BBMB अस्पताल में कोविड पीड़ित महिला की मौत, वीडियो वायरल, उठे गंभीर सवाल

मंडी।। कोविड डेडिकेटेड सेंटर बीबीएमबी सुंदरनगर में एक कोरोना पॉजिटिव एक महिला की मौत का मामला चर्चा में आ गया है। घटना रविवार रात की है जिसमें 61 साल की महिला उर्मिला का निधन हो गया। महिला के आखिरी क्षणों में परिजनों द्वारा बनाया गया एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया जिसमें वे बेबसी से डॉक्टरों पर देरी से आने का आरोप लगा रहे हैं। इस वीडियो में डॉक्टरों की टीम महिला को रिवाइव करने की कोशिश करती दिख रही है मगर उनकी कोशिश नाकाम रहती है।

यह विचलित कर देने वाला वीडियो पोस्ट करने से पहले ‘इन हिमाचल’ ने काफी विचार किया क्योंकि इसके कुछ दृश्य बेहद विचलित कर देने वाले थे। आखिरकार महिला के चेहरे वाले हिस्से को लोगो से ढककर वीडियो को व्यापक जनहित में अपलोड किया गया। क्योंकि यह बताता है कि कोरोना की सेकेंड वेव जब हिमाचल में खतरनाक रूप लेती जा रही है, तब डेडिकेटेड कोविड सेंटरों में किस तरह के इंतजाम हैं।

मृतका के परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों से गुहार लगाते रहे मगर समय पर ख्याल न रखे जाने के कारण जान चली गई। अगर ऐसा है तो कल को इस तरह की घटना किसी के भी साथ हो सकती है। जरूरी है कि पहले ही इतना सजग रहा जाए कि किसी भी स्तर पर होने वाली लापरवाही या चूक को होने ही न दिया जाए।

‘इन हिमाचल’ ने चेतावनी के साथ इस वीडियो को पोस्ट किया था और साथ ही लिखा था कि विस्तृत जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी। जिस दौरान लोग इस वीडियो को अलग-अलग मंचों पर सर्च कर रहे थे, उस समय इन हिमाचल कोशिश कर रहा था कि मामले की तह तक जाया जाए। हमने मृतका के परिजनों से बात की और स्वास्थ्य अधिकारियों का भी पक्ष जानना चाहा। एक परिजन से तो बात हो गई मगर स्वास्थ्य अधिकारियों का पक्ष नहीं मिल सका।

महिला मंडी जिले के जोगिंदर नगर के घमरेहड़ गांव की रहने वाली थीं। ‘इन हिमाचल’ से बातचीत में मृतका के परिजन राकेश ने बताया कि वह डायबीटिक थीं और इसके अलावा उन्हें और कोई समस्या नहीं थी। उन्होंने जो बताया उसे हम उनके शब्दों में नीचे लिख रहे हैं-

“मरीज की दो-तीन दिन से तबीयत खराब थी। परसों (17 अप्रैल) को मरीज को प्राइवेट हॉस्पिटल में लेकर गए थे। कल (18 अप्रैल को) मरीज को जोगिंदर नगर के सरकारी अस्पातल ले गए। सांस की दिक्कत थी तो तुरंत ऑक्सीजन लगाई गई, लेकिन मरीज का ऑक्सीजन लेवल नहीं बढ़ रहा था। इसके बाद मरीज का कोरोना टेस्ट करवाया गया जो प़ॉजिटिव आया।”

“हमने मरीज को टांडा मेडिकल कॉलेज शिफ्ट करने की गुजारिश की लेकिन अस्पताल ने उन्हें बीबीएमबी रेफर कर दिया। हमसे डॉक्टर ने कहा कि मेरी बात हो गई है, आप निश्चिंत होकर वहां जाइए। हम दो घंटे के भीतर ही बीबीएमबी पहुंच गए थे। जह हम बीबीएमबी कोविड केयर डेडिकेटिड अस्पताल पहुंचे, रात के नौ से दस बजे के बीच का समय था। वहां पहले से ही पांच गाड़ियों में मरीज वेटिंग में थे। गाड़ी में जो ऑक्सीजन सिलेंडर था वो खत्म हो गया।”

“बाद में गाड़ी में ही मरीज को ऑक्सीजन लगाई गई वो भी एक घंटे बाद। इसके बाद मरीज को जैसे-तैसे अंदर लेकर गए। अंदर भी 10-15 मिनट लगाए गए। इसके बाद भी मरीज को चेक करने के लिए डॉक्टर नहीं आए। हम लगातार डॉक्टर को बुलाने के लिए गुहार लगाते रहे कि कम से कम डॉक्टर आकर चेकअप तो करे। इस दौरान मरीज का ऑक्सीजन लेवल काफी गिर गया था।”

