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हिमाचल: कोरोना से रोज होने लगी मौतें, जानें- किसकी जान को है ज्यादा खतरा

शिमला।। पहले हिमाचल प्रदेश में कोरोना वायरस महामारी को लेकर स्थिति थोड़ी नियंत्रण में दिख रही थी मगर अब हर रोज जानें जा रही हैं। हो सकता है कि इन मौतों को आप महज आंकड़ों के तौर पर देख रहे हों, मगर जिनके परिवार से कोई एक भी बिछड़ा है, उसका दर्द आप आसानी से समझ सकते हैं।

इसलिए, बेहद जरूरी हो जाता है कि आप इस वायरस से बचने की भरपूर कोशिश करें। क्योंकि अगर वायरस के कारण जान नहीं भी गई, तो भी आफ्टर इफेक्ट्स आपको परेशान कर सकते हैं। यह देखा जा रहा है कि कोरोना नेगेटिव हो जाने के बावजूद लोग वायरस के असर से पूरी तरह उबर नहीं पा रहे, उन्हें कमजोरी, सिरदर्द और अन्य अंगों में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

हिमाचल में कोरोना से रोज जा रही हैं जानें

हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार शाम तक 240 लोगों की जान जा चुकी है। अगर जान गंवाने वाले कोरोना संक्रमितों की मेडिकल हिस्ट्री का अध्ययन करें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि आखिर ये वायरस किन लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। गुरुवार तक हिमाचल प्रदेश में 233 कोरोना संक्रमितों ने दम तोड़ा था। इनमें से 171 लोग ऐसे थे, जिन्हें डायबिटीज़ या हाइपरटेंशन जैसी समस्या थी।

समस्या  मौतें
डायबिटीज़ (मधुमेह या शुगर) 87
हाइपरटेंशन (ज्यादा बीपी) 62
गुर्दे की बीमारी 24
फेफड़ों में समस्या 19

 

क्या समझा जाए इन आंकड़ों से?
यह बताता है कि जो लोग दवाइयों के दम पर सामान्य जिंदगी जी रहे हैं, कोरोना से संक्रमित होना उनके लिए जानलेवा बन सकता है। आपके परिवार में या परिचितों में कई लोग ऐसे होंगे जो मधुमेह यानी डायबिटीज (जिसे आम भाषा में शुगर कहते हैं) से जूझ रहे हैं।

कई ऐसे भी होंगे जो हाइपरटेंशन (बीपी या ब्लड प्रेशर हाई होना) की दवाइयां खा रहे हैं। तो उन्हें सावधान रहने को कहिए क्योंकि ये वायरस इन समस्याओं से जूझ रहे लोगों को बुरी तरह कमजोर कर रहा है। अगर उम्र 60 वर्ष से अधिक है तो खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।

उम्रदराज लोगों को ज्यादा है खतरा (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सरकार चलाएगी अभियान
हिमाचल प्रदेश सरकार का अनुमान है कि प्रदेश में 11 लाख लोग ऐसे हैं, जिनकी सेहत ऐसी है जो कोरोना संक्रमण के हिसाब से उनके लिए खतरनाक बन सकती है। ऐसे में अब हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने एक अभियान चलाने की सोची है ताकि डायबिटीज और हाइपरेंशन जे जूझ रहे इन लगभग 11 लाख लोगों की सेहत पर नजर रखी जा सके।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि 12 अक्तूबर को एक विशेष अभियान चलाया जाएगा और यह जिम्मेदारी आशा वर्कर्स को दी जाएगी कि वह दिन में कम से कम 10-12 ऐसे लोगों की सेहत का हालचाल जानें।

प्रतीकात्मक तस्वीर

मगर सावधानी जरूरी
हालांकि, सरकार उन्हीं लोगों तक पहुंच पाएगी जो उसके पास पंजीकृत हैं, जिनका मोबाइल आदि का पता उसके पास है। असल में मधुमेह, रक्तचाप जैसी समस्या ज्यादा कॉमन है और गांवों में बहुत सारे लोग तो इसकी परवाह तक नहीं करते। ऐसे में उन तक पहुंचना सरकार के लिए संभव नहीं होगा।

