सलमान खान की फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ के टीजर में देखिए हिमाचल की वादियां

इन हिमाचल डेस्क।। सलमान खान की फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ का टीजर इंटरनेट पर धूम मचा रहा है। इस फिल्म की काफी शूटिंग हिमाचल प्रदेश की वादियों में भी हुई है। फिल्म से टीज़र में भी ये लोकेशंस नजर आती हैं।  इस टीजर ने आते ही इंटरनेट पर धूम मचा दी है। डायरेक्‍टर कबीर खान की इस नई फिल्‍म में सलमान खान काफी मासूमियत भरे अंदाज में नजर आ रहे हैं। इस टीजर की शुरुआत तो युद्ध से सीन से होती है मगर सलमान कुछ अलग से नजर आ रहे हैं। वह मासूम से दिख रहे है।  इस फिल्‍म में एक बार फिर सलमान के छोटे भाई सोहेल खान भी उनके साथ नजर आएंगे। सलमान की इस फिल्‍म के टीजर को देखते ही लोगों को ‘बजरंगी भाईजान’ वाले सलमान की याद आ गई। फिल्म में सोहेल खान सेना का जवान बने दिख रहे हैं। सलमान गले में जूते लटका कर भागते हुए, बेहद मासूमियत भरे अंदाज में सलामी  देते हुए, बच्‍चों के साथ खेलते हुए और नाचते हुए नजर आ रहे हैं।

गुरुवार को देर शाम रिलीज हुए इस टीजर को अभी तक लाखों लोग देख चुके हैं। टीजर में जहां एक ओर भारतीय जवान बंदूक ताने दिख रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ चीनी सेना नजर आ रही है। कबीर खान और सलमान खान की जोड़ी तीसरी बार इस फिल्‍म में साथ काम कर रही है। इससे पहले ऐक्‍टर-डायरेक्‍टर की यह जोड़ी ‘एक था टाइगर’ और ‘बजरंगी भाईजान’ जैसी सुपरहिट फिल्‍में दे चुकी है। नीचे देखें, कैसा है ट्रेलर:

 

यह फिल्म ईद पर रिलीज होगी। कॉमेंट करके बताएं आपको हिमाचल की कौन सी लोकेशंस नजर आईं।

15 साल के टीनेजर पर दूसरी क्लास में पढ़ने वाली बच्ची से रेप का आरोप

नाहन।। हिमाचल प्रदेश प्रदेश के सिरमौर में दूसरी क्लास में पढ़ने वाली बच्ची से बलात्कार का मामला सामने आया है। आरोपी भी नाबालिग है और इस वक्त पुलिस की गिरफ्त में है। आरोपी की उम्र 15 साल बताई जा रही है।

घटना सिरमौर के पच्छाद इलाके की है। माता-पिता को जब घटना की जानकारी मिली तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। आरोप 15 साल के शख्स पर लगाया गया है। आरोप है कि स्कूल जा रही उनकी बेटी को यह युवक जंगल में ले गया और वहां इसके साथ इस वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद वह मौके से फरार हो गया।

पुलिस स्टेशन पच्छाद के एसएचओ जय राम डोगरा का कहना है कि अभिभावकों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि आरोपी को भी पकड़ लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है।

ASI समेत तीन पुलिसकर्मियों ने शराब पीकर किया हंगामा, एसपी ने किए सस्पेंड

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, नाहन।। सिरमौर की एसपी सौम्या सांबशिवन ने शराब के ठेके के बाहर हुड़दंग करने पर एक एएसआई समेत 3 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। आरोप है कि शिमला हाइवे शराब के नशे में धुत पुलिसकर्मियों ने ठेके के पास एक पिकअप ड्राइवर से बदसलूकी की और वर्दी का रौब दिखाया। पुलिस को इसकी सूचना रात को ही मिल गई थी। इसके बाद एसपी ने शुक्रवार शाम को इन तीनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया।

बताया जा रहा है कि घटना बीती रात करीब साढ़े 11 बजे की है। तीनों पुलिसकर्मी सरकारी गाड़ी HP 18 B-1216 पर सवार होकर घटनास्थल पर पहुंचे थे। सूत्रों का यह भी कहना है की एसपी ने इस तरह के मामलो में कड़ा रुख अपनाने का फैसला लिया है। गौरतलब है कि सौम्या सांबशिवन ने जिले के नशा माफिया की कमर तोड़ दी है। अवैध शराब के कारोबार पर नकेल कसने में भी उनकी बड़ी भूमिका रही है।

