पावंटा साहिब में मस्जिद में धमाका, शरारती तत्वों का हो सकता है हाथ

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, पावंटा साहिब।। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के पावंटा साहिब में ग्राम पंचायत पिपली में एक मस्जिद में धमाके की खबर है। इस घटना में किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है मगर पुलिस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच में जुट गई है। बताया जा रहा है कि सुतली बम से यह धमाका किया गया है। आशंका यह भी जताई जा रही है कि यह काम शरारती तत्वों का हो सकता है।

 

पुलिस ने शुरुआती जांच में पाया है कि देर रात मस्जिद में एक तरफ धमाके की आवाज सुनाई दी थी। सुबह देखा गया कि मस्जिद की खिड़की टूटी हुई थी और सुतली बम का बारूद मौके पर पहुंचा हुआ था। इसके बाद पुलिस को खबर दी गई।एसपी रोहित मालपानी ने भी डीएसपी प्रमोद चौहान के साथ मौके का दौरा किया है। कारण साफ नहीं हुआ है मगर आशंका जताई जा रही है लोगों के बीच भाईचारे को खत्म करने की साजिश भी इसमें हो सकती है।

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डीएसपी प्रमोद चौहान ने बताया कि घटना में आईपीसी की धारा 427 के इलावा विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस पूरी सावधानी से मामले की जांच कर रही है। डीएसपी ने लोगों से यह भी अपील की है कि इस मामले को तूल न दे साथ ही किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें।

 

डीएसपी ने कहा कि पुलिस पूरी शिद्दत से जांच में जुटी हुई है और जल्द ही सच को सबके सामने लाया जाएगा।

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मंडी के पड्डल मैदान में खाली रह गईं राहुल की रैली की कुर्सियां

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, मंडी।। राज्य की कांग्रेस सरकार ने जिस रैली को ऐतिहासिक बनाने की ठानी थी, उस रैली की कुर्सियां खाली रह गईं। ‘विकास से विजय की ओर’ रैली की शुरूआत से लेकर अंत तक पंडाल के पीछले हिस्से की कुर्सियां बैठने वालों का इंतजार की करती रह गई। सरकार और कांग्रेसी नेताओं ने दावे किए थे कि रैली ऐतिहासिक होगी और वह गलत आकंड़े जारी नहीं करेंगे जो भी होगा सभी के समक्ष होगा।

 

कुछ कांग्रेसी नेताओं ने तो बिलासुपर में हुई प्रधानमंत्री की रैली से चार गुणा अधिक भीड़ उमड़ने का दंभ भी भरा था, लेकिन जब रैली हुई तो इन सब बातों की हवा निकल गई। रैली का समय सुबह दस बजे निर्धारित किया गया था। दस बजे तक बनाए गए पंडाल का एक चौथाई हिस्सा भी नहीं भर पाया था।

इस रैली में आई भीड़ को लेकर न्यूज 18 हिमाचल ने क्या रिपोर्ट किया है, देखें:

यहां तक कि सीएम वीरभद्र सिंह भी 11 बजे तक रैली स्थल पर पहुंच गए थे और उनके सामने भी खाली कुर्सियां उन्हें चिढ़ा रही थी। बाद में धीरे-धीरे करके लोगों के आने का सिलसिला शुरू हुआ।

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राहुल गांधी के आने तक अधिकतर खाली कुर्सियां भर चुकी थी, लेकिन अभी भी पंडाल का पीछे वाला एक हिस्सा खाली कुर्सियों से भरा पड़ा था।

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हालांकि अधिकतर लोग मैदान की सीढ़ियों पर भी बैठे थे लेकिन जहां कुर्सियां थी वहां लोग बड़े आराम से बैठे हुए नजर आए, क्योंकि कुर्सियों को लेकर कोई मारा-मारी नहीं थी। कहीं न कहीं कांग्रेस की तरफ से भीड़ उमड़ने का जो दावा किया गया था वह सही साबित नहीं हो सका।

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मंडी में राहुल गांधी के भाषण की पांच मुख्य बातें