इसलिए, सही रास्ता यही होगा कि आप अपने आसपास जागरूकता फैलाएं,  खुद भी सावधानी बरतें और दूसरों को भी सावधानी बरतने के लिए कहें। क्योंकि संक्रमित हो जाने के बाद अगर हालत बिगड़ी तो इसकी गारंटी नहीं है कि समय रहते आपको वेंटिलेटर की सुविधा मिल पाएगी। इसलिए, बचाव में ही बचाव है।

लड़ाई में दोस्तों का साथ देने पहुंचे मंडी के युवक की गोली मारकर हत्या

चंडीगढ़।। खरड़ में रह रहे हिमाचल प्रदेश के एक युवक की बीती रात कथित तौर पर रोड रेज में गोली मारकर हत्या कर दी गई। अनिल कुमार नाम के इस युवक की उम्र 35 साल थी। वह हिमाचल के मंडी जिले से संबंध रखता था।

यह घटना रात डेढ़ बजे की बताई जा रही है। अभी तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक फॉर्च्यूनर पर सवार पांच लोगों की एक दूसरी फॉर्च्यूनर पर सवार लोगों के साथ ओवरटेकिंग को लेकर बहस हो गई।

इनमें से एक गाड़ी पर सवार लोगों ने अपने दो दोस्त बुलाए। इनमें एक का नाम मोंटी था और दूसरा अनिल। अनिल जीरकपुर में ही किसी के जन्मदिन की पार्टी में था। जब वह दोस्तों की मदद के लिए पार्टी छोड़कर मौके पर पहुंचा तो उसकी भी दूसरी गाड़ी वालों से बहस हो गई।

बताया जा रहा है कि फरीदकोट के रहने वाले एक शख्स ने कथित तौर पर तीन गोलियां चलाईं, जिनमें से दो अनिल को लग गईं। उसे पास के ही एक अस्पताल ले जाया गया मगर उसकी जान नहीं बच सकी।

बताया जा रहा है कि अनिल लिफ्ट की मरम्मत के काम से जुड़ा था। परिवार में पत्नी और 10 साल का एक बच्चा है।

हिमाचल: सात महीने बाद अध्यापकों को इस दिन से रोज जाना होगा स्कूल

शिमला।। हिमाचल में सभी अध्यापकों और नॉन-टीचिंग स्टाफ को अब लगातार स्कूल जाना होगा। भले ही सरकार ने छात्रों के लिए स्कूलों को पूरी तरह खोलने का फैसला नहीं लिया है, मगर सोमवार 12 अक्तूबर से टीचिंग और नॉट-टीचिंग स्टाफ को स्कूल जाकर अपनी हाजिरी दर्ज करनी होगी। कोरोना संकट के कारण लगभग सात महीनों से स्कूल बंद चल रहे हैं।

शिक्षण संस्थानों के संबंध में दिशा निर्देश जारी करने वाले हायर एजुकेशन के जॉइंट सेक्रेटरी वेद प्रकाश ने मीडिया को बताया है, “पहले की तरह सामान्य तौर से क्लास चलाना अभी संभव नहीं होगा मगर सभी सरकारी शिक्षण संस्थानों के अध्यापकों और अन्य स्टाफ को 12 अक्तूबर से रोज ड्यूटी पर आने के लिए कहा गया है।”

संस्थानों से कहा गया है कि वे 17 अक्तूबर तक संस्थानों की व्यवस्था दुरुस्त करें। हालांकि, शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर ने हाल ही में कहा था कि सरकार कोविड-19 के बढ़ते हुए मामलों को देखते हुए अभी स्कूल खोलने की जल्दी में नहीं हैं। उन्होंने संकेत दिया था कि पहली से आठवीं तक के बच्चों को स्कूल बुलाना अभी संभव नहीं होगा क्योंकि बड़ी संख्या में अभिभाव इसके पक्ष में नहीं हैं।

