‘अरबपति’ विधायक ने पहले पटका था मास्क, अब जोड़े हाथ

मंडी।। मंडी जिले के जोगिंदर नगर से निर्दलीय प्रकाश राणा ने कहा है कि देश के अधिकांश न्यूज चनल और अखबार सनसनी फैलाकर डरा रहे हैं इसलिए उनसे दूरी बनाकर रखें। पिछले चुनावों में बीजेपी के दिग्गज नेता गुलाब सिंह ठाकुर को हराने वाले प्रकाश राणा ने पिछले दिनों मास्क पटककर एलान किया था कि कोरोना खत्म हो गया है।

मगर अब अरबपति विधायक के नाम से चर्चित प्रकाश राणा ने अपने आधिकारिक फेसबुक ग्रुप पर पोस्ट डालकर लोगों से अपील की है कि कोविड को हल्के में न लें। वह लिखते हैं, “आप सभी से मेरा हाथ जोड़कर निवेदन है कि कोविड को हल्के में न लें। इस से डरने या निराश होने की आवश्यकता नहीं है लेकिन लापरवाही भी न करें। नियमों का पालन करें, मास्क पहनें, केवल जरुरी होने पर ही घर से बाहर निकलें ”

उन्होंने आगे लिखा है, “मैं आप से आग्रह इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मैंने स्वयं, अपने मित्रों और नाते – रिश्तेदारों में से कई लोगों को इस संक्रमण से जूझते हुए देखा है और दुर्भाग्य से उनमें से कुछ लोगों को हमने खो भी दिया है। उनमें केवल बूढ़े या बीमार लोग नहीं, बल्कि कई युवा और स्वस्थ लोग भी थे। मैं नहीं चाहता कि आपको या आपके परिवारजनों को वैसे कष्ट और शोक का सामना करना पड़े।”

टीका लगाने की अपील करने के साथ ही उन्होंने टीवी और अखबारों से दूरी बनाने की भी अपील की है। वह लिखते हैं, “मैंने यह भी देखा है कि भारत के अधिकांश न्यूज चैनल और अखबार केवल सनसनी फैलाने और लोगों को डराने का काम कर रहे हैं। अतः उन से दूरी बना कर रखें।”

आखिर में उन्होंने लिखा है- दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी। मगर कोरोना काल में जनसभाएं करने में उन्होंने कोई कमी नहीं रखी। अपने करीबी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर को अपने चुनाव क्षेत्र में बुलाकर कई कार्यक्रम किए जिनमें न दो गज की दूरी का पालन किया गया और न ही मास्क की जरूरत पर जोर दिया गया।

प्रकाश राणा के पेज पर पोस्ट

सैलरी ना मिलने पर सोशल मीडिया पर वायरल हुई HRTC कंडक्टर की मार्मिक कविता

मंडी। इनसान सरकारी नौकरी क्यों करता है ताकि उसकी जॉब सिक्योर हो और समय पर हर महीने पहली तारीख से पहले उसे तनख्वाह मिल जाए। हालांकि हिमाचल पथ परिवहन निगम यानि एचआरटीसी में इसका ठीक उल्टा होता है। यहां काम तो लिया जाता है पर समय से कर्मचारियों को उनकी तनख्वाह मिल जाए इसकी गारंटी नहीं।

आज अप्रैल महीने की 26 तरीख हो गई है। बहुत से कर्मचारियों को अप्रैल महीने की सैलरी भी तीन-चार दिन में क्रेडिट होने वाली है, लेकिन एचआरटीसी के कर्मचारियों को अभी तक मार्च महीने की तनख्वाह भी नहीं दी गई है। ये मुद्दा कई दिनों से उठ रहा था, लेकिन सोशल मीडिया ने एक बार फिर इसमें एक अहम भूमिक निभाई।

तनख्वाह ना मिलने पर एचआरटीसी सुंदरनगर यूनिट के परिचालक द्वारा लिखी गई कविता सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसमें गद्य-पद्य, छंद कविता के तमाम मानकों में गलती हो सकती है, लेकिन वेतन ना मिलने की टीस बिल्कुल स्टीक है। वायरल हो रहे फोटो के मुताबिक कविता जसवंत सिंह नाम के परिचालक द्वारा लिखी गई है।