SP सौम्या सांबशिवन (File Pic) Courtesy: sirmourpolice.in

जानकारी के मुताबिक निलंबित कर्मी नाहन थाना में ही तैनात है। आरोपी ASI की पहले भी शिकायते मिलती रही हैं। एसपी सौम्या साम्बशिवन ने तीन कर्मियों के सस्पेंशन की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि आम लोगो से इस तरह की बदसलूकी बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

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उन्होंने यह भी कहा कि शराब के ठेके पर मौजूद कर्मचारी से यह भी पूछा जाएगा कि शराब लेने के बदले इन पुलिसकर्मियों ने पैसे दिए थे या नहीं। इससे पहले राजबन चौंकी को लाइन हाजिर किया गया था और कालाअंब थाने के कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी।

हिमाचल प्रदेश के इन यंग ऑफिसर्स ने गोद ली शहीद की बेटी

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, नाहन।। हिमाचल प्रदेश के तैनात दो युवा अधिकारियों ने ऐसा काम किया है जो पूरे देश के लिए मिसाल है। IAS यूनुस खान और IPS अंजुम आरा ने पंजाब के तरनतारन के शहीद परमजीत की 12 साल की बेटी को गोद लेने का फैसला किया है। आईएएस अधिकारी यूनुस खान इन दिनों कुल्लू के डीसी हैं और उनकी पत्नी अंजुम सोलन की एसपी हैं। दोनों अधिकारियों को उनके शानदार काम के लिए पहचाना जाता है और दोनों ही बहुत लोकप्रिय हैं यह युवा दंपत्ति अपने इस फैसले को गोपनीय रखना चाह रहा था मगर कहीं से मीडिया को इसकी जानकारी मिल गई। बताया जा रहा है कि 12 साल की बेटी को गोद लेने के फैसले पर जब डीसी यूनुस ने शहीद की विधवा से बात की तो परिवार इस नेक फैसले से इनकार नहीं कर पाया। बच्ची अपनी मां के पास ही रहेगी मगर उसकी पढ़ाई-लिखाई और अन्य खर्चों को यूनुस और अंजुम ही वहन करेंगे।

सोलन की एसपी अंजुम आरा देश की दूसरी मुस्लिम महिला आईपीएस अधिकारी है। उनके पति कुल्लू के डीसी युनुस खान अपने भावनात्मक व्यक्तित्व के लिए पहचाने जाते हैं। वह कुछ साल तब चर्चा में रहे थे जब उन्होंने खनन माफिया की कमर तोड़ दी थी। प्रोबेशन पीरियड पर वह एसडीएम के पद पर नालागढ़ में तैनात थे। खनन माफिया ने ट्रैक्टर चढ़ाकर उन्हें कुचलने की कोशिश की थी।

IAS ऑफिसर यूनुस और IPS ऑफिसर अंजुम

वह  2010 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और उनकी पत्नी 2011 बैच की आईपीएस है। आईएएस व आईपीएस दंपत्ति का करीब 4 साल का बेटा है। उनका कहना है कि भाई को बहन मिली है। कोशिश रहेगी कि दोनों के बीच भाई-बहन की तरह गहरा रिश्ता बने।

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कुल्लु के उपायुक्त युनस खान ने कहा कि यह फैसला मानवता के नाते लिया गया है। उन्होंने कहा कि शहीद की विधवा के अलावा भाई से बात हो चुकी है। उनका यह भी कहना है कि बच्ची अगर आईएएस व आईपीएस भी बनना चाहें तो बेटी को हर मदद मुहैया करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही शहीद के घर भी जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरहदों की रक्षा करने वाले सैनिकों के परिवारों को अगर देशवासी सुरक्षा मुहैया करवाएं तो सैनिकों का मनोबल भी बढ़ेगा।

शहीद परमजीत का परिवार (MBM News Network)

सोलन की एसपी अंजुम आरा ने कहा कि सैनिकों के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार से व्यथित हो गए थे। उन्होंने कहा कि जब उनके पति ने शहीद की बेटी को गोद लेने की बात सामने रखी तो वह भी भावुक हो गई थीं।

