शिमला: रामपुर बस हादसे में 28 की मौत, 10 घायल

एमबीएम न्यूज, शिमला।। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर के खनेरी के पास गुरुवार सुबह 9 बजे एक निजी बस गहरी खाई में गिर गई। इस मामले में अब तक 28 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है जिनमें 18 पुरुष, 9 महिलाएं और 1 बच्चा शामिल है। मृतकों के परिजनों को दस-दस हजार रुपये फोैरी राहत राशि के रूप में दिए गए हैं।

उपायुक्त शिमला रोहन चन्द ठाकुर ने बताया कि हादसे में घायल हुए 10 व्यक्तियों में से चार को इन्दिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला रेफर किया गया है। 21 मृतकों की पहचान की जा चुकी है, 07 शवों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। 19 शव, परिजनों को सौंपे जा चुके हैं और 09 शव, शवगृह में रखे गए हैं।

दुर्घटना के बाद उपमण्डलाधिकारी रामपुर डा. निपुन जिंदल के नेतृत्व में सीआईएसएफ, सिविल डिफेन्स एजेंसीज़ और होमगार्ड के जवान मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि प्रशासन द्वारा सुन्नी से एनडीआरएफ की टीम रामपुर के लिए भेजी गई है। सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड द्वारा पीड़ितों के परिजनों को शव ले जाने के लिए वाहन उपलब्ध करवाए गए हैं। रोटरी क्लब द्वारा परिजनों को भोजन व अन्य सहायता की व्यवस्था की गई।

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(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है।)

मुख्यमंत्री की प्रदेश की जनता से अपील- संयम और शांति बनाए रखें

शिमला।। कोटखाई मामले में जनता के आक्रोश को देखते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अपने पेज पर फेसबुक लाइव के माध्यम से एक मेसेज जारी किया है। प्रदेश की जनता से उन्होंने संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि कुछ लोग इस मामले में भ्रांतिया फैलाकर माहौल खराब करना चाहते हैं, उनसे दूर रहें। मुख्यमंंत्री ने भरोसा दिलाया है कि सरकार दोषियों को सजा दिलाएगी और परिजनों को न्याय मिलेगा।

 

प्रदेश के नाम संदेश में मुख्यमत्री ने कहा, ‘प्रिय प्रदेशवासियों देवभूमि हिमाचल में 6 जुलाई को शिमला के कोटखाई क्षेत्र में एक स्कूली छात्रा गुड़िया के साथ दुराचार के बाद उसकी निर्मम हत्या से पूरा हिमाचल आहत है। मैं व्यक्तिगत रूप से इस घटना से आहत हूं। गुड़िया के गुनहगारों को जल्दी पकड़कर सजा दिलाने के लिए 10 जुलाई को प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया था जिसने त्वरित कार्रवाई करते हुए 13  जुलाई को 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

सरकार ने इस मामले में हर संभव कार्रवाई तुरंत की गई। घटना के प्रति जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए हमारी सरकार ने 13 जुलाई को केंद्र सरकार को इस मामले की सीबीआई जांच करवाने के लिए पत्र लिखा। यही नहीं, 14 जुलाई को मैंने व्यक्तिगत आग्रह किया प्रधानमंत्री को लेटर भेजकर। मैंने राजनाथ सिंह जी से बात की और मामले से अवगत करवाया। हम उच्च न्यायालय के आभारी हैं जिन्होंने सरकार के अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की सीबीआई जांच करवाने और 2 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट करने के आदेश दिए हैं।

हमारी सरकार का एकमात्र मकसद गुड़िया को न्याय दिलाना है। प्रदेश की जनता भी यही चाहती है। इसिलए मेरा प्रदेशवासियों से अनुरोध है कि इस मामले को सही अंजाम तक पहुंचाने में सहयोग दें। अपील है कि वे शांति और संयम बरतें और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचाए। 19 जुलाई को कोटखाई थाने में 1 आरोपी की हत्या के मामले में भी जांच हो रही है। यह दुख की बात है कि कुछ दिनों से इस मामले में कुछ दल और तत्व राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं और भ्रांतियां फैलाकर प्रदेश के क्षेत्र विशेष में माहौल को खऱाब करने का प्रयास कर रहे हैं जबकि पूरे प्रदेश में शांति है। जनता से अनुरोध करता हूं कि संवेदना के इस सैलाब में संयम और शांति बनाए रखे और उनके बहकावे में न आए।

