ऋतिक रोशन को प्यार करने लग गईं थी कंगना !

इन हिमाचल 

ऋतिक रोशन और कंगना कंगना रनौत का विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. कंगना रनौत की ऋतिक रोशन को लिखे गए सारे ईमेल इंटरनेट पर लीक हो चुके हैं। ये ईमेल कंगना ने उसी बहरूपिए को लिखे हैं जो खुद को ऋतिक रोशन बताकर उनसे बात कर रहा था। लेकिन कंगना का कहना है कि ये जाली ईमेल आई डी ऋतिक की ही है जो उनसे बात कर रहे थे।इन हिमाचल

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लेकिन अब कंगना रनौत की ऋतिक रोशन को लिखे गए सारे ईमेल इंटरनेट पर लीक हो चुके हैं। ये ईमेल कंगना ने उसी बहरूपिए को लिखे हैं जो खुद को ऋतिक रोशन बताकर उनसे बात कर रहा था। लेकिन कंगना का कहना है कि ये जाली ईमेल आई डी ऋतिक की ही है जो उनसे बात कर रहे थे।
ऋतिक रोशन को कंगना ने भेजे थे ये मेल…
17 अगस्त 2014 कंगना ने लिखा कि कभी कभी मैं हर चीज को लेकर अनश्यॉर महसूस करती हूं। क्या वाकई हमारे बीच प्यार है या ये सिर्फ फैंटेसी है? क्या हमारा प्यार रियल है या मैं किसी इमेजनरी इंसान से बात करती रहती हूं? तुम मुझसे कभी बात क्यों नहीं करते? क्या हो अगर एक दिन मैं तुमसे मिलूं और तुम मुझसे कहो कि तुम्हें कुछ नहीं मिला, तुम मुझे जानते तक नहीं, तुमने मुझसे कभी प्यार नहीं किया, तब मैं क्या करूंगी? क्या मैं कभी इस दर्दनाक हकीकत से उबर पाऊंगी?
कुछ दिन बाद तुम्हारा गाना बहुत अच्छा है मैंने इसे दोबारा देखा। उम्मीद करती हूं मैंने जो लिखा उसके बारे में तुम बुरा नहीं मानोगे। मैं माफी मांगती हूं अगर तुम्हें बुरा लगा तो। मैं बहुत दुखी हूं कि हम बात नहीं करते। मुझे पाया है कि मुझे एसपरजर्स सिंड्रोम है। मैं इसके लेकर तनाव में हूं। अगर तुम्हें समय मिले तो पढऩा। मैं इस सिंड्रोम का 98 प्रतिशत तक शिकार हूं।
3 सितंबर 2014 तुम्हें इस तरह ईमेल भेजना और उनका कोई जवाब न मिलना मेरे लिए बहुत मुश्किल है।
4 अक्टूबर 2014 मैं सुबह उठते ही सबसे पहले तुम्हें गूगल करती हूं। तुम्हारी को नई तस्वीर तुम्हारे बारे में कोई खबर या तुम्हारा कोई इंटरव्यू ढूंढने की कोशिश करती हूं ताकि अपना दिन शुरू कर सकूं। मुझे उम्मीद है जल्द ही तुम्हें गूगल पर ढूंढने की बजाए मैं तुमसे बात कर, तुम्हारी आवाज सुनकर अपना दिन शुरू कर सकूंगी।
9 अक्टूबर 2014 असल में मैं खुश हूं कि तुमने फोन नहीं उठाया, मैं तुमसे क्या कहती? मैं कैसा साउंड करती? तुम्हें हाय कहने का सही तरीका क्या होता? मेरे मन में बहुत से सवाल हैं। आई लव यू जान
1 नवंबर 2014 मैं तैयार हूं
2 नवंबर 2014 बेबी मुझे यकीन नहीं हो रहा मैं तुमसे मिली। तुम बहुत सैक्सी लगते हो। मैं अब अपने बिस्तर पर हूं, लेकिन एसआरके के घर के बारह करीब 30 मिनट तक मैं रुकी रह गई। वहां प्रशंसकों की इतनी भीड़ थी। मुझे कुछ याद नहीं मैंने जो भी तुमसे कहा। मैं बहुत नरवस था और तुम्हारे साथ अलग ही इंसान बन गई थी। मैं एक टीनएजर की तरह नरवस हो रही हूं। मुझे यह फीलिंग अच्छी लग रही है। मैं सोचती हूं तब क्या होगा जब तुम मुझे खींच कर अपने करीब लाओगे और मुझे किस करोगे। मैं पक्का बेहोश होने वाली हूं।
13 नवंबर 2014 मैं ये भी सोच रही हूं कि जब तुम अपने नए घर में शिफ्ट हो रहे होगे बेबी, जब तुम्हारा किचन तैयार हो रहा होगा तो मैं उसे सजाऊंगी। मैं नहीं चाहती कि कोई और ये काम करे। तुम्हें स्टाफ की जरूरत होगी। हमें लोगों के इंटरव्यू लेने होंगे। मैं तुम्हारे स्टाफ को तुम्हारी जरूरतों के हिसाब से ट्रेन करूंगी।
(सौजन्य विराट पोस्ट)

