कमाल का हिमाचल: मानसिक रूप से अस्वस्थ बच्चों की हो रही पूजा

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश भले ही शिक्षा के मामले में देश में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों में है, लेकिन यहां शायद यहां शिक्षा का मतलब साक्षरता ही है। ऐसा इसलिए क्योंकि आज भी कई इलाकों में पढ़े-लिखे लोग भी अंधविश्वास की चपेट में हैं। प्रदेश के विभिन्न इलाकों में कई देवी-देवता हैं, जिनके पुजारी ‘खेल’ आने पर भविष्यवाणियां करते हैं। माना जाता है कि उनके माध्यम से देवी या देवता बोल रहे होते हैं। यह आपकी आस्था का विषय जरूर हो सकता है, मगर साइंस इसके भी कारण बताती है।

सबसे पहले तो आपको यह बताते हैं कि इस बात का जिक्र छिड़ा क्यों। शिमला के ठियोग में एक ही परिवार के तीन बच्चे अजीब हरकतें करते हैं। गरीब परिवार के ये बच्चे पढ़ाई छोड़कर अपने टूटे से घर में बैठे रहते हैं। दो भाई खुद को शिव और विष्णु का अवतार बताते हैं तो उनकी बहन खुद को काली माता का अवतार। हैरानी की बात यह है कि इन बच्चों से मिलने और इनसे अपनी समस्याओं का समाधान चाहने के लिए हिमाचल के विभिन्न हिस्सों से ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी लोग आ रहे हैं।

हर कोई अपनी समस्या का समाधान चाहता है, मगर इन बच्चों की समस्या की फिक्र न तो परिजनों को है और न ही प्रशासन को। मूर्खता ही हद देखें कि इन बच्चों को, जिन्हें खुद इलाज की जरूरत है, उनके कहने पर कई लोग गंभीर बीमारियों की दवाइयां तक छोड़ रहे हैं। और प्रशासन को भी मजबूरी में पुलिस की तैनाती करनी पड़ रही है भीड़ संभालने के लिए, क्योंकि लोग यह मानने को तैयार नहीं है कि इन बच्चों को कोई समस्या है। यानी अंधविश्वास हदें पार कर चुका है। नीचे वीडियो देखें-

वैसे प्रशासन अगर इन बच्चों पर कार्रवाई करे भी तो कैसे? ये बच्चे वैसी ही हरकतें तो कर रहे हैं जैसी हरकतें स्थापित और पुराने देवी-देवताओं के पुजारी करते हैं। हो सकता है कल को इन बच्चों के यहां भी तीन देव पालकियां बन जाएं और बाकयादा ढोल-नंगाड़ों के साथ उनकी यात्राएं निकलें। अब इन बच्चों पर सवाल उठाने का मतलब है हिमाचल के विभिन्न मेलों में दिखने वाले द्यो (देवी-देवता, जिन्हें पालकियों में लाया जाता है) पर भी सवाल उठाना। क्योंकि उन देवताओं के पुजारी भी ऐसे ही तो खेलते हुए पूछ देते हैं। अगर ये बच्चे बीमार हैं तो क्या पूरे हिमाचल में देवी-देवताओं के नाम पर खेलने और पूछ या प्रश्ना देने वाले पुजारी भी बीमार नहीं हैं? यह ऐसा सवाल है जिसके जवाब में हमारी आस्था भारी हो जाती है।

क्या है इन बच्चों की हरकतों का कारण?
जब पूरे देश में चोटी काटे जाने की अफवाह चली थी, तब इन हिमाचल ने बताया था कि हिस्टीरिया क्या होता है और कैसे मानसिक रूप से कमजोर लोग एकसाथ हिस्टीरिया की चपेट में आ जाएं तो उसे मास हिस्टीरिया कहा जाता है(यहां क्लिक करके पढ़ें)। आपने विभिन्न  धर्मों के धार्मिक आयोजनों में देखा होगा कि शुरू में एक महिला या पुरुष उछल-कूद मचाकर यह दिखाता है कि उसके अंदर कोई दैवीय शक्ति आ गई है। कुछ जगहों पर इसे माता आना कहा जाता है और हिमाचल में खेल आना। कई जगहों पर इसे भूत का आना भी कहा जाता है।

कई बार एक व्यक्ति के इस तरह से व्यवहार करने के बाद भीड़ से बहुत से लोग उसी तरह का व्यवहार करने लगते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वे मास हिस्टीरिया की चपेट में आ गए होते हैं। कुछ लोग धार्मिक आधार पर दूसरों को ठगने के लिए मास हिस्टीरिया को हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं।

