शिमला।। हिमाचल प्रदेश से चलने वाले एक पोर्टल ने सोलन के धर्मपुर क्षेत्र में बाघिन और उसके तीन शावक दिखने का दावा करते हुए एक भ्रामक वीडियो डाला है। साथ ही यह तक लिख दिया है कि यह वीडियो किसने बनाया है। मगर पड़ताल करने पर पता चला कि यह वीडियो हिमाचल का नहीं, मध्य प्रदेश का है। यही नहीं, यह वीडियो एक साल पुराना भी है।
इस पोर्टल ने अपने फेसबुक पेज पर वीडियो को शेयर करने के साथ ‘सटीक खबरों के लिए’ अपने चैनल को फॉलो करने की अपील की है मगर अफसोस, उनका यही वीडियो भ्रामक पाया गया।
इन हिमाचल की टीम के सदस्य को जब सोशल मीडिया पर यह वीडियो दिखा तो हैरानी हुई क्योंकि हिमाचल प्रदेश में बाघ नहीं पाए जाते। पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में बाघ होते हैं मगर हिमाचल में उनका आना एक दुर्लभ घटना होती। ऐसे में जब हमने सर्च किया तो पाया कि यही वीडियो एक साल पहले ज़ी मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ ने अपने यूट्यूब चैनल पर डाला था।
16 दिसंबर, 2020 के इस वीडियो को शेयर करते हुए चैनल पर लिखा गया है, “Bhopal के केरवा डैम के पास एक बाघिन तीन शावकों के साथ देखी गयी है। रात के समय बाघिन अपने तीन शावकों के साथ काफी देर तक यहां चहलकदमी करती रही। बाघिन का एक Video तेजी से Social media पर भी Viral हो रहा है।”
ध्यान देने की बात यह है कि हिमाचल प्रदेश में बाघ और शेर नहीं पाए जाते। फिर भी कई बार यहां पर कुछ लोग शरारतपूर्ण ढंग से या फिर अज्ञानतावश इधर-उधर के वीडियो शेयर कर देते हैं। और तो और, हिमाचल में पाए जाने वाले तेंदुओं को कुछ अखबार और पोर्टल शेर, सिंह, बाघ और यहां तक कि चीता भी लिख देते हैं। पाठकों से आग्रह है कि इस तरह का कोई भी फॉरवर्डेड वीडियो आगे शेयर करने से पहले उसकी सत्यता की पड़ताल कर लें।
हमीरपुर। एक दौर था जब इंजीनियरिंग में दाखिले के लिए मारामारी रहती थी, लेकिन समय के साथ शायद अब युवाओं और उनके माता-पिता की पसंद इंजीनियरिंग नहीं रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय से संबद्ध 34 से ज्यादा महाविद्यालयों में 1500 से ज्यादा सीटें खाली रह गई हैं। इनमें से 1200 सीटें सिर्फ बीटेक की हैं।
बीटेक के अलावा एमबीए की 200, बीएससी और होटल मैनेजमेंट की भी 125 से ज्यादा सीटों पर किसी छात्र ने दाखिला नहीं लिया है। सीटों को भरने के लिए कई काउंसलिंग शेड्यूल जारी किए गए थे। इसके बावजूद 1500 से ज्यादा सीटें खाली रह गईं। खाली सीटों को भरने के लिए तकनीकी विश्वविद्याल की ओर से 30 नवंबर को स्पॉट राउंड भी करवाया गया था। इसके बावजूद छात्रों ने दाखिले में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
निजी कॉलेज संचालक परेशान
तकनीकी विश्वविद्यालय से संबद्ध कई ऐसे निजी कॉलेज भी हैं जहां सीटें खाली रह गई हैं। निजी कॉलेज संचालकों ने बैंकों से कर्जा बड़े-बड़े भवन तैयार किए और फैकल्टी हायर की है। अब इनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। यहां यह भी बता दें कि पिछले पांच साल में आधा दर्जन महाविद्यालय इसी वजह से बंद भी हो चुके हैं।