“जब मरीज की ऑक्सीजन 20 पहुंच गई और हार्ट बीट 80 पहुंच गई थी और तभी मरीज को टांडा मेडिकल कॉलेज शिफ्ट करने की बात कही गई। वो बात भी नर्स ने कही, डॉक्टर ने नहीं। हमने कहा कि पहले मरीज का ऑक्सीजन लेवल पहले 30 से 35 था वो अब इतना कम रह गया है तो कैसे पांच घंटे में टांडा पहुंचेंगे? इस दौरान वो ऑक्सीजन सिलेंडर भी खत्म हो गया। जब सिलेंडर बदल ही रहे थे तो मरीज की मौत हो गई।”

चेतावनी: वीडियो के कुछ हिस्से विचलित कर सकते हैं

 

स्वास्थ्य अधिकारियों का पक्ष सार्वजनिक नहीं
इस घटना और मृतका के परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों को लेकर स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष जानने के लिए सीएमओ मंडी डॉक्टर देवेंद्र शर्मा से फोन के जरिये संपर्क की कोशिश की गई मगर उन्होंने फोन नहीं उठाया। इस संबंध में जैसे ही स्वास्थ्य विभाग या अस्पताल की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया आएगी, उसे ‘इन हिमाचल’ पर प्रकाशित किया जाएगा।

इस मामले के सबक
मृतका के परिजन की कही बातों से कुछ बिंदु स्पष्ट होते हैं। जैसे कि महिला की तबीयत खराब होने थी और बहुत ज्यादा बिगड़ने पर ही उन्हें अस्पताल लाया गया और बहुत बाद में कोविड टेस्ट हुआ। समय रहते उनका कोविड के लिए इलाज शुरू होता तो उनकी जान शायद बचाई जा सकती थी। ये शुरूआत में हुई गलतियां हैं जो बाकियों के लिए भी सबक हैं। किसी भी तरह के लक्षण आने पर उन्हें मामूली जुकाम समझकर घर पर बैठे रहकर तबीयत ज्यादा बिगड़ने का इंतजार न करें, तुरंत कोविड टेस्ट करवाएं ताकि पॉजिटिव पाए जाने पर तुरंत समय रहते इलाज शुरू हो सके।

साथ ही, परिजनों का यह दावा भी परेशान करने वाला है कि जब वे बीबीएमबी पहुंचे तो पहले से कुछ मरीज एडमिट होने का इंतजार कर रहे थे। यह भी गंभीर आरोप है कि गाड़ी में मरीज का ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म हो गया और एक घंटे का इंतजार करना पड़ा। फिर उसके बाद भी सिलेंडर गाड़ी में ही बदला गया और बहुत मुश्किलों के बाद मरीज को एडमिट किया गया। यही नहीं, आरोप है कि अस्पताल में भी डॉक्टरों ने समय रहते अटेंड नहीं किया और हालत गंभीर हो गई। जब परिजनों के आऱोपों के मुताबिक, ऑक्सीजन देने पर भी महिला के शरीर में ऑक्सीजन का स्तर नहीं बढ़ रहा था तो अगला कदम क्यों नहीं उठाया गया। अगर महिला को वेंटिलेटर पर रख दिया जाता तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। मगर हुआ यह कि ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म हो गया और उसे बदलने से पहले ही महिला की जान चली गई।

यह पूरा मामला गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है। इससे कई सवाल उठ रहे हैं, जिनपर ‘इन हिमाचल’ जल्द ही विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित करेगा।

सीएम के लिए रशिया से दिल्ली पहुंचा नया उड़नखटोला, किराया 5.10 लाख प्रति घंटा

शिमला। हिमाचल के सीएम जयराम ठाकुर के लिए नया उड़नखटोला आने वाला है। मुख्यमंत्री के लिए आने वाला नया उड़नखटोला यानी हेलीकॉप्टर 24 सीटर होगा। अभी सीएम जयराम ठाकुर जो हेलीकॉप्टर इस्तेमाल कर रहे हैं वो छह सीटर है। अब जाहिर है कि हेलीकॉप्टर बड़ा आएगा तो किराया भी ज्यादा होगा। अभी जयराम ठाकुर जिस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल कर रहे हैं उसका किराया दो लाख रुपए प्रति घंटा है और नए 24 सीटर उड़नखटोले का किराया 5 लाख 10 हजार रुपए प्रति घंटा रहेगा।