स्कूल आकर ये काम करना होगा
प्रिंसिपलों और अन्य संस्थान प्रमुखों से कहा गया है कि वे उन बच्चों को घर पर पठन सामग्री उपलब्ध करवाने का इंतजाम करें, जो ऑनलाइन क्लास, हर घर पाठशाला या दूरदर्शन के माध्यम से पढ़ाई नहीं कर सके हैं। अध्यापकों को स्कूल आकर यह इंतजाम करना होगा कि जो बच्चे लॉकडाउन के कारण पढ़ाई से वंचित रहे हैं, उनके नुकसान की भरपाई कैसे की जा सकती है।

सत्ता में आते ही टनल में फिर लगाएंगे सोनिया के नाम की पट्टिका: अग्निहोत्री

मंडी।। हिमाचल प्रदेश के मंडी में कांग्रेस पार्टी के राज्य स्तरीय किसान संवाद सम्मेलन में नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि बीजेपी अटल टनल रोहतांग के उद्घाटन समारोह में कांग्रेस के योगदान को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। उन्होंने कहा- पूरा देश जानता है कि इस टनल के लिए 1500 करोड़ रुपये की व्यवस्था पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने की थी।

इस सम्मेलन में आए नेताओं और कार्यकर्ताओं ने 2022 में हिमाचल में कांग्रेस की सरकार बनाने का संकल्प लिया। अग्निहोत्री ने कहा, “रोहतांग टनल का शिलान्यास 2010 में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार परिषद की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने किया था।”

नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “लेकिन भाजपा सरकार ने उनके नाम की शिलान्यास पट्टिका गायब कर दी है और जिनका कोई इस टनल में योगदान नहीं उनके नाम की पट्टिका लटका दी है। हमारी सरकार आते ही हम इसे उखाड़ फेंकेंगे और वहां कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की पट्टिका फिर से लगाएंगे।”

 

Sonic Boom: जानें, लड़ाकू विमानों से कई बार क्यों आती है धमाके जैसी आवाज

इन हिमाचल डेस्क।। कई बार लोग अचानक होने वाली धमक से चौंक उठते हैं। कई बार बादलों की गर्जन जैसी आवाज सुनाई देती है, कई बार धमाके की तो कई बार भूकम्प जैसा भी महसूस होता है, हालांकि यह असल में भूकम्प नहीं होता। इसकी वजह होती है- लड़ाकू विमानों के कारण पैदा हुई सोनिक बूम। इन दिनों बिलासपुर-हमीरपुर में धमाका सुनाई देने की खबर है। इससे पहले कभी, कभी हिमाचल के सुंदरनगर, मैहतपुर, नया नंगल, अजोली, वास, भनुपाली, कुठार, देहलां समेत आसपास के कई इलाकों में जोरदार आवाज सुनाई देती रही है। घबराए हुए लोग कई बार अपने घरों से बाहर भी आ जाते हैं। कुछ जगहों पर धमाके के साथ ही कुछ समय के लिए बिजली की सप्लाई बंद होने की भी खबरें आती रही हैं।

ऐसी ही एक घटना पर एक अखबार ने मैहतपुर चौकी इंचार्ज गुरमैल सिंह के हवाले से लिखा  था कि यह धमाका फाइटर प्लेन के गुजरने से हो सकता है। अखबार ने अजीब सी थ्योरी दी थी कि जब फाइटर प्लेन तेज गति की दौरान पल्टी मारता है तब जो वैक्यूम बनता है उससे जोरदार धमाका होता है। हालांकि यह अजीब सी थ्योरी है और हकीकत से इसका संबंध नहीं हैं। ऐसा क्यों होता है, हम आगे समझा रहे हैं।

