जानें, क्यों और कैसे मनाया जाता है सैर या सायर का त्योहार

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हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में आज सैर या सायर (पहाड़ी ऐक्सेंट में) का पर्व मनाया जा रहा है। इसे हिंदू कैलेंडर के अनुसार आश्विन माह के पहले प्रविष्टे यानी पहली तारीख को मनाया जाता है जिसे हिमाचल में सगरांद (संक्रांति) कहा जाता है। वैसे अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से हर साल यह दिन सितंबर महीने में पड़ता है। पहले तो यह एक हफ्ते तक मनाया जाता था और पर्व के बजाय एक उत्सव होता था। मगर आज समय किसके पास है? इसलिए एक दिन में सिमटकर रह गया है सैर का त्योहार।

क्यों मनाई जाती है सैर
पहले के दौर में न तो टीकाकरण होता था न ही बीमारियों के इलाज के लिए डॉक्टर। बरसात के दिनों में पीने के लिए स्वच्छ पानी भी उपलब्ध नहीं होता था। ऐसे में बरसात के दिनों में कई संक्रामक बीमारियां फैल जाया करती थीं जिससे इंसानों और पशुओं को भी भारी नुकसान होता था।

ऊपर से पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश कभी-कभी इतनी तबाही मचाती थी कि फसलें भी बर्बाद हो जाती थीं। कभी बिजली गिर जाया करती थी। ये वो दिन होते थे जब सावन महीने में सभी महत्वपूर्ण कार्य और यात्राएं तक रोक दी जाती थीं। लोग घरों में बंद रहते और बरसात के बीत जाने का इंतजार करते।

सैर को दरअसल कुछ इलाकों में डैण (दुरात्मा) माना जाता था और लोग इसका नाम तक नहीं लेते थे। उनका मानना था कि बरसात में होने वाले नुकसान के लिए वही उत्तरदायी है। फिर जैसे की भारी बारिश का दौर खत्म होता, लोग इसे उत्सव की तरह मनाते। यह एक तरह का जश्न था कि बरसात बीत गई और हम सुरक्षित रहे। फिर सैर वाले दिन लोग दरअसल प्रकृति का शुक्रिया अदा करते थे कि चलो, अनहोनी नहीं हुई।

बची हुई फसलों का भोग
इसीलिए बरसात खत्म होने पर सैर के दिन सुबह ही ताजा फसल के आटे से रोट बनाए जाते, साथ ही देवताओं को नई फसलों और फलों वगैरह का भोग लगाया जाता। इनमें धान की बाली, भुट्टा (गुल्लू), खट्टा (बड़ी नीबू), ककड़ी वगैरह की भी पूजा होती। आज बरसात में उतना नुकसान न होता लेकिन त्योहार के रूप में सैर मनाई जाती है और परंपराओं को निभाते हुए ऊपर बताई सभी चीज़ों के साथ सैर का पूजन होता है। इस पर्व में अखरोट का विशेष महत्व है क्योंकि इस महीने तक अखरोट तैयार हो जाते हैं और उनकी छाल सूख चुकी होती है। तो पहले ही अखरोट उतारकर सुखाकर रख लिए जाते हैं।

 

सैर पर निकलना
सैर का हिंदी में अर्थ देखें तो इसका अर्थ होता है घूमना-फिरना। तो इस पर्व के पीछे सैर नाम इसलिए पड़ा हो सकता है क्योंकि पहले बारिश के कारण लंबी दूरियों पर जाने से बचने वाले लोग इसी दिन से यात्राएं आदि शुरू करते थे और बुजुर्ग आदि सगे संबंधियों से मुलाकात करने घर से निकलते थे। काले महीने के नाम से पहचाने जाने वाले भाद्रपद महीने में मायके गईं नई दुल्हनें भी सैर के साथ ही अपने ससुराल लौटती हैं। फिर पहले एक हफ्ते तर रिश्तेदारों के यहां आना-जाना लगा रहता था। फोन उस समय होते नहीं थे तो कुशल-मंगल जानने के लिए प्रोण-धमकी ही एक तरीका था। इस तरह से यह वास्तविक सैर थी यानी संभवत: इसीलिए इसका नाम सैर पड़ गया। वैसे संयोग ही कहें कि पुर्तगाली भाषा में Sair (उच्चारण- सएर) का इस्तेमाल बाहर निकलने के संदर्भ में होता है।