देखें: हिमाचल की बेटी कशिका पटियाल नए म्यूज़िक वीडियो में

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हिमाचल प्रदेश के बैंड लमण के गाने ‘पिया न जा’ में नज़र आई प्रदेश की बेटी कशिका पटियाल ऐक्टिंग और मॉडलिंग की दुनिया में लगातार आगे बढ़ रही है।

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कशिका ने पंजाबी वीडियो सॉन्ग ‘बेवफा’ में काम किया है। मासूम चेहरे वाली कशिका इसमें बहुत आकर्षक लगी हैं।

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इस वीडियो को लांच होने के 24 घंटों के अंदर यूट्यूब पर साढ़े 3 लाख से ज़्यादा हिट्स मिल चुके हैं।

पोल: कांग्रेस के अगले CM के लिए जी.एस. बाली लोगों की पहली पसंद

इन हिमाचल डेस्क।।
आय से अधिक संपत्ति के मामले में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का भविष्य कोर्ट में अटका पड़ा है। सीबीआई ने कहा है कि उसके पास वीरभद्र के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जिस तरह के सबूतों की जानकारी मीडिया में आई है, वे वीरभद्र की गिरफ्तारी के लिए काफी हैं। कांग्रेस हाईकमान भी इस बात से वाकिफ है और किसी तरह का संकट पैदा न हो, इसलिए मंथन चल रहा है। फॉर्म्यूला निकाला गया है कि सीएम के साथ डेप्युटी सीएम भी होगा, जो भविष्य में पार्टी की कमान संभाल सके।
इस तरह की खबरों को ध्यान में रखते हुए इन हिमाचल में अपने पाठकों से एक पोल पूछा था, जिसमें 84789 लोगों ने जवाब दिया है। पोल की सेटिंग ऐसी थी कि एक यूजर एक ही बार जवाब दे सकता था। हमने 4 प्रमुख नेताओं के नाम देते हुए पूछा था कि वे कांग्रेस में किसी अगला मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं। इन नेताओं में कौल सिंह ठाकुर, जी.एस. बाली, विद्या स्टोक्स और सुधीर शर्मा थे।
इस पोल के नतीजों में परिवहन, तकनीकी शिक्षा और खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री जी.एस बाली सबसे लोकप्रिय नेता के रूप में उभरे हैं। उन्हें सबसे ज्यादा लोगों ने वोट किया है। 55 फीसदी लोगों ने बाली को मुख्यमंत्री के तौर पर पसंद बताया है। बाकी तीनों नेताओं को कुल मिलाकर 45 फीसदी वोट मिले हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि बाली की लोकप्रियता कौल सिंह ठाकुर, सुधीर शर्मा और विद्या स्टोक्स के मुकाबले कहीं ज्यादा है।
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परिवहन मंत्री जी.एस. बाली (Image Courtesy: Amar Ujala)
दूसरे नंबर स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर रहे, जिन्हें 24 फीसदी वोट पड़े। इसके बाद शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा रहे, जिन्हें 15 प्रतिशत वोट पड़े। विद्या स्टोक्स 6 फीसदी वोटों के साथ आखिर में रहीं। पोलिंग के दौरान मतदान के आंकड़े में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ। जी.एस. बाली सबसे आगे रहे। पहले दिन कौल सिंह ठाकुर सबसे पीछे रहे थे, मगर बाद में वह दूसरे नंबर पर आ गए।
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गौरतलब है कि कांगड़ा से दिग्गज और तेज-तर्रार नेता जी.एस. बाली ने हाल ही में फेसबुक पेज GS Bali पर जोरदार उपस्थिति दर्ज करवाई है। मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक वह अक्सर अपने मंत्रालयों द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हैं और मेसेज के जरिए मिली समस्याओं का समाधान भी करते हैं। वह सुझाव भी आमंत्रित करते रहे हैं, जिनके आधार पर कई फैसले लिए गए हैं। युवाओं के साथ दो-तरफा संवाद स्थापित करने की वजह से भी बाली की लोकप्रियता बढ़ी है।
संभव है कि कौल सिंह ठाकुर को पिछले दिनों चर्चित रही ऑ़डियो सीडी की वजह से नुकसान झेलना पड़ा है। इसके अलावा अपने काम के जरिए भी वे लोगों को प्रभावित करने में नाकामयाब रहे हैं। विद्या स्टोक्स जहां अस्वस्थ हो चुकी हैं, वहीं सुधीर शर्मा ने युवाओं के बीच कुछ हद तक पहुंच बनाई है। हाल ही में धर्मशाला में नगर निगम चुनाव में भी कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों की जीत का श्रेय उन्हें दिया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर हुई रायशुमारी का आंकड़ा असल में जमीनी स्तर पर की गई रायशुमारी के आंकड़े के बराबर होता है, यह नहीं कहा जा सकता। मगर सोशल मीडिया पर प्रदेश युवाओं से लेकर उम्रदराज़ लोगों तक की मौजूदगी हाल में बढ़ी है। ऐसे में कहा जा सकता है कि जमीनी स्तर पर राय में बहुद ज्यादा फर्क नहीं होगा।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पूरी तरह से बैकफुट पर आए हैं। अभी तक आलाकमान को विश्वास में लेने में कामयाब रहे वीरभद्र अपनी लड़ाई में अकेले पड़ते जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नहीं चाहती कि उसके दामन पर और दाग लगे, क्योंकि स्कूटर पर सेब ढोने और छापेमारी के बाद पिछले इनकम टैक्स रिटर्न ज्यादा भरने से साफ दिखता है कि कुछ न कुछ तो गोलमाल किया गया है।

