शिमला।। कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस में हिमाचल हाई कोर्ट ने सीबीआई को कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा है कि आखिर मामला हल करने के लिए कितने दिन चाहिए। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सीबीआई को स्टेटस रिपोर्ट सौंपनी थी। सीबीआई ने कहा कि मामले की जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि 6 हफ्तों का वक्त हो गया है और 70 लाख लोगों की नज़र इस केस पर है। इस पर सीबीआई ने कहा कि एक मामले की जांच लगभग पूरी है, बस लैब से रिपोर्ट्स आने का इंतज़ार हो रहा है।
सीबीआई के वकील ने कहा कि कुछ सैंपल की रिपोर्ट का अभी इंतजार है। इनके आने के बाद ही जांच आगे बढ़ सकती है। सीबीआई ने दावा किया कि गुड़िया केस के तहत लॉकअप में एक आरोपी की हत्या के मामले की जांच तकरीबन पूरी कर ली गई है। इस मामले में जल्द ही चार्जशीट भी पेश कर दी जाएगी। इसके अलावा दूसरा मामला जांच रिपोर्ट न मिलने से अटका हुआ है।
हाई कोर्ट ने दो हफ्तों का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी और सीबीआई को अपनी स्टेटस रिपोर्ट देनी होगी।
शिमला।। जैसे कयास लगाए जा रहे थे, उन्हीं के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में भी भारतीय जनता पार्टी बिना सीएम कैंडिडेट घोषित किए चुनाव लड़ेगी। ‘इन हिमाचल’ को सूत्रों से पता चला है कि बीजेपी ने दिसंबर तक संभावित चुनावों के लिए मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित करने का विचार छोड़ दिया है। जानकारी मिली है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में शामिल केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने ही इस बात की अनुशंसा की है कि चुनाव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर लड़ा जाना चाहिए।
इससे पहले कयास लगाए जा रहे थे कि जेपी नड्डा को सीएम का फेस बनाकर हिमाचल भेजा जा सकता है। मगर अब पार्टी में अहम फैसले की जानकारी रखने का दावा करने वाले एक पदाधिकारी का कहना है कि किसी का भी नाम घोषित नहीं किया जाएगा। उन्होंने दावा किया है कि पार्टी नेतृत्व ने पहले नड्डा का नाम आगे करने का फैसला किया था मगर फिर नड्डा ने यह कहते हुए ऐसा न करने की सलाह दी कि इससे पार्टी को नुकसान हो सकता है।
जानकारी के मुताबिक नड्डा ने कहा कि प्रदेश में अभी भी बहुत से कार्यकर्ता ऐसे हैं जो पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को पहली पसंद मानते हैं। ऐसे में अगर पार्टी धूमल की जगह उन्हें चेहरा बनाती है तो उन कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर सकता है और कुछ कार्यकर्ता अंदरखाने पार्टी को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। बताया जाता है कि नड्डा ने यह फीडबैक हिमाचल बीजेपी के अपने करीबी नेताओं और विधायकों की सलाह पर दिया है। नड्डा का कहना था कि पार्टी को अन्य राज्यों की तरह प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता के आधार पर ही हिमाचल में चुनाव लड़कर सत्ता में आना चाहिए।