इस साल ही हिमाचल के दो निजी कॉलेजों के प्रबंधकों ने अपने कॉलेज बंद करने के लिए तकनीकी विवि में आवेदन किया था। इससे पहले भी प्रदेश के तीन इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो चुके हैं। इस साल ही मंडी जिले के सिरडा कॉलेज और बिलासपुर जिले के चांदपुर का शिवा कॉलेज प्रबंधकों ने कॉलेज बंद करने के लिए आवेदन किया था। तकनीकी विश्वविद्याल हमीरपुर के रजिस्ट्रार अनुपम ठाकुर का कहना है कि कई महाविद्यालयों में सीटें नहीं भर पाई हैं। इस मामले को सरकार के समक्ष उठाया जाएगा, ताकि खाली सीटों को किसी दूसरे तरीके से भरा जा सके।
इन हिमाचल डेस्क।। कल रात हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी खबर आने लगी कि आसमान में कुछ अलग रोशनी दिख रही है। कुछ लोगों ने इसे धूमकेतु बताया, कुछ ने उल्कापिंड तो कुछ ने यूएफओ या उड़न तश्तरी। बहुत से लोग ऐसे थे जो जानते थे कि ये हैं तो सैटलाइट यानी कृत्रिम उपग्रह मगर उन्हें भी जिज्ञासा थी कि आखिर ये पहली बार क्यों नजर आए और एक कतार में क्यों हैं।
इस संबंध में शुरुआती जानकारी मिलने पर इन हिमाचल ने दो पोस्ट डालकर लोगों की जिज्ञासा शांत करने की कोशिश की थी। पोस्ट का कॉन्टेंट बहुत से लोगों और पेज वगैरह ने शेयर और कॉपी-पेस्ट किया। इसके बाद भी हमें मिलने वाले संदेशों का सिलसिला जारी रहा। पाठकों की अपील थी कि हम इन उपग्रहों के बारे में और जानकारी उपलब्ध करवाएं। इसके लिए हमारे सहयोगियों ने प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिकाओं पर प्रकाशित लेखों का अध्ययन किया और कम शब्दों में यह लेख तैयार किया ताकि सभी समझ सकें कि आसमान में दिखी चमकदार लकीर आखिर थी क्या।
इलॉन मस्क की छाप जो चमकदार सी लकीर आपने आसमान में देखी, उसे आप अंतरिक्ष में इलॉन मस्क की छाप मान सकते हैं। इलॉन मस्क एक इनोवेटर और उद्यमी हैं। दक्षिण अफ्रीका में जन्मे मस्क अभी अमेरिका, कनाडा और दक्षिण अफ्रीका, तीन देशों के नागरिक हैं। उनकी उम्र है 50 साल।नए-नए आइडिया पर काम करना उनका शौक है और काफी आइडियाज को धरातल पर उतारने में वो सफल भी हैं। उनकी गिनती दुनिया के सबसे अमीर लोगों में होती है। इस महीने उनकी संपत्ति का आकलन किया गया- 285 बिलियन डॉलर। उनकी कई सारी कंपनियां हैं, जिनमें प्रमुख हैं- स्पेसएक्स, टेस्ला, न्यूरोलिंक और ओपनएआई।
अभी हम बात करेंगे SpaceX की। स्पेसएक्स के कई प्रॉजेक्ट हैं। जैसे कि अंतरिक्ष में लंबी यात्राओं के लिए स्पेसशिप बनाना। मंगल ग्रह पर इंसानों के लिए बस्ती विकसित करना ताकि पृथ्वी पर कोई संकट आने पर इंसानों को विलुप्त होने से बचाया जा सके। इसके अलावा हार्डवेयर से लेकर सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग से जुड़े कई प्रॉजेक्ट्स पर स्पेसएक्स काम कर रही है। ऐसी ही एक परियोजना है- स्टारलिंक।
अंतरिक्ष से इंटरनेट इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने सैटलाइट नेटवर्क तैयार किया है। इसे नाम दिया गया है स्टारलिंक। कंपनी की योजना है कि इस नेटवर्क के माध्यम से पूरी दुनिया में हाई स्पीड इंटरनेट दिया जा सके। खासकर ग्रामीण और सुदूर इलाकों में। इसके लिए बस एक डीटीएच की तरह डिश लगानी होगी जो सीधे उपग्रह से इंटरनेट स्ट्रीम करेगी।