नया हेलीकॉप्टर एमआई-171 ए2  स्काई वन कंपनी का है। इसे पांच साल के लिए लीज पर लिया जाएगा। कंपनी के साथ इस हेलीकॉप्टर के लिए जीएडी यानी सामान्य प्रशासन विभाग ने एमओयू भी साइन कर लिया है। इससे पहले पवन हंस कंपनी के हेलीकॉप्टर की सेवाएं सरकार ले रही थी, लेकिन वो करार खत्म हो गया है।

सीएम साहब का नया उड़नखटोला रशिया से दिल्ली पहुंच चुका है। अब इसका एक टेस्ट ड्राइव होगा और हरी झंडी मिलते ही हेलीकॉप्टर एमआई-171 ए2 सरकार की खिदमत में हाजिर कर दिया जाएगा।

अब ऐसा नहीं है की सीएम साहब और उनके मंत्री संग अधिकारी ही अपने दौरों के लिए इस बड़े उड़नखटोले की सवारी का लुत्फ उठाएंगे। जरूरत पड़ने पर जनजातीय इलाकों, बर्फबारी और प्राकृतिक आपदा के दौरान भी इसका इस्तेमाल मदद के लिए किया जाएगा।

 

दिल्ली में छह दिन का Lockdown, कोरोना के कारण केजरीवाल का सख्त फैसला

नई दिल्ली। देश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। देश में महाराष्ट्र के बाद दिल्ली में कोरोना के मामलों में बेतहाशा वृद्धि देखी गई है। बीते तीन दिनों में देश की राजधानी में रोजाना 20 हजार से ज्यादा कोरोना के मामले दर्ज हुए हैं। कोरोना बढ़ते मामलों के कारण अस्पतालों में बेड कम पड़ गए हैं और ऑक्सीजन की भी भारी किल्लत है। ऐसे में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में आज शाम 10 बजे से सो 26 अप्रैल सुबह तक लॉकडाउन लगाने का ऐलान कर दिया है। इस दौरान आवश्यक सेवाएं चलती रहेंगी।

स्वास्थ्य सीमाएं चरम पर

दिल्ली के सीएम अरविंद  केजरीवाल ने लॉकडाउन लगाने के पीछे तर्क दिया कि रोजाना बहुत ज्यादा केस आ रहे हैं। इस वजह से स्वास्थ्य सीमाएं अपने चरम पर पहुंच गई है। अस्पताल तनाव में हैं। अभी ऐसी स्थितियां नहीं आई है कि लोग सड़कों पर बिना इलाज के मर रहे हैं, लेकिन अगर लॉककडाउन लगाकर सख्तियां नहीं लगाई गई तो ऐसी स्थितियां जरूर हो जाएंगे। इसलिए लॉकडाउन जरूरी है।

हमने कुछ नहीं छिपाया

अरविंद केजरीवाल ने कहा हमने जनता से कुछ भी नहीं छिपाया। जितनी मौतें कोरोना से रोजाना हो रही हैं हम उतना ही आंकड़ा बता रहे हैं। बकौल, अरविंद केजरीवाल हम एक लाख से ज्यादा टेस्ट रोजाना कर रहे हैं। दिल्ली में सबसे ज्यादा कोरोना टेस्ट हो रहे हैं, लेकिन स्थति ठीक नहीं है।

स्कूल बनाया कोविड अस्पताल

दिल्ली में कोरोना के कारण स्थितियां कितनी खराब होती जा रही हैं इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं दिल्ली में एक स्कूल को कोविड अस्पताल में बदल दिया गया है। यहां कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा शादियों के बैंक्वेट हॉल भी अस्पतालों के साथ अटैच कर वहां भी बेड लगाए गए हैं।

 

प्यारे हिमाचलियो! नेताओं को छोड़ो, अपना ख्याल रखो प्लीज

इन हिमाचल डेस्क।। देश में कोरोना की वजह से लगातार खराब होते हालात अब हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे राज्य के लिए चिंता का सबब बन गए हैं। हिमाचल में भी रोजाना न सिर्फ एक हजार से ज्यादा मामले सामने आने लगे हैं बल्कि आठ से दस लोगों की जान भी जा रही है। ये हाल तब हैं जब अधिकतर लोग फ्लू जैसे लक्षण होने पर भी टेस्टिंग नहीं करवा रहे और इधर-उधर घूमते हुए दूसरों को भी संक्रमित कर रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश समेत देशभर में कोरोना क्यों फैला, इसकी वैज्ञानिक वजहों को लेकर अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं हुआ है। कुछ एक्सपर्ट इसके लिए वायरस के नए वेरियंट को जिम्मेदार मान रहे हैं जो पहले से ज्यादा संक्रामक और घातक है। लेकिन यह भी एक बड़ी वजह है कि लोगों ने डरना छोड़कर एक तरह से यह मान लिया था कि कोरोना खत्म हो चुका है।