राल की भेंट
आज भी वही पुरानी परंपराएं जारी है और लोग सैर के दिन एक-दूसरे के यहां जाकर खाने-पीने की चीजों का आदान-प्रदान करते हैं। सैर के दिन सैर पूजन की सामग्री का पानी में विसर्जन करने के बाद प्रियजनों को राल यानी अखरोट की भेंट दी जाती है। दूब, फूलों और अखरोट को सौभाग्य के प्रतीक के रूप में दिए जाने को राल कहा जाता है। राल देने के बाद अपने से बड़ों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है।

सौभाग्य के प्रतीक के तौर पर दी जाती है राल (राळ)

अखरोट का खेल
पहले खोड़ (अखरोट) से निशाना लगाने का खेल भी खेला जाता था जिसमें लोग गांव या आस-पड़ोस के हर घर में जाकर यह खेल खेलते थे और यह होड़ लगी रहती थी कि कौन ज्यादा अखरोट जीतकर लाता है। निशाना लगाने के लिए मजबूत किस्म का अखरोट इस्तेमाल किया जाता था जिसका आकार बड़ा होता था। इसे भुट्टा कहा जाता था। इसके अलावा मधुमक्खी के छत्ते को पिघलाकर बनाए गए मोम से बना गोला भी भुट्टे के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता था और अगर खेलने वाले सभी लोग राजी हों तो छोटे से गोल पत्थर को भी इस्तेमाल किया जा सकता था। मगर अफसोस, आजकल शायद ही कोई इस खेल को खेलता हो।

कैसे पूजी जाती है सैर
सैर पूजन के लिए सैर से पिछले दिन से ही कुछ इंतज़ाम करने पड़ते हैं क्योंकि अगले दिन सुबह ही पूजा करनी पड़ती है। धान का पौधा, तिल का पौधा, दाड़ू, पेठा, मक्की, ककड़ी, कोठा का पौधा, खट्टा, कचालू का पौधा, पुराना सिक्का आदि जुटाया जाता है। फिर इन्हें आंगन या ओटे में रख दिया जाता है। अगली सुबह इस टोकरी को पूजा वाली जगह लाकर रखा जाता है, गणेश जी की स्थापना होती है और इस पूरी सामग्री की पूजा की जाती है। ठीक उसी तरह से जैसे सामान्य रूप से पूजा की जाती है।

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राखी आज ही उतारी जाती है
इस पूजा के दौरान ही रक्षाबंधन पर कलाई में बांधी गई राखी भी खोली जाती है और टोकरी पर अर्पित की जाती है। यह परंपरा बताती है कि हिमाचल में राखी दरअसल बहनों की ओर से बांधा गया रक्षा सूत्र होता है भाई की सलामती के लिए। न कि बहन इस धागे के बदले अपनी सुरक्षा का वचन मांगती है। यही कारण है कि हिमाचल में बहनों को भी राखी बांधने की परंपरा है।

पूजा के बाद विसर्जन जरूरी
परिवार के सभी सदस्य सैर पूजते हैं और प्रार्थना करते हैं कि हर साल इसी तरह सुखदायी रहना। इसके बाद कुछ इलाकों में सैर की टोकरी को गोशाला में घुमाया जाता है और फिर चलते पानी में प्रवाहित कर दिया जाता है।

पशुओं की भी सैर
इस दिन पशुओं को भी सैर पर ले जाया जाता था। उन्हें गोशालाओं से निकालकर जंगलों में या घासनियों में उन जगहों पर ले जाया जाता था जहां पर बरसात में ताजा घास उग आई होती थी। इस घास को बचाकर इसी दिन के लिए रखा जाता है इसलिए इस नरम घास को सैरू का घास भी कहा जाता है।

