शिमला।। शिमला के कोटखाई में हुए रेप ऐंड मर्डर केस में अब तक खुलासा न होने से लोगों में गुस्सा देखा जा रहा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से पत्रकारों ने सवाल किए तो उन्होंने बताया कि पीड़िता के परिवार के लिए 5 लाख रुपये मंजूर किए हैं। जब उनसे कहा गया कि स्थानीय जनता सीबीआई जांच की मांग कर रही है तो मुख्यमंत्री जनता पर भड़क गए और कहा कि वहां की जनता जरूरत से ज्यादा होशियार है। इस बीच पुलिस ने मामले की जांच के लिए SIT का गठन कर दिया है।
पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा, ‘मामले की छानबीन की जा रही है। लड़की के परिवार को 5 लाख रुपये भी मंजूर किए हैं।’ सीबीआई जांच की मांग को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी पुलिस सीबीआई से कहीं अच्छा काम करती है।
वीडियो: Samachar First से साभार
इसके बाद बताया गया कि सीबीआई जांच की मांग को लेकर लोग राज्यपाल से भी मिले हैं। इस पर मुख्यमंत्री का कहना था, ‘कोटखाई के लोग जो हैं, वो जरूरत से ज्यादा होशियार हैं। जब जांच हो रही है। इस मामले में हर पहलू देखा जा रहा है। इसमें उतावलापन दिखाने की जरूरत नहीं है। ऐसा नहीं है कि हमारी पुलिस किसी केस को सॉल्व करने मे सक्षम नहीं है।’
पुलिस ने किया SIT का गठन इस बीच हिमाचल प्रदेश पुलिस ने चार पुलिस अधिकारियों के विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। पुलिस महानिदेशक सोमेश गोयल ने बताया कि आईजी शिमला एसजेडएच जैदी के नेतृत्व में जांच दल गठित किया गया है। उन्होंने कहा है कि पुलिस मामले को गंभीरता से ले रही है इसमें कोई कोताही नहीं बरती जाएगी और हत्यारे जल्द पुलिस की गिरफ्त में होंगे।
शिमला।। हिमाचल प्रदेश में बढ़ते हुए अपराधों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और कांगड़ा से सांसद शांता कुमार ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि कोटखाई में 10वीं की छात्रा से बलात्कार और फिर शर्मनाक तरीके से हत्या एक दुर्भाग्यपूर्ण और निन्दनीय घटना है। इससे पूरे हिमाचल में चिन्ता और गुस्सा व्यक्त हुआ है। हिमाचल जैसे धार्मिक और शान्त प्रदेश में शायद इस प्रकार की यह पहली दर्दनाक घटना है। उन्होंने कहा है कि वन विभाग के एक ईमानदार कर्मचारी की हत्या और फिर उसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश और शुरू में पुलिस जांच में की गई कोताई एक और दर्दनाक घटना है।
शांता कुमार ने हिमाचल सरकार से विषेश आग्रह किया है कि प्रदेश में इस प्रकार के घिनौने अपराधों को रोकने के लिए अति शीघ्र कार्यवाही करे। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में अपराधों की संख्या बढ़ती जा रही है। उन्होने कहा है कि कोटखाई में छात्रा के साथ बलात्कार और हत्या की घटना हिमाचल के माथे पर एक शर्मनाक कलंक है। उन्होने जनता से अपील की है कि वे शांति प्रिय तरीके से गुस्सा तो प्रकट करे परन्तु अपनी पूरी शक्ति उसी मे न लगा दे। यह पाप करने वाले दरिन्दे आसमान से नहीं उतरे थे, उसी इलाके के आस-पास के है। उन्हे ढूंढने में जनता भी पुलिस की पूरी मदद करे। पुलिस को इस समय तक ऐसे अपराधियों को ढूंढने के लिए सूचना देने वाले को कुछ लाख रुपये के ईनाम की घोषणा करनी चाहिए थी।
शान्ता कुमार ने प्रेस रिलीज जारी करके कहा है कि भगवान के बाद दूसरी बड़ी शक्ति केवल सरकार है। सरकार बहुत कुछ कर सकती है। हिमाचल की पुलिस की अच्छी छवि है परन्तु यदि उस छात्रा के अपराधी दरिन्दे को नहीं ढूढ पाई तो यह पुलिस की कार्य-शैली पर एक बहुत बड़ा धब्बा होगा। उन्होंने कहा सरकार कुछ भी करे पर उन दरिन्दों को पकडे़। यह घटना हिमाचल में पहली और अन्तिम घटना होनी चाहिये। यदि सरकार विफल रही तो ऐसे दरिन्दों की हिम्मत बढ़ जाएघी। उन्होंने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह जी से विशेष आग्रह किया है कि वह इस मामले में सरकार की पूरी शक्ति झोंककर अति शीघ्र अपराधियों को उचित दण्ड देने की व्यवस्था करें।
