सेंट्रल यूनिवर्सिटी को बर्बाद कर गई धर्मशाला से देहरा शिफ्ट करने की जिद?

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश में सेंट्रल यूनिवर्सिटी की मांग लंबे समय से उठ रही थी। कई नेताओं ने कोशिश की मगर इसका सपना पूरा होने की आस जगी साल 2007 में। उस समय के वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान में भाषण के दौरान हिमाचल प्रदेश को ‘वर्ल्ड क्लास सेंट्रल यूनिवर्सिटी’ और एक आईआईटी देने का एलान किया था। आज 13 साल हो गए, आईआईटी का कैंपस पूरा हो चुका है, कई होनहार छात्र देश-विदेश में अच्छा काम कर रहे हैं मगर सेंट्रल यूनिवर्सिटी राजनीतिक रस्साकशी के बीच फंसी हुई है।

जब इस यूनिवर्सिटी का एलान हुआ था, तब पूरे प्रदेश में उत्साह था। मगर आज जो छात्र सेंट्रल यूनिवर्सिटी हिमाचल प्रदेश के छात्र हैं, वे अपनी किस्मत को कोसते हैं। किराये की इमारतों पर चल रही यूनिवर्सिटी, जिसका एक कैंपस धर्मशाला तो दूसरा देहरा में है। न तो टीचिंग स्टाफ पूरा है, न हॉस्टल हैं, न क्लासरूम में सही व्यवस्था है। लाइब्रेरी के नाम पर मजाक है, वाई-फाई की व्यवस्था नहीं और देहरा के कथित कैंपस में बच्चों को फोटोकॉपी करवानी हो तो भी पापड़ बेलने पड़ते हैं।

कस्बे के किसी सुदूर इलाके के उपेक्षित सरकारी स्कूल से भी गई गुजरी है। हालत तब खराब होती है जब इसे ‘वर्ल्ड क्लास’ सेंट्रल यूनिवर्सिटी समझ अन्य राज्यों के छात्र एडमिशन लेते हैं औऱ यहां आते हैं तो पाते हैं कि इस यूनिवर्सिटी का तो अपना कैंपस तक नहीं। लेकिन यह नौबत आई कैसे? हाल ही में एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने केद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर को घेरकर अपनी मांगों को लेकर कड़े सवाल किए। अनुराग असहज हुए और बाद में पुलिस ने छात्रों को हटा दिया।

इससे एक दिन पहले अनुराग से पत्रकारों ने एस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी यह सवाल पूछे थे। तब उन्होंने पहले कांग्रेस सरकार को दोष दिया कि उसने इसे लटकाया। मगर छात्रों ने पूछा कि आज जब केंद्र और राज्य में आपकी ही सरकारें हैं तो फिर दिक्कत कहां है? पिछले साल तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने देहरा कैंपस की आधारशिला रखी थी और तीन साल में काम पूरा होने की बात कही थी। मगर आज की हालत- वही ढाक के तीन पात।

अनुराग से क्यों गुस्सा हैं छात्र?
हर बार सेंट्रल यूनिवर्सिटी को लेकर हंगामा होता है, अनुराग ठाकुर सक्रिय भूमिका में रहते हैं और वे इसे लेकर काफी बयान देते हैं। इसकी एक वजह है। दरअसल यह यूनिवर्सिटी वीरभद्र-धूमल की आपकी खींचतान की भेंट चढ़ गई है। और इसकी शुरुआत होती है साल 2007 से ही।

जब 2007 में आईआईटी और सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाने का एलान किया गया तो उस समय के सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि आईआईटी को मंडी में बनाया जाएगा और सेंट्रल यूनिवर्सिटी को धर्मशाला में। उसके दो साल के अंदर, साल 2009 तक आईआईटी कैंपस की आधारशिला रखी जा चुकी थी और आईआईटी की कक्षाएं अस्थायी तौर पर रुड़की कैंपस में चलने लग गई थीं। मगर तब सेंट्रल यूनिवर्सिटी को लेकर कोई अता पता नहीं था। कारण- सरकार बदल गई थी- हिमाचल में बीजेपी की सरकार थी और केंद्र में कांग्रेस की।

