धारा 118: हिमाचल में जमीन खरीदने में रही है बाबों की मौज

इन हिमाचल डेस्क।। धारा 118 कहती है कि अन्य राज्य का व्यक्ति हिमाचल में जमीन नहीं खरीद सकता और साथ ही गैर-कृषक हिमाचली (जिनके पूर्वज भी हिमाचल में ही पैदा हुए) को जमीन का मालिकाना हक लेने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। लेकिन बाहरी राज्यों के बाबा अगर हिमाचल में आश्रम आदि बनाना चाहे तो उसकी मौज है और हर सरकार में ऐसा होता रहा है।

इन्हें धारा 118 के तहत जमीन खरीदने की इजाजत सिर्फ सरकारें दे सकती हैं क्योंकि नियमों के तहत आवेदन तो कोई भी पात्र व्यक्ति कर सकता है मगर उन्हें जमीन खरीदने की इजाजत देने का अधिकार सिर्फ सरकार के पास होता है। अगस्त 2017 तक ही हिमाचल में बाबों और धार्मिक ट्रस्टों के नाम जमीन दर्ज करने के 1783 मामले थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैसे रेवड़ियां बांटी जाती हैं और धारा 118 के नाम पर लोगों को गुमराह किया जाता है।

पढ़ें: वापस लिया गया 118 के तहत आवेदन करने के नियम में संधोशन

हर महीने दो से तीन धार्मिक ट्रस्टों को जमीन
सरकार किसी की भी हो, बाबों को तुरंत धारा 118 के तहत छूट मिल जाती है और इसमें पिछले साल दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराया गया गुरमीत राम रहीम भी शामिल है। सरकार ने इसके डेरे को पालमपुर के चचियां में जमीन लीज पर दी है। ऐसे ही बाबा रामदेव को साधुपुल में जमीन मिली है। और तो और सोलन के विवादित बाबा अमरदेव पर तो पिछली कांग्रेस सरकार गजब की मेहरबान रही थी।

बाबों की गर्मियों की ऐशगाह हिमाचल
आप सोच रहे हैं कि बाबा आखिर हिमाचल में क्यों जमीन खरीदते हैं। दरअसल धर्म के नाम पर बहुत से बाबा कारोबार करते हैं और जब देश में गर्मी पड़ रही होती है, वे अपने सारे सत्संग हिमाचल वाले डेरों में करने लगते हैं।

ऐसे खरीदते हैं जमीन
ये बाबा या डेरे या ट्रस्ट किसी हिमाचली कृषक के नाम पर हिमाचल में ही ट्रस्ट बनाते हैं और फिर आराम से जमीन को ट्रस्ट के नाम कर लेते हैं। कई बार तो सरकारी जमीन भी इन्हें दी जाती है।

वीरभद्र सरकार के दौरान इन्हें मिली जमीन
2015 से लेकर 2017 तक वीरभद्र सरकार के दौरान इन धार्मिक ट्रस्टों को धारा 118 के तहत जमीन की अनुमति मिली।

नाम                                        तिथि                     स्थान
पदम संभाव गोंपा कमेटी भुंतर                1-1-2015          कुल्लू
हरियाणा राधा स्वामी सत्संग एसोसिएशन    09-03-2015      नगरोटा बगवां
भगवान श्री लक्ष्मी नारायण धाम ट्रस्ट        31-03-2015       बल्ह मंडी
चैतन्य ट्रस्ट सोनीपत हरियाणा               28-04-2015
ओशो समर्थक  जीवन ट्रस्ट जींद            15-05-2015
रुहानी सत्संग प्रेम समाज                    05-12-2016      ऊना
वैष्णों भजन मंडली ट्रस्ट                     22-01-2016       ऊना
धाकपो शेद्रूप  मोनेस्ट्री                      14-03-2017       कुल्लू
(स्रोत: जागरण)

और फिर बेचने की भी छूट
ऐसा नहीं कि इन संगठनों को धर्मार्थ जमीन मिल गई। जाते-जाते वीरभद्र सरकार ने ऐसा फैसला किया था कि इन्हें इस जमीन को बेचने का भी अधिकार दे दिया था। पहले सरकार ने धर्मशाला के चुनिंदा चाय बागान मालिकों को लैंड सीलिंग ऐक्ट में छूट देकर जमीन बेचने की इजाजत दी थी, फिर धार्मिक संस्थाओं को जमीन बेचने की सशर्त इजाजत दे दी। इसके लिए हिमाचल प्रदेश कैबिनेट ने सीलिंग ऑन लैंड होल्डिंग अधिनियम में संधोशन किया था।

