पालमपुर में एक किलोमीटर से लंबी तिरंगा यात्रा का आयोजन

पालमपुर।। आज़ादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में पालमपुर में एक किलोमीटर से लंबी तिरंगा झंडा यात्रा का आयोजन किया गया। अपने आप में ऐतिहासिक एवम भव्य तिरंगा यात्रा का शुभारंभ विधान सभा अध्यक्ष, विपिन सिंह परमार ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्य सभा सदस्य इंदु गोस्वामी ने की।

भारतीय जन सेवा संस्था, इंसाफ संस्था, गीता पीठ संस्था, ओम मंगलम संस्था के संयुक्त तत्वावधान में प्रशासन के सहयोग से शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा मैदान से शहीद स्मृति स्थल कालू दी हट्टी (बाय पास) तक तिरंगा यात्रा निकाली गई। एक हजार 25 मीटर लंबे तिरंगे झंडे को उपमंडल के 24 शिक्षण संस्थानों के एक हजार से अधिक छात्रों जिसमें एनसीसी, एनएसएस, रेड रिबन क्लब और स्काउट एंड गाइड के छात्रों ने भाग लिया। तिरंगे झंडे को छात्रों के अतिरिक्त स्थानीय लोगों ने उठाया और यात्रा में बढ़चढ़ कर भाग लिया। यात्रा के दौरान लोगों ने जगह -जगह पर पुष्प वर्षा की। इस अवसर पर स्वन्त्रता सेनानियों और शहीदों की प्रतिमाओं पर श्रद्धासुमन भी अर्पित किए गए।

भव्य तिरंगा यात्रा में शामिल होना गौरव की बात: विपिन सिंह परमार
विधान सभा अध्यक्ष, विपिन सिंह परमार ने कहा कि ऐतिहासिक तिरंगा यात्रा में शामिल होना उनके लिए गौरव और शौभाग्य की बात है। उन्होंने चारों संस्थाओं को आज़ादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर तिरंगा यात्रा के आयोजन के लिये बधाई दी। उन्होंने ज़िलाधीश कांगड़ा को इस आलोकिक तिरंगा यात्रा को लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज करवाने के लिये प्रस्तवना भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने चारों संस्थाओं के माध्यम से उपायुक्त को भेंट तिरंगे झंडे को फ्रेम करने और इस यात्रा में शामिल सभी संस्थानों की जानकारी दर्ज करने की अपील की, ताकि भविष्य में लोग पालमपुर तिरंगा यात्रा के बारे में जानकारी हासिल कर सकें।
परमार ने कहा कि पालमपुर देव भूमि के साथ-साथ वीरों की भूमि है। पालमपुर से संबंधित अनेक वीरों ने मातृभूमि की रक्षा में अपना बलिदान दिया है। उन्होंने कहा कि अमर शहीद मेजर सोम नाथ शर्मा, अमर शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा, शहीद कैप्टन सौरव कालिया, मेजर सुधीर वालिया सहित अनेक वीरों ने शाहदत प्राप्त की। उन्होंने सभी अध्यापकों से प्रार्थना सभा में देश के स्वतंत्रता सेनानियों और महापुरुषों का ज्ञान देने की अपील की। ताकि छात्रों को अपने देश के इतिहास की जानकारी साथ-साथ देश प्रेम की भावना उत्पन्न हो। उन्होंने चारों संस्थाओं को 25-25 हजार देने की घोषणा की।

तिरंगा हमारे अखंड राष्ट्र की पहचान : इंदु गोस्वामी
इस पहले राज्य सभा सांसद इंदु गोस्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर आज़ादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर इसे अमृत महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव में हर घर तिरंगा अभियान को लोगों के सहयोग से महा उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है।

सांसद ने कहा कि तिरंगा हमारे देश को अखण्ड राष्ट्र की पहचान दिलाता है। तिरंगा देश का गौरव है और अनेकता में एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश वीरों की भूमि है और मातृ भूमि की रक्षा में पालमपुर के वीर सपूतों ने अपना बलिदान दिया है। उन्होंने चारों संस्थाओं को 1 हजार 25 मीटर तिरंगें की भव्य यात्रा निकालने पर बधाई दी और कहा कि यह सराहनीय प्रयास है जिसे लिम्का बुक ऑफ इंडिया में दर्ज होना चाहिये। उन्होंने छात्रों से अपने देश के समृद्ध इतिहास को पढ़ने और महापुरुषों से प्रेरणा लेने का आह्वान कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की। उन्होंने संस्थाओं को एक एम्बुलेंस देने की घोषणा की।