सेंट्रल यूनिवर्सिटी के लिए धूमल सरकार ने जो जगह चुनी, उसका हिमाचल के कांग्रेस नेता विरोध करते रहे। चूंकि केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार थी तो मामला अड़ गया। धूमल सरकार ने इस यूनिवर्सिटी को धर्मशाला की जगह देहरा में बनाना चाहा। मगर कांग्रेस इसका विरोध करती रही। उसका कहना था कि यूनिवर्सिटी धर्मशाला में ही बननी चाहिए।

बड़ा मुद्दा उठा। आरोप लगा कि प्रेम कुमार धूमल इस यूनिवर्सिटी को धर्मशाला से देहरा इसलिए शिफ्ट करना चाहते हैं क्योंकि अंब से लगता देहरा भले ही कांगड़ा का उपमंडल हो, मगर वह हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र में पड़ता था जहां से धूमल खुद सांसद रह चुके थे और उसके बाद से अनुराग ठाकुर लगातार सांसद हैं।

अब हालत यह हो गई कि विरोध को देखते हुए इस यूनिवर्सिटी के दो कैंपस बनाने का फैसला कर लिया गया- एक धर्मशाला में, एक देहरा में। इस राजनीति के चक्कर में आज तक न एक कैंपस बना है, न दूसरा। हां, पिछले लोकसभा चुनाव से पहले जावडेकर शिलान्यास जरूर कर गए थे ताकि राजनीतिक स्थिति थोड़ी ठीक हो सके। मगर इस खेल में छात्रों का भविष्य खराब हो रहा है।

एबीवीपी समेत अन्य छात्र संगठन लगातार स्थायी कैंपस की मांग कर रहे हैं। छात्रों की यह भी मांग है कि हिमाचल कोई दिल्ली जैसा मैदानी शहर नहीं कि एक विश्वविद्यालय के कई कैंपस हों और अच्छी कनेक्टिविटी के कारण छात्र कहीं भी जा सकें। ऐसे में स्थायी और एकीकृत कैंपस जरूरी है ताकि एक ही जगह पर सभी सुविधाएं हों औऱ प्रशासनिक कार्यों के लिए छात्रों को इधर से उधर न भागना पड़े।

मगर अफसोस, हर बार सीयू को राजनीतिक बयानबाजी के अलावा कुछ नहीं मिलता। आईआईटी औऱ सीयू का एलान एकसाथ हुआ था। आज आईआईटी मंडी लगातार आगे बढ़ रहा है जबकि सीयू की हालत बद से बदतर होती जा रही है। देहरा कैंपस के छात्रों का अनुराग से सवाल पूछना जायज है क्योंकि वह सांसद हैं और केंद्रीय मंत्री भी। कथित तौर पर जब उनकी जिद के कारण देहरा में कैंपस शिफ्ट हुआ तो क्या यह जिम्मेदारी उनकी नहीं बनती कि इसे तुरंत पूरा करवाएं?

HPPWD धर्मपुर में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, बड़े अधिकारियों की चुप्पी

सरकाघाट, रितेश चौहान, फ़ॉर इन हिमाचल।। हिमाचल प्रदेश में लोक निर्माण विभाग पर कई तरह की लापरवाहियों के आरोप लगते रहे हैं मगर अब जो मामला सामने आ रहा है, वह बताता है कि कैसे सारे नियम-कायदों को ठेंगा दिखाया जा रहा है। चिंता की बात इसलिए भी है कि यह विभाग किसी और के पास नहीं, बल्कि खुद हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के पास है।

आरोप लग रहा है कि धर्मपुर में सड़कें पहले बन जा रही हैं और विभाग उनका टेंडर बाद में निकालकर खानापूर्ति कर रहा है। यानी सिफारिश के आधार पर बिना टेंडर निकाले कुछ चहेते ठेकेदारों को बिना नियमों का पालन किए सड़क बनाने के लिए कह दिया जाता है और फिर जब काम पूरा हो जाता है, तब औपचारिकता के लिए टेंडर निकाले जाते हैं।

