लोकसभा टिकट के लिए कांग्रेस के संपर्क में हैं चंदेल और महेश्वर?

इन हिमाचल डेस्क।। आजकल हिमाचल प्रदेश के दो नेता चर्चाओं में हैं- सुरेश चंदेल और महेश्वर सिंह। दोनों भारतीय जनता पार्टी में हैं और ऐसी खबरें छाई हुई हैं कि लोकसभा का टिकट लेने के लिए वे कांग्रेस के संपर्क में हैं।

सुरेश चंदेल और महेश्वर सिंह एक समय एकसाथ लोकसभा में हिमाचल का नेतृत्व कर चुके हैं। सुरेश चंदेल हमीरपुर लोकसभा सीट से तीन बार भारतीय जनता पार्टी के सांसद रह चुके हैं और महेश्वर सिंह मंडी लोकसभा सीट का तीन बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। चंदेल 12वीं, 13वीं और 14वीं लोकसभा के सदस्य थे जबकि महेश्वर 9वीं, 12वीं और 13वीं लोकसभा के। महेश्वर सिंह राज्यसभा भी जा चुके हैं।

दोनों का राजनीतिक करियर बड़ा उतार-चढ़ाव वाला रहा है। दोनों पार्टी में अहम स्थान पर रहे हैं, दोनों की धाक रही है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष भी रह चुके हैं। मगर वक्त ने ऐसी करवट बदली कि दोनों हाशिये पर चले गए।

सुरेश चंदेल तीन बार हमीरपुर सीट से चुने गए थे। मगर एक टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन मे ‘कैश के बदले सवाल पूछने’ के आरोप में 2005 में उनकी सदस्यता खत्म कर दी गई थी। वहीं महेश्वर सिंह तो ऐसे असंतुष्ट हुए कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर करप्ट होने का आरोप लगाकर 2012 के विधानसभा चुनावों से पहले हिमाचल लोकहित पार्टी नाम से नया दल ही बना लिया था। लेकिन समय बदला और दोनों नेताओं की पार्टी में वापसी हुई।

सुरेश चंदेल कांग्रेस के संपर्क में?
चंदेल को पार्टी ने 2012 में बिलासपुर से उतारा था मगर पांच हजार से ज्यादा वोटों से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस बार उन्हें टिकट नहीं मिला, तभी से असंतुष्ट हैं। चंदेल की लोकसभा की सदस्यता रद्द होने के बाद ही अनुराग ठाकुर के लिए हमीरपुर से लड़ने की जगह बनी थी। अब अनुराग ठाकुर की जगह उन्हें तो टिकट मिलने से रहा। ऐसे में ‘द ट्रिब्यून’ के मुताबिक चंदेल कांग्रेस के संपर्क में हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चंदेल ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात की है और वह राज्य में वीरभद्र सिंह और प्रभारी रजनी पाटिल के संपर्क में भी हैं।

सुरेश चंदेल

महेश्वर सिंह को लेकर भी ऐसा ही दावा
2017 विधानसभा चुनाव से पहले महेश्वर सिंह भारतीय जनता पार्टी में लौट आए थे। मगर वह चुनाव जीतने में असफल रहे थे। ऐसे में इसकी संभावना भी कम है कि उन्हें रामस्वरूप शर्मा की जगह मंडी लोकसभा सीट से उतारा जाए। ऐसे में महेश्वर सिंह को लेकर अखबार ने छापा है कि ऐसी जानकारी मिली है कि वह भी कांग्रेस नेतृत्व के संपर्क में हैं।

महेश्वर सिंह

द ट्रिब्यून ने कांग्रेस के किसी वरिष्ठ नेता के हवाले से छापा है, “दोनों ने लोकसभा चुनाव लड़े हैं, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष रहे हैं। ऐसे में उन्हें कांग्रेस में शामिल करना कोई बुरा विचार नहीं है।”

जम्मू-कश्मीर में अहम एनकाउंटर में हिमाचल का जवान घायल

शिमला।। जम्मू और कश्मीर के पुलवामा में हुए अटैक के साजिशकर्ताओं के सफाए के लिए सोमवार को चले ऑपरेशन में हिमाचल प्रदेश के ऊना का जवान घायल हुआ है।

जानकारी के मुताबिक ईसपुर लवाणा माजरा के रहने वाले दविंद्र कुमार पुत्र रामचंद को एनकाउंटर के दौरान आंख में चोट आई है। इस एनकाउंटर में पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड गाजी और कामरान समेत तीन आ तंकवादी मारे गए थे।

ऐसी जानकारी मिली है कि दविंद्र की आंख से गोली निकालने के लिए ऑपरेशन किया गया है और एक और सर्जरी होगी। दविंद्र का चंडीगढ़ में इलाज चल रहा है। उनके परिवार वाले भी चंडीगढ़ पहुंच गए हैं।

क्षेत्र के इस जांबाज सैनिक की सलामती के लिए लोग दुआएं कर रहे हैं। दविंद्र कुमार 2011 में 51 आर्म्ड में भर्ती हुए और पिछले तीन साल से पुलवामा में तैनात हैं। बताया जा रहा है कि दविंद्र की शादी अभी तीन महीने पहले ही हुई है। उनके दो भाई और एक बहन है।

