विजिलेंस ने शुरू की वीरभद्र सरकार में हुई बस खरीद की प्रारंभिक जांच

शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार के निर्देश पर विजिलेंस ने पिछली वीरभद्र सरकार के कार्यकाल के दौरान खरीदी और लीज़ पर ली गई बसों के मामले में प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। मीडिया में सामने आई खबरों के मुताबिक प्रारंभिक जांच में कुछ गलत पाए जाने पर आगे की कार्रवाई होगी।

वीरभद्र सरकार के खिलाफ विपक्ष में रहते हुए बीजेपी ने राज्यपाल को एक चार्जशीट सौंपी थी जिसमें उसने इस मुद्दे को शामिल किया था। बीजेपी का कहना था कि अनावश्यक ही बसें खरीदी गई हैं और इसकी जांच होनी चाहिए। जबकि तत्कालीन परिवहन मंत्री जीएस बाली का कहना था कि बसों को जनता को सुविधा देने के लिए जरूरतों के हिसाब से ही खरीदा गया है।

खबरों के मुताबिक पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान एचआरटीसी ने लगभग 500 बसें खरीदी थीं और बसों को लीज पर भी लिया था। केंद्र से जेएनएनयूआरएम के तहत मिली लो फ्लोर बसों को लेकर भी बीजेपी सवाल उठाती रही है।

बीजेपी सरकार पर लगातार उस चार्जशीट पर अमल करने का दबाव हुआ है, जो उसने विपक्ष में रहते हुए राज्यपाल को सौंपी थी। मगर इस मामले में वह खुद बैकफुट पर है क्योंकि विपक्ष में रहते हुए उसने कांग्रेस सरकार के पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा पर भी आरोप लगाए थे, जो इस समय खुद बीजेपी सरकार में मंत्री हैं।

आपने नहीं देखी होंगी हिमाचल की ये 16 अनोखी और खूबसूरत तस्वीरें

इन हिमाचल डेस्क।। स्पर्शरहित रहना खूबसूरती के लिए कई मायनों में खुशनसीबी होती है, भले ही मुरीदों के लिए महरूमियत साबित हो. कुछ ऐसी ही ‘अनटच्ड ब्यूटी’ हैं करसोग की वादियां. वक्त यहां भी बदला है लेकिन इंटरनेट युग के सजीलेपन ने यहां के कस्बों और गांवों की सादगी को फीका नहीं किया है. इसी सादगी में आप वहां के अतीत और परंपरा का अक्स देख सकते हैं.

पेश हैं मंडी जिले के करसोग की वादियों की ऐसी तस्वीरें, जो आपमें से ज्यादातर लोगों ने पहले शायद ही देखी होंगी। सभी तस्वीरें और उनके कैप्शन मंडी जिले के दीपक शर्मा की टाइमलाइन से साभार।