इस खेल का पता चल रहा है विभाग की ओर से किए गए एक काम से। दअसल, विभाग ने सरस्काण पंचायत के हवाणी गांव में सड़क बनाने के लिए विभाग ने छह अक्तूबर को टेंडर मंगवाए। आपको हैरानी होगी कि जिस सड़क के लिए ये टेंडर मंगवाए गए, वह पहले ही निकाली जा चुकी है।

इस मामले को सामने लाने वाले ठेकेदार संजय ठाकुर का कहना है कि जब इस संबंध में टेंडर निकलने पर उसने क्लर्क से टेंडर फॉर्मा मांगा तो उसने कहा कि ‘साहब ने यह काम किसी और को दे दिया है।’ संजय का कहना है कि वह टेंडर भरने के लिए योग्य था, फिर भी क्लर्क का कहना था कि उसकी मजबूरी समझो और यह काम मंडल अध्यक्ष ने करवा दिया है।

इस बातचीत का एक ऑडियो भी है, जिसकी प्रामाणिकता की इन हिमाचल स्वतंत्र तौर पर पुष्टि नहीं करता है। शिकायत करने वाले संजय का कहना है कि उनके साथ ऐसा एक बार नहीं बल्कि कई बार हुआ है।

‘धर्मपुर में यह खेल वर्षों से चल रहा है’
यही नहीं, आरोप है कि धर्मपुर लोक निर्माण विभाग में दर्जनों टेंडर पहले सरकारी अखबार गिरिराज में छापे जाते हैं बाद में इन टेंडरों को विभागीय कारण बताकर कैंसिल कर दिया जाता है और फिर कार्यालय में नोटिस बोर्ड पर नोटिस लगाकर अगली डेट दी जाती है। आरोप है कि यह सारा ड्रामा सिर्फ़ पार्टी कार्यकर्ताओं को ही टेंडर देने के लिए किया जाता है। यानी जिन्हें टेंडर देने के आदेश होते है उन्हें ही देने होते हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि मामला प्रदेश के दिग्गज जल शक्ति मंत्री के गृह विधानसभा क्षेत्र धर्मपुर का है और उन्हीं के निर्देशों से ठेकेदारों को टेंडरों की रेवड़ियाँ बाँटी जा रही हैंl

ठेकेदार संजय ठाकुर का आरोप है कि विभागीय मिलीभगत के कारण करोड़ों का हेरफेर हो रहा है और मंत्री के चहेते ठेकेदारों को लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस खेल को ऐसे समझा जा सकता है कि 6 अक्तूबर को तीस कार्यों के टेंडर जारी करते हुए 7 को फार्म की लास्ट डेट और 8 को टेंडर खोलने की जानकारी रखी गई थी। मगर इस टेंडर को विभागीय कारणों का हवाला देते हुए कैंसल कर दिया गया।  मगर आज सोमवार को टेंडर डेट लगाकर टेंडर के फ़ार्म अपने चहेते ठेकेदारों को सेल कर दिए गए और कई बार मांगने पर भी टेंडर फार्म नहीं दिए गए।”

अधिकारियों की चुप्पी
जब इस बारे में लोक निर्माण विभाग हमीरपुर के चीफ इंजीनियर पीसी बंधन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह इस सारे मामले की जांच करेंगे। जब उनसे यह कहा गया कि शाम 4:00 बजे टेंडर फ़ार्म सेल करने का समय है और उसके बाद टेंडर फार्म नहीं मिलेंगे, आप शीघ्र कार्रवाई करें तो उन्होंने कहा कि मैं खुद इस बारे में जांच करता हूं। हालांकि, कई फोन किए जाने के बाद भी उन्होंने फोन नहीं उठाए।

वहीं, एक्सईएन जयपाल नायक को भी कई बार फ़ोन किए गए तो उन्होंने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। अलग नंबर से फोन पर उन्हें कहा कि वह हमीरपुर में मीटिंग में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा कि टेंडर असिस्टेंट जारी कर रहा है। मगर टेंडर असिस्टेंट विपन कुमार से फोन पर बात की गई तो उन्होंने कहा की उन्हें ऊपर से निर्देश मिला है, जिसे टेंडर देना है उसी को टेंडर दिए जाएंगे और वह इस बारे में कुछ नहीं कर सकते हैं।