आवारा पशुओं से बचने में हिमाचल के हर गांव के लिए मिसाल बनी ये पंचायत

मंडी।। यह जरूरी नहीं हर समस्या के समाधान के लिए सरकार की ओर ही हाथ फैलाएं जाएं। अगर इरादे नेक हो तो जन-सहयोग के आपसी सहयोग से भी बहुत सी समस्याओं से निपटा जा सकता है। जंगली जानवरों व लावारिस पशुओं की समस्या पूरे प्रदेश में विकराल बनी हुई है और किसान सबसे ज्यादा इससे पीडि़त हो रहा है लेकिन भांबला पंचायत वासियों ने कृषि विकास संघ (सध्याणी टिक्करी) के अध्यक्ष व पंचायत उप प्रधान रत्न वर्मा की अगुवाई में इस समस्या से निपटने के लिए बाडबंदी का बीड़ा उठाया। इन्होनें जिला प्रशासन व आपसी सहयोग से क्षेत्र की खेतीबाड़ी को बचाने के लिए अपने बलबूते पर बाडबंदी को लगाकर उजाड़ पड़ी कृषि योग्य भूमि को फिर से हरा भरा कर दिया।

इस समस्या से निपटने के लिए भांबला वासियों ने सामुहिक तौर पर निर्णय लिया वह जन सहयोग व जिला प्रशासन की मदद से प्रभावित क्षेत्र में कंटीली तारों लगाकर अपनी खेतीबाड़ी को बचाएंगे। इसके लिए उप-प्रधान रत्न सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई और प्रत्येक प्रभावित परिवार ने इसमें सहयोग दिया । कृषि विकास संघ (सध्याणी टिक्करी) के अध्यक्ष रतन वर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन की विकास में जन सहयोग ग्रामीण योजनाओं के अंतर्गत बाडबंदी योजना को शुरू किया जिसमें 70:30 के अनुपात में जिला प्रशासन ने 9 लाख की राशि स्वीकृत की। जिसके तहत अभी तक 250 बीघा के लगभग कृषि योग्य जमीन को कवर किया गया है जबकि शेष 250 बीघा का कार्य शेष बचा हुआ है जिसपर बाडबंदी का कार्य चला हुआ है। कंटीली तारों से बाडबंदी तो की ही जा रही है साथ ही प्रत्येक गांव में गेट व प्रवेश द्वार भी लगाए गए हैं जहां से लोगों को आवागमन के लिए सुविधा हो शाम को जहां जहां ऐसे गेट व प्रवेश द्वार हैं वहां स्थानीय गांव वासी खुद उन्हें बंद कर देते हैं। इस तरह इस बार पिछले 4-5 वर्षों से उजड़ पड़ी जमीन पर हरी भरी गेहूं की फसल देखने को मिल रही है।

उप प्रधान रत्न वर्मा ने बताया की इस योजना के लिए उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर ने बहुत सहयोग किया उन्होंने समय पर स्वीकृत राशि को जारी कर इस कार्य को रुकने नहीं दिया साथ ही आश्वासन भी दिया की भविष्य में भी यदि इस योजना के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता होगी तो वह इसके लिए भी पंचायत को सहयोग करेंगे । वहीं जिला मंडी के सांसद राम स्वरूप शर्मा ने भी अपनी सांसद निधि से 3.50 लाख रुपये की राशि इस कार्य के लिए दी है। इस कार्य को करने के लिए एक कमेटी का गठन हुआ जिसमें पंचायत उप प्रधान रत्न सिंह वर्मा को अध्यक्ष कश्मीर सिंह कोषाध्यक्ष, अमृत लाल सलाहकार, नंद लाल उपाध्यक्ष व लील देवी को महिला उपाध्यक्ष, हेमराज, राजकुमार, सुबेदार भूमि सिंह, ब्रह्म दास, टेक चंद, ऊषा देवी, आदि को सदस्य नियुक्त किया गया था वहीं वार्ड मेंबर कुलदीप सिंह, मीना देवी आदि ने भी इस कमेटी का भरपूर साथ दिया।

रत्न सिंह वर्मा ने बताया की इस पूरी मुहिम को सिरे चढाने के लिए स्थानीय विधायक कर्नल इंद्र सिंह ठाकुर ने भी हमें बहुत सहयोग किया उन्होंने हर पढाव पर हरसंभव मदद की चाहे वह बजट लाने की बात हो या अन्य किसी प्रकार की औपचारिकताओं को पूरा करने करवाने की बात हो विधायक महोदय ने आगे बढकर साथ दिया इसके लिए हम समस्त पंचायत वासी उनके तहेदिल से आभारी हैं।

गौरतलब है कि आवारा पशुओं द्वारा फसलों को बर्बाद करना प्रदेश के लिए वर्तमान में सबसे गंभीर समस्या बनी हुई है इसके लिए कोई सरकार को जिम्मेदार ठहराता है तो कोई प्रशासन को। प्रदेश में आजीविका का मुख्य साधन या तो सेवा क्षेत्र है या फिर कृषि। प्रदेश की बहुतायत जनसंख्या अभी भी कृषि पर ही आश्रित है। प्रत्येक परिवार प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से इससे कहीं न कहीं जुड़ा हुआ है। वर्तमान में जिस तरह से आवारा पशुओं द्वारा फसलों को बर्बाद किया जा रहा है उससे सडकों के किनारे लगती लगभग 90% कृषि योग्य भूमि पर किसानों ने खेती करना छोड दिया है। भांबला पंचायत में इस तरह का प्रयास न केवल काबिले तारीफ है बल्कि प्रदेश की अन्य पंचयातों के लिए भी उदाहरण है की किस तरह पंचयातें सरकारी योजनाओं को अगर चाहे तो अपने सहयोग से सिरे चढा सकती हैं।