कार्यक्रम में कर्मचारी एवम पेंशनर्स कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष घनश्याम शर्मा, पूर्व विधायक प्रवीण शर्मा, भारतीय जनसेवा संस्था के अध्यक्ष अनिल गौड़, पर्यटन प्रकोष्ट के संयोजक विनय शर्मा, उमेश दत्त, उपायुक्त कांगड़ा डॉ निपुण जिंदल, एसपी खुशहाल शर्मा, एसडीएम डॉ अमित गुलेरिया, गीता पीठ संस्था से गीतेश भृगु, ओम मंगलम संस्था से ललित सूद और गोपेश शर्मा, विजकय शर्मा, डीएसपी गुरवचन सिंह, कॉलेज और स्कूलों के छात्र तथा अध्यापक एवम बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

जानें, विपक्ष की आपत्तियों के बीच पारित हुए नए धर्मांतरण रोधी विधेयक में क्या है

शिमला।। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मॉनसून सत्र के आखिरी दिन धर्मांतरण रोधी कानून को और सख्त बनाने के लिए एक विधेयक पारित किया गया। इसे देश का सबसे सख्त धर्मांतरण रोधी विधेयक बताया जा रहा है जिसमें जबरन या फिर लालच देकर धर्म परिवर्तन करवाने पर सख्त सजा का प्रावधान है।

जयराम सरकार द्वारा लाए गए इस नए विधेयक में धोखाधड़ी, बल, गलत ढंग से प्रभावित करके, जबरदस्ती, लालच देकर, शादी के लिए या फिर अन्य किसी गलत मंशा से धर्म परिवर्तन करने पर रोक लगाई गई है। इसमें मास कन्वर्जन यानी सामूहिक धर्मांतरण का भी जिक्र किया गया है।

विधेयक में यह प्रावधान भी किया गया है कि धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति को उसके मूल धर्म में यदि कोई विशेष सरकारी लाभ मिलते थे तो वो नहीं मिलेंगे। उसे धर्मांतरण करते वक्त इस संबंध में हलफनामा देना होगा।

नए विधेयक में कुछ नए प्रावधान जोड़े गए हैं और पुराने प्रावधानों को और सख्त किया गया है। इसमें इस तरह के मामलों की जांच सब इंस्पेक्टर से नीचे के रैंक वाला अधिकारी नहीं कर पाएगा। साथ ही, सजा को भी पांच वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष कर दिया गया है। इस कानून में गैर-जमानती धाराओं का भी प्रावधान किया गया है।

विपक्ष की आपत्तियां
हिमाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2022 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायकों और सीपीएम विधायक की ओर से कुछ आपत्तियां जताई गईं। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि धर्म परिवर्तन करने पर अनुसूचित जाति के व्यक्ति को मिलने वाले लाभ छीनना संविधान का उल्लंघन है। उन्होंने इस विधेयक को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजने के लिए कहा।

वहीं किन्नौर से कांग्रेस विधायक जगत नेगी ने इस विधेयक की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि 3 प्रतिशत आबादी से डरकर 97 प्रतिशत लोग इस तरह का सख्त कानून ला रहे हैं। उन्होंने धर्मांतरण पर 10 साल की सजा देने को भी 3 प्रतिशत आबादी को दबाने का प्रयास बताया।

वहीं सीपीएम विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि यह विधेयक शहीदों का अपमान है और संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि वह इसका विरोध करेंगे और इस विषय को जनता के बीच ले जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पहले के कानून को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है और वह मामला विचाराधीन है।

इस पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि कानून बनाना विधानसभा का अधिकार है और हाई कोर्ट का सम्मान करते हुए हम अपने अधिकार का निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि धर्मांतरण बड़ी समस्या बनकर उभरा है और गलत ढंग से करवाए जा रहे धर्म परिवर्तन के कारण कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में पिछड़े और गरीब वर्ग के लोगों को कुछ लोग गुमराह कर रहे हैं और उनका शोषण कर रहे हैं। इस पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून आवश्यक है।

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चंपा ठाकुर ने अनिल शर्मा को कहा प्रदेश का सबसे निकम्मा विधायक

मंडी।। मंडी सदर से बीजेपी विधायक अनिल शर्मा की वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ करीबी बढ़ने की चर्चाओं के बीच उनके गृह विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस नेताओं ने कड़े तेवर अपना लिए हैं। पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर की बेटी और पिछले चुनावों में कांग्रेस की उम्मीदवार रहीं चंपा ठाकुर ने अनिल शर्मा को हिमाचल का सबसे निकम्मा विधायक कहा है।

चंपा ठाकुर ने कहा कि सीएम जयराम ठाकुर मंडी सदर क्षेत्र का विकास करवाना चाहते हैं लेकिन विधायक अनिल उसमें रोड़ा डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधायक अपने क्षेत्र के बजाय अपने परिवार के मान-सम्म्मान की ही बात करते रहते हैं। शनिवार को पत्रकारों से बात कहते हुए चंपा ने कहा कि अनिल शर्मा का जनता के विकास और मान-सम्मान से कोई संबंध नहीं है। यही कारण है कि विधानसभा में भी उन्होंने क्षेत्र को लेकर कोई मुद्दा नहीं उठाया।

