मंडी।। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने कहा है कि देश की कमान एक तानाशाह व्यक्ति के हाथ में चली गई है। उन्होंने सुंदरनगर में पार्टी पदाधिकारियों की बैठक के दौरान यह बात कही।
न्यूज 18 हिमाचल के मुताबिक कुलदीप सिंह राठौर ने पीएम मोदी पर हमला करते हुए कहा, “एक तानाशाह व्यक्ति के हाथ देश की कमान चली गई है।”
कुलदीप राठौर ने कहा कि मोदी ने किसानों, नौजवानों और छोटे कारोबारियों से झूठ बोल सत्ता हासिल की और देश की जनता से छल किया है। जीएसटी और नोटबंदी के चलते देश की अर्थव्यवस्था गिरी है और इसके जिम्मेदार नरेंद्र मोदी हैं।
ऊना। राजनीति में भाषणों के दौरान बड़ी-बड़ी बातें करने का चलन है मगर कई बार हदें ही पार हो जाती हैं। ऐसा ही हुआ ऊना में हो रहे भाजपा के पन्ना प्रमुख सम्मेलन में, जब पूर्व सीएम और वरिष्ठ भाजपा नेता प्रेम कुमार धूमल ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ में ऐसी बातें कह दीं, जो हंसी का विषय बन गई।
ऊना में हो रहे पन्ना प्रमुख सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका में भी मोदी लहर का असर है। और तो और, धूमल ने यह कह दिया कि प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर ट्रंप ने अमेरिका में जीत हासिल की है और अमेरिका में भी मोदी की नीतियों की सराहना हो रही है।
मगर यह पहला मौका नहीं है जब उन्होंने ऐसा कहा है। कई मंचों से वह ऐसा कह चुके हैं। राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले भी उन्होंने कहा था कि डॉनल्ड ट्रम्प का अभियान उस समय जीत की ओर बढ़ा जब उन्होंने मोदी का नाम लिया। (पढ़ें)
गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर बीजेपी समर्थक पेज और ग्रुप ऐसे मेसेज डालते रहते हैं और व्हाट्सऐप पर भी ऐसे मेसेज शेयर होते हैं। मगर वरिष्ठ नेता का इस तरह से बयान देना चर्चा का विषय बना हुआ है।
हमीरपुर।। कांग्रेस के नव नियुक्त प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर के काफिले में शामिल एक गाड़ी में हूटर बजने पर पुलिस ने चालान किया है। बता दें कि हर कोई हूटर का इस्तेमाल नहीं कर सकता।
पुलिस ने जिस स्कॉर्पियो कार का ट्रैफिक नियमों के मुताबिक चालान किया है, उसपर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्य़क्ष का स्टिकर लगा था।
कुलदीप हूटर बजने वाली स्कॉर्पियो के पीछे चल रही फॉर्च्यूनर पर सवार थे। लेकिन अमर उजाला की खबर के अनुसार ऊना से लेकर हमीरपुर जिले में आने के दौरान बड़सर से लेकर हमीरपुर तक यह हूटर बजता रहा।
पुलिस का कहना है कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष को पार्टी की ओर से मिली गाड़ी में यह हूटर बज रहा था और नियमों के अनुसार कार्रवाई की गई है।
शिमला।। लोकसभा चुनाव के लिए कुछ ही हफ्तों का समय बचा है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के नए प्रदेशाध्यक्ष के पास बहुत कम समय बचा है। इस बीच कांग्रेस ने प्रेस रिलीज करके जानकारी दी है कि हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के लिए विभिन्न कमेटियों के प्रस्ताव को राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंजूरी दे दी है।