लेखक- राजेश वर्मा

होशियार मामले में सीबीआई के हाथ खड़े करने पर एक पत्रकार की खरी-खरी

इन हिमाचल डेस्क।। मंडी ज़िले के बहुचर्चित फॉरेस्ट गार्ड होशियार सिंह की मौत मामले में जांच कर रही सीबीआई न तो हत्या का केस बना पाई है और न ही उसे होशियार को आत्महत्या के लिए उकसाए जाने के सबूत मिल पाए हैं। हाई कोर्ट के आदेश पर जांच करने आई सीबीआई ने अपने हाथ खड़े करते हुए केस बन्द करने की तैयारी की है। ऐसी खबरें आई हैं कि सीबीआई की शिमला शाखा ने क्लोजर रिपोर्ट बनाने के लिए सीबीआई निदेशालय को पत्र लिख दिया है। क्लोजर रिपोर्ट बनाने की इजाजत मिली तो इसे तैयार करके कोर्ट में पेश किया जाएगा।

पूरे हिमाचल प्रदेश को द्रवित कर देने वाले इस मामले में सीबीआई की इस नाकामी पर सवाल उठने लगे हैं। होशियार मामले की ग्राउंड रिपोर्टिंग करने वाले मंडी के पत्रकार कमलेश रतन भारद्वाज ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए फेसबुक पर मनोभाव पोस्ट किए हैं। पढ़ें उन्हीं के शब्दों में-

“अपना भाई होशियार तो था ही भोला, बस नाम होशियार था इसलिए वन माफिया बलि चढ़ गया, पर तुम भी सीबीआई कहां निकली, हाथ खड़े कर तुमने जो केस बंद करने की दलील दी तो तोते की संज्ञा फिर सार्थक हो गई।”

कमलेश रतन भारद्वाज।।  आखिर कौन होशियार निकला सीबीआई या वन माफिया निर्णय आप करें! इस मामले को बेहद करीब से देखा। आपकी नजर कुछ बीते हुए पल। आज सुबह जब सीबीआई के सरेंडर को अमर उजाला के मुख्य पन्ने पर देखा तो खुद को रोक नहीं पाया।

सियासत दानों के लिए यह महज मुद्दा था जो किसी की हार तो किसी की जीत का सबब बन गया। सत्ता बदली और सरदार बदले। टोल फ्री नंबर भी जारी हो गए। पर जिस को होशियार होना था वह देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी अब सरेंडर तक पहुंच गयी।

बहुचर्चित होशियार सिंह मौत मामले में एजेंसी अब अवैध कटान के मामले तक ही सिमट गई है। अजब तो यह है की पुलिस के लिए किसी समय हत्या से आत्महत्या बनी यह गुत्थी सीबीआई भी नहीं सुलझा पायी। अखबारों के लिए महज एक खबर जो कभी मैंने भी लिखी अब तक वह न्याय की एक ललक थी , तुम्हारे सरेंडर से अब एक खबर बन कर रह गई ।

यह बात उन दिनों की है जब अमर उजाला अखबार ने इस मसले को मुख्य पन्नों पर लाकर हमारी टीम को एक मंच और लक्ष्य दे दिया था। मैं अपने मित्र चित्र सिंह के साथ जंजैहली स्थित माता शिकारी देवी मंदिर की ओर जा रहा था। अमर उजाला के शिमला स्थित राज्य कार्यालय से कॉल आई। लाइन पर संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी और हमारे प्रेरक थे। बोले कहां जा रहे हो। मैंने उत्तर दिया महोदय साप्ताहिक अवकाश है, जंजैहली क्षेत्र में ही मां शिकारी के दर्शनों को जा रहे हैं। निर्देश मिले होशियार की डेड बॉडी उसके पैतृक गांव जरोठी में लाई जा रही है।

गरीब परिवार का बच्चा होशियार सिंह, जिसके माता-पिता भी नहीं थे, आज तक इंसाफ हासिल नहीं कर पाया।

आदेश मिलते ही योजना तुरंत बदल गई और हम kuthah मेले मैं पहुंच गए। यहां पर परम मित्र और इस कड़ी के अहम किरदार और धाकड़ पत्रकार गगन सिंह ठाकुर भी मिल गए। मेले के दो-तीन चक्कर काटकर समय गुजर गया। अब सड़क से लगभग 20 मिनट की खड़ी चढ़ाई के ऊपर फॉरेस्ट गार्ड होशियार सिंह का गांव होने की सूचना वहां पर मौजूद पुलिसकर्मियों से मिली। पता चला कि एसडी एम जंजैहली पहले ही गांव के लिए रवाना हो चुके थे। उनका नाम अभी तक मुझे याद है शायद अश्वनी कुमार।

