हिमाचल पुलिस में होगी 1073 की भर्ती, 21 जुलाई तक करें आवेदन

शिमला।। हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग में पुलिस कॉन्स्टेबलों की भर्ती होने जा रही है। पुलिस डिपार्टमेंट 1073 पुलिस जवानों की भर्ती करेगा।  इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी गई है। उम्मीदवारों को 21 जुलाई तक पहले आवेदन करना होगा। विभाग कुल 1073 जवानों की भर्ती करेगा, जिसमें 778 पद पुरुष जवानों के व 100 पद पुरुष चालकों के लिए रखे गए हैं। महिला कॉन्स्टेबलों के 195 पदों पर भर्ती होगी। (योग्यता और आवेदन आदि के बारे में जानकारी के लिए आखिर में दिए गए लिंक पर क्लिक करें) *तस्वीर सांकेतिक है

पुलिस डिपार्टमेंट द्वारा मंगवाए गए आवेदन संबंधित जिलों के एसपी कार्यालयों में जमा होंगे। पुलिस विभाग भर्ती का शेड्यूल बाद में जारी करेगा। विभाग से जारी अधिसूचना के मुताबिक उम्मीदवारों को फिजिकल टेस्ट लिया जाएगा। इसको क्वॉलिफाई करना होगा। इसके बाद पुलिस विभाग उम्मीदवारों की लिखित परीक्षा लेगा, जो कि 80 अंकों की होगी। इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं, वहीं इससे पहले चुनाव आचार संहिता भी लग जाएगी। ऐसे में पुलिस कॉन्स्टेबलों की भर्ती जल्द से जल्द विभाग पूरी करना चाहेगा।

खास बात यह है कि इस बार कॉन्स्टेबल की भर्ती के लिए साक्षात्कार नहीं होंगे। सरकार पहले ही चतुर्थ व तृतीय श्रेणी के पदों के लिए साक्षात्कार खत्म कर चुकी है। ऐसे में अब यह साफ है कि अब की बार इन जवानों की भर्ती लिखित परीक्षा और सरकार द्वारा तय मापदंडों के अनुरूप ही होगी। इस भर्ती से पुलिस विभाग में चल रही स्टाफ की कमी भी दूर होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले सरकार ने 1500 कांस्टेबलों की भर्ती की थी। इन जवानों का प्रशिक्षण तकरीबन पूरा हो चुका है और जल्द ही उनकी नियुक्तियां शुरू हो जाएंगी।

आवेदन करने का तरीका और योग्यता आदि की जानकारी के बारे में जानने के लिए यहां पर क्लिक करें

आईजीएमसी के रेडियोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉक्टर आरजी सूद की स्वाइन फ्लू से मौत

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में एक आईजीएमसी के रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आरजी सूद की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई है। उन्हें आईजीएमसी से पीजीआई ले जाया जा रहा था। दोपहर तीन बजे सोलन के बड़ोग के पास उन्होंने आखिरी सांस ली।

अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद ने डॉक्टर सूद के निधन की पुष्टि की है। रेडियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष पिछले ग्यारह दिन से अस्पताल में दाखिल थे। डॉक्टरों की निगरानी में उन्हें आईसीयू में रखा गया था। डॉक्टरों के मुताबिक इनकी हालत काफी गंभीर थी।

बताया जा रहा है कि रविवार को डॉक्युमेंट्स संबंधित प्रक्रिया पूरी करने के बाद डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ की मौजूदगी में उन्हें आईसीयू से बाहर लाया गया। इस दौरान उनके परिजन भी वहां मौजूद थे। ठीक एक बजे उन्हें ऐंबुलेंस में पीजीआई रेफर किया गया, मगर दो घंटों के अंदर ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

…जब बड़सर में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने ही रोक दी परिवर्तन रथयात्रा

