सुंदरनगर में पुलिस ने धरे लड़कियों पर कॉमेंट कर रहे हुड़दंगी

मंडी।। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सुंदरनगर में लड़कियों पर चिल्लाकर हुड़दंग मचाने के आरोप में 3 युवकों को गिरफ्तार किया गया है। मामला देर रात 11 करीब  बजे का है। राजस्थान नंबर की एक गाड़ी पर सवार तीन युवक मनाली से वापस जा रहे थे। आरोप है कि भोजपुर बाजार के पास हाइवे पर जा रही युवतियों पर उन्होंने चिल्लाना शुरू कर दिया।

 

स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी तो पुलिस ने हरकत में आकर गाड़ी का पीछा किया और उन्हें चतरखोड़ी चौर पर पकड़ लिया। पुलिस ने युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। सुंदरनगर पुलिस स्टेशन प्रभारी गुरुबचन सिंह का कहना है कि इलाके में इस तरह की हरकतें बर्दाश्त नहीं होंगी।

लैंडस्लाइड से दो हफ्तों में तीसरी बार बंद हुआ मनाली-चंडीगढ़ हाईवे

एमबीएम न्यूज, मंडी।। एक बार फिर चंडीगढ-मनाली हाईवे बारिश के कारण भूस्खलन होने से जाम हो गया है। जोगनी माता मंदिर के समीप मलबा आने के कारण हाईवे बंद हुआ है। दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गई है।

 

PWD के साथ-साथ नैशनल हाईवे विंग की टीमें मलबा हटाने के लिए जुट चुकी है लेकिन पहाड़ी से लगातार मलबा गिरने के कारण लगातार जोखिम भी बना हुआ है। हाईवे को बहाल होने में घंटों लग सकते है।

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बता दें कि इलाके में दो सप्ताह के भीतर भूस्खलन की वजह से तीसरी बार हाईवे बाधित हुआ है।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

शिमला केस में बीजेपी विधायक ने मुख्यमंत्री वीरभद्र पर लगाया गंभीर आरोप: मीडिया रिपोर्ट

शिमला।। शिमला में हुए रेप ऐंड मर्डर केस को लेकर बयानबाजी का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मामले में बीजेपी अब तक सरकार और पुलिस पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगा रही थी मगर अब सीधे-सीधे मुख्यमंत्री का नाम लिया गया है और यह भी कहा गया है कि वह किसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता द्वारा कथित तौर पर दिया गया यह बयान सियासी भूचाल ला सकता है। एक अखबार ने दावा किया है कि बीजेपी के विधायक और पूर्व मंत्री ने विशेष बातचीत में यह बात कही है।

 

रविवार को हिंदी अखबार पंजाब केसरी के वेब पोर्टल में प्रकाशित खबर में दावा किया गया है पूर्व कैबिनेट मंत्री और देहरा से बीजेपी के विधायक रविंदर सिंह रवि ने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनका दिमाग हिल गया है। अखबार आगे लिखता है कि एक विशेष भेंट में रविंदर रवि ने बताया कि गुड़िया के असली हत्यारों को बचाने में मुख्यमंत्री ने भूमिका निभाई है।

यही नहीं, अखबार के मुताबिक बीजेपी विधायक ने कहा, ‘इस कांड में 4 जुलाई से लेकर अब तक आरोपियों को बचाने में मुख्यमंत्री की क्या भूमिका रही, जनता को बताएं। आगे उन्होंने फेसबुक पर फोटो डालने और हटाने का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बताएं कि इस मामले में उन्होंने अपने ####### (एक अधिकारी का पद) के भांजे या भतीजे को बचाने में क्या भूमिका निभाई। (अखबार के पोर्टल में छपी इस खबर को यहां क्लिक करके पढ़ा जा सकता है)

