शिमला।। ठियोग में जो बस अड्डे की पुरानी बिल्डिंग गिरी है, अगर वक्त पर उसे खाली कर दिया गया होता तो यूं बेवक्त कई घरों में मातम न छाता। भले ही घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं, मुआवजे से लेकर नौकरियों तक की घोषणा कर दी गई है, सवाल उठता है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए और अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए HRTC कितनी गंभीर है।
इस सवाल का जवाब तलाश ही रहे थे कि हम उन तस्वीरों को आपके साथ शेयर करने जा रहे हैं, जो हमें हमारे एक पाठक ने भेजी हैं। ये तस्वीरें एचआरटीसी की मंडी और सरकाघाट वर्कशॉप्स की हैं। मूलत: ये तस्वीरें हमारे पाठक ने हमें इसी साल जनवरी में भेजी थीं। उनका कहना है कि अब बरसात में तो पानी अंदर तक आ जाता है। आप इन तस्वीरों को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं कि निगम के कर्मचारी किन हालात में हालात में काम करते होंगे। वैसे पालमपुर से बैजनाथ के बीच जाएं तो पालमपुर शहर के पास दिखने वाली वर्कशॉप की हालत भी ऐसी ही नजर आती है। बहरहाल, मंडी और सरकाघाट वर्कशॉप की ये तस्वीरें भेजने वाला अपनी पहचान नहीं बताना चाहता। पहले आप वीडियो देखें-
वीडियो में आप छत की हालत देख सकते हैं। बेतरतीबी का आलम देख सकते हैं और यह अंदाजा भी लगा सकते हैं कि वर्कशॉप की स्थिति क्या है। हमें ये तस्वीरें और वीडियो भेजने वाले पाठक ने लिखा था- छत की हालत आप देख सकते हैं। जब बारिश होती है तो सारा पानी अंदर तक भर जाता है। आगे की तस्वीरें देखें:
यह छत है छत के नाम पर मज़ाक?नंगे तार बरसात के मौसम में बन सकते हैं जानलेवाबारिश में बढ़ जाती हैं मुश्किलेंकीचड़ से हालात खराबबारिश में होने वाला जल भराव
शिमला।। हिमाचल प्रदेश के शिमला के ठियोग में शुक्रवार को बड़ा हादसा हुआ। यहां पर बस अड्डे की पुरानी बिल्डिंग ढह जाने से 4 लोगों की मौत हो गई जबकि कई घायल हो गए।
(वीडियो- पंजाब केसरी)
दफ्तर में बैठे अड्डा प्रभारी रोशन वर्मा और एक अन्य की मलबे में दबकर मौके पर ही मौत हो गई। मौत हो गई समाचार लिखे जाने तक घायलों में से 3 की हालत नाजुक बताई जा रही थी।
परिवहन मंत्री जी.एस. बाली ने इस घटना की न्यायिक जांच का आश्वासन देते हुए कहा कि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने यह ऐलान भी किया है कि घायलों का खर्च परिवहन विभाग उठाएगा।
हादसे के बाद की तस्वीर
मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये की राहत राशि और एक-एक आश्रित को सरकौरी नौकरी भी दी जाएगी।
जिम्मेदार कौन?
अमर उजाला अखबार का कहना है कि करीब चार साल पहले बस अड्डे के भवन को असुरक्षित घोषित कर दिया गया था, बावजूद इसके यहां बस काउंटर चलता रहा।
ठियोग बस अड्डे की पुरानी बिल्डिंग जर्जर हो चुकी थी।
ऐसे में साफ़ है कि अगर इस असुरक्षित बिल्डिंग को बंद करके या इसे पहले ही गिरा दिया जाता तो इस हादसे से हुई मौतों को टाला जा सकता था।
महेंद्र शर्मा।। गुरुवार को हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमिटी की प्रदेश कार्यकारिणी की मीटिंग दिन भर चर्चा में रही। सबसे ज्यादा बात इस बात को लेकर भी हुई कि किस तरह से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अपनी कैबिनेट के सीनियर मिनिस्टर और नगरोटा बगवां के विधायक जी.एस. बाली के अभिवादन का जवाब नहीं दिया। इससे ये अटकलें तेज हो गई हैं कि कांग्रेस संगठन के अंदर सबकुछ ठीक नहीं हैं। साथ ही यह भी साफ हुआ कि वीरभद्र और बाली के बीच तल्खी और बढ़ गई है।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और परिवहन मंत्री जी.एस. बाली एक कार्यक्रम में
हुआ यह कि बैठक में भाग लेने के लिए सीएम वीरभद्र सिंह सबसे पहले पहुंच गए थे। इसके बाद जैसे ही जी.एस. बाली सभागार में पहुंचे तो उन्होंने मुख्यमंत्री को नमस्ते की लेकिन उन्होंने इसका कोई जबाव नहीं दिया। बाली भी आगे बढ़े और अपनी सीट पर बैठ गए।
क्या है दो बड़े नेताओं में तनातनी की वजह?