कुटाहची गांव में देव महासु मेले की तस्वीर- शहरी चेतना में मेला यानी भीड़भाड़, शोर. लेकिन ये एक मेला कुदरत के मौन में ख़लल नहीं डालता. इसका मतलब ये नहीं कि इस सालाना मेले में रौनक नहीं होती. शायद इसी मौन से ऊबकर पहाड़ों में तकरीबन हर जगह ऐसे सालाना आयोजनो का सिलसिला निकला होगा. नगाड़ों की थाप और नरसिंघों के अलाप में वो पल भी आता है जब ऐसा लगता है मानो मेले का पूरा का पूरा हजूम साथ नाच रहा हो. जब से देख रहा हूं हर साल दुकान सजाने वाले ‘पिछले साल की तरह काम’ ना होने का शिकवा करते हैं. लेकिन हर साल रंग बिरंगे तंबुओं में दुकानें सज ही जाती हैं. यहां कमाने वालों और खरीदारों- दोनों की हसरतें बौराई नहीं हैं. मुश्किल से एक-डेढ़ दर्जन तंबू. ऐसा सामान जिसका दाम शॉपिंग मॉल वालों को आज़ादी से पहले का लग सकता है. बच्चों को रोमांचित करने के लिए गगनचुंबी झूलों की ज़रूरत नहीं होती वो 5 रूपये की कुल्फी से भी खुश हो जाते हैं.
झुंगी के नज़दीक शंडरा गांव में बना एक घर- सीमेंट के घर संपन्नता की निशानी हैं लेकिन पहाड़ी घरों की अपनी उपयोगिता, ‘ग्रेस’ है. ऊपर की मंज़िल की हर आहट का नीचे पता चलता है. परिवार को घर की इमारत भी ‘कनेक्ट’ रखती है. इस मायने में परिवार का जीवंत हिस्सा होती है. मौसम के अधिक अनुकूल तो खैर ये घर होते ही हैं. क्योंकि पैसा नहीं है इसलिए इनमें ऐश्वर्य नहीं मिलेगा. लेकिन अमीर बाग़वानों, कारोबारियो और अफसरों के कुछ घरों में यही ग्रेस सजा हुआ भी दिख जाता है. आधुनिकता और परंपरा के जिस सांमजस्य की बात मैं ऊपर कर रहा था वो देखी जा सकती है. बनाने वाले यथाक्षमता सीमेंट का घर बनवाकर अपनी तरक्की की घोषणा की है. लेकिन लकड़ी के घर को सिर्फ पुराना होने की वजह से नहीं गिराया.
‘पौंडा..’- और पहाड़ी घर के बरामदे का कोना.. घर के बुज़ुर्गों के लिए हुक्का पीने की फेवरेट जगह या फिर घर की बूढ़ी औरतों के लिए ऊन कातने की. यहां से पगडंड़ी पर भी नज़र रखो, मौसम का भी जायज़ा लेते रहो और अपने खेत, पशुओं पर भी नज़र रखो..
चिंडी मंदिर का तालाब- करसोग इलाके का इकलौता गांव, जहां के एकांत रास्तों में आपको विदेशी या हिंदुस्तान के दूर राज्यों के लोग नज़र आ सकते हैं. इसे पर्यटन के सरकारी नक्शे में जगह ज़रूर मिली है लेकिन इसकी ज़्यादा वजह बड़ी यहां सरकारी होटल का खुलना है. बिना शोकेस किए भी चिंडी में जो बाहरी सैलानी पहुंचते हैं उनमें से ज़्यादातर को या तो पर्यटन के किसी गहरे जानकार की सलाह मिली होती है या उनके गूगल में सर्च करने का हुनर शानदार होता होगा. यहां का टॉप आकर्षण यहां का खूबसूरती है. जंगलों में बनी सड़कें साइक्लिंग के लिए भी मुफीद हैं. हालांकि यहां के चिंडी मंदिर का प्रताप भी कम नहीं माना जाता. देव महासु की बहन कहलाने वाली चिंडी माता के स्नान के लिए इसी तालाब से पानी लिया जाता है.
His Grace ‘The Ghuri’- पहाड़ी देवता कोई मूर्तियों में मुस्कुराते भगवान नहीं होते. आस्था ने उन्हें अलग-अलग चरित्र दिए हैं जो हमेशा ईश्वर के लिए बनाए मानकों पर फिट बैठें ज़रूरी नहीं. ये इंसानों को उनसे ज़्यादा करीब होने का ऐहसास देता है. राजसी व्यवहार उनकी कई मानवीय कमज़ोरियों में एक है. इसलिए उनके अपने दरबान होते हैं जिनके संदेश-माध्यम (गूर) भी ज़्यादातर निचली जातियों के ही होते हैं. घूरी महादेव के सेवकों में एक हैं. पॉप-ज्ञान का सहारा लूं तो अघोरी का अपभ्रंश भी हो सकता है. आप इस मूर्ति की केश सज्जा, गहनों और आंखों में एक कबीलाई, असुर या ध्यान योगी, तीनों में जिसकी चाहें उसकी शक्ल देख सकते हैं. रक्त रंजित अधरों को छोड़ दें तो कुछ-कुछ बौद्ध गुरू पद्मसंभव जैसी लगती है.
चिंडी मंदिर का दरवाज़ा- मंदिर में लकड़ी की ये नक्काशी कुछ साल पहले कुल्लू के कारीगरों का कमाल है. दरवाज़े पर लगा मुंड आपको पुराने अंग्रेज़ी ड्राइंग रूम की याद दिला सकता है. आप इसे परंपरा में गहरे तक बसी बलि प्रथा की अवचेतन अभिव्यक्ति के तौर पर भी देख सकते हैं. कौन कहता है अब पहले जैसे कारीगर नहीं होते!