बीजेपी का एक बड़ा हिस्सा अभी भी धूमल का समर्थन करता है।
बताया जा रहा है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने नड्डा और अन्य नेताओं की सलाह पर गौर फरमाते हुए इस बात के लिए सहमति दे दी है कि चुनाव प्रधानमंत्री के नाम पर ही लड़े जाएं। दरअसल शाह जानते हैं कि यह हिमाचल से कांग्रेस को बड़े स्तर पर खत्म करने का मौका है क्योंकि वीरभद्र के बाद कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर फूट पड़ जाएगी। इसलिए वह नहीं चाहते कि उनकी पार्टी में भी घमासान मचे और उसकी स्थिति कांग्रेस के बराबर आ जाए।
कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश के नूरपुर में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला धनेटी में एक ऐसे टीचर हैं, जो रिटायर होने के बावजूद पढ़ा रहे हैं और बिना वेतन लिए। उनका नाम है अमरनाथ और वह ऐसा इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि उनके रिटायर होने के बाद स्कूल में कोई ड्रॉइंग टीचर नियुक्त नहीं किया गया था।
न्यूज़ 18 हिमाचल ने अमरनाथ की यह कहानी सबसे सामने रखी है। पोर्टल ने लिखा है कि 39 साल तक अमरनाथ शिक्षा विभाग में रहे हैं। वह सुबह स्कूल पहुंचकर परिसर की साफ-सफाई देखने से लेकर प्रार्थना सभा का आयोजन भी करवाते हैं। फिजिकल एजुकेशन का टीचर न होने की कमी भी वही पूरी कर रहे हैं और अगर कोई अध्यापक न आए तो क्लास को वही संभालते हैं।
अमरनाथ कहते है कि जब उन्होंने शिक्षा विभाग में सेवाएं देना शुरू किया था, तब शपथ ली थी कि जब तक स्वास्थ्य इजाजत देगा, पढ़ाता रहूंगा।
पोर्टल के मुताबिक स्कूल के प्रिंसिपल करनैल पठानिया का कहना है कि जब से वह इस विद्यालय में आए हैं, तब से उन्होंने देखा है कि अमरनाथ सबसे ज्यादा कर्तव्य निष्ठ हैं। जब उन्हें पता चला कि वे सेवानिवत्ति के बाद भी सेवाएं दे रहे हैं तो उनके प्रति सम्मान और भी बढ़ गया। बच्चे भी अमरनाथ की तारीफ करते हैं।
नूरपुर के एसडीएम आबिद हुसैन सादिक कहते हैं कि यह गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने पन्द्रह अगस्त को विशेष स्मृति चिन्ह देकर अमरनाथ को उनके पुण्य काम के लिए सम्मानित किया था।
शिमला।। आज हिमाचल प्रदेश के अखबारों में कैबिनेट का वह फैसला सुर्खियों में है, जिसमें बताया गया है कि अब हिमाचल में सभी लोगों को 330 तरह की दवाएं और चिकित्सा संबंधित वस्तुएं मुफ्त मिलेंगी। फैसला लिया गया कि यह व्यवस्था प्रदेश के तमाम स्वास्थ्य केंद्रों में होगी, चाहे वे पीएचसी हों या जोनल अस्पताल। मगर सरकार के फैसले के बीच कुछ ताज़ा खबरों को उतनी तवज्जो नहीं मिली, जो स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोलती हैं।
