वीडियो से खुली शिमला में चिट्टे के कारोबार की पोल, तीन धरे गए

शिमला।। पुलिस ने शिमला की झुग्गी में छापा मारकर 378 ग्राम चिट्टा बरामद किया है। इसके साथ ही तीन लोगों को पकड़ा गया है जिनमें एक दंपती है। पुलिस ने 33 हजार 350 रुपये भी बरामद किए हैं।

बताया जा रहा है कि पुलिस को एक युवक द्वारा बनाए गए वीडियो से जानकारी मिली पुराने बस स्टैंड के पास डाउन डेल इलाके से नशे का कारोबार चल रहा है। हालांकि यह वीडियो किसने, कब बनाया है, इस संबंध में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है।

कौन लोग पकड़े गए

डाउन डेल में झुग्गी में रहने वाली महिला सीमा के पास पंजाब के रोपड़ निवासी दम्पति धर्मा व पूजा मेहमान बन कर पहुंचे थे। पुलिस को इस बात की सूचना मिली कि दम्पति चिट्टा की सप्लाई करता है। इनसे बरामद चिट्टा शिमला में पहली बार एक बार में एकसाथ इतनी बड़ी मात्रा में मिला है।

एसपी ओमापति जम्वाल ने मामले की पुष्टि की है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है कि चिट्टा कहां सा लाया गया था और कहां ले जाया जा रहा था। डीएसपी प्रमोद शुक्ला ने बताया कि एनडीपीएस में केस दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। रिमांड के दौरान इनसे तस्करी के सम्बंध में अहम जानकारियाँ मिल सकती हैं।

पुलिस के लिए यह भी जरूरी है कि इस वीडियो बनाने वाले युवक को सुरक्षा मुहैया करवाए।

डीएसपी बी.डी. भाटिया का तबादला रद्द, नोटिफिकेशन जारी

शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार ने अधिसूचना जारी करके डीएसपी बी.डी. भाटिया का तबादला रद्द कर दिया है। बता दें कि सिरमौर जिले के पांवटा साहिब में स्टोन क्रशर की एनओसी जारी करने में कथित रिश्वतखोरी मामले की जांच कर रहे स्टेट विजीलेंस ऐंड ऐंटि करप्शन में तैनात डीएसपी बीडी भाटिया को विजीलेंस से उठाकर पौंग डैम व बीबीएमबी सुरक्षा में ट्रांसफर किया गया था।

डीएसपी ने एचएएस अधिकारी एचएस राणा सहित दो दलालों को हाल ही में गिरफ्तार किया था। ऐसे में उनके तबादले के बाद सरकार की आलोचना हो रही थी। ऐसे में अब इस तबादला आदेश को रद्द किया गया है।

क्या है पूरा मामला, जानने के लिए नीचे पढ़ें-

कथित घूसखोरी में HAS अफसर को अरेस्ट करने वाले DSP का तबादला

कथित घूसखोरी में HAS अफसर को अरेस्ट करने वाले DSP का तबादला

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, नाहन।। सिरमौर जिले के पांवटा साहिब में स्टोन क्रशर की एनओसी जारी करने में कथित रिश्वतखोरी मामले की जांच कर रहे स्टेट विजीलेंस ऐंड ऐंटि करप्शन में तैनात डीएसपी बीडी भाटिया का तबादला हुआ है। डीएसपी ने एचएएस अधिकारी एचएस राणा सहित दो दलालों को हाल ही में गिरफ्तार किया था। अब उन्हें विजीलेंस से उठाकर पौंग डैम व बीबीएमबी सुरक्षा में किया गया है।

उनकी जगह देहरा के डीएसपी लालमन की नियुक्ति की गई है। मगर इस तबादले को लेकर सवाल उठना शुरू हो गए हैं। संवेदनशील मामले में एचएएस अधिकारी की गिरफ्तारी और जांच के बीच ही तबादला कर दिए जाने को शक की निगाह से देखा जा रहा है।

क्या सरकार पर दबाव था?
ऐसी चर्चा है कि एचएएस अधिकारियों की एसोसिएशन सरकार पर राणा के निलंबन न करने का दबाव डाल रही थी। लेकिन सरकार को राणा के निलंबन के आदेश जारी करने पड़े क्योंकि 48 घंटे पुलिस रिमांड या न्यायिक हिरासत में सरकारी कर्मचारी को स्वतः ही निलंबित मान लिया जाता है।