अब मसला चढ़ाई चढ़ने का था जिसके स्कूल टाइम के बाद आदत नहीं रही थी। वहीं दूसरी ओर मित्र गगन सिंह ठाकुर भी राधास्वामी निकले। राधास्वामी होने का घाटा यह था की एक लोकल बंदा अब हमारे साथ होशियार के गांव तक नहीं पहुंचेगा। ठाकुर ने कहा कि वह वहां नहीं जा सकते हैं नियमों से बंधे हैं।

अब होशियार सिंह की डेड बॉडी को एक डंठल के सहारे उठाएं गांव के लोग सड़क से ऊपर की ओर जरोठी गांव की ओर चल दिए। गांव के भाईचारे के कंधे पर डेड बॉडी नहीं एक इंसाफ की उम्मीदों का बोझ था। हम भी उनके साथ हो गए। रास्ते में होशियार के ही कुछ मित्रों से बात हुई तो बोले जनाब जिन रास्तों पर आज वह कंधों पर जा रहा है और आपको पैदल चलने में भी तकलीफ आ रही है यही रास्ता होशियार का फॉरेस्ट गार्ड की भर्ती से पहले रनिंग ट्रेक था।

अब चुनौती यह थी की कवरेज के आदेश तो मिल गए थे लेकिन आक्रोश के सामने कैमरा खोल देना भावनाओं से खेलने से भी कम नहीं होता। इस बात को मैं और मेरा मित्र चित्र सिंह भलीभांति जानते थे। भाई चित्र सिंह जी का भी सीएम जयराम ठाकुर की तरह यह गृह विधानसभा क्षेत्र है। उनका साथ होना मेरे लिए बड़ी राहत थी। उन दिनों वह ऊना जिला में अमर उजाला के प्रसार प्रभारी के पद पर कार्यरत थे। अखबार की नौकरी ऐसी कि अब घर आना जाना भी कम ही होता था। उनकी सांस तो मेरे से पहले चढ़ गई। जैसे ही होशियार सिंह के घर में पहुंचे तो बहादुर पोते के इंतजार में बैठी दादी मां हिरदी देवी पर नजर गई। दादी मां की आंखें पथरा सी गई थी। अब आंसू भी सूख गए थे।

वन विभाग के आला अधिकारी आए सांत्वना दी और चले गए एसडीएम साहब तो पहले से ही पहुंच चुके थे। पोते के शव के आंगन में पहुंचते ही दादी मां दीवार के सहारे बैठ गई। दिल को दहला देने वाला चीखो-पुकार का वह भयावह मंजर आज भी आंखों के सामने घूमता है जब जब मुझे होशियार सिंह याद आता है। अब दिमाग जब शून्य हो चुका था तो मैं भी एक कुर्सी के सहारे एसडी एम के बगल में बैठ गया। अब ऐसे हालात में फोटो लेना और भावनाओं को बनाए रखना एक चुनौती था। एक ग्रामीण से बात कर होशियार के चाचा तक पहुंचा और उन्हें गले लगा कर सांत्वना देकर अपना परिचय भी दिया। उनसे अनुमति मिली तो फोटो लेना भी शुरू कर दिए।

मन में सोच रहा था दिमाग तो शून्य हो गया है खबर क्या लिखूंगा। तभी किसी आक्रोशित ग्रामीण ने वन विभाग के आला अधिकारियों के आंगन में पहुंचते हैं जोर से आवाज लगाई यह हमारे बेटे को नहीं माफिया ने सरकार को उल्टा लटकाया है। यही अगले दिन अमर उजाला अखबार के प्रदेश पन्ने की खबर थी, हेडिंग था बेटे को नहीं, माफिया ने सरकार को उल्टा लटकाया।

आक्रोष लगातार बढ़ रहा था। अगले दिन मंडी लौटना हुआ था। कर्मचारी संघ, स्वयंसेवी संस्थाएं सड़कों पर उतर आए। इसका अकेला कारण सिर्फ वन माफिया नहीं था। कर्मचारी संगठनों में जिसमें वन विभाग कर्मचारी संघ मुख्य था। इन संगठनों के धरने प्रदर्शन को इस लक्ष्य के साथ मुख्य पन्नों पर जगह दी जा रही थी की सरकार की नींद खुलेगी तो शायद गरीब के बेटे को इंसाफ मिल सके। फिर मामला पुलिस से होता हुआ सीबीआई रिटर्न ऑफिसर आसिफ जलाल के पास पहुंच गया। वह जांच के लिए मंडी पहुंचे 24 घंटे के भीतर ही मामला सीआईडी को सौंप दिया गया। पुलिस की जांच कई मायनों में मीडिया और लोगों को अखर रही थी। सीआईडी को जांच सौंप कर सरकार ने आक्रोष को थामने की कोशिश की।

पुलिस के बाद सीआईडी उस पेड़ पर उल्ट लटक कर कई महीनों तक खाली हाथ रही। कर्मचारी संगठनों के दबाव और मीडिया में छपी खबरों पर स्वत संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने सीबीआई को जांच के आदेश दिए। हमारे लिए व्यक्तिगत तौर पर यह किसी जीत से कम नहीं था। उम्मीद थी कि देर से ही सही अब सीबीआई तो एक गरीब के बेटे को न्याय दिला ही देगी। लेकिन आज सुबह जब अमर उजाला के मुख्य पन्ने पर इस खबर को पढ़ा तो मुंह से यही निकला लानत है।