बस, ऐसी डिश लगानी होगी। कहीं भी हाई स्पीड इंटरनेट ऐक्सेस किया जा सकेगा।
इस प्रॉजेक्ट के तहत स्पेसएक्स ने अब तक सैकड़ों उपग्रह लॉन्च किए हैं। कंपनी को ऐसे 12000 उपग्रह भेजने की इजाजत अमेरिका की ओर से मिली हुई है। कंपनी का दावा है कि इन स्टारलिंक सैटलाइट्स के नेटवर्क के माध्यम से फाइबर ऑप्टिक केबल से 47 प्रतिशत ज्यादा स्पीड वाला इंटरनेट स्ट्रीम किया जा सकता है।
इस योजना के तहत छोड़े गए उपग्रह, जिन्हें स्टारलिंक्स कहा जाता है, वे रात को लकीर की तरह नजर आ जाते हैं। ये इतनी ऊंचाई पर होते हैं कि सूर्य की रोशनी पड़ने के कारण रात भी चमकदार नजर आते हैं। एक कतार में दिखने वाले इन उपग्रहों को मेगाकॉन्सस्टलेशन (महा तारामंडल) कहा जाने लगा है। चूंकि भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में पहली बार ऐसा नजारा दिख रहा है, इसलिए लोग कौतूहल में इसे यूएफओ समझने लग गए हैं।
30,000 उपग्रह भेजने की योजना
स्टारलिंक के जरिये इंटरनेट देने की योजना इलॉन मस्क ने आज से छह साल पहले 2015 में पेश की थी। लोगों को भी सैटलाइट से इंटरनेट का आइडिया पसंद आया। प्रतिष्ठित पोर्टल अर्थस्काई के मुताबिक, अमेरिका के संघीय संचार आयोग (फेडरल कम्यूनिकेशंस कमिशन) ने स्पेस एक्स को 12000 उपग्रह स्थापित करने की इजाजत दी है। भविष्य में मस्क की योजना 30,000 तक उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने की है।
स्टारलिंक सैटलाइट ट्रेन नाम से भी पुकाने जाने लगे हैं ये उपग्रह
स्टारलिंक उपग्रह पृथ्वी की सतह से साढ़े पांच सौ किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित हैं। स्टारलिंक के एक उपग्रह का वजन 227 किलोग्राम है। ये पृथ्वी के काफी नजदीक हैं और आने वाले कुछ सालों में पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे आ जाएंगे और वायुमंडर में प्रवेश करते ही जलकर नष्ट हो जाएंगे। इन्हें निचली कक्षा में इसलिए रखा गया है ताकि बेकार हो जाने के बाद वे कचरा बनकर स्पेस में न घूमते रहें।
लेकिन चिंता की बात भी है खैर, सैटलाइट के जरिये इंटरनेट मिलने की बात जितनी अच्छी लगती है, उतना ही इस प्रॉजेक्ट का नुकसान भी है। जो खगोलविद या प्रकृतिप्रेमी रात के आसमान का अध्ययन करते हैं, उन्हें अब दिक्कत आ रही है। चूंकि स्टारलिंक उपग्रह काफी चमकीले नजर आते हैं, इसलिए रात के आसमान का प्राकृतिक नजारा ही बदल गया है। जैसा कि हिमाचल में कई जगह पर लोगों ने देखा।
अमेरिका में भी इस बात का विरोध हुआ। कई खगोलविदों ने इस प्रॉजेक्ट की आलोचना की। जवाब में स्पेसएक्स ने कहा कि उसने अपने नए उपग्रहों पर काले रंग की विशेष परत चढ़ाई है जिससे उनकी चमक कम होगी। चूंकि ये इतनी ऊंचाई पर होते हैं कि जब धरती पर रात होती है तो भी इनपर सूर्य की रोशनी पड़ रही होती है। इस कारण से चमकदार नजर आते हैं। वैज्ञानिक समुदाय भी इस विषय में काम कर रहा है और सुझाव दे रहा है कि उपग्रहों को ऐसा कैसे बनाया जाए कि सूर्य की रोशनी उनपर पड़े तो वे चमकदार न दिखाई दें।
चमकीले स्टारलिंक सैटलाइट्स के कारण के रात को आसमान की लॉन्ग एक्सपोजर फटॉग्रफी करने पर ऐसी लकीर दिखाई दे रही है।