मंडी।। मंडी में हुई ‘विकास से विजय की ओर’ रैली में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांदी ने पूरा भाषण नरेंद्र मोदी पर फोकस रखा। उन्होंने मोदी की जमकर आलोचना की और मुख्यमंंत्री वीरभद्र की तारीफ। साथ ही उन्होंने हिमाचल सरकार की कुछ चुनिंदा उपलब्धियों की तुलना गुजरात से की और यह जताने की कोशिश की कि हिमाचल में पिछले पांच सालों में बेहतर काम हुआ है।

 

जानें,  राहुल गांधी के भाषण की मुख्य बातें कौन सी रहीं:

2. मोदी पर हमला, वीरभद्र की तारीफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झूठ बोलने वाला बताते हुए राहुल गांधी ने कहा कि एक बार पीएम ने कहा था कि मैं चप्पल में ही 25000 हजार फुट की ऊंचाई तक घूम आया। राहुल कहते हैं कि इतनी ऊंचाई की चोटी भारत में एक ही है और वह कंचनजंगा है। राहुल ने कहा कि मोदी वहां चप्पल में गए हों न हों, मगर वीरभद्र जूते पहनकर पूरे हिमाचल को घूम चुके हैं। मोदी बोलने से पहले बिल्कुल नहीं सोचते। आप जिन्हें राजा साहब कह रहे हो, ये फकीर हैं और दिल से काम करते हैं। मैं कहना चाहता हूं कि ये 6 बार सीएम रह चुके हैं, अब सातवीं बार सीएम बनेंगे। कांग्रेस आपके साथ खड़े होकर सरकार लाएगी

 

2. गुजरात सरकार से हिमाचल सरकार की तुलना
राहुल गांधी ने दावा किया- हिमाचल में पिछले पांच साल में 70 हजार लोगों को सरकारी रोजगार मिला, मगर गुजरात ने 10 हजार लोगों को ही दिया। हिमाचल सरकार ने पिछले पांच साल में चार मेडिकल कॉलेज खोले हैं, जबकि गुजरात में इस दौरान एक भी नहीं खुला। हिमाचल सरकार ने करीब 1500 सरकारी स्कूल खोले हैं, मगर गुजरात सरकार ने 1 भी सरकारी स्कूल नहीं खोले हैं। गुजरात सरकार ने पिछले पांच साल में 13 हजार सरकारी स्कूल बंद किए मगर वीरभद्र जी ने इस दौरान एक भी स्कूल बंद नहीं किया। आपने 55 सरकारी कॉलेज खोले हैं मगर गुजरात सरकार ने 25 कॉलेज खोले हैं। आप 700 रुपये की विधवा पेंशन देते हैं, गुजरात सरकार 450 रुपये देती है। आप 1 लाख 30 हजार रुपये इंदिरा आवास के लिए देते हैं, गुजरात सरकार सिर्फ 70 हजार देती है। आपने 230 स्वास्थ्य केंद्र खोले, गुजरात ने एक भी स्वास्थ्य केंद्र नहीं खोला।

3. मोदी सिर्फ मन की बात करते हैं
पिछले साल नवंबर में उन्होंने बिना किसी से पूछे नोटबंदी कर दी। भारत कैश से चलता है। लोग कैश से बीज खरीदते हैं। 2 प्रतिशत का नुकसान हो गया जीडीपी को। जीएसटी को लेकर भी जल्दबाजी की गई और देश को नुकसान हुआ। छोटे व्यापारियों को नुकसान हुआ है। हमने उन्हें सलाह दी थी कि करुण रखिए, गरीबों का सोचिए। मगर नरेंद्र मोदी बात नहीं सुनते। वह सिर्फ मन की बात करते हैं। एक दिन में जीएसटी लागू कर दिया और हिंदुस्तान की इकॉनमी पर चोट हुई और लाखों छोटे बिजनस बंद हुए।

 