शाम तक इस पर मंथन किया और फिर खुद पर अथवा होशियार सिंह पर तरस खाने के बजाय दिल को तसल्ली दी कि गरीब के बेटे ने वर्दी का कर्ज़ चुका दिया, लेकिन खुद को सर्वोच्च जांच एजेंसी बताने वाली सीबीआई खाली हाथ सरेंडर कर गई।

पहले हत्या फिर आत्महत्या और अब सर्वोच्च जांच एजेंसी के लिए कुछ भी नहीं महज अवैध कटान का मामला। सवाल यह अभी तक अनसुलझा है की क्या होशियार सिंह बिना किसी दबाव अथवा किसी के उकसाने के बिना ही जहर खाकर पेड़ पर उल्टा लटक गया। आत्महत्या, कत्ल या मौत आखिर यह क्या था। सीबीआई के लायक ऑफिसर क्या इन छोटे-छोटे सवालों पर विचार नहीं करते।

अब एक गाना याद आया इसमें तेरा घाटा सरकार (whatever NDA or UPA) जिसने इतनी निकम्मी जांच एजेंसी को पाल रखा है। एक बेटे का कुर्बान होने के बाद अब कुछ नहीं जाता, न्याय मिल जाता तो एक फॉरेस्ट गार्ड भी शहीद कहलाता।

(पत्रकार कमलेश रत्न भारद्वाज की फेसबुक टाइमलाइन से साभार)

आंखों में आंसू ला देगा ‘शहीद वनरक्षक होशियार सिंह का पत्र’

हिमाचल की प्राइवेट यूनिवर्सिटी के छात्र को हमले की पहले से थी जानकारी?

सोलन।। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में सीआरपीएफ जवानों पर हुए आतंकी हमले को लेकर हिमाचल के बद्दी जिले की पुलिस ने एक छात्र को गिरफ्तार किया है। यह छात्र श्रीनगर का रहने वाला है। उसे यूनिवर्सिटी ने सस्पेंड भी कर दिया है।

साथी छात्रों के बाद यह मामला यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास पहुंचा था। आरोप है कि उसने पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद सोशल मीडिया पर एक देश विरोधी पोस्ट शेयर किया जिसमें उसने दावा किया कि उसे पहले से हमले की जानकारी थी।

न्यूज 18 की खबर के मुताबिक इस छात्र ने पुलवामा हमले को अंजाम देने वाले हमलावर के लिए लिखा था- खुदा आपको जन्नत बख्शे। ऐसा भी कहा जा रहा है कि उसने एक आतंकी संगठन के पोस्ट पर कॉमेंट भी किया था। इस पोस्ट में आईईडी के ज़रिए धमाका किए जाने की तैयारी का ज़िक्र था।

कथित तौर पर इस पोस्ट पर इस छात्र ने लिखा था-‘अल्लाह ताला सलामत रखे।’ इस मामले को लेकर यूनिवर्सिटी ने बरोटीवाला थाने को सूचित किया और छात्र को गिरफ्तार कर लिया गया है।

जिला पुलिस बद्दी के पुलिस अधीक्षक रोहित मालपानी ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार किया है। उनका कहना कि जांच जारी हैं।

अब ईरान ने कहा- आतंकियों पर कार्रवाई करे वरना नतीजे भुगतने को तैयार रहे पाकिस्तान

इन हिमाचल डेस्क।। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ पर हुए आत्मघाती हमले में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के शामिल होने के बाद ईरान ने भी यह कहा है कि पाकिस्तान के सुरक्षा बल ‘आत्मघाती बॉम्बर्स’ को पनाह देने का काम करते हैं। ईरान ने पाकिस्तान से अपने यहां छिपे आतंकियों पर कार्रवाई करने को कहा है और चेताया है कि ऐसा न किया तो गंभीर नतीजे भुगतने होंगे।

दरअसल गुरुवार को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमले से एक दिन पहले ही बुधवार को ईरान में भी एक आत्मघाती हमला हुआ था। इस हमले में ईरान रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के 27 सैनिकों की मौत हो गई थी। इसका तरीका भी पुलवामा जैसा था। पाकिस्तान सीमा से लौट रहे जवानों की बस के बगल में विस्फोटकों के भरी गाड़ी लाकर आतंकवादी ने धमाका कर दिया था।

ईरान और पुलवामा में हुआ हमले का तरीका काफी हद तक मिलता-जुलता है। पुलवामा में अटैक की भी ईरान ने तीखी निंदा की थी। नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने ट्वीट कर कहा था, ‘ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बहराम कासेमी ने भारत में हुए आतंकी हमले की तीखी निंदा की है, जिसमें दर्जनों लोग मारे गए हैं और घायल हुए हैं।’

अब ईरानी सेना के मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफरी ने आतंकी संगठन जैश-अल-अदल का जिक्र करते हुए कहा, ‘पाकिस्तान की सरकार ऐसे आतंकियों को पनाह देती है, जो हमारी सेना और इस्लाम के लिए खतरा है। उसे पता है कि ये लोग कहां छिपे हैं और पाकिस्तानी सुरक्षा बल उन्हें समर्थन देने का काम करते हैं।’

शहीद तिलक राज को हजारों लोगों ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई

कांगड़ा।। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हुए हिमाचल प्रदेश के बेटे तिलक राज का अंतिम संस्कार शनिवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव में किया गया।