बीते साल 18 सितंबर को सुंदरनगर शहर और आसपास के गांवों के लोग जोरदार धमाके की आवाज़ से चौंक गए थे। धमाका इतना जोरदार था कि लोग डर के मारे घरों से बाहर आ गए। यह धमाका सुबह करीब सवा 10 बजे सुनाई दिया था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि धमाका इतना तीखा और जोरदार था जैसे तुरंत ही आसपास बिजली गिरी हो। मगर बिजली गिरती है तो रोशनी भी चमकती है। मगर न तो रोशनी हुई और न ही गड़गड़ाहट। साथ ही धमाका ऐसा था कि शीशे तक कंपन करने लगे।

लोगों के बीच चर्चाओं का दौर जारी रहा। लोग पता लगाने लगे मगर किसी को पता नहीं चला कि कहां से आवाज आई। लोग एक-दूसरे को फोन करके पूछते रहे कि आपको धमाका सुनाई दिया या नहीं। मगर शाम तक किसी को पता नहीं चला कि आखिर धमाके का स्रोत क्या था। बाद में ‘In Himachal’ ने यह आर्टिकल लिखकर बताया था कि कैसे फाइटल प्लेन की सोनिक बूम के कारण यह आवाज सुनाई देती है।

इन हिमाचल के आर्टिकल के आधार पर ही बाद में सुंदरनगर के प्रशासन ने पता किया था तो स्पष्ट हुआ था कि भारतीय वायुसेना के उतरी क्षेत्र के आदमपुर जालंधर एयर स्टेशन से रुटीन अभ्यास सेशन के तहत उड़े लड़ाकू विमान सुंदरनगर के आसमान के ऊपर से उड़े थे और वह धमाका उन्हीं के कारण सुनाई दिया था। अमृतसर में सुनाई दिए धमाके का कारण भी यही हो सकता है क्योंकि भारत और पाकिस्तान के बीच पैदा हुए तनाव के बाद एयरफोर्स अलर्ट पर है।

जानें, क्यों सुनाई देता है धमाका
जब कम से कम 10-15 वर्ग किलोमीटर के दायरे में आवाज सुनाई दी है तो इसका मतलब है कि धमाके का स्रोत दमदार रहा होगा। इसके पीछे वैज्ञानिक कारणों की बात करें तो एक वजह नजर आती है- सोनिक बूम (Sonic Boom)

सोनिक बूम उस धमाकेदार आवाज को कहा जाता है, जो उस समय पैदा होती है जब कोई चीज हवा में ध्वनि की रफ्तार यानी Speed of Sound से भी तेज गति से चले। इस कारण इतनी ज्यादा ऊर्जा पैदा हो जाती है कि जबरदस्त धमाके या बिजली गिरने की कड़कड़ाहट जैसी आवाज पैदा होती है।

उदाहरण के लिए ऐसा तब होता है जब हिमाचल की सड़कों पर करतब दिखाते नजर आ जाने वाले कलाकार अपनी पीठ पर कोड़े मारने का नाटक करते हैं। तब हमें लगता है कि आवाज उसकी पीठ पर जोर से कोड़े के टकराने के कारण आ रही है मगर वह चटाक की आवाज दरअसल कोड़े के अगले हिस्से के तेज गति में झटकने के कारण छोटे स्तर पर पैदा हुई सोनिक बूम के कारण पैदा होती है। समझने के लिए नीचे दिया गया वीडियो देखें-

विमानों से भी पैदा होती है सोनिक बूम
जब कभी बड़े विमान तेजी से उड़ते हुए ध्वनि की रफ्तार से तेज स्पीड पकड़ते हैं तो इतनी जोरदार आवाज पैदा होती है कि लोग चौंक जाते हैं। कई बार तो घरों और इमारतों तक को नुकसान पहुंच जाया करता है। इसके कारण भूकम्प मापने वाले यंत्र सिज़्मोग्राफ तक रीडिंग दे सकते हैं। ऐसा शक्तिशाली इफेक्ट सुपरसोनिक विमानों के कारण ही पैदा हो सकता है। सुपरसोनिक विमान उन विमानों को कहते हैं जो ध्वनि की रफ्तार से तेजी से उड़ सकते हैं।