राजनीति चमकाने के लिए लोगों को गुमराह कर रहे हैं गोकुल बुटेल?

  • आई.एस. ठाकुर ।।
पालमपुर से एक शख्स खुद को युवा नेता के तौर पर प्रॉजेक्ट कर रहा है। और तो और, लोग भी उसे हाथोहाथ ले रहे हैं। उसकी हर पोस्ट पर वाह-वाही कर रहे हैं और उसे पालमपुर का भविष्य बता रहे हैं। पालमपुर से विधायक बनने का सपना देख रहा यह शख्स रोज नए-नए दावे करता है और उसके फेसबुक फ्रेंड बिना उन दावों की सचाई जांचे कहते हैं- वाह भाई, क्या शानदार विजन है आपका।
बात गोकुल बुटेल की हो रही है, जो मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार हैं। हाल ही में उन्होंने पालमपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और लगभग हर अखबार ने उसे छापा। किसी भी पत्रकार या अखबार ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि इन दावों में कितनी सच्चाई है। खबर है आईटी पार्क की। कुछ अखबारों ने लिखा है कि कांगड़ा जिले में बनेगा आईटीपार्क, कुछ ने लिखा है कि पालमपुर में बनेगा। कुछ ने लिखा है- 6 माह में होगा काम शुरू। खुद गोकुल ने लिखा है-
‘Announced the upcoming STPI (Software Technology Park of India) IT Park at District Kangra potentially at Bindraban, Jia or Gaggal.’
इस पर लोगों के कॉमेंट आए- वाह गोकुल भाई, आप पालमपुर का अच्छा नेतृत्व कर रहे हैं। कुछ ने लिखा- पालमपुर का भविष्य गोकुल, क्या विज़न है। मगर गोकुल का यह दावा और उनके प्रशंसकों की वाहवाही बहुत ही हास्यास्पद है। सच यह है कि कांगड़ा जिले में आईटी पार्क की स्थापना की चर्चा 2010-11 से चल रही है और इसके लिए जमीन के चयन से लेकर शिलान्यास तक की खबरें आपने पढ़ी होंगी। जिस आईटी पार्क के ऐलान का दावा गोकुल कर रहे हैं, उसके बारे में सच यह है-

– 15 मई, 2013 यानी आज से 3 साल पहले 400 बीघा भूमि का चयन हुआ।

– 13 फरवरी, 2014 को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने आईटी पार्क का शिलान्यास किया।