गौरतलब है कि बेटे आश्रय के कांग्रेस के टिकट से 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ने के बाद से ही अनिल शर्मा बीजेपी से अलग-थलग पड़े हैं। हाल ही में उनके बेटे आश्रय ने एक तस्वीर शेयर की थी जिसमें अनिल शर्मा विधानसभा के बाहर कांग्रेस नेता सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ खड़े थे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चंपा से पूछा गया कि अगर अनिल कांग्रेस में आ गए और भाजपा ने मंडी सदर से आपको प्रत्याशी बनाया तो क्या होगा। इस पर चंपा ने कहा कि यह फैसला भविष्य पर टिका है लेकिन इतना तय है कि मैं चुनाव लड़ूंगी।

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पवित्र कमरूनाग झील में चोरी की कोशिश को लेकर मामला दर्ज

मंडी।। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले प्रसिद्ध कमरूनाग मंदिर में पवित्र झील में चोरी की कोशिश को लेकर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। 7 अगस्त को कमरूनाग झील की सुरक्षा में लगे चौकीदारों को बंधक बनाकर चोरी की कोशिश की खबर सामने आई थी। दरअसल, यह माना जाता है कि पवित्र झील में भारी मात्रा में सोना और चांदी है।

पुलिस को मिली शिकायत के अनुसार 11 अगस्त को मंदिर के चौकीदार ने मंदिर के कटवाल काहन सिंह को सूचना दी थी कि सात अगस्त को रात 2 बजे के करीब तीन लोग मंदिर में घुसे और बाहर ग्रिल में ताला लगा दिया। इसके बाद उन्होंने डंडों की मदद से झील में चढ़ाए गए गहनों को चुराने की कोशिश की।

शनिवार को पुलिस ने मंदिर में जाकर चौकीदारों के बयान दर्ज किए और मामला दर्ज किया। चौकीदार ने झील में घुसे लोगों की वीडियो भी बनाई है। यह जानकारी मिली है कि मंदिर का दानपात्र तो सुरक्षित है लेकिन झील से कुछ चुराया गया है या नहीं, इस बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं हैं।

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मंदिर में चोरी के प्रयास की खबर को सबसे पहले हिंदी अखबार अमर उजाला ने प्रकाशित किया गया था। इसके बाद यह मामला विधानसभा में ेभी गूंजा था। सुजानपुर के विधायक राजिंद्र राणा ने सदन में यह मामला उठाया था।

आठ विभागों ने बिना उपयोगिता प्रमाण पत्र खर्च दिए 3558 करोड़ रुपये: CAG

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में आठ विभागों ने वित्त वर्ष 2015 से लेकर 2021 तक 3557.83 करोड़ रुपये खर्च किए हैं मगर वे इसका उपयोगिता प्रमाणपत्र पेश नहीं कर पाए हैं। इस राशि को लेकर भारत के नियंत्रक एवं लेखा परीक्षक (कैग) ने आपत्तियां लगाई हैं।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विधानसभा के मॉनसून सत्र के अंतिम दिन शनिवार को सदन में कैग की रिपोर्ट पेश की जिसमें वित्त वर्ष 2020-21 के वित्त लेखे पेश किए गए। कैग की रिपोर्ट में यह बात निकलकर आई है कि विभिन्न विभागों ने 2,799 उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किए।

कैग के मुताबिक उपयोगिता प्रमाणपत्रों को प्रस्तुत नहीं करने का मतलब है कि अधिकारियों ने खर्च की गई रकम का सही स्पष्टीकरण नहीं दिया है। अगर उपयोगिता प्रमाण पत्र न पेश किए जाएं तो ऐसी आशंका भी रहती है कि इस रकम का दुरुपयोग हो गया है।

कैग ने टिप्पणी की है कि इन बातों को ध्यान में रखते हुए यह जरूरी है कि राज्य सरकार हर पहलू की बारीकी से निगरानी करे और संबंधित व्यक्तियों पर इस बात का दबाव बनाए कि उपयोगिता प्रमाणपत्रों को समयसीमा के अंदर प्रस्तुत करें।

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किस विभाग में कितना व्यय
सबसे ज्यादा 1,269.55 करोड़ रुपये पंचायती राज, 745.69 करोड़ विकास और 454.98 करोड़ रुपये शहरी विकास विभाग से संबंधित है। बाकी राशि आयुष, शिक्षा, कृषि एवं उद्यान, पशुपालन, उद्योग, जलशक्ति विभाग और राज्य लोक सेवा आयोग से संबंधित है।

वित्त वर्ष 2015-16 में 24, 2016-17 में 152, 2017-18 में 397, 2018-19 में 914 और 2019-20 में 1312 उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं किए गए। अगर रकम की बात करें तो वित्त वर्ष 2015-16 में 34.86, 2016-17 में 139.08, 2017-18 में 410.48, 2018-19 में 1002.65 और 2019-20 में 1970.76 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