वीरभद्र कैबिनेट के सबसे ज्यादा ऐक्टिव नजर आने वाले परिवहन, तकनीकी शिक्षा और खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री जी.एस. बाली के मुख्यमंत्री के साथ पुराने मतभेद रहे हैं। वह कई मुद्दों पर कैबिनेट मीटिंग में अपनी बात मुख्यमंत्री के रुख के उलट रखते रहे हैं। कैबिनेट के कई फैसलों के खिलाफ वह असहमति पत्र भी भेज चुके हैं। यही नहीं, कई बार वह सार्वजनिक मंचों से भी वह अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली के प्रति असंतोष जाहिर कर चुके हैं। इसमें हाल ही में शिमला में हुआ गुड़िया प्रकरण भी था जिसमें उन्होंने सबसे पहले सीबीआई जांच करवाने के लिए मुख्यमंत्री को ख़त लिखा था।
मुख्यमंत्री भी बाली पर करते रहे हैं हमले
बेरोजगारी भत्ते को लेकर सीएम पर बनाया था दबाव
इससे पहले बेरोज़गारी से लेकर भी वह अपनी सरकार की नीतियों पर असंतोष जाहिर करते रहे हैं। साथ ही उन्होंने कांग्रेस घोषणापत्र में किए गए बेरोजगारी भत्ते को देने का ऐलान करने के लिए भी मुख्यमंत्री पर दबाव बनाया। बाली का कहना था कि इस भत्ते से बेरोजगार युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी करने के लिए पत्र-पत्रिकाएं लगवाने और फॉर्म भरने में सुविधा होगी। पहले मुख्यमंत्री ने यह भत्ता देने से इनकार किया मगर बाली ने पार्टी आलाकमान से दखल दिलवाया और आखिरकार मुख्यमंत्री वीरभद्र को बेरोजगारी भत्ता देने का ऐलान करना पड़ा।
मुख्यमंत्री को देते रहे हैं सीधी चुनौती वीरभद्र के बाद हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में विद्या स्टोक्स, कौल सिंह ठाकुर और जी.एस. बाली का नाम आता है। चूंकि विद्या स्टोक्स भी बुजुर्ग हो चुकी हैं, ऐसे में वरिष्ठता और कद के आधार पर कौल सिंह और बाली प्रदेश में शीर्ष पद के लिए दावेदारी जताते रहे हैं। इन दिनों कौल सिंह तो मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर पूरी आस्था जता रहे हैं मगर जी.एस. बाली पहले की ही तरह अलग रुख पर कायम हैं। मीडिया के सवालों के जवाब में कहते हैं कि मुख्यमंत्री पद का फैसला पार्टी आलाकमान करेगा। साथ ही खुद के बीजेपी में शामिल होने की बातों का भी वह सीधे-सीधे जवाब नहीं देते।
‘साथ होकर भी साथ नहीं दोनों नेता’
मनकोटिया और सुक्खू से करीबी चर्चा है कि वीरभद्र को बाली का सुक्खू के करीब होना पसंद नहीं है। गौरतलब है कि प्रदेशाध्यक्ष सुक्खू भी खुलकर मुख्यमंत्री पर निशाना साधते रहे हैं और मुख्यमंत्री भी उनपर हमले करते हैं। जहां मुख्यमंत्री वीरभद्र की कैबिनेट के ज्यादातर मंत्री उन्हीं के पक्ष में बोलते हैं, जी.एस. बाली सुक्खू के करीब खड़े नजर आते हैं। यही नहीं, पिछले दिनों जब मेजर मनकोटिया ने मुख्यमंत्री पर आरोपों की झड़ी लगाई तो उसके अगले ही दिन शिमला के मॉल रोड पर जी.एस. बाली और मनकोटिया साथ नजर आए। बाली ने जहां इसे शिष्टाचार भेंट बताया, मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात पर भी टिप्पणियां कीं।
बाली की युवाओं में बढ़ती पैठ हिमाचल प्रदेश में राजनीति के जानकार बताते हैं कि जी.एस. बाली पिछले कुछ समय में पार्टी में अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब हुए हैं। अगर हिमाचल कांग्रेस में वीरभद्र के छत्र से अलग कोई नेता नजर आता है तो वह बाली हैं। दरअसल जी.एस. बाली हिमाचल प्रदेश में सोशल मीडिया के जरिए संवाद करने वाले और लोगों की समस्याएं सुनने वाले पहले नेता हैं।
सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं तक पहुंचे हैं बाली
समस्याओं का निपटारा होता है या नहीं, बात यह है लोगों को खुशी होती है कि कम से कम कोई तो है जो सीधे उनकी बातें सुन रहा है। मुख्यमंत्री ने भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल शुरू किया मगर देरी से। साथ ही उनके पेज से शिमला केस में हुए ब्लंडर और उसके बाद मुख्यमंत्री के यह कहने कि मेरे पेज को कोई और लोग देखते हैं, लोगों का भरोसा उठ गया है।
बाली की काट नहीं ढूंढ पाए हैं वीरभद्र
बात यह भी है कि जहां ज्यादातर विधायक, सीपीएस और मंत्री अक्सर मुख्यमंत्री की हां में हां मिलाते हैं, जी.एस. बाली अलग ही रवैया अपनाते हैं। कूटनीति में माहिर रहे मुख्यमंत्री वीरभद्र ने रणनीतिक तौर पर लगभग हर सीट पर कांग्रेस के कई नेताओं की पैरलल टीमें बनाई हुई हैं ताकि अगर कोई विधायक या नेता उनसे बाहर जाने की कोशिश करे दूसरे नेता को ऊपर उठाकर वह पर कतर सकें। मगर नगरोटा बगवां उन चुनिंदा सीटों में है जहां पर वीरभद्र कांग्रेस के किसी और नेता को बाली के पैरलल नहीं ला सके हैं।
ऐसे में इन सब बातों पर नजर डालें तो समझना मुश्किल नहीं है कि आखिर क्यों मुख्यमंत्री ने अपने ही मंत्री के अभिवादन का जवाब नहीं दिया। वैसे भी मुख्यमंत्री इन दिनों उम्रदराज होने की वजह से कमजोर याद्दाश्त, गुस्सा होने, रिऐक्ट करने और चिढ़ने के आरोपों से घिरे हुए हैं। ऐसे आरोप लगाने वालों में विपक्ष ही नहीं, बल्कि उनकी ही पार्टी के संगठन के लोग भी शामिल हैं।
(लेखक हिमाचल प्रदेश के सोलन से हैं और स्वतंत्र लेखन करते हैं)
Disclaimer: ये लेखक के निजी विचार हैं, इनके लिए लेखक स्वयं जिम्मेदार हैं
शिमला।। पिछले महीने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एक मामले में पेश हुई कनिष्ठ अभियंता की जींस और कलरफुल टॉप पर आपत्ति जताई थी। अब हिमाचल प्रदेश सरकार ने हाई कोर्ट के सामने पेश होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड लागू कर दिया है। ये आदेश अदालत ही नहीं बल्कि कार्यालयों पर भी लागू होंगे। वहां भी कर्चारियों को ‘सोबर’ कपड़े पहनने होंगे। (कवर इमेज प्रतीकात्मक है)
हिंदी अखबार अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार को सरकार के कार्मिक विभाग की तरफ से जारी आदेशों में सभी अफसरों और कर्मचारियों को हाईकोर्ट में फॉर्मल ड्रेस पहनकर जाने के लिए कहा गया है। चटक रंग के कपड़े और जींस-टी शर्ट में कोर्ट जाने पर रोक लगा दी गई है। यह ड्रेस कोड सरकारी और अर्ध सरकारी कार्यालयों पर भी लागू होगा।
कार्मिक विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को आदेशों का पालन सुनिश्चित करवाने को कहा है। विभाग ने आदेशों की अनदेखी करने वालों को अनुशासनात्मक कार्रवाई के प्रति भी चेताया है।
गौरतलब है कि कथित सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े एक मामले में पेश हुई कनिष्ठ अभियंता के जींस और रंग बिरंगे परिधान पर हाईकोर्ट ने बीते माह कड़ा एतराज जताया था। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने प्रदेश के मुख्य सचिव को आदेश दिए थे ऐसे निर्देश जारी करें कि सरकारी कर्मचारी कोर्ट आएं तो गरिमा बनी रहे।