कांग्रेस की कैंपेन कमेटी का चेयरमैन वीरभद्र सिंह को बनाया गया है, चुनाव कमेटी का चेयरमैन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर होंगे और प्रचार कमेटी का चेयरमैन पूर्व परिवहन मंत्री जी.एस. बाली को बनाया गया है। इसके अलावा मीडिया कोऑर्डिनेशन और इलेक्शन मैनेजमेंट टीमों का गठन भी किया गया है।
कुल्लू।। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू के पास राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या पाठशाला सुल्तानपुर में पढ़ने वाली दो छात्राओं को इस बार के गणतंत्र दिवस समारोह में राजधानी दिल्ली में सम्मानित किया जाएगा।
मुस्कान और सीमा नाम की इन छात्राओं को बहादुरी पुरस्कार से नवाज़ा जाएगा। दरअसल स्कूल के पास लड़के इकट्ठा होकर टिप्पणियां किया करते ते। मुस्कान और सीमा ने पिछले साल 10 जुलाई को ऐसे ही लड़कों की धुनाई कर दी थी।
इसके बाद दोनों बेटियों ने इन लड़कों को महिला पुलिस स्टेशन ले जाकर शिकायत दर्ज करवाई थी। इस घटना के बाद स्कूल के आसपास असामाजित तत्वों का आना बंद हो गया। जाहिर है, इससे छात्राओं के लिए सुरक्षित माहौल बना है।
नई दिल्ली।। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी वाड्रा आखिरकार सक्रिय राजनीति में उतर गई हैं। आगामी लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने बड़ा दांव चलते हुए प्रियंका वाड्रा को महासचिव बनाते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी है।
बता दें कि पूर्वी उत्तर प्रदेश को भारतीय जनता पार्टी का गढ़ माना जाता है। प्रियंका अगले महीने पहले हफ्ते अपना कार्यभार संभालेंगी। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा ने प्रियंका गांधी को महासचिव बनाए जाने की पुष्टि की है। प्रियंका पार्टी के लिए प्रचार करती रही हैं मगर उन्होंने अब तक कोई पद नहीं लिया था।
मोतीलाल वोरा ने कहा, ‘प्रियंका को जो जिम्मेदारी दी गई, वह बेहद अहम है। इसका असर केवल पूर्वी यूपी पर ही नहीं होगा, बल्कि उत्तर प्रदेश के अन्य इलाकों पर भी पड़ेगा।’
पूर्वी क्षेत्र में भले ही भारतीय जनता पार्टी का दबदबा हो मगर कुछ सीटें ऐसी हैं जहां कांग्रेस का अच्छा प्रभाव रहा है। यहां फूलपुर से पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू सांसद रहे हैं।
शिमला।। मंगलवार को जिस समय हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में बर्फबारी हो रही थी, उस समय मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सचिवालय से रिज की तरफ निकले।
सीएम ने ढाई किलोमीटर तक यात्रा की और हालात का जायजा लिया कि बर्फबारी के कारण शहर में कैसे हालात हैं। इस बात के लिए सीएम की तारीफ तो हो रही है, मगर वीडियो को लेकर एक और बात की चर्चा भी हो रही है- सीएम का अपना छाता खुद न पकड़ना।
दरसअल हिमाचल प्रदेश के नए सीएम की छवि ज़मीन से जुड़े हुए शख्स की है जो दिखावे से दूर रहते हैं। बहुत से लोगों को यह बात खटकी कि जब बाकी लोग अपने लिए छाता पकड़ सकते हैं तो सीएम क्यों खुद अपने लिए छाता पकड़कर नहीं चले। सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर निराशा जताते हुए लोग पूछ रहे हैं कि क्या सीएम बनने से पहले वह खुद के लिए छाता नहीं पकड़ते थे।
भारी बर्फबारी के बीच हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सचिवालय से रिज तक करीब ढाई किलोमीटर पैदल सफ़र कर पूरे हालात का जायजा लिया !