तो इस बार भी बरसात अच्छे बरसात निकल गई। इसलिए प्रकृति को शुक्रिया, आपको भी सैर मुबारक हो। आने वाला साल आपके लिए संपन्नता और अच्छा स्वास्थ्य लाए। शुभकामनाएं।

(पहली बार 17 सितंबर 2018 को प्रकाशित इस लेख को अपडेट किया गया है)

मंडी जिले के जोगिंदर नगर के रहने वाले पत्रकार आदर्श राठौर की फेसबुक टाइमलाइन से साभार

डीए की अधिसूचना जारी, 4 लाख कर्मचारियों-पेंशनरों को मिलेगा लाभ

शिमला।। प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को डीए देने की अधिसूचना जारी कर दी है। प्रदेश के करीब चार लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को इसका लाभ मिलेगा। सीएम जयराम ठाकुर ने 15 अगस्त को प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को छह फीसदी महंगाई भत्ता देने का ऐलान किया था। बुधवार को इसकी अधिसूचना जारी हो गई है।

डीए एक जुलाई 2021 से दिया जाएगा। सितंबर महीने की तनख्वाह में कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की किश्त दे दी जाएगी। वहीं, एक जुलाई से 31 अगस्त तक मिलने वाला अतिरिक्त एरियर कर्मचारियों के जीपीएफ खाते में डाला जाएगा। एक अक्तूबर से इस पर ब्याज दिया जाएगा।

अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त प्रबोध सक्सेना ने इस बारे में अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना में साफ किया गया है कि डीए की किस्त 153 प्रतिशत की दर से बढ़ाकर 159 प्रतिशत कर दी है।

वहीं, इस बीच जो कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए हैं और कंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम के तहत आते हैं। उन्हें डीए की किस्त का एरियर उनके खातों में नकदी के रूप में डाला जाएगा। हालांकि निगमों-बोर्डों और अन्य स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों को डीए की यह किस्त उनकी आर्थिक स्थिति के अनुसार दी जाएगी।

प्राइवेट यूनिवर्सिटीज के अयोग्य शिक्षकों की होगी छुट्टी

शिमला।। हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग ने प्रदेश की प्राइवेट यूनिवर्सिटीज से अयोग्य स्टाफ की छुट्टी करने की तैयारी कर ली है। आयोग इसी हफ्ते यूनिवर्सिटी ऑथोरिटीज़ को ऐसे करीब 285 शिक्षकों को हटाने के निर्देश देगा। कई प्राइवेट यूनिवर्सिटीज ने यूजीसी के तय मानकों को दरकिनार कर 35 फीसदी शिक्षकों को नियक्तियां दी हैं।

इसके अलावा शैक्षणिक योग्यता की जानकारी न देने पर 20 प्राइवेट कॉलेजों के प्रिंसिपल और प्रबंधन समितियों को भी आयोग ने तलब किया है। निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग की जांच में प्राइवेट प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में अयोग्य शिक्षक नियुक्त होने का खुलासा हुआ है। प्राइवेट यूनिवर्सिटीज पर यूजीसी के वर्ष 2009 और वर्ष 2016 के नियम पूरा न करने का आरोप है। कई शिक्षक नेट पास नहीं हैं। नेट पास नहीं होने पर विशेष छूट के लिए भी इनकी ओर से कदम नहीं उठाए गए।

आयोग ने इन्हें अयोग्य करार दिया है। साथ ही संबंधित यूनिवर्सिटीज को उन्हें पद से हटाने को कहा है और उनकी जगह जगह नियम पूरा करने वाले शिक्षकों को नियुक्त करने को कहा है।

आयोग ने कुछ महीने पहले सभी प्राइवेट कॉलेजों के प्रिंसिपलों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर दस्तावेज देने को कहा था। अभी तक 20 कॉलेजों ने आयोग को इस बारे में जानकारी नहीं दी है। ऐसे में आयोग ने इन कॉलेजों की प्रबंधन समितियों और प्रिंसिपलों को समन जारी कर जानकारी सहित तलब किया है।