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हालांकि यह रूटीन तबादला हो सकता है मगर इस मामले में टाइमिंग के आधार कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे मौजूदा सरकार को लेकर ठीक वैसे ही सवाल उठ रहे हैं, जैसे सवाल पिछली वीरभद्र सरकार पर आईपीएस गौरव का तबादला करने पर उठे थे। इससे यह संदेश गया है कि ईमानदार अधिकारी को ईमानदारी की सज़ा मिली है।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित हुई है)

जनमंच में शिमला की मेयर पर भड़के शिक्षा मंत्री, वीडियो वायरल

शिमला।। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें जनमंच कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज गुस्से में शिमला की मेयर कुसुम सदरेट को गुस्से में टोकते हुए नजर आ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि जिस समय एक महिला जनमंच में अपनी समस्या बता रही थी, उस दौरान मंच से मेयर ने कुछ कहने की कोशिश की। इस पर शिक्षा मंत्री बिफर उठे और उन्होंने मेयर को टोक दिया। इसके बाद मेयर असहज नजर आईं। कुछ लोगों को तालियां बजाते भी देखा जा सकता है।

हालांकि, इस वीडियो में यह पता नहीं चल रहा कि मेयर ने क्या कहा था। महिला जब शिकायत कर रही है, उसके बाद सीधे कट लगा है और फिर मंच पर शिक्षा मंत्री गुस्से में बोलते हुए नजर आ रहे हैं। बहरहाल, वीडियो देखें-

इसी कार्यक्रम का एक और वीडियो सामने आया है जिसमें एक शख्स शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी और शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज से बहस करता नजर आ रहा है।

देखें-

विक्रमादित्य और मनमोहन कटोच को आज मिल सकती है नई ज़िम्मेदारी

शिमला।। हिमाचल के पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के बेटे और शिमला रूरल से विधायक विक्रमादित्य सिंह को आज हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमिटी का महासचिव नियुक्त किया जा सकता है।

इसके साथ ही मनमोहन कटोच को भी महासचिव बनाने का ऐलान किया जा सकता है।

हिमाचल में कांग्रेस के नए प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर इन दोनों को अपनी टीम में शामिल करने जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक सोलन से राहुल ठाकुर को भी कुलदीप नई जिम्मेदारी दे सकते है।

एम्स को झटका, IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की सुप्रीम कोर्ट में जीत

नई दिल्ली।। आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को सुप्रीम कोर्ट में बड़ी जीत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने एम्स की अपील खारिज की है और उसके ऊपर 25 हजार रुपये का जुर्माना लाया है। एम्स ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील की थी। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा था कि केंद्र और एम्स ने चतुर्वेदी के खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई की थी।

दरअसल चतुर्वेदी ने 2014-16 के बीच अपनी खराब मूल्यांकन रिपोर्ट को खारिज करने की मांग करते हुए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिस अवधि में उनका खराब मूल्यांकन हुआ था, उस दौरान वह एम्स में बतौर सीवीओ तैनात थे। चतुर्वेदी का दावा है कि जब उन्होंने एम्स में गंभीर भ्रष्टाचार से पर्दा हटाया तो स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने उन्हें पद से हटाने में भूमिका निभाई।

इस मामले पर सुनवाई करने के बाद उत्तराखंड हाई कोर्ट ने कहा था कि केंद्र और एम्स का रवैया चतुर्वेदी के प्रति प्रतिशोध वाला रहा है। इस फैसले के खिलाफ एम्स ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी मगर सुप्रीम कोर्ट ने एम्स को झटका देते हुए चतुर्वेदी को राहत दी है।

नड्डा पर लगाए थे आरोप
जिस समय जेपी नड्डा को केंद्र की मोदी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया था, एनडीटीवी इंडिया समेत कई न्यूज़ चैनलों और अखबारों ने खबर छापी थी कि जेपी नड्डा ने एम्स की सीवीओ संजीव चतुर्वेदी को हटाने के लिए तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को चिट्ठियां लिखी थीं।