4. गुजरात में मोदी जी ने 30 लाख लोग बेरोज़गार किए
आज गुजरात में 30 लाख लोग बेरोजगार हैं, जो मोदी की देन हैं। गुजरात मॉडल की बात होती है, प्रधानमंत्री बताएं कि ये कैसे हुए। जीएसटी और नोटबंदी के कारण ये लोग बेरोजगार हुए और गुजरात के मॉडल के कारण हुए। गुजरात का मॉडल हिंदुस्तान के चुनिंदा  उद्योगपतियों की सब कुछ देने की पार्टी है, जबकि कांग्रेस सभी को साथ लेकर चलती है, सबकी सुनती है। हिंदुस्तान को एक व्यक्ति नहीं चला सकता, जो हिंदुस्तान की बात सुनने को तैयार नहीं है

 

5. जनता के दिल को छूने की कोशिश
भाषण की शुरुआत में आयोजकों से मुखातिब होते हुए राहुल गांधी ने कहा- यहां बहुत गर्मी है। अगली बार या तो इधर भी धूप होनी चाहिए या फिर उधर भी (जहां जनता बैठी है) छाया होनी चाहिए। आखिर में उन्होंने कहा कि आप इतनी गर्मी में भी यहां आए। इसके लिए धन्यवाद। अगली बार या तो इधर भी धूप होनी चाहिए या फिर उधर भी छाया होनी चाहिए।

विधानसभा चुनाव नजदीक, फिर गुजरात पहुंचे पीएम मोदी

नई दिल्ली।। हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ गुजरात में भी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक महीने में तीसरी बार गुजरात पहुंच गए हैं। यहां पर कई नए प्रॉजेक्टों की शुरुआथ करेंगे। चुनाव से ठीक पहले किए जा रहे प्रधानमंत्री के इन दौरों और प्रॉजेक्टों को लेकर कांग्रेस ने सवाल किए हैं। चुनाव के लिए बहुत कम वक्त बचा है, ऐसे में प्रधानमंत्री द्वारा किए जा रहे दौरों और प्रॉजेक्टों को चुनावी रणनीति देखा जा रहा है।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने 1 सितंबर को जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे का साथ अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन का शिलान्यास किया था। इसके बाद वह 17 सितंबर को जन्मदिन के मौके पर भी गुजरात आए थे, जहां उन्होंने सरदार सरोवर बांध का उद्घाटन किया था। अब वह फिर गुजरात पहुंचे हैं, जहां एक रैली को भी संबोधित करेंगे।

 

गौरतलब है कि कांग्रेस ने बीजेपी को काउंटर करने के लिए गुजरात में बीजेपी के विकास के दावों पर चोट करने की रणनीति बनाई है। ऐसे में प्रधानमंत्री के दौरे पार्टी के लिए हवा बनाने की कोशिश के तौर पर देखे जा रहे हैं।

हिमाचल सरकार का जनसंपर्क विभाग कर रहा कांग्रेस का प्रचार?

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के सूचना एवं जन संपर्क विभाग द्वारा जारी की गई एक प्रेस रिलीज़ विवादों के घेरे में फंस गई है। नियमों के अनुसार सरकार का जन संपर्क विभाग राजनीतिक रैलियों के संबंध में जानकारी नहीं दे सकता, न ही उसका काम ऐसा करना है। मगर 6 तारीख को जारी की गई विवादास्पद प्रेस रिलीज में कहा गया है– CM reviews arrangement of rally at Paddal यानी मुख्यमंत्री ने पड्डल में होने वाली रैली के इंतज़ामों की जांच की।

 

आगे लिखा गया है- “मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, हिमाचल के पार्टी प्रभारी सुशील कुमार शिंदे और सह प्रभारी रंजीता रंजन कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के दौरे के सिलसिले में मिलकर कुल्लू से मंडी पहुंचे। यहां उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं और सरकारी अधिकारियों के साथ के साथ कई बैठकें कीं और इंतजामों को लेकर निर्देश दिए।”

प्रेस रिलीज़

यही नहीं, इस विज्ञप्ति में लिखा है- “पड्डल में लैंडिग करने के बाद तीनों ने स्थल का निरीक्षण किया और ‘विकास से विजय’ रैली को कामयाब बनाने के लिए निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने दशहरा मेले के समापन के बाद कुल्लू के ऐपल वैली रिजॉर्ट में सुशील कुमार शिंदे से मुलाकात की और फिर भुंतर एयरपोर्ट से उन्होंने साथ उड़ान भरी।”