इस संशोधन से धार्मिक संस्थाओं और डेरों को अपनी जमीन बेचने, गिरवी रखने या किसी को तोहफे में देने की छूट मिलती है। शर्त यह रखी गई थी जिसे जमीन मिले, वह धारा 118 के तहत बताई गई परिभाषा में आने वाला किसान हो। कैबिनेट में आने से पहले दो बार यह मामला पहले ही खारिज हो चुका था। अधिकारियों को भी इस बात को लेकर आपत्ति थी। इस संबंध में हिमाचल दस्तक अखबार ने दावा किया था कि सरकार ने जाते-जाते राधास्वामी सत्संग ब्यास के लिए लैंड सीलिंग ऐक्ट बदलने की मंजूरी दी है। अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा था कि यह डेरा कांगड़ा में अपनी जमीन को फाइव स्टार रिजॉर्ट बनाने के लिए बेचना चाहता है और इसके लिए कई महीनों से कोशिश चल रही थी। इस खबर को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

हिमाचल में इन डेरों की हैं जमीनें
ऐसा नहीं है कि कांग्रेस के कार्यकाल में ही बाबों की मौज हुई, बीजेपी के कार्यकाल में भी यह खेल चलता रहा। नीचे देखें, हिमाचल में किन-किन धार्मिक संगठनों की जमीनें हैं-

नाम                                                  स्थान
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम       पालमपुर (चचियां)
सुधांशु जी महाराज                                   कुल्लू
बाबा अमरदेव                                        सोलन
बाबा रामेदव                                         साधुपुल
राधा स्वामी सत्संग                                   प्रदेश में लगभग सभी ब्लाक स्तर पर
सतपाल जी महाराज                                 परमहंस संजौली
आसाराम                                             नादौन के कलूर
निरंकारी भवन                                        प्रदेश के सभी जिलों में
श्रीश्री रवि शंकर                                      प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर
(स्रोत: जागरण)

धारा 118 के तहत बाबाओं को छूट देने में राजनेताओं का क्या हित है, यह जांच का विषय है।

धारा 118 क्या है?
हिमाचल प्रदेश में भूमि मुजारा कानून की धारा 118 के तहत कोई भी बाहरी व्यक्ति, गैरकृषक व्यक्ति जिसके पास हिमाचल का राशनकार्ड ही क्यों न हो, हिमाचल में जमीन नहीं खरीद सकता है। हिमाचली स्थायी प्रमाणपत्र रखने वाले भी सरकार की अनुमति से शहरों में ही आवास बनाने या कारोबार के लिए जमीन खरीद सकते हैं। इसे विस्तार से समझने के लिए नीचे दिए गए दो लिंक्स पर क्लिक करके पढ़ें।

अगर आप कृषक नहीं हैं तो हिमाचल में जमीन हीं खरीद सकते

 

आसान भाषा में समझें, हिमाचल की धारा 118 आखिर क्या है

‘डुगे नालुए’ वाले सिंगर का नया गाना ‘ढाटू वालिए’ देखा आपने?

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश के गानों के इतिहास में यूट्यूब पर कम वक्त में सबसे ज्यादा देखे गए म्यूजिक वीडियो ‘डुगे नालुए’ के गायक विकी राजटा ने नया गाना पेश किया है। इस गाने को अगस्त के दूसरे सप्ताह में यूट्यूब पर अपलोड किया गया था और अब तक लगभग सवा चार लाख व्यूज़ आ चुके हैं।

Image: Songest

ढाटु वालिए ऐसा गाना रहा था जिसने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। हिमाचल प्रदेश में भले ही अलग-अलग बोलियां हैं मगर पूरे प्रदेश में शादियों और अन्य कार्यक्रमों में इस गाने को बजाया गया। हिमाचल की सीमाओं से बाहर अन्य प्रदेशों के लोगों को भी इस गाने ने आकर्षित किया। एक साल से भी कम समय में 1 करोड़ 10 लाख से ज्यादा व्यूज हो चुके हैं।

Image: Songest

बहरहाल, विकी का नया गाना ढाटू वालिए एक हरे-भरे मैदान में फिल्माया गया है। इसमें उनके साथ इंस्टाग्राम पर 80 हजार से ज्यादा फॉलोअर वाली रवीना ठाकुर नजर आ रही हैं। हालांकि ऐक्टिंग करते हुए वह सहज नहीं आ रही हैं मगर इससे वीडियो में मासूमियत का पुट आया है।

Image: Songest

बाकी गाना कैसा है, आप खुद देखें और कॉमेंट करके बताएं।

गाना सॉन्गेस्ट म्यूजिक के चैनल पर है। म्यूजिक डायरेक्टर हैं राजीव नेगी, बोल लिखे हैं प्रकाश नेगी ने। अगर आप सुपरहिट गाना डुगे नालुए सुनना चाहते हैं तो यह रहा-

बड़ा भंगाल हेलिकॉप्टर से पहुंचाया गया 387 क्विंटल अनाज

कांगड़ा।। कांगड़ा जिले के सुदूर इलाके बड़ा भंगाल में 387 क्विंटल से ज्यादा राशन पहुंचा है। कांगड़ा के उपायुक्त संदीप कुमार ने कहा है कि राशन को हेलिकॉप्टर के जरिए चंबा से बड़ा भंगाल ले जाया गया।

