”

ट्वीट में बताया गया है कि पिछले साल जनवरी से लेकर जुलाई तक हिमाचल में 1680 सड़क हादसों में 672 लोगों की जान गई थी जबकि इस साल इसी दौरान 1078 हादसों में 399 लोगों की जान गई।

पुलिस ने किस स्टडी के हवाले से यह बात कही है, इसका ज़िक्र नहीं किया गया है। हालांकि, ये स्टडी जो भी होगी, पुलिस के पास दर्ज मामलों के आधार पर ही होगी। मगर इस बीच ध्यान देने की बात यह है कि कोरोना संकट के कारण लगाए गए लॉकडाउन के कारण लंबी अवधि तक हिमाचल में निजी और सरकारी वाहनों के परिचालन पर रोक रही थी और अभी भी सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में कम ट्रैफिक है। ऐसे में हादसे कम होने और नुक़सान के काम होने के पीछे लॉकडाउन ही एक बड़ी वजह है।

लोगों ने उठाए सवाल
हिमाचल पुलिस के इस ट्वीट पर बहुत से लोगों ने सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि श्रेय पुलिस ले रही है, जबकि श्रेय दिया जाना चाहिए लॉकडाउन को। लोगों ने करारे प्रहार किए हैं तो कुछ ने खिल्ली भी उड़ाई है। विराट नाम के ट्विटर यूज़र लिखते हैं, “शायद ऐसा वाहनों के कम ट्रैफिक के कारण हुआ है.”

अंशुल भारतीय ने लिखा है, “पिछले साल की तुलना में इस साल ट्रैफिक में आई कमी का डेटा भी जारी कीजिए, कारण समझ में आ जाएगा।” हालांकि, कुछ लोगों ने पुलिस को बधाई भी दी है। विजया ठाकुर नाम की ट्विटर यूज़र लिखती हैं, ‘लोगों की सुरक्षा के लिए अथक काम करने वाले सभी को बधाई। मुझे यकीन है कि आपके समर्पण और परिश्रम से आने वाले समय में आंकड़ों में और कमी आएगी। शुभकामनाएं।’

दविंदर शर्मा नाम के यूज़र ने लिखा है, “जो कोविड लॉकडाउन के कारण हुआ, उसका क्रेडिट लेने के लिए बधाई। वाहनों का आवागमन 50 फीसदी कम कम हो गया है और लॉकडाउन के दौरान तो 30 फीसदी से भी कम था. फिर भी रिकॉर्ड अच्छे हैं, ट्वीट करने के लिए फिर भी अच्छा प्रयास किया गया है।”

वहीं हिमांशु नाम के यूज़र हिमाचल पुलिस के ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए लिखते हैं कि ‘हिमाचल पुलिस ने रोज ऐक्सिडेंट और मौतों को कैसे कंटेन किया? आप लोग तो घटना होने के बाद पहुंचते हैं. साथ ही अगर आप लॉकडाउन को अगले साल तक बरकरार रखें तो आंकड़ों में और भी कमी आएगी.’

हिमाचल: नौकरशाहों के बीच चर्चा का विषय बनी सीएम के साथ चीफ सेक्रेटरी की ये तस्वीर

शिमला।। हाल ही में लाहौल दौरे पर गए सीएम जयराम ठाकुर की तस्वीरें सोशल मीडिया और हिमाचल की अफसरशाही के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इनमें सीएम चॉपर के पास खड़े हैं और उनके आसपास अन्य अधिकारी मौजूद हैं। इसमें खास चीज है- मुख्य सचिव अनिल कुमार खाची का जेब में हाथ डाल खड़े रहना।

दरअसल प्रोटोकॉल और सामान्य शिष्टाचार में भी इस तरह का आचरण गरिमाहीन समझा जाता है। केंद्र सरकार में सचिव पद पर रह चुके एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी ने नाम न छापने का आग्रह करते हुए इन हिमाचल को बताया, “वैसे तो यह मामूली बात लगती है मगर हर पद की एक गरिमा होती है। जब सीएम, मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी या अपने से बड़ा कोई शख्स आपके सामने आधिकारिक कार्यक्रम में मौजूद हो तो आप उनके सामने जेब में हाथ डालना, कमर पर हाथ रखना या हल्की भाषा इस्तेमाल करने जैसा काम नहीं कर सकते। यह बुनियादी शिष्टाचार है और इसे सीखने के लिए अलग से कोई नियम नहीं हैं।”