कांगड़ा पुलिस ने शेयर की नशे के कारोबारियों की जब्त प्रॉपर्टी की तस्वीरें

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश में नशे के सौदागर बड़े स्तर पर सक्रिय हैं। भांग, चरस, गांजे के साथ-साथ केमिकल नशे का चलन भी युवाओं के बीच बढ़ता जा रहा है। यह नशा इंजेक्शन, कैप्स्यूल्स और पाउडर के रूप में उपलब्ध है। पुलिस के कुछ ऐसे अधिकारी हैं जिन्होंने नशे के खिलाफ अभियान छेड़ा हुआ है। इनमें सबसे पहले कांगड़ा के एसपी संजीव गांधी का नाम आता है जो इलाके में नशे के सौदागरों के लिए आतंक का पर्याय बन चुके हैं। उनके नेतृत्व में कांगड़ा पुलिस अब तक दर्जनों नशे के तस्करों और उनके आकाओं को सलाखों के पीछे पहुंचा चुकी है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर से हिमाचल में चिट्ठे और अन्य तरह के नशे की सप्लाई करने के लिए नए-नए तरीके ढूंढे जा रहे हैं। पुलिस अपने स्तर पर काम कर रही है और अब तक न ऐसे लोगों की करोड़ों की संपत्ति भी जब्त की जा चुकी है। आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि नशे के सौदागर इस काले काम से लोगों की जिंदगियां तबाह करते हुए कितना ज्यादा पैसा कमा रहे हैं। तुरंत मिलने वाले पैसे के चक्कर में ये लोग आलीशान भवन बना रहे हैं और कई जगहों पर जमीनें खरीद रहे हैं। दूसरों का भविष्य चौपट करके ये लोग खुद के लिए ऐशो आराम जुटा रहे हैं। कांगड़ा के एसपी संजीव गांधी ने फेसबुक टाइमलाइन पर कुछ तस्वीरें शेयर की हैं जो ड्रग डीलर्स की जब्त की हुई प्रॉपर्टीज़ की हैं।

गुरुवार को SP Kangra ने इन तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा है, ‘Today we are sharing the pics of immovable properties freezed by District Police Kangra These are few pics, In last one year, we have identified & freezed Properties of of drug peddlers worth Rs 10 crores Our mission is still on. इसका अर्थ है कि आज हम जिला कांगड़ा पुलिस द्वारा जब्द की गई अचल संपत्तियों की कुछ तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। पिछले 1 साल में हमने नशे के सौदागरों की 10 करोड़ की संपत्तियों की पहचान करके उन्हें फ्रीज किया है। हमारा अभियान अभी भी जारी है। देखें ये तस्वीरें:

 

यह आलीशन बंगला ड्रग्स की काली कमाई से बनाया जा रहा था।

 

बाहर से ही नहीं, अंदर भी पूरी साज-सज्जा की गई है।

 

लॉन में फव्वारे लगाए जा रहे थे

 

शानो-शौकत का पूरा ख्याल रखकर घर के सामने लॉन बनाया गया है।

 

किसी के सपनों को कुचलकर अपने लिए आशियाना बना रहे हैं ये लोग।

 

दो मंजिला मकान बना लिया गया लोगों का खून चूसकर

 

भव्य इमारतें बनाने का शौक रखते हैं ये डीलर।
कोई पहचान नहीं सकता कि कौन सा आदमी कैसा काम कर रहा है। ये ड्रग डीलर हमारे बीच ही शराफत का चोला ओढ़कर रहते हैं।

 

लोगों के घर उजाड़कर अपना घर बसाया जा रहा है।

 

तुरंत आए पैसे को शायद तुरंत लगा रहा था ड्रग डीलर।

ये सभी तस्वीरें SP Kangra की पोस्ट से ली गई हैं। प्रोफाइल पर जाने के लिए यहां पर क्लिक करें। इससे पता चलता है कि क्यों युवाओं को गुमराह किया जा रहा है। नशे के चक्कर में लोग तो बर्बाद हो जाते हैं मगर नशे के ये सौदागार अमीर होते चलते जाते हैं। जिस तरह से कांगड़ा पुलिस शानदार काम कर रही है, उसके लिए वह बधाई की पात्र है। जरूरत है कि पूरे प्रदेश में व्यापक अभियान चलाया जाए और मौत के इन सौदागरों को सलाखों के पीछे डाला जाए। अगर कोई नेता या पुलिसकर्मी इन लोगों का साथ देता पाया जाता है तो उसे भी न बख्शा जाए। साथ ही लोगों से भी अपील है कि अगर उन्हें ऐसे किसी ड्र्ग्स रैकिट या फिर स्मगलर के बारे में पता चलता है कि तुरंत गुप्त रूप से पुलिस को बताएं।

अमित शाह के फॉर्म्युले से कट सकते हैं हिमाचल बीजेपी के इन नेताओं और विधायकों के टिकट