प्रदेश में कहीं पर खाली इमारतें हैं, जहां डॉक्टर नहीं। कहीं पर स्टाफ की कमी है तो कहीं डॉक्टर बहुत कम हैं। कहीं पर मशीनें और लैब कई-कई दिन काम नहीं कर रही। लोग आए दिन धरने प्रदर्शन कर रहे हैं। अब चुनाव नजदीक देखकर बड़े-बड़े ऐलान कर रही सरकार और स्वास्थय मंंत्री ने पिछले 5 सालों में किया क्या? खुद तो हमारे स्वास्थ्य मंत्री पीजीआई चंडीगढ़ जाकर दाखिल हो जाते हैं, मगर प्रदेश की जनता को किन अस्पतालों के भरोसे छोड़ा हुआ है, पिछले 24 घंटों की खबरें हकीकत बयां कर देंगी। आवाज़ उठाना ज़रूरी है क्योंकि बीमारियां या हादसे बताकर नहीं आते। कल को हम या हमारा अपना भी इस तरह से भुगत सकता है। कोई भी हो, मौत बेवक्त नहीं होनी चाहिए और खासकर सुविधाओं या व्यवस्थाओं के अभाव में। 1. खाली ऑक्सिजन सिलेंडर लगाकर कर दिया रेफर, मौत
यह घटना सिरमौर की है। यहां के डॉ. यशवंत सिंह मेडिकल कॉलेज नाहन से पीजीआई के लिए रेफर एक मरीज को ऑक्सिजन का खाली सिलेंडर लगा दिया गया। अस्पताल से निकलते ही दो सड़का के पास ऐंबुलेंस को वापस लाना पड़ा। इसके बाद नया सिलेंडर लगाकर मरीज को पीजीआई ले जाया गया, लेकिन दाखिल होने से पहले ही मरीज की मौत हो गई।
2. खून और ऑक्सिजन न मिलने से महिला की मौत ऊना में हुए ट्रक हादसे में घायल सुखवंत कौर की टांग हादसा स्थल पर ही धड़ से अलग हो गई। उन्हें अम्ब अस्पताल पहुंचाया गया मगर यहां ख़ून नहीं मिल पाया। उनका खून काफी बह चुका था और खून चढ़ाना ज़रूरी था। ऐसे में उन्हें क्षेत्रीय अस्पताल ऊना रेफर कर दिया गया। ऐंबुलेंस में ऑक्सिजन तक नहीं मिल पाई। जिंदगी और मौत के बीच झूलतीं सुखवंत ने ऊना हॉस्पिटल में स्ट्रेचर पर ही दम तोड़ दिया।
3. आईजीएमसी के ओटी में फंगस वाली ग्लूकोज बॉटल आईजीएमसी शिमला, प्रदेश का तथाकथित टॉप हॉस्पिटल। मंगलवार को सुबह के समय जब नर्स सी.टी.बी.एस. ओ.टी. में एक मरीज को ग्लूकोज लगा रही थी, उसे शक हुआ कि शायद ग्लूकोज की बोतल में कुछ फंगस है। ऐसे में नर्स ने तुरंत ग्लूकोज को लगाने से रोक दिया और बोतल को बंद करके एम.एस. के रूम में पहुंचाया। मगर अस्पताल प्रशासन का दावा है कि फंगस नहीं था, नर्स को सिर्फ शक हुआ था। अगर ऐसा ग्लूकोज़ चढ़ा दिया जाए तो आप कल्पना कर सकते हैं कि नतीजा क्या होगा। वैसे यह पहला मौका नहीं है। आईजीएमसी में खून लगी सिरिंज का मामला सामने आ चुका है। यहां पर पैकेट बंद सिरिंज में खून के धब्बे मिले थे।
4. स्क्रब टाइफस से आईजीएमसी में 5 मौतें आईजीएमसी शिमला मे स्क्रब टाइफस से मौतें थम नहीं रही है। यहां रामपुर की रहने वाली महिला की स्क्रब टाइफस से मौत हो गई। आंकड़ों के अनुसार अस्पताल में स्क्रब से हुई मौतों में यह सांतवी मौत है। जबकि अस्पताल प्रशासन पांच ही मौतों की पुष्टि कर रहा है। गौरतलब है कि वक्त पर पहचान होने पर एंटीबायोटिक्स की मदद से इसका इलाज हो सकता है। अब दुनिया में इसकी गिरफ्त में आने वाले मरीज़ों की मौत होने का मामला 2 फीसदी से भी बचा है।
5. ये रहस्यमयी बुखार क्या है?