आनी : नानी का सहारा बनने के लिए साथ रहती दोहती, घर पर आया मलबा दोनों की मौत

आनी।। जिला कुल्लू के उपमंडल आनी में भारी बारिश से करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है। भारी बारिश के दौरान मकान पर मलबा गिरने से बुजुर्ग महिला और किशोरी की मौत हो गई। ये रिश्ते में नानी और दोहती थीं। यह घटना आनी उपमंडल की चवाई पंचायत के खदेड़ गांव की है।

जानकारी के अनुसार खदेड़ गांव में 55 वर्षीय चबेलू देवी और उनकी 17 वर्षीय दोहती कृतिका मकान में सो रही थी कि अचानक घर पर मलबा आ गिरा। मलबा छत और दीवार तोड़ते हुए कमरे में जा पहुंचा और इस हादसे में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। कृतिका ऊर्टू निरमंड की रहने वाली थी।

हादसे का पता लगते ही आसपास के लोग एकत्र हुए और मलबे में दबी महिला और लड़की को निकालने में जुट गए। हादसे के बाद से गांव में मातम है। दोनों शवों को मलबे से निकाल लिया गया है। महिला के पति की मौत हो चुकी है व उसका कोई बेटा नहीं था। इस कारण महिला के साथ उसकी दोहती रहती थी।

उधर, प्रशासन की ओर से एसडीएम आनी नरेश वर्मा ने लोगों से एहतियात बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से चिकित्सकों की टीम घटनास्थल पर भेज दी है। मौके पर ही शवों का पोस्टमार्टम किया जाएगा। वही, प्रशासन की ओर से फौरी राहत प्रदान की जा रही है।

हिमाचल में भी दिखे लंपी स्किन डिजीज के लक्षण, जानें क्या है LSD जिसने हजारों मवेशी मार दिए?

डेस्क ।। देश के कई राज्यों में लंपी स्किन डिजीज (LSD) की वजह से हजारों मवेशियों की मौत हो चुकी है। गुजरात और राजस्थान में यह बीमारी व्यापक स्तर पर फैल चुकी है। पंजाब और मध्य प्रदेश में भी इसके फैलने की खबर सामने आई है। अब हिमाचल में भी मवेशियों में इस बीमारी के लक्षण देखे गए हैं।

हिमाचल प्रदेश में भी इस बीमारी के लक्षण दिखने के बाद पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। यह बीमारी मवेशियों जैसे गाय, भैंसों और बैलों में फैल रही है।

क्या है लंपी स्किन डिजीज ?

LSD मवेशियों में त्वचा की एक बीमारी है जो तेजी से फैल रही है। इसे गांठदार त्वचा रोग वायरस (LSDV) कहते हैं। इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार होना, उनकी त्वचा पर चेचक और नाक बहना शामिल है। इस बीमारी की वजह से पशुओं को तेज बुखार होता है और वे खाना-पीना छोड़ देते हैं। इससे उनकी शारीरिक क्षमता काफी गिर जाती है जिस कारण उनकी मौत भी हो सकती है। यह बीमारी मच्छर, मक्खी और जूं इत्यादि के काटने या मवेशियों के सीधा संपर्क में आने से भी फैल रही है।

कहां से आई लंपी स्किन डिजीज ?

यह संक्रामक रोग या फिर वायरस 30 से 35 साल पहले अफ्रीका में पाया गया था। पिछले एक दशक में इस बीमारी ने अफ्रीका के कई इलाकों में महामारी का रूप ले लिया था। भारत में यह बीमारी पहली बार तीन साल पहले पाई गई थी। अब भारत के कई राज्यों में इस बीमारी ने महामारी का रूप ले लिया है।

कैसे की जा सकती है रोकथाम?

इस बीमारी का अभी तक कोई ठोस इलाज नहीं है। अभी तक इसका इलाज मवेशियों में दिखने वाले लक्षणों के आधार पर किया जा रहा है। इसके अलावा भारत सरकार ने एक एडवाजरी जारी की है जिसमें गोवंश की रक्षा के लिए गॉट पॉक्स वैक्सीन लगवाने की सलाह दी है। सरकार का कहना है कि यह वैक्सीन पशुओं को इस घातक बीमारी से बचा सकती है। इसके अलावा इस बीमारी से बचाव के लिए पशुपालकों को चाहिए कि वो अपने पशुओं को संक्रमित पशुओं से दूर रखें।

क्या कह रहे पशुपालन मंत्री वीरेंद्र कंवर

पशुपालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि उन्हें यह जानकारी मिली है कि शिमला के कुछ क्षेत्रों में पशुओं में यह बीमारी देखी गई है। ऐसे में पशुपालन विभाग को वैक्सीनेशन करने के आदेश दिए हैं। इस बीमारी की रोकथाम के लिए विभाग के साथ बैठक कर टास्क फोर्स बनाई जाएगी। पशुपालन विभाग इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।