जानें, रेप विक्टिम की पहचान जाहिर करने को लेकर क्या कहता है कानून

शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार ने शिमला रेप विक्टिम के नाम पर उसके गांव के स्कूल का नामकरण लेने का फैसला किया है। इस फैसले को लेकर सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि कानून के मुताबिक विक्टिम की पहचान को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। न सिर्फ नाम और तस्वीर, बल्कि परिजनों के नाम या गांव, लोकैलिटी या फिर स्कूल आदि का नाम भी नहीं बताया जाना चाहिए। यानी कोई भी ऐसी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए जिससे पता चले कि विक्टिम कौन है।

इस मामले को बीजेपी नेता प्रेम कुमार धूमल ने सरकार पर निशाना साधा है कि आखिर कैसे इतनी बड़ी चूक कर दी। हालांकि प्रश्न उन्हीं की पिछली सरकार में मंत्री रहे नरेंद्र बरागटा और उनके बेटे पर भी उठ रहे हैं जिन्होंने अपनी फेसबुक टाइमलाइन पर वीडियो शेयर किए हैं और उनमें शुरू में गुड़िया की तस्वीरें नजर आती हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने गुड़िया की असली तस्वीरें शेयर की हैं और उसकी तस्वीरों वाले प्रोफाइल पिक्चर फ्रेम भी बनाए हैं। इसी के बाद हरकत में आते हुए बाल संरक्षण आयोग ने इन तस्वीरों को हटाने की गुजारिश की है। मगर लोग अब सरकार पर प्रश्न उठा रहे हैं कि सरकार ने फिर क्यों स्कूल का नाम विक्टिम के नाम पर किया और उसकी नोटिफिकेशन भी जारी की। आइए जानते हैं, इस संबंध में कानून क्या कहता है-

क्या कहता है POCSO ऐक्ट
चूंकि शिमला केस की विक्टिम नाबालिग थी और मामला POCSO ऐक्ट के तहत भी दर्ज हुआ है, इसलिए जानना जरूरी है कि यह ऐक्ट क्या कहता है-

पॉक्सो ऐक्ट का सेक्शन 23 इस तरह से है-
(1) किसी भी व्यक्ति को किसी मीडिया, स्टूडियो या फोटो के जरिए पूरी और प्रामाणिक जानकारी के बिना किसी बच्चे पर ऐसी कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए जिससे उसकी छवि खराब हो या उसकी निजता का उल्लंघन हो।

(2) किसी मीडिया में ऐसी रिपोर्ट नहीं आनी चाहिए जिससे कि बच्चे की पहचान जाहिर हो- उसका नाम, पता, फोटो, परिवार का जिक्र, स्कूल, आस-पड़ोस या फिर कुछ ऐसा जिससे उसकी पहचान पता चले। इस मामले में विशेष अदालत को अगर लगता है कि ऐसा किया जाना बच्चे के हित में है तो वह लिखित अनुमति दे सकता है।

(3) अगर कोई कर्मचारी ऐसा करता है तो वह मीडिया, स्टूडियो या फोटोग्राफिक फैसिलिटी पूरे तौर पर जिम्मेदार होंगे।

(4) अगर कोई सब सेक्शन 1 या सब सेक्शन 2 के प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो या उसे कम से कम 6 महीने और अधिकतम 1 साल व जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।

IPC में यह है प्रावधान
इससे पहले कि कानून को समझें, कुछ साल पीछे चलते हैं। जिस समय दिल्ली में निर्भया गैंगरेप मामला हुआ था, उस वक्त केंद्रीय मंत्री शशि थरूर चाहते थे कि बहादुर बेटी का नाम सार्वजनिक किया जाए। उनका कहना था कि जो ऐंटी रेप कानून बने, उसका नाम रेप विक्टिम के नाम पर रखा जाना चाहिए। मगर भारत का कानून कहता है कि रेप विक्टिम की पहचान जाहिर नहीं की जा सकती और ऐसा करने के दोषियों को आईपीसी की धारा सेक्शन 228 A के तहत सजा का सामना करना पड़ सकता है। 2 साल की सजा और जुर्माने तक का प्रावधान इस मामले में है। हालांकि उस वक्त सरकार ने कहा था कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि किसी कानून का नाम किसी व्यक्ति के नाम पर रखा जाए।