इस बारे आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल सेवानिवृत्त अतुल कौशिक ने बताया कि निजी शिक्षण संस्थानों में गुणात्मक शिक्षा मिले, इसके लिए शिक्षकों का योग्य होना जरूरी है। प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को अयोग्य शिक्षकों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

सब्र रखें विक्रमादित्य सिंह, अभी शोक के दौर से गुज़र रहा परिवार: सीएम

शिमला।। सीएम जयराम ठाकुर ने शिमला ग्रामीण के विधायक विक्रमादित्य सिंह के रातों-रात सीएम बदलने वाले बयान पर पलटवार किया है। सीएम ने कहा कि विक्रमादित्य सिंह बहुत जल्दी में हैं। उनका परिवार अभी शोक के दौर से गुज़र रहा है। उन्हें संयम और सब्र रखकर राजनीतिक दृष्टि से बात करनी चाहिए।

ये सारी बातें सीएम ने मंगलवार को पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कही हैं। सीएम ने कहा कि पार्टी में क्या होगा यह निर्णय पार्टी नेतृत्व द्वारा किया जाएगा। विक्रमादित्य यह निर्णय नहीं करेंगे। सीएम ने बताया कि नई दिल्ली में संगठन का निर्धारित कार्यक्रम है। वह इसी बैठक में हिस्सा लेने दिल्ली आए हैं। सीएम ने यह भी बताया कि यह बैठक आज नहीं, बल्कि 20 दिन पहले तय हुई थी।

वहीं, सीएम ने नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री के बयान पर भी पलटवार किया है। अग्निहोत्री ने कहा था कि उन्होंने सोशल मीडिया में पढ़ा है कि पांच नहीं, छह मुख्यमंत्री बदलने हैं। इसलिए जयराम ठाकुर अपनी कुर्सी बचा लें। सीएम ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि ये सारी बातें बिना सिर-पैर की हैं। इन सारी बातों के कोई अर्थ नहीं हैं।

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने अपनाई नई मूल्यांकन प्रणाली

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने बोर्ड कक्षाओं की मूल्यांकन प्रणाली को बदलने का फैसला किया है। तीसरी, पांचवी, आठवीं और नौवीं से बारहवीं क्लास का मूल्यांकन अब पूरी तरह से बोर्ड द्वारा आयोजित लिखित परीक्षाओं के आधार पर नहीं होगा। बोर्ड के अध्यक्ष एसके सोनी ने इस बात की जानकारी दी है।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के आधार पर बोर्ड की बैठक में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। बैठक में निर्णय लिया गया कि तीसरी, पांचवी और आठवीं क्लास के लिए 50 प्रतिशत अंक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षा के आधार पर और 50 प्रतिशत अंक उनके स्कूलों द्वारा आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर दिए जाएंगे। 50 प्रतिशत में से स्कूल 25 प्रतिशत अंक छात्रों के व्यापक शैक्षणिक मूल्यांकन के आधार पर और 25 प्रतिशत अतिरिक्त पाठयक्रम गतिविधियों के आधार पर देंगे।

उन्होंने बताया कि अतिरिक्त पाठयक्रम गतिविधियों में योग और अन्य खेलों के प्रदर्शन के आधार पर कम से कम चार प्रतिशत अंक दिए जाएंगे। छात्रों को स्थानीय इतिहास और राष्ट्रीय व्यक्तित्वों पर लेख प्रस्तुत करना होगा।

नौवीं से बारहवीं क्लास के लिए 80 प्रतिशत अंक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षाओं के आधार पर और 20 प्रतिशत स्कूलों द्वारा मूल्यांकन के आधार पर दिए जाएंगे। 20 प्रतिशत अंकों में से स्कूल व्यापक शैक्षणिक मूल्यांकन के आधार पर सिर्फ चार प्रतिशत अंक और अतिरिक्त पाठयक्रम गतिविधियों के आधार पर 16 प्रतिशत अंक देंगे। इसके साथ ही बोर्ड ने वार्षिक परीक्षा आयोजित करने के बजाय हर छह महीने में परीक्षा आयोजित करने का प्रस्ताव रखा था।