देश में जब कोरोना संक्रमण के हर दिन के मामले न्यूनतम स्तर पर पहुंचे थे, तब लोगों ने सोचा कि यह महामारी खत्म होने वाली है। लगभग एक साल से सख्त नियमों और बंदिशों का पालन कर रहे लोग इस साल की शुरुआत से ही लापरवाह होने लगे थे। बाकियों को छोड़ दें, जो लोग सही से मास्क पहनते थे या हाथ धोने और सैनिटाइज़र के इस्तेमाल को तरजीह देते थे, वे भी वायरस को हल्के में लेने लगे थे।

हमारी लापरवाही
इस बीच जब होली और अन्य त्योहार आए तो हमने सोचा कि क्यों न अब एक साल की बंदिशों के बाद आजादी का जश्न मनाया जाए। आप जानते हैं कि हिमाचल प्रदेश में कई गांवों में होली की टोलियों में शायद ही किसी ने मास्क पहना था। अन्य निजी, सरकारी समारोहों में भी खुलकर सोशल डिस्टैंसिंग की धज्जियां उड़ाई गईं। चुनाव हुए, मेलों का आयोजन हुआ तो उसमें भी लोग मास्क को नाक से नीचे सरकाए घूमते रहे। यही वजह रही कि संक्रमण तेजी से फैला और आज उसका घातक रूप देखने को मिल रहा है।

जब सख्ती बढ़ाई जाने लगी है तो अब लोग सरकार, नेताओं और अधिकारियों से कह रहे हैं कि आप नियमों का पालन क्यों नहीं कर रहे। होना भी चाहिए। नेताओं का काम है एक उदाहरण पेश करना। मगर ऐसा हो नहीं रहा । प्रदेश ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर भी नेता उदाहरण पेश करने में विफल रहे हैं। पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में हो रहे चुनावों के प्रधानमंत्री से लेकर गृहमंत्री और मुख्यमंत्री समेत लगभग सभी दलों के नेताओं का जमकर प्रचार करना और भारी लोगों की जनसभाओं को जुटाना जारी रखा है। ऐसे में लोगों का कहना है कि वहां पर रोक क्यों नंहीं लग रही?

गैर-जिम्मेदार नेताओं की ऐसी-तैसी
परेशान लोगों को लगता है कि हमपर तो बंदिशें थोप दी जा रही हैं लेकिन नेता खुद नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि इस महामारी में हर कोई अपने लिए खुद जिम्मेदार है। नेताओं के पास पैसा है और प्रभाव है, पहुंच है, जान-पहचान है। वे सरकारी नहीं तो किसी निजी अस्पताल में अपना इलाज करवा सकेंगे। हालांकि इसमें भी उनकी जान को खतरा रहेगा क्योंकि कोई नहीं जानता कि यह वायरस कब किसे लील जाए।

हिमाचल वासियो, देश का सरकारी तंत्र लड़खड़ा सा गया है, कई राज्यों में आईसीयू बेड्स से लेकर ऑक्सिजन तक की कमी हो गई है। गाजियाबाद जैसे शहर से ऐसा मंजर देखने को मिला कि शवों का अंतिम संस्कार सड़क किनारे फुटपाथ तक पर करना पड़ रहा है। इसलिए सोचिए, अगर आप बीमार हुए तो आपको न तो वीआईपी ट्रीटमेंट मिलेगा और न प्रदेश से बाहर के निजी अस्पतालों में इलाज का खर्चा आप उठा पाएंगे।

प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़…
इसलिए आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि अगर आपको नेताओं के आचरण और उनके द्वारा कोविड नियमों के खुलेआम उल्लंघन से आपत्ति है तो उसे व्यक्त कीजिए। खुलकर व्यक्त कीजिए। सोशल मीडिया पर लिखिए। इन हिमाचल भी आपका साथ देगा और दे भी रहा है। लेकिन अपने स्तर पर नियमों का पालन कीजिए। भूल जाइए कि सरकार और उसमें बैठे लोग क्या कर रहे हैं। सरकार ठप नहीं हो सकती और नेता भीड़ जुटाने से बाज नहीं आएंगे। लेकिन आप भी तो अपनी समझ इस्तेमाल कीजिए। आपको कोई डंडे मारकर तो किसी सभा में नहीं ले जा रहा? फिर क्यों आप जाते हैं? जब लोग जुटना बंद हो जाएंगे तो इन राजनेताओं को अपने आप आईना दिख जाएगा।