मगर जरूरी नहीं कि हमेशा इतनी तेज गति से चलने वाले विमान की धमाकेदार आवाज सुनाई दे। ये उन्हीं लोगों को सुनाई देगी जब वे तेज गति से उड़ रहे विमान या वस्तु के पीछे शंकु के आकार के क्षेत्र में पड़ेंगे। जैसे-जैसे विमान या वस्तु ध्वनि की रफ्तार से तेजी से आगे की और बढ़ेंगे, उस ज्यामितीय शंकु वाले क्षेत्र में पड़ने वाले लोगों को वह आवाज सुनाई देगी। इस बात को नीचे दिए डायाग्राम से आसानी से समझ सकते हैं-

सुंदरनगर, बिलासपुर और हमीरपुर में हुए धमाके के पीछे भी यही घटना है क्योंकि लोगों का यह भी कहना है कि लगभग उसी समय हवाई जहाज की आवाज भी सुनाई दी थी। वैसे भी हिमाचल से सटे राज्यों में वायुसेना के कई एयरबेस हैं। ऐसे में ऊपर से उड़ रहे विमान के कारण यह सोनिक बूम इफेक्ट पैदा होना सामान्य है।
कैसा होता है सोनिक बूम इफेक्ट, नीचे वीडियो ध्यान से देखें। ऊपर जो डायाग्राम समझाया गया है, उसके आधार पर देखें कि जब उस विमान थोड़ा आगे चला जाता है, तब अचानक उसकी आवाज आती है, जबकि पहले उसकी आवाज सुनाई नहीं दे रही होती। तो जैसे ही पहली बार आवाज सुनाई देती है, एक धमाका सा महसूस होता है।

हवा में ध्वनि 343 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से चलती है जबकि यात्री विमानों की सामान्य रफ्तार लगभग 245 मीटर प्रति सेकंड होती है। जबकि सुपरसोनिक विमान कहीं तेज चलते हैं। भारतीय वायुसेना के पास भी सुपरसोनिक विमान हैं। भारत के पास मिग 21 जैसा सुपरसोनिक विमान है जो 601 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से उड़ सकते हैं जो ध्वनि की रफ्तार से लगभग दोगुनी है। अब भारत के पास राफाल भी है जो सुपरसोनिक जेट है। पिछले दिनों पैरिस में एक धमाका सुनाई दिया था। बाद में पता चला कि वह फ्रांस की वायुसेना के रफाल से पैदा सोनिक बूम थी।

Mig 21
मिग 21

भारतीय वायुसेना अक्सर अभ्यास करती है और संभव है कि ऐसे ही किसी सुपरसोनिक विमान ने अमृतसर के ऊपर साउंड बैरियर तोड़ते हुए उड़ान भरी हो, उससे सोनिक बूम पैदा हुई हो और उसके शंक्वाकार प्रभाव क्षेत्र में आने वाले लोगों को यह आवाज सुनाई दी हो। हालांकि आबादी वाले इलाकों के ऊपर वायुयान इस रफ्तार से नहीं उड़ते मगर कई बार चूक भी हो जाती है।

हालांकि, उस समय ऊपर से वायुसेना का विमान उड़ रहा था या नहीं, यह पुष्टि करना प्रशासन का का है। इसलिए अफवाहों पर ध्यान न दें, हर घटना के पीछे वैज्ञानिक वजह जरूर होती है। हिमाचल में ऐसी आवाज़ें सुनाई देने के पीछे फाइटर जेट्स से पैदा हुई सोनिक बूम ही थी।

(19 सितंबर, 2018 को प्रकाशित इस लेख को अपडेट करके फिर से प्रकाशित किया गया है)