महिला ने अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में ही दे दिया बच्चे को जन्म

कुल्लू।। कुल्लू जिला के बंजार विधानसभा क्षेत्र के मेल गांव में सड़क संपर्क नहीं होने से एक गर्भवती महिला समय से अस्पताल नहीं पहुंच पाई और सोमवार को उसने रास्ते में ही बच्चे को जन्म दे दिया।

स्थानीय लोगों के अनुसार, गाडापारली पंचायत के अंतर्गत आने वाला गांव निकटतम सड़क से लगभग 8 किमी दूर स्थित है। उन्हें सड़क के किनारे तक पहुंचने और परिवहन सुविधा खोजने के लिए यह दूरी तय करनी पड़ती है।

सोमवार को ग्रामीणों ने बंजार अस्पताल में परिवहन की व्यवस्था करने के लिए सड़क किनारे पहुंचने के लिए एक गर्भवती महिला को अपने कंधों पर ले लिया। हालांकि लंबी दूरी होने के कारण उन्हें सड़क किनारे पहुंचने में घंटों लग गए। देरी के कारण महिला को तेज दर्द से गुजरना पड़ा और आखिरकार उसने सड़क किनारे ही बच्चे को जन्म दिया।

आक्रोशित ग्रामीणों ने कहा कि अब समय आ गया है कि राज्य सरकार परिवहन सुविधाओं के साथ गांव को उचित सड़क संपर्क प्रदान करे। उन्होंने कहा कि किसी क्षेत्र के विकास को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक बुनियादी चीजों में से एक सड़क है और राज्य सरकार को इस संबंध में प्रयास करने चाहिए।

ग्राम पंचायत गाडापारली के उप-प्रधान अजय कुमार ने कहा कि हम राज्य सरकार से इस पंचायत के गांवों को सड़क संपर्क प्रदान करने का आग्रह कर रहे हैं, जो बंजार उपमंडल की एक दूरस्थ पंचायत है। आपात स्थिति में लोगों को अपने परिवार के सदस्यों को अस्पताल ले जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी चिकित्सा देखभाल में देरी के कारण लोगों की जान भी चली जाती है।

उन्होंने यह भी बताया कि सड़क संपर्क के बिना कृषि और बागवानी उत्पादों को दूर के बाजारों में समय पर पहुंचाना आसान नहीं है। इसमें उन्हें दिक्कतें दिक्कत होती है।

हिमाचल विधानसभा को संबोधित करने वाले तीसरे राष्ट्रपति होंगे कोविंद

शिमला।। राज्य के गठन की स्वर्ण जयंती के अवसर पर 17 सितंबर को भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा संबोधित किए जाने वाले विधानसभा के विशेष सत्र में वर्तमान व पूर्व 93 विधायक शामिल होंगे। सुबह 11 बजे विधानसभा को संबोधित करने वाले कोविंद हिमाचल विधानसभा को संबोधित करने वाले तीसरे राष्ट्रपति होंगे।

जानकारी देते हुए विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने बताया कि इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने 2003 और प्रणब मुखर्जी ने 2013 में विधानसभा को संबोधित किया था। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 51 कार्यक्रमों का आयोजन करके 1971 से राज्य की यात्रा को उजागर करने का फैसला किया है, जिनमें कोविड के कारण विलंब हुआ है।