माहूंनाग के मंदिर का दरवाज़ा- पुराने मंदिरों के वास्तुकार लोकेशन चुनने के महारथी कहला सकते हैं. पहाड़ी मंदिर अक्सर ऐसी जगह पर होते हैं जहां कुदरत की खूबसूरती सबसे ज़्यादा निखार पर होती है. माहूंनाग मंदिर भी इसी श्रेणी में जगह रखता है. जबसे जगह-जगह माहूंनाग मंदिर बनने लगे, तबसे ये जगह ‘मूल माहूंनाग’ मंदिर हो गई है. देवताओं के लिए ना सही, इंसानों के लिए आज के दौर में ब्रैंडिंग ज़रूरी है. माहूंनाग करसोग के सबसे प्रतापी माने जाने वाले ही नहीं, धनी देवताओं में भी एक है. चांदी का ये दरवाज़ा इसकी मिसाल है.
जहल देवता- प्रचंड छवि के देवता, वैसे कई जगह इनके अपने मंदिर भी हैं लेकिन यहां माहूंनाग की सेवा में तैनात हैं.
पहाड़ी योद्धा- महादेव मंदिर में मौजूद एक और मूर्ति. क्या ऐसे दिखते होंगे पहाड़ी पूर्वजों के योद्धा? हल्की, छोटी ढाल लेकिन मोटी तलवार. बड़े कुंडलो पर ग़ौर करें. क्या पहाड़ी टोपी उनके लिए सिर के कवच का भी काम करती होगी? ये योद्धा है लेकिन दिखने में भीषण नहीं है. हालांकि ये समझना मुश्किल है कि पहाड़ों में भी कोई सिर्फ आधा तन ढककर युद्ध कर सकता होगा?
महादेव मंदिर, गांव बिठरी- सादगी हर कला का चरम रही है. सौंदर्य का सर्वोच्च शिखर. वास्तु कला में इसी का एक नमूना. ये गांव शिकारी के पहाड़ों की तलहटी में बसा है. बड़े-बूढ़े कहते हैं मंदिर कभी बाढ़ में बहकर शिकारी के पास से बहकर यहां आया था जिसे गांव के लोगों ने संजोया. उनके पास ‘नोआ की बाढ़’ का अपना वर्ज़न है! कुछ ही जातियों को मंदिर के भीतर जाने का हक है बाकियों के निचले खेत से ही दर्शन करने होते हैं. मंदिर के भीतर एक छोटे पत्थरनुमा शिवलिंग के अलावा कुछ नहीं है.
बड़े भाई से मिलने चले महादेव- इस यात्रा में वो पहला मोड़ जहां से बड़े भाई देव महासु का मंदिर नज़र आता है, वहां महादेव का रथ नमन करने को रुकता है. रिश्तों में मानवीय मोह देवताओं की एक और मानवीय प्रवृत्ति है. जब दोनों भाइयों के रथ इस अतिरेक में मिलते हैं मानों सदियों बाद मिले हों.
दैवीय ‘छत्र’छाया- इस पूरे दैवीय उपक्रम में ऊंची जातियों को महत्ता मिलती है, बजाने वालों के हिस्से कम से कम दाद तो आती है. लेकिन देव सवारी के राजसी ठाठ में इन छत्रों को भी उठाना होता है. लोग इस काम को बिना शिकायत करते हैं.
पहाड़ी ‘स्फिंक्स’?- आप तस्वीर के शीर्षक को अतिश्योक्ति मान सकते हैं. लेकिन यहां भी सिर मानवीय है और धड़ पशु का. ग्रीस के स्फिंक्स की मुद्रा आंखों में विजय गौरव की चमक से भरे सम्राट सी लगती है लेकिन अपना वाला भक्ति में नत नमन है.
माहूंनाग मंदिर की धूनी- कहा जाता है कि ये धूनी कई हज़ार सालों से अखंड जल रही है. इस बात का ख़ास ख्याल रखा जाता है कि इस कुंड में आग पूरी तरह कभी ना बुझे.
चिंडी मंदिर- मिथक के मुताबिक एक शख्स को सपने के बाद जो जगह मिली उसमें चींटियों का बना घेरा पाया गया था. उसी घेरे के मुताबिक मंदिर का मूला तामील हुआ था. लोग इसे देव महासु की बहन मानते हैं और उनके मंदिर के ठीक सामने की पहाड़ी पर ये मंदिर है. माता को कौमार्य प्रिय है और मिथक में उसे बरकरार रखा गया है. चिंडी माता का गूर याचकों को पीठ दिखाकर मुखातिब होता है, कहा जाता है मां कुंवारी होने के कारण किसी को शक्ल नहीं दिखाती. न्योते पर एक गांव (जिसे एक किवंदती के मुताबिक उसके मायके का दर्जा हासिल है) को छोड़कर किसी के यहां रात को नहीं रुकती. लोग मानते हैं कि अपने मेले में जब नृत्य करती है तो देव महासु देवता के मंदिर वाला पहाड़ धुंध में ढक जाता है. ऐसा कई बार मैंने भी होते देखा है हालांकि पहाड़ों में धुंध कोई अप्रत्याशित घटना नहीं है. कभी-कभी मंदिर की इमारत से दोपहर या शाम की गाढ़ी खामोशी को तोड़ती छनछनाहट कोई मिथक नहीं है. इसमें लकड़ी की झालरें हवा से छूते ही गुनगुनाने लगती हैं. मंदिर की काष्ठकारी अव्वल दर्जे की है. कुछ ऐसी जो हज़ारों साल बाद अवशेष की शक्ल में भी इस युग के इंसानों के हुनर की गवाही देंगीं.