अटल टनल: चीन के कारण नहीं, इसलिए तैनात हुए 30 पुलिसकर्मी

कुल्लू।। अटन टनल रोहतांग में हिमाचल पुलिस ने 30 कर्मियों की तैनाती की है। इस संबंध में कुछ समाचार माध्यमों ने खबर दी कि चीन की ओर से मिली धमकी को देखते हुए यह सुरक्षा बढ़ाई हुई है। जबकि मामला यह है कि टनल के अंदर ट्रैफिक और अन्य व्यवस्थाएं सही से रहें, इसकी निगरानी के लिए पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।

दरअसल चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में एक विशेषज्ञ ने अटल टनल को लेकर लिखा था कि युद्ध की स्थिति में चीनी सेना के पास इस सुरंग को बेकार करने के कई तरीके हैं। इसके बाद जब हिमाचल पुलिस ने टनल पर 30 पुलिसकर्मियों की तैनाती की तो कुछ माध्यमों ने दोनों बातों को लिंक कर दिया। मगर यह जानकारी सामने आ रही है कि यह एक सामान्य प्रक्रिया के तहत किया गया है।

क्या कहती है पुलिस
कुल्लू के एसपी गौरव सिंह ने कहा है कि पुलिस सुरंग के अंदर निगरानी रखेगी और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि बिना वजह सुरंग के अंदर गाड़ी रोकने पर केस दर्ज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुरंग में जगह-जगह स्पीड के बोर्ड लगे हैं और इसका उल्लंघन करने वालों का चालान काटा जाएगा। सुरंग के अंदर इस काम के लिए डॉप्लर रडार लगाए गए हैं।

कुल्लू और लाहौल-स्पीति पुलिस ने अपने कर्मचारियों को सुरंग के कंट्रोल रूम्स में तैनात किया गया है। ओवरस्पीडिंग की निगारनी के लिए कैमरों पर नजर रकी जा रही है। पुलिसकर्मियों को मोटरसाइकल दिए गए हैं ताकि वे गश्त लगा सकें। पलचान में नाका भी लगाया गया है।

मेरे खिलाफ फैलाई जा रही अफवाह, लूंगा लीगल ऐक्शन: सुरेंद्र शौरी

कुल्लू।। बंजार से बीजेपी के विधायक सुरेंद्र शौरी ने कहा है कि वह दो अक्तूबर को कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इसके एक दिन बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल टनल रोहतांग का लोकार्पण किया था और सोलंग में जनसभा को संबोधित किया था।

शौरी का कहना है कि वह और उनका स्टाफ तुपंत ही आइसोलेट हो गए थे और कुछ लोग इसे लेकर अफवाहें फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी छवि खराब करने के लिए कुछ लोग यह कह रहे हैं कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट छिपाई। शौरी ने कहा है कि वह ऐसा करने वालों के खिलाफ लीगल एक्शन ले सकते हैं।

फेसबुक पोस्ट में शौरी ने कहा कि उन्हें कोई लक्षण नहीं थे। उन्होंने टेस्ट एसपीजी के निर्देश पर करवाया था न कि लक्षण होने पर। बता दें कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए तैनात एसपीजी ने इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के लिए टेस्टिंग अनिवार्य करने को कहा था। शौरी ने कहा कि जैसे ही उन्हें रिपोर्ट मिली, वह और उनका स्टाफ आइसोलेट हो गया।

कुछ लोग, जो यह भ्रांति फैला रहे हैं कि मैंने अपनी कोरोना पॉजिटिव आने की जानकारी छुपाई है और पॉजिटिव आने के बावजूद मनाली…

Posted by Surender Shourie on Tuesday, 6 October 2020

 

शौरी और स्वास्थ्य विभाग पर क्या आरोप लग रहे हैं, जानें-

बंजार के विधायक के कारण पीएम मोदी ऐसे आए कोरोना के ख़तरे में

शाहीन बाग: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सार्वजनिक स्थानों पर कब्जा गलत