फिर अब काहे का ऐलान और प्रदेश का मीडिया क्यों इस खबर को सुर्खियां दे रहा है? कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है कि ये सभी खबरें पेड न्यूज हैं। बहरहाल, मैं इस बहस में नहीं पड़ना चाहता, क्योंकि बिना सबूत के बातें नहीं करनी चाहिए। फिर भी इतना तो है कि एक ही पक्ष दिखाकर लोगों को भ्रमित करना गलत है।
सच यह भी है कि गोकुल बुटेल के पास कोई अधिकार नहीं कि वह किसी तरह का ऐलान करें। वह मुख्यमंत्री के सलाहकार हैं, जिसका काम मुख्यमंत्री के साथ मशवरा करना और सुझाव देना है। आईटी सलाहकार का पद वैसे भी तुष्टीकरण वाला पद है, जिसका कोई औचित्य नहीं और उनसे पहले हिमाचल में इस पद पर रहा भी नहीं। अमूमन मीडिया, राजनीतिक आदि सलाहकरों की नियुक्ति की जाती है, ताकि वे मुख्यमंत्री निजी तौर पर ब्रीफ कर सकें और ग्राउंड स्थिति से वाकिफ करवाएं।
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Gokul Butail (Courtesy: Facebook Timeline of Gokul Butail)
आईटी सलाहकार का पद ही इसलिए सृजित किया गया, ताकि वीरभद्र सिंह पालमपुर से अपने खासमखास नेता के पोते को अडजस्ट कर सकें। जी हां, गोकुल बुटेल के दादा कुंज बिहारी लाल बुटेल 2 बार पालमपुर से विधायक रहे हैं और कांग्रेस के सीनियर नेता रहे हैं। मौजूदा विधायक और विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल उनके दादा के भाई हैं। बुटेल परिवार पालमपुर के सबसे संपन्न परिवारों में है और इनके कई एकड़ में चाय के बागान हैं। गोकुल अमेरिका से पढ़कर लौटे और मुख्यमंत्री ने आईटी सलाहकार बना दिया।
मुख्यमंत्री के पास अधिकार है कि वह अच्छे शासन के लिए किसी को भी इस तरह के पद पर नियुक्त करे। मगर गोकुल बुटेल ने ऐसे कामों का क्रेडिट लेने की कोशिश की, जो उनके अधिकार क्षेत्र में ही नहीं थे। उदाहरण के लिए आईटी पार्क तब की बात है, जब गोकुल अमेरिका में पढ़ रहे थे। लोग कई अन्य योजनाओं का श्रेय भी गोकुल को दे रहे हैं। उन्हें पता होना चाहिए कि ई-राशन कार्ड योजना केंद्र सरकार द्वारा प्रमोटेड है, जिसे खाद्य आपूर्ति मंत्रालय ने प्रदेश में शुरू किया था। जगह-जगह पर फ्री वाई-फाई भी कोई नया कॉन्सेप्ट नहीं है।

अगर आप सामान्य योजनाओं का क्रेडिट ले सकते हैं तो महत्वपूर्ण नाकारियों का जिम्मा भी आपको उठाना होगा। हिमाचल प्रदेश सरकार की वेबसाइट दुनिया की सबसे वाहियात साइट्स में है। इस दौर में, जब 60 फीसदी से ज्यादा इंटरनेट यूजरबेस मोबाइल पर शिफ्ट हो गया है, हिमाचल सरकार की वेबसाइट मोबाइल फ्रेंडली नहीं है। यानी मोबाइल पर इस्तेमाल करने के हिसाब से सुविधाजनक नहीं, बल्कि डेस्कटॉप वर्जन खुलता है, जिसमें सूक्ष्मदर्शी यंत्र की मदद से ही कोई चीज़ें पढ़ सकता है. इसे इस्तेमाल करना बड़ी चुनौती है।

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मुख्यमंत्री कार्यालय से गवर्न होने वाले ई-समाधान की हालत खस्ता है। लोग परेशान हैं शिकायतें करते-करते, कई बार जवाब नहीं आता। अन्य सरकारी वेबसाइटों की हालत भी कमाल ही है।

जहां तक बात है प्रदेश में कंप्यूटर शिक्षा की, वह केंद्र की योजना है और गोकुल जब स्कूल में थे, तभी से चल रही है। तमाम सरकारी विभागों को इंटरनेट से जोड़ना भी केंद्र की योजना है। यूपीए सरकार के वक्त से इसका काम चल रहा है और मोदी सरकार भी इस पर जोर दे रही है। जितनी भी योजनाएं गोकुल ने पालमपुर में गिनाईं, कमोबेश सभी केंद्र की योजनाएं और सभी राज्यों में इस दिशा में काम चल रहा है और कुछ राज्य आगे बढ़ चुके हैं।
सतही दावों पर वाहवाही करने वाले वही लोग हैं, जो वैसे तो समस्या होने पर गालियां देते हैं कि सिस्टम खराब है। जो कहते हैं कि परिवारवाद हावी है और कुछ ढंग का काम नहीं हो रहा। वही ऐसे अचानक अवतरित हुए लोगों का समर्थन करने लगते हैं और उनकी हर बातों पर दावा करते हैं। नेताओं के दावों पर यकीन करने वाले अनपढ़ लोगों और आप जैसे पढ़े-लिखे लापरवाह लोगों में कोई फर्क नहीं है।
गोकुल कहते हैं कि पार्टी लड़ाएगी, तो लड़ूंगा। 2 साल पहले कहीं बाहर से आकर वही शख्स ऐसा दावा कर सकता है, जो राजनीतिक परिवार से हो। वरना 20 सालों से पालमपुर में कांग्रेस के लिए काम कर रहा मेहनती कार्यकर्ता क्यों ऐसी बात नहीं कह पा रहा? राजनीति में रसूख का खेल जारी है, गोकुल बुटेल उसी का एक प्रमाण है। लोगों की आंखों में पट्टी बंधी है। उन्हें प्रभावशाली लोग पसंद हैं, मेहनती लोग नहीं। कोई हैरानी नहीं होगी कि कल को गोकुल विधायक भी बन जाएं। मेरी तरफ से गोकुल और पालमपुर के लोगों के लिए शुभकामनाएं।
(लेखक मूलत: हिमाचल प्रदेश के हैं और पिछले कुछ वर्षों से आयरलैंड में रह रहे हैं। उनसे kalamkasipahi@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