परिचालक द्वारा कविता में मां के लिए कुझ बातें लिखी गई हैं, जिसमें घर बुलाने और सैलरी ना आने के दर्ज को कुछ पंक्तियों में समझाया गया है। हालांकि सरकार ने शिक्षकों और शिक्षक विभाग के कर्मचारियों पर तो मीडिया में सरकार की नीति विरोधी बयान देने पर पाबंदी लगा दी है, लेकिन यहां एचआरटीसी के परिचालक ने अपना दर्द बयान करने का पुराना और मार्मिक तरीखा खोज लिया।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कविता

आपको बता दें कि यह पहला मौका नहीं जब एचआरटीसी कर्मचारियों को सैलरी के लिए इतना इंतजार करना पड़ा हो। अकसर एचआरटीसी कर्मचारियों और पेंशनर्स को तनख्वाह के लिए लंबा समय तक इंतजार करना पड़ता है। सरकार और विशेषकर परिवहन मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर इस मुद्दे कितना गंभीर हैं इसका अंदाजा आप नीचे दिए गए लिंक पर उनके जवाब से लगा सकते हैं। यह वीडियो 18 फरवरी कहा है। आपको बता दें कि जनवरी महीने में भी एचआरटीसी कर्मचारियों की तनख्वाह फरवरी महीने के अंत में आई थी।

क्लिक सुनें क्या कहा था उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर ने (टाइम 8:30 मिनट के बाद)

सवाल उठे तो हिमाचल सरकार ने गायब कर दिया गंभीर मरीजों वाला कॉलम

परिजनों से नशे के लिए पैसा न मिलने पर सनकी युवक ने की अजीब हरकत

पांवटा साहिब।। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में कथित तौर पर नशे के आदी एक शख्स ने पैसे न मिलने पर खुद को चोट पहुंचा ली। माना जा रहा है कि युवक ने खुदकुशी की कोशिश की है क्योंकि उसने किसी तेज धार वाली चीज से अपनी नसों को काटने की कोशिश की थी।

शनिवार देर रात को इस युवक ने यह कदम उठाया। बताया जा रहा है कि यह युवक स्मैक का नशा करता है और इसीलिए परिजनों से पैसे मांग रहा था। जब पैसे नहीं मिले तो उसने अपनी नसों को काटने की कोशिश की। युवक लहूलुहान हो गया।

घबराए हुए परिजनों ने आननफानन में उसे सिविल अस्पताल पांवटा साहिब पहुंचाया जहां डॉक्टरों ने इलाज किया। अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुधी गुप्ता ने पत्रकारों को बताया कि युवक को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया।

पीएम मोदी के फैसले से देश में दूर होगी ऑक्सीजन की कमी: धूमल

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले से देश में ऑक्सीजन की कमी दूर होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देश में 551 नए ऑक्सीजन प्लांट लगाने की घोषणा को लेकर धूमल ने यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने जल्द ऑक्सीजन उत्पादन करने का भरोसा देकर देश की जनता को कोरोना की दूसरी लहर से लड़ने के लिए हौसला दिया है और इसके लिए पीएम केयर फंड से बजट का भी प्रावधान किया है।”

पूर्व सीएम ने कहा कि देश को महामारी से लडऩे के लिए पॉजिटिव सोच रखनी होगी तथा विपक्ष को भी नेगेटिविटी फैलाने की बजाय कोरोना की दूसरी लहर से जनमानस को सुरक्षित बचाने के लिए सरकार के साथ प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर बेहद खरतनाक है, इसे कोई भी व्यक्ति इसे हल्के में न लें तथा जरा भी लापरवाही न बरतें।

प्रेम कुमार धूमल ने अपील की कि आजकल शादियों का सीजन शुरू हुआ है और जिन घरों में शादी समारोह है वे इन समारोहों को जरूर करें लेकिन कोविड-19 की गाइडलाइन को जरूर फॉलो करें। उन्होंने लोगों से कहा कि वे पिछले साल की तरह पीएम केयर फंड में अपना योगदान जरूर दें ताकि किसी की जान बचाई जा सके। उन्होंने युवाओं, महिला मंडलों व भाजपा कार्यकर्ताओं से भी अपील की है कि कोरोना मरीजों व कंटेनमैंट जोन में कोरोना गाइडलाइन के अनुसार सभी सुविधाएं उपलब्ध हों।