नहीं रहे पूर्व मंत्री और हिमुडा उपाध्यक्ष प्रवीण शर्मा

ऊना।। हिमुडा के उपाध्यक्ष प्रवीण शर्मा का निधन हो गया है। पिछले कुछ समय से वह दिल से संबंधित समस्याओं के चलते अस्वस्थ थे। उन्होंने अंब में अपने घर पर अंतिम सांस ली।

चिंतपूर्णी से भाजपा विधायक रहे प्रवीण शर्मा 1998 से लेकर 2003 तक प्रेम कुमार धूमल सरकार में खेल और आबकारी मंत्री रहे थे। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के करीबी रहे प्रवीण शर्मा उम्र के आखिरी पड़ाव तक काफी सक्रिय रहे।

शर्मा ने पार्टी में विभिन्न दायित्व संभाले और 2007 से 2012 तक हिमुडा के उपाध्यक्ष रहे। वर्तमान सरकार में भी उन्हें यही पद दिया गया था।

राजनीतिक गलियों में उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल का हनुमान भी कहा जाता था। जब प्रेम कुमार धूमल लोकसभा की सदस्यता छोड़ मुख्यमंत्री बने थे तो उनकी जगह हुए उपचुनाव में अनुराग ठाकुर को हमीरपुर से विजयी बनाने में प्रवीण शर्मा की भी बड़ी भूमिका रही थी।

शर्मा के निधन पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने दुख जताया है।

जब एक ट्रक ड्राइवर ने डॉक्टर वाई.एस. परमार से लिया था पंगा

डॉक्टर चिरंजीत परमार।। बात 1966 की है। मैं बागथन के फ्रूट रिसर्च स्टेशन पर पोस्टेड था। यह डॉक्टर वाई.एस. परमार का पैतृक स्थल था। उका एक घर था और पास ही एक फॉर्म जहां पर खुमानी का बाग लगाया गया था। रिसर्च स्टेशन को लोक ‘फार्म’ कहा करते थे।

मेरे अलावा वहां पर एक वेटरिनरी डॉक्टर भी हुआ करता था। साथ में उसका एक स्टॉक असिस्टेंट होता था। एक फुल सब-डिविजन भी होता था HPPWD का जहां सब डिविजनल ऑफिसर, तीन जेई, एक क्लर्क और एक चपरासी हुआ करता था। 6 लोगों का यह ग्रुप एख बड़े से हॉल में बैठता था जिसे फार्म के सीड स्टोर के लिए बनाया गया था। सब काम यही से चलते थे और ऑफिर का फर्निचर तक पूरा नहीं था।

हिमाचल निर्माता डॉ. परमार की जयंती आज, परमार की जन्मस्थली की सुध लेने वाला कोई नहीं
डॉक्टर वाई.एस. परमार

यह वह दौर था जब हिमाचल में सड़कों का जाल पिछने की शुरुआत हुई थी। ज्यादातर सड़कें कच्ची थीं और तंग भी थीं। 20 किलोमीटर लंबी सड़क बागथन को नाहन शिमला रोड से जोड़ती थी। यह रोड ढंग से बनी तक नहीं थी। इसमें बागथन और नाहन के बीच एक बस सेवा भी शुरु हुई थी। ज्यादातर टाइम यहां पर विभिन्न सरकारी विभागों की जीपें दौड़ा करती थीं। मटीरियल ढोने के लिए PWD के ट्रक भी आया करते थे।

डॉक्टर परमार का घर बागथन में था और उनका यहां से बड़ा जुड़ाव था। वह महीने में 2-3 दिन यहीं गुजारा करते थे। उस वक्त (मैं 1974 के बाद बागथन नहीं गया हूं) उनका घर बहुत सिंपल था। दोमंजिला घर जिसमें 3 से 4 कमरे होंगे। फर्श लकड़ी का था। लोग यकीन नहीं करेंगे कि पूरे घर में एक ही बिस्तर था और उसमें श्रीमती परमार सोया करती थीं। डॉक्टर परमार और अन्य लोग फर्श पर ही सोते थे।

डॉक्टर परमार की एक तस्वीर

एक दिन डॉक्टर परमार शिमला से लौट रहे थे। आगे PWD का ट्रक चल रहा था और पीछे डॉक्टर परमार की गाड़ी थी। ट्रक 10-12 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चल रहा होगा। ऐसी सड़क पर तेज चलना भी संभव नहीं था। गर्म दिन था और धूल उड़ती जा रही थी। डॉक्टर परमार के ड्राइवर ने पास मांगना शुरू किया ताकि ओवरटेक करके आगे बढ़ें। मगर ट्रक वाले ने पास नहीं दिया।

ट्रक चलता रहा और धूल उड़कर डॉक्टर परमार की गाड़ी में घुसती रही। एक घंटे बाद वे बनेठी पहुंचे जहां पर बस स्टॉप के लिए चौड़ी जगह बनाई थई। ट्रक वहां रुका। डॉक्टर परमार इरिटेट हो गए थे। उन्होंने ड्राइवर को बुलाया और पूछा कि साइड क्यों नहीं हुए।