मंडी।। केसीसी बैंक में भर्तियों के लिए हो रहा एग्जाम पहले से ही विवादों में है। अब मंडी में उस वक्त युवाओं के साथ ठगी सी हो गई जब वहां इस परीक्षा का आयोजन करवा रहा हिमाचल स्कूल बोर्ड प्रश्न पत्र ही नहीं पहुंचा सका। बताया जा रहा है कि यहां 200 ही प्रश्न पत्र थे जबकि एग्जाम देने वाले 1000 के करीब थे। दूर-दूर से आए लोगों को निराशा हाथ लगी है। सोशल मीडिया पर लोगों ने इसके वीडियो और पोस्ट्स डाली हैं जिन्हें आप नीचे देख सकते हैं।
आलम यह रहा कि नाराज युवाओं को समझाने के लिए पुलिस भी वहां आ गई। गौरतलब है हाई कोर्ट में डाली गई एक याचिका में पहले कहा गया था कि बैंक के नॉन परफार्मिंग असेट्स (एनपीए) 15 फीसदी से अधिक हैं। आरबीआई के नियमों के अनुसार एनपीए अगर 10 फीसदी से ज्यादा हो तो न तो कोई नई बैंक शाखा खोली जा सकती है और न ही नई भर्तियां हो सकती हैं। इस पर हिमाचल हाईकोर्ट ने कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक में विभिन्न श्रेणियों के 216 पदों के लिए होने वाली भर्ती परीक्षा से पहले फाइनल रिजल्ट पर रोक लगा दी थी। यानी टेस्ट हो रहे है कि लेकिन नतीजा कोर्ट की अनुमति के बाद ही निकलेगा। मगर 8 और 9 को हुए टेस्टों में कई जगह गड़बड़ी देखने को मिली है। हमीरपुर में कुछ लोगों ने कहा था कि एग्जाम सेंटर का पूरा पता न दिए जाने पर उन्हें बहुत असुविधा हुई। अब मंडी में क्या हाल हुए, नीचे देखें:
शिमला।। शिमला में हुई 10वीं की छात्रा की रेप के बाद हत्या के मामले में जो जानकारियां सामने आ रही हैं, वे रूह को कंपा दे रही हैं। हिंदी अखबार अमर उजाला लिखता है कि रेप और हत्या के बाद पीड़िता के शव को सबसे पहले उसके मामा ने देखा। मामा का कहना है कि कुछ देर के लिए तो मैं सन्न रह गया। बेटी की बाजू और टांग को तोड़कर मोड़ दिया गया था। शरीर पर खरोंचों के भी निशान थे।
पिता ने कहा- मैं दरिंदों से कुछ पूछना चाहता हूं
अखबार के मुताबिक लड़की के मामा का कहना है कि यह दरिंदगी किसी एक शख्स की नहीं हो सकती, इसके पीछे गैंग है। उन्होंने कहा कि हमारी बेटी की चीखें जंगल में ही दबकर रह गईं और पुलिस इस मामले में कुछ नहीं कर रही। उधर शिमला के एसपी डीडब्ल्यू नेगी ने विक्टिम के पिता से बात की तो पिता ने कहा, ‘पहले दोषियों को पकड़कर मेरे पास लाओ। वे पहले मेरे गुनहगार हैं उसके बाद कानून के। मैं उन्हें देखना चाहता हूं, उनके कुछ पूछना चाहता हूं।’
मां बोली- उन्हें भी तड़पाया जाना चाहिए
लड़की की मां ने रोते हुए कहा कि जिन लोगों ने मेरी बेटी को तड़पाया है, उन्हें भी उसी तरह तड़पाया जाना चाहिए। दरिंदों को किसी भी हाल में नहीं छोड़ा जाना चाहिए। परिजनों ने एसपी को अल्टीमेटम दिया है कि चार दिन में न्याय न मिला तो वे गांव से निकलकर पूरे जिले में धरना-प्रदर्शन करेंगे।
जानवरों से भी खतरनाक निकला इंसान
परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि इस घटना को अंजाम देने वाले जंगली जानवरों से भी खतरनाक निकले। भाई-बहन जिस जंगल से होकर रोज स्कूल जाते थे, वह भालुओं और तेंदुओं से भरा हुआ है। मगर खतरा उन्हें जंगली जानवरों से नहीं, बल्कि इंसानों से हुआ।
शिमला।। प्रदेश के शिमला के कोटखाई में छात्रा से रेप के बाद हत्या को कई घंटे बीत जाने के बाद मामले में अब तक पुलिस के हाथ खाली हैं। जिस तरह से होशियार सिंह के मामले में पहले पोस्टमॉर्टम और फिर फरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था, इस मामले में भी पुलिस अभी इसी रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। अब तक पुलिस के हाथ खाली ही हैं।