हिमाचल आना है तो टेस्ट और क्वॉरन्टीन को लेकर नए नियम लागू

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में कोरोना के बढ़ते मामलों पर काबू पाने के लिए राज्य सरकार ने कुछ नई सख्तियां लागू की हैं। इसके तहत चार जिलों में नाइट कर्फ्यू लागू करने का फैसला किया गया है। कांगड़ा, ऊना, सोलन और सिरमौर में 27 अप्रैल आधी रात से 10 मई तक रात दस बजे से सुबह पांच बजे तक कर्फ्यू रहेगा।

नेगेटिव रिपोर्ट जरूरी
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हुई हाई लेवल मीटिंग में यह फैसला भी किया गाय कि प्रदेश में आने वाले लोगों के लिए 72 घंटों के अंदर जारी कोरोना के RT-PCR टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट रखना जरूरी है।

रिपोर्ट न हुई तो…
साथ ही यह भी फैसला लिया गया है कि जिन लोगों के पास यह रिपोर्ट नहीं होगी, उन्हें 14 दिनों तक अपने घर या क्वॉरन्टीन सेंटर पर क्वॉरन्टीन रहना होगा। हालांकि इन लोगों को सात दिन के बाद कोरोना का टेस्ट करवाने का विकल्प दिया जाएगा। अगर रिपोर्ट नेगेटिव आती है तो उनका क्वॉरन्टीन खत्म हो जाएगा। अगर वे पॉजिटिव आते हैं तो संक्रमितों के लिए पहले से तय प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा।

ग्राम पंचायतों को शक्तियां
इसके साथ ही ग्राम पंचायतें और शहरी निकायों को कोरोना के नियमों का पालन करवाने की शक्तियां दी गई हैं ताकि अगर कोई शख्स क्वॉरन्टीन या कोरोना संबंधित नियमों को तोड़ें तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

 

सवाल उठे तो हिमाचल सरकार ने गायब कर दिया गंभीर मरीजों वाला कॉलम

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर दिन जारी किए जाने वाले कोरोना संक्रमण के आंकड़ों को लेकर गड़बड़ देखने को मिल रही है। हर शाम को जारी हुए वाले मीडिया बुलेटिन में कोरोना संक्रमितों की संख्या, ठीक होने वाले लोगों की संख्या, एक्टिव केसों और गंभीर मरीजों और वेंटिलेटर पर रखे मरीजों के कॉलम वाला एक टेबल जारी किया जाता था।

जब हिमाचल प्रदेश में हर रोज 10-15 मौतें हर रोज कोरोना संक्रमितों की हो रही थीं, तब भी हर रोज इस बुलेटिन में गंभीर मरीजों और वेंटिलेटर पर रखे मरीजों की संख्या के आगे जीरो लिखा रहता था। ऐसे में सवाल उठने लगे थे कि जब हर रोज यह संख्या जीरो है तो वे कौन से लोग हैं जिनकी मौत हो जा रही थी।

सवाल उठाए जाने लगे कि विभाग या तो किसी तरह आंकड़ों को छिपा रहा है या फिर डेटा देने में लापरवाही बरती जा रही है। ‘खबरनाउ’ नाम के पोर्टल ने शनिवार को ही इस संबंध में एक रिपोर्ट की थी। लेकिन जैसे ही यह मामला उठा, सरकार ने मीडिया बुलेटिन से ये दोनों कॉलम ही गायब कर दिए। आज जारी टेबल में गंभीर और बेहद गंभीर मरीजों वाला कॉलम ही गायब है।

देखें: 24 अप्रैल तक जारी मीडिया बुलेटिन, जिसमें आखिर में दो कॉलम हैं। एक है- गंभीर मरीजों की संख्या और दूसरा बेहद गंभीर हालत वाले मरीज जो वेंटिलेटर पर रखे गए हैं।

23 अप्रैल तक आखिर में गंभीर मरीजों और वेंटिलेटर पर रखे मरीजों वाला कॉलम रहता था जिसमें संख्या जीरो होती थी।

लेकिन नीचे देखिए, आज रविवार को जारी मीडिया बुलेटिन जिसमें से ये कॉलम ही गायब कर दिए गए हैं। इसकी जगह इसमें बिस्तरों की उपलब्धता वाला कॉलम शामिल किया गया है मगर अधिक जानकारी के लिए nrhmhp.gov.in पर जाने के लिए कहा गया है।