इन हिमाचल डेस्क।। पालमपुर आए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने ‘इन हिमाचल’ की उन रिपोर्ट्स पर मुहर लगाई है, जिनमें दावा किया गया था कि पार्टी हिमाचल में बिना किसी को सीएम कैंडिडेट घोषित किए चुनाव लड़ सकती है और नए चेहरों को ज्यादा टिकट दिए जाएंगे। अमित शाह ने पालमपुर में साफ कहा कि पार्टी इस बार नए चेहरों को उतारेगी और इस पर पार्टी नेतृत्व फैसला लेगा कि चेहरे पर चुनाव लड़ा जाएगा या सामूहिक तौर पर। साथ ही उन्होंने मौजूदा वीरभद्र सरकार को रिटायर्ड लोगों की सरकार करार दिया। इससे उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं को भी इशारा दिया कि अब बीजेपी प्रदेश में यंग नेतृत्व चाहती है।

अमित शाह के इन बयानों से जहां युवा कार्यकर्ताओं और टिकट चाहने वाले यंग लीडर्स में जोश देखा जा रहा है, वरिष्ठ और उम्रदराज हो चुके नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ती हुई दिख रही हैं। वैसे अमित शाह का यह बयान हैरान नहीं करता क्योंकि अन्य राज्यों में पार्टी इसी लाइन पर रहकर चुनाव लड़ी है और जीती भी है। मगर अब अमित शाह ने खुलेआम हिमाचल भाजपा को यह बात स्पष्ट कर दी।

अमित शाह के दौरे के बाद सभी के मन में यह ख्याल आ रहा होगा कि अगर बीजेपी इस बार नए चेहरों को टिकट देने का इरादा रख रही है तो वे कौन से पुराने चेहरे हैं, जिन्हें हटना होगा। भले ही अमित शाह ने पालमपुर में स्पष्ट किया कि 70+ एज वालों को टिकट देने में पार्टी को कोई आपत्ति नहीं है, मगर अन्य राज्यों में पार्टी ने कुछ अपवादों को छोड़कर टिकट आवंटन यह ध्यान रखा है कि यंग कैंडिडेट्स को ही टिकट मिलें। दरअसल बीजेपी यंग लीडरशिप तैयार कर रही है जो लंबे समय तक टिके। अमित शाह ने इससे पहले सोलन दौरे में कहा था कि अब बीजेपी हिमाचल में आए तो कम से कम 15-20 साल टिके। यह तभी संभव हो पाएगा जब लीडर्स नए हों। वैसे भी देखा जाता है कि न सिर्फ सत्ताधारी विधायक, बल्कि विपक्षी विघायकों के हारने की आशंकाएं भी ज्यादा होती हैं क्योंकि काम न होने की वजह से जनता के मन में उनके प्रति नाराजगी होती है। इसलिए बीजेपी इस बार उनके टिकट भी काट सकती है जो इस बार जीते हुए हैं। अमित शाह जबसे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं, हर राज्य में उन्होंने यही फॉर्म्युला अपनाया है और यह कामयाब भी रहा है। दिल्ली में हुए एमसीडी चुनाव इसका उदाहरण है जहां पर बीजेपी ने सभी सीटों से नए कैंडिडेट उतारे और कामयाबी हासिल की।

क्या होगा बीजेपी का पैमाना
– अन्य राज्यों के पैटर्न पर गौर करें तो बीजेपी उन नेताओं को टिकट देने से बचने की कोशिश करेगी जो 70 पार हैं या ज्यादा बुजुर्ग हैं।
– उन्हें भी टिकट मिलने में दिक्कत होगी जो लगातार एक ही सीट पर हारते चले आ रहे हैं।
– उन्हें भी टिकट की उम्मीद छोड़नी होंगी जो 2012 विधानसभा चुनाव में बहुत ज्यादा मार्जन से हारे हैं।
– 2012 में बहुत कम मार्जन से जीतने वालों को भी निराशा हाथ लग सकती है क्योंकि एक तो वे खुद मुश्किल से जीते थे और अब उनके खिलाफ लोकल लेवल पर ऐंटी-इनकमबेंसी वेव हो सकती है।