हिंदी अखबार अमर उजाला की आज ही हेडलाइन कहती है- ’72 घंटे: वहशी दरंदिों का सुराग नहीं खोज सकी स्मार्ट शिमला पुलिस।’ अखबार लिखता है कि पीड़िता के गांव और आसपास के इलाके में ऐसा माहौल है कि महिलाएं और बच्चियां घरों से बाहर नहीं निकल रही हैं। अखबार के मुताबिक सभी दहशत में हैं और बच्चों को स्कूल तक नहीं भेज रहे। ग्रामीण पुलिस से सुरक्षा मांग रहे हैं।
4 जुलाई को स्कूल से घर के लिए निकली यह बच्ची लापता हो गई थी। 6 जुलाई को उसका शव जंगल में नग्न अवस्ता में पड़ा हुआ था। शव के पास शराब की बोतलें भी पड़ी थीं। रेप के बाद हत्या की आशंका जताई गई थी। घटना के चौथे दिन शिमला के एसपी डीडब्ल्यू नेगी घटनास्थल पर पहुंचे। अखबार लिखता है कि गुस्साए ग्रामीणों और परिजनों को आश्वासन के अलावा वह कुछ नहीं दे सके हैं। इस बीच लोग प्रदर्शन भी कर रहे हैं।
एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी ने कहा है कि पुलिस ने कई पहलुओं पर जांच शुरू कर दी है और आरोपी जल्द ही पकड़ लिए जाएंगे। मैंने खुद मौके का मुआयना किया है और परिजनों को हर संभव कार्रवाई का भरोसा दिया है। टीम अभी भी वहीं पर डटी हुई है।
शिमला।। पहले से ही चालीस हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज के सागर में डूबी हिमाचल सरकार फिर से 500 करोड़ रुपए का कर्ज लेने जा रही है। मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार की कर्ज उठाने की सीमा 3 हजार करोड़ रुपए है। इस तय सीमा के 50 फीसदी के कुछ ही कम तक हिमाचल सरकार कर्ज ले चुकी है। इनाडू इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक वीरभद्र सरकार 1300 करोड़ रुपए का कर्ज उठा चुकी है।
हिमाचल प्रदेश की माली हालत इस कदर खराब है कि खजाने का अधिकांश हिस्सा वेतन और पेंशन पर ही चला जाता है। संसाधनों की कमी झेल रहा हिमाचल पहले ही करीब 43 हजार करोड़ रुपए के कर्ज में है। कई दफा वित्तीय विशेषज्ञ ये बता चुके हैं कि अधिक कर्ज लेना राज्य सरकार को दिवालिएपन की तरफ धकेल सकता है। इतना ही नहीं ,कैग ने भी हिमाचल को कर्ज न लेने की चेतावनी दी है, लेकिन विकास कार्यों के लिए लगातार पैसे की कमी के कारण राज्य सरकार को बार-बार कर्ज लेना पड़ता है।
खबर के मुताबिक शुक्रवार को राज्य के वित्त विभाग ने कर्ज लेने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी। कर्ज की रकम 12 जुलाई तक यह हिमाचल सरकार को मिल जाएगी। यह कर्ज 10 साल की अवधि के लिए लिया जा रहा है। ऐसे में जुलाई 2027 तक सरकार को ब्याज सहित इसे वापस लौटाना होगा। तर्क दिया जा रहा है कि ये लोन विकास कार्य को गति प्रदान करने के लिए लिया जा रहा है।
राज्य में सरकारी कर्मियों के वेतन और सेवानिवृत कर्मियों की पेंशन पर ही सरकारी खजाने का अधिकांश हिस्सा खर्च हो जाता है। पेंशन व वेतन तथा अन्य भत्तों का बिल ही करीब 13 हजार करोड़ रुपए सालाना का है। पेंशन पर करीब 44 सौ करोड़ रुपए और वेतन व भत्तों पर करीब 9 हजार करोड़ की रकम हर साल खर्च होती है। इसके अलावा सरकार को 4 हजार करोड़ सालाना अन्य प्रतिबद्ध देनदारियों के भुगतान पर खर्च करने पड़ते हैं।
हर साल देनदारियों, वेतन और भत्तों के साथ पेंशन के भुगतान के लिए सरकार को 17 हजार करोड़ की रकम चाहिए। इधर, हालात ये हैं कि प्रदेश के आर्थिक संसाधन इस कदर नहीं कि वह इन देनदारियों का भुगतान खुद वहन कर सके। हालांकि 14 वें वित्तायोग से प्रदेश को राजस्व घाटा अनुदान के तौर 46625 करोड़ की रकम 5 सालों में मिलनी है। मगर केंद्र ने इस राशि को जारी करने के साथ राजस्व घाटा कम करने और वित्तीय अनुशासन को अपनाने की शर्त भी लगाई है।