‘द ट्रिब्यून’ के मुताबिक संदीप ने कहा कि अब घाटी में रह रहे लोगों के पास पर्याप्त राशन है। डीसी ने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर हर दिन हालात पर नजर रख रहे थे।

संदीप कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को खच्चरों के रास्ते को भी जल्द बहाल करने के निर्देश दिए हैं ताकि स्थानीय लोगों को असुविधा न हो।

पिछले साल सरकार ने खच्चरों के जरिए घाटी में राशन भेजा था मगर इस साल भारी भूस्खलन और प्लाशक के पास पैदल पुल बह जाने के कारण यह रास्ता बंद हो गया था और बड़ा भंगाल में खाद्यान्न का भारी संकट पैदा हो गया था।

387-quintal foodgrain reaches Bara Bhangal
Image Credit: The Tribune

डीसी ने कहा कि हर साल मई या जून में खच्चरों के जरिए घाटी में अनाज और खाने-पीने की चीजें भेजी जाती हैं। यही वह समय है जब थमसार दर्रा खुलता है।

बैजनाथ के विधायक मुलख राज प्रेमी ने कहा कि राज्य सरकार ने बड़ा भंगाल के लिए 883.60 क्विंटल राशन मंजूर किया है और इसमें से 387 क्विंटल पहुंचाया जा चुका है जबकि बाकी को मौसम साफ होने के बाद भेजा जाएगा।

उन्होंने मामले का संज्ञान लेकर हेलिकॉप्टर का प्रबंध करने के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद अदा किया।

क्या हिमाचल सरकार ने धारा 118 में संशोधन किया है?

शिमला।। सोशल मीडिया पर कुछ समाचार पत्रों की कटिंग्स शेयर की जा रही है जिनमें दावा किया गया है कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने ‘मुजारियल एवं भू-सुधार अधिनियम-1972’ की ‘धारा-118’ में संशोधन किया है। कहा जा रहा है कि इसके तहत “प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत गैर हिमाचली अधिकारियों व कर्मचारियों को सरकार ने बड़ी राहत दी है” और स्पष्ट किया है कि “यदि कोई गैर हिमाचली अधिकारी एवं कर्मचारी किसी कारणवश स्वयं आवास योग्य भूमि लेने में असमर्थ है, तो वह अपने बच्चों के नाम से भी भूमि ले सकता है।”

नोट- यह खबर अपडेट हो चुकी है, ताजा खबर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर या फिर यहां पर क्लिक करें:

वापस लिया गया 118 के तहत आवेदन करने के नियम में संधोशन

मूल खबर का बाकी हिस्सा:
धारा 118 हिमाचल प्रदेश की जनता के लिए संवेदनशील विषय रहा है। हिमाचल प्रदेश टेनंसी ऐंड लैंड रिफॉर्म्स ऐक्ट 1972 में एक विशेष प्रावधान किया गया था ताकि हिमाचलियों के हित सुरक्षित रहें। इस ऐक्ट के 11वें अध्याय ‘कंट्रोल ऑन ट्रांसफर ऑफ लैंड’ में आने वाली धारा 118 के तहत ‘गैर-कृषकों को जमीन हस्तांतरित करने पर रोक’ है। सेक्शन 118 ऐसे किसी भी व्यक्ति को जमीन ट्रांसफर किए जाने पर प्रतिबंध लगाता है, जो हिमाचल प्रदेश में कृषक नहीं है। इसका मतलब है कि हिमाचल का गैर-कृषक आदमी भी जमीन नहीं खरीद सकता हिमाचल में।

मगर अभी जो समाचार सामने आया है, उसमें कहा गया है कि इस कानून में संशोधन किया गया है। हिमाचल दस्तक ने लिखा है, “राजस्व विभाग ने सभी उपायुक्तों और मंडलायुक्तों को क्लेरिफिकेशन जारी कर कहा है कि गैर हिमाचली अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बच्चे भी धारा 118 के तहत जमीन खरीदने के लिए पात्र होंगे। इन पर (बच्चों के लिए) 30 साल प्रदेश में काम करने का प्रमाण पत्र लेने की शर्त भी नहीं लगेगी। यह शर्त गैर हिमाचली कर्मचारियों के लिए वर्तमान में है। इस बारे में संयुक्त सचिव राजस्व राकेश मेहता की ओर से लिखित निर्देश जारी हुए हैं। इन निर्देशों के तहत गैर हिमाचली कर्मचारी जो राज्य में कार्यरत हैं, वे यहां आवास हेतु जमीन खरीदने के लिए पात्र हैं। इनके पात्र होने के कारण इनके बच्चे चाहे वो पुत्र हो या पुत्री, वो भी यहां भूमि खरीद के लिए पात्र हैं।”