 

कानूनन ऐसा करना सही नहीं
हिमाचल प्रदेश सरकार के सूचना एवं जन-संपर्क विभाग के अपने दिशा-निर्देशों में साफ चिह्नित है कि उसका उद्देश्य सरकार की योजनाओं का प्रचार-प्रसार करना है और जनता के साथ रिश्ता बनाना है। सत्ताधारी पार्टी से जुड़ी गतिविधियों के प्रचार-प्रसार का कोई जिक्र इसमें नहीं है। हैरानी की बात यह है कि ये हाल तब हैं जब इसी वेबसाइट पर विभाग ने अपने निदेशक तत्वों वाला डॉक्युमेंट भी अपलोड किया है।

इसमें विभाग के कार्य एवं कर्तव्य (Functions and Duties) में 10 दिशा-निर्देश हैं। इनमें कहीं पर भी नहीं लिखा है कि विभाग राजनीतिक गतिविधियों का प्रचार प्रसार करेगा। इसमें हर जगह सरकार का जिक्र है, न कि किसी नेता या पार्टी का। बता दें कि इस रैली को हिमाचल सरकार ने सरकारी रैली घोषित किया हुआ है यानी इसका पूरा खर्च सरकार उठाएगी। इसे सरकार के पांच साल पूरे होने पर इसका आयोजन कर रही है, जिसमें राहुल मुख्यातिथि होंगे। मगर जैसा कि रैली के नाम ‘विकास से विजय’ से ही स्पष्ट है, यह चुनावी रैली है और सरकारी पैसे का दुरुपयोग है।

 

विभाग पर है और भी गड़बड़ियों का शक
यह पहला मौका नहीं है जब जनता का पैसा सरकार के प्रचार-प्रसार पर खर्च करने के लिए जवाबदेह जनसंपर्क विभाग पर इस तरह से फेवर पहुंचाने का आरोप लगा है। इससे पहले भी सरकार की उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार के नाम पर मुख्यमंत्री के प्रचार-प्रसार वाले वीडियो तैयार किए जा रहे हैं, जिसके लिए खास टीम रखी गई है। आरोप तो यहां तक हैं कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य के प्रचार-प्रसार वाले वीडियो भी उसी टीम से बनवाए जा रहे हैं।

इसके सबूत उस वक्त सामने आए थे, जब हिमाचल सरकार की मुहर लगे वीडियो को ‘शिमला ग्राणीण’ पर शेयर किया गया था और उस वीडियो में हिमाचल सरकार की मुहर थी। ‘In Himachal’ ने खबर छापी थी तो उस वीडियो को हटा लिया गया था। यही नहीं, इस मामले में हिमाचल सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने एक पोर्टल से बात करते हुए सफाई दी थी कि यह चूक किसी से हुई है, जिसे पता नहीं था कि यह पर्सनल वीडियो है न कि सरकारी। यानी साफ है कि वीडियो एक ही जगह बन रहे थे।

अब वरिष्ठ बीजेपी नेता अरुण शौरी ने किया पीएम मोदी पर हमला

सोलन।। केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अब पार्टी के एक और वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने हमला बोला है। यशवंत सिन्हा के बाद अब अरुण शौरी हमलावर हुए हैं और उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी को समर्थन देना मेरी भूल थी। उन्होंने यहां तक कह दिया गुजरात मॉडल इवेंट मैनेजमेंट था और किसी ने भी जानने की कोशिश नहीं की कि आखिर यह गुजरात मॉडल है क्या चीज़।

 

कसौली में खुशवंत सिंह लिट फेस्ट में शौरी ने ‘हाउ टु रिक्गनाइज़ रूलर वॉट दे आर’ विषय पर बोलते हुए कहा कि मैंने खुशवंत सिंह की ही तरह गलतियां कीं। उन्होंने कहा, “खुशवंत सिंह ने राजीव गांधी का समर्थन किया था और मैंने नरेंद्र मोदी का। मेरी गलतियों में वीपी सिंह से लेकर मोदी को समर्थऩ देना शामिल है।”