कर्ज लेने के बावजूद राज्य सरकार विकास कार्य के लिए 100 रुपए में से सिर्फ 40.86 रुपए ही खर्च कर पा रही है। कर्ज का बोझ राज्य पर इतना है कि इसको चुकाने के लिए 100 रुपए में से 10.43 रुपए ब्याज अदा करना होता है। इसके अलावा और 100 रुपए में से 6.84 रुपए कर्ज अदायगी पर व्यय करने पड़ रहे हैं। लगातार कर्ज उठाने तथा प्रदेश की वित्तीय स्थिति को देखते हुए राज्य के दिवालिएपन की तरफ जाने की आशंका है।
आईएस ठाकुर।। टोपी पहनाना एक मुहावरा है। इस मुहावरे का अर्थ है- बेवकूफ बनाना या झांसा देना। हिमाचल प्रदेश में चुनाव आने वाले हैं, ऐसे में टोपी पहनाने का खेल शुरू हो चुका है। हिमाचल के साथ अच्छी बात यह है कि यहां पर पहनाने के लिए अपनी टोपी है जो आज दुनिया भर में ‘हिमाचली टोपी’ के नाम से पहचानी जाती है। और हमारे नेता तो टोपी पहनाने में एक्सपर्ट हैं। हर किसी ने अपनी-अपनी टोपी तय कर ली है और वे अपने समर्थकों को इसी टोपी को पहनाते हैं। जैसे कि वीरभद्र और उनके समर्थक और ज्यादा कांग्रेसी हमेशा हरे रंग की टोपी पहनेंगे और पहनाएंगे भी। हरे रंग वाली इस टोपी को बुशहरी टोपी या किन्नौरी टोपी कहते हैं। वहीं धूमल और उनके समर्थक और बीजेपी वाले लाल रंग की ही टोपी पहनेंगे और इसी को पहनाएंगे भी। यह कुल्लुवी टोपी की एक किस्म है और तथाकथित निचले हिमाचल के कई हिस्सों में पहनी जाती है। यानी हर बड़ा राजनेता अपनी तरह की टोपी पहनाना पसंद करता है। जरूरी नहीं है कि किसी को झांसे में लेने के लिए उसे टोपी पहनाना जरूरी है, टोपी पहनकर भी सामने वाले को झांसे में लिया जा सकता है। खासकर तब, जब टोपी पहनने वाला बड़ी शख्सियत हो। उदाहरण के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी।
इसरायल के दौरे पर गए प्रधानमंत्री मोदी लाल रंग की टोपी पहने नजर आए। देश के अन्य हिस्सों के लोग नहीं समझ पाए मगर हिमाचल के लोग समझ पाए कि ये तो हिमाचली टोपी है। बीजेपी वाले तो फूले नहीं समाए क्योंकि मोदी जी ने वही टोपी पहनी थी, जो उन्हें उनके नेता धूमल जी ने पहनाई है। जी हां, लाल रंग वाली ये कुल्लुवी टोपी धूमल जी के पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही पॉप्युलर हुई और इसे वीरभद्र सिंह की हरी टोपी के जवाब के तौर पर अपनाया गया। अब कुछ लोग तो इतने खुश हुए कि उन्होंने बाकयादा प्रेस नोट निकालकर मोदी जी को धन्यवाद कर दिया हिमाचली टोपी पहनने के लिए। कुछ सांसद (जो खुद टोपी नहीं पहनते हैं क्योंकि शायद उन्हें लगता है कि टोपी पहनना ट्रेंडी नहीं है) वे कहने लगे कि मोदी जी ने तो हिमाचल का मान बढ़ा दिया यह टोपी पहनकर। मगर कुछ लोग ऐसे भी थे जिनका कहना था कि मोदी जी ने टोपी पहनी नहीं है, पहनाई है। शायद ये लोग समझ गए थे कि मोदी जी की टोपी के जरिए कुछ लोग फिर से जनता को टोपी पहनाने में लग गए हैं।
हिमाचली टोपी पहने नजर आए पीएम मोदी
मैंने कई दोस्तों को फेसबुक पर लिखते देखा कि मोदी जी सही टाइमिंग चुनी है हिमाचली टोपी पहनने के लिए। उन्हें खास तौर पर वही लाल टोपी पहनी, जो हिमाचल में बीजेपी वाले पहना करते हैं। अगर मोदी ने हरी टोपी या धारीदार कुल्लुवी टोपी पहन ली होती तो बीजेपी काडर इतना उत्साहित न होता। ठीक भी कहा। दरअसल मोदी जी इस खेल के माहिर खिलाड़ी हैं। वे जानते हैं कि कौन सी चीज लोगों को कहां टच करती है। इसीलिए अचानक मोदी जी का हिमाचल प्रेम हिलोरें मार रहा है। मगर यह प्रेम अचानक क्यों उमड़ आया? लोग कहते हैं कि इलेक्शन की वजह से मोदी जी जरा हिमाचलियो को लुभाने में जुटे हैं। मैं उनसे सहमत हूं और मेरी समझ भी यही कहती है कि मोदी जी बहुत चतुराई से हिमाचलियों को मोहने में जुटे हैं। पहले पिछले दिनों की कुछ घटनाओं पर नजर डाल लेते हैं:
1. उड़ान योजना का हिमाचल से आगाज: मोदी जी ने उड़ान नाम की योजना शुरू की और कहा, भाइयो-बहनो, मेरा ख्वाब था कि हवाई चप्पल पहनने वाला व्यक्ति भी हवाई यात्रा कर सके। कम दूरी वाले एयरपोर्ट्स के बीच सस्ती यात्रा की शुरुआत करने के लिए मोदी जी कहीं और भी जा सकते थे, मगर हिमाचल को क्यों चुना? दरअसल एक तो कोर्ट पहले ही कह चुका था कि शिमला के लिए उड़ान क्यों नहीं है और कनेक्टिविटी यहां पर होनी चाहिए। इसलिए सरकार को यहां से हवाई सेवा तो देनी ही थी। साथ ही हिमाचल में इलेक्शन के लिए 1 साल से कम वक्त बचा था, इसलिए वहां जाकर भाषण आदि देकर कैंपेनिंक की अप्रत्यक्ष शुरुआथ भी तो करनी थी। तो मोदी जी चले आए उड़ान का आजाग करने शिमला और उनके जाने के बाद यह योजना फुस्स हो गई और टिकट महा महंगे हो गए और सुलभ भी नहीं रहे। यानी माहौल तो बहुत बना, मगर जमीन पर हवाई चप्पल पहनने वालों को तो क्या, महंगे जूते पहनने वालों तक को फायदा नहीं हो रहा।
2. ट्रंप की पत्नी को हिमाचली तोहफे: हिमाचल का मीडिया और बीजेपी कार्यकर्ता तब और भी दीवाने हो गए जब मोदी जी ने अमेरिका के राष्ट्रपति की पत्नी को कुल्लू शॉल, चांदी का ब्रेसलेट और कांगड़ा चाय गिफ्ट की। अच्छी बात है, मुझे खुशी हुई कि चलो हिमाचल का कुछ नाम हुआ। मगर मैं टाइमिंग पर शक क्यों न करूं? चुनाव की तैयारियों में जुटी है प्रदेश बीजेपी, अमित शाह कई चक्कर लगा चुके हैं, परिवर्तन रथयात्रा चल रही है, इस बीच अगर हिमाचल से जुड़ी कोई चीज मोदी से किसी को गिफ्ट कर दें तो माहौल बनना तय है। भले ही कांगड़ा और चंबा की चांदी के गहने अभ कोई न पहनता हो, कांगड़ा चाय की महक सरकारी नजरअंदाजी की वजह से फीकी पड़ती जा रही हो, कोई फर्क नहीं पड़ता। इन्हें बचाने के लिए सरकार कुछ करे या न करे, कोई फर्क नहीं पड़ता। मोदी जी ने गिफ्ट कर दी चीजें, हिमाचली खुश, बस। मगर हिमाचल का भला तब होगा जब कांगड़ा चाय को रिवाइव किया जाए और हिमाचल की नक्काशी और अन्य कलाओं को संरक्षण दिया जाए। इस संबंध में कोई ठोस कदम उठाए बिना कुछ नहीं होगा।
3. इसरायल में हिमाचली टोपी: ट्रंप फैमिली को हिमाचली तोहफे देने के कुछ ही दिनों के अंदर मोदी जी टोपी पहने नजर आए। यह कोई संयोग नहीं था। मोदी जी हमेशा तो टोपी नहीं पहनते। कसोल से इजरायल के लिंक को जोड़ते हुए कुछ लोग इसे एक अच्छा मूव बता रहे हैं। मैं भी उनसे आंशिक रूप से सहमत हूं। बल्कि मैं तो कहता हूं कि मोदी जी ने अच्छा कदम उठाया है और एक तीर से दो शिकार किए हैं। इजरायली भी मोदी जी को हिमाचली टोपी में देखकर कनेक्ट कर गए होंगे और अपने हिमाचली (खासकर बीजेपी वाले) तो आज तक खुशी की खुमारी से नहीं उतरे हैं। मगर क्या हिमाचल के लिए टोपी पहनना ही काफी है? हिमाचलियों को जरूरत है कुछ और चीजों की और उम्मीद है कि वे सिर्फ राजनीतिक ऐलान नहीं होंगे।
पिक्चर अभी बाकी है…
मुझे मोदी जी द्वारा किए गए इन सभी कामों से कोई दिक्कत नहीं। बल्कि मुझे खुशी है कि चलो, कुछ तो अच्छा किया जा रहा है। हिमाचल जैसा प्रांत जो कि राजनीतिक रूप से इसलिए इग्नोर किया जाता है क्योंकि यहां से सिर्फ 4 लोकसभा सीटे हैं, कम से कम एक प्रधानमंत्री की नजर में तो है, भले ही चुनावों के लिए सही। मगर मोदी जी से अपील है कि सिर्फ टोपी पहनने से काम नहीं चलेगा। आपने भाषणों में वादा किया है कि हिमाचल में रेल का नेटवर्क होना चाहिए। आपने कहा था कि मेरा दिल दुखता है जब हादसों में किसी की मौत होती है। आपने पूछा था- भाइयो-बहनों, रेल नेटवर्क होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? आपके कई बार पूछे गए सवाल का मतलब आपका वादा है। इसका मतलब यह होना चाहिए कि बिलासपुर-लेह लाइन के अलावा भी आप अहम जगहों को कनेक्ट करवाएं ट्रेन से (वह भी न जाने कब बनेगी)। बात इकनॉमिकल फिजिबिलिटी की नहीं, लोगों की जान और उनकी सुविधा की है। जरुरी नहीं है कि ट्रेन लाइन वहीं बनाई जाए जहां लोग भेड़-बकरियों की तरह चढ़ते हों।