हालांकि समाचार में आगे यह भी स्पष्ट किया गया है, “यह भूमि केवल आवास निर्माण के लिए मिलेगी। यदि संबंधित कर्मचारी के बच्चे प्रदेश से बाहर काम कर रहे हैं, लेकिन रहने के लिए हिमाचल में ही आवास बनाना चाहते हैं, तो भी कोई आपत्ति नहीं होगी। इस मामले में 30 वर्ष के प्रदेश में काम करने का प्रमाण पत्र भी अपेक्षित नहीं होगा। यह गैर हिमाचली परिवारों के लिए बड़ी राहत है, जो यहां घर तो बनाना चाहते हैं, लेकिन आवेदन जिला स्तर पर ही खारिज हो रहे थे। हालांकि हिमाचल मुजारियत एवं भू-सुधार अधिनियम 1972 की धारा 118 के तहत इन्हें अनुमति लेनी होगी, जो सरकार से ही मिलेगी।”

इसी तरह दिव्य हिमाचल ने भी लिखा है, “प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग की ओर से यह अधिसूचना 25 जुलाई, 2018 को जारी की गई है, लेकिन इसके बाद विभाग की ओर से अगस्त माह में एक अन्य अधिसूचना जारी की गई। इसमें स्पष्ट किया गया कि कोई भी गैर हिमाचली अधिकारी एवं कर्मचारी इसे धारा-118 में छूट न समझें, क्योंकि ऐसे सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को धारा-118 के तहत ही अनुमति लेने के अप्लाई करना होगा।”

क्या है सच
ऊपर की इन खबरों को सच मानें तो स्पष्ट है कि जुलाई महीने में सरकार की ओर से मंडलायुक्तों को बताया गया है कि गैर हिमाचली अधिकारियों के बच्चे जमीन खरीदने के लिए आवेदन कर सकते हैं और वे सिर्फ रहने के लिए ही जमीन खरीद सकते हैं और इसके लिए भी अनुमति सरकार से ही मिलेगी।

गौरतलब है कि कई अधिकारी जो मूलरूप से अन्य राज्यों में हैं, हिमाचल प्रदेश में सेवाएं दे रहे हैं और यहीं रह रहे हैं। हिमाचल प्रदेश टेनेंसी ऐंड लैंड रिफॉर्म्स रूल्स 1975 जो कि 2012 तक संशोधित है, उसमें 38 A के तहत शर्त तीसरे अनुच्छेद में लिखा गया है कि सब-रूल 2 के तहत कुछ कामों के लिए जिन योग्यताओं के आधार पर इजाजत दी जा सकती है। इसमें b) शर्त कहती है कि घर बनाने के लिए 500 स्क्वेयर मीटर(150 स्क्वेयर मीटर से काम नहीं) वे लोग जमीन ले सकते हैं

  • 1. b) जो हिमाचल में 30 से ज्यादा सालों तक काम कर रहे हों और संबंधित स्थानीय निकाय ने उसे इजाजत देने की सिफारिश की हो।

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इसी पैमाने वाला व्यक्ति दुकान के लिए भी जमीन खरीदने का आदेवन कर सकता है। मगर समाचार कहते हैं कि इस नियम में ढील देते हुए कर्मचारियों के बच्चों को जमीन खरीदने का आवेदन करने की इजाजत दे दी गई है और उनके लिए (बच्चों के लिए) हिमाचल में 30 साल तक काम करने की शर्त भी जरूरी नहीं है यानी वे भले ही बाहर कहीं काम कर रहे हों, वे हिमाचल में जमीन खरीदने के लिए आवेदन करने के योग्य हो गए हैं।

समाचारों में स्पष्टता का अभाव
धारा 118 स्पष्ट तौर पर कहती है कि कोई भी भारतीय नागरिक (गैर-हिमाचली) हिमाचल में रिहायश बनाने के लिए जमीन खरीदने के लिए आवेदन कर सकता है। 38 A के ही तहत तीसरे अनुच्छेद में सब सेक्शन C में लिखा है कि कोई भी भारतीय नागरिक (OCI समेत) और भारत में पंजीकृत कानूनी एंटिटी डेप्युटी कमिश्नर की सिफारिश पर रिहायशी इलाका बनाने के लिए 500 स्क्वेयर मीटर तक जमीन खरीदने का आवेदन कर सकता है। मगर इसके लिए शर्त यह है कि जो जमीन खरीदी जा रही हो, वह टाउन ऐंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट के पास पंजीकृत हो और डिपार्टमेंट ने वहां इमारत बनाने के लिए पहले से NOC न दिया हो।