श्री रेणुका जी में स्वास्थ्य खंड संगड़ाह के अंतर्गत आने वाले गांव गवाहू और रनवा में पिछले सप्ताह 2 लोगों की जान ले चुके रहस्यमयी बुखार ने रविवार को तीसरे व्यक्ति की जान ले ली। मगर यह रहस्यमयी बुखार क्या है? आपने मियादी बुखार सुना होगा, दिमागी बुखार सुना होगा… रहस्यमयी बुखार किस बला का नाम है? जब आप डायग्नोज़ नहीं कर पा रहे कि मरीज़ों को बुखार क्यों हो रहा है, यह आपकी नाकामी है। उसे रहस्यमयी बुखार का नाम देकर अपना पल्ला नहीं झाड़ सकते। खासकर लोगों की मौत हो रही हो, तब स्पेशल जांच करवाई जानी चाहिए कि कारण क्या है।
क्या आपके करीबी अस्पताल या हेल्थ सेंटर में दवाइयां या डॉक्टर हैं? कॉमेंट करके जवाब दें।
शिमला।। कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस में पहले मुख्यमंत्री सीबीआई जांच से इनकार कर रहे थे। मगर 14 जुलाई को उन्होंने ऐलान किया कि जांच सीबीआई से होगी। फिर उन्होंने इसके लिए केंद्र को खत लिखा। 18 जुलाई को उन्होंने कोर्ट जाकर सीबीआई को जांच के आदेश देने की मांग की। इसके ठीक एक दिन बाद केस के सिलसिले में जेल में बंद नेपाली मूल के आरोपी सूरज की संदिग्ध हालात में मौत हो गई।
पुलिस का कहना था कि एक अन्य आरोपी राजू ने गुस्से में सूरज को पीट-पीटकर मार डाला। मगर अब सीबीआई को शक है कि इसमें पुलिसवाले शामिल हैं और उसने एसआईटी के अधिकारियों को गिरफ्तार भी किया है। कोर्ट ने दूसरी बार इन अधिकारियों और कर्मचारियों को रिमांड पर भेजा है। ऐसे में पुलिस यह पता लगाना चाह रही है कि जब सीबीआई जांच का ऐलान हो चुका था, पुलिस पहले ही केस को सुलझाने का दावा कर चुकी थी। फिर वह क्यों पीट रही थी सूरज को? उससे कुछ उगलवाना चाह रही थी या उसका धमकाना चाह रही थी कि जब सीबीआई जांच हो, तब वह कोई ऐसा राज न उगल दे जिससे पुलिस के दावों की पोल खुल जाए?
मृतक आरोपी सूरज की पत्नी ममता। Image: Indian Express
जब पुलिस के दावे के मुताबिक सभी आरोपी गुनाह कबूल रहे थे, तो सूरज से पूछताछ क्यों की जा रही थी? हिंदी अखबार अमर उजाला ने ऐसे ही प्रश्न उठाए हैं और कहा है कि सीबीआई जांच को लेकर सरकार के गंभीर रुख को देखकर पुलिस को जांच बंद कर देनी चाहिए थी और अमूमन ऐसा ही किया जाता है ताकि पुलिस पर सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप न लगे। मगर शिमला केस में ऐसा नहीं हुआ। संतरी के बयान से पुलिस के दावों की पोल खुल चुकी है मगर अधिकारी अपने पुराने बयान पर ही अड़े हैं। इसीलिए सीबीआई को दोबारा उनका रिमांड मांगना पड़ा।
शिमला।। हिमाचल प्रदेश में ताबड़तोड़ कैबिनेट मीटिंगें हो रहीं है, जिनमें आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए फ़ैसले लिए जा रहे हैं।
आज भी कैबिनेट की मीटिंग है और सोमवार शाम को ही मंत्री शिमला पहुंच चुके हैं। राजनीतिक हलकों मे चर्चा है कि यह मीटिंग वीरभद्र सरकार के इस कार्यकाल की अंतिम कैबिनेट मीटिंग हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि आज कैबिनेट विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव पारित कर सकती है।