खबरों में दावा किया गया था कि नड्डा ने न सिर्फ चतुर्वेदी को हटाने के लिए कहा था बल्कि जिन मामलों में उन्होंने भ्रष्टाचार होने की बात कही थी, उनकी जांच बंद करने के लिए भी कहा था। कथित तौर पर नड्डा ने अपनी चिट्ठियों में डॉक्टर हर्षवर्धन से अपनी पसंद के एक डॉक्टर को एम्स में नया सीवीओ बनाने के लिए भी कहा था।

विनीत चौधरी का था मामला
दरअसल संजीव चतुर्वेदी ने आईएएस अधिकारी विनीत चौधरी के खिलाफ जांच करते हुुए आरोप लगाए थे। ये वही विनीत चौधरी हैं जो हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत हुए हैं।

जून 2015 में इस मामले पर खबर छापते हुए एनडीटीवी ने लिखा था कि 1982 बैच के आईएएस अधिकारी विनीत चौधरी पर एम्स के भीतर गंभीर गड़बड़ियों और करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। एम्स के डेप्युटी डायरेक्टर रह चुके विनीत चौधरी के खिलाफ चार्जशीट को खुद तब स्वास्थ्य मंत्री रहे डॉ. हर्षवर्धन ने हरी झंडी दी, लेकिन बीजेपी सरकार ने उस चार्जशीट पर कोई कार्रवाई नहीं की थी।

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उस समय एनडीटीवी पर प्रकाशित खबर में लगी तस्वीर

इसके बाद जून 2015 में एम्स की ओर से एक प्रेस रिलीज़ जारी हुई, जिसके मुताबिक स्वास्थ्य मंत्रालय ने एम्स के निदेशक एम सी मिश्रा से कहा कि वह देखें कि विनीत चौधरी पर लगे आरोप किसी कार्रवाई के लायक हैं या नहीं। एम्स की प्रेस रिलीज़ में ये भी कहा गया कि संस्थान के मौजूदा सीवीओ के मुताबिक विनीत चौधरी पर लगे आरोपों में कोई ‘विजिलेंस एंगल’ नहीं है यानी जांच की ज़रूरत नहीं है।

एम्स में डिप्टी डायरेक्टर रह चुके विनीत चौधरी पर दायर चार्जशीट को लेकर काफी विवाद हुआ था। एनडीटीवी ने दावा किया था कि ‘असल में भ्रष्टाचार के कई मामलों के तार विनीत चौधरी से जुड़ते हैं। जिनका खुलासा पूर्व सीवीओ संजीव चतुर्वेदी ने किया जिन्हें बाद में एम्स के सीवीओ पद से हटा दिया गया।’

इज़रायल की कंपनी ने किया कैंसर का 100% इलाज ढूंढने का दावा

इन हिमाचल डेस्क।। इज़रायल की एक बायोटेक कंपनी के वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्हें लगता है कि वे एक साल के अंदर कैंसर का इलाज ढूंढ लेंगे। मगर लाइव साइंस नाम की पत्रिका ने जब विशेषज्ञों से बात की तो उनका कहना है कि इज़रायल की कंपनी ने जो दावा किया है, उसके सच होने सी संभावनाएं कम हैं।

दि यरूशलम पोस्ट’ में एक्सलरेटेड इवलूशन बायोटेक्नॉलजीज़ लिमिटेड के वैज्ञानिकों के हवाले से बयान छपा था कि वे मानते हैं कि वे एक साल के अंदर कैंसर का पूरी तरह से इलाज कर सकेंगे। मगर कंपनी ने अभी तक यह नहीं बताया है कि उसने ऐसी क्या खोज की है। लोगों को इस बारे में ‘दि यरूशलम पोस्ट’ के लेख से ही जानकारी मिली है।

अखबार के मुताबिक जिस इलाज की बात की जा रही है, उसे म्यूटैटो (MuTaTo) या मल्टीटारगेट टॉक्सिन कहा जा रहा है. इसमें कुछ ऐसे पेप्टाइड (एमीनो ऐसिड्स के छोटे स्ट्रैंड) हैं, जिन्हें वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। ये पेप्टाइड एक साथ कैंसर सेल में कई जगहों पर चिपक जाते हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि ये कैंसर सेल के लिए जहरीले होते हैं और कैंसर को खत्म कर देेते हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने इस प्रक्रिया को चूहों पर आज़माया है और उम्मीद है कि इंसानों पर वे जल्द ही क्लीनिकल ट्रायल कर पाएंगे.  मगर अन्य वैज्ञानिक इस दावे पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं.