ये नियम जमीन खरीदने के नहीं, जमीन के खरीदने के लिए आवेदन से जुड़ने नियम हैं। इसलिए आगे पढ़ते समय और ऊपर लिखी बातों में आवेदन शब्द पर ध्यान दें। ये नियम सिर्फ रिहायश बनाने के लिए ही और अधिकतम 500 स्क्वेयर मीटर तक ही जमीन खरीदने के लिए आवेदन की इजाजत देते हैं। मगर इसके लिए भी सरकार की इजाजत चाहिए होगी और ये आवेदन सरकार ही मंजूर या रद कर सकती है। हालांकि यह देखा जाता रहा है कि सरकारें अपने चहेतों को यह इजाजत देने में दरियादिली दिखाती हैं और उनमें अभिनेताओं से लेकर राजनेता भी शामिल हैं।

इस हिसाब से देखें तो 2012 तक के संशोधित ऐक्ट के नियम बताते हैं कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह हिमाचली कर्मचारी हो या न हो, जमीन खरीदने के लिए आवेदन कर सकता है। फर्क इतना है कि 30 साल की सेवा पूरी करने वाले व्यक्ति के आवेदन पर स्थानीय निकाय सिफारिश कर सकते हैं और अगर कोई भी भारतीय नागरिक (गैर-हिमाचली) को जमीन खरीदने की अनुमति देने की सिफारिश सिर्फ डीसी कर सकते हैं। लेकिन ये सिफारिशें भी यूं ही नहीं की जा सकतीं, इसके लिए आवेदक को कुछ और शर्तें पूरी करनी होती हैं। मसलन उसके हिमाचल आकर बसने से हिमाचल को क्या लाभ होगा, उसे बताना होता है।

क्या है संभावना
ऐसे में संभव है कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने इसी संबंध में क्लैरिफिकेशन जारी की हो यानी स्पष्टीकरण जारी किया हो। विभिन्न विभाग समय-समय पर कर्मचारियों को नियमों आदि को स्पष्ट करने के लिए इस तरह के सर्कुलर भेजा करते हैं। सवाल उठ रहा है कि अगर सरकार ने ऐसा संशोधन किया होता तो उसे इसकी नोटिफिकेशन सार्वजनिक करनी पड़ती मगर जुलाई महीने में ऐसी कोई नोटिफिकेशन हमें हिमाचल प्रदेश रेवेन्यू डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर नहीं मिली। हालांकि यह भी तथ्य है कि अधिकतर सरकारी विभाग सभी नीतिगत फैसलों और अन्य कानून और नियमों के संशोधनों की अधिसूचनाएं वेबसाइटों पर अपलोड नहीं करते। ऐसे में दो ही संभावनाएं हो सकती हैं-

1) सरकार ने चुपके से संशोधन करके उसकी नोटिफिकेशन सार्वजनिक नहीं की जो अब मीडिया के जरिए सामने आई है।

2) अखबारों ने किसी मौजूदा नियम के क्लैरिफिकेशन को संशोधन का समाचार समझकर प्रकाशित किया।

अगर ऐसा हुआ है तो इन हिमाचलियों के साथ अन्याय
अगर हिमाचल में काम करने वाले बाहरी राज्यों के कर्मचारियों या अधिकारियों के बच्चों को जमीन खरीदने में नियमों में बदलाव किया गया है तो यह हिमाचल प्रदेश के उन गैर-कृषक हिमाचलियों के साथ छल है, जो हिमाचली होने के बावजूद हिमाचल में ज़मीन नहीं खरीद सकते और जिन्हें बाहरियों की तरह की जमीन खरीदने की इजाजत के लिए आवेदन करना पड़ता है। पढ़ें-(जो कृषक नहीं हैं, क्या वह हिमाचली नहीं है?)

मगर फिर भी इस पूरे मामले में अभी तक रहस्य बना हुआ है, क्योंकि न तो सरकार ने अभी तक इन खबरों का खंडन किया है और न ही विपक्ष ने इस मामले पर कोई टिप्पणी की है । ऐसे में सोशल मीडिया पर सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि  अगर ये खबरें गलत हैं तो सरकार के किसी मंत्री को सामने आकर इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए या फिर बयान जारी करके स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

आसान भाषा में समझें, हिमाचल की धारा 118 आखिर क्या है

सेंट्रल यूनिवर्सिटी को दिया जाए धर्मशाला का विधानसभा भवन: शांता कुमार

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांगड़ा लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद शांता कुमार ने कहा है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय को धर्मशाला के तपोवन स्थित विधानसबा परिसर में चलाना चाहिए।

धर्मशाला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शांता कुमार ने कहा कि तपोवन स्थित विधानसभा परिसर सरकार के लिए सफेद हाथी है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े खर्च के साथ बनाए गए परिसर को साल में सिर्फ 5 से 6 दिन इस्तेमाल किया जाता है और इस दौरान डेढ़ से दो करोड़ रुपये खर्च हो जाते हैं।