जरूरत है हिमाचल में अच्छे अस्पतालों की। एम्स का आपने ऐलान तो कर दिया मगर यहां प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के बीच फ्रेंडली मेैच चल रहा है। राज्य सरकार केंद्र पर आरोप लगाती है कि उनकी तरफ से मामला अटका है और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री कहते हैं कि इसमें कोई टेक्निकैलिटी है जिसमें मैं जाना नहीं चाहता। अगर आप सोच रहे हैं कि टोपी पहनने, कांगड़ा चाय गिफ्ट करने की तरह इलेक्शन से पहले एम्स का शिलान्यास करके माहौल बनाएंगे तो आपमें और उन लोगों में कोई फर्क नहीं रहा जो कई दशकों से ऐसी ही राजनीति करते आ रहे हैं। सेंट्रल यूनिवर्सिटी को भी वॉलिबॉल बनाया हुआ है। एक जगह कैंपस होने के बजाय आपकी पार्टी के नेता दो-दो जगह कैंपस खोलने की बात कर रहे हैं और वह भी प्रदेश के दो कोनों मे नहीं ताकि जनता को सुविधा हो, बल्कि एक ही जिले में दो कोनों पर। अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगे हैं।
अगर आप सोच रहे हैं कि इसका भी इलेक्शन से पहले कुछ करेंगे तो कोई फायदा नहीं। असल फायदा जनता को शिमला और धर्मशाला को स्मार्ट सिटी बनने से भई नहीं है। जनता ने आपको परिवर्तन के लिए प्रधानमंत्री बनाया है तो इसका मतलब तौर-तरीकों मे भी परिवर्तन होना चाहिए। आपके वादे जमीन पर दिखने चाहिए। 2014 से लेकर आज 2017 तक हिमाचल में आपने क्या अलग कर दिया, दिख नहीं रहा। अगर किसी को लगता है कि वह लच्छेदार भाषणों और टोपी पहनने-पहनाने से वोट बटोर लेगा तो यह दुख की बात है। हो सकता है कि आपको माहौल के बीच आंख मूंदकर वोट देने वालों के वोट मिल भी जाएं, मगर प्रदेश के उस समझदार तबके को हताशा होगी जो आपसे उम्मीदें लगाए बैठा है। वरना अगर कोई बदलाव के नाम पर लोक-लुभावन और टोपी पहनाने जैसी राजनीति करता है तो यह जनता के साथ ठगी है। शायद आपको टोपी पहनने की सलाह देने वालों ने बताया नहीं होगा कि हिमाचली अब टोपी पहनकर लोगों को टोपी पहनाने वालों से तंग आ चुके हैं।
(लेखक हिमाचल प्रदेश से संबंध रखते हैं और आयरलैंड में रहते हैं। इन हिमाचल से जुड़कर लंबे समय से लेखन कर रहे हैं)
DISCLAIMER: ये लेखक के निजी विचार हैं, इनके लिए वह स्वंय उत्तरदायी हैं।
एमबीएम न्यूज नेटवर्क, शिमला।। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले केकोटखाई में 16 साल की छात्रा की रेप के बाद निर्मम हत्या के मामले में लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। घटना के विरोध में कोटखाई के गुम्मा बाजार के कारोबारियों ने आज अपनी दुकानें बंद रखीं और आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर प्रदर्शन किया। शिमला शहर में ऐतिहासिक रिज मैदान पर भी लोगों ने बैनरों और पोस्टरों के साथ प्रदर्शन किया और बापू की प्रतिमा के सामने कैंडल जलाकर मृतका के प्रति संवेदना प्रकट की। गुम्मा के वासियों ने इस मामले की सीबीआई जांच करने और आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की। गुम्मा के वासियों ने आरोपियों को न पकड़ने की सूरत में चक्का जाम करने की भी चेतावनी दे डाली है।
घटना के आक्रोश में राजधानी में भी धरने-प्रदर्शनों का दौर चलता रहा। एबीवीपी के बाद एसएफआई शिमला शहरी और विवि ईकाई ने ने आज उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की मांग की है। इस तरह की घटनाओं की पुनरावृति रोकने के लिए एसएफआई ने राज्य की सभी शैक्षणिक संस्थानों में विशेष समितियां गठित करने का सुझाव प्रशासन को दिया। दूसरी तरफ छात्र संगठन एनएसयूआई ने बाद दोपहर सीटीओ चौक पर कैंडल मार्च निकाला और सरकार व प्रशासन से आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की। हत्याकांड के विरोध में शिमला के रिज मैदान पर संजौली के एक गैर सरकारी संगठन ने भी कैंडल मार्च निकाला।