आरोप कई हैं
धर्मपुर लोक निर्माण विभाग में पिछले साल भी कांग्रेस का समर्थन करने वाले ठेकेदारों को टेंडर फॉर्म न दिए जाने का मामला उठा था। यहां तक कि इस संबंध में पुलिस के पास क्रॉस केस भी दर्ज है। ठेकेदारों ने इस संबंध में प्रदर्शन किया था और रैली भी निकाली थी। आरोप उश वक्त भी यही था कि कांग्रेस समर्थित ठेकेदारों को विभाग के अधिशासी अभियंता और अन्य कर्मचारी टेंडर फार्म तक नहीं देते हैं l

प्रदेश कांग्रेस सचिव और धर्मपुर से कांग्रेस प्रत्याशी रहे चंद्रशेखर ने कहा कि छोटे छोटे कामों के ठेकों के लिए मंत्री और मंत्री पुत्र के आदेश से सरकारी कार्यालय चल रहे हैं। उन्होंने कहा, “जो ठेकेदार मंत्री समर्थक नहीं हैं, उन्हें टेंडर फार्म तक नहीं दिए जा रहे हैं। लोक निर्माण और जल शक्ति विभाग में मंत्री परिवार के सदस्य रिश्तेदार और कार्यकर्ता पार्टी पदाधिकारी मलाई चाट रहे हैं।” चंद्रशेखर ने कहा, “आलम यह है कि जो काम हो चुके हैं, उनके अभी टेंडर लगाए जा रहे हैं। लोक निर्माण विभाग धर्मपुर कार्यालय भ्रष्टाचार का अड्डा बना हुआ है।”

महेंद्र सिंह ठाकुर पर फिर लगा सरकारी गाड़ियों के दुरुपयोग का आरोप

टनल में सोनिया की पट्टिका नहीं लगाई तो कांग्रेस करेगी FIR और आंदोलन: राठौर

शिमला।। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस इस बात से नाराज चल रही है कि अटल टनल रोहतांग से वह पट्टिका गायब है, जिसमें सोनिया गांधी का नाम था। शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन इस्पात मंत्री वीरभद्र सिंह और हिमाचल के उस समय के सीएम प्रेम कुमार धूमल भी मौजूद रहे थे।

इस संबंध में हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर ने कहा है कि जिन लोगों ने यह शिलान्यास पट्टिका गायब की है, कांग्रेस उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत भी करेगी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सीएम जयराम ठाकुर और डीजीपी संजय कुंडू को शिकायत भेजी जा चुकी है।

राठौर ने कहा कि 28 जून, 2010 को यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तत्कालीन इस्पात मंत्री वीरभद्र सिंह की उपस्थिति में इस टनल का शिलान्यास किया था। मगर वह पट्टिका वहां से आज गायब है। उन्होंने कहा कि यह पूरी जिम्मेदारी सरकार और पुलिस की बनती है।

अब अटल टनल रोहतांग के मुहाने पर 500 करोड़ की प्रतिमा बनाएगी सरकार

इससे पहले कांग्रेस विधायक दल के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने भी कहा था कि कांग्रेस सत्ता में आई तो इस टनल के लिए योगदान न देने वाले लोगों के नाम की पट्टिका हटाकर फिर से सोनिया गांधी के नाम वाली पट्टिका लगाई जाएगी।

सत्ता में आते ही टनल में फिर लगाएंगे सोनिया के नाम की पट्टिका: अग्निहोत्री

कच्चे मकान की पुताई के लिए मिट्टी लाने गई महिला की दबकर मौत

ऊना।। हिमाचल प्रदेश के ऊना में एक दुखद घटना हुई है। घर की मरम्मत के लिए मिट्टी लाने गई महिला की एक हादसे में मौत हो गई।