नोट:
 आप भी अपने लेख inhimachal.in@gmail.com पर भेज सकते हैं। हमारे यहां छपने वाले लेखों के  लिए लेखक खुद जिम्मेदार है। ‘इन हिमाचल’ किसी भी वैचारिक लेख की बातों और उसमें दिए तथ्यों के प्रति उत्तरदायी नहीं है। अगर आपको कॉन्टेंट में कोई त्रुटि या आपत्तिजनक बात नजर आती है तो तुरंत हमें इसी ईमेल आईडी पर मेल करें। 

संसद में कांग्रेस और हिमाचल विधानसभा में बी जे पी का एक ही एजेंडा “वाकआउट”

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  • विकास राणा

  हिमाचल प्रदेश विधानसभा का सेशन मजाक का सेशन हो गया है।  जनहित के मुद्दों पर चर्चा करने उनके ऊपर सत्ता पक्ष को घेरने की जगह विपक्ष सिर्फ वाकऑउट पर केंद्रित है जो की अफ़सोस का विषय है।  विपक्षी नेता प्रेम कुमार धूमल के नेर्तित्व में रोज रोज के वाकऑउट से जनता अब उकताने लगी है।  प्रदेश भाजपा वाकऑउट का कारण वीरभद्र सिंह के ऊपर लगे  ई डी आरोपों और कारवाई  पर सदन में चर्चा को बताती है।  हालाँकि न्यायालय में मामला होने पर सदन में इस पर चर्चा का कोई तुक नहीं बनता है।

अगर सदन में चर्चा से कुछ इस मामले में निकल कर आएगा तो न्यायालय किस लिए हैं।  सदन में इस मामले की आड़ में सिर्फ एक दूसरे पर कीचड फेंकने की राजनीति को बल मिलेगा।  विपक्ष मामले में कई बार  स्पीकर से इस बारे में बात कर चूका है परन्तु स्पीकर का जबाब वही है जो हमेशा रहा है।  ऐसे ही प्र्शन काल में भी विपक्ष का मंत्रियों से सत्ता पक्ष से प्रदेश के बेरोजगारों से सबंधित प्र्शन पूछने की जगह सदन से वाकऑउट कर देना आम आदमी की उम्मीदों का गला घोंटना हैं
प्रदेश की खराब सड़कों शिमला सोलन में फैले पीलिया के प्रति जबाबदेही लोअर हिमाचल में सीमित होती खेती बेरोजगारों की बढ़ती फ़ौज के लिए सरकार ने क्या किया सरकार की जबाबदेहि सुनिश्चित करने की जगह सदन से बाहर चले जाना कहाँ तक उपयुक्त है।
लोकसभा में भी यही हो रहा है वहां कांग्रेस जो कर रही है यहाँ हिमाचल  में धूमल के नेर्तत्व  में भाजपा भी वही कर रही है।  क्या भाजपा नेता अपने प्रधानमंत्री की बात से इत्तफाक नहीं रखते जो सदन को सुचारु चलाने के लिए उन्होंने लोकसभा में कही थी ?
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कुलमिलाकर सिर्फ वीरभद्र विरोध पर टिकी  प्रदेश भाजपा के पास जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की जगह क्रिकेट और वीरभद्र विरोध के अलावा कोई एजेंडा नहीं है।  बी जे पी सत्ता में तो आना चाहती है पर वो सत्ता में आकर कैसे हिमाचल प्रदेश की ज्वलंत समस्या को सुलझाएंगे इस बारे में किसी रोडमैप पर बात नहीं करती है।  सब स्कूटर क्रिक्केट पर केंद्रित विपक्ष अगर जनहित के मुद्दों को समस्याओं को मंत्रियों के सामने नहीं रखेगा तो जनता को जबाब कैसे मिलेगा।
आरोपों में घिरे वीरभद्र सिंह का क्या होता है यह देखना जांच एजेंसियों का कार्य है और भारत की न्याययिक व्ययवस्था इस पर अपने हिसाब से फैसला लेगी।  प्रदेश का आम व्यक्ति सिर्फ अपने विद्याक से यह उम्मीद करता है की सदन में वो उसकी समस्याओं  जुड़े प्रश्न लेकर जाए उनके निदान में भूमिका बने।  न की अपने पार्टी विशेष के अजेंडे में केंद्रित रहे।
कुलमिलाकर हिमाचल प्रदेश विधानसभा में जो भी हो रहा है यह प्रदेश के विकास में अवरोधक और भविष्य के लिए घातक है।