उन्होंने बताया कि जिन्होंने भी पहले मुख्यमंत्री वाई एस परमार के समय से राज्य के विकास में योगदान दिया है, इसके माध्यम से उन सभी के प्रयासों की सराहना करने का विचार है। राष्ट्रपति द्वारा विभिन्न मुख्यमंत्रियों और सरकारों के कार्यकाल के दौरान 50 वर्षों के राज्य के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन और मील के पत्थर वाली एक पुस्तक का भी विमोचन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि राज्य ने स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क नेटवर्क, बिजली उत्पादन, बागवानी, कृषि और अन्य क्षेत्रों में बड़ी प्रगति की है और इस आयोजन का उद्देश्य राज्य के लोगों के उल्लेखनीय योगदान और उपलब्धि को याद करना है। विधानसभा स्टाफ के 93 सदस्यों सहित राष्ट्रपति के करीब आने वाले सभी लोगों का कोविड आरटी-पीसीआर टेस्ट किया जाएगा। परमार ने कहा कि सभी पूर्व और वर्तमान विधायकों का सम्मान किया जाएगा।

बता दें 25 जनवरी 1971 को हिमाचल 18वां राज्य बना था, जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पहले मुख्यमंत्री डॉ वाई एस परमार और राज्य के हजारों लोगों की उपस्थिति में ऐतिहासिक रिज पर हिमाचल प्रदेश को राज्य का दर्जा देने की घोषणा की।

बेटी की तस्वीर सीने से लगाकर रोई माँ, पिता ने नम आंखों से दी श्रद्धांजलि

मंडी।। बेटी की तस्वीर गले से लगाकर मां सिसक रही थी, वहीं पिता ने भी दिल पर पत्थर रखकर नम आंखों से अपनी बेटी को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह दुखदायी दृश्य आज जोगिंद्रनगर में देखने को मिला। गांधी वाटिका में एकत्रित सैकड़ों लोग ज्योति की मौत पर इंसाफ की मांग कर रहे थे।

भीड़ में खड़े भाई दीपक की आंखे भी नम थीं। नम आंखों से भाई अपनी बहन की तस्वीर को टकटकी लगाए देख रहा था। बेटी की फोटो सीने से लगाई माँ बार-बार बेसुध हो रही थी। परिजन मां को संभालने में लगे थे। कोई छाता लेकर खड़ा था, तो कोई बार-बार पानी पिला रहा था। यह दुखदायी दृश्य देख वहाँ मौजूद हर व्यक्ति की आँख से आंसू छलकने को तैयार थे।

पिता ने नम आंखों के साथ लोगों का सहयोग के लिए धन्यवाद किया। कहा कि अभी तक की पुलिस कार्यवाही से वे संतुष्ट है। बोले, अब ये केस सीआईडी को सौंपा गया है। अगर किसी भी तरह की ढील सामने आई तो केस की सीबीआई जांच की मांग करेंगे।

जोगिंद्रनगर के गडूही गांव की 23 वर्षीय ज्योति की मौत पर हर कोई न्याय की मांग कर रहा है। आज जिला परिषद कुशाल भारद्वाज के नेतृत्व में सैकड़ों लोग गांधी वाटिका में न्याय को लेकर एकत्रित हुए थे। ज्योति के परिजन भी इसमें शामिल हुए थे। शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की मांग करते हुए ज्योति को श्रद्धांजलि अर्पित की गई, साथ ही दो मिनट का मौन भी रखा गया। वहीं, परिजनों ने एसपी मंडी शालिनी अग्निहोत्री से भी मुलाकात की।

ज्योति को न्याय दिलाने के लिए आज फिर एकजुट हुए लोग

मंडी।। बहुचर्चित ज्योति मौत मामले में न्याय की मांग करते हुए आज फिर सैकड़ों लोग जोगिंद्रनगर स्थित गांधी वाटिका में एकजुट हुए। हल्की-फुल्की नारेबाज़ी के साथ शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया गया। ज्योति को श्रद्धांजलि दी गई और आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। ग्रामीणों के साथ ज्योति के माता-पिता भी बेटी को श्रद्धांजलि देने के लिए शामिल हुए। इस दौरान बेटी को याद कर माता-पिता की आंखों से आंसू भी छलक पड़े।