उदयपुर।। लाहौल स्पीति के करपट की हवा में उदासी घुली हुई है। यह गांव अपने बेटे की शहादत पर गमगीन है। शहीद की मां तेंजिन आंगमो और दो बहनें फूट-फूट कर रो रही हैं। मां कभी आसमान की तरफ देखती हैं तो कभी रास्ते की तरफ।
लाहौल का करपट गांव इन दिनों बाढ़ की वजह से मुसीबत में घिरा हुआ है। करपट नाले में आई बाढ़ से यहां का जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित है। इसी बीच ग्रामीणों ने गांव के एक वीर सैनिक को खो दिया, जिससे मानो गांव पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो।
शहीद तेंजिन छुलटिम के चाचा रमेश बताते हैं कि तेंजिन जून माह में घर आया था और 21 जून को उसने दोबारा ड्यूटी जॉइन की थी। जाने से पहले वह बहनों से वादा कर गया कि था कि जल्द छुट्टी लेकर रक्षाबंधन पर घर आने की कोशिश करेगा। मगर होनी को कुछ और ही मंजूर था।
आंतकियों से लोहा लेते हुए जनजातीय जिला लाहौल स्पीति के करपट गांव का जवान तेंजिन छुलटिम शहीद हो गया। बुधवार देर रात श्रीनगर के अलगांव में आंतकियों से मुठभेड़ के दौरान जवान के सिर पर गोली लगी थी। देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए वीर जवान शहीद हो गया। घटना के बाद समूची लाहौल घाटी में शोक की लहर है।
सेना के एक अधिकारी ने बताया कि घटना बुधवार देर रात 2:30 बजे के आसपास की है। आंतकियों से मुठभेड़ के बीच उनके सिर पर गोली लगी। शहीद जवान को लाहौल लाने के लिए सेना के उच्चाधिकारियों ने हेलीकॉप्टर की सिफारिश की है।
25 साल का तेंजिन चार साल पहले डोगरा स्काउट में सिपाही के पद पर भर्ती हुआ था। परिजनों को अब तेंजिन के पार्थिव शरीर का इंतजार है। सेना के उच्च अधिकारियों की मानें तो शहीद को उनके पैतृक गांव पहुचांने के लिए तिंगरेट हेलीपैड की जीआर ले ली गई है। शहीद तेंजिन को राजकीय सम्मान के साथ मुखाग्नि दी जाएगी।
शहीद तेंजिन छुलटिम के पिता किशन चंद ने कहा कि मैंने अपना चिराग खो दिया है। लेकिन देश के लिए शहीद होने वाले बेटे की देशभक्ति को मैं सलाम करता हूं। बचपन में नकली पिस्तौल से खेलने का शौक आज उसने पूरा कर लिया है।
शिमला।। हिमाचल हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की साल 2009-2010 की आयकर रिटर्न की दोबारा असेसमेंट करने के इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह तक के लिए टल गई है। वीरभद्र सिंह ने इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल के 8 दिसंबर 2016 को पारित आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ के समक्ष इस मामले पर सुनवाई हुई। वीरभद्र सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने मामले की पैरवी की। वीरभद्र सिंह ने ट्रिब्यूनल के आदेशों के खिलाफ अपील दायर कर उनकी आयकर रिटर्न की दोबारा असेसमेंट पर रोक लगाने की गुहार लगाई है।
कोर्ट ने 20 जनवरी को पारित आदेशों में दोबारा असेसमेंट किए जाने पर रोक नहीं लगाई थी। यह स्पष्ट किया था कि विभाग अपने निर्णय के अनुसार आगामी कार्रवाई जारी रख सकता है, लेकिन उनकी अंतिम कार्रवाई इस अपील के अंतिम निपटारे पर निर्भर करेगी।
अब विभाग का कहना है कि उन्होंने वीरभद्र सिंह की आयकर रिटर्न का दोबारा असेसमेंट कर लिया है इसलिए इस अपील में कुछ भी निर्णय के लिए नहीं बचता। आयकर विभाग की दलील है कि अब प्रार्थी चाहे तो वह अपनी दोबारा असेस की गई आय को उपयुक्त फोरम में चुनौती दे सकता है।