आपने सुना होगा कि फ्लां जगह पर स्कूल की बच्चियां एक के बाद एक चीखकर बेहोश होने लगीं। कई बार किसी खास जगह पर कुछ लोग अजीब हरकतें करने लगते हैं। इसके बाद लोग अक्सर ओझाओं और तांत्रिकों की मदद लेने लगते हैं मगर उन्हें पता होना चाहिए कि ऐसा करने से समस्या और खराब हो सकती है। मन में डर और गहरा बैठ सकता है। ऐसा ही मामला बिलासपुर में हुआ था और उस वक्त भी In Himachal ने लोगों को वैज्ञानिक ढंग से सोचने के लिए कहा था। (यहां क्लिक करके पढ़ें)

सामाजिक और मनोविज्ञान में इसे ग्रुप हिस्टीरिया या सामूहिक उन्माद कहते हैं। इसमें बहुत सारे लोग एक साथ भ्रम के शिकार हो जाते हैं। अफवाहों की वजह से होने वाले डर या उत्तेजना की वजह से उनका व्यवहार एक जैसा हो जाता है। दुनिया भर के कई देशों में ऐसे उदाहरण हैं जहां पर कहीं लोगों को लगने लगा कि उनके ऊपर शैतान आ गया है तो कहीं लोगों को लगने लगा कि प्रभु की कृपा उनके ऊपर हो गई है। ऐसे उदाहरण पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं। खास बात यह है कि अफवाहें और डर जितना ज्यादा फैलता है, हिस्टीरिया उतना ही बढ़ता जाता है। इन बच्चों के साथ भी वैसा ही हुआ।

इन बच्चों के साथ क्या हुआ है?
साइकोसिस (psychosis) वह डिसऑर्डर है, जिसमें विचार और भावनाएं इतनी हावी हो जाती हैं कि इंसान सच्चाई से दूर होता चला जाता है। साइकोसिस के पीछे कई मानसिक समस्याएं हो सकती हैं। संभव है कि ये बच्चे सिज़ोफ्रेनिया (Schizophrenia) के शिकार हो सकते हैं। यह एक ऐसा मेंटल डिसऑर्डर है, जो किशोरावस्था के दौरान होता है। इसमें भ्रम, कल्पनाओं में कुछ देख लेना, समझने में दिक्कत आदि जैसी समस्याएं आती हैं। वे बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर यानी BPD के जूझ रहे हो सकते हैं, जिसमें व्यवहार अचानक बदलता रहता है।

निश्चित रूप से इन बच्चों ने अपने आसपास किसी को तथाकथित भूत की चपेट में अजीब व्यवहार करते देखा होगा या फिर किसी देवता के पुजारी को खेलते हुए देखा होगा। निजी कारणों या मानसिक अवसाद के कारण इन बच्चों पर भी उस घटना का असर हुआ और वे हिस्टीरिया की चपेट में आ गए। जैसे कि यूट्यूब पर एक वीडिया है, जिसमें बच्चे देवता के पुजारी की तरह खेल का नाटक कर रहे हैं। ये तो जानबूझकर कर रहे हैं लेकिन साइकोसिस के दौरान आप अनजाने में ऐसा ही व्यवहार करने लग जाते हैं और आपको पता भी नहीं होता।

ठियोग के तीन भाई बहन ऊपर के वीडियो वाले बच्चों की तरह व्यवहार क्यों कर रहे हैं, इसका पता तभी चल सकता है जब डॉक्टर और सायकायट्रिस्ट इनकी जांच करें और इलाज शुरू करें। मगर हमारा समाज, जहां पर मानसिक समसम्याओं को भूत-प्रेत और माता आने से जोड़ा जाता है, वह इन्हें मानसिक समस्याएं मानने को ही तैयार नहीं है। कई गांवों में तो ऐसे मानसिक मरीज खुद को अवतार घोषित करके बैठे हैं, लोगों की समस्याओं का निदान करने का दावा करते हैं और पूछ देते हुए यानी सवालों का जवाब देते हुए कहते हैं- आपके ऊपर फ्लाणे ने जादू किया, आपके उस रिश्तेदार ने टोटका किया है।

यानी जिन्हें खुद इलाज और देखभाल की जरूरत है, वे अंधविश्वास का प्रचार प्रसार नहीं कर रहे, बल्कि समाज और परिवारों में शक के बीज बोकर उन्हें बर्बाद भी कर रहे हैं। इसलिए जरूरत है कि देव परंपरा के नाम पर बहुत से लोगों ने जो दुकानें खोली हुई हैं, उन्हें बंद किया जाए। आज बहुत से लोग प्रश्न उठाते हैं कि 21वीं सदी में आस्था अपनी जगह है, मगर वास्तव में ही अगर कोई अवतार है या कोई शक्ति अपने पुजारी के माध्यम से बोलती है, तो वह क्यों नहीं पहले ही समस्याओं के बारे में बता देती। उदाहरण के लिए गुड़िया रेप केस को लेकर एक सवाल बहुत शेयर हुआ था सोशल मीडिया पर- अगर कोई देवी या देवता यह बता दे कि गुड़िया के साथ किसने ऐसी हरकत की थी तो मैं मान लूंगा कि देवता हैं, वरना सब ढोंग है।