शांता कुमार ने कहा कि विधानसभा परिसर सदुपयोग नहीं हो रहा है और जनता को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा। उन्होंने कहा कि ऐसे में इसे सेंट्रल यूनिवर्सिटी को दिया जाना चाहिए ताकि इन कमरों में छात्र तो पढ़ सकें। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है तो सेंट्रल यूनिवर्सिटी का शिलान्यास नहीं, बल्कि सीधा उद्घाटन ही होगा।

गौरतलब है कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी राजनीति के फेर में फंसी है। अक्तूबर में इसके परिसर का शिलान्यास होने की चर्चा होती रही है मगर अभी तक कोई शेड्यूल जारी नहीं हुआ है। यह तय है कि अगले साल लोकसभा चुनाव होने वाले हैं ऐसे में चुनाव से ठीक पहले उसका शिलान्यास करके माहौल बनाने की कोशिश जरूर की जाएगी।

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वीरभद्र सरकार पर धारा 118 के खुले उल्लंघन और करोड़ों के घोटाले का आरोप

शिमला।। हिमाचल प्रदेश अतिरिक्त मुख्य सचिव पद से रिटायर हुए दीपक सानन ने कहा है कि वीरभद्र सिंह सरकार के दौरान हिमाचल प्रदेश में धारा 118 का जमकर उल्लंघन हुआ है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार इन मामलों की जांच करे नहीं तो मैं कोर्ट में गुहार लगाऊंगा।

दीपक सानन का आरोप है कि वीरभद्र सरकार ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर हिमाचल की जमीनें बेचने की इजाजत दी। प्रेस क्लब में उन्होंने कहा वीरभद्र कैबिनेट ने कई मौकों पर धारा 118 का उल्लंघन किया और मनमर्जी से छूट दी।

दीपक सानन Image Credit: thestatesman.com

भ्रष्टाचार के कई आरोपसानन ने न सिर्फ पिछली सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए बल्कि यह भी कहा कि मौजूदा सरकार इन मामलों में कुछ नहीं कर रही। सानन ने आरोप लगाया कि रामपुर के निजी मंदिर के जीर्णोद्धा के लिए नियमों को ताक पर रखकर 20.50 लाख रुपये दिए गए जिसमें कई अधिकारियों और नेताओं की मिली भगत है।

रोपवे को लेकर सवाल
सानन ने कहा कि रोहतांग रोपवे के लिए वीरभद्र सरकार ने 2016 में उसी पार्टी को काम दिया, जिसका टेंडर पहले रद किया गया था। सानन का आरोप है कि करोड़ों रुपये का घपला इसमें हुआ है।

होटलों को लेकर कथित गड़बड़ी
दीपक सानन ने छराबड़ा के फाइव स्टार होटल को लेकर भी यह दावा कि इससे सरकार को एक करोड़ रुपये हर साल की आमदनी होनी थी मगर 23 साल से एक पैसा नहीं आया।  उन्होंने यह भी कहा कि वीरभद्र सरकार ने बड़ोग के एक होटल को उसी आदमी को दे दिया, जो सुप्रीम कोर्ट में सरकार के खिलाफ केस हार गया था।

पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की सेहत में सुधार, IGMC से छुट्टी मिली

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की सेहत थोड़ी बेहतर है। अब उन्हें आईजीएमसी से छुट्टी मिल गई है। हाथ और पैरों में सूजन आने के बाद उन्हें आईजीएमसी शिमला में भर्ती करवाया गया था।

अस्पताल में उनके कई टेस्ट किए गए जिनकी रिपोर्ट सामान्य बताई गई थी।डॉक्टरों का कहना था कि सूजन भी कम हुई है। अब वीरभद्र सिंह ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर डाली गई पोस्ट में कहा है कि अब उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। उन्होंने शुभकामनाओं के लिए समर्थकों और प्रदेशवासियों का धन्यवाद भी अदा किया।


बता दें कि आईजीएमसी में विभिन्न स्पेशलिस्ट डॉक्टर लगातार वीरभद्र सिंह के स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग कर रहे थे। प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री समेत सत्ता और विपक्ष के कई नेता उनका हाल जानने के लिए आईजीएमसी पहुंचे थे।

पिता पर नाबालिग बेटी से 3 महीनों तक रेप का आरोप

सोलन।। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में एक शक्स पर अपनी नाबालिग बेटी से तीन महीनों तक बलात्कार करने का आरोप लगा है। जानकारी सामने आई है कि पीड़िता ने इस बात के बारे में अपने एक टीचर को बताया और उसी के बाद मामला खुला।

उपलब्ध सूचना के मुताबिक अध्यापक ने इस बात की जानकारी लड़की की मां और पुलिस को दी जिसके बाद पुलिस ने तुरंत आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया।

हिंदी अखबार पंजाब केसरी की रिपोर्ट मुताबिक पिछले करीब तीन महीनों से यह शख्स अपनी बेटी को अकेला पाकर कथित तौर पर बलात्कार कर रहा था।