‘हिमाचल और किन्नौर से मेरा एक रिश्ता बन गया’

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रोहित वर्मा 
मैं उत्तर प्रदेश के मुजफरनगर के रहने वाला हूँ।  हिमाचल प्रदेश से मेरा एक पुराना रिश्ता रहा है।  चाहे वो बचपन में घर वालों के साथ देवभूमि के शक्तिपीठों ज्वाला जी और कांगड़ा की देवीयों के दर्शन करने के लिए जाना हुआ हो या  कालेज समय में हर सेमस्टर  एग्जाम से पहले माता नैना देवी से आशिर्वाद लेना हो।  शिमला कुफरी की मेरी कई यात्राएं इसकी गवाह रही हैं की हिमाचल प्रदेश की मेरे लिए क्या अहमियत है ।
वक़्त के साथ साथ कालेज लाइफ भी खत्म हो गई और कहीं  नौकरी भी लग गई जेब में चंद पैसे आ गए फिर एक सिलसिला शुरू हुआ हिमाचल को एक्सप्लोर करने का शोघी राजगढ़ कसौली कसोल मणिकरण तोश आदि  की ख़ाक छानने के बाद इस बार ऐसी जगह पहुंचे की वहां की खूबसूरती देख कर मन वैरागी हो गया।

हुआ यूँ की दिल्ली की दौड़धूप की जिंदगी और सॉफ्टवेयर इंजीनियर की रूटीन जॉब के बीच अभी होली की पांच छुट्टियां आ गई तो मैंने और मेरे दोस्त रवि ने प्लान बनाया की क्यों न इनका सदुपयोग किया जाए।  हिमाचल के बारे में पढ़ते पढ़ते अचानक मेरी नजर एक आर्टिकल पर पड़ी जिसमे हिमाचल प्रदेश के जिला किन्नौर के छितकुल का जिक्र था।  फिर क्या बुलेट की सर्विस करवाई गर्म कपडे  जरुरत का सामान बैग में पैक किया और निकल पड़े दिल्ली से किन्नौर के सफर पर।

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दो पहिए जो ले गए जन्नत की ओर



शिमला तक तो पहले भी गए ही थी उसके आगे जो हमारा पहला पड़ाव  था वो था रामपुर बुशेहर।  अब हम ठहरे फक्कड़ सन्यासी सस्ते में विस्वास रखने वाले धर्मशाला में रात गुजारी सुबह माँ भीमाकाली का आशीर्वाद लेने सराहन पहुँच गए।  वहां के लोगों से बात करने पर पता चला इस मंदिर का सबन्ध महाभारत काल से है।  काष्ठ कला का अलग ही नमूना यह मंदिर पहाड़ी शैली में बना है और अपने आप में अनूठा है।  वहां का वातावरण एकदम सुन्दर और शांत।  जैसे ही बाहर आए पारम्परिक वेशभूषा पहने हुए पहाड़ी औरतों ने घेर लिया और होली पर रंग लगाने को कहा।  एक तो होली का पर्व मैं ठहरा इसका शौकीन जम के होली खेली और आगे बढ़ गए।

एक तरफ खड़ा शांत पहाड़ दूसरी तरफ शोर मचाती मचलती सतलुज और बीच में सर्पीली सड़क पर हम चले जा रहे थे की एक भव्य गेट  दिखा।  यह किन्नर प्रदेश भोलेनाथ की धरती किन्नौर का प्रवेश द्वार था।
 एक बात की दाद मैं हिमाचल प्रदेश की सरकार को देता हूँ की इन पहाड़ों और विपरीत परिस्थितियों के बीच भी जहाँ तक हो सकता था सड़क की गुणवत्ता बरकरार रखी गई थी।  परन्तु जैसे ही कड़छम पहुंचे मन दुःखी हो गया देखा सारा पहाड़ सड़क पर और निकलने का कोई रास्ता आगे नहीं।  तभी एक मुसाफिर ने बताया की नीचे से नई सड़क बनी है।  करीब दो महीने से लैंड स्लाइड के कारण रास्ता बंद था।  आगे चलकर एक चौराहे से हमने सांगला का रूख किया।
सतलुज की अविरल धारा

गरूर के साथ सफेद चादर ओढ़े खड़े  पर्वतराज हिमालय का असली रूप अब दिखने लगा था। ऊबड़ खाबड़ रास्ते से होते हुए थकान भी अब हावी होने लगी थी की एक पहाड़ की ओट से जैसे आगे मोड़ मुड़ा तो जो देखा हम अवाक रह गए अद्भुत नैसर्गिक शांत एक घाटी सामने थी यह सांगला घाटी थी।  वहां की हवा में एक संगीत था।  हर तरफ ताज़गी का एहसास था।  हमने रात इसी जन्नत में गुजारने का फैसला लिया।