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वन्य जीव अंगों की कथित तस्करी के मामले में देवता के गुर ने दी चेतावनी

कुल्लू।। यह घटना सुनने में अजीब जरूर लग सकती है, मगर पूरे इलाके में चर्चा के केंद्र में बनी हुई है। दरअसल पिछले दिनों कुल्लू में पुलिस ने शेर सिंह नाम के शख्स को कथित तौर पर तेंदुए की खाल, मोनाल और जूजुराना जैसे जीवों की कलगियों और पंखों के साथ पकड़ा था। शाकटी इलाके के निवासी शेर सिंह को पुलिस ने चार दिन के रिमांड पर लिया ताकि पूछताछ कर सके और अन्य चीजों को बरामद कर सके।

पुलिस की टीम शेर सिंह को साथ लेकर शाकटी पहुंची और आरोपी के घर की तलाशी ली। मगर पुलिस को ऐसी कोई चीज हाथ नहीं लगी, जैसी चीजें उसने पहले शेर सिंह से बरामद की थीं।

इससे पुलिस को लगा कि हो सकता है कि दूसरे लोगों ने बाकी चीजों को छिपा दिया हो या ठिकाने लगा दिया हो, क्योंकि शेर सिंह के पकड़े जाने से स्पष्ट ही था कि पुलिस छानबीन के लिए उसके घर पर भी तलाशी ले सकती है। मगर इसके बाद अचानक देव पंरपरा वाले एंगल की इस केस में एंट्री होती है।

आरोपी शेर सिंह

खबर है कि जिस समय 12 किलोमीटर पैदल सफर तय करके पुलिस टीम शेर सिंह के साथ शाकटी जा रही थी, रास्ते में उसे कई भेड़-बकरियां मरी हुई दिखीं। खून से लथपथ।

पुलिस की टीम हैरान-परेशान आगे बढ़ी। गांव पहुंचने पर लोगों ने पुलिस टीम को बताया कि ये बकरियां बाघ के हमले की शिकार हुई हैं। शायद वे तेंदुआ (Leopard) कहना चाह रहे हों क्योंकि यहां बाघ (Tiger) नहीं पाए जाते। बहरहाल, आम तौर पर देखा गया है कि तेंदुआ सिर्फ भूख लगने पर शिकार करता है और एक शिकार हाथ न आने पर दो-तीन अन्य जानवरों पर हमला कर सकता है। मगर 80 भेड़-बकरियों को मारना समझ से परे था।

प्रतीकात्मक तस्वीर

गांव में छानबीन के बाद पुलिस टीम यहां पर देव ब्रह्मा के मंदिर भी गया। यहां पर देवता के गुर (Shaman, मान्यताओं के मुताबिक देवता अपने गुर के माध्यम से बात करते हैं) ने कहा कि पुलिस ने जितनी भी कलगियां आदि अपने कब्जे में ली है, उसे तुरंत लौटाए।

ऐसी जानकारी सामने आई है कि देवता ने चेतावनी दी है कि अगर ये कलगियां नहीं लौटाई गईं तो नतीजे ठीक नहीं होंगे। गांववालों में डर था कि देवता नाराज हैं और इसी कारण इतनी भेड़-बकरियां उनके गुस्से के कारण मारी गई हैं। उन्हें किसी और अनहोनी का भी अंदेशा है।

बहरहाल, देवता ने कथित तौर पर गुर के माध्यम से ये कलगियां लौटाने का आदेश इसलिए दिया क्योंकि शेर सिंह नाम के जिस शख्स को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, वह देवता का भंडारी है यानी देवता की चीजों के भंडार की देख-रेख करने वाला।

बरामद चीज़ें

लोगों का कहना है कि ये सब चीजें को शेर सिंह के पास मिली हैं, दरअसल वे कालांतर में श्रद्धालुओं की तरफ से देवता को चढ़ाई गई थीं।

अब शेर सिंह को भुंतर वापस लाया गया है। इस बीच डीएसपी हेडक्वॉर्टर कुल्लू आशीष शर्मा ने मीडिया से कहा है कि शाकटी गांव में आरोपी के घर जाकर दूसरी बार हुई तलाशी में कोई चीज नहीं मिली है जो केस में जुड़ सके। उन्होंने ये भी कहा कि साथ गई टीम ने देवता की ओर से गुर के माध्यम से दी गई चेतावनी की भी जानकारी दी गई है।