गायब हुए बुलेटिन

गंभीर मामला
इस बात के स्वाभाविक मायने या तो यह निकलते हैं कि गंभीर मरीजों को आईसीयू पर रखा ही नहीं जा रहा या फिर बुलेटिन जारी करते समय सही आंकड़े जारी करने में किसी तरह की कोताही बरती जा रही है। तीसरी वजह यह हो सकती है कि कोरोना की पुष्टि किसी की जान जाने के बाद हुई हो या दिन भर कोई ठीक रहता हो और बुलेटिन जारी करने के तुरंत बाद दम तोड़ देता हो। लेकिन हर मामले में ऐसा होता हो, यह यकीन करना मुश्किल है। इन सवालों के जवाब देने के बजाय अब इन कॉलमों को ही गायब कर दिया गया है।

इस संबंध में हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग का कोई भी पक्ष सार्वजनिक नहीं हुआ है। जैसे ही सरकार की ओर से इसमें कुछ जवाब आएगा, इस खबर को अपडेट कर दिया जाएगा।

जानें, क्या RT-PCR की नेगेटिव रिपोर्ट न होने पर हिमाचल में एंट्री नहीं मिलेगी?

पेड़ों के अवैध कटान पर 34 लाख भरें वन विभाग के अधिकारी: हाई कोर्ट

शिमला।। शिमला की कोटी फॉरेस्ट रेंज कोटी में 416 पेड़ों को अवैध ढंग से काटने पर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने वन विभाग के अधिकारियों से 34 लाख 68 हजार 233 रुपये की वसूली करने का आदेश दिया है। साथ ही इनके सर्विस रिकॉर्ड में एंट्री करने के लिए कहा गया है। प्रधान वन सचिव को दिए आदेशों में कहा गया है कि यह रकम दो वन अरण्यपालों, दो मंडल वन अधिकारियों, तीन सहायक वन अरण्यपालों, दो रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर्स, छह ब्लॉक ऑफिसर्स और एक गार्ड से वसूली जाए।

जिस दौरान कोटी रेंज में 416 पेड़ों का अवैध कटान हुआ था, उस दौरान ये सभी कर्मचारी भलावाग बीट, कोटी फारेस्ट ब्लॉक, कोटी फारेस्ट रेंज, शिमला फारेस्ट डिवीजन और शिमला फॉरेस्ट सर्किल में तैनात थे। यह कटान साल 2015 से 2018 के बीच हुआ था।

मुख्य न्यायाधीश एल नारायण स्वामी और न्यायमूर्ति अनूप चिटकारा की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करने के बाद यह आदेश पारित किए। हालांकि, कोर्ट ने इन अधिकारियों को 27 मई को अदालत में उपस्थित होने का अवसर देते हुए कहा कि ये कर्मी यह रकम या फिर उनके सर्विस रिकॉर्ड में उनके काम में हुई चूक का एंट्री होने से पहले कोर्ट में अपना पक्ष रख सकते हैं।

अदालत ने सभी पक्षकारों की दलीलों के सुनने के बाद कहा कि राज्य सरकार ने इस मामले में बेशक काटे पेड़ों की लकड़ी की लागत वसूली होगी लेकिन पेड़ों के मूल्य का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता है। पेड़ न केवल ऑक्सीजन उत्पादक हैं बल्कि डी कार्बोनाइजर भी हैं। कोर्ट ने कहा कि जो अधिकारी 100 साल की उम्र के पेड़ों के इस नुकसान के लिए जिम्मेदार हैं उन्हें दंडित करना होगा। पेड़ों की इस तरह की अवैध कटाई की भरपाई किसी भी तरीके से नहीं की जा सकती है।

पूर्व मंत्री-विधायकों की पेंशन से भी कटौती करे सरकार: जीएस बाली

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जीएस बाली ने राज्य सरकार से अपील की है कि अगर कोरोना काल में फंड की कमी पड़ रही है तो सरकार को पूर्व मंत्रियों और पूर्व विधायकों को मिलने वाली पेंशन से भी कटौती करनी चाहिए। जीएस बाली ने धर्मशाला के पूर्व कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा की ओर से कोरोना काल में अपना घर क्वॉरन्टीन कम कोविड केयर सेंटर बनाने की पेशकश का भी स्वागत किया।