कांग्रेस में संगठन बनाम वीरभद्र जंग चली है और दिल्ली में में फ्री हैंड लेने गए वीरभद्र सिंह को सोनिया गांधी और अहमद पटेल से सकारात्मक इशारा नहीं मिला। इसे देखते हुए वीरभद्र सिंह चुनाव नहीं लड़ने के अपने दबाव वाले दांव से एक कदम आगे जाते हुए हुए विधानसभा को जल्द भंग करने का अस्त्र चला सकते हैं।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह
वीरभद्र सिंह मान रहे हैं कि उन्हें कमान मिलने में जितनी देरी होगी, उतनी ही उनकी ताकत कम हो जाएगी। हालांकि 2012 में भी चुनाव से सिर्फ एक महीना पहले ही जब कौल सिंह को हटाया गया था, तब वीरभद्र सरकार बनाने में कामयाब रहे थे। मगर इस बार उन्हें पता है कि 2012 से हालात अलग हैं।
2012 में बीजेपी सत्ता में थी और ऐंटीइनकम्बेंसी कांग्रेस से फेवर में थी। दिल्ली में कांग्रेस की सरकार थी जिसमें वीरभद्र मंत्री रहे थे। ऊपर से बीजेपी की गुटबाजी कांग्रेस के लिए आसान हालात बना रही थी।
मगर इस बार हालात अलग हैं। मोदी लहर है और कांग्रेस कई राज्यों से साफ हो चुकी है। वीरभद्र इस दांव को इसलिए भी खेल सकते हैं कि पार्टी पर सीधे प्रेशर बन जाए कि अब क्या करना है, क्योंकि चुनाव सिर पर आ गए हैं। वह नेतृत्व से पूछ सकेंगे कि मेरे नेतृत्व में लड़ना है या नहीं; या फिर मैं लड़ूं ही नहीं?
दूसरा कारण यह भी सकता है कि उनकी नजर वर्तमान में भाजपा की स्थिति भांपने पर है। एम्स मामले में नड्डा अनुराग के टकराव और मंत्रिमंडल विस्तार में सामने आयी अफवाहों से भाजपा काडर असमंजस में है कि उनका नेता होगा कौन। वीरभद्र सिंह इस स्थिति का फायदा उठाना चाह रहे हैं। वह नहीं चाहते कि बीजेपी को इस भ्रम को सुलझाने के लिए समय मिले।
एम्स को लेकर नड्डा और अनुराग में टकराव
तीसरा कारण यह भी है कि कांग्रेस के बजाय बीजेपी में इस बार हर सीट से टिकट चाहने वालों की फौज तैयार हो गई है। पहले सिटिंग विधायकों वाली जगह पर टिकट के दावेदार नहीं होते थे। मगर इस बार कहा जा रहा है कि सर्वे के आधार पर टिकट मिलेंगे। ऐसे में सिटिंग विधायकों के भी टिकट कट सकते हैं। इसीलिए दावेदार मजबूती से सामने आ रहे हैं। वीरभद्र इस स्थिति का फायदा उठाने के लिए भी जल्दी चुनाव करवा सकते हैं।
व्यक्तिगत रूप से भी वीरभद्र सिंह मनी लॉन्ड्रिंग के केस में घिर गए हैं। ED द्वारा जब्त उनकी प्रॉपर्टी पर भी कोर्ट ने मुहर लगा दी है। कहीं इस मुद्दे पर पार्टी में ही उनके विरोधी आलाकमान के सामने उनपर हावी न हो जाएं, इससे पहले ही वह आरपार की लड़ाई के मूड में हैं।
गुड़िया मामले में भी हिमाचल पुलिस ने जो फजीहत अपने साथ-साथ मुख्यमंत्री की करवाई है, इस से भी वह बहुत आक्रोशित और दुखी बताए जा रहे हैं। सीबीआई इस मामले में किसी ठोस नतीजे तक पहुंचे, इससे पहले ही वह अपने नेतृत्व में चुनाव में उतर जाना चाहती है।
पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी से हुई है फजीहत