हमीरपुर।। हमीरपुर के बड़सर में उस वक्त अजीब स्थिति पैदा हो गई जब बीजेपी की परिवर्तन रथयात्रा को पार्टी के ही कार्यकर्ताओं ने रोक दिया। इस घटना को बीजेपी में गुटबाजी के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल यहां पर पूर्व MLA बलदेव शर्मा और किसान मोर्चा नेता जुगल किशोर के समर्थकों के बीच गहमागहमी हो गई। सांसद अनुराग ठाकुर और नैनादेवी के विधायक रणधीर शर्मा समेत पार्टी के अन्य नेता भी इस मौके पर असहज नजर आए। काफी देर तक रथ रुका रहा तब अनुराग ठाकुर ने माहौल शांत करवाया।

यह मामला अखबारों में भी छाया हुआ है। अमर उजाला लिखता है, ‘शनिवार को बीजेपी की परिवर्तन रथयात्रा बड़सर विधानसभा क्षेत्र के लिए रवाना हुई। रैली के सलौणी पैट्रोल पंप के नजदीक पहुंचते ही भाजपा के दो गुटों में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। परिवर्तन रैली के दौरान रथ पर पहले से सवार पूर्व विधायक बलदेव शर्मा को भी मुर्दाबाद के नारों का सामना करना पड़ा। ढटवाल क्षेत्र से भाजपा समर्थित सैकड़ों लोग किसान मोर्चा नेता जुगल किशोर को रथ पर चढ़ाने पर अड़ गए।’

आगे लिखा गया है, ‘पूर्व विधायक के खिलाफ जुगल समर्थकों की नारेबाजी परंतु सांसद अनुराग ठाकुर के साथ पहले से ही रथ पर सवार पूर्व विधायक को यह पसंद नहीं था। जुगल को रथ पर चढ़ाने से इनकार करने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने रथ को रोक दिया। पूर्व विधायक बलदेव के विरोध के बावजूद जुगल किशोर को रथ पर बिठा लिया गया। लेकिन जुगल किशोर को करीब 400 मीटर के बाद रथ से उतार दिया गया। इस मामले में पूर्व विधायक और किसान मोर्चा नेता मीडिया के सामने कुछ भी बोलने को अब तैयार नहीं हैं।’

होशियार सिंह केस में अब विजिलेंस ने भी शुरू की जांच: मीडिया रिपोर्ट

शिमला।। मंडी के करसोग में कतांडा बीट के फॉरेस्ट गार्ड होशियार सिंह की संदिग्ध हालात में मौत के मामले में अब तक पुलिस खुलकर कुछ नहीं कह पाई है। 15 दिन से ज्यादा का वक्त बीच चुका है मगर मामले की जांच कर रही सीआईडी खाली हाथ ही नजर आ रही है। मगर ‘पंजाब केसरी’ अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि सीआईडी की सिफारिश पर वन विभाग के अधिकारियों की जांच शुरू हो गई है और यह जांच विजिलेंस कर रही है।

अखबार के मुताबिक विजिलेंस जांच की जद में वे सभी लोग आएंगे, जिनका नाम होशियार सिंह के कथित सुसाइड नोट में है। इसमें बीओ तेज राम भी शामिल है। अखबार लिखता है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी सी.आई.डी. के अधिकारियों के साथ बातचीत की है। गौरतलब है कि सरकार ने मामले की जांच सीबीआई से करवाने से इनकार कर दिया था।

मामले में हाई कोर्ट में 4 जुलाई को होगी सुनवाई
विभाग ने हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट फाइल कर ली है। अब इस पर 4 जुलाई को सुनवाई होगी। कटांडा में हुए वन कटान को लेकर अब अधिकारियों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है। इस मामले की सीआईडी जांच के अनुसार गार्ड होशियार सिंह पिछले महीने 5 जून को लापता हुआ था। मृतक के चाचा परस राम की शिकायत पर स्थानीय पुलिस ने 9 जून को हत्या का मामला दर्ज किया था लेकिन सुसाइड डायरी, नोट मिलते ही दूसरे ही दिन 10 जून को पुलिस ने धारा 302 को हटा लिया। इसकी जगह आत्महत्या के लिए उकसाने की नई धारा 306 जोड़ी गई। करसोग मंडल में काटे गए सैंकड़ों पेड़ों के कटान के मामले में वन महकमे की एसआईटी जांच कर रही है।