तथ्यहीन तथा सनसनीखेज खबरों से प्रदेश की जनता को भ्रमित करने की कोशिश हो रही है। इस प्रचार से दूर रहें और सरकार को शांति बनाए रखने में योगदान दें। भरोसा रखें, दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी और परिजनों को इंसाफ दिलाया जाएगा।

रेप ऐंड मर्डर केस: शिमला में जोरदार प्रदर्शन, हुड़दंग मचाते भी नजर आए कुछ लोग

शिमला।। कोटखाई रेप ऐंड मर्डर में जनाक्रोश को राजनीतिक रूप से भुनाने के आरोप तेज हो गए हैं। दरअसल विभिन्न छात्र संगठन इस मामले में अलग-अलग प्रदर्शन कर रहे थे। बाद में बीजेपी ने गुरुवार को शिमला बंद का आह्वान किया था। गौरतलब है कि पहले से उठे इस मामले में बीजेपी नेता कहीं नहीं थे। सीबीआई की जांच के आदेश हो जाने के बाद बीजेपी का इस मामले में सक्रिय होना सवालों के घेरे में आ गया है।

गुरुवार को शिमला में बंद का असर देखने को मिला। मगर कुछ लोग कैमरे के सामने मुस्कुराते नजर आए, कुछ लोगों ने हुड़दंग मचाया तो कुछ पीड़िता की पहचान को उजागर करते हुए उसकी तस्वीरों वाली तख्तियां उठाए नजर आए। इस बंद की वजह से रामपुर बस हादसे में घायल हुए लोगों को भी IGMC पहुंचाने में दिक्क्त हुई। ऐसे में बीजेपी पर जनाक्रोश के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकने के आरोप लग रहे हैं।

अस्पताल जा रहे बुजुर्ग से हाथापाई
इस मामले में हिंदी अखबार अमर उजाला लिखता है कि शिमला बंद के चलते आम लोगों को दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा। बीसीएस में अस्पताल जा रहे एक बुजुर्ग से प्रदर्शनकारियों ने हाथापाई तक कर डाली। कई अन्य जगहों पर भी शिमला बंद के नाम पर प्रदर्शनकारियों ने गुंडागर्दी कर दी (स्रोत)।

बसों के टायरों की हवा निकाल दी गई
यही नहीं, सुबह के समय शहर जो बसें चली भी थीं उनके टायरों की हवा निकालकर उन्हें बीच सड़क में खड़ा कर दिया गया। जो लोग जरूरी काम से निकलना चाह रहे हैं वे भी जाम में अटक गए (स्रोत)। शिमला के ढली, खलीणी, विक्ट्री टनल, संजौली, टुटू और बालूगंज जैसे एरिया में सुबह से ही चक्का जाम जारी रहा। शिमला की सड़कों पर लंबा जाम लग गया। उधर, माकपा ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। शहर में लगे जाम से सैलानी भी गाड़ियों में फंसे रहे। वहीं, स्कूली बच्चों और अन्य लोगों को पैदल ही अपने काम पर जाना पड़ा।

सड़क पर जाम लगाकर बैठ गए बीजेपी नेता
शिमला घूमने आए पर्यटकों को चक्का जाम से दिक्कत हुई। भाजपा कार्यकर्ताओं ने विक्टरी टनल और सचिवालय के बाहर चक्का जाम किया। विक्टरी टनल पर कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा विधायक सुरेश भारद्वाज व अन्य नेता भी सड़क जाम कर बैठ गए। इस दौरान सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।

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ट्रैफिक रोकने के लिए सड़क पर बैठे बीजेपी नेता। सबसे दाएं बैठे हैं शिमला के विधायक सुरेश भारद्वाज।