साफ है, आस्था और अंधविश्वास में मामूली सा फर्क है। पढ़े-लिखे होने के कारण हमारी जिम्मेदारी बनती है कि अंधविश्वास को फैलने न दिया जाए। क्योंकि भले ही आप आज इससे अछूते हों, कल को आपपर भी इसकी आंच आएगी। प्रशासन को चाहिए इन बच्चों को तुरंत अंधविश्वासी और स्वार्थी लोगों के चंगुल से बचाकर बाहर ले जाए और इलाज शुरू करवाए। वैसे पूरे प्रदेश में ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां मंदिर खोलकर बैठे कुछ मानसिक रोगी (जो खुद को अवतार समझते हैं) दूसरे मानसिक रोगियों (समझा जाता है कि जिनपर भूत-प्रेत है) का इलाज कर रहे हैं। जबकि दोनों को ही डॉक्टरों की जरूरत है।

इन बुजुर्ग से सीखें- अनार की बागवानी से कैसे कमा सकते हैं लाखों

कुल्लू।। भुंतर के बागवान होतम सिंह पाल को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने नवोन्मेषी किसान पुरस्कार 2018 से सम्मानित किया है। होतम सिंह पाल बागवानी के लिए विभिन्न मंचों से एक दर्जन से ज्यादा सम्मान हासिल कर चुके हैं। वैसे तो वह सेब, नाशपाती और आलूबुखारा की पैदावार में नई तकनीक इस्तेमाल करते हैं मगर उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है- अनार की बंपर पैदावार और सफल कारोबार।

हिमाचल प्रदेश में जंगली जानवरों ने खेती और बागवानी करना मुश्किल कर दिया है। यह रोज का संघर्ष बन गया है कि खेतों में उगाई गई सामान्य फसलों को बचाने के लिए किसान दिन भर चौकीदारी करते रहते हैं। चौकीदारी ही करनी है अगर, तो क्यों न फलदार पौधों को पैदा करके उनकी चौकीदारी की जाए। ताकि सामान्य फसलों के मुकाबले मेहनत का फल भी अच्छा मिले। ऐसे में अगर आप अनार की बागवानी करना चाहते हैं तो कुल्लू के होतम सिंह पाल से सबक लिया जा सकता है।

अनार की पैदावार में बनाए रिकॉर्ड
पाल ने 1969 के दौर में अनार के कुछ पौधे रोपे थे। फिर अनार पैदा हुए तो ललक बढ़ी कि क्यों न अनार उत्पादन को ही बड़े स्तर पर बढ़ाया जाए। फिर वह आगे बढ़ते रहे और धीरे-धीरे करके अनार के पौधे रोपते रहे। अच्छी बात यह रही कि उन्होंने एक ही किस्म नहीं बल्कि कई किस्मों के अनार उगाए। इनमें गणेश, कांधारी और सिंदूरी जैसी किस्में शामिल थीं। आखिर में उन्होंने देखा कि अपने इलाके में सबसे कामयाब किस्म है कांधारी अनार की। उन्होंने इसी पर फोकस किया और कामयाबी के कीर्तिमान बनाते रहे।

कंधारी अनार उगाने में सफलता मिली

बागीचों में गुजारते हैं ज्यादा समय
शिक्षा विभाग में अफसर रहे एचएस पाल आज भी अपना ज्यादातर समय बागीचों में गुजारा करते हैं। बीते साल अनार की कीमतें काफी ऊंची रहीं। अक्टूबर महीने में वह अनार की फसलों को बाजार पहुंचाने में जुटे रहे। साल 1973 की बात है जब उन्होंने खुद अपने बागीचों में उगाए अनार को दशहरा उत्सव में बागवानी विभाग की ओर से लगाई प्रदर्शन में सजाया था। यहां उन्हें बेहतरीन पैदावार के लिए बागवानी विभाग की ओर से पहला पुरस्कार भी मिला था। अब तक वह अनार उत्पादन के लिए विभिन्न मंचों से 14 से ज्यादा बार पुरस्कृत हो चुके हैं।

लोगों के लिए बने प्रेरणास्रोत
पाल बताते हैं कि 1969 में जब उन्होंने अनार उगाए थे तो लोगों ने ध्यान नहीं दिया। मगर जब पौधों में फल लगने शुरू हुए तो अन्य लोगों ने भी आकर्षित होकर इस तरफ ध्यान दिया। अनार का उत्पादन और लोग भी करने लगे तो नजदीक ही सब्जी मंडियां खुलने से अनार को अच्छा बाजार मिल गया। फल आसानी से बिकने लगे और लोगों को और प्रोत्साहन मिला। आज कई लोग अनार उगाकर पैसा कमा रहे हैं।