जिला परिषद सदस्य कुशाल भारद्वाज ने आज के लिए पहले ही सामूहिक उपवास का कार्यक्रम निर्धारित किया था। लेकिन पिछले कल मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी गई। जिसके बाद कुशाल भारद्वाज ने कार्यक्रम में बदलाव करते हुए सामूहिक उपवास की जगह ज्योति को न्याय दिलाने के लिए शोक प्रताव पारित किया। सभी लोगों ने शोक प्रताव में लिखी मांगों पर अपनी हामी भरी। उसके बाद कुशाल भारद्वाज परिजनों सहित एसपी मंडी शालिनी अग्निहोत्री से मिले।

कुशाल भारद्वाज ने कहा कि हमारे पूर्व निर्धारित कार्यक्रम को रद्द करने के उद्देश्य से एक दिन पहले जांच सीआईडी को सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि फिर भी हम सन्तुष्ट है कि सीआईडी को मामले की जांच सौंपी गई है। उन्होंने मांग की है हर एक पहलू को ध्यान में रखते हुए ज्योति मौत मामले की जांच की जानी चाहिए। केवल आत्महत्या के नज़रिए से ही जांच नहीं होनी चाहिए।

ज्योति के पिता ने भी कहा कि उन्हें सीआईडी की जांच पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि अभी हम जांच प्रक्रिया से संतुष्ट हैं, लेकिन आग सीआईडी भी मामले में ढील बरतती है, तो मामले में सीबीआई जांच की मांग करेंगे।

उधर, एसपी मंडी शालिनी अग्निहोत्री ने कहा कि पुलिस ने मामले में पूरी गहनता से जांच की है। अब मामले की जांच सीआईडी को सौंपी जा चुकी है और एसआईटी भी गठित की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि अब आगे की जांच सीआईडी द्वारा पूरी की जाएगी। पुलिस द्वारा उनको पूरा सहयोग किया जाएगा।

दिल्ली दौरे के बीच से पालमपुर आकर शांता को भावुक कर गए जयराम

विनोद भार्गव, फ़ॉर इन हिमाचल, पामलपुर।। भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार उस समय भावुक नजर आए जब उन्होंने कहा- 30 सालों में यह पहली बार है जब विवेकानंद मेडिकल रिसर्च ट्रस्ट की बैठक में उसका संरक्षक भी शामिल हुआ।

पार्टी के वरिष्ठ नेता शांता कुमार का इशारा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की ओर था जो दिल्ली दौरा बीच में ही छोड़कर इसलिए हिमाचल आए थे ताकि विवेकानंद मेडिकल रिसर्च ट्रस्ट (वीएमआरटी) की बैठक में हिस्सा ले सकें।

शांता कुमार ने साल 1991 में वीएमआरटी की नींव रखी थी। ट्रस्ट का संरक्षक प्रदेश का सीएम होता है। मगर अब तक कभी कोई सीएम यहां नहीं आया था।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पहले से तय कार्यक्रम की तहत दिल्ली गए थे। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को हिमाचल आने का न्योता दिया और केंद्रीय मंत्रियों से भी बैठक की। इस बीच कुछ बैठकों और भेंटों का समय बाद के लिए तय हुआ।

मुख्यमंत्री की योजना दिल्ली में रुककर ही वहां के सभी कार्यक्रमों को संपन्न करके हिमाचल लौटने की थी मगर पार्टी के वरिष्ठतम नेताओं में से एक के आग्रह को वह टाल नहीं सके। वीएमआरटी की बैठक के बाद भावुक नजर आ रहे शांता कुमार भी जयराम ठाकुर की संवेदनशीलता की तारीफ करते नहीं थके।

जयराम ठाकुर रविवार को हिमाचल लौटे, यहां कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की, अगले दिन पालमपुर गए, पीएसए ऑक्सीजन प्लांट का लोकार्पण किया और साथ वीएमआरटी की बैठक में भी हिस्सा लिया। इसके बाद पहले से तय बैठक में हिस्सा लेने के लिए मंगलवार सुबह दिल्ली रवाना हो गए।