दरसअल भारत में नेता और बड़े पदाधिकारी इन छोटी बातों पर ध्यान नहीं देते। छाता तो फिर भी अलग बात है, कई नेता अपने सुरक्षा अधिकारियों से जूते उठवाने और जूते पहनवाने जैसा काम कर चुके हैं। मगर विदेशों में सारे काम दूसरों से करवाने के बजाय खुद करने को सम्मानजनक समझा जाता है और नेता भी इसमें यकीन रखते हैं। मगर भारत में ऐसा देखने को कम ही मिलेगा है।
जब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत आए थे उन्होंने अपना छाता ख़ुद पकड़ा था और इस तस्वीर की काफी तारीफ भी हुई थी।
हो सकता है मंगलवार को सीएम ने किसी कारण छाता खुद न पकड़ा हो मगर लोगों का कहना है उन्हें इन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देना चाहिए और एक उदाहरण पेश करना चाहिए।
राजेश वर्मा।। पिछले सप्ताह नेपाल में बिना खिड़की वाली झोंपड़ी में आग से दम घुटने के कारण 35 वर्षीय महिला और उसके दो बेटों की मौत की घटना ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। भले ही सभी इस घटना को आग से दम घुटना वजह मानते हों लेकिन असल कारण तो महिला को माहवारी के दौरान अछूत मानकर उसे अलग स्थान पर एक झोंपड़ी में रहने के लिए मजबूर करना था।
आधुनिक युग में इंसानियत के नाम पर हम सभी के मुंह पर यह किसी तमाचे से कम नहीं की महज पीरियड्स के नाम पर महिलाओं को अछूत मान लिया जाए। यह घटना मात्र नेपाल की ही नहीं हमारे देश में अभी भी कई राज्यों में इस प्रकार की सामाजिक परंपराओं के नाम पर महिलाओं से भेदभाव किया जाता है।
गैक़ानूनी होने के बावजूद नेपाल के कई हिस्सों में पीरियड आने पर अलग कर दी जाती हैं महिलाएं
ऐसी ही कुप्रथा देव भूमि कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश में भी प्रचलित है। पिछले वर्ष एक ऐसी ही मीडिया रिपोर्ट कुल्लू जिला से भी देखने को मिली कि किस तरह ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को कैसा भी मौसम हो, मासिक धर्म के दौरान घरों से बाहर निकाल दिया जाता है। महिलाओं को पीरियड्स के दौरान कहीं 5 तो कहीं 7 दिन के लिए अछूत बनाकर उनका जीवन बहुत ही कठिन बना दिया जाता है। देखिए वो वीडियो:
वहां देव प्रथा के अनुसार मासिक धर्म के दौरान महिलाएं अशुद्ध हो जाती है और घर में प्रवेश करने व घर के किसी भी सामान को छूने पर वह सामान भी अशुद्ध हो जाता है। इस दौरान उन महिलाओं से अछूत की तरह व्यवहार किया जाता है और घर के सदस्य भी उन्हें छूने से कतराते है। उन्हें भी घर के बाहर गौशाला या अन्य अंधेरी जगहों पर रहने के लिए मजबूर किया जाता है। उन्हें अलग बर्तनों में खाना पीना दिया जाता है।
महिलाओं के साथ पीरियड्स के दौरान यह भेदभाव आज के वैज्ञानिक युग में समझ से परे है। महिलाओं का मासिक धर्म या माहवारी एक सहज वैज्ञानिक और शारीरिक क्रिया है। किशोरावस्था से शुरू होने वाली यह नियमित मासिक प्रक्रिया सामान्य तौर पर अधेड़ावस्था तक चलती रहती है। लेकिन भारत के बहुत से हिस्सों में इस मासिक प्रकिया के दौरान महिलाओं पर लगाई जाने वाली सामाजिक पाबंदियां व अछूतों जैसा व्यवहार महिलाओं के लिए हर माह तीन-चार दिन किसी सजा से कम नहीं।
इतना परहेज़ तो तब नहीं करते लोग जब किसी को ऐसी संक्रामक बीमारी हुई हो जो छूने से फैलती हो। सोचिए, वे खाना नहीं पका सकती, दूसरे का खाना और पानी नहीं छू सकती। कई मामलों में तो उनको जमीन पर सोने के लिए मजबूर किया जाता है।
यह सच है कि पिछले कुछ समय में लोगों की सोच में काफी बदलाव आया है। अब लोग पीरियड्स के दौरान महिलाओं को अछूत नहीं समझते। इस दौरान महिलाओं को होने वाले मानसिक व शारीरिक दर्द से उबारने के लिए सहायता करते हैं। लेकिन अभी भी बहुत से लोग हैं जो पीरियड्स के दौरान महिलाओं को रिवाज़ों में बांधते हैं और इनमें केवल ग्रामीण व अशिक्षित ही नहीं बल्कि शहरी व पढ़े लिखे भी कम नहीं। वे भी महिलाओं को अहसास करवाते हैं कि पीरियड्स आना एक पाप से कम नहीं। जहां एक महिला इस मासिक चक्र के दौरान शारीरिक कष्टों को झेल रही होती है वहीं इस तरह की परंपराएं उन्हें और मानसिक पीड़ा भोगने पर मजबूर कर देती है।
देश के असम राज्य में होने वाली एक सामाजिक रीति भी बड़ी विचित्र है। एक तरफ तो किसी कन्या को जब पहली बार पीरियड होता है तो इस बात पर खुशी मनाई जाती है। उसे उपहार दिए जाते हैं तथा उसे विशेष खुशी का अनुभव करवाया जाता है लेकिन दूसरी तरफ इसी खुशी में शामिल होने से उन महिलाओं को कोसों दूर रखा जाता है जो मासिक धर्म भोग रही होती है। तीन रातों तक वह महिलाएं उस घर में प्रवेश नहीं कर सकतीं, जिस घर की कन्या को पहली बार पीरियड हुआ हो। आखिर यह कैसा रिवाज़?