अंतिम कारण यह भी माना जा रहा है कि सरकार के पास अब कोई ऐसी योजनाए, कार्य और फैसले नहीं बचे है जो चुनावी समय में जनता को लुभाने के लिए बचे हुए रह गए हैं। सरकार कार्यकाल में जो कर सकती थी, कर चुकी है। इसलिए चुनाव को लंबा खींचकर अभ फायदा नहीं है।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि वीरभद्र सिंह के विरोधी माने जाने वाले बड़े नेता अभी मानते है कि मुख्यमंत्रीं ने चुनाव नहीं लड़ा तो प्रदेश में जो एक कांग्रेस काडर फैला है, जिसके लिए कांग्रेस मतलब ही वीरभद्र सिंह है, उसका हौसला टूट जाएगा और इसका खामियाजा उन्हें भी चुनावों में हो सकता है। इसलिए अगर नेतृत्व पर जल्द फैसला लेने की स्थिति बनती है तो उन्हें भी वीरभद्र को नेता मानना पड़ेगा, ताकि अपनी सीट बच जाए।
ऐसे में आज कैबिनेट में मुख्यमंत्री इस संबंध में चर्चा कर सकते हैं। अगर कैबिनेट ने विधानसभा भंग करने की अनुशंसा की तो हिमाचल प्रदेश में ज्यादा नहीं तो तय वक्त से कम से कम 3-4 हफ्ते पहले चुनाव हो सकते हैं।
एमबीएम न्यूज नेटवर्क, मंडी।। संधोल के गांव कनूही की लगभग 95 वर्षीय कला देवी इन दिनों रोटी -रोटी के लिए दर दर भटक रही है, उसे लोगों से मांग कर खाना खाना पड़ रहा है, मगर न तो उसके परिवारजन और न ही सरकार या प्रशासन उसकी सुध ले रहा है।
कला देवी जीवन के अंतिम पड़ाव पर जो दुख सहन कर रही है व अपनों व अपनी सरकार प्रशासन की उपेक्षा की शिकार है वह वर्तमान व्यवस्था पर करारा तमाचा भी है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि गांव कनूही की कला देवी जिसके पति 1976 में मर गए थे की दो बेटियां हैं जो दोनों ही विधवा हो चुकी हैं, उसके दो बेटे हैं। इनमें से एक विद्युत कर्मचारी था जो 1999 में स्वर्ग सिधार गया था। दूसरा बेटा भी विद्युत विभाग में चपरासी के पद पर कार्यरत है। उसे न तो विधवा बहू फूला देवी और न बेटे व उसके परिवार की ओर से ही कोई खर्चा दिया जा रहा है।
दुखी मन से कला देवी रोते हुए बताती है कि उसे रोटी के लिए दर – दर भटकना पड़ रहा है। उसे कहीं से भी कोई इमदाद नहीं मिल रही है।
कला देवी ने सरकार और प्रशासन आग्रह किया है कि उसकी रोजी रोटी का प्रबंध किया जाए, ताकि जो भी जीवन उसका बचा है वह उसे ठीक से जी सके। उसने यह भी गुहार प्रशासन से लगाई है कि उसके बेटों के परिवार से उसका खर्चा दिलाया जाए।
(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)
चंबा।। 26 अगस्त 2017 को अखबारों और मीडिया पोर्टल्स में चंबा के परोथा-कुरैणा संपर्क मार्ग पर एक टाटा सफारी गहरी खाई में गिरने से विजय अबरोल नाम के शख्स की मौत की खबर आई। उस वक्त घटनास्थल को देखकर यह शक जताया जाने लगा कि मामला कहीं हत्या का तो नहीं है। मगर अब मृतक के परिजनों ने पुलिस की जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
26 अगस्त को पंजाब केसरी के पोर्टल में छपी खबर में कहा गया था कि शव गाड़ी से बाहर पड़ा था और सिर धड़ से दूर गिरा था। अखबार ने लिखा था कि ‘आज तक ऐसा देखने को नहीं मिला है कि गाड़ी दुर्घटना के मामले में गाड़ी में सवार व्यक्ति की गर्दन पूरी तरह से बड़ी सफ़ाई के साथ धड़ से अगल हो गई हो। सिर के किसी भी भाग में कोई भी चोट का निशान नजर नहीं आ रहा है। मुंह पर भी किसी प्रकार की चोट नहीं दिखाई दी।’