हरोली उपमंडल के सलोह गांव की 28 साल की अनुराधा अपने पति के साथ मिट्टी लाने गई थीं। वे लोग इस मिट्टी से अपने कच्चे मकान की मरम्मत करना चाहते थे।

जिस दौरान वे खुदाई कर रहे थे, मिट्टी का बड़ा हिस्सा छूटकर अनुराधा पर गिर गया और वह दब गईं। पति राम लाल ने शोर मचाया तो आसपास से लोग वहां जमा हुए।

इस घटना में अनुराधा ने दम तोड़ दिया।

 

जयराम ठाकुर: कोरोना पॉजिटिव पाए गए हिमाचल के मुख्यमंत्री

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। उन्होंने फेसबुक पर यह जानकारी दी है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले बंजार के विधायक सुरेंद्र शौरी के संपर्क में आने के बाद वह आइसोलेट हुए थे। इसके बाद उनके प्रधान निजी सचिव भी कोरोना संक्रमित पाए गए थे।

सीएम ने जानकारी दी है, “कुछ दिन पहले किसी कोरोना पॉज़िटिव व्यक्ति के सम्पर्क में आने के कारण मैं बीते एक सप्ताह से अपने आवास पर क्वारंटीन था,गत दो दिनों से कोरोना के कुछ लक्षण आने के कारण आज कोरोना टेस्ट करवाया,जिसकी रिपोर्ट अभी पॉज़िटिव आई है।”

सीएम ने लिखा है, “चिकित्सकों की सलाह पर अपने सरकारी आवास में ही आइसोलेट हूं। आप सभी के आशीर्वाद से मैं शीघ्र पूरी तरह स्वस्थ हो जाऊंगा।”

कुछ दिन पहले किसी कोरोना पॉज़िटिव व्यक्ति के सम्पर्क में आने के कारण मैं बीते एक सप्ताह से अपने आवास पर क्वारंटीन था,गत…

Posted by Jairam Thakur on Monday, 12 October 2020

क्या हो सकती है वजह?
सीएम ने बताया है कि उन्होंने खुद को आइसोलेट किया हुआ था। दरअसल, पिछले दिनों रेपिड एंटीजन टेस्ट में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के प्रधान निजी सचिव डॉ. आरएन बत्ता कोरोना संक्रमित पाए गए थे। पिछले कई दिनों से उन्हें बुखार था और उनमें कोरोना के लक्षण भी पाए गए थे। एहतियातन उनका सैंपल लिया गया था जो पाॅजिटिव पाया गया था। रोहतांग में अटल टनल के उद्घाटन के लिए वह सीएम के साथ मनाली दौरे पर थे और उन्हीं के साथ वापस भी आए थे।

दूसरी ओर बंजार के एमएलए सुरेंद्र शौरी कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। मुख्यमंत्री इनके संपर्क में भी आए थे। रोहतांग से लौटने के बाद सीएम ने एहतियात बरतते हुए सोमवार को खुद को तीन दिन के लिए आइसोलेट कर लिया था। हालांकि, इसके बाद सीएम ने आज अपने कोरोना संक्रमित पाए जाने की जानकारी दी है।

बंजार के विधायक के कारण पीएम मोदी ऐसे आए कोरोना के ख़तरे में

फर्जी रेंट अग्रीमेंट से हिमाचल में रजिस्टर करवाई जा रहीं लग्जरी गाड़ियां?

शिमला।। नियमों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में वही लोग अपनी गाड़ी का पंजीकरण करवा सकते हैं, जो यहां के निवासी हैं या फिर नौकरी या कारोबार के सिलसिले में यहां पर रहते हैं। मगर आरोप लग रहा है कि अन्य राज्यों में लग्जरी वाहन खरीदने वाले लोग हिमाचल के कुछ बाशिंदों के साथ मिलीभगत करके रेंट अग्रीमेंट बनवा रहे हैं और उसके आधार पर हिमाचल का नंबर ले रहे हैं।