मेहनत और प्लानिंग से मंडी के कालीदास ने लगाया आम का बागीचा, कमा रहे हैं लाखों

मंडी।। स्वरोजगार के जरिए जीवन बदल सकता है। हम प्रदेश के युवाओं के लिए अब कई ऐसे कामयाब लोगों की कहानियां ला चुके हैं जो घर बैठे ही मेहनत करके लाखों कमा रहे हैं। हमें अखबारों, न्यूज पोर्टल्स या फेसबुक आदि के जरिए किसी के बारे में पता चलता है तो हम उसकी कहानी अपने पाठकों से जरूर शेयर करते हैं। इसी कड़ी में हम आपको आज मंडी जिले के कालीदास के बारे में बताने जा रहे हैं। 60 साल के कालीदास बागवानी में माहिर हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हुए वह सफलता से पैसे भी कमा रहे हैं।

कालीदास मंडी जिले के जोगिंदर नगर की ग्राम पंचायत कुछेड़ा के रहने वाले हैं। घर के पास उनकी ढलानदार पहाड़ी पर सीढ़ीनुमा खेत थे जहां पारंपरिक तौर पर मक्की उगाई जाती थी। मगर मक्की से अच्छे रिटर्न्स नहीं मिल रहे थे। ऐसे में उन्होंने बागवानी करने का फैसला किया और सरकार से अनुदान पर आम के पौधे लिए और करीब 250 पौधे लयहां लगा दिए। ऐसा नहीं किया कि एक ही वराइटी लगाई। दशहरी, सफेदा और लंगड़ा जैसी किस्में लगा दीं। आग इनका आमों का बाग तैयार है। हर साल वह करीब 40 क्विंटल आम पैदा कर रहे हैं और इनकी बिक्री से अच्छी खासी कमाई भी कर रहे हैं।

कालीदास बताते हैं कि पास के ही गांव में रहने वाले ऋषि राणा ने उनकी मदद की जो उपनिदेशक, उद्यान रिटायर हुए हैं। उन्होंने कई जानकारियां मुहैया करवाईं। अब बाग लगाया तो सिंचाई जरूरी है। इसलिए लिए उन्होंने पास के ही नाले से पानी की व्यवस्था की और चेक डैम बनवाया और अपने यहां टैंक भी बनवाया। पाइप के लिए भी सरकार से मदद मिली।
अपनी मेहनत और सरकार की योजनाओं का सही से लाभ उठाकर उन्होंने आज कामयाबी की इबारत लिखी है।

फलों को जंगली जानवरों या फिर मौसम की मार से बचाने के लिए उन्होंने बीमा भी करवा दिया है। कालीदास कहते हैं कि वह कीटनाशक वगैरह को इस्तेमाल करने से बचते हैं। फलों को भी प्राकृतिक तौर पर ही पकने दिया जाता है। इसीलिए उनके बाग के आम ए ग्रेड होते हैं। ज्यादाकर लोग तो उनके घर आकर ही आम ले जाते हैं। खास बात यह है कि वह कलम लगाने में भी एक्सपर्ट हो गए हैं। उन्होंने विभाग से इसकी ट्रेनिंग ली है। वह अन्य लोगों के यहां भी कलम लगाने जाते हैं जिससे उनकी अतिरिक्त इनकम हो जाती है।