नई दिल्ली।। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग में हुए प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा कि ‘कोई भी व्यक्ति या समूह सार्वजिनक स्थानों को ब्लॉक नहीं कर सकता है।’ शीर्ष अदालत ने कहा, “पब्लिक प्लेस पर अनिश्चितकाल के लिए कब्जा नहीं किया जा सकता। धरना-प्रदर्शन करने का अधिकार अपनी जगह है लेकिन जिस तरीके का विरोध अंग्रेजों को राज में किया जाता था, वैसा अभी करना सही नहीं है।”

‘ऐसे कब्जे हटा सकते हैं अधिकारी’
दिल्ली के शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर डेरा डालकर कई दिनों तक प्रदर्शन किया था। भीड़ को कोरोना महामारी के फैलने के बाद ही वहां से हटाया जा सका था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विरोध जताने के लिए पब्लिक प्लेस या रास्ते को ब्लॉक नहीं किया जा सकता। कोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों को इस तरह के अवरोध को हटाना चाहिए और विरोध प्रदर्शन तय जगहों पर ही होना चाहिए।

‘विरोध के साथ कर्तव्य भी जरूरी’
शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के सार्वजनिक जगहों पर प्रदर्शन लोगों के अधिकारों का हनन है। कानून में इसकी इजाजत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आवागमन का अधिकार अनिश्चित काल तक रोका नहीं जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा सार्वजनिक बैठकों पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है लेकिन उन्हें निर्दिष्ट क्षेत्रों में होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा संविधान विरोध करने का अधिकार देता है लेकिन इसे समान कर्तव्यों के साथ जोड़ा जाना चाहिए।

सैंपल देने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ से मिले थे बंजार के विधायक शौरी

कुल्लू।। यह स्थापित नियम है कि सैंपल देने के बाद जब तक रिपोर्ट नेगेटिव न आए, आपको लोगों से नहीं मिलना है। मगर कोरोना संक्रमित पाए गए बंजार से बीजेपी के विधायक सुरेंद्र शौरी के मामले में बड़ी लापरवाही देखने को मिली है। अब यह पता चला है कि वह न सिर्फ सीएम से मिले थे, बल्कि कोविड के लिए सैंपल देने के बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात की थी। उनकी इस मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। यह तस्वीर उन्होंने खुद ही फेसबुक पर डाली थी। हालांकि, शौरी ने कहा है कि उनके खिलाफ अफवाह फैलाई जा रही है और वह कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं। उनका कहना है कि उनमें कोई लक्षण नहीं थे और कोरोना टेस्ट उन्होंने एसपीजी के निर्देश पर करवाया था।

बहरहाल, इस पूरे मामले को लेकर गंभीर लापरवाहियां सामने आ रही हैं। सीएम जयराम ठाकुर के अलावा अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शौरी के प्राइमरी कॉन्टैक्ट बन गए हैं यानी उन्हें खतरा हो सकता है। हालांकि तस्वीर में वे मास्क पहने नजर आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि कैसे जानकारी होने के बावजूद उन्होंने यह बात छिपाई कि सुरेंद्र शौरी कोरोना संक्रमित हैं।

सुरेंद्र शौरी

यह सार्वजनिक हुआ है कि शौरी के पॉजिटिव होने की रिपोर्ट दो अक्तूबर की ही आ गई थी, रोहतांग अटल टनल के लोकार्पण कार्यक्रम से एक दिन पहले। मगर ऐसा दावा किया जा रहा है कि इस जानकारी को छिपाया गया और सीएम को भी तीन अक्तूबर को यह जानकारी दी गई।

सवाल उठ रहे हैं कि इस जानकारी को इसलिए छिपाया गया ताकि कार्यक्रम पर कोई असर न पड़े। ऐसे में सीएमओ कुल्लू को इस मामले में जवाब देना पड़ सकता है कि जानकारी क्यों सार्वजनिक नहीं की गई। विभाग की कोताही इससे भी पता चलती है कि जहां शौरी के पॉजिटिव पाए जाने के तुरंत बाद उनके कॉन्टैक्ट में आए लोगों का पता करना था, वह काम भी समय पर नहीं किया गया। नियमों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।