हिमाचल कई कई दूर-दराज के इलाकों में नेट कनेक्टिविटी नहीं है। ब्रॉडबैंड छोड़िए, कई जगह फोन के सामान्य सिग्नल भी नहीं आते। ऐसे क्षेत्रों के लिए यह योजना वरदान हो सकती है लेकिन यह भविष्य की बात है। अभी भारत सरकार ने स्टारलिंक के ऑपरेशन को इजाजत नहीं दी है और लोगों को भी सलाह दी है कि वे कंपनी की सेवाओं के लिए पंजीकरण न करवाएं।
भविष्य में हो सकता है कि नियमों को लेकर सहमति बनने पर यहां भी सेवाएं शुरू हो जाएं मगर ये बहुत महंगी होंगी। यह भी संभव है कि स्पेसएक्स के बाद और भी कई सारी कंपनियां इसी कारोबार में उतरें। इससे प्रतियोगिता बढ़ेगी और सैटलाइट से मिलने वाला हाई स्पीड इंटरनेट सस्ता होगा। तब तक रात के आसमान में स्टारलिंक्स की इस कतार जिसे लोग स्टारलिंक्स सैटलाइट ट्रेन भी कहते हैं, उसे देखकर ही काम चलाना होगा।
कुल्लू। विवादों में रहने वाले अभिनेत्री कंगना रनौत की शिकायत पर पुलिस थाना मनाली में एफआईआर दर्ज की गई है। कंगना रनौत इन दिनों भगवान कार्तिक के देव महोत्वस में हिस्सा लेने हिमाचल पहुंची हैं। मनाली में कंगना रनौत का घर भी है। अब सोशल मीडिया पर जान से मारने की धमकी के बाद कंगना ने कुल्लू जिले के मनाली पुलिस थाना में एक शिकायत दी थी। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।
अभिनेत्री ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा है कि मुंबई आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को नमन करने वाली एक पोस्ट उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट की थी। इसी पोस्ट पर उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। बठिंडा के एक व्यक्ति ने भी उन्हें जान से मारने की धमकी दी है। उधर, पूरे मामले को लेकर एसपी कुल्लू गुरदेव शर्मा ने बताया कि अभिनेत्री की शिकायत पर केस दर्ज किया गया है।
कंगना मनाली में कार्तिक भगवान के देव महोत्सव का हिस्सा बनने के लिए यहां पहुंची हैं। पुलिस को शिकायत देने के साथ ही अभिनेत्री ने कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी एक चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने सोनिया गांधी से निवेदन किया कि पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को भी निर्देश दें कि वो इस तरह की धमकी पर तुरंत कार्रवाई करें।
कंगना ने कहा कि धमकी देने वालों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज की है। मुझे उम्मीद है कि पंजाब सरकार भी जल्द कार्रवाई करेगी। देश मेरे लिए सर्वोपरि है, इसके लिए मुझे बलिदान भी देना पडे़ तो मुझे स्वीकार्य है। देश के हित में गद्दारों के खिलाफ खुलकर बोलती रहूंगी।
शिमला। हिमाचल सरकार अपने कुल बजट का लगभग 43 प्रतिशत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर व्यय कर रही है। छठे वेतन आयोग के लागू होने के बाद यह 50 प्रतिशत तक हो जाएगा। ये बात मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शनिवार को कर्मचारियों के लिए आयोजित जेसीसी ( संयुक्त सलाहकार समिति) बैठक के बाद कही। आपको बता दें कि नए पे-स्केल लागू होने से सरकार को 6000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय करना होगा होगा।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि पिछले लगभग चार वर्षों के दौरान राज्य सरकार ने प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के डीए में 22 प्रतिशत की वृद्धि की है और उन्हें 1320 करोड़ रुपये का वित्तीय लाभ प्रदान किया गया है। इसके अतिरिक्त उन्हें 12 प्रतिशत अंतरिम राहत की दो किस्तें भी प्रदान की गईं, जिससे कर्मचारियों को लगभग 740 करोड़ रुपये का लाभ हुआ है।