अब मृतक विजय अबरोल की पत्नी मीनाक्षी अबरोल ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि मेरे पति की हत्या की गई है और इसे हादसे का रंग देने की कोशिश की है। उन्होने कहा, ‘इस मामले में पुलिस की कार्यशैली भी संदेह के घेरे में है क्योंकि इस मामले को लेकर पुलिस में मैंने जो बयान दिया है, उसमें मैंने 2-3 लोगों पर अपने पति की हत्या करने का शक जताया था लेकिन अफसोस की बात है कि अभी तक पुलिस ने उक्त लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में नहीं लिया है।’
‘तेजधार से गर्दन काटी गई’
मीनाक्षी का कहना है कि जिस हालत में उनके पति का शव मिला था, वह अपने आप में यह कहानी बयां कर रहा था कि यह दुर्घटना नहीं बल्कि एक हत्या का मामला है। उन्होंने कहा कि उनके पति की पहले किसी तेजधार हथियार के साथ गर्दन को काट कर धड़ से अलग किया गया, उसके बाद शव को सड़क से नीचे फेंका गया। फिर इस हत्या की साजिश को हादसे का रूप देने के लिए बाद में गाड़ी को सड़क से नीचे फेंक दिया गया।
‘गाड़ी में खून की एक भी बूंद नहीं’ मीनाक्षी ने कहा कि इस बात का प्रमाण यह है कि उनके पति की गाड़ी में खून की एक भी बूंद पड़ी हुई नहीं मिली। उन्होंने कहा, ‘अगर पति की मौत गाड़ी दुर्घटना में होती तो गाड़ी में खून के धब्बे तो मौजूद रहते। यही नहीं, गर्दन धड़ से अगल मिली है और धड़ पर कमीज मौजूद नहीं थी। मौके पर कम से कम वह वस्तु तो मौजूद होनी चाहिए थी, जिसकी चपेट में आकर पति की गर्दन धड़ से एकदम से अलग होकर दूर जा गिरी।’
मीनाक्षी ने कहा कि ये तमाम बातें इस बात को पुख्ता करती हैं कि उनके पति की हत्या हुई है न कि सड़क दुर्घटना में मौत। उन्होंने पुलिस विभाग से मांग की है कि मैंने जिन लोगों पर पति की हत्या करने का शक जताया है, उन्हें गिरफ्तार कर सख्ती से पूछताछ की जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी।
गौरतलब है कि घटना के वक्त पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर उसे पोस्टमॉर्टम के लिए मेडिकल कॉलेज चंबा लाया, जहां से उसे टांडा मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। एसपी चंबा डा. विरेंद्र तोमर ने उस वक्त बताया था कि पुलिस ने फिलहाल इस मामले को भारतीय दंड संहिता की धारा 279 व 304ए के तहत दर्ज कर जांच शुरू की है।
शिमला।। पिछले दिनों अंग्रेजी अखबार द ट्रिब्यून ने दावा किया था कि कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस में पकड़े गए आरोपियों के नमूने विक्टिम के शरीर से मिले नमूनों से मैच नहीं हुए हैं. अब जानकारी सामने आई है कि सीबीआई ने जांच को आगे बढ़ाने के लिए 70 और लोगों के सैंपल लिए हैं। जिन लोगों के सैंपल लिए गए हैं, उनमें कुछ स्थानीय लोग चरानी और घोड़े वाले भी हैं।