जानें, इस पैमाने पर किन नेताओं को टिकट मिलने की संभावनाएं लगभग शून्य हैं:
1. आत्मा राम (जयसिंहपुर)
2. हीरा लाल (करसोग)
3. तेजवंत सिंह (किन्नौर)
4. प्रवीण कुमार (पालमपुर)
5. बालक राम नेगी (रोहड़ू)
6. प्रेम सिंह ड्रैक (रामपुर)
7. राकेश वर्मा (ठियोग)
8. मुल्ख राज (बैजनाथ)
9. खीमी राम (बंजार)
10. बदलेव शर्मा (बड़सर)
11. सुरेश चंदेल (बिलासपुर)
12. रेणु चड्ढा (डलहौजी)
13. किशन कपूर (धर्मशाला)
14. बलदेव सिंह ठाकुर (फतेहपुर)
15. प्रेम सिंह (कुसुम्पटी)
16. दुर्गा दत्त (मंडी)
17. रणवीर सिंह निक्का (नूरपुर)
18. कुमारी शीला (सोलन)

अब बात उन नेताओं की जिनके टिकट कटने की संभावनाएं तो बहुत ज्यादा हैं मगर इन्हें सेकंड लाइन ऑफ लीडरशिप न होने का फायदा मिल सकता है। अगर पार्टी को इनकी जगह कोई और कैंडिडेट मिला तो वह इनका टिकट काटने में देर नहीं लगाएगी:
1. सरवीन चौधरी (शाहपुर)
2. सुरेश भारद्वाज (शिमला)
3. जवाहर लाल (दरंग)
4. महेंद्र सिंह (धर्मपुर)
5. रमेश चंद धवाला (ज्वालामुखी)
6. रिखी राम कौंडल (झंडूता)
7. गुलाब सिंह ठाकुर (जोगिंदर नगर)
8. नरिंदर बरागटा (जुब्बल-कोटखाई)
9. राजिंदर  गर्ग (घुमारवीं)

अभी चुनावों में वक्त है और नजदीक आते-आते हलचल तेज हो जाएगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि यूपी और उत्तराखंड की तर्ज पर हिमाचल कांग्रेस के बड़े नेता भी बीजेपी का रुख कर सकते हैं। यह देखा गया है कि बीजेपी ने अन्य पार्टियों से आने वाले नेताओं की जीतने की संभावनाओं को देखते हुए उन्हें टिकट भी दिया है। उस स्थिति में भी कई सीटों पर बीजेपी के मौजूदा नेताओं के लिए मुश्किल स्थिति हो जाएगी जो टिकट की उम्मीद लगाए हुए है। बहरहाल, अन्य राज्यों में बीजेपी द्वारा अपनाई गई रणनीति के हिसाब से हिमाचल में इन नेताओं के टिकटों को खतरा हो सकता है मगर पार्टी क्या देखकर किसे टिकट लेती है, यह उसका अपना फैसला होगा। चुनाव आने पर ही पता चलेगा कि यह राजनीतिक विश्लेषण और अनुमान कितना खरा उतरता है क्योंकि राजनीति में कुछ भी निश्चित नहीं होता।

नोट: इस आर्टिकल में राजनीतिक विश्लेषण के बाद इन सीटों और नामों का जिक्र किया गया है। सोशल मीडिया पर कुछ तत्व इन नामों को अपने-अपने तरीके से शेयर कर रहे हैं। कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि बीजेपी ने ही इन नामों की लिस्ट बनाई है। ‘In Himachal’ सोशल मीडिया पर किए जा रहे इन दावों से इत्तफाक नहीं रखता। यह विश्लेषणात्मक अनुमान पर आधारित आर्टिकल है न कि पार्टी की तरफ से जारी किसी सूची पर आधारित समाचार।

अब बिलासपुर में मिला सिरकटा तेंदुआ, चारों पंजे भी गायब

बिलासपुर।। हिमाचल प्रदेश में लगाए गए चीड़ के जंगलों में हर साल लगने वाली भीषण आग से अगर जंगली जीव बच जाएं तो शिकारी उन्हें नहीं छोड़ रहे। अब बिलासपुर जिले के बरमाणा में एक मामला सामने आया है जहां तेंदुए को बर्बरता से मार गिराया गया है। इस तेंदुए का सिर और चारों पंजे गायब हैं। साफ है कि किसी ने दांतों और नाखूनों के लिए इसकी यह हालत की है। इससे पता चलता है कि अपराधियों ने अपने तरीके में बदलाव लाया है। खाल के बजाय अब वे पंजों और दांतों को ही निकाल रहे हैं। इससे पहले प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से इस तरह की खबरें आ चुकी हैं। अब तक किसी भी मामले में पुलिस और वन-विभाग को सफलता नहीं मिल पाई है। लगातार सामने आ रहे मामलों से यह आशंका उठ खड़ी हुई है कि कहीं कोई गिरोह इन घटनाओं को अंजाम तो नहीं दे रहा।

 