कालीदास जैसे मेहनती लोग हमें सिखाते हैं कि सरकारी योजनाएं और सब्सिडी वगैरह खाने-उड़ाने के लिए नहीं बल्कि धैर्य और प्लानिंग के लगाने के लिए है। तभी कामयाबी मिलेगी। वरना प्रदेश में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो दिखावे के लिए सरकारी योजनाओं से वॉटर टैंक, ग्रीनहाउस और अन्य चीजें बनवाते हैं और कुछ ही दिनों में किसी और काम के लिए उन्हें इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं।

हिमाचल में पहली बार रोबॉटिक मशीन से लगाई जाएंगी कलमें

पालमपुर।। हिमाचल प्रदेश में बागवानी आदि को गति देने के लिए अब रोबॉटिस साइंस की मदद ली जा रही है। कृषि विश्वविद्यालय ने किसान समुदाय के लिए ग्राफ्टिंग मशीन स्थापित करने की तैयारी की है। यह देश में अपनी तरह का दूसरा रोबॉट बताया जा रहा है। इससे पहले इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ हॉर्टिकल्चर रिसर्च बेंगलरु में ही इस तरह से ग्राफ्टिंग (कलम लगाना) की जाती है।

इस रोबॉट की सहायता से विभिन्न सब्जी किस्मों की पौध की ग्राफ्टिंग कर मैटीरियल किसानों को उपलब्ध करवाया जाएगा। राज्य में पिछले कुछ वर्षों में सब्जी उत्पादन में कई गुना बढ़ौतरी हुई है तथा ऑफ सीजन सब्जी उत्पादन को लेकर हिमाचल एक अग्रणीय राज्य बन कर उभरा है, ऐसे में उच्च गुणवत्ता युक्त पौध की मांग भी बड़ी ही है। माना जा रहा है कि कम समय में अधिक पौध तैयार की जा सके इसी के दृष्टिगत रोबोट की सहायता ली जाएगी।

क्या है ग्राफ्टिंग
कलम बांधने की तकनीक ग्राफ्टिंग कहलाती। इस तकनीक में दो या दो से अधिक पौधों के कुछ हिस्सों को जोड़ा जाता है, जिससे कि वे एक ही पौधे के रूप में विकसित हों। कलम बांधने की प्रक्रिया में ऊपरी भाग में इस्तेमाल होने वाला भाग वंशज कलम के रूप में जाना जाता है और निचला हिस्सा जो कि जड़ प्रणाली को बनाता है, पालटी या रूट स्टॉक के रूप में जाना जाता है। कलम बांधने की प्रक्रिया को एक स्थापित पेड़ पर एक या एक से अधिक विभिन्न किस्मों को टॉप वर्किंग के माध्यम से स्थापित करने के लिए भी इस्तेमाल की जा सकती है। यह एक कठिन काम है और अभ्यास की बहुत आवश्यकता होती है, ऐसे में कृषि विश्वविद्यालय में आवश्यक सारे कार्य को रोबोट की सहायता से मूर्त रूप दिया जाएगा।

कृषि विश्वविद्यालय के सब्जी विज्ञान एवं पुष्प उत्पादन विभाग द्वारा ग्राफ्टिंग मशीन की स्थापना की जा रही है। इस विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफैसर अशोक सरयाल किसान समुदाय को 3 जुलाई को इस रोबोट का लोकार्पण करेंगे। दक्षिण कोरिया के इंजीनियर जर्मी एच.जे. पाक के सहयोग से सब्जी शोध फार्म में इस स्थापित किया गया है।