मेडिकल साइंस में पीरियड्स का आना महज़ एक शारीरिक तब्दीली है। पीरियड्स होने का मतलब है कि वह कन्या या स्त्री एक ज़िंदगी को दुनिया में लाने के लायक है। पीरियड्स के दौरान छूने से कौन सा भोजन खराब होगा? इस दौरान पानी देने से कौन से पौधे सूख जाएंगे? वे दो दिन तक बाल नहीं धो सकती। चलो एक बार यह तर्क मान लें कि पहले के समय में इस दौरान किसी नदी या नाले में महिलाओं के पीरियड्स के दौरान स्नान करने से पानी दूषित हो सकता था। लेकिन अब तो घरों में साफ सफाई युक्त सुविधाएं उपलब्ध है फिर ऐसी क्या समस्या?
ऐसी नहीं की यह किसी एक धर्म में ही है भारत के ज्यादातर हिस्सों में हिंदू और मुसलमान समुदायों में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के साथ अछूतों की तरह का व्यवहार होता है। मुस्लिम तबके के लोग भी इस दौरान लड़की को नापाक यानी अपवित्र मानते हैं, उसे इबादत की अनुमति नहीं होती वह कुरान नहीं छू सकती। पहली बार माहवारी होने पर लड़की को घऱ से बाहर नहीं भेजा जाता आदि तरह तरह की पाबंदियां लगा दी जाती है।
इस भेदभाव के पीछे यदि अकेले पुरुषों को दोषी माना जाए तो यह नाइंसाफी होगी। इन कुरीतियों के पीछे महिलाएँ भी कम जिम्मेदार नहीं बहुत सी महिलाएं ऐसी हैं जो पीरियड्स के दौरान लोगों व परिवार से दूर रहना पसंद करती हैं। वे इस विषय पर बात करने से झिझकती हैं। जब महावारी या पीरियड्स आना शुरू होते हैं तो सबसे पहले और कोई नहीं माँ ही कहती है कि बिटिया इन दिनों न तो मन्दिर जाते हैं न ही पूजा करते हैं। किचन में नहीं जाना, किसी चीज़ को नहीं छूना, तुम्हें अलग बिस्तर पर ही सोना और अलग ही खाना खाना होगा आदि तमाम तरह की बातें एक माँ ही अपनी बेटी को सिखाती है और बेटी इसे प्राकृतिक प्रक्रिया न मानकर एक छूत की बीमारी या अभिशाप समझ लेती है । जिसे वह न चाहते हुए भी ताउम्र ढोने के लिए मजबूर हो जाती है या उसे मजबूर कर दिया जाता है।
भले ही बदलते समय के साथ शहरी इलाकों में यह प्रथा अब न के बराबर हो इसका कारण यह भी है कि शहरों में आप महिलाओं को बाहर रखने के लिए जगह कहां से लाओगे? एक व्यक्ति अपनी पत्नी को गांव में तो पीरियड्स के दौरान गौशाला में या अलग कमरे में सोने के लिए भेज सकता है लेकिन शहर में जहां वह किराए पर एक ही कमरे में रह रहे हैं तब वह उसे और कहां भेजेगा मतलब?
हम लोग अपनी अपनी सहूलियत के हिसाब से इन कुरीतियों को महिलाओं को मानने पर मजबूर करते हैं। हम भूल जाते हैं कि गौशाला में रहने से किसी महिला को कौन कौन से संक्रामक रोग लग सकते हैं। मासिक चक्र के दौरान यदि महिलाएं साफ सफाई न रखें तो उनकी सेहत के लिए यह कितना नुकसानदेह साबित हो सकता है। जब भी ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा महिलाओं की इस अवधि के दौरान जांच हुई तो महिलाओं में पीरियड्स के दौरान सफाई न रखने के कारण कई बीमारियां पाई गई।
भले ही बहुत से लोग इसे चीज को धार्मिक रीति रिवाजों से जोड़ते आए हों पुराणों व कुरान का उल्लेख कर इस कुप्रथा को सही साबित करते हों लेकिन संस्कृति व रीति रिवाज भी वही सहेजने चाहिए जिनसे हम अपने परिवार में अपनी बेटी, बहन व पत्नी को शोषित होने पर मजबूर न करें। जब हम गौशाला में नहीं सो सकते तो हमारी घर परिवार की महिला सदस्यों को हम कैसे मजबूर कर सकते हैं कि वह ऐसी जगहों पर अकेली रहें?