और अपने निजी समारोहों में कम से कम भीड़ रखिए। न तो भीड़ भरे आयोजनों में जाएं न ऐसे आयोजन करके लोगों को बुलाएं।  मास्क ढंग का पहनिए और सही ढंग से पहनिए, हाथ धोइए, सैनिटाइज कीजिए और भीड़ में जाने से बचिए। हर उस नियम का पालन कीजिए जो आपको संभावित संक्रमण से बचा सकता है। अगर कोई नियमों का पालन नहीं कर रहा तो उसे टोकिए। भले अपना हो या पराया। क्योंकि ये उसकी नहीं, आपकी जान का भी सवाल है। आपके परिजनों की सेहत का भी सवाल है। हम कई बार दबाव में आ जाते हैं कि कोई हमें ओवर स्मार्ट समझेगा कि मास्क लगाकर आया है। उसे समझने दीजिए, बस अपनी सेहत का ख्याल रखिए। क्योंकि कल को आप बीमार होंगे तो ये टिप्पणी करने वाले आपकी मदद करने नहीं आएंगे।

यही कामना है कि आप स्वस्थ रहें और हम सभी जल्द इस महामारी से मुक्ति पाकर सामान्य जीवन जी पाएं।

मैं राजनीतिक कार्यक्रम नहीं कर रहा हूं: सीएम जयराम ठाकुर

हमीरपुर।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि वह राजनीतिक कार्यक्रम नहीं कर रहे बल्कि जिलों में यह समीक्षा कर रहे हैं कि कोरोना से निपटने के लिए क्या तैयारियां की जा रही हैं, इंतजाम कैसे हैं।

दरअसल, हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने शनिवार को पालमपुर में कहा था कि कोरोना से बचने के लिए सरकार को सभी राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों पर रोक लगानी चाहिए।

ऊना के बाद हमीरपुर पहुंचे सीएम से इस पर सवाल पूछा गया। इसके जवाब में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा, “शांता कुमार ने सही बात कही है, लेकिन मैं कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं कर रहा। मैं प्रदेश के जिलों में कोरोना से बचाव की तैयारियों की समीक्षा बैठक कर रहा हूं।”

‘सोशल मीडिया तय नहीं करेगा परीक्षाएं होंगी या नहीं’
सीएम ने यह भी कहा कि प्रदेश में दसवीं और बारहवीं कक्षा की राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं करवानी हैं या रद्द करनी हैं, यह सोशल मीडिया तय नहीं करेगा।

सीएम ने सोशल मीडिया पर परीक्षाएं करवाने की मांग कर सरकार की आलोचना करने वालों पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी और व्यक्ति का जीवन सरकार के लिए महत्वपूर्ण है। सीएम ने कहा कि अब जो कोरोना वायरस है, उसका संक्रमण युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है। इसके चलते परीक्षाएं रद्द की गई हैं।

 

दिल्ली में बचे 100 से कम आईसीयू बेड, केजरीवाल सरकार ने केंद्र से मांगी मदद

नई दिल्ली।। दिल्ली में भी बाकी देश की तरह के कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हालात इतने खराब हो गए हैं कि राज्य के अस्पतालों में 100 से भी कम आईसीयू बेड बचे हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से मदद मांगी है। यहां पर पिछले 24 घंटों में 25 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। ये हाल तब हैं जब कई सारी निजी लैब टेस्टिंग के लिए वेटिंग दे रही हैं और कई लोगों के टेस्ट रिजल्ट आने में तीन या ज्यादा दिनों का समय लग रहा है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हालात खराब होते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 24 घंटों के अंदर ही टेस्ट किए जाने वाले सैंपलों में पॉजिटिव आने की दर 24 फीसदी से बढ़कर 30 फीसदी हो गई है। इस वजह से अस्पताल में बिस्तर भी कम हो रहे हैं और ऑक्सीजन भी कम होती जा रही है।

दिल्ली में कोविड के हालात को बहुत गंबीर बताते हुए केजरीवाल ने रविवार को कोरोना के मरीजों के लिए बिस्तर और ऑक्सिजन मांगते हुए  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा है कि दिल्ली के सेंट्रल अस्पतालों के 10 हजार बिस्तरों में से कम से कम सात हजार बिस्तरों को कोविड के मरीजों के लिए रिजर्व किया जाना चाहिए। उन्होंने दिल्ली के अस्पतालों के लिए ऑक्सिजन की भी मांग की है।