तो इस तरह से यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। यह आस्था बनाम कानून के टकराव का मामला भी बनता जा रहा है। साथ ही पुलिस असमंजस में है कि आखिर अब किया क्या जाए।

13 साल की बेटी से बलात्कार के आरोप में पिता गिरफ्तार

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के नूरपुर थानाक्षेत्र में आने वाले एक गांव में 13 साल की बच्ची के साथ पिता द्वारा कथित बलात्कार का मामला सामने आया है। कंडवाल पुलिस चौकी में इस संबंध शिकायत दर्ज करवाई गई, जिसके बाद संबंधित धाराओं में आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पंचायत में आयोजित कानूनी ज्ञान बढ़ाने के लिए शिविर के दौरान एक वॉर्ड सदस्य ने इस मामले को उठाया। वहां आए न्यायाधीश ने तुरंत इस वॉर्ड को मामला दर्ज करवाने के लिए कहा।

पुलिस का कहना है कि वॉर्ड सदस्य की ओर से शिकायत दी गई है कि पहले लड़की ने उन्हें बताया था कि मेरे पिता ने मेरे साथ मारपीट की है। मगर वॉर्ड सदस्य के मुताबिक बाद में लड़की की मां ने पंचायत में कानून संबंधित जागरूकता बढ़ाने वाेल शिविर के दौरान उनसे कहा कि दो महीने पहले उसके पति ने बेटी के साथ गलत काम किया था और धमकी दी थी।

वॉर्ड मेंबर की शिकायत के आधार पर पॉक्सो ऐक्ट, आईपीसी की धारा 376 और 506 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी ओंकार सिंह ने मीडिया को बताया है कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और सोमवार को उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। वहीं पीड़िता का मेडिकल भी करवाया गया है।

हिमाचल से किया वह वादा, जिसे नरेंद्र मोदी पूरा नहीं कर पाए

इन हिमाचल डेस्क।। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस समय 2014 लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार कर रहे थे, उन्होंने हिमाचल प्रदेश में की गई रैलियों में केंद्र सरकार को कई बातों के लिए कोसा था और हिमाचल की अनदेखी करने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि मां-बेटे की सरकार (केंद्र की यूपीए सरकार) और पति-पत्नी की सरकार (हिमाचल में वीरभद्र सिंह की सरकार) के कारण हिमाचल पिछड़ गया है।

उस समय नरेंद्र मोदी ने कई उदाहरण दिए थे कि कैसे वह हिमाचल को लेकर क्या सोचते हैं और अगर भारतीय जनता पार्टी को मौका दिया गया तो वह क्या-क्या कर दिखाएंगे। वैसे तो इस तरह के वादों में से अधिकतर वादे वह चार साल पूरे हो जाने के बाद भी पूरे नहीं कर पाए हैं, मगर एक प्रमुख वादा आए दिन चर्चा में आता रहता है। वह है हिमाचल प्रदेश में हादसों को टालने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रेल नेटवर्क को बढ़ावा देना।

17 फरवरी 2014 को सुजानपुर में प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी ने कहा था- “भाइयो-बहनो, दुनिया के हर देश में पहाड़ों में टूरिजम को विकसित करने के लिए उन देशों ने इस बात को प्राथमिकता दी है कि रेल कनेक्टिविटी बनाई जाए। टूरिजम को डेवलेप करना है औक पहाड़ी इलाके में डेवेलप करना है तो सारी दुनिया ने इस मॉडल को स्वीकार किया है।

एक हम ही अकेले ऐसे हैं जो इस प्रकार का मजबूत नेटवर्क नहीं बनाते, उसके कारण उत्तराखंड जैसे हादसे होते हैं। उसी कारण आए दिन हमारे हिमाचल में बसें गिर जाना, 25-30 लोगों का मर जाना आए दिन होता है। हिमाचल सरकार का ज्यादातर काम तो इसी में चला जाता है। इतना छोटा सा राज्य, मगर इसका ज्यादातर समय मरने वालों की सेवा में चला जाता है, यह मैंने खुद अपनी आंखों से देखा है।

क्या भाइयो-बहनों, एक अच्छा रेल नेटवर्क हिमाचल को मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए? उसके लिए प्रयास होने चाहिए कि नहीं होने चाहिए? उसको प्रायोरिटी देनी चाहिए कि नहीं देनी चाहिए?”