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चलना ही जिंदगी है

अगले दिन हम आगे बढे रकछम गावँ में मार्च महीने में भी बर्फ का दिखना हमारे लिए अजूबे से कम नहीं था।  रास्ते में हम रुके लोगों से बात करी उनका रहन सेहन जाना और पहुंचे  छितकुल  उस बॉर्डर की तरफ से भारत का  आखिरी  गांव।  सुंदरता की हद कहाँ तक हो सकती है यह छितकुल गांव को देख कर समझा जा सकता है।  ऐसे जगह जिसकी कल्पना हम स्वप्नों में करते हैं यह उस से भी परे था।

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मेरे मुल्ख का एक कोना



वहां फौजी भाई लोगों से भी बात हुई।  उन्होंने हमें चाय पिलाई हमने उनके साथ भी गपशप की।  और अगली सुबह इस जन्नत को भारी मन से विदा कहते हुए रास्ते के हर मोड़ को फिर आने का वादा करते हुए अठखेलिया करती हुई सतलुज के साथ साथ हम भी रामपुर शिमला और फिर दिल्ली की ओर आ गए। हिमाचल प्रदेश और किन्नौर के बारे में मैं बस यह कहना चाहूंगा की पहाड़ का मजा मंजिल में नहीं सिर्फ सफर में है चलते जायो और यहाँ की ताज़ा हवा ,  खूबसूरती के साथ बहते जाओं

 “लेखक मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुजफरनगर  जनपद के रहने वाले हैं और हिमाचल प्रदेश से विशेष लगाव रखते हैं ” 

प्रवर्तन निदेशालय के पास हैं वीरभद्र सिंह को गिरफ्तार करने लायक सबूत!

इन हिमाचल डेस्क।।

हिमाचल प्रदेश के सीएम वीरभद्र सिंह पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। इंग्लिश अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक प्रवर्तन निदेशालय (ED) को जांच के दौरान सबूत मिले हैं कि वीरभद्र सिंह ने आय से अधिक संपत्ति इकट्ठा करने के मामले में अपना बचाव करने के लिए फर्जीवाड़ा किया है।

TOI के मुताबिक ED का मानना है कि ये सबूत काटे नहीं जा सकते। जांच के दौरान सामने आया है कि वीरभद्र सिंह ने डॉक्यूमेंट्स के साथ छेड़छाड़ की और पिछले डेट्स के स्टाम्प पेपर बनवाकर सेब के व्यापारियों से बैक डेट पर अग्रीमेंट बनाए। इससे इनकम में अचानक आए उछाल को जस्टिफाई करने की कोशिश की गई।

VBS

गौरतलब है कि इनकम टैक्स के छापे पड़ने के बाद सीएम ने  2008-09 से 2011-12 की ड्यूरेशन के लिए संशोधित रिटर्न फाइल किया था। छापों से पहले वीरभद्र ने 2011 में अपनी आमदनी 47.35 लाख बताई थी, मगर जांच शुरू होने के बाद उन्होंने यह 6.57 करोड़ बताई।

वीरभद्र आय से अधिक संपत्ति मामले में पहले से ही सीबीआई की जांच के दायरे में है। उन्हें मनी लॉन्डरिंग के अलावा कागजात से छेड़छाड़ के मामले में भी अरेस्ट किया जा सकता है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ सुधीर शर्मा के खिलाफ बना एक पोस्टर

धर्मशाला।।

हिमाचल प्रदेश के शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा के खिलाफ डाला गया एक पोस्टर वायरल हो गया है। विभिन्न पेजों और व्यक्तियों द्वारा इस पोस्टर को शेयर किया जा रहा है। इस पोस्टर में सुधीर शर्मा से सवाल पूछा गया है कि आप केंद्र की योजनाओं पर अपनी फोटो लगवाकर बैनर क्यों बनवा रहे हैं।गौरतलब है कि सुधीर शर्मा को धर्मशाला नगर निगम चुनावों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह यहीं से विधायक भी हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान हो रही राजनीति के तहत ही यह पोस्टर शेयर किया जा रहा है। इसके साथ ही यह सवाल भी पूछा गया है कि जोगिंदर नगर को फ्री वाई-फाई देने का वादा कहां गया।

SUdhir Sharma

इस पोस्टर में NULM योजना का जिक्र किया गा है। साथ ही कहा गया है कि राज्य सरकार के कार्यों का भी बोर्ड बनवाया जाए। वादे पूरे न करने का भी आरोप लगाया गया है। नीेचे इस पोस्टर वाली ही एक पोस्ट इंबेड की गई है।