क्या है उनकी सलाह
सेवानिवृति के बाद पाल भी अनार उगाकर अच्छी-खासी कमाई कर रहे हैं। उन्होंने यह सलाह भी दी कि बागवानी जैसे कामों में विशेषज्ञों से मदद जरूर लेनी चाहिए और हर साल लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मिट्टी का भी परीक्षण करवाना चाहिए। ऐसा नहीं कि मन किया तो देखा-देखी में कुछ भी उगाने लग गए। इस तरह की लापरवाही नुकसान भी करवा सकती है।

अखबार बताएं कि उन्होंने ये समाचार छापा है या विज्ञापन

इन हिमाचल डेस्क।। कुछ दिन पहले ‘इन हिमाचल’ ने बताया था कि किस तरह से तथाकथित संत के विज्ञापनों को बहुत से अखबार पहले पन्ने पर प्रकाशित कर रहे हैं और वह भी ऐसे, जैसे वे समाचार हों। ऐसे तथाकथित संत हिमाचल की जनता को टारगेट करने में न सिर्फ झूठ का सहारा लेते हैं, बल्कि उनके झूठ पर आधारित कारोबार को बढ़ाने में अखबार भी मदद करते हैं। बाबा जो मर्जी करें, मगर पत्रकारिता का काम क्या है? झूठ को बढ़ाना क्या पत्रकारिता से सम्मान और विश्वास को बेचने का काम नहीं है? मगर अफसोस, यह सिलसिला बेशर्मी के साथ बदस्तूर जारी है।

हिमाचल प्रदेश में जन समस्याओं को उठाने के लिए पहचाना जाने वाला और सबसे विश्वसनीय और जन हितैषी अखबार कहलाने का दावा करने वाला ‘अमर उजाला’ भी भ्रम फैलाने की इस दौड़ में शामिल हो गया है। पंजाब केसरी के विभिन्न सस्करणों में ऐसा ही विज्ञापन छपा है।

अखबारों ने अपने पहले पन्ने पर ‘ब्रह्मर्षि कुमार स्वामी’ का विज्ञापन दिया है और वह भी बाकयादा उसी शैली में, जिस तरह से खबरें हों। जरा ध्यान से पढ़ें, अमर उजाला और पंजाब केसरी ने आज धर्मशाला से छपे संस्करण के पहले पन्ने पर क्या दावा किया है-

95 प्रतिशत रोग केवल 15 मिनट में समाप्त, भारत की अद्भुत खोज, पूरे विश्व में आश्चर्यजनक प्रसन्नता, समाजगम में मिलेगा रोगों से मुक्ति का अद्भुत रहस्य

अगर यह समाचार है तो अमर उजाला और पंजाब केसरी बताएं कि इसका स्रोत क्या है और अगर विज्ञापन है तो बताएं कि इस विज्ञापन को उन्होंने खबरों की तरह क्यों प्रकाशित किया है?

इसके लिए अखबारों ने फ्रंट पेज पर बड़ी सी हेडिंग दी है और बीच में लोगों के अनुभवों को डेटलाइन के साथ प्रकाशित किया है। ध्यान रहे, यह पूरा फॉरमैट विज्ञापन है मगर कहीं पर भी यह नहीं लिखा है कि यह समाचार नहीं बल्कि ऐड है। और अघर यह विज्ञापन नहीं, समाचार है तो भी अमर उजाला और पंजाब केसरी को बताना होगा कि झूठ से भरे समाचार वह लाया कहां से? क्योंकि हिमाचल प्रदेश की भोली भाली जनता जब पढ़ेगी कि एक अखबार ने लिखा है कि व्यक्ति की एलर्जी मंत्रों से ठीक हो गई, तो वह अचानक अपनी समस्याओं को दूर करने के लिए अखबार पर यकीन करते हुए संत के समागम में चला जाएगा।

क्या ‘अमर उजाला’ या पंजाब केसरी ने इस विज्ञापन को खबरों की शक्ल में देने से पहले या इन तथाकथित समाचारों को छापने से पहले जांच की थी कि इसके कॉन्टेंट की सत्यता क्या है? क्या अखबारों ने प्रधानमंत्री के बयान को समाचार के रूप में छापने से पहले पता किया कि प्रधानमंत्री ने कब और कहां ऐसा बयान दिया? कौन से शोध में दावा हुआ है कि 95 फीसदी रोगों का इलाज 15 मिनट में हो जाएगा?