भाषण नीचे देखें:

बहरहाल, हिमाचल प्रदेश में रेल नेटवर्क की हकीकत यह है कि अभी तक बिलासपुर-मनाली-लेह लाइन के सर्वे ही हुए हैं। अप्रैल 2017 में सरकार ने कहा था कि फाइनल लोकेशन सर्वे (एफएसएल) 2020 तक पूरा होगा। चार साल बीत जाने के बावजूद मंडी और कांगड़ा के सांसद पठानकोर-जोगिंदर नगर रेलवे ट्रैक को ब्रॉडगेज करने के दावे करते रहे हैं मगर इस दिशा में असल में क्या हुआ है, कोई साफ नहीं बता पा रहा।

यानी रेलवे का वादा सिर्फ वादा ही साबित हुआ है। बिलासपुर-मनाली-लेह लाइन सामरिक महत्व की रेल लाइन होगी, मगर उसके लिए भी कछुआ चाल से काम हो रहा है। फिर नरेंद्र मोदी ने प्रचार के दौरान पर्यटन को विकसित करने के लिए और हादसों से लोगों को बचाने के लिए जिस नेटवर्क का वादा किया था, वह अधूरा है। नेटवर्क यानी आपस में कई जगहों को जोड़ने वाली लाइनें। प्रदेश के अंदर नेटवर्क स्थापित करने दिशा में कोई भी सर्वे नहीं हुआ है, यहां तक कि इसकी तो कोई बात ही नहीं कर रहा।

अभी तो प्रदेश के कुछ हिस्सों को बाकी देश के नेटवर्क से जोड़ने की बात की जा रही है। चलिए, अगर रेलवे नेटवर्क बनाना आसान नहीं है तो हिमाचल के लिए सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए ही अच्छा खासा बजट आना चाहिए और तीव्र गति से काम होना चाहिए। लोकतंत्र में सरकारें जब पांच साल के लिए चुनी जाती हैं तो उन्हें बेशक लंबी योजना बनानी चाहिए मगर पांच साल के अंदर ही काम करके दिखाना होता है या काम की शुरुआत ही करनी होगी। मगर अफसोस, करोड़ों रुपये के प्रॉजेक्ट्स का एलान भले ही हिमाचल के लिए केंद्र से हुआ हो, जमीन पर हालात बेहतर नहीं दिखते।

प्रधानमंत्री ने और भी वादे हिमाचल प्रदेश की चार लोकसभा सीटों पर प्रचार के दौरान किए थे, जो अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं। चुनाव के दौरान हर एक वादे का रिऐलिटी चेक करके बताया जाएगा कि ‘हिमाचल के लोगों का मुझपर बड़ा उपकार है है’ कहने वाले नरेंद्र मोदी इस उपकार को चुका पाए हैं या नहीं।

थाने पहुंचा पिटाई से तंग 11 साल का बच्चा, पिता ने मांगी माफी

ऊना।। हिमाचल प्रदेश के ऊना में कथित तौर पर अपने पिता की बदसलूकी से तंग आकर एक बच्चे ने थाने में शिकायत कर दी। बच्चे ने कहा कि पिता शराब पीकर मेरी और बहन की अक्सर बेरहमी से पिटाई करते हैं और गालियां भी देते हैं।

बच्चा वर्दी में ही थाने पहुंच गया था। यह मामला अंब के एक गांव का है। पुलिस ने बच्चे की शिकायत के आधार पर बच्चे के पिता और पंचायत प्रधान को थाने बुलाया। पुलिस के सामने पिता ने वादा कि कि अब कभी बच्चों की पिटाई नहीं करूंगा।

अंब के डीएसपी मनोज जम्वाल ने मीडिया को जानकारी दी है कि उस शख्स के खिलाफ इस शर्त पर कार्रवाई नहीं की  गई है कि वह कभी बच्चों से दुर्व्यवहार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि बच्चे ने भी इस बात के लिए सहमति दे दी थी।

पुलिस का कहना है इस मामले को गंभीरता से लिया गया है और आगे भी शिकायत करने वाले बच्चे के पिता के व्यवहार पर नजर रखी जाएगी।

विधायक के भाई को अजस्ट करने के लिए किए गए विकलांग के तबादले पर रोक

मंडी।। हिमाचल प्रदेश के मंडी ज़िले में एक विकलांग इंस्ट्रक्टर के तबादले पर हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने रोक लगा दी है। बताया जा रहा है कि बीजेपी के विधायक के भाई को अजस्ट करने के इरादे से विकलांग इंस्ट्रक्टर का तबादला सुंदरनगर से संधोल कर दिया गया था।