क्या कहता है भारत का कानून
आईपीसी की धारा 228-A (Disclosure of identity of the victim of certain offences etc) का Sub Section (1) कहता है-  जिस विक्टिम के मामले में धारा 376, धारा 376A, धारा 376B, धारा 376C या धारा 376D के तहत मामला दर्ज हुआ हो,  उसका नाम या कोई ऐसी सामग्री जो उसकी पहचान बताती हो, प्रकाशित करने वाले को सजा मिल सकती है और 2 साल की सजा व जुर्माना हो सकता है।

सब सेक्शन 2 कहता है-  a) जांच अधिकारी या संबंधित पुलिस स्टेशन के इंचार्ज से लिखित परमिशन के बिना b) या विक्टिम की इजाजत के बिना c) अगर विक्टिम मृत या नाबालिग हो तो उसके निकटतम संबंधी की अनुमति के बिना नाम को प्रकाशित नहीं किया जा सकता। ध्यान रहे कि निकटतम संबंधी इस तरह की अनुमति किसी मान्यता प्राप्त वेल्फेयर इंंस्टिट्यूशन या संगठन के चेयरमैन या सेक्रेटरी के अलावा किसी और को नहीं दे सकता। जिन संगठनों का या संस्थाओं का जिक्र ऊपर किया गया है वे राज्य या केंद्र सरकार की तरफ से मान्यता प्राप्त होने चाहिए (बाल संरक्षण आयोग, महिला आयोग आदि)।

Sub Section (3): जो कोई सब सेक्शन 1 में बताए गए मामलों में कोर्ट में चल रही कार्यवाही को बिना इजाजत प्रकाशित करता है, उसके खिलाफ भी दो 2 साल की जेल और जुर्माने की कार्रवाई हो सकती है। इसका मतलब यह है कि इस तरह के मामलों में फैसला आने तक कोर्ट की कार्यवाही को बिना कोर्ट की इजाजत के प्रकाशित नहीं किया जा सकता। फैसला आ जाने के बाद ऐसा करना अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा।

कोटखाई थाने और वाहनों को आग लगाने वालों पर कार्रवाई की तैयारी

शिमला।। कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस में एक आरोपी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद हुए प्रदर्शन में भीड़ हिंसक हो गई थी। भीड़ ने कोटखाई पुलिस स्टेशन को आग लगाने की कोशिश की थी और तीन वाहनों को फूंक दिया था। अब क्राइम ब्रांच कानून अपने हाथ में लेने वाली इस घटना में शामिल लोगों पर कार्रवाई करने जा रही है। अमर उजाला अखबार के मुताबिक पुलिस की क्राइम ब्रांच ने करीब चार दर्जन लोगों की लिस्ट बनाई है जिनके ऊपर गैर-जमानती धाराओं में मामला दर्ज करने की तैयारी है।

 

पुलिस ने कोटखाई थाने को आग के हवाले करने की घटना के वीडियो, अखबारों में छपी तस्वीरों और सोशल मीडिया पर मौजूद सामग्री की जांच करने के बाद लोगों की लिस्ट बनाई है। अखबार ने सूचना के हवाले से लिखा है कि पुलिस को कई लोगों के नाम-पते भी मिल गए हैं। पुलिस ने जले हुए वाहनों और सामान के नमूने मिले हैं। बताया जा रहा है कि पुलिस को पता चला है कि थाने को जलाने के लिए ज्वलनशील तरल पदार्थ का इस्तेमाल किया गया था। इन नमूनों को जांच के लिए लैब में भेजा गया है।