बिलासपुर के बरमाणा में ग्राम पंचायत पंजगाई के साथ लगते गांव कुन्नू में जहां यह तेंदुआ मिला है, वहां पर एसीसी की तरफ से माइनिंग का काम चल रहा है। किसी ने तेंदुए के मरे होने की सूचना गांववालों को दी। प्रधान और गांव के अन्य लोग वहां पहुंचे तो देखा कि मरे हुए तेंदुए की गर्दन और आधी कटी टांगें गायब थी। तेंदुए को देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे उसे दो-तीन दिन पहले मार कर फेंका गया है। मामले की जांच की जा रही है।

 

इससे पहले मंडी जिले के जोगिंदर नगर और सिरमौर के नाहन भी में भी तेंदुओं को इसी हालत में पाया गया है। कुछ लोग शो ऑफ के लिए जंगली जानवरों का शिकार करते हैं तो कुछ को गलतफहमी है कि तेंदुओं के दांत और नाखून बहुत पावरफुल होते हैं। कुछ लोग इनसे दवाएं बनाने का दावा करते हैं तो कुछ साज-सज्जा में इस्तेमाल करते हैं। अपने लालच के लिए इस तरह से इन जानवरों को मारना दिखाता है कि अपराधियों के मन में कानून का कोई डर नहीं रहा है। जब तक इस तरह की घटनाओं में शामिल रहने वालों को सजा नहीं होती, तब तक इनके हौसले यूं ही बढ़े रहेंगे।

पढ़ें: अब मंडी में मिला बेरहमी से मारा गया तेंदुआ

मान्यता के नाम पर डिस्टर्ब कर दिए मेटिंग कर रहे किंग कोबरा

इन हिमाचल डेस्क।। यह ठीक है कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि है और यहां के इंसान सादगी भरे हैं। मगर वक्त के साथ बदलाव जरूरी है और कम से कम समझदारी अपनाना जरूरी है। प्रदेश में कई मान्यताएं और पंरपराएं ऐसी हैं जो आज के वक्त में भी जारी रखी जा सकती है क्योंकि उनसे किसी तरह का नुकसान नहीं है और वे हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखती हैं। मगर कुछ मान्यताएं अगर अंधविश्वास बन जाएं और जानलेवा ही साबित होने लगें तो उनसे किनारा कर लेना चाहिए। ऐसी ही एक मान्यता है कि नाग-नागिन अगर संभोग कर रहे हों तो उन्हें नहीं देखना चाहिए। ऐसा करने पर दुर्भाग्य का सामना करना पड़ता है। यहां तक अगर कोई इस मान्यता को मान ले तो कोई बुराई नहीं है। किसी को मेटिंग करते भला क्यों देखना? मगर इस मान्यता का दूसरा हिस्सा खतरनाक है और अमानवीय भी। दूसरा हिस्सा कहता है कि कहीं नाग-नागिन संभोग कर रहे हों तो उनके ऊपर कपड़ा डाल देना चाहिए। यहीं चूक हो जाती है और सब कुछ खराब हो जाता है (वीडियो नीचे है)।

 

पहली बात तो यह है कि सांप भी वैसे ही प्रकृति के अंग हैं जैसे हम और आप। वे हमारी तरह कपड़े नहीं पहनते और न ही कि पर्दे का कॉन्सेप्ट है। अगर आपको सांपों को संसर्ग करते नहीं देखना है तो न देखें, उनके ऊपर कपड़ा आप फेंकेगें तो न सिर्फ वे बेचारे विचलित होंगे, बल्कि गुस्से में आकर पर्दा डाल रहे शख्स पर हमला कर सकते हैं। अगर उनका संसर्ग आधा रहा तो यह न सिर्फ अमानवीय है बल्कि हो सकता है कि इससे पूरा बैलंस बिगड़ जाए। क्योंकि नाग (किंग कोबरा) हिमाचल में कम संख्या में हैं और उन्हें साथी की तलाश में दूर-दूर तक भटकना पड़ता है। जब वे मुलाकात करते हैं तो उससे मादा नागिन गर्भवती होकर अंडे देती है जिससे  कि नागों की संख्या बढ़ती है। आहार श्रृंखला में सापों का अहम योगदान है। ये कई जीवों को खाकर गुजारा करते है और उनकी जनसंख्या को कंट्रोल में रखते हैं। ऐसा न हो तो चूहों आदि की संख्या बेतहाशा बढ़ जाएगी और हम-आप फसलें भी नहीं उगा पाएंगे।

 