सुंदरनगर आईटीआई में अनुदेशक मोहम्मद याकूब ने अपने वकील के माध्यम के याचिका दाखिल की थी कि मैं विकलांग हूं और मुझे यहां से संधोल के लिए ट्रांसफर कर दिया गया है। याचिका में कहा गया था कि विधायक ने मेरी जगह अपने भाई को अजस्ट किया है।

ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष वीके शर्मा की बेंच में इसकी सुनवाई हुई। ट्रिब्यूनल ने मोहम्मद याकूब की दलीलों को सही माना और उनके तबादले पर रोक लगा दी। इसके साथ ही डायरेक्टर टेक्निकल एजुकेशन को आदेश दिए हैं कि तुरंत इस संबंध में फैसला किया जाए।

मुख्यमंत्री जयराम ने दिखाए कड़े तेवर, बड़ा प्रशासनिक फेरबदल

शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। ऊंचे पदों पर बैठे बड़े अधिकारियों मे अहम फेरबदल हुआ है। 18 वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के महकमों में बदलाव दिया है, जिनमें सबके चौंकाने वाला फेरबदल है श्रीकांत बाल्दी को मुख्यमंत्री का प्रिंसिपल सेक्रेटरी बनाया जाना। अब तक मनीषा नंदा प्रिंसिपल सेक्रेटरी टु सीएम थीं।

यह फेरबदल बड़ा संकेत माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले सियासी हलकों में चर्चा थी कि अहम पदों पर मुख्यमंत्री की अपनी पसंद के अधिकारी न होने के कारण उनकी सरकार को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मगर जानकारों का कहना है कि इस आदेश के साथ ही जयराम ने संकेत दे दिए हैं कि सरकार पर उनकी पूरी पकड़ है और वह बिना किसी के प्रभाव में आए आगे भी इस तरह के कड़े फैसले ले सकते हैं।

यह बड़ा प्रशासनिक फेरबदल न सिर्फ अधिकारियों के बीच बल्कि बीजेपी के विभिन्न खेमों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। माना जा रहा है कि यह इस कदम के साथ जयराम ने साफ संदेश देने की कोशिश की है कि प्रदेश सरकार उन्हीं के हिसाब से चलेगी। जानकारों का कहना है कि इससे यह धारणा भी टूटी है कि सरकार दिल्ली या फिर पूर्व दिग्गजों के प्रभाव में काम कर रही है।

इस अप्रत्याशित कदम के बाद अंदाज़ा लगाया जाने लगा है कि आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री और बड़े बदलाव कर सकते हैं। इनमें वे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी बदले जा सकते हैं, जिन्हें किसी विशेष खेमे से संबंधित माना जाता है। यह बात भी साफ हो गई है कि आने वाले समय में चेयरमैनों आदि की नियुक्ति में भी किसी और की नहीं, मुख्यमंत्री की ही चलेगी।

बहरहाल, जिन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के विभाग बदले हैं, उनकी पूरी लिस्ट नीचे पढ़ें:

 

कोई मामूली सी चीज नहीं, हमारी सांस्कृतिक पहचान है चूल्हा

दीपक शर्मा।। ठेठ पहाड़ी घरों में मेहमानों को सीधे ड्राइंग रूमों में नहीं हांका जाता। पहला स्वागत रसोई में चूल्हे के ताप से ही होता है। फिर गुनगुने पानी से पैर धुलाए जाते हैं। बारहों महीने की सर्दी और मीलों लंबी पहाड़ी पगडंडियों का पैदल सफर; ज़ाहिर है प्रदर्शनीयता पर प्रैक्टिकेलिटी भारी होती है। लंबे हाल-चाल के बाद स्निग्ध आंच में गंवई गॉसिप घंटों सिंकती है।

इसी चूल्हे से मोड़ी (भुने हुए गेहूं के दाने), बिज्या (भांग के बीजों से बना नमक) और राख में दबाकर भूने गए आलू जैसी अनूठी खाने की चीज़ें निकलती रहती हैं जो दुख-सुख, शिकवे-सनेहों के ज़ायके को और भी गाढ़ा कर देती हैं। हमारा राष्ट्रीय पेय चाय तो खैर होती ही है। चूल्हे के ही इर्द-गिर्द खाना लगता है। जब तक लकड़ियां सुलगती हैं, गप्पबाज़ी का सिलसिला चलता रहता है। उसके बाद कोयलों को अंगीठी में डालकर अपने-अपने बिस्तरों का रुख़ किया जाता है।