इसी कारण, मर्सिडीज़, वॉल्वो, लैंड रोवर, बीएमडब्ल्यू और लैंबर्गीनी जैसी गाड़ियों का पंजीकरण भी हिमाचल में हो रहा है। ऐसी बात नहीं है कि हिमाचल के लोग इन गाड़ियों को नहीं खरीद सकते। प्रदेश संपन्न है और लोग इस तरह के वाहन खरीदने में सक्षम हैं और खरीद भी रहे हैं। मगर बड़ी संख्या में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और यूपी तक के लोग भी हिमाचल में अपनी महंगी गाड़ियों का पंजीकरण करवा रहे हैं क्योंकि यहां पर वाहन पंजीकरण करवाने की दर पड़ोसी राज्यों से कम है।

बाकी प्रदेशों में जहां वीइकल रजिस्ट्रेशन रेट  6 से 8 प्रतिशत है, वहीं हिमाचल में अभी यह मात्र 3 प्रतिशत है। यही कारण है कि वे अपने राज्यों के बजाय हिमाचल में अपनी गाड़ी रजिस्टर करवा रहे हैं। उदाहरण के लिए, हाल ही में इंदौरा जैसे छोटे कस्बे में एक लैंबर्गीनी कार का रजिस्ट्रेशन हुआ और वह चर्चा का विषय बन गया।

Lamborghini registered in Indora a surprise

सरकार की ढील
ध्यान देने की बात है कि हाल ही में हिमाचल प्रदेश विधानसभा में एचपी मोटर वीइकल टैक्सेशन अमेंडमेंट बिल पारित हुआ था जिसके तहत इस फीस को बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया था। मगर अभी तक सरकार ने इसे हस्ताक्षर के लिए राज्यपाल के पास नहीं भेजा है। उनके हस्ताक्षर के उपरांत ही यह बिल एक कानून की शक्ल लेगा और सरकार की अधिसूचना के बाद लागू होगा।

ऐसे में, पड़ोसी राज्यों के लोग (साथ ही हिमाचल के भी) तुरंत गाड़ियां लेकर हिमाचल में पंजीकरण करवा रहे हैं। ऐसी भी खबरें हैं कि कुछ लोगों ने गाड़ियां खरीदकर उनका रजिस्ट्रेशन करवा लिया है मगर वे मुहूर्त के हिसाब से दिवाली का इंतजार कर रहे हैं ताकि उसे घर ला सकें। तब तक गाड़ियां शो रूम में ही रखवाई गई हैं।

पिछले साल जून 2019 से सितंबर 2019 तक 13,754 गाड़ियों का पंजीकरण हिमाचल में हुआ था। मगर इस साल इसी अवधि में यह संख्या 16,761 है। यानी पिछले साल से लगभग तीन हजार ज्यादा वाहन। ऐसा तब हुआ, जब  तीन महीनों तक तो लॉकडाउन ही लगा हुआ था। ऐसे में यह बात चौंकाने वाली है।

सरकार की अजीब सोच
एक तरह से इसमें हिमाचल को राजस्व का फायदा हो रहा है मगर जो प्रक्रिया अपनाई जा रही है, वह ठीक नहीं है। ऐसा नहीं है कि सरकार को इस बारे में पता नहीं है। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर जे.एम. पठानिया का कहना है कि उनके संज्ञान में मामला आया है और इंदौरा में लैंबर्गीनी के रजिस्ट्रेशन के मामले की जांच की जाएगी।

हालांकि, उन्होंने आउटलुक मैगजीन से कहा है कि जब एक बार कानून (जो विधेयक विधानसभा के मॉनसून सत्र में पारित हुआ है मगर अभी राज्यपाल के हस्ताक्षर नहीं हुए हैं) बन जाएगा तो इस पर रोक लग जाएगी।

लेकिन सवाल ये है कि इस तरह की गतिविधियां रोकने के लिए पहले से मौजूद प्रावधनों को कड़ा क्यों नहीं किया जाता? क्यों न लग्जरी वाहनों पर ही अतिरिक्त रजिस्ट्रेशन रेट लगाया जाए क्योंकि जो इतना महंगा वाहन खरीद सकता है, वह महंगा पंजीकरण करवा सकता है। मगर कोई आम हिमाचली जो जरूरतों के लिए छोटा वाहन लेता है, वह 10 प्रतिशत फीस कहां से भरेगा?