पूर्व मंत्री ने फेसबुक पेज पर डाले पोस्ट में यह भी लिखा है कि उनके परिवार द्वारा संचालित फोर्टिंस कांगड़ा अस्पताल को जरूरत पड़ने पर सरकार कोरोना के मरीजों के लिए इस्तेमाल कर सकती है और इसके लिए सरकार को लिखित जानकारी दे दी गई है। उन्होंने लिखा  है, “इस संबंध में अस्पताल की बिल्डिंग में एंट्री और अलग वॉर्ड बनाने में कुछ दिक्कतें बताई गई हैं मगर आपात स्थिति में इसका इस्तेमाल किया जाता है तो हम तैयार हैं।”

इससे आगे का सुझाव देते हुए उन्होंने लिखा, “अगर प्रशासन सुधीर शर्मा की पेशकश पर विचार करता है तो उनके परिसर में कोविड सेंटर चलाने के लिए और गंभीर रोगियों को रखने के लिए बिस्तर, ऑक्सीजन सिलेंडर और नर्सिंग समेत हेल्थ स्टाफ की निशुक्ल सुविधा अपने संस्थान फोर्टिस की ओर से दी जाएगी।”
हालांकि, हाल ही में कांगड़ा के डीसी राकेश कुमार प्रजापति ने सुधीर शर्मा की पेशकश को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में इन हिमाचल से कहा था कि फिलहाल जिले के अस्पतालों में ऐसी कोई कमी नहीं है और किसी के निजी परिसर पर कोरोना के मरीजों को रखने की व्यवस्था करना आसान नहीं है।

नोएडा से हिमाचल सुसाइड करने आया युवक, बचाने वाले हुए क्वॉरन्टीन

शिमला।। खुदकुशी करने नोएडा से हिमाचल के किन्नौर पहुंचे एक युवक को बचा लिया गया मगर उसे बचाने वालों को क्वॉरन्टीन करना पड़ा। दरअसल जांच में पाया गया कि यह युवक कोरोना संक्रमित भी था।

यह युवक किन्नौर के कथित सुसाइड पॉइंट रोघी से कूद गया। उसने इंटरनेट पर सर्च करने के बाद आत्महत्या के लिए यह जगह चुनी थी। कूदने के बाद इसकी मौत तो नहीं हुई मगर घायल हो गया।

स्थानीय लोगों और पुलिस ने इसे 500 फुट गहरी खाई से निकाला और इलाज के लिए अस्पताल ले गए। सामान्य प्रोटोकॉल के तहत जब युवक की कोरोना के लिए जांच की गई तो वह पॉजिटिव आई। इसके बाद बचाव करने वाले लोगों को क्वॉरन्टीन कर दिया गया।

बताया जा रहा है कि यह युवक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता था मगर सफलता नहीं मिलने से तनाव में था। इसने खुदकुशी करने का फैसला ले लिया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

EXCLUSIVE: भारद्वाज ने दी गलत जानकारी, पिछले हेलिकॉप्टर से महंगा है नया चॉपर

शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार के नए हेलिकॉप्टर को लेकर उठे विवाद में नया मोड़ आ गया है। इस चॉपर को लेकर उठे सवालों पर सफाई देते हुए शहरी विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज ने दावा किया था कि जो हेलिकॉप्टर आया है, उसकी सीटें ज्यादा हैं मगर किराये की दर पहले वाली ही हैं। मगर अब साफ हुआ है कि भारद्वाज का यह दावा गलत है। यही नहीं, इसका औसत न्यूनतम किराया पांच लाख 10 हजार नहीं बल्कि 6 लाख रुपये प्रति घंटा होगा। वह भी तब, जब निश्चित अवधि तक ही हेलिकॉप्टर की सेवाएं ली जाएंगी।

क्या है मामला
अब तक हिमाचल सरकार पवनहंस कंपनी का हेलिकॉप्टर इस्तेमाल करती रही है जो पुराना होने के साथ-साथ अक्सर खराब भी रहता था। इसीलिए हिमाचल सरकार ने 2018 में ही विकल्प तलाशना शुरू कर दिया था। टेंडर जारी होने के बाद 2019 में स्काई वन कंपनी के साथ करार भी हो गया था जिसे जनवरी 2020 में हेलिकॉप्टर देना था। मगर कंपनी ने कहा कि वह हेलिकॉप्टर देने की स्थिति में नहीं है और 1 अप्रैल 2020 से सेवाएं देगी। मगर उसके बावजूद कंपनी हेलिकॉप्टर डिलीवर नहीं कर पाई और अब वह इस साल ऐसा कर रही है।