रिपोर्ट के मुताबिक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिव कुमार ने बताया है कि अभियुक्त उत्तर प्रदेश का है और कुछ समय बेटी के साथ दुष्कर्म कर रहा था। उन्होंने बताया कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज करके पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

आउटसोर्स्ड कर्मचारी रेग्युलर नहीं किए जा सकते: मुख्यमंत्री

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि आउटसोर्स्ड कर्मचारियों को न तो रेग्युलर किया जा सकता है और न ही इन्हें कॉन्ट्रैक्ट पर रखा जा सकता है। सीएम ने कहा कि न तो नियमों में ऐसा प्रावधान है और न ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों में ऐसी कोई व्यवस्था है।

विधानसभा में शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार यह जरूर सुनिश्चित करेगी कि इन कर्मचारियों का शोषण न हो। जिन कंपनियों ने इन्हें रखा है, अगर उनके द्वारा शोषण की शिकायत मिलती है तो कार्रवाई होगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आउटसोर्स्ड कर्मचारियों की नियुक्ति में किसी तरह के आरक्षण की व्यवस्था भी सरकार नहीं कर सकती।

उन्होंने यह भी कहा कि पिछली सरकार ने इलेक्शन के दौरान जरूर आउटसोर्स्ड कर्मचारियों के लिए पॉलिसी बनाने का ऐलान किया था मगर यह चुनावी लाभ के लिए किया गया था जबकि कानूनी पेचीदगियों के चलते ऐसा नहीं किया जा सकता।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर विधानसभा में (Image: FB/Jairam Thakur

क्या होते हैं आउटसोर्स्ड कर्मचारी
जब कभी किसी बाहरी सप्लायर के साथ कॉन्ट्रैक्ट करके कोई चीज या सेवा ली जाती है, उसे आउटसोर्स करना कहा जाता है। इस मामले में सरकार या सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों का अनुबंध निजी कंपनियों के साथ होता है और वे कंपनियां अपनी शर्तों पर कर्मचारियों को रखकर वहां भेजती हैं, जहां सरकार को जरूर होती है। यानी कर्मचारी कंपनी के कर्मचारी होते हैं न कि सरकार के।

अभी कितने कर्मचारी हैं
हिमाचल प्रदेश में इस समय विभिन्न विभागों, बोर्डों और निगमों में 8731 कर्मचारी हैं। 5048 कर्मचारी सरकार के विभिन्न विभागों, 2893 कर्मचारी बोर्डों में और 790 कर्मचारी निगमों में काम कर रहे हैं। इनको वेतन कंपनियां देती हैं और इन कंपनियों को कॉन्ट्रैक्ट के तहत सरकार से पैसा मिलता है।

‘कंपनियों ने शोषण किया तो होगी कार्रवाई’
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर कंपनी अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं देती है तो नियमों के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कंपनियां नियमानुसार इनका ईपीएफ काटती हैं और सरकारी कर्मचारियों की ही तरह मेडिकल लीव और अन्य लाभ देती हैं।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि साल 2015 से 2017 के बीच सरकार ने आउटसोर्स्ड कर्मचारी मुहैया करवाने वाली इन कंपनियों को 225 करोड़ 88 लाख 26 हजार 495 रुपये का भुगतान किया है।

विधानसभा में यह मुद्दा सीपीएम विधायक राकेश सिंघा के प्रश्न के बाद उठा जिस पर मुख्यमंत्री ने विस्तार से जवाब दिया और अन्य सदस्यों ने भी चर्चा की। आउटसोर्स्ड कर्मचारियों के विषय में हुई इस चर्चा को विधानसभा की कार्यवाही के लिखित ब्यौरे की शुरुआत में पढ़ा जा सकता है। इसे पढ़ने के लिए यहां पर क्लिक करें, काफी कुछ जानने को मिलेगा।

परिवहन मंत्री ने बताया, क्यों हुई नीली JnNURM बसों की दुर्गति

इन हिमाचल डेस्क।। पिछले दिनों धर्मशाला के एक पत्रकार द्वारा डाली गई तस्वीरों के आधार पर ‘इन हिमाचल’ ने भी मुद्दा उठाया था कि केंद्र सरकार के JnNURM मिशन के तहत मिली नीले रंग की बसों को सदुपयोग क्यों नहीं हो रहा और वे बसें अभी भी खड़ी-खड़ी खराब क्यों हो रही हैं। इस संबंध में परिवहन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर के नाम से बनी एक फेसबुक प्रोफाइल पर पोस्ट डालकर विस्तार से सरकार का पक्ष रखा गया है।

jnnurm buses
Image Credit: FB/Munish Dixit

इसमें बताया गया है कि पिछली सरकार की लापरवाही के कारण ये बसें खड़ी हैं क्योंकि पहले तो इन्हें निर्धारित क्लस्टरों से बाहर चलाया गया और फिर न्यायालय के आदेश के कारण ये खड़ी हो गईं। परिवहन मंत्री ने आश्वासन दिया है कि कुछ बसों को चला दिया गया है और बाकी को एक माह के अंदर चलाने की कोशिश की जाएगी। उनके विस्तृत बयान को आप नीचे पढ़ सकते हैं-