जेसीसी में किन मांगों पर लगी मुहर
करीब 6 साल बाद आयोजित हुई जेसीसी बैठक में जयराम सरकार ने लाखों सरकारी कर्मचारियों- पेंशनर्स को कई तोहफे दिए। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कर्मचारियों को पंजाब की तर्ज पर नया पे-स्केल लागू करवाने और अनुबंध कार्य अवधि दो साल करने की मांग पूरी कर दी है। कर्मचारियों को पहली जनवरी 2016 से नए वेतनमान का लाभ मिलेगा।
यह फरवरी 2022 के वेतन में देय होगा। हालांकि एरियर कर्मचारियों को कितनी किस्तों में दिया जाएगा यह तय नहीं हुआ है। इस पैट्रन पर अधिकारी काम कर रहे हैं। नया पे-स्केल मिलने से सबसे कम बेसिक वेतन वाले क्लर्क को तीन से साढे़ तीन हजार तक का लाभ होगा। डॉक्टर, वरिष्ठ अधिकारियों और एचएएस अधिकारियों को करीब 15 से 20 हजार रुपये तक का लाभ होगा। पेंशनरों को भी 1000 रुपये से लेकर 10 हजार तक का लाभ होगा।
30 सिंतबर से लागू होगा ये फैसला
इसके अलावा अनुबंध कार्य अवधि को तीन साल से घटाकर दो साल किया गया है। यह फैसला 30 सितंबर 2021 से लागू होगा। दरअसल पहले जेसीसी की बैठक सितंबर में होनी थी, लेकिन फिर यह पोस्टपोन कर दी गई। ऐसे में इस मांग को बैक डेट से लिया गया, क्योंकि अधिकारी पहले ही इस पर कार्य कर चुके थे।
इसके साथ-साथ दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों, अंशकालिक कामगारों, जल रक्षकों और जलवाहकों आदि के संबंध में नियमितीकरण/अंशकालिक से दैनिक वेतनभोगी के रूप में नियुक्ति के लिए भी एक-एक वर्ष की अवधि कम की जाएगी। बता दें कि प्रदेश के ढाई लाख कर्मचारियों के लंबित मसले सुलझाने के लिए जेसीसी की बैठक आयोजित की गई।
पेंशन को लेकर भी की गई घोषणा
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 15 मई 2003 से फैमिली पेंशन देने की भी घोषणा की है। यह केंद्र सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक पांच मई 2009 से देय होगी। इससे प्रदेश सरकार पर 250 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। प्रदेश की सीमित संसाधनों के बावजूद सीएम जयराम ठाकुर ने कर्मचारियों को सौगात देने कोई कमी नहीं छोड़ी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों के भुगतान के लिए 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जारी करने की भी घोषणा की।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि करूणामूलक आधार पर नियुक्ति के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी। यह समिति आगामी मंत्रिमण्डल बैठक में अपनी प्रस्तुति देगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के जनजातीय क्षेत्रों में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी एवं अनुबंध कर्मचारियों को जनजातीय भत्ता देने पर भी विचार करेगी।