इस अवसर पर हजारों लोगों ने नम आंखों से शहीद को अंतिम विदाई दी। लोगों में आतंकी संगठनों और पाकिस्तान के खिलाफ लोगों में रोष देखने को मिला। भारत माता की जय और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगाए गए।

शहीद के अंतिम संस्कार में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, सांसद शांता कुमार, खाद्य आपूर्ति मंत्री किशन कपूर, नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया, ज्वाली के विधायक अर्जुन ठाकुर, डीसी कांगड़ा संदीप कुमार, एसपी कांगड़ा संतोष पटियाल समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

शहीद की पत्नी को मिलेगी नौकरी
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शहीद तिलक राज की पत्नी को सरकारी नौकरी देने का आश्वासन दिया। साथ ही गांव के स्कूल को शहीद के नाम रखने और इसका दर्जा मिडल से राजकीय उच्च पाठशाला करने की घोषणा की।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार पूरी तरह सक्षम है और पुलवामा आतंकी हमले का मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा।

ओ गालियां देने वालो! आप पर गुस्सा नहीं, तरस आता है

गालियों और धमकियों के लिए शुक्रिया। आपकी टिप्पणियों से न तो गुस्सा आया और न ही डर लगा। बल्कि हंसी आई, तरस आया। कुछ दुख भी हुआ। जब-जब लोग हमें गालियां देते हैं तो हमें लगता है अभी इन लोगों के हृदय में परिवर्तन लाने के लिए अभी बहुत कुछ करना होगा। इसमें कोई शक नहीं कि पुलवामा हमले में जवानों की शहादत से हम सब दर्द और गुस्से में हैं। मगर अक्सर दर्द और गुस्सा हमारी समझ पर पर्दा डाल देता है। गुस्से में हम अक्सर सही-गलत का फर्क भूल जाते हैं। कुछ लोग हैं जो ऐसे मौकों का फायदा उठाते हैं। उन्हें सस्ती लोकप्रियता करने और राजनीति चमकाने का आसान रास्ता यही लगता है।

पालमपुर वाली घटना को लेकर ज़रा दो पल विचार कीजिए। बहुत से लोग कहेंगे कि ये मुस्लिम होते ही ऐसे हैं तो कुछ कहेंगे कि जो पिटे वे कश्मीरी थे। लेकिन जिन्हें पीटा गया, क्या वो आतंकवादी थे? क्या पुलवामा हमले को उन लोगों ने अंजाम दिया था? अगर वे आतंकी होते तो मार खा रहे होते? और जो लोग उन्हें पीट रहे थे, क्या वे ऐसा करने के लिए अधिकृत हैं? क्या कोई भी किसी को ऐसे पीट सकता है?

अगर आपका जवाब हां में है तो एक बार खुद को उनकी जगह रखकर सोचिए। कल को आप कहीं जाएं और आपको इसलिए पीट दिया जाए कि आप हिन्दू हैं। ये कहते हुए कि तुम हिंदुओं ने हमारे समुदाय के बंदों को पीटा, हम बदला ले रहे हैं। क्या यह तर्कसंगत बात होगी? ये सोशल मीडिया, मीडिया और सुनी-सुनाई बातों के आधार पर आप आपको नफरत की आग में मत झोंको। शायद आपमें से बहुत से लोग वर्कप्लेस, स्कूल या अन्य जगह किसी मुस्लिम के संपर्क में भी नहीं आए होंगे, मगर कुछ लोगों के एजेंडे के कारण धारणा बना बैठे हैं कि हर मुस्लिम एक जैसा है।

और बुद्धिजीवियों से शिकायत। ज़रा पिछली दो पोस्ट्स पर आए कॉमेंट्स पढ़िए। समझ आ जाएगा कि आप जो खुद को उदार और दूसरों को कट्टर बोलते हो, उसकी हक़ीक़त क्या है। मारने की बातें की जा रही हैं, काटने की बातें की जा रही हैं, ज़हर उगला जा रहा है। अगर ऐसी ही बातें मुस्लिम समुदाय के लोग कर रहे होते तो आप हाहाकार मचा रहे होते कि ये तो होते ही ऐसे हैं। मगर हिन्दू नफरत, हिंसा और साम्प्रदायिक बातें कर रहे हैं तो आप खामोश हैं।

बहरहाल, इन हिमाचल देश के संविधान के हिसाब से आगे भी काम करता रहेगा। ‘इन हिमाचल’ को अनफॉलो करना है तो शौक से कीजिए। लाइक्स और क्लिक्स की चिंता हमें कभी नहीं रही। पहले दिन से ‘इन हिमाचल’ ने वो बातें छापी हैं जो प्रदेश और देश के हित में रही हों। इसके लिए हम राजनीतिक दलों, नेताओं, उनके चमचों, सत्ता, विपक्ष, अफसरों, ठेकेदारों और पत्रकार साथियों की आंख की किरकिरी भी बने हैं। इसलिए, जिन्हें अनलाइक करना है वो अनलाइक करें, जिन्हें गालियां देने के लिए आते रहना है, उनका भी स्वागत।