शिमला।। फॉरेस्ट गार्ड होशियार सिंह की मौत पर हाई कोर्ट द्वारा लिए संज्ञान के मामले में बुधवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने सरकार से यह स्पष्टीकरण देने को कहा है कि इस मामले को सीबीआई को सौंपने को लेकर सरकार को कोई आपत्ति तो नहीं हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने कोर्ट मित्र द्वारा जांच पर उठाए सवालों को सुनने के पश्चात महाधिवक्ता को अगली सुनवाई तक सरकार से यह स्पष्टीकरण लेने को कहा कि क्या इस मामले को सी.बी.आई. को सौंपने पर सरकार को कोई आपत्ति होगी।
गौरतलब है कि होशियार सिंह की संदिग्ध हालात में हुई मौत के मामले में हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त कोर्ट मित्र ने पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
शिमला।। हिमाचल के शिमला के कोटखाई गैंगरेप एंड मर्डर केस में बुधवार को हाईकोर्ट में सीबीआई ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की। हाईकोर्ट ने सीबीआई द्वारा केस की जांच के लिए जब 3 महीने का समय मांगा तो कोर्ट ने उसे जमकर फटकार लगाई। इस पर कोर्ट ने इतना समय देने से इंकार कर दिया।
दरअसल लिफाफे में बंद इस स्टेटस रिपोर्ट को हालांकि कोर्ट में खोला नहीं गया है। सीबीआई ने रिपोर्ट को सीलबंद नहीं किया। इस पर भी जज ने सीबीआई को लताड़ा और पूछा कि लिफाफे को सीलबंद क्यों नहीं किया गया? तभी इस गलती पर सीबीआई ने कोर्ट से माफी मांगी। हालांकि सीबीआई की अलग-अलग तीन टीमें इस मामले की जांच कर रही है।
अब सीबीआई इस मामले में अगली स्टेटस रिपोर्ट 17 अगस्त को सौंपेगी। बता दें कि हाईकोर्ट ने सीबीआई से 14 दिन में पूरी स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी, जिसकी अवधि बुधवार यानी 2 अगस्त को खत्म हो रही थी। लेकिन सीबीआई ने यह स्टेटस रिपोर्ट अधूरी दी।
मंडी।। मंडी जिले के एक गांव में एक युवती के आपत्तिजनक पोस्ट चिपकाने की घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि गांव में लगाए गए इन पोस्टरों में युवती का नाम और उसका मोबाइल नंबर लिखा गया है और साथ ही गलत बातें भी लिखी गई हैं। (कवर इमेज प्रतीकात्मक है)
जब प्रधान और अन्य सदस्य इस मामले में युवती के घर पहुंचे तो बताया गया कि गांव का ही एक अन्य युवक उनकी बेटी को तंग कर रहा था जिससे वे परेशान हैं। इसके बाद पुलिस स्टेशन में इस संबंध में शिकायद दी गई है।
हिंदी अखबार पंजाब केसरी के मुताबिक पुलिस स्टेशन प्रभारी ने बताया है कि इस संबंध में शिकायत आई है और जांच की जा रही है।
सोलन।। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू के बीच चल रही तनातनी किसी से छिपी नहीं है। मगर मंगलवार को सोलन में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भावुक नजर आए। उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन ने मुझे अकेला छोड़ दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भाजपा मेरे ऊपर हमलावर हुई तो संगठन के एक भी पदाधिकारी ने जवाब नहीं दिया। वे चाटुकारिता में लगे थे। किसी ने मेरे ऊपर हो रहे हमलों का जवाब देना ठीक नहीं समझा। मैं साढ़े 4 साल से अकेला इस जंग को लड़ रहा हूं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अफसोस इस बात का है कि पूरा संगठन गूंगा-बहरा बनकर तमाशा देखता रहा। जब मुझे संगठन की सबसे ज्यादा जरूरत थी, कोई साथ देने नहीं आया। उन्होंने कहा कि संगठन में शामिल लोग कमजोर हैं और उनके दम पर चुनाव नहीं जीता जा सकता।