उन्होंने डीआरडीओ की ओर से दिल्ली में 500 आईसीयू बिस्तरों का इंतजाम करने को लेकर भी प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा किया और अपील की कि ऐसे बिस्तरों की संख्या बढ़ाकर 1000 की जाए।

ऐतिहासिक शानन पावर हाउस में पाइप फटा, परिसर में भरा पानी

मंडी।। भारत के मेगावॉट क्षमता के शुरुआती हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर स्टेशन में से एक में हादसे की खबर है। पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के तहत आने वाले मंडी के जोगिंदर नगर स्थित शानन पावर हाउस में एक पाइप का वाल्व फटने से परिसर में पानी भर गया।

अभी किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है मगर जो वीडियो सामने आया है, उसमें परिसर के अंदर तेज़ बहाव के साथ पानी बहता दिख रहा है। 1932 में इस प्रॉजेक्ट ने काम करना शुरू किया था। अभी यह पंजाब सरकार के पास है और 99 साल की लीज खत्म होने के बाद साल 2024 में हिमाचल को मिल सकता है।

यह उहल परियोजना का पहला पावर हाउस है। इसके बाद दूसरा प्रॉजेक्ट बस्सी में है जो हिमाचल सरकार के पास है। तीसरा प्रॉजेक्ट चुल्ला में बन रहा है जो कई दशकों मे करोड़ों का खर्च होने के बाद भी अधूरा है। पिछले साल मई 2020 में वहां पर भी ट्रायल के दौरान ही पेनस्टॉक फट गया था।

माना जा रहा है कि शानन में पाइप फटने और पानी भरने से भारी भरकम आर्थिक नुकसान हो सकता है। अभी और जानकारी का इंतजार है।

सरकार के फैसलों की आलोचना की तो अध्यापकों पर होगी कार्रवाई

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के सरकारी अध्यापकों और अध्यापक संघों ने सरकार के फैसलों की सोशल मीडिया या अन्य मीडिया में आलोचना की तो उनके ऊपर कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में शिक्षा निदेशक (उच्चतर शिक्षा) की ओर से उच्चतर शिक्षा के सभी उप शिक्षा निदेशकों को एक सर्कुलर भेजा गया है।

इसमें शिक्षा निदेशक उच्चतर शिक्षा डॉक्टर अमरजीत कुमार शर्मा ने कहा है कि “यह देखा गया है कि प्रदेश सरकार की ओर से लिए गए फैसलों पर अध्यापक संघों या कर्मचारियों की ओर से समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से खुले रूप से विरोधात्मक बयान दिए जा रहे हैं जो कि सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू केंद्रीय सिविल सेवाएं (आचरण) नियम-1964 का उल्लंघन है।”

आगे कहा गया है कि अध्यापक संघों और अध्यापकों को इस तरह के बयान देने से रोकने का दिशा निर्देश जारी किया जाए। आखिर में लिखा है कि अगर कर्मचारियों या संघों की ओर से सरकार के फैसलों का खुलकर विरोध होता है तो उनके खिलाफ केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण औऱ अपील) नियम 1965 के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की अनुशंसा करके निदेशालय को तुरंत भेजा जाए।

कोरोना से अब घर पर भी हो रही मौतें, 16 दिन में 10,590 केस, 120 की गई जान

शिमला। हिमाचल में बीते 16 दिनों में कोरोना की स्थतियों में काफी ज्यादा बदलाव आया है। अगर यह कहें कि हम भी घातक परिस्थितियों की ओर बढ़ रहे हैं तो यह कहना भी गलत नहीं होगा। इसकी दो वजह हैं। एक बीते 16 दिनों में हिमाचल में आए कोरोना केस और मौत के आंकड़े। दूसरी वजह यह है कि मंडी जिला में दो व्यक्तियों की मौत घर पर ही हो गई। इसके बाद पता चला कि दोनों ही व्यक्तियों को कोरोना था।

पहले बात करते हैं हिमाचल में लगातार बढ़ रहे कोरोना केस के ग्राफ की। हिमाचल में अप्रैल महीने में 16 दिन के भीतर ही कोरोना केस में बेतहाशा वृद्धि दर्ज हुई है। इस वजह से कोरोना पॉजिटिविटी रेट बढ़ा है, जबकि कोरोना रिकवरी रेट में कमी आई है। इसके साथ ही कोरोना मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। बीते 16 दिनों के आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे हैं। हालात किस ओर बढ़ रहे हैं यह किसी से छिपा नहीं है।