क्या कहते हैं अन्य विशेषज्ञ

लाइव साइंस मैगज़ीन के मुताबिक लॉस एंजिलिस में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के सर्जरी डिपार्टमेंट में असिस्टेंट क्लीनिकल प्रोफेसर डॉक्टर डिएना अत्ताई कहती हैं कि इज़रायल के वैज्ञानिक शुरुआती स्टडी के आधार पर ही बड़े नतीजे पर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह के दावे करना ‘गैर जिम्मेदाराना है.’

वहीं न्यू यॉर्क के नॉर्थवेल हेल्थ कैंसर इंस्टिट्यूट के चीफ साइंटिफिक ऑफिसर डॉक्टर रॉबर्ट मकाई का कहना है कि कोई ऐसा डेटा उपलब्ध नहीं कराया गया है जिसे बाकी लोग स्टडी कर सकें। उनका कहना है कि इस खबर में यह नहीं बताया गया है कि क्या शोध हुआ, क्या आंकड़े आए, ऐसे में जांच करने के लिए कुछ उपलब्ध ही नहीं है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि यह मानना जल्दबाजी होगा कि इजरायल के वैज्ञानिक कैंसर का इलाज ढूंढने के करीब पहुंच गए हैं क्योंकि यह शोध सिर्फ चूहों पर किया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि चूहों पर आज़माया गया तरीका जरूरी नहीं कि इंसानों के लिए भी कामयाब रहे।

कंपनी अपने दावे पर कायम

हालांकि लाइव साइंस पोर्टल ने जब इजरायली कंपनी से संपर्क किया तो ईमेल से उनका जवाब आया, “हम मानते हैं कि इस साल के अंदर हम कैंसर का पूरा इलाज कर पाने में कामयाब रहेंगे. यह इलाज पहले दिन से ही प्रभावी रहेगा और कुछ हफ्तों तक चलेगा. इसके साइड इफेक्ट या तो होंगे ही नहीं या फिर बहुत कम होंगे.”

बहरहाल, एक साल के अंदर साफ हो जाएगा कि इजरायली कंपनी के दावे कितने सच्चे हैं। अगर वे कामयाब रहते हैं तो यह उनके लिए बड़ी उपलब्धि होगी। यह पूरी मानव जाति के लिए एक ऐतिहासिक दिन होगा। असंख्य लोग असमय जान गंवाने से बच सकेंगे।

स्वाइन फ्लू से डरिए मत, बस ये कदम उठाइए और सुरक्षित रहिए

इन हिमाचल डेस्क।। पूरे देश, खासकर उत्तरी भारत में इन दिनों स्वाइन फ्लू का आतंक देखने को मिल रहा है। हिमाचल प्रदेश में भी इस साल स्वाइन फ्लू के मामले सामने आए हैं और कुछ लोगों की जान भी गई है। पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह भी कथित तौर पर स्वाइन फ्लू का इलाज करवाकर घर लौटे हैं।

जाहिर है, सर्दियों के मौसम में कई तरह के फ्लू के बीच आजकल स्वाइन फ्लू का फैलना आम हो गया है। यह अन्य फ्लू की तरह कुछ समय में ठीक हो जाता है मगर कई बार सही देखभाल न होने के कारण तो कई बार लापरवाही के कारण मरीज की जान जा सकती है। इसलिए जरूरी है कि लक्षणो की पहचान करके सही समय पर जांच करवाने के बाद डॉक्टरी मदद ली जाए।

ऐसे पहचानें, ये हैं लक्षण:
बुखार और खांसी, गला खराब, नाक बहना या बंद होना, सांस लेने में तकलीफ और बदन दर्द, सिर दर्द, थकान, ठिठुरन, दस्त, उल्टी, बलगम में खून आना इत्यादि स्वाइन फ्लू के सामान्य लक्षण हो सकते हैं। तबीयत ज्यादा खराब लगे तो लापरवाही न बरतें, अस्पताल जाकर डॉक्टर को जरूर दिखाएं।

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स्वाइन फ्लू को गंभीरता के आधार पर मुख्यत: तीन श्रेणियों में बांटा गया है- A, B और C

कैटिगरी-A
बुखार, खांसी, सर्दी, शरीर में दर्द होना व थकान महसूस होना माइल्ड स्वाइन फ्लू के लक्षण हैं। इसमें इलाज लक्षणों पर आधारित होता है। ऐसे लक्षणों में टैमीफ्लू दवा लेने की या जांच की जरूरत नहीं होती