सचिवालय पर पथराव
दोपहर को संजौली की तरफ से आए समूह ने राज्य सचिवालय पर पथराव भी किया, इससे यहां हालात तनावपूर्ण हो गए। ये लोग सचिवालय में घुसने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस की प्रदर्शनकारियों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई। सचिवालय की सुरक्षा में तैनात पुलिस बल ने सड़क मार्ग के दोनों गेट बंद कर प्रदर्शनकारियों को अंदर घुसने से रोका।

हाई कोर्ट ने CBI को दिए मामले की जांच करने के आदेश

शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार के आवेदन के बाद हाई कोर्ट ने सीबीआई को कोटखाई में हुए रेप ऐंड मर्डर केस की जांच करने के लिए कहा है। प्रदेश हाई कोर्ट ने सीबीआई के डायरेक्टर को निर्देश दिए कि वह मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाए। इस SIT में एक एसपी और दो डीएसपी स्तर के अधिकारी शामिल होने चाहिए।

हाई कोर्ट ने सीबीआई को दो हफ्तों में स्टेटस रिपोर्ट फाइल करने के लिए कहा है। कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि प्रदेश पुलिस की एसआईटी मामले का सारा रिकॉर्ड सीबीआई की एसआईटी को सौंपे। कोर्ट से हिमाचल सरकार ने मामले में सीबीआई की हर संभव मदद देने की बात कही है।

सीबीआई

हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को भी इस मामले में पार्टी बनाया है। गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने 12 जुलाई को इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया था। इसके बाद हिमाचल सरकार ने कोर्ट में आवेदन दायर कर मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की गुजारिश की थी।

शिमला के एसपी, एएसपी और सदर्न रेंज के आईजी का तबादला

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, शिमला।। कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस में पुलिस पर सवाल उठने के बाद बुधवार रात को हिमाचल प्रदेश सरकार ने एसपी शिमला समेत दक्षिण रेंज के आईजी को ट्रांसफर कर दिया है। एसपी डीडब्ल्यू नेगी को स्टेटस विजिलेंस ऐंटी करप्शन ब्यूरो शिमला में एसपी के पद पर तैनात किया गया है। उनकी जगह सिरमौर से कांगड़ा अंडर ट्रांसफर एसपी सौम्या सांबशिवन को इस पद पर शिमला भेजा गया है।

आईजी जहूर एच. जैदी को आईजीपी (वेलफेयर ऐंड ऐडमिनिस्ट्रेशन) के पद पर पुलिस हेडक्वॉर्टर में तैनात किया गया है। उनकी जगह सेंट्रल रेंज के आईजी अजय कुमार यादव दक्षिण रेंज की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालेंगे।  IPS गुरदेव शर्मा को एसपी किन्नौर भेजा गया है । शिमला के एएसपी भजन देव नेगी का भी ट्रांसफर हुआ है और उन्हें पुलिस हेडक्वॉर्टर भेजा गया है। उन्हें अगली पोस्टिंग नहीं दी गई है।

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माना जा रहा है कि कोटखाई केस में लोगों की नाराजगी बढ़ने के बाद सरकार यह कदम उठाने को मजबूर हुई है। हालांकि इस मामले में कुछ अधिकारियों के संस्पेंशन के कयास भी लगाए जा रहे थे और यह भी माना जा रहा था कि कुछ के तबादले हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि मंडी में अपना कार्यक्रम बीच में छोड़ने के बाद शिमला पहुंचते ही मुख्यमंत्री की सहमति से ये ट्रांसफर ऑर्डर जारी किए गए हैं।

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शिमला केस को लेकर पत्रकारों के सवालों से भड़के मुख्यमंत्री

एमबीएम न्यूज़, मंडी।। सीएम वीरभद्र सिंह कोटखाई में रेप के बाद हुए मर्डर मामले पर मीडिया पर जमकर बरसे। मंडी जिला के पधर में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम वीरभद्र सिंह ने मीडिया और राजनीतिक दलों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी की मौत को जलसा बनाना ठीक नहीं होता।

 