अप्रैल में 16 दिन के आंकड़े

  • कोविड केस  10 हजार 590
  • कोविड मौतें 120
  • ठीक होने वाले 5 हजार 710
  • कोविड टेस्ट हुए 106671

अब इससे भी गंभीर विषय एक और है। दरअसल मंडी जिला में दो मौतें बीते रोज हुईं, लेकिन चिंताजनक बात यह थी कि दोनों ही मामलों में मौत के बाद यह बात पता चला कि व्यक्ति कोरोना संक्रमित थे। परेशानी इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक दोनों ही व्यक्तियों की मौत घर पर हुई है।

ऐसे में साफ है कि लोग टेस्ट नहीं करवा रहे और सरकार ने भी अपनी टेस्टिंग क्षमता में ज्यादा इजाफा नहीं किया है। बीते साल भी ऐसे ही मामले सामने आए थे, जहां पता चला था कि मरीजों की स्थिति काफी ज्यादा बिगड़ने पर वो अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन ताजा मामले में तो व्यक्तियों को यह भी पता नहीं था कि वो कोरोना संक्रमित हैं। यह हालात रहते हैं तो हम भी दिल्ली और महाराष्ट्र की तरह कोरोना हॉटस्पॉट बन सकते हैं। इसलिए अभी से सावधानियां ज्यादा जरूरी है।

 

दुआ करो कि हिमाचल के ‘ठेठ सराजी’ सीएम को गुस्सा आ जाए

सुरेश चम्बयाल।। जयराम ठाकुर पर अक्सर फ़ैसले न ले पाने वाले ‘‘अक्षम’’ और कमज़ोर मुख्यमंत्री होने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, उनके समर्थकों और प्रशंसकों के बीच जयराम की छवि एक नेकदिल और भद्र इंसान की है। प्रदेश की जनता… जयराम ठाकुर को इन्हीं दो छवियों के बीच तौलती रही है। मगर मंडी ज़िले के द्रंघ में जयराम ठाकुर ने जो कहा, उससे ये धारणा और पुख़्ता हो गई कि जयराम ठाकुर न सिर्फ एक ‘‘अक्षम’’ मुख्यमंत्री हैं बल्कि क़िस्मत से मिली इस पोस्ट के साथ वो न्याय नहीं कर पा रहे और न ही जनता के प्रति उन्हें अपनी कोई जवाबदेही लगती है।

भ्रष्टाचार मौजूदा दौर का सबसे बड़ा मुद्दा है। इतना बड़ा मुद्दा कि बीते दशक पर नजर दौड़ाएं तो केंद्र की यूपीए सरकार 10 वर्ष राज करने के बाद इस मुद्दे की ऐसी चपेट में आई कि कांग्रेस 44 सीटों तक सिमटकर रह गई। भ्रष्टाचार, खासकर राजनीतिक भ्रष्टाचार के मामलों में अधिकांश तौर पर कोई ख़ास कारवाई न होने और लंबे कानूनी केसों के बाद भी कुछ न निकलने से जनता परेशान हो चुकी थी। इसी से सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के लोकपाल आंदोलन की नींव पड़ी थी। ऐसा आधार कि आम जनता भी इस मुद्दे पर सड़कों पर निकल आई। युवा वर्ग ने ख़ासतौर पर इसमें बढ़-चढ़कर भाग लिया। सत्ता परिवर्तन हुए और आम आदमी जैसी पार्टी का उदय हुआ।

इस आंदोलन और सिस्टम में इससे उपजे आक्रोश का सबसे अधिक फायदा अगर किसी को देश में हुआ तो वो राजनातिक रूप से भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री मोदी को हुआ। भ्रष्टाचार पर नरम रहने के कारण कांग्रेस की छवि देश के गली मोहल्ले तक खराब हुई और भाजपा मजबूत होती चली गई।

देश की जनता बेसब्री से यह इंतज़ार करती रही कि बड़ी मछलियां पकड़ी जाएंगी और उनके कर्मो का भुगतान होगा। पर कुछ नहीं हुआ। क्या सबूत नहीं मिले? क्या जांच नहीं हुई? राष्ट्रीय स्तर पर इन प्रश्नों के जबाब तो नहीं मिल पाए परन्तु द्रंग की सभा मे कम से कम प्रदेश स्तर पर इसका जबाब मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने दे दिया। उन्होंने बड़े गर्व के साथ प्रदेश की जनता को भरे मंच से बताया-
हिमाचल में पिछली कांग्रेस सरकार में जमकर भ्रष्टाचार हुआ, कांग्रेस के नेता इसमें सम्मिलित रहे और उनके पास इसके पूरे सबूत भी है। जयराम ठाकुर ने यह भी कहा कि उन्हें गुस्सा न दिलाया जाए नहीं तो वो कार्रवाई करने पर विवश हो जाएंगे।