टीम इन हिमाचल

कब तक आतंकवाद को यूं ही सहता रहेगा हिंदुस्तान

के.एस. ठाकुर।। जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवंतीपुर के पास गोरीपोरा में जैश ए मोहम्मद आतंकी संगठन द्वारा सीआरपीएफ की 54वी बटालियन व आर.ओ.पी. के दो जवानों सहित 44 जवान शहीद हो गएl यह आतंकवादी हमला इतना दर्दनाक था, जो कि हर किसी को झकझोर कर गयाl भारत में ही नहीं विश्व के शक्तिशाली देशों रूस, अमेरिका, फ्रांस तथा संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा इस कायर हमले की घोर निंदा की गईl भारत पर आतंकवाद का काला साया पिछले दो दशकों से मंडरा रहा हैl देश की नीति निर्माता तथा राजनीतिक नेतृत्व आतंकवाद जैसी लाइलाज बीमारी पर भी वोट बटोरने को बेताब रहता हैl पक्ष तथा विपक्ष की बयान बाजी कहीं न कहीं भारतीय सेना के जवानों पर भारी पड़ रही हैl जम्मू कश्मीर अपने अस्तित्व से लेकर अब तक निरंतर भारत की अखंडता को चुनौती देता आ रहा हैl केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) से समर्थन वापस लेने के कारण जम्मू कश्मीर में सीधा केंद्र का शासन स्थापित हो गया थाl साधारण शब्दों में बात करें तो जम्मू कश्मीर में शासन व्यवस्था की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की बनती हैl केंद्र में भाजपा की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ सत्तासीन हैl वैश्विक मंच पर भी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा आतंकवाद के मुद्दे को जोरों शोरों से उठाया गया लेकिन किसी भी तरह का कोई कठोर निर्णय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखने को नहीं मिलाl जिसके परिणाम स्वरूप 14 फरवरी 2019 का दिन भारत के इतिहास में “काला दिवस” के रूप में समा गयाl आतंकवादी संगठनों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वह दिनदहाड़े सरेआम निहत्थे लोगों तथा भारतीय सेना के सिपाहियों को अपना निशाना बना रहे हैंl विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का नेतृत्व व जनमानस धरा का धरा बैठा हुआ हैl

दर्दनाक घटना घटित होने के बाद संवेदनाएं तथा प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया, टीवी चैनलों तथा समाचार पत्रों में सुर्खियां बटोरती हैl केंद्र में भाजपा की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ सत्तासीन है उम्मीद जताई जा रही थी कि यह सरकार आतंकवाद पर कड़ा प्रहार करेगीl सर्जिकल स्ट्राइक जैसे साहसिक कार्यों द्वारा कुछ हद तक यह साबित करने की कोशिश भी की गईl वैश्विक मंचों पर भी आतंकवाद के मुद्दे को गंभीरता से उठाया गया लेकिन यह भारत का दुर्भाग्य ही है कि आतंकवाद पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो सकीl सोलहवीं लोक सभा का नेतृत्व कुछ दिनों का मेहमान हैl ऐसे में कोई कठोर कानून तो नहीं बन सकता, लेकिन पुलवामा की घटना में शहीद हुए सैनिकों की शहादत का बदला जरूर दिया जा सकता हैl सोशल मीडिया पर भारतीय युवा तथा देशभक्त इस कायराना हरकत का बदला लेने के लिए अपनी प्रतिक्रियाएं उगल रहा हैl सोशल मीडिया रन का मैदान बन गया हैl अब देश के राजनीतिक नेतृत्व तथा सैन्य ताकत द्वारा आतंकवाद के पनाहगारो को उसकी औकात दिखाने का समय आ गया हैl

आखिर कब तक सहन करेंगे?
3 जनवरी 2016 पठानकोट एयरबेस पर आतंकवादी हमले में 7 जवानों की मौत हुई, 20 से ज्यादा घायल हुए थेl 21 फरवरी 2016 श्रीनगर के आंचलिक इलाके में एक सरकारी भवन में छिपे आतंकियों से मुठभेड़ में दो कैप्टन समेत 3 कमांडो मारे गए थेl 25 जून 2016 श्रीनगर के पंपोर के निकट फ्रेंस्टबल में सीआरपीएफ के काफिले पर हमले में आठ जवान शहीद हो गए थेl 18 दिसंबर 2016 उरी में सेना के मुख्यालय पर 18 जवान शहीद हुए 32 अन्य घायल हुए थेl वर्ष 2017 में जुलाई महीने में अमरनाथ यात्रा से लौटे बस पर आतंकवादी हमले में 7 लोग मारे गए थेl वर्ष 2016-17 में करीब 41 सैनिक सीधे आतंकवादी हमले में शहीद हुएl इसके अलावा छुटपुट घटनाओं में भी अनेक सैनिकों की शहादत हुईl लेकिन वर्ष 2019 में प्रारंभिक महीनों में ही एक आतंकवादी हमले में 44 सैनिकों का शहीद होना बहुत बड़ी दर्दनाक घटना हैl वर्ष 2018 में ऐसा प्रतीत हो रहा था कि आतंकवाद पर लगाम लग रही है लेकिन वर्ष 2019 में सब पर पानी फिर गयाl गृह मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक कश्मीर में सेना का ऑपरेशन ऑल आउट जारी है जिसके तहत पिछले 3 सालों में सुरक्षाबलों ने 586 आतंकी मार गिराएl नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन पर भी भारतीय सेना के जवान मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैंl सीमा पर लगातार आतंकी मुंह की खा रहे हैं, ऐसे में उन्होंने अपनी साजिशों को सरहदों से सड़कों पर पहुंचाने की साजिशें रची हैl इन साजिशों को भांपने में सैन्य शक्ति नाकाम सिद्ध हुईl जिसके परिणाम स्वरूप अवंतीपुरा की सड़कें खून से लथपथ हो गईl