खबर के मुताबिक अगर लैब में पुष्टि होती है कि ज्वलनशील पदार्थ इस्तेमाल किया गया है तो वीडियो में दिखे वे लोग, जो पेट्रोल के लिए चंदा इकट्ठा कर रहे थे और बाद में वाहनों में आग लगा रहे थे, उनके खिलाफ गैर जमानती धाराओं में मामला दर्ज होगा। क्राइम ब्रांच जांच करके वापस आ चुकी है। हालांकि अखबार का यह भी कहना है कि इस मामले की आधिकारिक पुष्टि करने के लिए क्राइम ब्रांच तैयार नहीं है।

गुड़िया की तस्वीरें और नाम इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई

शिमला।। अगर आपने शिमला रेप ऐंड मर्डर केस की विक्टिम ‘गुड़िया’ का असली नाम या उसकी तस्वीर शेयर की है तो उसे तुरंत हटा दें वरना आपके ऊपर कार्रवाई हो सकती है। In Himachal शुरू से ही पाठकों से अपील करता रहा है कि किसी भी सूरत में पीड़िता की तस्वीर या नाम को इस्तेमाल नहीं किया जा सकता और न ही कुछ ऐसी जानकारी दी जा सकती है जिससे उसकी पहचान उजागर हो। मगर सोशल मीडिया से लेकर सड़कों पर हुए प्रदर्शनों तक में गुड़िया की तस्वीर और उसके असली नाम को इस्तेमाल कर दिया गया। हद तो तब हो गई जब प्रदेश सरकार ने गुड़िया के गांव के स्कूल का नाम उसके असली नाम पर रखने का ऐलान करते हुए उसकी पहचान जारी कर दी।

पाठकों को बता दें कि POCSO ऐक्ट 23 और जुवेनाइल ऐक्ट के तहत इस तरह से पहचान को उजागर करना अपराध है। अगर इस तरह से विक्टिम या उसके परिजनों की पहचान उजागर की जाती है तो इसमें 6 महीने से लेकर 2 साल तक की सजा हो सकती है।

पढ़ें: विक्टिम की पहचान को लेकर क्या कहता है देश का कानून

अब इस मामले में राज्य बाल संरक्षण आयोग कार्रवाई करने की बात कर रहा है। आयोग का कहना है कि ऐसे यूजर्स और संगठनों पर वह खुद नजर रख रहा है और एसपी शिमला को भी ऐसे लोगों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आयोग अब इस मामले में हाई कोर्ट जाने की तैयारी में भी है।

गौरतलब है कि कुछ लोगों ने विक्टिम की वीभत्स तस्वीरें भी शेयर की थीं। बाद में कुछ लोगों ने गुड़िया की तस्वीरों के प्रिंट निकाले और शिमला रिज मैदान पर उसे रख दिया। यही नहीं, लोगों ने बैनर भी बनाए और उसके असली नाम को जाहिर करते हुए नारे भी लिखे। कुछ लोगों ने Try it के जरिए फ्रेम बनाए हैं जिसमें फेसबुक पर लोगों की प्रोफाइल पिक्चर पर जस्टिस फॉर गुडिया मेसेज के साथ उसकी तस्वीर आती है। शिमला बीजेपी के नेता और भाजयुमो के सोशल मीडिया के प्रभारी ने अपनी टाइमलाइन पर कुछ वीडियो शेयर किए थे और उनमें भी गुड़िया की तस्वीर नजर आ रही थी।

ऊपर बताए गए सभी तरीके कानून अपराध हैं। राज्य बाल संरक्षण आयोग और जुवेनाइल जस्टिस के पदाधिकारियों ने अपील की है कि आम जनता, राजनीतिक दल और संगठन किसी भी तरीके से गुड़िया की तस्वीर इस्तेमाल करने से बचें। अगर किसी ने ऐसा किया है तो तुरंत हटा दें वरना आयोग कानूनी कार्रवाई करेगा।