हिंदी अखबार अमर उजाला लिखता है कि दांदी के जंगल और आसपास काम करने वाले मजदूरों, चरानियों और घाड़े वालों के साथ-साथ बणकुफर मैदान में ताश खेलने वाले लड़के भी सीबीआई के शक के दायरे में हैं और इनमें से कई नमूने दिल्ली ले जाकर परखे जा रहे हैं।
अखबार के मुताबिक सीबीआई ने तीन टीमें बनाई हैं। करीब आधा दर्जन सदस्यों वाली टीम जेल में मारे गए आरोपी सूरज के मामले की जांच कर रही है और एक टीम पुलिस से दस्तावेज आदि जुटा रही है। वहीं करीब एक दर्जन सदस्यों वाली टीम गुड़िया मामले में सबूत इकट्ठे कर रही है।
शिमला।। हिमाचल प्रदेश के सोलन के जिस विवादित बाबा के बारे में कुछ दिन पहले ‘इन हिमाचल’ ने विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी, जानकारी मिली है कि उसके इलाज का खर्च मुख्यमंत्री राहत कोष से हुआ है।
कंडाघाट के रूड़ा गांव में रामलोक मंदिर परिसर के बाबा अमरदेव ने यहां पर 25 करोड़ रुपये की मूर्तियां स्थापित करने का दावा किया है। मगर अप्रैल 2017 में एक महिला पर तलवार से जानलेवा हमला करने के बाद जब बाबा ने यह कहते हुए अस्पताल का रुख किया था कि उनके ऊपर हमला करके मारपीट की गई। वह आईजीएमसी के स्पेशल वॉर्ड में भर्ती हुए थे और मुख्यमंत्री ने यहीं आकर उनसे मुलाकात की थी। इस मुलाकात के कुछ ही घंटों के अंदर कंटाघाट के पूरे थाने को ट्रांसफर कर दिया गया था।
हिंदी अखबार ‘हिमाचल दस्तक’ ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि आईजीएमसी के स्पेशल वॉर्ड में ऐडमिट रहे बाबा अमरदेव का बिल 25 हज़ार रुपये का बना, मगर करोड़ों की मूर्तियां मंदिर में होने का दावा करने वाला यह बाबा इस रकम को भी नहीं चुका पाए। अखबार ने कहा है कि संभव है कि जब मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह इस बाबा से आईजीएमसी जाकर मिले थे, तभी उन्होंने आदेश दिए हों कि इलाज के पैसे न लिए जाएं।
अखबार के मुताबिक 25 हज़ार रुपये की यह रकम पहले कंडाघाट भेजी गई और फिर वहां से आईजीएमसी डायवर्ट की गई। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री राहत कोष से अगर एक आम आदमी को इलाज के लिए पैसे लेने हों तो पापड़ बेलने पड़ते हैं। सभी को मदद नहीं मिल पाती और जिन्हें मिलती है, कई बार वह भी ऊंट के मुंह में जीरा होती है। ऐसे में उस बाबा, जो कि विवादित है, जिस पर सरकारी ज़मीन पर कब्जा करने से लेकर जानवरों की खाल रखने और महिला पर जानलेवा हमला करने जैसे आरोप लगे हैं, उसपर इतनी मेहरबानी क्यों?
गौरतलब है कि स्थानीय लोग इस बाबा को पसंद नहीं करते और वे नहीं चाहते कि बाबा यहां लौटे। मगर बताया जा रहा है कि जन्माष्टमी के बाद से बाबा लौट आए हैं। हिमाचल सरकार के कई मंत्री और मुख्यमंत्री इस बाबा पर मेहरबान हैं।विपक्षी बीजेपी के नेता भी यहां हाजिरी भरते रहे हैं। इस ‘शाही’ बाबा के मंदिर के बाहर महंगी लग्जरी कारें खड़ी रहती थीं जो पुलिस की जांच शुरू होने के बाद अचानक गायब हो गईं। इस बाबा के बारे में पूरे विवादों के बारे में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।