कैटिगरी-B
इस श्रेणी के मरीजों में माइल्ड स्वाइन फ्लू के लक्षणों के अलावा तेज बुखार और गले में तेज दर्द होता है या मरीज में माइल्ड स्वाइन फ्लू के लक्षणों के साथ, हाई रिस्क कंडीशन कैटिगरी है तो रोगी को स्वाइन फ्लू की दवा टैमीफ्लू दी जाती है। हाई रिस्क कैटिगरी में छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, 65 साल या उससे अधिक उम्र के व्यक्ति, फेफड़े की बीमारी, दिल की बीमारी, किडनी की बीमारी, डायबीटीज, कैंसर से पीड़ित लोग आते हैं।

कैटिगरी-C
इस श्रेणी के लोगों में स्वाइन फ्लू के ऊपर लिखे लक्षणों के अतिरिक्त ये गंभीर लक्षण भी मिलते हैं जैसे सांस लेने में दिक्कत, छाती में तेज दर्द, गफलत में जाना, ब्लड प्रेशर कम होना, बलगम में खून आना, नाखून नीले पड़ जाना। इस श्रेणी से संबंधित सभी रोगियों को अस्पताल में भर्ती करना चाहिए और रोगी को अकेले में रखा जाता है। रोगी को स्वाइन फ्लू की दवा टैमिफ्लू दी जाती है और जांच भी जरूरी है।

स्वाइन फ्लू से जुड़े 5 मिथक

बचाव कैसे हो?
– खांसने और छींकने के दौरान अपनी नाक व मुंह को कपड़े या रुमाल से जरूर ढकें
– अपने हाथों को साबुन व पानी से नियमित रूप से धोएं
– भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में जाने से बचें
– फ्लू से संक्रमित हों तो घर पर ही आराम करें
– फ्लू से संक्रमित व्यक्ति से एक हाथ तक की दूरी बनाए रखें
-पर्याप्त नींद और आराम लें, पर्याप्त मात्रा में पानी-तरल पदार्थ पिएं और पोषक आहार खाएं
– फ्लू से संक्रमण का संदेह हो तो डॉक्टर को दिखाएं

क्या नहीं करना चाहिए
– गंदे हाथों से आंख, नाक या मुंह को छूना, सार्वजनिक स्थानों पर थूकना
– किसी को मिलने के दौरान गले लगना, चूमना या हाथ मिलाना
– बिना डॉक्टर को दिखाए दवाएं लेना
– इस्तेमाल किए हुए नैपकिन, टिशू पेपर इत्यादि खुले में फेंकना
– फ्लू वायरस से दूषित रेलिंग, दरवाजे आदि को न छूएं
– सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करना

गलत जानकारियों से बचें

  1. भारत में स्वाइन फ्लू की दवाओं की कमी है

सच: स्वाइन फ्लू से प्रभावित लोगों में से 1 प्रतिशत से भी कम लोगों को इलाज के लिए दवा की जरूरत होती है। हमारे देश के पास 60,000 वयस्क लोगों की और 1.000 बच्चों की खुराक स्टॉक में मौजूद है। साथ ही 3 फार्मा कंपनियां ऐसी हैं जो शॉर्ट नोटिस पर दवा तैयार कर सकती हैं।

2. सुअर का मांस खाने से होता है स्वाइन फ्लू

सच: भले ही बीमारी के नाम का सुअर से गहरा संबंध हो, लेकिन इसके बावजूद सुअर का मांस खाने से स्वाइन फ्लू नहीं फैलता। यह फ्लू मरीज की खांसी और छींक के संपर्क में आने से फैलती है।

3. स्वाइन फ्लू का वायरस अपना रूप-रंग बदल चुका है

सच: पुणे और दिल्ली की लैब्स ने पिछले हफ्ते ही रिसर्च में यह साबित किया है कि इस बार का वायरस भी पिछली बार के वायरस की तरह ही है। इसका मतलब उसके इलाज के लिए वही दवाएं कारगर हैं, जो पिछली बार थीं।

4. स्वाइन फ्लू केवल एक बार होता है

सच: दूसरे फ्लू की तरह आप स्वाइन फ्लू से भी बार-बार संक्रमित हो सकते हैं। इसकी वैक्सीन 1 साल तक ही आपको इस बीमारी से बचाती है।