सीएम ने कहा कि प्रदेश सहित देश भर में रेप और मर्डर जैसी वारदातें होती रहती हैं, लेकिन जिस प्रकार से मीडिया इस मामले को दिखा है उससे ऐसा लग रहा है जैसे पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था चरमरा गई है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ही थाने और कचहरियां बनाई गई हैं। सीएम ने कहा कि मीडिया और राजनीतिक दलों को हद में रहकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मीडिया ने इस घटनाक्रम में आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आज जिस नाबालिग की हत्या हुई है, उसकी भी इतनी खबरें दिखाकर तोहिन की जा रही है। उन्होंने कहा कि पीडि़ता की आत्मा भी तड़प रही होगी कि रोजाना मीडिया में उसका नाम आ रहा है।

 

उन्होंने कहा रेप और मर्डर जैसी घटनाएं होती रहती हैं। सीएम ने कहा कि क्या सीएम या पुलिस विभाग के अधिकारी मुजरिमों को फांसी पर लटका दें, ऐसा नहीं हो सकता, इसके लिए पूरा प्रोसेस बनाया गया है। सीएम ने कहा कि जो दोषी हैं उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा जो पकड़े गए हैं उन्हें सजा-ए-मौत होनी चाहिए।

 

जब जनसभा के बाद मीडिया कर्मियों ने सीएम वीरभद्र सिंह से कोटखाई में बिगड़े हालातों को लेकर बात करनी चाही तो सीएम काफी गुस्से में नजर आए। सीएम से पूछा गया कि हिमाचल के सांसद इस मामले को लेकर गृह मंत्री से मिले हैं तो सीएम साहब इसपर भड़क गए और कहा कि क्या गृह मंत्री उनपर हमला कर देंगे। उन्होंने कहा कि शिमला में हालात सामान्य है और कोई अव्यवस्था नहीं हुई है।

 

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गुड़िया केस में पुलिस हिरासत में आरोपी की हत्या, पुलिस पर उठे सवाल

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, शिमला।। शिमला के कोटखाई के चर्चित रेप ऐंड मर्डर केस के आरोपी की हत्या से पुलिस पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। 29 साल के नेपाली युवक को उसी के साथी राजेंद्र ने हवालात में मौत के घाट उतार दिया और ड्यूटी पर मौजूद पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी? इस मामले के तूल पकड़ने के बावजूद एसआईटी से लेकर कोटखाई पुलिस ने अपराधियों को अलग-अलग लॉकअप में रखना जरूरी नहीं समझा? गौरतलब है कि कोर्ट ने इस मामले के पांच आरोपियों को सात दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा था।

कोटखाई थाने में तीन आरोपियों को एक लॉक अप में और अन्य दो को दूसरे लॉक अप में रखा गया था। पूरे प्रदेश में पुलिस तंत्र के खिलाफ हो रहे धरने-प्रदर्शनों से भी कोटखाई पुलिस ने सीख नहीं ली। रेप और हत्या जैसे मामले बेहद संगीन अपराध में आते हैं और थानों में ऐसे अपराधियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते हैं और इनकी निगरानी के लिए दिन-रात पुलिस जवानों का सख्त पहरा रहता है। मगर कोटखाई थाने में ऐसा कोई बंदोबस्त नहीं था। ऐसे में इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि या तो पुलिस की मिलीभगत से नेपाली आरोपी का कत्ल हुआ या फिर यह एक इतफार था कि दोनों आरोपी लड़े और सूरज की मौत हो गई। मगर इस बात की संभावना बेहद कम है कि थाने में मौजूद पुलिस जवानों को आरोपियों के झगड़े की भनक न लगी हो।

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कुल-मिलाकर देखें तो पुलिस तंत्र सवालों के घेरे में है। थाने में हत्याकाण्ड के बाद पुलिस ने यह बताने में तनिक भी देर नहीं की है कि आरोपी राजेंद्र ने सूरज को मौत के घाट उतारा है। मामले में हत्या की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस सारा दोष आरोपी राजेंद्र के सर मढ़ रही है। एएसपी भजन नेगी का कहना है कि सूरज और राजेंद्र एक साथ लॉक अप में बंद थे। मध्य रात्रि दोनों आपस में लड़ पड़े और राजेंद्र ने सूरज की जान ले ली। यह मामला गले की हडडी बन गई है।