संत का झूठ
यह हो सकता है कि कुमार स्वामी से बहुत से लोगों की आस्था जुड़ी हो। मगर इस बाबा के भ्रामक विज्ञापन की आज पोल खोलना जरूरी है। इस विज्ञापन में दावा किया गया है- गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की वरिष्ठ अधिकारी पोलीन स्पेन्सिका ब्रह्मर्षि को गिनीज अवॉर्ड प्रदान करती हुईं। समागम में हजारों लोगों का एकसाथ जानलेवा फंगल डैंड्रफ खत्म हो गया।

आपको हंसी आएगा कि गिनीज बुक अवॉर्ड नहीं देती, रिकॉर्ड बनाने का सर्टिफिकेट देती है। और बाबा को ये सर्टिफिकेट इसलिए मिला है क्योंकि इनके समागम में 987 लोगों ने कुमार स्वामी के समागम में एकसाथ सिर के बाल धोए थे। उसमें भी संत से संबंधित कंपनी अरिहंता की भी भूमिका थी। यह डैंड्रफ की ट्रीटमेंट का एक हिस्सा मात्र था।

हजारों लोगों ने नहीं, सिर्फ 987 में। और वैसे भी डैंड्रफ जानलेवा नहीं होता। यहां क्लिक करके गिनीज बुक की वेबसाइट पर पढ़ें। यानी संत का झूठ। क्या इस झूठ की गारंटी लेंगे अखबार?

ये पूरा विज्ञापन झूठ का पुलिंदा है। और तो और, भारतीयों की मानसिकता पर छाप छोड़ने के लिए लिखा गया है- अमरीका नासा में आयोजित…. क्या अखबार बताएंगे कि नासा ने कहां और कब तथाकथित संत को सम्मानित किया?

इसी तरह के भ्रामक विज्ञापनों के दम पर करोड़ों का कारोबार खड़ा कर लिया गया है और इसमें अखबार वालों की भी मौज है क्योंकि फ्रंट पेज के विज्ञापन की कीमत लाखों की होती है। यह पत्रकारिता के नियमों का ही उल्लंघन नहीं बल्कि कानून का भी उल्लंघन है और ऐसा करने पर अखबारों पर बड़ी कार्रवाई संभव है। मगर जहां पैसे कमाना प्राथमिकता हो, वहां सारे उसूल ताक पर रख दिए जाते हैं। और यह खेल एक बाबा या एक अखबार नहीं कर रहा, सबका यही हाल है।

आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं कि अखबारों ने पहले क्या क्या ऐड छापे थे और किस तरह से कुमार स्वामी खुद कह चुके हैं कि मंत्रों से इलाज नहीं होता।

‘भ्रम ऋषि’ संग मिलकर हिमाचल को गुमराह करते अखबार

गुड़िया केस: नए तथ्यों के साथ हाई कोर्ट पहुंची सीबीआई

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, शिमला।। कोटखाई गैंगरेप ऐंड मर्डर केस में गुरुवार को सीबीआई ने ताजा स्टेटस रिपोर्ट फाइल की है। एक दिन पहले ही हाई कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाई थी औऱ उसके डायरेक्टर को तलब किया था।  जानकारी मिली है आज सीबीआई ने फरेंसिक लैब से डीएनए सैंपल्स समेत कुछ अहम तथ्य रखे हैं।

हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 अप्रैल की तारीख तय की गई। सुनवाई के बाद सीबीआई के वकील ने कहा कि हमने कोर्ट के सामने नए तथ्य रखे हैं। उन्होंने कहा कि सीबीआई को केस में एक बड़ी लीड मिली है और जल्द महत्वपूर्ण बात सामने आएगी।

गुड़िया मामले में पुलिस के ढीले रवैये के कारण पूरे प्रदेश में प्रदर्शन हुए थे।

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वकील अंशुल बंसल ने कहा कि सीबीआई साइंटिफिक तरीके से जांच कर रही है और सुनवाई से पहले ही अपराधी सामने आ जाएंगे।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

गुड़िया केस: हाई कोर्ट ने CBI के डायरेक्टर को तलब किया

शिमला।। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस में सीबीआई के डायरेक्टर को अगली सुनवाई में हाजिर रहने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी। दरअसल अदालत इस बात से नाराज है कि मामले के लगभग नौ महीने बीत जाने के बाद भी सीबीआई खाली हाथ है।

बुधवार को सीबीआई ने बंद लिफाफे में सीबीआई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की। हाई कोर्ट ने कहा कि फाइनल रिपोर्ट अगली सुनवाई को दाखिल करे।

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

बता दें कि अभी तक पुलिस गुड़िया केस के आरोपियों का पता लगाने में नाकाम रही है। हालांकि शुरू में पकड़े गए संदिग्ध सूरज की हत्या के मामले में उसने आईजी और एसपी समेत नौ पुलिसवालों को गिरफ्तार किया है।

मामले को हल करने में हो रही देरी पर सीबीआई के वकील का कहना है कि पुलिस ने शुरू में ही सारे सबूत नष्ट कर दिए थे, इस कारण मामले को सुलझाने में समय लग रहा है।