5. स्वाइन फ्लू का कोई इलाज नहीं है

सच: अगर बीमारी के लक्षण दिखने के 48 घंटे के अंदर ही एंटि-वायरल ड्रग ऑसेल्टामिविर (टेमीफ्लू) की डोज ले ली जाए, तो इससे न केवल बीमारी की अवधि और तीव्रता कम होती है, बल्कि इससे आपकी दूसरों को संक्रमित करने की क्षमता भी कम होती है।

स्रोत: एनबीटी

शिमला नगर निगम बैठक में बीजेपी पार्षद और डेप्युटी मेयर में भिड़ंत

शिमला।। हिमाचल की राजधानी शिमला में नगर निगम की बैठक में भारतीय जनता पार्टी की पार्षद आरती चौहान और डेप्युटी मेयर राकेश शर्मा के बीच बहस हुई और हालात ऐसे हो गए कि पार्षद हाथापाई पर उतारू हो गईं।

दरअसल आरती चौहान ने एक अफसर की ऑडियो क्लिप वायरल होने का मामला उठाते हुए कहा कि अधिकारी की जांच हो और उनका ट्रांसफर किया जाए। उन्होंने कहा कि मेरे पास ऑडियो है जिसमें मेयर और आयुक्त के खिलाफ गलत कॉमेंट किए गए हैं।

इसके बाद पार्षदों ने मामले की जांच करवाने औऱ अधिकारी को हटाने का प्रस्ताव पारित किया। इस बीच डेप्युटी मेयर राकेश शर्मा ने कहा कि अधिकारी को अपना पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए।

मगर आरती को डेप्युटी स्पीकर का बात करने का ढंग पसंद नहीं आया और वह भड़क गईं। लहजे पर आपत्ति उठाते हुए वह डेप्युटी मेयर की और बढ़ चलीं। बीच बचाव करने कुछ लोग उतरे और आखिर में सदन स्थगित करना पड़ा।

वीडियो देखें.

अपनी ही सरकार पर बिफरे धवाला, विधानसभा में मामला उठाने की धमकी

शिमला।। पिछले दिनों जयराम सरकार में राज्य के योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष पद और कैबिनेट रैंक हासिल करने वाले रमेश धवाला ने अपनी ही सरकार पर प्रश्न उठाए हैं। सचिवालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर उन्होंने शिक्षा विभाग के निदेशक की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाते हुे कहा है कि जिस शख्स को सरकार ने उच्चतर शिक्षा निदेशक के पद पर बैठाया है, उसने ज्वालामुखी कॉलेज में बतौर प्रिंसिपल रहते हुए पीटीए के पैसे को गलत ढंग से खर्च किया था।

क्या है धवाला का आरोप
धवाला ने कहा जवालामुखी कॉलेज में वर्ष 2015-16 के दौरान पीटीए के पैसे को गलत तरीके से खर्च किया गया है। निदेशक पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि जब वह प्राचार्य थे तो उन्होंने अपनी मनमर्जी से पीटीए के तहत 33 शिक्षकों को तैनाती दी और उन्हें वेतन के नाम पर पीटीए के 25 लाख रुपये बांट दिए। जबिक इस कॉलेज में पहले से ही 35 नियमित शिक्षक तैनात थे।

धवाला ने तो यहां तक कह दिया कि नियमों को दरकिनार कर जवालामुखी कॉलेज में बिना साक्षात्कार के संजय कुमार को किसके इशारे पर सरकार ने नियुक्ति दी है और कैबिनेट तक को भी मामले को लेकर भ्रमित किया गया है।

विधानसभा में उठाएंगे मामला
धवाला ने कहा कि ज्वालामुखी डिग्री कॉलेज में 2010-11 के दौरान प्रवक्ता संजय कुमार की सेवाओं को सरकारी क्षेत्र में अनुचित तरीके से समायोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रवक्ता को नियमों के विपरीत अनुबंध आधार पर नियुक्ति दी गई। रमेश धवाला ने कहा कि मामले को लेकर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से भी शिकायत की गई है।

धवाला ने कहा कि अगर सरकार ने मामले को लेकर कोई फैसला नहीं लिया तो वह मामले को विधानसभा सत्र में भी उठाएंगे और विजिलेंस से शिकायत की जाएगी।