अरुण शौरी (File Pic)

विषय पर बोलते हुए शौरी ने कहा, “यह मत सोचिए कि आपके नेता सत्ता में आते ही बदल जाएंगे। उन्हें चुनने से पहले उनके चरित्र का आकलन कीजिए। देखिए कि वे अपनी बातों के कितने पक्के हैं। हम लोगों ने बिना तथ्यों को परखे मोदी को मौका दिया, लेकिन अब आंखें खोलने का वक्त आ गया है।”

 

शौरी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने चुनाव से पहले वादा किया था कि 2 करोड़ नौकरियां दी जाएंगी, मगर ये नौकरियां कहां हैं, किसे मिली, दिख नहीं रहा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से कोई सवाल नहीं कर सकता और वह बस अपनी मर्जी चला रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, “मीडिया भी मोदी का ही गुणगान करता है और सच नहीं बता रहा।”

 

सलाम: बहू बनाकर लाए थे, बेटी बनाकर विदा किया…

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, बिलासपुर।। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के  घुमारवीं उपमंडल के अन्तर्गत पड़ने वाली ग्राम पंचायत बम्म के गाँव कलौडी के सुखदेव ने समाज की परवाह न कर हुए वह काम कर दिखाया है, जिसकी हर जगह चर्चा हो रही हैं। सुखदेव हिमाचल प्रदेश पथ परिवाहन निगम के कर्मचारी थे, जो सेवानिवृत्त हो गए हैं। साल 2011 में सुखदेव ने अपने बेटे अरुण की शादी ऊना में की, लेकिन परिवार की खुशियों को ग्रहण लग गया और दस महीने बाद ही परिवार के इकलौते बेटे की मौत हो गई।

 

बहू अनुबाला ने हिम्मत नहीं हारी।  अपने टूट चुके सास-ससुर को भी हौंसला भी दिया। पति के जाने का दुख तो अनु को भी कुछ कम न था, लेकिन उसने हिम्मत नहीं छोड़ी। सास ससुर भी उसे एक बेटी की तरह देखने लगे। उम्र छोटी होने के कारण ससुर ने अनु की दोबारा शादी करवाने का मन बना लिया। अच्छा परिवार व लड़का तलाश करने लगे और पहली अक्तूबर को बहू बना कर लाई गई अनु को बेटी बनाकर विदा कर दिया।

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बेटे की मौत के बाद माता पिता के लिए बहू ही बेटा व बेटी दोनों थी। अब घर में सुखदेव व पत्नी लेची देवी ही हैं। अनुबाला की शादी ऊना में ही की गई है और लडका एयरफोर्स में कार्यरत है। सुखदेव व उनकी पत्नी लैची देवी ने अपनी बेटी की शादी होटल से सारी रस्में निभा कर बड़ी धूमधाम से की है। साथ ही समाज में पल रही रूढ़ीवादी परम्परा को खत्म करने में इस परिवार ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है, जो एक मिसाल बन गई है।

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आज भी हमारे समाज में लोगों विधवा लड़कियों के पुनर्विवाह को अच्छा नहीं समझा जाता है। किसी न किसी को तो पहल करनी ही पड़ेगी। सुखदेव और उनकी पत्नी लेची देवी जैसे लोग हमारे समाज के लिए आदर्श हैं।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

चुनाव से ठीक पहले किसके लिए ऐसे फैसले ले रही सरकार?

शिमला।। चुनाव को कुछ ही वक्त बचा है और हिमाचल प्रदेश सरकार धड़ाधड़ ऐसे फैसले ले रही है, जिनपर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि सरकार को ऐसे नीतिगत फैसले लेने की तभी क्यों सूझ रही है, जब उसका कार्यकाल खत्म होने को कुछ ही दिन बाकी हैं। नौकरी वगैरह के मामलों में तो चलो सरकार जनहित का हवाला दे सकती है, मगर कुछ फैसले ऐसे भी हैं, जिनका लाभ किसी और को नहीं, बल्कि सत्ताधारियों और उनमें भी किसी ख़ास शख्सियत को ज्यादा पहुंच रहा है। यह कोई हवा-हवाई बात नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश में सुर्खियों पर नजर डालें तो यही बात साफ होती है।