छात्रा का आरोप- छेड़छाड़ की शिकायत करने पर SHO ने चरित्र पर उठाए सवाल

हमीरपुर।। सुजानपुर डिग्री कॉलेज की एक छात्रा ने एसपी ऑफिस पहुंचकर शिकायत दी है कि उसके साथ हुई छेड़छाड़ और भाई से मारपीट के मामले में पुलिस से मदद मांगी तो थाना प्रभारी ने उन्हें धमकाया और चरित्र पर ही सवाल खड़े कर दिए।

कॉलेज की छात्रा और उसके रिश्तेदारों ने एसपी रमन कुमार मीणा से कार्यालय में पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और मामला दर्ज करने की मांग की है। एसपी ने मामले की निष्पक्षता से जांच करवाने का भरोसा दिया है।

क्या है मामला
सुजानपुर कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा का कहना है कि 23 मार्च को कॉलेज के वार्षिक समारोह में कुछ लड़कों ने उससे बदतमीजी की। लड़की के मुताबिक आरोपियों ने कथित तौर पर गालियां दीं और कॉलेज छुड़वाने की धमकी थी।

छात्रा का कहना है कि उसके भाई ने जब विरोध किया तो आरोपियों ने मारपीट की। बाद में पुलिस स्टेशन सुजानपुर में शिकायत दर्ज करवाने गई तो थाना प्रभारी ने कथित तौर पर धमकाया और चरित्र पर टिप्पणियां कीं।

छात्रा का कहना है कि जहां यह घटना हुई है, वहां सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे। उसका कहना है कि जांच करने पर सब साफ हो जाएगा। छात्रा ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की और खुद को सुरक्षा मुहैया करवाए जाने की भी मांग की है।

क्या कहती है पुलिस
 ‘न्यूज 18 हिमाचल’ के मुताबिक एसपी हमीरपुर रमन मीणा ने कहा है कि शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि एसएचओ सुजानपुर को रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जिन एसएचओ पर छात्रा को धमकाने और चरित्र पर सवाल उठाने का आरोप लगाया है, वही कैसे जांच करेंगे।

महिला ने पति पर लगाया यौन हिंसा का आरोप, मामला दर्ज

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, ऊना।। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला के अंब उपमंडल में आने वाले गांव नैहरिया में एक महिला ने अपने पति पर शारीरिक और मानसिक रूप से टॉर्चर करने का आरोप लगाया है। महिला ने अपने पति पर यौन हिंसा का भी आरोप लगाया है।

महिला का कहना है कि सेना में काम करने वाले उसके पति इन दिनों छुट्टी पर घर आए हुए हैं। आरोप है कि 27 तारीख जो जब उनका बड़ा बेटा स्कूल में था और छोटा बेटा घर पर था, तब पति ने हमला करके घायल कर दिया।

महिला का कहना है कि ‘दोपहर करीब एक बजे पति ने संबंध बनाने की बात कही लेकिन बेटे के घर पर होने के कारण इनकार कर दिया। इससे गुस्से में आकर पति ने बरामदे में पड़ा लोहे का बेलचा उठाकर हमला कर दिया।”

महिला का कहना है कि इस हमले में वह बुरी तरह घायल हो गई। घर पर मौजूद 11 साल के बेटे ने भी बचाने की कोशिश की और पड़ोसियों ने दखल देकर उसे बचाया।

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महिला एक निजी अस्पताल में भर्ती है जां उसका इलाज चल रहा है। वहीं से उसने अंब पुलिस को मामले की सूचना दी है। डीएसपी का कहना है कि महिला का मेडिकल करवाकर पति के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

मिलिए आवाज और अदाओं से जादू बिखेरने वाली प्रेक्षा राणा से

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश की प्रतिभाओं को मंच देने के उद्देश्य ‘इन हिमाचल’ एक नया सेग्मेंट शुरू कर रहा है। ‘शिखर पर नजर’ यानी कामयाबी का लक्ष्य रखने वाले हिमाचलियों को हम मंच देंगे। कला, संस्कृति, विज्ञान, शिक्षा, राजनीति और समाज सेवा से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में कुछ कर दिखाने की चाहत रखने वाली प्रतिभाओं के बारे में बताया जाएगा।

अगर आपमें भी कुछ खास करने का इरादा तो अपने काम के वीडियो, तस्वीरें या अन्य दस्तावेज हमें हमारी ईमेल आईडी inhimachal.in @ gmail.com पर भेज दें।

नाम- प्रेक्षा राणा
उम्र- 21 वर्ष
जन्मस्थान- गग्गल, कांगड़ा
लक्ष्य- सिंगिंग, ऐक्टिंग और मॉडलिंग