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काश! मैंने उसे आदमियों से सावधान रहने को कहा होता: विक्टिम के पिता

शिमला।। कोटखाई में हुई दिल दहलाने वाली घटना की विक्टिम ‘गुड़िया’ के परिजनों ने रविवार को गायत्री पाठ रखा था। इस दौरान इंग्लिश अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने गुड़िया के माता-पिता और बहन से बात की। माता-पिता की बातें सुनकर दिल पिघल जाता है। आगे पढ़ें, क्या कहती है अखबार की रिपोर्ट (मूल रिपोर्ट पर जाने के लिए यहां पर क्लिक करें):

60 साल के वह शख्स सिर झुकाए और हाथों को बांधे हलाइला गांव में उस जगह से मुश्किल से 100 मीटर दूर खड़े थे, जहां उनकी बेटी का शव बरामद हुआ था। इस मुद्रा में वह उन लोगों के प्रति कृतज्ञता जता रहे थे जो बेटी की आत्मा की शांति के लिए किए गए गायत्री पाठ में आए थे। उनकी 16 साल की बेटी हलाइला के जंगल में 6 जुलाई को मृत पाई गई थी। वह स्कूल से घर आते हुए रास्ते से 2 दिन पहले गायब हो गई थी।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में रेप और दम घुटने से मौत की पुष्टि हुई है और पता चला है कि उसके शरीर और चेहरे पर गहरी चोटें थीं। लड़की की मौत से प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हुआ कि मामले की जांच को सीबीआई को सौंपा जाए। मृतका और उसका भाई महासू में पढ़ते थे और उन्हें पांच किलोमीटर की दूरी तय करके अपने गांव से यहां देवदार के घने जंगलों के बीच कच्ची सड़क से होकर आना पड़ता था। पिता का कहना है, उस दिन स्कूल में टूर्नमेंट था और बेटा स्कूल में ही रुक गया मगर बेटी ने घर आने का फैसला किया।

‘मेरा बेटा और बेटी आमतौर पर इकट्ठे घर आते थे। उनके साथ कुछ और बच्चे भी होते थे। मेरी बेटी किसी इवेंट में नहीं थी उस दिन तो वह अकेली आ गई। मैंने हमेशा उसे जंगली जानवरों से आगाह किया कि ध्यान रखना। खासकर रीछ के बारे में। मगर वह कहती- पापा, मुझे कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा। काश! मैंने उसे चेताया होता कि आदमी तो दैत्यों से भी बुरे होते हैं।’ यह कहते हुए वह फूट-फूटकर रोने लगते हैं।

13 जुलाई को पुलिस शराल गांव के 29 साल के एक शख्स की गिरफ्तारी का ऐलान करती है, जो कि एक अग्रणी बागवान का बेटा है। बाद में उसी दिन एसआईटी 6 लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि करती है, जिसमें वही 29 साल का शख्स, मुख्य संदिग्ध जो मंडी से आकर यहीं रहता है और सेब के एक बागीचे में मैनेजर व ड्राइवर का काम करता है, शामिल थे। पुलिस का कहना है कि 4 जुलाई को जब विक्टिम स्कूल से लौट रही थी, तब यह वारदात हुई। उसके घर से 4 किलोमीटर दूर हलाइला में कथित तौर पर मुख्य संदिग्ध ने उसे अपनी गाड़ी में लिफ्ट दी। चार अन्य आरोपी- एक 42 का शख्स,  दूसरा 38 का, जो गढ़वाल से हैं और एक अन्य जो 29 साल और  19 का है, नेपाल से हैं। ये चारों इसी गाड़ी में बैठे हुए थे। ये चारों लोग मुख्य आरोपी के साथ सेब के एक बागीचे में काम करते थे।