हिमाचल में गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन महंगा हुआ, विधानसभा में बिल पास

अब ‘जमीन पर मछली पालन’ करेगा हिमाचल, सरकार देगी आर्थिक मदद

शिमला।। अभी तक मुख्य तौर पर नदियों और झीलों में मत्स्य पालन कर रहा हिमाचल प्रदेश लैंड बेस्ड फिश फार्मिंग पर भी फोकस करने जा रहा है। यानी अब जलधाराओं या बड़े जलाशयों से इतर बाकी जगहों पर जमीन में तालाब बनाकर या इनडोर टैंकों में फिश फार्मिंग की जाएगी।

यह काम recirculation aquaculture systems (रीसर्कुलेशन एक्वाकल्चर सिस्टम्स) आरएएस तकनीक से किया जाएगा। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच 15 मछली तालाब स्थापित किए जाएंगे। ठंडे पानी में मछली पालन की नवीनतम एक्वाकल्चर तकनीकों में प्रशिक्षण राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड हैदराबाद में लिया जाएगा।

क्या है RAS
रीसर्कुलेशन एक्वाकल्चर सिस्टम्स या आरएएस तकनीक में पारंपरिक विधि के बजाय नियंत्रित वातावरण में पानी का सीमित उपयोग कर इंडोर टैंकों में मछली पालन किया जाता है। स्वच्छ पानी की सीमित मात्रा की नियमित आपूर्ति नियंत्रित तापमान पर सुनिश्चित की जाती है।

15 मछली फार्मों में से पांच फार्म ऊना, मंडी, कांगड़ा (पालमपुर और पौंग बांध) और सिरमौर जिलों और दस किन्नौर, सिरमौर, शिमला, मंडी में स्थापित किए जाएंगे। 40 टन प्रति यूनिट वार्षिक मछली उत्पादन सामान्य आरएएस इकाई में प्राप्त किया जाएगा। ठंडे पानी के आरएएस में चार टन और 10 टन उत्पादन क्षमता इकाइयां हैं।

क्या बोले मंत्री
मत्स्य मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि आरएएस प्रौद्योगिकी के तहत सभी 15 मछली फार्मों का संचालन किया जाएगा। राज्य में इसके अंतर्गत हर साल लगभग 270 टन मछली उत्पादन की उम्मीद है। इंद्रधनुष ट्राउट को ठंडे पानी के आरएएस में, जबकि सामान्य पानी में आरएएस पंगासियस, तिलापिया और कामन कार्प को पाला जाएगा।

इस परियोजना के लिए राज्य सरकार निजी सेक्टर को आर्थिक मदद भी देगी। फिश फार्म लगाने के लिए सामान्य वर्ग के लोगों को 40 प्रतिशत और एससी/एसटी/महिलाओं को कुल लागत की 60 प्रतिशत मदद सरकार की ओर से दी जाएगी।

घट गया मनाली और लाहौल के बीच का किराया, हुए कई फायदे

मनाली।। अटल टनल रोहतांग बनने से घटी दूरी के कारण अब लाहौल और मनाली के बीच का बस किराया भी कम हो गया है। एचआरटीसी ने केलॉन्ग से मनाली के बीच के बस किराये को 100 रुपये कम किया है।

पहले दोनों जगहों के बीच 255 रुपये का किराया था, अब यात्रियों को 155 रुपये चुकाने होंगे। बता दें कि सुरंग बन जाने से एक तरफ का सफर 46 किलोमीटर कम हुआ है।

टनल के कारण अब लाहौल घाटी में उगने वाली फसलें भी कम दरों पर बाहर उपलब्ध हो पाएंगी। लाहौल के आलू और अन्य फसलें भी सुरंग के माध्यम से आएंगी। इससे अब आलू का 50 किलो के बोरे को लाहौल से कुल्लू लाने में 45 रुपये का किराया लगेगा। पहले इसके लिए 75 रुपये लगते थे।