हेलिकॉप्टर पहले भी इस्तेमाल होता रहा है लेकिन इस बार विवाद इसलिए खड़ा हुआ क्योंकि इसका किराया पहले से ज्यादा है और सीटें भी ज्यादा हैं। ऊपर से इसकी डिलीवरी ऐसे समय हो रही है, जब प्रदेश कोरोना संकट में है और बेबस दिख रही सरकार को कर्मचारियों और पेंशन लेने वालों का पैसा काटना पड़ रहा है। लेकिन मामला तब और भी गंभीर हो गया जब सरकार का बचाव करने आए सुरेश भारद्वाज ने गलत जानकारी रख दी। उन्होंने कहा-

पुराना हेलिकॉप्टर भी 5.10 लाख रुपये प्रति घंटा मूल्य पर उड़ान भरता था और अब स्काई वन कंपनी का लीज पर लिया गया हेलिकॉप्टर भी 5.10 लाख रुपये प्रति घंटा से उड़ान भरेगा।

-सुरेश भारद्वाज, शहरी विकास मंत्री, हिमाचल प्रदेश

पहले की दर- 3 लाख 90 हजार रुपये घंटा
लेकिन उनके द्वारा दी गई जानकारी बहुत गलत है। पवन हंस कंपनी का जो हेलिकॉप्टर सरकार इस्तेमाल कर रही है, उसके लिए सरकार नई कंपनी से करार करने से पहले तक प्रतिघंटा तीन लाख 30 हजार का भुगतान कर रही थी। 18 फीसदी टैक्स के साथ पवनहंस को सरकार प्रतिघंटा तीन लाख 90 हजार के करीब भुगतान करना पड़ रहा था।

नई दर- लगभग 6 लाख रुपये प्रति घंटा
अब स्काईवन कंपनी से लीज पर लिए जा रहे चॉपर को प्रतिमाह 40 घंटे का न्यूनतम भुगतान करना होगा। इस कारण हिमाचल सरकार को स्काई वन एयरवेज को साल के 480 घंटे के लिए 28 करोड़ 88 लाख रुपये देने ही पड़ेंगे। ध्यान रहे, प्रतिमाह 40 घंटे से ज्यादा सेवा लेने पर कंपनी को छह लाख प्रति घंटा की दर से अतिरिक्त भुगतान भी करना पड़ेगा।

इस संबंध में विधानसभा में 26 फरवरी 2020 को नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने सवाल पूछा था, उसमें मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की ओर से क्या जानकारी दी गई थी, आप नीचे पढ़ सकते हैं-

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में दिए गए प्रश्न का उत्तर

इस सवाल के जवाब में यह भी बताया गया कि केंद्र सरकार सिर्फ 10 रूटों पर आवश्यक कार्यों (रेस्क्यू आदि) के लिए भरी जाने वाली उड़ानों पर ही 75 फीसदी उड़ानें देंगी। जनजातीय क्षेत्रों के ये रूट हैं- चंबा- किल्लाड- चंबा, भुंतर-किल्लाड- भुंतर, पालमपुर- बड़ा-भंगाल-पालमपुर, भुंतर-उदयपुर-भुंतर, भुंतर-स्टींगरी-भुंतर,भुंतर-तांदी-भुंतर, रामपुर-काजा-रामपुर, रामपुर-पूह-रामपुर, रामपुर-रिकांगपिओ-रामपुर और शिमला-डाेडरा कवार और शिमला।

अफसरों पर कार्रवाई की तैयारी
इस बीच, ऐसी खबर आई है कि इस मामले में ‘सूचना लीक’ करने को लेकर जीएडी के अफसरों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। आरोप है कि एक अधिकारी ने कांग्रेस के एक नेता तक ऐसे दस्तावेज पहुंचाए थे। अखबार अमर उजाला के मुताबिक, सीएम कार्यालय ने इस बात पर भी आपत्ति जताई है कि मंत्री को भी यह गलत जानकारी दी गई थी कि हेलिकॉप्टर की लीज का रेट वही है जो साल 2013 में था।

इससे पता चलता है कि हाल ही में सुरेश भारद्वाज ने जो दावा किया था, वह पूरी तरह गलत था। यानी स्काई वन कंपनी से किए गए करार के तहत जो पांच लाख 10 हजार रुपये प्रति घंटे का किराया तय किया गया है, वह पिछली कंपनी से किए गए करार से अधिक है।