‘शिखर पर नजर’ के तहत आज हम आपको मिलवाने जा रहे हैं प्रेक्षा राणा से। 21 साल की प्रेक्षा राणा ने मिस हिमालय पेजंट 2017 का खिताब जीता था। धर्मशाला के पास गग्गल की रहने वालीं प्रेक्षा इंग्लिश लिटरेचर में बीए कर रही हैं। उनका ख्वाब है- सिंगिंग, ऐक्टिंग और मॉडलिंग में करियर बनाना। प्रेक्षा का इंस्टाग्राम अकाउंट है, जहां पर वह अपनी मॉडलिंग की तस्वीरें, गाने, ऐक्टिंग और विभिन्न तरह का कॉन्टेंट डालती हैं। नजर डालें।

प्रेक्षा गाती भी हैं।

उनके इंस्टाग्राम अकाउंट के अच्छे-खासे फॉलोअर्स हैं।

वह डांस भी करती हैं।

टेबल पर फाइल केस पटककर विधानसभा से निकले वीरभद्र

शिमला।। कांग्रेस विधायकों का विधानसभा से लगातार वॉकआउट करने का सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा। सोमवार को कांग्रेस के विधायकों ने वॉकआउट कर दिया, मगर एक अलग तरह की स्थिति पैदा हो गई। कांग्रेस के कुछ विधायक दो बार बाहर निकल गए। इसे लेकर मुख्यमंत्री ने चुटकी भी ली।

वीरभद्र ने टेबल पर पटका फाइल केस
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के ऊना दौरे के दौरान बीजेपी के हारे हुए प्रत्याशियों के माध्यम से विकास कार्य करवाने को तरजीह दिए जाने को लेकर विपक्ष एक स्थगन प्रस्ताव लेकर आया। कांग्रेस विधायक रामलाल ठाकुर ने नियम 67 के तहत काम रोककर चर्चा की मांग की। स्पीकर ने चर्चा की इजाजत नहीं दी मगर विषय रखने को कहा। सत्ता पक्ष ने विषय को हास्यास्पद बताया और विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी।

हंगामा चल ही रहा था कि कांग्रेस के विधायक वीरभद्र सिंह सीट पर खड़े हुए और उन्होंने फाइल केस मेज पर पटक दिया। उनकी यह हरकत देख सभी पल के लिए ठहर गए। इसके बाद वीरभद्र सिंह सदन से बाहर निकल आए। उनके साथ कांग्रेस के कुछ विधायक भी बाहर निकल गए। जब वीरभद्र और ये विधायक बाहर गए, तब कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री सदन में बोल रहे थे। इतने में बाहर गए विधायक फिर लौट आए। और उनके आने के बाद फिर विपक्ष ने वॉकआउट किया। 

मुख्यमंत्री ने ली चुटकी
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस के विधायक रामलाल ठाकुर कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री की बराबरी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “कांग्रेस के विधायकों में आपसी तालमेल नहीं है। एक बोलता है तो दूसरा बाहर जाने लगता है। कभी बाहर जाते हैं तो कभी अंदर आते हैं।”

मंत्री महेंद्र सिंह के बेटे पर खनन का आरोप लगाने वाले पर केस

मंडी।। सिंचाई एवं बागवानी मंत्री और धर्मपुर से बीजेपी के विधायक महेंद्र सिंह ठाकुर के बेटे पर शनिवार को बक्कर खड्ड में अवैध ढंग से खनन का आरोप लगाने वाले शख्स रमेश और चार अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इन पर मंत्री के बेटे की गाड़ी तोड़ने को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। बता दें कि रमेश चंद पर यह मामला मंत्री के बेटे पर खनन का आरोप लगाने के एक दिन बाद ही दर्ज हुआ है।

क्या है मामला
धर्मपुर में सबसे पहले एक शिकायत दर्ज कराई गई। रमेश चंद नाम के शख्स का कहना है कि दोपहर तीन बजे कुज्जाबल्ह से संधोल की तरफ जाते समय उन्होंने एक जेसीबी और दो टिप्पर बक्कर खड्ड में खनन करते देखे। इसकी सूचना उन्होंने पुलिस को दी और पुलिस ने तुरंत आते ही इन वाहनों को अपने कब्जे में ले लिया।

रमेश चंद का दावा है कि मुख्य आरक्षी संजीव सकलानी के पास चालान नहीं कर सकते थे क्योंकि संधोल पुलिस चौकी प्रभारी मौके पर मौजूद नहीं थे। ऐसे में कथित तौर पर संजीव ने अपने धर्मपुर थाना प्रभारी को सूचा दी। लेकिन इसके बाद मौके पर करीब दो दर्ज लोग पहुंचे और पुलिस के सामने से दो टिप्पर और जेसीबी छुड़ाकर ले गए।

शिकायत पत्र

आरोप है कि मंत्री के एक रिश्तेदार ने इस दौरान पुलिस वालों को कथित तौर पर धमकाया और छह दिन के अंदर देख लेने का जिक्र किया। बताया जा रहा है कि शनिवार रात आठ बजे एसएचओ पृथ्वी सिंह भी पहुंचे लेकिन मंत्री के बेटे का नाम आने के कारण वह कार्रवाई से बचते रहे। बता दें कि इस खड्ड में मंत्री के बेटे का क्रशर भी है।