डॉक्टर परमार

ट्रक का ड्राइवर था पृथी सिंह। दिहाड़ी पर काम करता था शायद। उसने बताया कि ट्रक का सेल्फ स्टार्टर खराब है इसलिए धक्का लगाकर इसे चलाना पड़ता है। अगर इंजन एक बार रुक जाए तो स्टार्ट नहीं होगा और देरी हो जाएगी। यह सिर्फ बहाना था क्योंकि ऐसा तो भला ट्रक ड्राइवर बीच रास्ते में अभी क्यों रुका होता। डॉक्टर परमार को भी शायद इसका पता चल गया था मगर वह खामोश रहे।

यह मामला धीरे-धीरे चर्चा का विषय बना कि बंदे ने मुख्यमंत्री की गाड़ी को रास्ता नहीं दिया। हमारे दफ्तर में PWD लोगों के बीच भी बात होने लगी। हमने पृथी सिंग से पूछा कि भाई ऐशा किया क्यों। वह बोला- मैंने कई अफसरों से पंगे लिए हैं। मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों इस बार मुख्यमंत्री से पंगा लिया जाए और देखा जाए कि क्या होता है। उसे हैरानी थी कि कुभ भी नहीं हुआ।

क्या ऐसा आज के दौर के मुख्यमंत्रियों के साथ हो सकता है?

https://inhimachal.in/special/educative/doctor-parmar-a-great-leader/

इस लेख को इंग्लिश में पढ़ने के लिए क्लिक करें: WHEN A DAILY WAGER PWD TRUCK DRIVER TOOK PANGAA (पंगा) WITH DR. Y.S. PARMAR

(लेखक हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से हैं जाने-माने फ्रूट साइंटिस्ट हैं। पूरी दुनिया में विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय उनकी सेवाएं ले चुके हैं। यह लेख उनकी फेसबुक टाइमलाइन और ब्लॉग से साभार लिया गया है।)

Fact Check: क्या अटल सरकार ने हिमाचल पर जबरन थोपी थी NPS?

डेस्क।। हिमाचल प्रदेश में ओल्ड पेंशन की बहाली सरकारी कर्मचारियों की प्रमुख मांग है। इस मामले पर कर्मचारियों ने कड़े तेवर अपनाए हुए हैं। मौजूदा सरकार ने इस विषय पर विमर्श के लिए जहां मुख्य सचिव की अगुवाई ने एक विशेष कमेटी बनाई है, वहीं कांग्रेस ने तो खुलकर एलान कर दिया है वह सत्ता में आती ही ओपीएस को बहाल करेगी।

नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने रविवार को हरोली में युवाओं के कार्यक्रम में कई सारे वादे किए। सबसे बड़ा वादा था- मां चिंतपूर्णी की कसम खाकर कहना कि कांग्रेस सत्ता में आते ही ओपीएस बहाल करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक ओपीएस बहाल नहीं होगी, प्रदेश में और कोई काम नहीं होगा।

कई मंचों पर मुकेश अग्निहोत्री यह कहते रहे हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने राज्यों को ओपीएस खत्म करके एनपीएस अपनाने को मजबूर किया था। उन्होंने कल भी कहा- हम अटल जी का सम्मान करते हैं मगर उन्होंने एनपीएस लागू करके गलत काम किया।

दरअसल, कई सारे लोग कांग्रेस को इस बात के लिए घेरते हैं कि जब हिमाचल में कांग्रेस की सरकार थी और वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री थे, उसी समय यहां एनपीएस लागू की गई। संभवत: इसी के जवाब में मुकेश अग्निहोत्री और अन्य कांग्रेस नेता पूरी जिम्मेदारी तत्कालीन केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर डालने की कोशिश कर रहे हैं।

तो क्या NPS वाकई राज्यों के लिए बाध्यकारी थी?
पड़ताल करने पर पता चलता है कि NPS यानी National Pension Scheme सबसे पहले केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए लाई गई थी। राज्यों के लिए इसमें शामिल होना वैकल्पिक था। इसी कारण पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा, दोनों ही राज्य पेंशन की पुरानी व्यवस्था को बहाल रख पाए हैं।

दरअसल, अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार भारी आर्थिक बोझ से बचने के लिए एनपीएस का कॉन्सेप्ट लाई थी। यह देखा गया कि ओपीएस वाली व्यवस्था तब सही थी, जब कर्मचारियों की संख्या भी कम थी और वेतन भी कम हुआ करता था। मगर समय के साथ हर क्षेत्र में कर्मचारियों की संख्या बढ़ती गई और साथ ही उनके वेतन और अन्य भत्तों में भी बढ़ोतरी हुई।

आज समय-समय पर वेतन आयोगों की सिफारिशों के आधार पर कर्मचारियों की आय में बढ़ोतरी भी जाती है। मगर ओल्ड पेंशन वाली व्यवस्था के कारण सरकारों को अपने बजट का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों की पेंशन पर ही देना पड़ रहा था। ऐसे में केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों के लिए एनपीएस लाई।