“JnNURM जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूअल मिशन के तहत नीली बसों के खड़े होने का सच।”

“आए दिनों विभिन्न संचार माध्यमों से हिमाचल पथ परिवहन निगम की JnNURM बसों के परिवहन निगम के विभिन्न डिपुओं में खड़े होने को लेकर प्रदेश के सजग नागरिकों ने सवाल उठाए हैं, जिसका मैं स्वागत एवं अभिनन्दन करता हूँ, क्योंकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक कल्याणकारी राज्य के उद्देश्यों को जनसहभागिता से ही पूरा किया जाना सम्भव है।

मैं विकास एवं कल्याणकारी कार्यों को और अधिक बेहतर बनाने के लिए अनेक मंचों से आप सभी से संवाद कर आपके बहुमूल्य सुझाव लेता रहता हूँ तथा नियमों एवं अधिनियमों की परिधि में इन्हें सरकार के निर्णय और नीतियों में शामिल करने का प्रयास करता हूँ।

JnNURM भारत सरकार की शहरों में मूलभूत सुविधाओं में नवीनीकरण एवं बढोतरी की एक योजना थी जिसके तहत देश के पहाड़ी राज्यों को 2000 बसों की खरीद के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की गई थी। हिमाचल प्रदेश को इस योजना के तहत 791 बसें खरीदने के लिए ₹227.11 करोड़ प्राप्त हुए थे।

इन बसों को परिवहन निगम द्वारा 28 शहरों के 13 निर्धारित क्लस्टर में चलाना था, लेकिन तत्कालीन सरकार ने नियमों की अवहेलना करते हुए 791 में से 325 बसों को निर्धारित क्लस्टर से बाहर चलाया, जिसके विरोध में माननीय हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका संख्या 1727/2017 दाखिल की गई, नतीजतन माननीय न्यायालय ने 24 अगस्त 2017 को निर्देश जारी किए कि क्लस्टर से बाहर चलने वाली बसों को न चलाया जाए। माननीय उच्च न्यायालय का यह निर्णय तत्कालीन कांग्रेस सरकार की एक बहुत बड़ी असफलता थी, जिसका खामियाजा परिवहन निगम अभी तक भुगत रहा है। इन बसों के खड़ी होने पर तत्कालीन सरकार ने कोई कदम नहीं उठाए तथा इन्हें विभिन्न डिपुओं में कवाड़ होने के लिए छोड़ दिया।

JnNURM जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूअल मिशन के तहत नीली बसों के खड़े होने का सच।

आए दिनों विभिन्न संचार माध्यमों से…

Posted by Govind Singh Thakur on Tuesday, August 28, 2018

प्रदेश में श्रीमान जयराम ठाकुर जी के नेतृत्व में बनी भाजपा सरकार में मुझे परिवहन विभाग का दायित्व सौंपा गया तो मैंने पहले दिन से ही इन बसों को सड़क पर उतारने के प्रयास किए। मैंने परिवहन विभाग तथा निगम के अधिकारियों को इन बसों को चलाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिये। मैंने स्वयं हितधारकों से बातचीत की, माननीय न्यायालय में दृढ़ता से परिवहन निगम का पक्ष रखा, न्यायालय के निर्देशों के अनुसार लोगों की आपत्तियों को सुना और उनका निराकरण किया। 23 मई, 2018 को माननीय न्यायालय से हमें राहत प्राप्त हुई और हमने 325 में से 84 बसों को फिर से चला दिया। 29 और बसों को हम इस सप्ताह से चलाने में सक्षम हो जाएंगे तथा शेष 212 बसों को एक माह के भीतर नए रुट प्रकाशित होने के पश्चात चलाने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है।

मेरा प्रदेश की जनता से यही कहना है कि HRTC प्रदेश के लोगों के दैनिक जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसकी सेहत हम सभी के जीवन को प्रभावित करती है, पूर्व की सरकार के गलत निर्णयों से इसकी सेहत खराब होती रही है तथा आमजन को मिलने वाली सुविधाओं में दुष्प्रभाव के साथ साथ प्रदेश के खजाने पर भी भार बढ़ा है। मैं पहले दिन से इन सभी विषयों को गंभीरता से सुलझाने का प्रयास कर रहा हूँ और मेरा विश्वास है कि इसमें हम अवश्य सफल होंगे क्योंकि प्रदेश की जागरूक जनता तथा प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री दोनों का साथ एवं समर्थन हमें प्राप्त है, हम हिमाचल को अवश्य शिखर की ओर ले जाने में कामयाब होंगे।”