हम यह सब इसलिए बता रहे हैं क्योंकि हिमाचल प्रदेश का एक वीडियो सामने आया है। एक पेज पर शेयर किए गए इस वीडियो में कई फुट लंबा किंग-कोबरा का जोड़ा मेटिंग कर रहा है। इतने में कुछ लोग एक लड़के को हाथ में लाल दुपट्टा लेकर नागों के पास भेजते हैं ताकि वह उसके ऊपर फेंक सके। वह सावधानी से जा रहा है औऱ महिला कह रही है कि नाग की तरफ देखे बिना कपड़ा फेंक। लड़का दो-तीन बार कोशिश करता है। एक बार सांप हमलावर भी होता है। यह तो किस्मत अच्छी थी कि वह दूर था। लड़का कपड़ा फेंक देता है और सांप भी डर के मारे अलग हो जाते हैं। उनकी प्राकृतिक क्रिया भी बीच में छूट जाती है।  देखें वीडियो:

 

मान्यताओं के नाम पर यह हरकत बहुत दुखद है। एक तो आप जीवों को चैन से नहीं रहने दे रहे ऊपर से अपनी जान भी खतरे में डाल रहे हैं। इतने बड़े किंग कोबरा पलक झपकते रुख मोड़कर डस सकते हैं और कुछ ही मिनटों के अंदर आपकी जान जा सकती है। अस्पतालों के हालात तो वैसे भी माशाअल्लाह हैं हिमाचल के। रेफर गेम में आपको स्थानीय अस्पताल से टांडा और फिर टांडा से पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया जाएगा। और इतनी देर में किंग कोबरा का जहर आपको किसी और ही दुनिया में रेफर कर चुका होगा। इसलिए ‘इन हिमाचल’ की गुजारिश है कि कृपया समझदारी अपनाएं, अपनी और इन जीवों के लिए परेशानी खड़ी न करें। कहीं नाग-नागिन मेटिंग कर रहे हैं तो मत देखो न उस तरफ, कपड़ा फेंकने की क्या जरूरत है?

खतरों के खिलाड़ियों की भी सांसें थम जाती हैं स्पीति घाटी के इस रोपवे पर

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश का लाहौल-स्पीति जिला देखने में जितना सुंदर है, वहां पर रहना उतना ही मुश्किल। भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि आसान से आसान काम भी मुश्किल बन जाता है। ऊंची-ऊंची पहाड़ियों, टीलों और खाइयों से भरी स्पीति घाटी का एक खूबसूरत गांव है किब्बर। पास ही चीचम गांव है। दूरी वैसे तो ज्यादा नहीं मगर सड़क जहां से बनी है, उसके जरिए किब्बर से चीचम जाना हो तो एक घंटे का समय लग जाता है। बीच में एक गहरी खाई है जिसकी तलहटी में एक जलधारा बहती है। पार जाने के दो तरीके हो सकते हैं- या तो सड़क से जाएं या फिर खाई में उतरें और फिर से चढ़ें। पहले वाले तरीके में टाइम ज्यादा लगेगा और दूसरा तरीका न सिर्फ थकाऊ होगा बल्कि खतरनाक भी साबित हो सकता है। मगर आना-जाना तो पड़ता ही है लोगों को। इसके लिए एक नायाब तरीका ढूंढ निकाला गया है। खाई को पाटने के लिए चूंकि पुल नहीं है, इसलिए यहां पर एक लोहे की रस्सिों पर चलने वाली ट्रॉली लगाई गई है जिसे हाथ से खींचना पड़ता है। हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और नेपाल से लेकर एशिया के कई देशों में इस तरह की ट्रॉलियां आज भी नदियों या खाइयों को पार करने में इस्तेमाल होती हैं (वीडियो नीचे हैं)।

 

हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में पुल बन जाने से ऐसी ट्रॉलियां दिखना अब कम हो गई हैं मगर बहुत से इलाके हैं जहां पर आज भी लोग इन्हें इस्तेमाल कर रहे हैं। किब्बर-चीचम को जोड़ने वाली यह ट्रॉली भी ऐसी ही है।

 

 

इस सिस्टम में खतरा तो है मगर विवशता में कोई करे भी तो क्या? अगर कोई पुल बना दिया जाए तो लोगों की समस्या जरूर कम होगी। इस मामले में हमें चीन से सीखना चाहिए। उसने गहरी खाइयों के पुल बनाए हैं। कुछ जगहों पर तो उसने शीशे के पुल बनाए हैं। लोग तो आ-जा रहे ही हैं, बाहर से टूरिस्ट्स भी आ रहे हैं ऐसे पारदर्शी पुलों पर चलने के लिए, जिनके नीचे गहरी खाई नजर आती।