एचआरटीसी वोल्वो में hmpc की पानी की बोतल में तैरती मिली गंदगी

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश सरकार के उपक्रम hmpc के बारे में आपने सुना ही होगा जो जगह-जगह फलों के जूस और अन्य प्रॉडक्ट बेचती है। एचपीएमसी के मिनरल वॉटर की बोतलें भी उपलब्ध हैं। मगर आप अगर यह सोचकर एचपीएमसी का पानी लेते हैं कि सरकारी है तो अच्छा होगा, तो सावधान हो जाएं। हिमाचल पथ परिवहन निगम की वोल्वो बस से यात्रा कर रहे एक यात्री ने बस मे दी जाने वाली hpmc की वॉटर बॉटल का वीडियो डाला है जिसमें बोतल के अंदर कई तरह की अशुद्धियां तैरती हुई नजर आ रही हैं। यह पहला मौका नहीं है जब hpmc के पानी में शिकायत आई हो। पहले भी यात्री पानी खराब होने की शिकायत करते रहे हैं। नीचे वीडियो देखें:

फेसबुक पर आदर्श राठौर नाम के एक शख्स ने दो वीडियो पोस्ट किए हैं। पहले वीडियो में सीलबंद बोतल नजर आ रही है और फिर कैमरे को बोतल से सटाने पर अंदर कुछ अशुद्धियां तैरती नजर आती हैं। दूसरा वीडियो और करीब से लिया गया है जिसमें कई तरह की गंदगियां तैरती दिखती हैं। वीडियो के साथ पोस्ट किया गया है- ‘HRTC वॉल्वो बस से यात्रा करें तो उसमें दिया जाने वाला hpmc का पानी बिल्कुल न पिएं। पिछली बार यात्रा करते वक्त स्वाद अजीब लगा था। इस बार बोतल को चेक किया तो कई कण तैरते मिले।’ (दूसरा वीडियो नीचे है)

गौरतलब है कि पहले भी hrtc के यात्रियों ने इस तरह की शिकायत की थी। अगस्त 2014 में वोल्वो बसों मे यात्रियों को दिए जाने वाली बोतल में कचरा आने पर HRTC ने HPMC को नोटिस भेजा था। एचपीएमसी ने उस वक्त दावा किया था कि पानी सप्लाई करने वाली कंपनी को बदला जाएगा और नई कंपनी को ठेका दिया जाएगा (पढ़ें खबर)। मगर वीडियो में दिख रहे इन कणों को देखकर तो यही लगता है मानो पानी को फिल्टर किए बिना ही डाल दिया गया है। अगर ऐसा है तो सरकारी कंपनी की तरफ से यह बड़ी लापरवाही है।

10 साल में भी नहीं बन पाया ठियोग-हाटकोटी-रोहड़ू रोड, वर्ल्ड बैंक ने नहीं दिया एक्सटेंशन

शिमला।। जिस सड़क को कांग्रेस ने चुनावी मुद्दा भी बनाया था, वह पूरी नहीं हो सकी है। हम बात कर रहे हैं ठियोग-हाटकोटी-रोहड़ू सड़क की जो ऐपल बेल्ट के लिए वरदान बनने वाली सड़क होगी। वर्ल्ड बैंक ने हिमाचल मे 10 रोड प्रॉजेक्ट्स के लिए 281 मिलियन डॉलर्स का लोन दिया था जिसमें यह सड़क भी शामिल है। 2007 में शुरू हुआ काम 30 जून 2017 को खत्म होना था मगर तय वक्त में यह पूरा नहीं हो पाया है। अब वर्ल्ड बैंक ने इसके लिए एक्सटेंशन देने से इनकार कर दिया है।

हिमाचल प्रदेश मे ऐपल सीजन शुरू होने को है। इस साल विधानसभा चुनाव भी होंगे। चूंकि वर्ल्ड बैंक ने एक्सटेंशन देने से इनकार कर दिया है और यह कांग्रेस का चुनावी मुद्दा रहा था, ऐसे में प्रदेश सरकार के माथे पर बल पड़ना लाजिमी है। इसलिए अधूरे काम को सरकार अब अपने स्तर पर पूरा करने जा रही है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पास ही PWD डिपार्टमेंट है और वह खुद कह चुके हैं कि मै जुगाड़ से सरकार चला रहा हूं। इसलिए हैरानी नहीं होगी अब इस सड़क को पूरा करने के लिए कहां का बजट खर्च किया जाता है। वैसे भी बीजेपी नेता आरोप लगाते रहे हैं कि सरकार इधर के बजट उधर कर रही है जिससे कोई भी काम ढंग के नहीं हो पा रहे।