एक वीडियो भी शेयर किया जा रहा है जिसमें सीएम के सामने भी काफी देर तक खाची जेब में हाथ डाले मौजूद रहे।

उन्होंने कहा, “आपको याद होगा कि कुछ साल पहले जब पीएम मोदी छत्तीसगढ़ गए थे तो वहां एक डीएम ने धूप का चश्मा पहना हुआ था। वैसे तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं लेकिन यह थोड़ा गरिमाहीन लगता है। खासकर तब, जब आप आधिकारिक कार्यक्रम में हों और आपके आसपास कोई और वैसा न कर रहा हो। हर बात के लिखित रूल हों, यह जरूरी नहीं।”

गौरतलब है कि खाची से पहले चीफ सेक्रेटरी रहे श्रीकांत बाल्दी भी ऐसे ही व्यवहार को लेकर चर्चा में रहे थे। सीएम के कार्यक्रम में सभी के उठ जाने के बावजूद वह सीट पर बैठे रहे थे। एक बार वह केंद्रीय मंत्री के कक्ष में जूते पहनकर चले गए थे जबकि मंत्री ने खुद और सीएम ने जूते उतार दिए थे। उस समय भी हिमाचल के प्रशासनिक अधिकारियों के बीच यह चर्चा का विषय बना था और उनके व्यवहार की आलोचना हुई थी। अब खाची भी उसी राह चल रहे हैं।

कार्यक्रम सीएम का, चर्चा में आ गए प्रधान सचिव श्रीकांत बाल्दी

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पूर्व कांग्रेस विधायक बंबर ठाकुर की कोरोना पॉजिटिव पत्नी ने अस्पताल में किया हंगामा

बिलासपुर।। विवादों में रहने वाली बंबर ठाकुर ऐंड फैमिली एक बार फिर चर्चा में है। कांग्रेस के पूर्व विधायक बंबर ठाकुर के साथ उनकी पत्नी को भी कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। वह रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद शनिवार को जिला अस्पताल पहुंच गईं। उन्होंने ओपीडी में जमकर हंगामा किया।

भावना ठाकुर इसी हॉस्पिटल में नर्स हैं। अस्पताल आकर उन्होंने कहा कि ‘जो रिपोर्ट उन्हें दी गई है, वह गलत है।’ उन्होंने कथित तौर पर यह भी चेतावनी दी कि इसके लिए वह स्वास्थ्य विभाग को कोर्ट लेकर जाएंगी। जिस समय पूर्व विधायक की पत्नी आपात ओपीडी में पहुंचीं, उस समय वहां करीब 50 से ज्यादा गर्भवती इलाज के लिए पहुंचीं थीं। ऐसे में उन महिलाओं को भी जोखिम में डाल दिया गया।

इस बीच अस्पताल प्रबंधन ने एसपी को इस घटना की शिकायत लिखित में कर दी है। भावना ठाकुर का कहना था कि उनका सैंपल दोबारा लिए जाए। हालांकि, चिकित्सकों ने उनका सैंपल नहीं लिया। इसके बाद वह खुद ही वहां टेस्ट सैंपल की ट्यूब रखकर चली गईं और कहा कि इसे जांच के लिए भेजा जाए।

नरेंद्र भारद्वाज, एमएस, जिला अस्पताल बिलासपुर का कहना है कि विभाग इस पर कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने पत्रकारों को बताया, “इसके बारे में सीएमओ को भी अवगत करवा दिया है। जिला उपायुक्त को भी इस संबंध में पत्र लिखा जा रहा है। एसपी को भी लिखित शिकायत भेज दी है। जरूरी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।”

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सही व्यवस्था करके मंदिर खोलने पर फैसला करे सरकार: जीएस बाली

धर्मशाला।। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जीएस बाली ने कहा है कि सरकार को जरूरी व्यवस्था करके मंदिरों को खोलने का फैसला करना चाहिए।