लड़की के पिता के पास गांव में जमीन का छोटा सा टुकड़ा है। वह अन्य लोगों के सेब के बागीचों में भी काम करते है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कम कमाई होने के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई में कसर नहीं छोड़ी। इसी साल विक्टिम, जिसे लोगों ने ‘गुड़िया’ नाम दिया है, और उसका भाई अपने घर से करीब 6 किलोमीटर दूर के स्कूल में शिफ्ट हुए थे।  ठियोग के डीएसपी मनोज जोशी बताते हैं, ‘जिस गांव से विक्टिम थी, उस गांव में 10वीं क्लास में 9 बच्चे थे और सभी फेल हो गए थे। इसलिए वह इस साल महासू स्कूल आ गई थी। वह और उसका छोटा भाई दोनों दसवीं में थे।’

विक्टिम की बड़ी बहन, जिनकी शादी हो गई है और पास के ही गांव में रहती हैं, बताती हैं, ‘हमने कभी नहीं सुना था कि इस इलाके में महिलाओं को कोई दिक्कत हुई हो। इसलिए हमें कभी नहीं लगा कि वह सुरक्षित नहीं है। उस रास्ते से तो कई बच्चे स्कूल जाते हैं।’

विक्टिम की मां आंखों के आंसुओं को पोंछते हुए कहती हैं, ‘क्या किसी को हमारी बच्ची की चीखें नहीं सुनीई दीं? क्या लोग इस इलाके से नहीं जा रहे थे? मेरी बच्ची के यहां से जाने के बाद कई बच्चे यहीं से गए, यहां तक कि एक टीचर भी यहां से गया। क्या किसी ने कुछ नहीं देखा-सुना? मुझे पक्के तौर पर लगता है कि मेरी बेटी का अपहरण हुआ है, उसे कहीं ले जाया गया, उसे दवा खिलाई गई, उसके साथ रेप किया गया और उसके शव को यहां फेंक दिया गया।’

पुलिस का कहना है कि लड़की की वर्दी और अन्य चीजें शव के पास मिलीं। जहां पर शव मिला, उसके पास ही मुख्य सड़क है और दूसरी तरफ से मुख्य आरोपी के घर को कच्चा रास्ता जाता है, जहां वह अपनी विधवा मां के साथ 30 साल से रह रहा है।

मुख्य आरोपी की मां कहती है, ‘मैं पक्के तौर पर कह सकती हूं कि मेरा बेटा निर्दोष है। अगर वह ऐसे शर्मनाक काम में शामिल होता तो मैं आपको कहती कि उसकी खाल उधेड़ दो, फांसी पर लटका दो। मगर मैं जानती हूं कि उसे फंसाया गया है। उसने कभी किसी से झगड़ा नहीं किया। मैं कल्पना भी नहीं कर सकती वह ऐसा काम कर सकता है।’ 62 साल की इस बुजुर्ग महिला का कहना है, ‘उसने रात को खाना खाया, मुझे सुलाया और अपने कमरे में सोने चला गया। अगली सुबह वह मुझे कैंसर हॉस्पिटल में चेकअप के लिए ले गया। वहां से हम दवाइयां भी लाए थे।’ यह कहते हुए वह दवाइयों के पत्ते दिखाती हैं और बोलती हैं, ”मैं अनपढ़ हूं, मुझे तो पता नहीं कि कौन सी दवा कब लेनी है। वह मेरे लिए सबकुछ है। कुछ साल पहले पति की मौत हो गई थी तो मैंने अकेले ही उसे पाला है। मेरा दिल बैठा जा रहा है। मेरे से सब सहन नहीं होता।’

कोटखाई और शिमला में प्रदर्शनों के बीच लोग पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठा रहे हैं और वे एसआईटी की जांच से भी संतुष्ठ नहीं। वे सवाल उठाते हैं कि मुख्य आरोपी ने अपने घर के पास ही शव को क्यों फेंका और प्रवासी मजदूर यहीं क्यों रुके रहे। इस बीच मुख्यमंत्री का कहना है, ‘हमने मामले की जांच सीबीआई को देने का फैसला किया है क्योंकि अपराध गंभीर है और जनता में रोष है। प्रदर्शन कर रहे लोगों के पास ऐसा करने की अब कोई वजह नहीं है। मुझे इसमें राजनीति नजर आ रही है और इससे कड़ाई से निपटा जाएगा।’