बहुत सारे राज्य भी पेंशन पर होने वाले भारी भरकम खर्च को देखते हुए एनपीएस की ओर आकर्षित हुए और उन्होंने अपने यहां इसे लागू कर दिया। हिमाचल भी इन्हीं राज्यों में एक था जिसने 17 अगस्त 2006 को अधिसूचना जारी की और 15 जून, 2003 से हुई भर्तियों पर इसे लागू कर दिया।

धीरे-धीरे तकरीबन सभी राज्यों ने अपने यहां NPS लागू कर दी, सिवाय वाम दलों की सरकारों वाले राज्यों ने। त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और केरल की सरकारों का कहना था कि नई पेंशन योजना की तुलना में पुरानी व्यवस्था कर्मचारियों के ज्यादा हित में है। त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में भले सत्ता परिवर्तन हो गया मगर ओल्ड पेंशन योजना बरकरार रही। हालांकि, केरल में जब UDF की गठबंधन सरकार बनी तो 2013-14 से एनपीएस लागू कर दी। तब पूरे प्रदेश में कर्मचारियों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया था।

कर्मचारियों का कहना है कि एनपीएस न्यायसंगत नहीं है और उन्हें पुरानी पेंशन दी जाए। यह मानते हुए कि कर्मचारियों का एक बड़ा वोट बैंक है, कांग्रेस शासित राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड की सरकारों ने ओपीएस देने की घोषणा कर दी है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ओपीएस लागू होने पर कर्मचारियों की पिछली देय राशि और भविष्य दी जाने वाली राशि की व्यवस्था ये राज्य कैसे करेंगे। साथ ही, एनपीएस में डाले जा रहे फंड का प्रबंधन किस तरह से होगा, यह भी अभी साफ नहीं है।

जिन राज्यों ने ओपीएस बहाल करने की घोषणा की है, वहां कांग्रेस सत्ता में है। एक तर्क यह भी दिया जाता है कि ओपीएस लागू करना कांग्रेस पूरी तरह से डेस्परेट पॉलिटिकल मूव (बेचैन होकर लिया गया राजनीतिक कदम) है क्योंकि अगर राज्य पुराने तरीके से पेंशन देने में सक्षम होते तो वे एनपीएस को चुनते ही नहीं। ये घोषणाएं आनन-फानन में की जा रही हैं ताकि किसी तरह राजनीतिक लाभ लिया जाए। लेकिन इससे राजनीतिक फायदा होगा ही, इसे लेकर विशेषज्ञ एकमत नहीं हैं।

जानकारों का कहना है कि कर्मचारी वर्ग समाज के सबसे जागरूक वोटरों में से एक माना जाता है और वह कभी भी भेड़ चाल में उस तरह वोटिंग नहीं करता, जिस तरह से लोग जाति, धर्म या क्षेत्र के आधार पर वोटिंग करते हैं। यही कारण है कि हिमाचल में पिछली कई सारी सरकारें कर्मचारियों के तुष्टीकरण के लिए फैसले लेती रहीं, लेकिन उनके पूरे मत नहीं ले पाईं। संभवत: इसीलिए बीजेपी भी यह फैसला लेने से बच रही है क्योंकि उसे पता है कि अगर उसने ओपीएस लागू कर भी दी, तब भी कोई गारंटी नहीं कि उसे कांग्रेस के प्रति झुकाव रखने वाले कर्मचारियों के वोट मिल पाएंगे।

अगर कर्मचारी एक वोट बैंक के रूप में संगठित होते तो एनपीएस कहीं पर भी लागू नहीं होती और लागू हो भी गई होती तो वोट बैंक छिनने के डर से पहले ही किसी सरकार ने ओपीएस बहाल कर दी होती। कर्मचारी भी इस बात को जानते हैं कि उनके साथ काम करने वाले कितने व्यक्ति ऐसे हैं जो किसी भी हाल में अपने पसंदीदा दल या नेता को ही वोट देंगे। वे किसी एक फैसले या सरकार की ओर से दी जाने वाली सौगात से खुश होकर एक तरफा वोट नहीं डालते। और यही कारण है कि वे चुनाव से पहले वर्तमान सरकार पर दबाव बनाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं।

बहरहाल, नीचे का टेबल देखें कि किस राज्य ने कब एनपीएस को लागू किया। हिमाचल 17वें नंबर पर है।