इस बीच शव बरामदगी के तीन दिन बीतने पर भी पुलिस आरोपियों को नहीं पकड़ पाई है। पुलिस ने आरोपियों की धड़पक्कड के लिए अलग-अलग टीमें बनाई हैं और वे विभिन्न पहलुओं पर बारीकी से पडताल कर रही हैं। मामले की संवेदनशीलता और लोगों में पनप रहे गुस्से के चलते मृतका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट बारे पुलिस खुलासा करने से बच रही है, लेकिन एमबीएम न्यूज नेटवर्क के सूत्र बताते हैं कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गैंगरेप के बाद छात्रा की बड़े ही बर्बरता से हत्या की गई है। इधर इस मामले ने सियासी तूल भी पकड़ लिया है और विपक्षी पार्टी भाजपा ने इस मामले की तुलना निर्भया हत्याकांड से कर दी है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार में प्रदेश में कानून नाम की कोई चीज नहीं रह गई है और प्रदेश में अराजकता में बढ़ोतरी हुई है।
(यह स्टोरी MBM News Network की है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)
शिमला।। क्या बीजेपी ने हिमाचल की खूबसूरती को खराब करने के लिए पंजाब से लोग मंगवाए हैं? सोशल मीडिया पर लोग इस प्रश्न को उठा रहे हैं क्योंकि कुछ जगहों पर पंजाब नंबर की गाड़ियों पर सवार होकर आए कुछ लोग सार्वजनिक स्थलों पर बीजेपी के लिए वॉल पेंटिंग कर रहे हैं। ये कहीं पर खाली दिख रही सतह, जैसे कि डंगे (रिटेनिंग वॉल), रेन शेल्टर (वर्षा शालिकाएं) और चट्टानों पर बीजेपी के नारे लिख रहे हैं। ये कार के पीछे के बूट स्पेस में रंग के डब्बे लाते हैं और ऐसी जगह मिलने पर नारे लिखना और कमल बनाना शुरू कर देते हैं।
‘इन हिमाचल’ ने रानजीतिक पार्टियों द्वारा सार्वजनिक स्थानों की सुंदरता को नष्ट करने को लेकर जो मामला उठाया था, वह रंग लाता नजर आ रहा है। लोगों में भी जागरूकता आई है और राजनीतिक पार्टियों से जुड़े लोग भी इस मामले में ऐक्टिव हुए हैं। ताजा मामला है मंडी-पठानकोट हाइवे का। यहां पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार गोकुल बुटेल ने देखा कि कुछ लोग रीटेनिंग वॉल पर बीजेपी के नारे लिख रहे हैं। गोकुल कहीं जा रहे थे मगर उन्होंने इसे नजरअंदाज करने के बजाय पेंट कर रहे लोगों का सामना किया। उन्होंने इन्हें कहा कि तुरंत नारों को हटाएं। नीचे वीडियो देखें: (अगर आपको वीडियो न दिख रहा हो तो यहां क्लिक करें)
गोकुल बुटेल ने एक वीडियो शेयर किया है जिसमें शेयर करने की लोकेशन बैजनाथ दिख रही है। उन्होंने इस वीडियो के साथ लिखा है- ‘मंडी जाते हुए पंजाब के ये लोग (मारुति 800 थी पंजाब नंबर वाली और इनके पास उसके पेपर नहीं थे) सरकारी रीटेनिंग वॉल, पैरापिट और रेन शेल्टर को रंग रहे हैं। जब इन्हें रोका गया तो उन्होंने तुरंत हटा दिया। स्थानीय पुलिस को इस बारे में सूचित कर दिया गया है।’ आगे उन्होंने यह भी लिखा है कि सार्वजनिक संपत्ति को किसी भई पार्टी के तत्वों द्वारा नुकसान न पहुंचने दें। भले ही वह कांग्रेस के हों, बीजेपी या XYZ पार्टी के।
गौरतलब है कि In Himachal को विभिन्न लोगों ने बीजेपी कार्यकर्ताओं की कुछ तस्वीरें भेजी थीं जिनमें वे न सिर्फ चट्टानों पर बल्कि सड़क किनारे सिक्यॉरिटी के लिए सफेद रंग से रंगे गए पैरापिट और रिफ्लेक्टर्स पर बीजेपी के नारे लिख रहे थे। विभिन्न जगहों से ऐसी तस्वीरों को In Himachal न सिर्फ सबके सामने रखा बल्कि एक बहस छेड़ी कि यह गलत है या नहीं। इस मुहिम को समर्थन मिला और बीजेपी के बहुत से कार्यकर्ता इस मामले में इन हिमाचल के रुख के साथ खड़े हुए। बाद में हिमाचल यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष विक्रमादित्य ने भी इस संबंध में पोस्ट डाली थी।