उन्होंने कहा, “भारत मे अनलॉक 4 में अब शादी समारोहों में 100 लोगों को बुलाने की अनुमति दे गई गई है लेकिन हिमाचल प्रदेश जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है और करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, वहां हिमाचल सरकार ने मंदिर खोलने का फैसला नही लिया है।”

पूर्व मंत्री जीएस बाली ने कहा कि ‘हिमाचल सरकार को चाहिए कि लोगों की सुरक्षा व कोरोना के बचाव के साथ मंदिर के कपाट अब खोल दे क्योंकि यह लोगों की आस्था के साथ जुड़ा मामला है।’

उन्होंने कहा, “पहली बार इतिहास में ऐसा हुआ कि मंदिर के कपाट 6 माह से भी अधिक से बंद हैं। अब समय आ गया है कि सरकार को उचित व्यवस्था के साथ मंदिरों को खोलना चाहिए।”

विजिलेंस जांच में मंत्री के पास मिली अनुमति से कई गुना ज्यादा जमीन: मीडिया रिपोर्ट

शिमला।। नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर जमीन खरीदने के आरोपों में घिरीं कैबिनेट मंत्री सरवीण चौधरी को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने हिमाचल सरकार में मंत्री पर परिवार के सदस्यों के नाम पर अचल संपत्ति जुटाने के आरोप लगाए थे। इसके बाद सरवीण चौधरी ने मनकोटिया को मानहानि का नोटिस भी भेजा था। अब जानकारी सामने आ रही है कि इस मामले की विजिलेंस जांच मे ंपता चला है कि कई नियमों को तोड़ा गया है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक़, प्रारंभिक जांच पूरी हो गई है और इसमें कई अनियमितताएं पाई गई हैं। इसमें पता चल रहा है कि सरकार के सारे नियमों को धता बताते हुए जमीन खरीदी गई है। इसमें न सिर्फ लैंड होल्डिंग को लेकर बने सीलिंग एक्ट की धज्जियां उड़ाई गई हैं बल्कि अलग-अलग तरह से लैंड होल्डिंग की अनुमति दी गई।

रिपोर्ट कहती है, “प्रदेश में लैंड होल्डिंग को लेकर बने 1971 के हिमाचल प्रदेश सीलिंग ऑन लैंड होल्डिंग एक्ट के अनुसार एक परिवार के पास सामान्य क्षेत्र में 150 बीघा से ज्यादा जमीन नहीं हो सकती। इसमें कई मानकों को आधार बनाकर अलग-अलग लैंड होल्डिंग की अनुमति दी गई है। विजिलेंस ने जांच पूरी कर सरकार को सौंप दी है, अब कार्रवाई के लिए गेंद सरकार के पाले में है।”

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मंत्री के पास अनुमति से कई गुना ज्यादा जमीन होने की पुष्टि हुई है। लिखा गया है,”करोड़ों की जमीन को रिश्तेदारों के नाम दर्ज कराने में भी सरकार को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया है। जमीन का कई गुना कम दाम पर सौदा किया। इससे सरकार को सेल डीड के लिए स्टांप एक्ट के तहत लगने वाले स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण फीस से मिलने वाले राजस्व का नुकसान हुआ है।”

हैरानी की बात यह है कि इस मामले में मीडिया में विस्तृत रिपोर्टें आ रही हैं मगर न तो अभी किसी तरह की एफआईआर होने की सूचना है और न ही और कोई जानकारी सरकार की ओर से दी जा रही है। यही नहीं, जब मामला इतना हाई प्रोफाइल हो चुका है तो हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने भी इसमें स्वत: संज्ञान नहीं लिया। दरअसल, राजनीति के इस तरह के मामलों में जब राजनेता खुलकर कोई कदम नहीं उठाते तो जनता की उम्मीदें न्यायपालिका से बढ़ जाती हैं।

क्वॉर्टरों की बिजली घंटों गुल रहने से बेहाल नेरचौक मेडिकल कॉलेज के स्वास्थ्यकर्मी

मंडी।।

24 जुलाई को सुबह 06:30 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक

28 जुलाई को दोपहर 2 बजे से लेकर शाम 5:20 बजे तक

29 जुलाई को सुबह 11:15 बजे से लेकर शाम 6:45 बजे तक

30 जुलाई को पहले 10:37 बजे दस मिनट फिर उसके बाद दोपहर 12:50 बजे से लेकर 2:35 बजे तक