 

राजघरानों को फायदा देने वाली पॉलिसी
हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक नई पॉलिसी मंजूर की है। इसके तहत रियासत काल की धरोहरों, जिनमें भवन, किले, महल, लॉज और हवेलियां शामिल हैं, को संजोया जाएगा। रियासत या ब्रिटिश काल से जुड़ी इन इमारतों आदि का रखरखाव करके इन्हें पर्यटन के लिए विकसित किया जाएगा। इन इमारतों के रखरखाव के लिए प्रदेश सरकार भवन या महल के मालिक को 50 फीसदी रकम देगी, ताकि वह विरासत को संजोकर रख सके। इस पॉलिसी को हिमाचल हेरिटेज टूरिज़म पॉलिसी का नाम दिया गया है।

 

वीरभद्र सिंह को भी होगा लाभ
इस पॉलिसी का सीधा फायदा राजघरानों को मिलेगा, यानी उन लोगों को, जिनके पूर्वज रियासतों के शासक थे। ध्यान देने की बात यह है कि हिमाचल प्रदेश में जो भी रियासतें थीं, उनके शासकों के ज्यादातर वशंज आज हिमाचल की राजनीति में हैं। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह खुद पूर्व राजपरिवार से संबंध रखते हैं। उनके अलावा आशा कुमारी, अनिरुद्ध सिंह, महेश्वर सिंह और रवि ठाकुर शामिल हैं।

 

राजनीतिक हल्कों में चर्चा है कि इस नीति का असल मकसद ब्रिटिश दौर की इमारतों के संरक्षण के बजाय अपने लिए आय का स्रोत पैदा करना है। दरअसल राजस्थान में ऐसी पॉलिसी पहले से ही है, मगर चुनाव से ठीक पहले सरकार, जिसके मुखिया खुद राजघराने से ताल्लुक रखते हैं, द्वारा ऐसी पॉलिसी लाया जाना कहीं न कहीं सवाल तो ज़रूर खड़े करता है कि इसका असल मकसद क्या है। पिछली कैबिनेट में सरकार के ही एक मंत्री ने इस पॉलिसी पर सवाल खड़े किए थे।

 

पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुविधाएं बढ़ाने की कोशिश
इस नई पॉलिसी पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि इससे पहले मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की कैबिनेट में एक प्रस्ताव आया था, जिसके तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुविधाएं बढ़ाई जानी थीं। कुछ दिन पहले ही इसे कैबिनेट में पेश किया गया था। इसके तहत पूर्व सीएम के निवास स्थान पर ड्राइवर के साथ एक गाड़ी रहने और साथ ही फॉलोअप के लिए एक SUV भी रखने जाने का प्रावधान था। कार के साथ ड्राइवर, टूर पर जाने के लिए विभागीय वाहन और निवास स्थान पर डॉक्टर इस लिस्ट में टॉप पर था। अजेंडा आइटमों में हर साल 1 लाख रुपये का प्रशासनिक खर्च भत्ता, पसंद के 2 निजी सुरक्षा अधिकारी, लैंडलाइन और मोबाइल के 50000 रुपये और घर के प्रवेश द्वारा पर हथियारबंद पुलिस गार्ड शामिल थे। (यहां क्लिक करके विस्तार से पढ़ें)

 

बचने के लिए छुट्टी पर जा रहे अधिकारी
हिमाचल प्रदेश के अखबारों और विभिन्न चैनलों पर यह खबर आ चुकी है कि हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी छुट्टियों पर चले गए हैं या फिर अहम मौकों से पहले छुट्टी पर चले जाते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं ताकि चुनाव से ठीक पहले सरकार द्वारा लिए जा रहे मनमाने फैसलों में वे शामिल न हों। दरअसल फैसले बेशक सरकार लेती है, मगर उन्हें तैयार करने की जिम्मेदारी अधिकारियों की होती है और उसके लिए वे भी जवाबदेह होते हैं। ऐसे में असहज स्थिति से बचने के लिए उन्हें कथित तौर पर ऐसा रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