हिमाचल वॉचर द्वारा अगस्त 2016 में डाला गया वीडियो

वर्ल्ड बैंक ने इस सड़क के लिए 322 करोड़ रुपये मंजूर किए थे जो जो खत्म हो गए हैं। अब इस सड़क में 20 से 25 करोड़ रुपये और खर्च होने का अनुमान है। उधर अमर उजाला अखबार लिखता है कि लोक निर्माण विभाग के मुताबिक सीऐंडसी कंपनी ने इस सड़क का 80 पर्सेंट काम पूरा कर लिया है। इस सड़क में 300 मीटर तक सड़क की कटिंग होगी, पुल बनेंगे और रिटेनिंग वॉल्स भी बनाई जाएंगी।

71 की लड़ाई में पैर गंवा चुके बुजुर्ग भूतपूर्व सैनिक और पत्नी पर जानलेवा हमला

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, बिलासपुर।। बिलासपुर जिले के घुमारवीं उपमंडल के कगहरानी गांव में 85 साल के भूतपूर्व सैनिक देवी शरण अपनी 80 वर्षीय पत्नी प्रेमी देवी शर्मा के साथ घर पर अकेले थे। 15 जून को उनके ऊपर हमला कर दिया गया। जिस फौजी ने 1962 में चीन ऑपरेशन के अलावा 1965 व 1971 की लड़ाई-लड़ते वक्त अपनी एक टांग गंवा दी थी, वही शख्स आज ऐसी बेबसी से पुलिस की लचर कार्यप्रणाली को देख रहा है।

एमबीएम न्यूज नेटवर्क को दंपत्ति के दोहते माधव शर्मा ने हमले से घायल दंपत्ति की मार्मिक तस्वीरें भेजी हैं। साथ ही पाठकों से न्याय दिलवाने में मदद का आग्रह किया है। हमले की वजह जो भी रही हो, लेकिन भूतपूर्व सैनिक की पत्नी को घायल हालत में पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया। आप यह भी जानकर हैरान होंगे कि बुजुर्ग महिला की 8 दिन तक सर्जरी नहीं की जा सकी, क्योंकि उनकी ह्रदयगति व ब्लड प्रैशर स्थिर नहीं था।

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सवाल उठता है कि क्या इस संगीन मामले में हत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज नहीं होना चाहिए था? प्रश्न यह भी है कि जब एक समय में देश के जांबांज सिपाही रहे शख्स देवी शरण को ही पुलिस से न्याय लेने में इस तरह की परेशानी पेश आ रही है तो आम व्यक्ति के हालात क्या हो सकते थे। माधव का कहना है कि पुलिस यह कहकर पल्ला झाड़ रही है कि जमीनी विवाद से मामला जुड़ा हुआ है। मेडिकल रिपोर्ट में ही गंभीर चोटें आने की सूरत में सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इस मामले में एसपी बिलासपुर से बात नहीं हो पाई है। लिहाजा अगर पुलिस का पक्ष सामने आता है तो प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाएगा।

कुल्लू की पूनम ने घर बैठे जमाया करोड़ों का कारोबार

कुल्लू।। ‘इन हिमाचल’ वक्त-वक्त पर आपको हिमाचल के उन कामयाब लोगों के बारे में बताता रहता है जो स्वरोजगार के जरिए न सिर्फ खुद अच्छा-खासा कमा रहे हैं बल्कि दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं। आज हम आपको कुल्लू जिले के भुंतर इलाके की पूनम के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने रसोई में काम करते-करते बड़ा काम कर दिखाया। उनके उत्पाद को  आज देश ही नहीं बल्कि देश के भी कई हिस्सों में भेजा जाता है और इससे करोड़ों की कमाई होती है।