सुधीर शर्मा जबाब दो ।
Posted by Pavan Rana on Friday, March 25, 2016

हिमाचल के जागरूक युवाओं के लिए खास मंच: Youth In Himachal

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इन हिमाचल एक अलग तरह की सीरीज़ लेकर आ रहा है। हिमाचल प्रदेश के युवा अपने राज्य के जुड़े विषयों पर क्या सोचते हैं, यह सीरीज़ इसी के बारे में होगी। हम विभिन्न विषयों को लेकर प्रदेश के विवेकशील युवाओं से फेसबुक के जरिए सवाल पूछेंगे और उसपर उनकी राय मांगेंगे। सवाल हिमाचल प्रदेश की समस्याओं से जुड़ा हो सकता है, राजनीति से जुड़ा हो सकता है, कला या संस्कृति से जुड़ा हो सकता है या हस्तियों पर हो सकता है। 
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दरअसल यह कोई जनरल नॉलेज का टेस्ट नहीं होगा। बस विचार जाने जाएंगे। फिर हम उन विचारों को तस्वीर के साथ अपने पेज पर शेयर करेंगे। उस तस्वीर के नीचे प्रदेश के जागरूक युवा कॉमेंट करके बहस को आगे बढ़ाएंगे। वे अपनी सहमतियां या असहमतियां कॉमेंट करके जताएंगे। इस तरह से हमारा इरादा न सिर्फ प्रदेश को लेकर व्यापक समझ पैदा करना है, बल्कि समस्याओं और मुद्दों को सार्थक दिशा देना भी है। इस सीरीज़ की पहली कड़ी सोमवार को प्रकाशित की जाएगी।
पाठक खुद भी किसी मामले पर अपनी राय जाहिर कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें अपनी फेसबुक टाइमलाइन पर #YouthInHimachal हैश टैग के साथ कोई पोस्ट डालनी होगी। ध्यान रहे, पोस्ट की प्रिवेसी सेटिंग Public होनी चाहिए। आप इस तरह की पोस्ट को हमारे फेसबुक पेज www.facebook.com/inhp.in पर भी पोस्ट कर सकते हैं। हम खुद अच्छी पोस्ट्स के विषयों को उठाकर अपने पेज पर पब्लिश करेंगे।

बी जे पी नारी एवं युवा शक्ति विंग की सरदारी कांगड़ा को !

इन हिमाचल डेस्क।
मिशन 2017 की तैयारी में जुडी  हिमाचल प्रदेश बी जे पी पिछली बार की तरह इस बार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है।  इसी फेरहिस्त में पार्टी संगठन ने  जिला कांगड़ा को ख़ास तवज्जो देने का फैसला किया है।   गौरतलब है की पिछली बार कांगड़ा में पार्टी को आपसी गुटबाजी के कारण कांगड़ा से सत्ता से बाहर होना पड़ा था।
पार्टी इस बार इस तरह का कोई रिस्क नहीं लेना चाहती इसलिए फूंक फूंक कर कदम रख रही है इसी कड़ी में।  कांगड़ा को तवज्जो देते हुए यह फैसला लिया गया है की।  महिला मोर्चा की सरदारी के साथ युवा मोर्चा की सरदारी भी कांगड़ा को दी जाए।
महिला मोर्चा की अद्यक्ष के लिए पूर्व छात्र नेता एवं 90 के दशक से पार्टी से जुडी रहीं तेजतर्रार महिला नेत्री ” इंदु गोस्वामी”  के नाम को लगभग फाइनल माना जा रहा है।  इंदु गोस्वामी बैजनाथ हलके से सबंध रखती हैं और लम्बे अनुभव के साथ पार्टी संग़ठन में उनकी खासी पकड़ मानी जाती रही है।

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इंदु गोस्वामी
युवा मोर्चा की बात की जाए तो कांगड़ा से विशाल चौहान का नाम भी लगभग तय ही है।  विशाल चौहान भी छात्र नेता रहे हैं और अभी युवा मोर्चा में सक्रिय पदाधिकारी हैं।  हालाँकि उनके ऊपर जिम्मेदारी भी काफी  रहेगी क्योंकि अंदरखाते कहा जाता रहा है की  अनुराग ठाकुर और नरेंद्र  अत्त्री के बाद  मोर्चा के अद्यक्ष बने वर्तमान अध्य्क्ष सुनील ठाकुर अनुराग एवं अत्री   के स्तर का कार्य नहीं कर पाए हैं।  युवा मोर्चा की पकड़ युवायों में कुछ वर्षों में ढीली हुई है।  पार्टी के ही एक पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया की वर्तमान अध्य्क्ष के दौर में युवा मोर्चा सिर्फ शिमला तक ही सीमित रह गया है जिसे फैलाव देने की आवश्यकता है।  अब विशाल चौहान इस जिम्मेदारी को कैसे निभाते हैं यह भविष्य के गर्भ में छुपा है।

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विशाल चौहान