Image: Deepak Sharma/FB

अगर आपके बचपन पर किसी पहाड़ी गांव की छाप है तो शायद आपके लिए चूल्हे में जलती चीड़ की लकड़ियों की सौंधी गंध को भुलाना आसान नहीं होगा। ख़ासकर बर्फबारी का मौसम जब लगातार कई दिनों तक आप सिर्फ अपने घर की खिड़कियों से बाहर झांकने के अलावा कुछ नहीं कर सकते। कभी बादलों से ज़र्द आसमान में नीली पौ फटने की आस लिए ताकते और कभी ज़मीन में कितने इंच बर्फ जमी है, इसका अंदाज़ा लगाते हुए।

एक वक्त था जब आबादी और विकास के करीब माने जाने वाले इलाकों में भी बर्फ के बाद कम अज़ कम महीने भर के लिए बिजली का गुल होना तय होता था। ज़्यादा ऊंची जगहों पर ये अवधि 4-5 महीने तक होती थी। बिजली के खंभे इतने मज़बूत हो ही नहीं पाते थे कि एक सीज़न की बर्फबारी झेल पाएं। इन दिनों में छह-सात बजे ही रात का खाना मजबूरी ही होती थी। इसके बाद चूल्हे की आंच तापते हुए गपशप ही मनोरंजन का इकलौता ज़रिया हुआ करती थी। लेकिन क्या मनोरंजन होता था वो!

Image: Shipra Khanna/YouTube (Video is at bottom)

ऐसी ही दोपहरों और शामों में बर्फ से सफेद मंज़र की नि:शब्दता को बाहर पंछियों के झुंड़ों की हलचल तोड़ती थी और घर की रसोई में चूल्हे की आग तापते दादाजी की तिलिस्म से भरी हुई कहानियां। वे अक्सर घर के बाकी लोगों के सो जाने के बाद भी वहीं बैठे गुनगुनाया करते थे। जब तक कि लकड़ियों से कुरेदने के बाद राख़ में सेंकने लायक अंगार बाकी हों।

मेरे जो दोस्त पहाड़ से हैं वो इस ‘नॉस्टेलजिया’ को शायद इसलिए ना समझें क्योंकि वो इस अनुभव के बेहद करीब हैं और जो पहाड़ से नहीं हैं उन्होंने इसे कभी जिया नहीं। लेकिन मैं इन स्मृतियों को छोड़ना नहीं चाहता। मोह ही कह लीजिए। अच्छी बात ये है कि हमारे यहां अब भी बहुत सारी चीज़ों पर आधुनिकता का रोगन नहीं चढ़ पाया है। कुछ मामलों में परंपराओं के टूटने का भय और कुछ मामलों में ज़रूरत का तकाज़ा।

Talks over chulha
Image courtesy: Jubin Mehta/YourStory

संपन्न घरों में आपको डिजाइनर किचन मिल जाएंगे लेकिन चूल्हे की एक अलग रसोई भी होगी। उज्ज्वला जैसी योजनाओं से काफी पहले ही ज़्यादातर रसोई घरों में गैस सिलिंडर पहुंच चुके थे लेकिन चूल्हे टूटे नहीं। टूटने भी नहीं चाहिएं। घर के चार लोग बैठे तो एक ही कमरे में हों लेकिन एक साथ नहीं बल्कि चार अलग-अलग मोबाइल फोन के साथ। चूल्हे ये सुनिश्चित करने का एक ज़रिया हैं कि ऐसे दुर्दिन हमारे गांवों को कभी ना देखने पड़ें। आमीन।

(लेखक हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से हैं और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर लिखते रहते हैं।)

बलात्कार के बाद गर्भवती हुई 13 वर्षीय छात्रा, आरोपी फरार

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, मंडी।। मंडी जिले में 13 वर्षीय छात्रा कथित तौर पर एक युवक द्वारा बलात्कार के बाद गर्भवती हो गई है। इस बात का पता तब चला जब जब बच्ची के करीबी रिश्तेदार उसे अस्पातल लेकर आए थे। संदिग्ध फरार चल रहा है।

जानकारी मिली है कि इस बच्ची की मां नहीं है और पिता ने दूसरी शादी कर ली है। बच्ची अपने दादा-दादी के साथ रहती है। बच्ची का कहना है कि जनवरी महीने में स्कूल से लौटते वक्त इलाके के ही एक शख्स ने उसके साथ बलात्कार किया था।

बच्ची का कहना है कि डर के कारण वह इस बात का जिक्र किसी से नहीं कर पाई। मेडिकल चेकअप में ही पता चल पाया कि वह प्रेगनेंट है।

पुलिस ने बयान के आधार पर मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। संदिग्ध युवक फरार चल रहा है और उसे पकड़ने के लिए पुलिस की टीमें भी रवाना हो गई हैं।

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एसपी मंडी गुरदेव शर्मा ने मामले की पुष्टि की है। उनका कहना है कि जल्द ही संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)