शिमला केस: जेल में मारे गए नेपाली आरोपी के दोस्त ने दिया सनसनीखेज बयान

शिमला।। कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस में पुलिस हिरासत में मारे गए आरोपी सूरज के दोस्त ने चौंकाने वाला बयान दिया है। उसने कहा है कि सूरज पर इस अपराध को स्वीकार करने के लिए बहुत प्रेशर था। उसने तो यहां तक कहा है कि एक पुलिसकर्मी ने सूरज की कनपटी पर बंदूक तान दी थी और पंचायत प्रधान ने थप्पड़ मार दिया था। पंजाब केसरी में छपी खबर के मुताबिक सूरज के एक दोस्त ने दावा किया है कि ये लोग कह रहे थे कि अगर तुम केस को अपने सिर पर नहीं लोगे तो मार दिए जाओगे।

 

गौरतलब है कि इससे पहले मृतक सूरज की पत्नी ममता ने भी चौंकाने वाले बयान दिए थे जो मीडिया में छपे थे। इसके बाद ममता की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अब सनसनीखेज बातें करने वाला दोस्त भी नेपाल का रहने वाला है। उसका कहना है कि सूरज ही उसे लेकर आया था। पहले वे दिल्ली में रहते थे। अखबार के मुताबिक सूरज के दोस्त को दुख है कि उसका इस दोस्त दुनिया में नहीं। मगर उसका कहना है कि मरने से पहले उसने पुलिस द्वारा की गई पूछताछ की कहानी बयां की थी।

उधर कोटखाई केस के आरोपी और सूरज को मारने के भी आरोपी राजेंद्र उर्फ राजू की मां भी अपने बेटे को बेकसूर बता रही हैं। उनका कहना है कि बेटा अपराध वाले दिन घर पर ही था और कहीं नहीं गया था। उसने बागीचे में स्प्रे की थी और अगले दिन मुझे लेकर शिमला में अस्पताल ले गया था। उनका कहना है कि मेरे बेकसूर बेटे को फंसाया जा रहा है। महिला का कहना है कि पुलिस जब पूछताछ करने आई थी तो बारिश से बचने के लिए राजू ने ही छाता दिया था।

गुड़िया केस को विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनाएगी भाजपा: मंगल पांडेय

हमीरपुर।। हिमाचल प्रदेश के बीजेपी प्रभारी मंगल पांडेयने कहा कि गुड़िया मामले को भारतीय जनता पार्टी आने वाले विधानसभा चुनावों में मुद्दा बनाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था अब मुख्यमंत्री के नियंत्रण में नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और कांग्रेस पार्टी पर निशाना भी साधा।

 

मंगल पांडेय ने कहा कि कांग्रेस पार्टी बीजेपी से टकराने से पहले ही बुरी तरह खंडित हो गई है। उन्होंने कहा कि यह टूटी हुई पार्टी ज्यादा देर तक बीजेपी के सामने खड़ी नहीं रह सकती। अमर उजाला अखबार के मुताबिक टौणीदेवी मंदिर सराय में आयोजित जिला भाजपा कार्यसमिति की बैठक से पहले पांडेय ने पत्रकारों से बातचीत में कहा- गुडि़या मामले को भाजपा आने वाले विधानसभा चुनावों में मुद्दा बनाएगी।

पांडेय ने कहा, ‘प्रदेश में कानून व्यवस्था अब मुख्यमंत्री के नियंत्रण में नहीं रही है। कोटखाई में हुए जघन्य अपराध में प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन कटघरे में है। कुछ लोग पैसों के दम पर इस मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के इशारे पर पुलिस आरोपियों पर कार्रवाई करने से परहेज कर रही है।’

हिमाचल में पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, 7 जिलों के एसपी ट्रांसफर

एमबीएम न्यूज, शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार ने शनिवार दोपहर बाद बड़े स्तर पर पुलिस अधिकारियों के तबादले किए हैं। एसपी (क्राइम) शिमला से आईपीएस अशोक कुमार को एसपी मंडी के पद पर ट्रांसफर किया गया है। एसपी मंडी प्रेम ठाकुर का तबादला पुलिस मुख्यालय में किया गया है। गौरतलब है कि होशियार सिंह मामले में पुलिस की फजीहत के बाद प्रेम ठाकुर को पुलिस मुख्यालय में तैनाती दी गई है।  (कवर पिक्चर सांकेतिक है)