सेना के आधुनिकीकरण में देरी क्यों?
संसद में आधुनिक सैन्य साजो- सामान, हथियार व लड़ाकू उपकरणों को खरीदने के लिए गहमागहमी मची हुई हैl राफेल का मुद्दा जगजाहिर हैl सैन्य आधुनिकीकरण में लेटलतीफी भी आतंकवाद को बढ़ावा देती हैl स्वार्थ पूर्ण राजनीति भारतीय सेना पर भी भारी पड़ रही हैl आतंकवादी संगठन आधुनिक हथियारों से लैस होते हैं और उनका सूचना तंत्र भी भारतीय सैन्य प्रणाली से कहीं आगे बढ़ चुका हैl ऐसे में भारतीय सैन्य के काफीलो पर आतंकवादी हमले बढ़ते जा रहे हैंl देश की सुरक्षा एकता व अखंडता के साथ किसी भी तरह का कोई भी कंप्रोमाइज नहीं होना चाहिए तभी भारत सुरक्षित बन सकता है तथा बाहरी दमनकारी शक्तियों से महफूज रह पाएगाl

130 करोड़ के भारतवासी माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से यह गुहार लगाए बैठे हैं पुलवामा में भारतीय सैनिकों की अमर शहादत के गुनाहकारों को कड़ी सजा दी जाए, तभी भारत माता के इन सपूतों की आत्मा को शांति मिलेगीl हिमाचल प्रदेश के हर तीसरे घर से एक जवान भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहा हैl इस छोटे से पहाड़ी प्रदेश का देश की सुरक्षा में बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहता हैl शहादत में भी प्रदेश के जवान सबसे आगे हैंl देश के लिए मर-मिटने की कसम खाकर सेना में भर्ती होते हैं, पूर्ण ईमानदारी, सजगता के साथ अपनी ड्यूटी करते हैं तथा अंत में तिरंगे के कफन में देवभूमि की माटी में समा जाते हैंl इन वीर जवानों की गौरवशाली शहादत का मोल धन, यश से पूरा नहीं किया जा सकताl लेकिन फिर भी इनको एक सम्मानजनक विदाई देने का प्रावधान होना चाहिएl

पुलवामा आतंकी हमले में कांगड़ा जिले के जबाली विधानसभा क्षेत्र के सीआरपीएफ जवान तिलक राज शहीद हो गयाl इस वीर जवान की शहादत की खबर से पूरा हिमाचल गहन सदमे में चला गयाl केंद्रीय नेतृत्व को भी हिमाचली वीर जवानों की शहादत को उचित मान सम्मान तथा प्रतिनिधित्व देना चाहिएl काफी लंबे समय से हिमाचल अपनी अलग बटालियन की मांग कर रहा हैl केंद्र सरकार को हिमाचल को अपनी अलग से बटालियन दे देनी चाहिए।

लेखक कर्म सिंह ठाकुर सुंदरनगर, मंडी, हिमाचल प्रदेश से हैं, उनसे 98053 71534 पर सम्पर्क कर सकते हैं।
(ये लेखक के निजी विचार हैं)

देखे हिमाचल पुलिस, कैसे रची जा रही साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने की साजिश

पालमपुर।। कांगड़ा जिले के पालमपुर में बस अड्डे से निकल रहे मुस्लिम युवकों की पिटाई का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस का कहना था कि उसे शिकायत नहीं मिली। मगर अब संकेत मिल रहे हैं कि कुछ छुटभैये नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए पुलवामा में जवानों की शहादत को इस्तेमाल करते हुए मुस्लिमों को निशाना बना रहे हैं।

आज हुआ हमला कोई सामान्य मारपीट की घटना नहीं बल्कि साजिश थी। एक दिन पहले योजना बनाई गई और आज अंजाम दिया गया। यही नहीं, गर्व से आंकड़ों को फेसबुक पर शेयर भी किया जा रहा है।

इन पोस्ट्स से पुलिस क्या साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने और लोगों पर बिना उकसावे के हमला करने की धाराओं सहित मामला दर्ज करके जांच के बाद कार्रवाई करेगी या नहीं देखना होगा।

स्क्रीनशॉट देखें, इन्हें शेयर करने वाला शख्स पालमपुर से है। खुद को हिंदू जागरण मंच के प्रदेश महामंत्री बताने वाले आकाशदीप जरयाल की पोस्ट्स देखें-

कल योजना बनाई गई कि मुस्लिमों पर आते ही हमला किया जाए।

आज उसी तर्ज पर हमला हुआ।

अब स्कोर बताया जा रहा।

क्या पुलिस इस तथाकथित स्कोर के बढ़ने की प्रतीक्षा कर रही है? यह जांच करना पुलिस का काम है कि इस हमले और इन पोस्टों के बीच संबंध है या नहीं। वीडियो में कौन लोग हैं जो कानून व्यवस्था का मजाक बना रहे हैं, उनका पता भी इनसे पूछताछ पर चल सकता है।