अब शिकायत करने वाले पर मामला
खनन की शिकायत वाले मामले में क्या कार्रवाई हुई है, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है लेकिन अब शिकायतकर्ता रमेश पर मामला दर्ज किया गया है। खनन विवाद के ठीक एक दिन बाद रमेश चंद पर विधायक और मंत्री महेंद्र के बेटे रजत की गाड़ी को तोड़ने का केस दर्ज हुआ है। इसमें चार अन्य लोगों पर भी केस दर्ज हुआ है। रमेश का कहना है कि आवाज उठाने के कारण उनके साथ ऐसा किया जा रहा है।

क्या कहना है मंत्री के बेटे का
मंत्री के बेटे रजत सिंह ने न्यूज पोर्टल ‘समाचार फर्स्ट’ से बात करते हुए अपना पक्ष रखा है (पढ़ें)। उन्होंने कहा है कि ‘अवैध खनन से मेरा कोई संबंध नहीं है और मौके से जिस टिप्पर और जेसीबी के मिलने की बात कही जा रही है, वह पुरानी घटना है और मुझे जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है. जिन पांच लोगों पर एफआईआर की गई है, उन्होंने मेरी गाड़ी में तोड़फोड़ की है।’ हालांकि पोर्टल का दावा है कि आगे मंत्री के बेटे ने सवालों का जवाब नहीं दिया और कहा कि मामला कानूनी तौर पर विचाराधारीन है।

पुलिस की चुप्पी
इस मामले में पुलिस का रवैया ढुलमुल नजर आ रहा है। पुलिस अपने ऊपर लग रहे आरोपों पर भी जवाब नहीं दे रही। समाचार फर्स्ट की रिपोर्ट के मुताबिक एसएचओ धर्मपुर ने सवालों का जवाब नहीं दिया और टेलिफोन पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। इससे साफ पता चलता है कि पुलिस कहीं न कहीं दबाव में है।

(संधोल इलाके में जोरों पर है अवैध खनन) Image courtesy: Samachar First

जयराम सरकार की फजीहत
खनन माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के वादे के साथ सत्ता में आई बीजेपी के दौर में भी खनन जारी है। संधोल क्षेत्र में खनन जोरों पर है और इससे खड्डों की संरचना ही बदल गई है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी कई बार कह चुके हैं कि उनकी सरकार माफिया को बर्दाश्त नहीं करेगी। मगर उनकी ही सरकार के मंत्री के बेटे पर गंभीर आरोप लगे हैं और ऊपर से पुलिस पर ढुलमुल रवैया अपनाने के भी।

शिकायतकर्ता रमेश चंद कौन है
इस मामले में शिकायकर्ता रमेश चंद शराब के ठेकेदार हैं। बता दें कि उन्होंने ही महेंद्र सिंह की विधानसभा सदस्यता को  चुनौती दी है। उन्होंने अपनी याचिका में महेंद्र सिंह ठाकुर ने चुनाव के दौरान हलफनामे में जानकारियां छिपाने का आरोप लगाया है।

चुनावी हलफनामों में महेंद्र की तरफ से दी गई जानकारियों के आधार पर उन्होंने सवाल उठाया है कि मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर की पत्नी गृहिणी हैं और 2012 में उनके पास पैन कार्ड तक नहीं था। लेकिन इस बार उनकी संपत्ति 7.68 करोड़ दिखाई गई है। सवाल पूछा गया है कि पांच साल में उनके गृहिणी होते हुए यह संपत्ति एकाएक कैसे आ गई। इस मामले में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकार, चुनाव आयोग और मंत्री को पिछले दिनों नोटिस भी भेजा था। 

दो मंत्रियों की सदस्यता को चुनौती देने वाली याचिका पर हाई कोर्ट का नोटिस

गौरतलब है कि महेंद्र सिंह ठाकुर की पत्नी के नाम पर मनाली के रांगड़ी में एक होटल भी है। एनजीटी के आदेश के बाद जांच में यहां पाया गया था कि टीसीपी और अन्य निर्माण नियमों का उल्लंघन किया गया है। इस कारण होटल का बिजली और पानी का कनेक्शन काट दिया गया था। बाद में खबर आई थी कि अवैध हिस्से पर खुद ही हथौड़ा चला दिया गया था।

प्रदेश में इस तरह से 1700 होटलों में अनियमितताएं पाई गई थीं और फिर जयराम सरकार ने इन होटलों को राहत देने की बात कही थी। उस समय विपक्ष ने आरोप लगाया था और ऐसी खबरें भी आई थीं कि सरकार में बैठे बड़े नेता के रिश्तेदार के होटल फंसने के कारण ही सरकार नियमों में बदलाव कर रही है ताकि उन्हें राहत दे सके।