क्रमांक राज्य माध्यम अधिसूचना की तिथि अपनाने की तिथि रेफरेंस नंबर
1 Andhra Pradesh Other Notification 18/06/2012 01/09/2004 Circular Memo No. 41/01/A2//Pen.I/2012 of Finance (Pension-I) Department
2 Arunachal Pradseh State Notification 17/11/2007 01/01/2008 No./ DAP/PEN/11/2004 of Finance Department
3 Punjab Other Notification 09/07/2012 01/01/2004 No. 5/44/2012-5FPPI/758 of Finance Deptt.
4 Punjab State Notification 02/03/2004 01/01/2004 No. 8/1/2004-3FPII/2078 of Finance Deptt.
5 Orissa Other Notification 01/11/2012 01/01/2005 No. Pen-250/12 36690/F of Finance Deptt.
6 Nagaland State Notification 28/01/2010 01/01/2010 No. Fin ESTT-3/04/ Pt of of Finance Deptt. (Establishm
7 Mizoram State Notification 17/06/2010 01/09/2010 No. G 17011/2/2008-F.APF of Finance Deptt.
8 Meghalaya State Notification 24/03/2010 01/04/2010 FEMPC ) 7/2007/Pt.II/66 of Finance (Pension Ce
9 Manipur State Notification 31/12/2004 01/01/2005 No. 9/44/2004-FD (PIC) of Finance Deptt. Pay Imple
10 Maharashtra State Notification 31/10/2005 01/11/2005 No.CPS-1005/ 126/SER-4 of Finance Deptt.
11 Madhya Pradesh Other Notification 22/05/2010 01/01/2005 No./ F-9/3/2003/Niyam/4, Bhopal of Finance Dep
12 Madhya Pradesh State Notification 13/04/2005 01/01/2005 No./ F-9/3/2003/Niyam/4, Bhopal of Finance Dep
13 Kerala State Notification 07/01/2013 01/04/2013 G O (P) No. 20/2013 /Fin. Of of Finance (Pension A)
14 Karnataka State Notification 31/03/2006 01/04/2006 FD (SPL) 04 PET 2005 of Finance Deptt.
15 Jharkhand State Notification 09/12/2004 01/12/2004 D P -5-47-03-518/FDS of Finance Deptt.
16 Jammu and Kashmir State Notification 24/12/2009 01/01/2010 SRO-400 of Finance Deptt.
17 Himachal Pradesh State Notification 17/08/2006 15/06/2003 No. Fin (Pen) A (3) -1/96 of Finance (Pension) D
18 Andhra Pradesh State Notification 22/09/2004 01/09/2004 G.O. Ms. No. 653, FINANCE (Pension -I) Department
19 Assam State Notification 25/01/2005 01/02/2005 No. BW 3/2003/Pt.II/1 of Finance (Budget) Deptt.
20 Assam Other Notification 18/10/2012 01/02/2005 No. BW 7/2008/Pt. -I/69 of Finance (Budget) Deptt.
21 Bihar State Notification 31/08/2005 01/09/2005 F No. F (27) P.C-53/04-1964 of Finance Deptt
22 Bihar Other Notification 31/08/2005 01/09/2005 F No. F (27) P.C-53/04-1964 of Finance Deptt
23 Chhattisgarh State Notification 27/10/2004 01/11/2004 F No. 977/761/F/R/04 of Deptt. Of Finance & Planning
24 Chhattisgarh Other Notification 01/08/2012 01/04/2012 No. 1230/F 1-41/2009/Fin./S/4/2012 of Deptt. Of Finance & Planning
25 Goa State Notification 05/08/2005 05/08/2005 No. 12/4/2004/Fin.(R&C) of Finance (R&C) Deptt.
26 Goa Other Notification 05/08/2005 05/08/2005 No. 12/4/2004/Fin.(R&C) of Finance (R&C) Deptt.
27 Gujarat State Notification 18/03/2005 01/04/2005 G.R.No.NPN-2003-GOI-10-P of Finance Deptt.
28 Gujarat Other Notification 23/08/2013 01/04/2005 G.R.No. NPN-102011/O-115/(810/2013)-P of Finance Deptt.
29 Haryana State Notification 18/08/2008 01/01/2006 No. 1/1/2004 -1 Pension of Finance Deptt.
30 Haryana Other Notification 02/03/2010 01/01/2006 No. 2/47/2007-1 Pension of Finance Deptt.
31 Orissa State Notification 17/09/2005 01/01/2005 No.Pen-5/05-44451/F of Finance Deptt.
32 Rajasthan State Notification 28/01/2004 01/01/2004 No. F 13(1) FD/Rules/2003 of Finance Deptt. (Rules Division)
33 Rajasthan Other Notification 20/06/2011 01/04/2004 No. F -133/NPS/SAB/2011/527 of State Insurance and Provident Fund Deptt.
34 Sikkim State Notification 10/11/2010 01/04/2006 No. GOS/Fin.(Adm) 98-99/0-043/Fin/304 of Fina
35 Tamil Nadu State Notification 06/08/2003 01/04/2003 G O No. 259 of Finance Deptt.
36 Uttar Pradesh State Notification 28/03/2005 01/04/2005 UP Gazette Notification
37 Uttar Pradesh Other Notification 21/03/2012 01/04/2005 S-3-517/10-2012/301(9)/SAB/2011
38 Uttaranchal

/Uttarakhand

State Notification 25/10/2005 01/10/2005 No. 21/XXVII(7) CPS/2005 of Finance (General