ग्लास ब्रिज (चीन)

लाहौल-स्पीति की यह ट्रॉली शीशे का परदर्शी पुल बनाने के लिए एकदम उपयुक्त है। क्योंकि चारों तरफ शानदार नजारे तो हैं ही, नीचे देखने पर गहरी खाई में जलधारा बहती हुई नजर आती है जिसका पानी बहुत साफ है। पूरी दुनिया से टूरिस्ट्स ऐसे पुल को देखने के लिए आ सकते हैं। मगर अभी भी जो लोग किब्बर आते हैं, वे रोमांच के लिए इस ट्रॉली का लुत्फ उठाना नहीं भूलते। बाहरी लोगों के लिए यह अडवेंचर का विषय है मगर स्थानीय लोगों के लिए मजबूरी। देखें वीडियो:

 

 

इस वीडियो को ध्यान से देखें, इसमें ड्रोन से पता चलता है कि ऊंचाई कितनी है:

 

यह तो अलग तरह का अडवेंचर है। सरकार को चाहिए कि स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए सुरक्षित इंतजाम करे। वैसे ग्लास ब्रिज जैसे विकप्लों पर विचार किया जाता सकता है क्योंकि वे सुरक्षित तो होंगे ही, टूरिस्ट्स को भी आकर्षित करेंगे।

कार्यक्रम को बीच में ही रोककर ऐंबुलेंस के लिए रास्ता बनाने लगे जेपी नड्डा

कांगड़ा।। आमतौर पर देखने को मिलता है कि राजनेताओं की रैलियों और काफिलों के चलते लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। टीवी पर आए दिन मामले देखने को मिलते हैं कि मंत्रियों या नेताओं का काफिला या रोडशो निकालने के चक्कर में ऐंबुलेंस तक फंस गई। राजनेता इस मामले में जिस तरह से लापरवाही भरा रवैया अपनाते हैं, वह हम सभी ने देखा है। मगर इस मामले में हिमाचल प्रदेश थोड़ा अलग रहा है। कई मंत्रियों और नेताओं के काफिले इस तरह के हालात में इमर्जेंसी वीइकल्स को रास्ता देते रहे हैं। यह दिखाता है कि हिमाचल प्रदेश और यहां के राजनेताओं में कई कमियां हैं मगर वे अपेक्षाकृत अन्य राज्यों से बेहतर हैं। ऐसे ही एक काम के लिए हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ बीजेपी नेता और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा सोशल मीडिया पर चर्चा हैं। एक कार्यक्रम के सिलसिले में घुघर आए जेपी नड्डा के स्वागत में भारी भीड़ जुटी थी। कार्यकर्ताओं का उत्साह ऐसा था कि वे नड्डा के स्वागत में रोड पर ही जमा हो गए थे। कई नेता अपनी गाड़ियों में भी आए थे। इस बीच वहां ऐंबुलेंस आई और फंस गई। जैसे ही नड्डा का ध्यान इस ओर गया, उन्होंने अपना कार्यक्रम बीच में ही रोक दिया और कार्यकर्ताओं को वहां से हटने को कहा। वह खुद ही गाड़ियों और कार्यकर्ताओं को वहां से हटाकर ऐंबुलेंस के लिए रास्ता बनाने में जुट गए।

 

नड्डा को खुद मोर्चा संभालते देख वहां मौजूद लोग भी हरकत में आए और ऐंबुलेंस के लिए रास्ता बनाने में जुट गए। आसपास खड़े लोग भी मदद के लिए आगे आए ताकि साइड में खड़ी गाड़ियों को और किनारे करके जगह बनाई जाए और ऐंबुलेंस आराम से निकल सके।

 

एक अन्य मामले में जेपी नड्डा का काफिला उस वक्त भी रुका जब उन्होंने रास्ते में एक ऐक्सिडेंट देखा। नड्डा गाड़ी से उतरे और उन्होंने घायलों के लिए ऐंबुलेंस का इंतजाम करवाया और उन्हें टांडा मेडिकल कॉलेज भिजवाया।

 

 

नड्डा से पहले हिमाचल प्रदेश के अन्य नेता भी इस तरह से संवेदनशीलता दिखाते रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के लोगों को, भले वे नेता हों या कोई और, यह भावना बरकरार रखनी चाहिए। प्रदेश की पहचान इन्हीं अच्छाइयों की वजह से होनी चाहिए।