जिस जगह पर प्रार्थना की गई, वहां पर लोगों ने 18 जुलाई को प्रदर्शऩ करने का फैसला किया ताकि सीबीआई की जल्द जांच की मांग की जाए। बच्ची के स्कूल से अन्य बच्चे शोक प्रकट करने आए तो पिता फिर फूट-फूटकर रोने लगे और बोले, ‘भगवान और मां गंगा मुझे मेरी बच्ची को न्यया दिलाने की शक्ति दे। मैं हर एक दोषी को फांसी पर लटकते देखना चाहता हूं। मगर मैं पुलिस से अपील करता हूं कि प्लीज किसी बेगुनाह को न फंसाए।’

मुझे वह दिन भी याद है जब सुक्खू पैदा हुए थे: मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह

शिमला।। कांग्रेस की पथयात्रा को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू और प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सुक्खू अक्सर मेरी याददाश्त को लेकर बेतुकी बातें करते हैं। मगर जब वह पैदा हुए थे, मुझे वह दिन याद है।

पढ़ें: मुख्यमंत्री बुजुर्ग हैं, शायद भूल गए होंगे- सुक्खू

गौरतलब बै कि सोमवार को मुख्यमंत्री ने कहा था कि मुझे प्रदेश संगठन की पथयात्रा की कोई जानकारी नहीं है। इस बारे में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए सुक्खू ने कहा था कि मैंने सीएम को इस बारे में बताया था, मगर शायद उन्हें याद नहीं है, वह भूल गए होंगे। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री के बुजुर्ग होने का हवाला दिया।

इस बयान के बाद मीडिया ने सुंदरनगर में जब सीएण वीरभद्र सिंह के प्रतिक्रिया लेनी चाही तो उन्होंने कहा कि उन्हें वो दिन भी याद है जिस दिन सुक्खू पैदा हुए थे। उन्होंने सुक्खू को नसीहत भी दी और कहा कि इस तरह की टिप्पणियां करना शोभा नहीं देता।

मुख्यमंत्री बुजुर्ग हो गए हैं, शायद भूल गए होंगे कि पथयात्रा को लेकर बात हुई थी: कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुक्खू

शिमला।। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को बुजुर्ग बताते हुए कहा है कि उन्हें कुछ याद नहीं रहता। दरअसल मुख्यमंत्री वीरभद्र ने सोमवार को कहा था कि कांग्रेस प्रदेश मे पथयात्रा कर रही है, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। ऐसे में सुक्खू ने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र बूढ़े हो चुके हैं, इसलिए उन्हें याद नहीं रहता।

अपडेट पढ़ें: मुख्यमंत्री ने कहा- मुझे सुक्खू के पैदा होने का दिन भी याद है 

दरअसल मुख्यमंत्री से मीडिया ने पथयात्रा को लेकर सवाल किया था तो उन्होंने कहा था कि इसकी जानकारी तो मुझे आपसे (मीडिया से) ही मिल रही है। इस बारे में सवाल करने पर सुक्खू ने कहा कि मेरी उनसे बात हुई थी, शायद वह भूल गए होंगे। इसके लिए सुक्खू ने मुख्यमंंत्री के बुजुर्ग होने का हवाला दिया।

इस बीच शिमला रेप मामले में सुक्खू ने कहा कि प्रदेश की जनता सड़कों पर इसलिए उतरी क्योंकि जांच में कमियां पाई गई हैं। उन्होंने कहा कि यह सरकार और पुलिस की लापरवाही से हुई और इसीलिए जनता में नाराजगी है।

सुक्खू (File Pic)

सुक्खू ने केंंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि प्रदेश को लेकर केंद्र ने अपने वादे पूरे नहीं किए। न तो युवाओं को रोजगार मिला औऱ न ही किसी के खाते में पैसे आए। प्रदेश में विकास भी नहीं हुआ।