एक बार पुरुष होकर सोचो तो सही कि जब कोई आप से कहे कि खाने की किसी चीज़ से हाथ मत लगाओ, घर के किसी सदस्य को मत छूना, खाना पीना भी अलग बर्तन में लेना आदि तब आपके अंदर से ऐसा गुबार आएगा कि आपको लगेगा दुनिया में सबसे ज्यादा भेदभाव इस चीज के सिवा कहीं नहीं है, वह भी महिलाओं की तरह मासिक धर्म के मानसिक व शारीरिक कष्ट को भोगे बिना।
(स्वतंत्र लेखक राजेश वर्मा बलद्वाड़ा, मंडी के रहने वाले हैं और उनसे 7018329898 पर संपर्क किया जा सकता है।)
एमबीएम न्यूज नेटवर्क, कुल्लू।। हिमाचल प्रदेश के आंतरिक क्षेत्रों में कुछ लोगों की हरकतें पूरे प्रदेश को शर्मसार कर रही हैं। और तो और, देवता के नाम पर जातिवादी भेदभाव किया जा रहा है।
ताजा मामला कुल्लू जिले का है। बंजार घाटी के करथा मेले में परंपरा के नाम पर एक दलित युवक की पिटाई करने का मामला सामने आया है। सैंज के शलबाड निवासी युवक लाल चंद पुत्र ओमप्रकाश ने एसपी को इसकी शिकायत की है।
लालचंद ने बताया कि वह 10-12 दोस्तों के साथ मेले में गया हुआ था और इस दौरान देवता का आशीर्वाद माना जाने वाला नरगिस का फूल उसकी गोद में गिरा, जिस पर कारिंदों ने आपत्ति जताई और कहा कि यह दलित है और नरगिस का फूल इसके पास गिरना अपशगुन है, जिसके चलते कारिंदों ने युवक को पीटने के आदेश दे दिया।
युवक ने शिकायत में कहा कि भीड़ ने उसके साथ मारपीट की और साथ में आए दोस्तों को भी दौड़ दौड़ा का पीटा। युवक ने देव कारिंदो पर आरोप लगाया है कि इसके लिए पहले उनसे 11 हजार रुपए जुर्माना मांगा गया,लेकिन दोस्तों ने अपनी जान बचाने के चक्कर में 51 सौ रुपए देकर जान बचाई।
युवक ने कारिंदों पर यह भी आरोप लगाया है कि देव कारिंदों ने उनके साथ जाति सूचक गालियों का भी प्रयोग किया। एसपी शालिनी अग्निहोत्री का कहना है कि उनके शिकायत मिली है और इसकी जांच के आदेश दिए गए हैं।
(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)
एमबीएम न्यूज नेटवर्क, शिमला।। कुलदीप सिंह राठौर की कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर नियुक्ति होने के बाद कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प का मामला पुलिस के वास पहुंच गया है।
इस घटना में घायल सुक्खू समर्थक की शिकायत के आधार पर पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पीड़ित का दिन दयाल उपाध्याय (रिपन) अस्पताल में इलाज चल रहा है।
जिन पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है, वे वीरभद्र के कट्टर समर्थक बताए जा रहे हैं। इनमें युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता भी हैं। बता दें कि कुछ वर्ष पहले विक्रमादित्य सिंह के नेतृत्व में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा के शिमला कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। उस समय मारपीट और पथराव में बीजेपी के एक कार्यकर्ता की आंख फूट गई थी।
बहरहाल, जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है उनमें महेंद्र स्तान, विनोद जिंटा, दीपक खुराना, वेद प्रकाश और विरेंद्र वांसटू शामिल हैं। इनके खिलाफ आईपीसी की धाराओं 323, 506, 147 व 148 के तहत केस दर्ज हुआ है। डीएसपी (हैडक्वार्टर) प्रमोद शुक्ला ने एफआईआर दर्ज किए जाने की पुष्टि की है।
(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)