वहीं, नियमों के अनुसार कार्रवाई तो बंजार के विधायक पर भी होनी चाहिए जिन्होंने सैंपल देने के बावजूद सीएम, मंत्रियों और केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की और उन्हें खतरे में डाला। इस मामले में जनता में रोष है कि जहां पहले इस तरह का व्यवहार करने वाले आम लोगों पर एफआईआऱ तक की गई है, वहीं विधायक की ओर से वैसा ही किए जाने पर सरकार कुछ नहीं कर रही।

बंजार के विधायक के कारण पीएम मोदी ऐसे आए कोरोना के ख़तरे में

बंजार के विधायक के कारण पीएम मोदी ऐसे आए कोरोना के ख़तरे में

शिमला।। अटल टनल रोहतांग के उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए हिमाचल प्रदेश पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को लेकर एक नई बात सामने आई है। यह पता चला है कि कोरोना संक्रमित पाए गए बंजार के विधायक सुरेंद्र शौरी इस कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और वन मंत्री राकेश पठानिया कोरोना के संपर्क में आए थे। संक्रमण को लेकर सीएम से भी जानकारी छिपाए जाने की भी बात सामने आ रही है।

बाद में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर न सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बल्कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और अन्य कई नेताओं के संपर्क में आए। उन्होंने पीएम को पेंटिंग भेंट करके और टोपी पहनकार सम्मानित किया था। हालांकि, इस दौरान कोरोना का फैलाव रोकने के लिए जरूरी नियमों का पालन किया गया था।

इस समय सीएम और पठानिया ने खुद को एहतियातन क्वॉरन्टीन किया हुआ है। उनके अलावा सीएम के राजनीतिक सलाहकार त्रिलोक जम्वाल, भाजपा के संगठन महामंत्री पवन राणा समेत आधा दर्जन से ज्यादा नेता भी आइसोलेट हो गए हैं। मगर सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर लक्षण होने के कारण विधायक ने टेस्ट करवाया था तो वह आइसोलेट क्यों नहीं हुए थे और क्यों इतने बड़े कार्यक्रम से पहले नेताओं से मिल रहे थे।

छिपाई गई जानकारी?
राकेश पठानिया ने कहा है कि जब वे शौरी से मिले थे तो दूरी का ध्यान रखा गया था और मास्क आदि भी पहने हुए थे। मगर इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और सरकार पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि यह कहा जा रहा है कि पीएम के कार्यक्रम से एक दिन पहले ही शौरी के पॉजिटिव होने की रिपोर्ट आ गई थी। अमर उजाला के मुताबिक़, दो अक्तूबर को ही पता चल गया था कि वह कोरोना संक्रमित हैं। लेकिन सीएम का कहना है कि उन्हें तीन अक्तूबर को इसकी जानकारी दी गई थी।

कथित तौर पर सीएम तक से जानकारी छिपाने के अलावा, स्वास्थ्य विभाग पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि किसी के भी पॉजिटिव पाए जाने पर उसके प्राइमरी कॉन्टैक्ट्स की ट्रेसिंग की जाती है ताकि संक्रमण और न फैले। मगर शौरी के मामले में ऐसा नहीं किया गया।

पीएम को ख़तरा कम
जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री को संक्रमण होने की सभावनाएं बहुत ही कम हैं क्योंकि उन्होने सामाजिक दूरी बनाई हुई थी और साथ उनके संपर्क में आए सीएम एक दिन पहले ही शौरी से मिले थे। संक्रमण तभी आगे फैलता है जब एक वायरस एक व्यक्ति से दूसरे में जाकर मल्टीप्लाई कर चुका हो।इस प्रक्रिया में कई दिनों का समय लग सकता है। चूंकि यहां सीएम की शौरी और फिर पीएम से मुलाकात के बीच एक ही दिन का समय है, ऐसे में खतरा अधिक नही है। मगर थोड़ी चिंता की बात तब होगी जब सीएम का टेस्ट पॉजिटिव आए।