 

हेरिटेज टूरिज़म से पहले टी टूरिज़म
मौजूदा सरकार का यह इकलौता फैसला नहीं है जो विवाद में है। पिछले कैबिनेट में कांगड़ा के चुनिंदा चाय बागान मालिकों को सशर्त लैंड यूज़ बदलने की इजाजत मिली। ध्यान दें, सभी को नहीं। लैंड रिफॉर्म्स के दौर में जब हिमाचल प्रदेश में सभी जमीन मालिकों को एक तय सीमा तक ही जमीन रखने की परमिशन मिल रही थी और उससे ज्यादा जमीन सरकार के पास चली जा रही थी, उस दौर में चाय और सेब बागानों के मालिकों राहत दी गई थी। वे तय सीमा से ज्यादा बागान अपने पास रख सकते थे, इस शर्त पर कि वे उनका रखरखाव करेंगे।

 

अब चाय बागान और सेब बागानों के मालिकों के पास बहुत ज्यादा जमीन बच गई। मगर अब सरकार उन्हें छूट दे रही है कि वे उसे बेच दें। नियमों में ढील देकर। जबकि नियम कहता है कि वे इसे बेच नहीं सकती। इसके लिए सरकार ने टी टूरिज़म नाम की टर्म गढ़ी है। यह छूट उन लोगों के साथ ठगी है, जिनकी जमीन सरकार ने कई साल पहले लैंड रिफॉर्म के नाम पर कब्जा ली थी। जो चाय बागान के नाम पर बच गए, आज उन्हें फायदा पहुंचाया जा रहा है। (विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

गुड़िया केस: सीबीआई की जांच में आई गति, कई जगह पूछताछ

शिमला।। कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस के संदिग्ध आरोपी सूरज की हिरासत में मौत को लेकर हिमाचल पुलिस के अधिकारियों को जेल में डाल चुकी सीबीआई संभवत: मामले का खुलासा करने के करीब पहुंच गई है। दरअसल सीबीआई की जांच टीम घटनास्थल के आसपास लगातार बनी हुई है और कई बार विभिन्न जगहों का मुआयना कर चुकी है। टीम ने लगातार जिस तरह से पूछताछ में तेजी लाई है, माना जा रहा है कि वह किन्ही कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

 

सीबीआई ने गुरुवार को महासू बीट के फॉरेस्ट गार्डों से भी बात की। यह पता किया गया कि जून-जुलाई महीनों में जंगल में लकड़ी काटने के लिए कितने कश्मीरी आए थे। सीबीआई ने वन निगम के दफ्तर में जाकर कागज़ात की भी जांच की।जहां से विक्टिम का शव मिला था, वहां दोनों गार्डों को ले जाया गया और फिर वन निगम के डिपो चले गए। डिपो में उन लोगों के रिकॉर्ड देखे गए, जिन्हें निगम ने टीडी दी थी।

 

इसके अलावा कोटखाई-हलाइला के बीच चलने वाली बस के ड्राइवर से भी पूछताछ की गई कि घटना वाले दिन कोई जंगल से बस में चढ़ा तो नहीं था। सीबीआई के अफसरों ने नेपाली मूल के मजदूरों के डेरे में जाकर भी पूछताछ की।

6 दिन बाद भी पता नहीं चला, कहां गया वनकर्मी मोहन

मंडी।। हिमाचल प्रदेश के मंडी ज़िले के कमरूनाग जंगल में लापता हुए वनकर्मी मोहन का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। सात दिन हो चुके हैं मगर अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है कि आखिर मोहन है कहां।

 

गुरुवार को पुलिस ने डॉग स्क्वॉयड की मदद भी ली। नालों, चट्टानों, पेड़ों, खाइयों… सब जगह मोहन की तलाश होती रही। यह राज़ बन गया है कि आखिर मोहन लाल कहां चला गया। परिजनों ने मामले को मंडी के डीसी के सामने उठाया है।

 

पुलिस का कहना है कि वह तीन दिनों कमरूनाग जंगल में सघन तलाशी अभियान चला चुकी है, मगर कोई सुराग नहीं मिल रहा।