ऊपर के टाइमटेबल को देखकर ऐसा लगता है कि इस समय कोई दुर्लभ घटना हुई होगी। मगर यह समय है नेरचौक मेडिकल कॉलेज के आवासिय परिसर में बिजली गुल रहने का। कोविड काल में अपनी जान जोखिम में डालकर, मास्क लगाकर और उमस भरे गर्म मौसम में पीपीई किट पहनने वाले डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों को जब घर जाने का मौका मिलता है तो वहां पर वे आराम तक नहीं कर पाते। बिजली गुल रहने के कारण किन दिक्कतों का सामना करना पड़ता होगा, यह आसानी से समझा जा सकता है।

मगर ऊपर की समय सारिणी अगर जुलाई महीने तक सीमित रहती तो बाद अलग थी। अगस्त महीने में भी अघोषित कट लगाए जाने का सिलसिला जारी है। 10 और 11 अगस्त को दस-दस मिनट के दो कट लगाए गए और फिर दो दिन राहत देने के बाद, स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले बिजली विभाग ने सुबह 7 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक फिर बिजली गायब कर दी।

यह सिलसिला जा रहा। किसी दिन कट लगता, किसी दिन हालत ठीक रहती। इस बीच 25 अगस्त को बिजली विभाग ने फिर बिजली सुबह 7:35 बजे से लेकर 9:15 बजे तक गुल कर दी। इसके बाद रात 8:30 बजे से लेकर 9 बजे तक एक बार फिर बिजली गायब रही।

बाजार में बिजली, क्वॉर्टर्स में गुल
इस पूरे मामले का एक और विचारणीय पहलू यह है कि नेरचौक के बाजार में बिजली रहती है और बाजार-सड़क से मात्र कुछ मीटर दूर बिजली अपनी मर्जी से आती जाती रहती है।

गौरतलब है कि नेरचौक मेडिकल कॉलेज प्रदेश का कोविड समर्पित अस्पताल है और कॉलेज के बाहर इसका बड़ा सा बोर्ड भी लगा है। जहाँ अस्पताल में मरीजों के लिए जेनरेटर सुविधा उपलब्ध है, वहीँ मरीजों की सेवा में जुटे डाक्टर, नर्स व प्रशासनिक कार्य देख रहे मुलाजिमों के लिए बिजली विभाग की कोई सहानुभूति नहीं है।

कठिन ड्यूटी के बाद घर लौटने पर बिजली न होने से परेशान हो रहे हैं स्वास्थ्यकर्मी
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
‘टोपी’ ट्रांसफर का खेल
14 अगस्त को कंट्रोल रूम में कंट्रोल पैनल ब्लास्ट होने के कारण पहले से ही चरमराई हुई बिजली व्यवस्था की हालत खराब हो गई है? इन हालात को लेकर कॉलेज के अंदर कार्यरत PWD के इलेक्ट्रिसिटी विंग का कहना है कि ये काम बिजली बोर्ड को देखना होगा। जबकि बिजली विभाग का कहना है कि PWD के बिजली विंग की जिम्मेदारी बनती है।

इस सबके बीच शिमला से आई फैक्ट/फॉल्ट फाइंडिंग टीम भी वापिस जा चुकी है और अब तक कोई सुधार नहीं हुआ है। जिम्मेदारी को दूसरे विभाग के पाले में डालने के इस खेल में कॉलेज के मुलाजिमों का ही फुटबॉल बना हुआ है| हाल ये कि खबर लिखे जाने तक, 26 अगस्त 2020 को सुबह 11:30 बजे से गायब हुई बिजली अभी तक (5 बजे तक नहीं आई है)।

नाराज डॉक्टरों का कहना है कि उनकी समस्या की ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कुछ डॉक्टरों का कहना है कि 7 दिन आइसोलेशन वॉर्ड ड्यूटी और उसके बाद परिवार से दूर होटल में रहने के बाद भी अगर स्वास्थ्यकर्मियों को बिजली जैसी बुनियादी सुविधा नहीं दी जा सकती तो सरकार को चाहिए कि इन्हें परिवार सहित किसी होटल में शिफ्ट कर दे।