हिमाचल में कांग्रेस बनाएगी अगली सरकार: वीरभद्र सिंह

शिमला।।  पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि राज्य में अगली सरकार कांग्रेस की बनेगी। कुठाड़ (कृष्णगढ़) में उन्होंने कहा कि सरकार बनते ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुबाथू का दर्जा बढ़ाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र किया जाएगा।

पूर्व सीएम ने कहा, “कांग्रेस बिखराव की राजनीति नहीं करती तथा सबको साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है। सरकार बनने पर सुबाथू की जनता की उपतहसील की मांग पर ईमानदारी से विचार किया जाएगा।”

वीरभद्र ने कहा कि ‘जनता को समझ आ गया है कि कौन गुमराह करता है और कौन विकास को तरजीह देता है।’ उन्होंने कहा कि नगर निकाय एवं ग्राम पंचायत के चुनावों को सैमीफाइनल का दर्जा दिया जाता है। अब तक के नतीजों में कांग्रेस का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है।

विरोध हुआ तो बोले मंत्री महेंद्र सिंह- तुम जैसे बहुत देखे, तुम्हारी वजह से नहीं हूं मैं

धर्मपुर।। हिमाचल प्रदेश के जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर को उस समय अजीब स्थिति का सामना करना पड़ा जब उनकी अपने ही इलाके के लोगों से बहस हो गई। बताया जा रहा है कि मंत्री महोदय अपनी बेटी वंदना के पक्ष मे ंप्रचार कर रहे थे जो सजाओ पिपलु वॉर्ड से जिला परिषद चुनाव लड़ रही हैं। इसी दौरान कुछ लोगों ने विरोध करते हुए गो-बैक के नारे लगा दिए।

वीडियो का जो हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, उसमें नारेबाजी कर रहे लोगों और मंत्री के बीच शब्दों का तीखा आदान प्रदान भी सुनाई दे रहा है। मंत्री कहते हैं- मैंने आप जैसे बहुत देखे हैं। लोग कहते हैं कि वे अपनी समस्या रखना चाहते हैं। इस बीच नारेबाजी जारी रहती है। आगे मंत्री कहते हैं- मैं तुम लोगों की वजह से नहीं हूं। तो फिर कोई कहता है- हमने वोट दिए हैं। फिर किसी ने कहा- हम भीख नहीं मांग रहे।

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इसके बाद मंत्री अपनी गाड़ी पर सवार होकर चले गए। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही मंत्री के बेटे रजत ठाकुर को भी विरोध का सामना करना पड़ा था। मंगलवार को जब वह सरकाघाट में अपने ससुर के पक्ष में प्रचार कर रहे थे, तब लोगों ने उनकी गाड़ी रोक दी थी। पूरी खबर आगे पढ़ें-

लोगों ने रोकी प्रचार करने निकले मंत्री महेंद्र सिंह के बेटे की गाड़ी

लोगों ने रोकी प्रचार करने निकले मंत्री महेंद्र सिंह के बेटे की गाड़ी

रितेश चौहान, सरकाघाट, फॉर इन हिमाचल।। प्रदेश भाजपा मीडिया प्रभारी एवं जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर के बेटे रजत ठाकुर का भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा जमकर विरोध किया और उनके काफिले को प्रचार के लिए जाने से रोक दिया। यही नहीं नाराज कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। लोगों का आरोप था किसी बाहरी व्यक्ति को प्रचार करने के लिए वह घुसने तक नहीं देंगेl

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और मिली जानकारी अनुसार रजत ठाकुर मंगलवार को ज़िला परिषद का चुनाव लड़ रहे अपने ससुर पृथ्वीराज धूमल का प्रचार करने सरकाघाट विधानसभा क्षेत्र की चौरी पंचायत में जा रहे थे। वहां पर भाजपा के ही दूसरे प्रत्याशी चंद्रमोहन शर्मा का प्रचार कर रहे दर्जनों कार्यकर्ताओं ने रजत ठाकुर के काफिले को रोक लिया और जमकर नारेबाजी की। लोगों ने साफ कहा कि किसी भी बाहरी व्यक्ति को अपनी विधानसभा क्षेत्र में प्रचार नहीं करने देंगेl

लोगों का कहना था कि ‘रजत ठाकुर किस हक से सरकाघाट विधानसभा क्षेत्र में प्रचार करने आ रहे हैं? जब उनके बच्चों को नौकरी चाहिए थी तो उन्होंने सरकाघाट के बेरोज़गारों के बजाए अपनी विधानसभा क्षेत्र धर्मपुर में जल शक्ति विभाग में सैकड़ों लोगों को नौकरियां प्रदान कर दी। आज वही लोग सरकाघाट विधानसभा क्षेत्र में जलशक्ति विभाग मे पैरा पीटर और वाटरगार्ड लगे हुए लोग कार और बाइकों में पानी छोड़ने हमारे क्षेत्र में आते है और चार घंटे बाद चले जाते हैं जबकि हमारे बच्चे बिल्कुल बेरोजगार घर बैठे हैं।”

उधर, चंद्रमोहन शर्मा ने कहा कि उन्हें इस बारे में कुछ भी मालूम नहीं है,  वह अलग जगह प्रचार कर रहे हैं और उनके पक्ष में दर्जनों स्थानों पर लोग खुद प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें नहीं मालूम कि किसका रास्ता रोका और क्यों रोका, लोगों का अपना विरोध का तरीक़ा हो सकता है। रजत ठाकुर को कई फ़ोन किए गए पर उन्होंने बात तक नहीं की।