अब अगर कोई व्यक्ति टैक्सी करके इधर से उधर जाना चाहे, उसके लिए भी उसे कम पैसे देने होंगे। कुल मिलाकर सुरंग बनने से लोगों को न सिर्फ बर्फीले सीजन में कनेक्टिविटी की ही सुविधा मिली है, किराये और माल ढुलाई में होने वाला खर्च भी कम हुआ है।

हिमाचल: 22 साल की युवती से गैंगरेप, पुलिस ने गिरफ्तार किए तीन युवक

ऊना।। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में 22 साल की एक युवती के साथ गैंगरेप के आरोप में तीन युवकों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत के आधार पर तीन युवकों के खिलाफ केस दर्ज करते हुए यह कार्रवाई की है और आगे की जांच शुरू कर दी है।

इस संबंध में पुलिस ने तीनों युवकों के खिलाफ गैंगरेप के आरोप में आईपीसी की धारा 376 डी के तहत केस दर्ज किया है। शिकायत के मुताबिक, एक परिचित युवक ने पीड़िता को घर से बुलाया और फिर तीनों युवकों ने बलात्कार को अंजाम दिया।

पीड़िता का कहना है कि इसके बाद युवकों ने उसे धमकी दी थी कि किसी को यह बात न बताए। युवती का कहना है कि उसने तुरंत घर पहुंचकर परिजनों को आपबीती बताई और फिर परिजन उसे लेकर महिला पुलिस स्टेशन ऊना पहुंचे और शिकायत दर्ज करवाई।

डीएसपी अनिल मेहता ने बताया कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपी युवकों के खिलाफ गैंगरेप के आरोप में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

चहेतों को नौकरियां देने पर NIT हमीरपुर के डायरेक्टर विनोद यादव बर्खास्त

हमीरपुर।। पिछले कुछ समय से इस बात को लेकर लगातार विरोध हो रहा था कि कैसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (एनआईटी) हमीरपुर के निदेशक प्रो. विनोद यादव अपने संस्थान में कथित तौर पर अपने पैतृक राज्य के लोगों को भर्ती कर रहे हैं। इन आरोपों की प्रारंभिक जांच के बाद उन्हें पद से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है।

प्रोफेसर यादव पर आरोप है कि एनआईटी हमीरपुर का निदेशक रहते हुए उन्होंने असिस्टेंट प्रोफेसर ग्रेड दो के पदों पर होने वाली भर्तियां में चहेतों को लाभ दिया और संस्थान के स्टाफ को अनुचित वित्तीय लाभ भी दिया। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने प्रथम दृष्टया आरोप साबित होने पर यह कड़ी कार्रवाई की है। इससे पहले जुलाई में निदेशक यादव की वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां छीनकर मंत्रालय ने उन्हें लंबी छुट्टी पर भेज दिया था। साथ ही अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के चेयरमैन प्रो. अनिल सहस्त्रबुद्धे को जांच का जिम्मा सौंपा था।

NIt Hamirpur Director Prof Vinod Yadav Dismissed
Prof Vinod Yadav

रिकॉर्ड गायब थे
संभवत: एनआईटी के निदेशक के खिलाफ पहली बार ऐसी कार्रवाई हुई है। जब प्रोफेसर सहस्त्रबुद्धे जांच के लिए हमीरपुर पहुंचे थे तो कई सरकारी रिकॉर्ड संस्थान से गायब मिले थे। आरोप है कि कुछ फाइलें प्रोफेसर यादव के घर से भी बरामद हुईं थीं। करीब 2 माह से भी अधिक समय तक चली जांच के बाद एआईसीटीई चेयरमैन ने जांच रिपोर्ट केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को सौंपी थी, जिसमें यादव पर लगे आरोप सही पाए गए हैं।

मंत्रालय ने जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रो. यादव को निदेशक पद से निष्कासित कर दिया। मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी इलाहाबाद (यूपी) के मेकेनिकल विभाग के प्रो. यादव को मंत्रालय ने 20 मार्च, 2018 को 5 वर्ष के लिए एनआईटी हमीरपुर के निदेशक पद पर नियुक्ति किया था।