एनपीएस को होगी पेंशन निधि चुनने की स्वतंत्रता
जयराम ठाकुर ने कहा कि एनपीएस कर्मचारियों को अब पेंशन निधि चुनने की स्वतंत्रता होगी, जिससे उनके निवेश पर बेहतर रिटर्न सुनिश्चित हो सकेगा। उन्होंने कहा कि अब तक इन कर्मचारियों को सरकार द्वारा चुनी गई पेंशन निधि में ही निवेश अनिवार्य था। उन्होंने कहा कि सभी एनपीएस कर्मचारियों को डीसीआरजी लाभ प्रदान किया जा रहा है और अब सरकार ने 15 मई, 2003 से 22 सितंबर, 2017 तक इस लाभ से वंचित एनपीएस कर्मचारियों को ग्रेच्युटी प्रदान करने का निर्णय लिया है।
धर्मशाला।। हिमाचल प्रदेश के एक निजी चैनल समाचार फर्स्ट का फेसबुक पेज हैक होने की सूचना है। इस संबंध में समाचार फर्स्ट की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उनके पोर्टल का पेज हैक हुआ है और इसे रिकवर करने के प्रयास जारी हैं।
समाचार फर्स्ट के अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में हिमाचल प्रदेश पुलिस के साइबर सेल में भी कंप्लेंट कर दी गई है। यह बताया गया है कि उनके फेसबुक पर पोस्ट हो रही सामग्री कोई और व्यक्ति पोस्ट कर रहा है, जिसने पेज को हैक किया है।।
इस समय समाचार फर्स्ट के पेज पर इधर उधर के वीडियो पोस्ट दिख रहे हैं, हिमाचल या देश से जुड़ी खबर लगभग दो दिन से पोस्ट नहीं की गई है।
शिमला। बीएड करने वाले भी अब जेबीटी बन सकते हैं यानी बीएड डिग्री धारक भी पहली से पांचवीं तक के छात्रों को पढ़ा सकेंगे। ये आदेश हिमाचल हाईकोर्ट ने दिया है। दरअसल जेबीटी भर्ती में बीएड डिग्री धारकों की एंट्री के खिलाफ हिमाचल हाईकोर्ट में केस किया गया था। ये केस जेबीटी प्रशिक्षुओं की ओर से किया गया था। इस केस का आधार यह बनाया गया था कि बीएड करने वालों को जेबीटी की भर्ती में मौका नहीं दिया जा सकता। क्योंकि बीएड डिग्री धारक अन्य भर्तियों में मौका पा सकते हैं। जबकि कोई जेबीटी प्रशिक्षु यदि बीएड डिग्री धारक नहीं है तो उसे अन्य जगह मौके नहीं मिलते।
हालांकि हिमाचल हाईकोर्ट ने इस आधार का नाकाफी माना और अब हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक बीएड डिग्री धारक भी जेबीटी के लिए पात्र होंगे। इससे पहले हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जेबीटी बैचवाइज भर्ती मामले पर 12 नवंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने पुष्पा देवी और अन्यों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।
याचिका लगाने वाले प्रार्थियों का कहना था कि वे बीएड पास हैं और 28 जून, 2018 की एनसीटीई की अधिसूचना के तहत जेबीटी के इन पदों के लिए वे पात्रता रखते हैं। सरकार उन्हें इस अधिसूचना का लाभ नहीं दे रही है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि उन्हें भी जेबीटी बैचवाइज भर्ती के लिए साक्षात्कार हेतु बुलाया जाए व इन पदों के लिए कंसीडर किया जाए।
शिमला । स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछड़ने के बाद शिमला ने वापसी की है। चंडीगढ़, पुणे, पणजी और बेंगलुरु जैसे शहरों को पछाड़ कर शिमला शहर देश भर में नंबर 1 बना है। नीति आयोग की ओर से जारी सतत विकास लक्ष्य शहरी भारत सूचकांक 2021-22 में शिमला देशभर में शीर्ष पर रहा है।