इस बयान के बाद जयराम ठाकुर को जनता किस अलंकार से सुशोभित करे? नेक भद्र पुरुष या ‘‘अक्षम’’ मुख्यमंत्री? नेक या भद्र इसलिए कि ये भ्रष्टाचारियों पर दया दिखा रहे हैं? यह कैसी भद्रता हुई कि ग़रीब हिमाचल के हितों पर डाका डाला गया, उसके सबूत भी हैं, मुख्यमंत्री को पता भी है कि किसके ख़िलाफ़ सबूत हैं लेकिन कहा जा रहा है कि ग़ुस्सा न दिलाओ, वरना कार्रवाई होगी।
अब आप सोचिए, जहां का मुख्यमंत्री ऐसा ‘‘अक्षम’’ होगा, जिसकी नीति भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को लेकर इतनी नरम होगी, उस राज्य में कितनी लूट अभी भी चल रही होगी, ये बात कल्पनाओं से परे है।

जिस पार्टी की सरकार जनता के बीच एक चार्जशीट का पुलिंदा फैलाकर सत्ता में आई, उसपर साढ़े तीन वर्ष से एक कार्रवाई नहीं हुई। और उस पार्टी का मुख्यमंत्री भरी जनसभा में आक्रामक होकर कहता है-
मुझे गुस्सा न दिलाओ मेरे पास सारे सबूत हैं कि किसने प्रदेश को लूटा, किसने गरीबों के हक पर डाका डाला।
उस प्रदेश का वासी अपने आप को किस स्थिति में पा रहा होगा और सरकार को किस स्तर पर जवाबदेह पा रही होगा, यह चिंतनीय विषय है।

आखिर क्या मजबूरी है कि सबूत भी हैं पर कार्रवाई नहीं होगी? सिर्फ मंच से धमकियां दी जाएंगी?

इस तरह की धमकियां वास्तव में समझौते की भाषा है कि तुम्हारी करतूतों पर मैं चुप रहूंगा, तुम मेरे मामले में चुप रहना।

क्या भ्रष्टाचार और लूट सिर्फ कांग्रेस-भाजपा के बीच की बात है कि एक चुप हो जाए तो दूसरे को शह मिल जाती है गलत करने की?
क्या जनता का कोई रोल, कोई अहमियत नहीं?

क्या जनता के लिए यह जानना जरूरी नहीं कि आज तक हुए भ्रष्टाचार पर क्या कार्रवाइयां हुई हैं?

जनता आखिर कब तक मुख्यमंत्री के गुस्से का इंतज़ार करे कि कब उन्हें गुस्सा आए, सबूतों की पोटली खोलें और जांस एजेंसियों को जगाए और इस प्रदेश को लूटने वालों पर कार्रवाई होती दिखे?
फैसले लेने में ‘‘अक्षम’’ सिद्ध हो रहे मुख्यमंत्री को अपने कार्यकाल में चर्चाओं में आए कथित स्वास्थ्य घोटाले, कोरोना काल में खरीद में हुई कथित गड़बड़ियों और प्रदेश में हो रहे पक्षपातपूर्ण विकास पर तो गुस्सा आता ही नहीं होगा? या आने से रहा क्योंकि यहां तो कोई गुस्सा दिलवाने वाला भी नहीं।

प्रदेश में लूट हुई, ऐसा भी कहते हैं और इस बात का दंभ भी दिखाते हैं कि सबूतों की पोटली अपने पास रखकर कार्रवाई नहीं कर रहे।

प्रदेश का शीर्ष नेतृतव नेक, भद्र, ईमानदार या ‘‘अक्षम’’ है; यह फैसला जनता खुद करे। यह कैसी ईमानदारी कि अपनी मातृभूमि और उससे जुड़ी जनता के हितों पर डाके डले हैं और आपका खून नहीं खौलता, गुस्सा नहीं आता कि कार्रवाई की जरूरत महसूस हो।
प्रदेश का इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा?

वहां भ्रष्टाचार करने पर क्या डर होगा जिसका मुखिया भरी सभा मे ऐसी बातें कहकर अपने आप और अपनी महानता को जस्टिफाई करता हो।

(ये लेखक के निजी विचार हैं)