सोलन।। प्रदेश सरकार पर अक्सर आरोप लगाने के लिए पहचाने जाने वाले बीजेपी नेता अरुण धूमल ने इस बार प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी पर हमला बोला है। पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल के बेटे अरुण ने सोलन में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आरोप लगाया कि सोलन के कंडाघाट में हुई करोड़ों की डील में धांधली हुई है और उसमें वन विभाग की बड़ी भूमिका है। पीड़ित NRI ने FIR में इस बात का भी जिक्र किया है कि आरोपी की रसूख हिमाचल सरकार में इस कदर है कि उसके खिलाफ वहां शिकायत भी दर्ज नहीं हो पा रही थी। अरुण धूमल का कहना है कि पुलिस को दिए स्टेटमेंट में आरोपी ओपी शर्मा ने माना है कि उसने जमीन को सेक्शन 118 के दायरे में लाने के लिए वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी के जरिए 56 लाख रुपये मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को दिए। वहीं वन मंत्री ने इन आरोपों को गलत बताया है।
अरुण धूमल ने बीते दिन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर सोलन जिला के कंडाघाट में जमीन के सौदे में हुए 23 करोड़ रुपए के लेन-देन में गोलमाल का आरोप लगाया था। मगर शुक्रवार को उन्होंने इस मामले में सीएम के साथ वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी और उपाध्यक्ष केवल सिंह पठानिया पर भी भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाए हैं। अरुण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कंडाघाट में जमीन का सौदा हुआ था, जिसकी कीमत महज 3 करोड़ थी लेकिन उसे धोखे से 23 करोड़ रुपए में बेचने की कोशिश की गई। इस डील में मुख्यमंत्री भी अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं। उन्होंने बताया कि एन.आर.आई. खरीददार को जब इस गोलमाल का पता चला तो उसने मुख्यमंत्री और उनके सहयोगियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज करवाई है।
अरुण धूमल द्वारा मीडिया को दी गई ‘FIR की कॉपी’
अरुण ने कहा कि इस मामले में कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद फरीदाबाद थाना में केस दर्ज किया गया है। मामले के आरोपी ने पुलिस पूछताछ में बताया है कि उसने स्टीव बेदी से एक करोड़ बीस लाख रुपये लिए थे। जिसमें से 70 लाख रुपये उसका मार्च-2014 से अप्रैल 2015 तक का वेतन था, जो पांच लाख रुपये प्रतिमाह तय था। जबकि 56 लाख रुपये उसने इस कार्य के एवज में रिश्वत के तौर पर दिए थे। बताया जा रहा है कि यह रकम वनमंत्री के माध्यम से सीएम के नाम पर दी गई। अरुण धूमल का कहना है कि मेरे पास इस बात के प्रमाण हैं कि वन विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री तक धनराशि पहुंचती रही है।
अरुण धूमल द्वारा मीडिया को दी गई ‘FIR की कॉपी’
आरोप लगाते हुए अरुण ने कहा कि फरीदाबाद में हुई एफआईआर में पीड़ित ने आरोपी पर हिमाचल की राजनीति में कनेक्शन और मुख्यमंत्री के साथ संबंध की बात कही है। इसके अलावा मामले का मुख्य आरोपी कई बार मुख्यमंत्री और वनमंत्री के साथ नजर आया है। जिसके फोटो भी अरुण धूमल ने मीडिया के सामने उजागर किए, जिसमें मामले का आरोपी गिफ्ट देते हुए नजर आ रहा है।
वनमंत्री ने आरोपों को बताया निराधार
वनमंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने ऐसी किसी भी तरह की सौदेबाजी की जानकारी होने से इनकार किया है। अमर उजाला अखबार के मुताबिक भरमौरी ने कहा कि धूमल परिवार की राजनीतिक साख खतरे में है, जिसे बचाने के लिए वे किसी पर भी आरोप लगा देते हैं। जमीनों की खरीद-फरोख्त पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के समय में हुई है और वन विभाग की कई बीघा जमीन भाजपा अपने चहेतों में बांट चुकी है। वनमंत्री के अनुसार ऐसे आरोपों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लोग जानते हैं मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और मेरी छवि बेदाग है।