बीते रोज ही सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय मापदंडों पर मूल्यांकन कर नीति आयोग ने एक सूची जारी की। सतत विकास लक्ष्य शहरी भारत सूचकांक 2021-22 में 100 अंकों में से शिमला को 75.50 अंक मिले हैं। नीति आयोग ने 56 शहरों का मूल्यांकन किया था। पहली बार शहरी क्षेत्रों के लिए रैंकिंग घोषित की है।
नीति आयोग की ओर से जारी किया गया इंडेक्स
एसडीजी शहरी सूचकांक (sdg urban index) में शीर्ष 10 शहरी क्षेत्र शिमला, कोयंबटूर, चंडीगढ़, तिरुवनंतपुरम, कोच्चि, पणजी, पुणे, तिरुचिरापल्ली, अहमदाबाद और नागपुर शामिल हैं। आंकड़े आधिकारिक स्रोतों जैसे एनएफएचएस (national family health survey), एनसीआरबी (national crime records bureau), यू-डीआईएसई (integrated district information system for education), विभिन्न मंत्रालयों के पोर्टल और अन्य सरकारी स्रोतों से प्राप्त किए गए हैं।
हाल ही में शिमला को स्वच्छता रैंकिंग में झटका लगा था। स्वच्छता सर्वेक्षण में हिमाचल को तो पांचवां रैंक मिला था, लेकिन शिमला टॉप 100 से बाहर हो गया था। बीते साल शिमला को 65वीं रैंक मिली थी, लेकिन इस बार स्वच्छता के मामले में शिमला की रैंकिंग गिरकर 102 हो गई थी। इसके बाद राजनीति बयान के पलटवार भी शुरू हुए थे, लेकिन अब सतत विकास लक्ष्य यानी एसडीजी में बेहतरीन प्रदर्शन कर शिमला ने अपनी साख बचा ली है।
शिमला।। हिमाचल भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष कृपाल परमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। फतेहपुर उपचुनाव लड़ने के इच्छुक रहे कृपाल परमार ने प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप को त्यागपत्र भेजा है।
अपने इस्तीफे में परमार ने कहा है कि वह भाजपा कार्यकर्ता के रूप में पार्टी के लिए काम करते रहेंगे। राज्यसभा सांसद रह चुके परमार इस बार फतेहपुर विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ना चाहते थे मगर टिकट न मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताई थी।
जल्द ही भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक होने वाली है। इसमें चुनावों में हुई हार के लिए जिम्मेदार कारणों पर चर्चा होनी थी और उसके बाद पार्टी के ओर से कदम भी उठाए जाने थे। इस बैठक से ठीक पहले परमार ने इस्तीफा दिया है।
शिमला।। देश-दुनिया समेत हिमाचल प्रदेश के कई वेब पोर्टल्स ने मिस्टर बीन का किरदार निभाने वाले अभिनेता रोवन एटकिंसन के निधन की खबर दी है। हालांकि, यह जानकारी सामने आई है कि मिस्टर बीन जीवित हैं और उनके निधन की झूठी खबर फैली हुई है।
मिस्टर बीन के नाम से मशहूर ब्रितानी अभिनेता रोवन की मौत की खबर अमेरिका से शुरू हुई। फॉक्स न्यूज के नाम से फर्जी ट्विटर हैंडल चलाने वाले किसी शख्स ने इस गलत जानकारी को ब्रेकिंग न्यूज की तरह ट्वीट किया और फिर यह बात आगे फैलती गई> इस हैंडल ने लिखा था- मिस्टर बीन (रोवन एटकिंसन) का कार हादसे में 58 की उम्र में निधन।
यह खबर पूरी तरह गलत है। रोवन की उम्र 66 साल है और वह ठीक हैं। कई प्रतिष्ठित चैनलों ने भी खबर को चलाने से पहले पुष्टि करना उचित नहीं समझा। इनमें हिमाचल प्रदेश के भी कई चैनल शामिल हैं।