 

ऊना के एसपी अनुपम शर्मा को कमांडेंट होमगार्ड हमीरपुर के पद पर स्थानांतरित किया गया है। शिमला में स्टेट विजीलेंस और ऐंटी करप्शन ब्यूरो के एसपी मोहित चावला को एसपी सोलन तैनाती मिली है। पुलिस मुख्यालय में सीडब्ल्यू ओ शुभ्रा तिवारी को एआईजी (मुख्यालय) लगाया गया है।

लाहौल-स्पीति के एसपी रमण कुमार मीणा को एसपी हमीरपुर बदला गया है। सोलन की एसपी अंजुम आरा को शिमला में एसपी क्राइम के पद पर ट्रांसफर किया गया है। जुन्गा में एसपी (एनसीबी व सीआईडी) के पद पर तैनात आईपीएस अधिकारी शालिनी अग्रिहोत्री को एसपी कुल्लू के पद पर तैनाती दी गई है।

कांगड़ा में सहायक पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह को लाहौल-स्पीति में एसपी के तौर पर तैनाती दी गई है। कांगड़ा के एसपी संजीव गांधी को बद्दी में एक अगस्त से बतौर एसपी तैनाती दी गई है। यहां से एसपी बीएस चौहान 31 जुलाई को रिटायर हो रहे हैं।

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सरकार ने कांगड़ा में फिर एचपीएस अधिकारी की नियुक्ति बतौर एसपी की है। स्टेट विजीलेंस व ऐंटी क्रप्शन ब्यूरो (एसआर) रमेश छाजटा को एसपी कांगड़ा लगाया गया है। हमीरपुर के एसपी अजय बोध को एसपी ऊना के पद पर तैनाती दी गई है।

कुल्लू के एसपी पदम चंद को जुन्गा में कमांडेंट के तौर पर ट्रांसफर किया गया है। बता दें कि शिमला, सिरमौर व किन्नौर के पुलिस अधीक्षक पहले ही बदले जा चुके हैं। उल्लेखनीय यह भी है कि इन तबादलों की उम्मीद पिछले दो महीनों से की जा रही थी।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और इसे सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित किया गया है)

सरकार ने गुड़िया के गांव के स्कूल को अपग्रेड करके बनाया सीनियर सेकंडरी

शिमला।। कोटखाई में हुई दुखद घटना के बाद सरकार ने हरकत में आते हुए गुड़िया के गांव के स्कूल को अपग्रेड करके सीनियर सेकंडरी स्कूल बना दिया है। गौरतलब है कि गांव का यह स्कूल 8वीं तक ही था और 10वीं में पढ़ने वाली गुड़िया और उसके भाई को करीब 6 किलोमीटर का खतरनाक रास्ता तय करके दूर के स्कूल में जाना पड़ता था। इसी स्कूल से घर लौटते वक्त वारदात को अंजाम दिया गया था।

 

सरकार ने गांव के स्कूल का नाम बदलकर गुड़िया के असली नाम पर रख दिया है। स्कूल के लिए प्रधानाचार्य के साथ-साथ अन्य पद भी सृजित करने की नोटिफिकेशऩ जारी की गई है। गुड़िया का भाई भी घटना के बाद से स्कूल नहीं जा रहा था।

इसी बीच जानकारी यह भी है कि प्रशासन ने गुड़िया के परिजनों को फौरी राहत के तौर पर दो लाख रुपए की राशि प्रदान की है। उधर उच्चशिक्षा विभाग के निदेशक बीएल विंटा ने अधिसूचना जारी होने की पुष्टि करते हुए कहा कि इसी साल से स्कूल काम करने लगेगा।