हिंदी पोर्टल ‘समाचार फर्स्ट’ लिखता है कि भुंतर की एक गृहिणी पूनम घई ने अपने हाथों से बने मसालों को रेडिमेड तड़के की महक देते हुए सात समंदर पार के देशों में पहुंचा दिया है। पूनम के इस हुनर और मेहनत को देखते हुए उद्योग विभाग ने भी उसकी मदद की जिसके बाद वह इस मुकाम तक पहुंच पाई है। आज देश के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी पूनम का रेडी टू कुक स्पाइस मिक्स रेडिमेड तड़का इस्तेमाल किया जा रहा है, और लोग इसे काफी पसंद भी कर रहे हैं।

अन्य लोगों को भी मिल रहा है रोजगार (Image: Samachar First)

पूनम भुंतर में रहती हैं, उन्हें बचपन से ही स्वादिष्ट और जायकेदार भारतीय व्यंजन का बहुत शौक रहा है। वह अपनी रसोई में नित नए-नए प्रयोग करती रहती थी। तरह-तरह के व्यंजन तैयार करके अपने परिजनों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों को जब वह परोसतीं तो सभी उंगुलियां चाटते रह जाते और उनकी पाक-कला की तारीफ किए बगैर नहीं रहते। कई महिलाएं विशेषकर विदेशों में बसीं उनकी रिश्तेदार अक्सर उनसे विभिन्न व्यंजनों की रेसिपी पूछती रहती थीं।

आप भी सीखें, पूनम ने कैेस बढ़ाया बिजनस
कुछ साल पहले पूनम ने घर में ही मसालों के पैकेट और रेडिमेड तड़का ‘रेडी टू कुक स्पाइस मिक्स’ तैयार करके अपने रिश्तेदारों में बांटना शुरू किए। फिर उन्होंने इस कारोबार में ही हाथ आजमाने का निर्णय लिया। उन्होंने आरआर एंटरप्राइजेज के नाम से मसालों का घरेलू उद्योग आरंभ किया। उद्योग विभाग ने राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण मिशन के तहत आरआर एंटरप्राइजेज को 33.33 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की। पूनम ने बताया कि उन्होंने अपने कारोबार के विस्तार के लिए खाद्य प्रसंस्करण मिशन के अंतर्गत 18 लाख रुपये का ऋण लिया, जिस पर उद्योग विभाग ने लगभग छह लाख रुपये की सब्सिडी दी। उद्योग विभाग की इस सब्सिडी योजना ने उनके कारोबार को पंख लगा दिए। अब वे निमकिश ब्रैंड के नाम से विभिन्न भारतीय व्यंजनों के लिए कई प्रकार के मसाले तैयार कर रहे हैं।

आरआर एंटरप्राइजेज का रेडिमेड तड़के ‘रेडी टू कुक स्पाइस मिक्स’ की बाजार में विशेषकर विदेशों में मांग तेजी से बढ़ रही है। इसमें विभिन्न मसालों के अलावा तड़के का पूरा सामान जैसे-प्याज, लहसुन और अदरक इत्यादि का मिश्रण किया जाता है। इस उत्पाद ने रसोई में तड़के के सामान को तैयार करने का झंझट ही खत्म कर दिया है। विशेषकर कामकाजी महिलाओं के लिए यह रेडिमेड तड़का एक वरदान साबित हो रहा है, क्योंकि इससे उनके समय की काफी बचत होती है। भारत के अलावा कनाडा, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और अन्य देशों में इसकी काफी मांग है। पूनम ने बताया कि वह घर में ही 15 अन्य महिलाओं को रोजगार दे रही हैं और उनका सालाना टर्नओवर एक करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें से 60 प्रतिशत माल विदेशों को निर्यात किया जा रहा है।