WhatsApp छोड़ Signal पर जाना चाहते हैं? जानें ये काम के फीचर

इन हिमाचल डेस्क।। वॉट्सऐप की ओर से नई प्राइवेसी पॉलिसी जारी करने के बाद लोगों के मन में यह शंका पैदा हो गई है कि उनकी चैट्स सुरक्षित हैं या नहीं। वॉट्सऐप पहले लोगों की सुरक्षा और निजता पर जोर देता था मगर अब उसने इन बातों को हटा दिया है। आपकी चैट्स एंड टु एंड एनक्रिप्टेड तो रहेंगी मगर फिर भी वॉट्सऐप अब इस बात की गारंटी नहीं देता कि आपकी जानकारियों को कहीं और इस्तेमाल किया जाएगा या नहीं।

इसके बाद से ही लोग वॉट्सऐप छोड़ अन्य ऐप्स की ओर रुख करने लगे हैं। टेलिग्राम और सिगनल इसी तरह के दो ऐप हैं। टेस्ला के मालिक एलॉन मस्क ने भी अपने फॉलोअर्स को सिगनल ऐप इस्तेमाल करने की सलाह दी तो हर कोई इस ऐप को इस्तेमाल करने लगा है। लेकिन आप भी ज्यादा सुरक्षा के लिए सिगनल ऐप इस्तेमाल करना चाहते हैं तो इसके कुछ फीचर्स ऐसे हैं, जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए।

आप गूगल प्ले स्टोर या ऐपल ऐप स्टोर पर Signal टाइप करके इस ऐप को इंस्टॉल कर सकते हैं।

  1. स्क्रीन लॉक

सिगनल ऐप में स्क्रीन लॉक का फंक्शन है। अगर आपका फोन अनलॉक होगा, तब भी आप सिगनल ऐप को लॉक रख सकते हैं ताकि कोई आपकी चैट न पढ़ सके।  इस फीचर को ऐक्टिवेट करने के लिए Settings में जाएं, फिर Privacy पर टैप करें और वहां Screen Lock को ऑन कर दें।.

2. जॉइन करने वालों की नोटिफिकेशन ऑफ करें

आपके अलावा आपके संपर्क के कई लोग सिगनल जॉइन करेंगे। तो जैसे ही वो जॉइन करेंगे, आपके कॉन्टैक्ट्स में शामिल लोगों के बारे में आपको नोटिफिकेशन आएगी कि फ्लां शख्स ने सिगनल जॉइन कर लिया। इस तरह की नोटिफिकेशंस आती रहेंगी। इससे बचने के लिए आप इन नोटिफिकेशंस को ऑफ कर सकते हैं।

Settings में जाकर Notifications में जाएं और यहां पर Contact Joined Signal को ऑफ कर दें।

3. फोटो में चेहरे ब्लर करें

प्राइवेसी को लेकर चिंता ज्यादा है तो आप कई बार यह भी चाहेंगे कि आप कोई फोटो भेजें तो उसका चेहरा न दिखे। मान लीजिए आप किसी के साथ खींचा गया अपना फोटो किसी कारण किसी को भेज रहे है और यह नहीं चाहते कि साथ वाले की तस्वीर दिखे, तो सिगनल ऐप का एक फीचर काम का साबित होगा। आपको मैनुअली चेहरा ब्लर नहीं करना होगा।

ऐसा करने के लिए आप + साइन पर टैप कीजिए, फिर जो तस्वीर भेजनी है, उसे सिलेक्ट करिए, फिर ब्लर बटन पर टैप कीजिए। यह बटन काले और सफेद रंग के बक्सों से भरा सर्कल सा दिखेगा। फिर जो हिस्सा ब्लर करना है, वहां पर उंगली फेरकर  ब्लर कर दीजिए।

4. गायब होने वाले मेसेज

डिसअपियरिंग मेसेज का फीचर वॉट्सऐप ने कुछ ही दिन पहले दिया था मगर सिगनल में यह काफी दिनों से था। इसमें मेसेज कुछ समय बाद डिलीट हो जाते हैं। इसके लिए चैट खोलिए, जिस व्यक्ति को ऐसा मेसेज भेजना है, उसके नाम पर टैप कीजिए और वहां दिख रहे Disappearing Messages को सिलेक्ट कीजिए और जितनी समय बाद मेसेज डिलीट करना है, उसे चूज़ कर लीजिए।

 

अटल टनल रोहतांग: कैसे धरे रह गए इंतजामों के बड़े-बड़े दावे

इन हिमाचल डेस्क।। अटल टनल रोहतांग हिमाचल प्रदेश ही नहीं, देश के लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। जब इसका लोकार्पण किया गया था, तब प्रशासन और पुलिस ने बड़े-बड़े दावे किए थे कि इसमें निगरानी के लिए कैमरे लगे हैं, सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिसकर्मी तैनात होंगे, कोई नियम नहीं तोड़ पाएगा, नियम तोड़ेगा तो तुरंत कार्रवाई होगी, आदि। लेकिन जैसे ही टनल पर टूरिस्ट सीजन में लोड पड़ा, सारे इंतजाम और दावे धरे के धरे रह गए।

पिछले कुछ दिनों में ही टनल के अंदर पर्यटकों द्वारा हुड़दंग मचाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पुलिस ने हुड़दंगियों को हिरासत में लिया, वाहन भी जब्त किए मगर ये सब घटना हो जाने के बाद की गई कार्रवाई है। जबकि दावा तो यह किया गया था कि ऐसी नौबत ही नहीं आएगी। अव्यवस्था का आलम यह रहा कि कई बार सुरंग के अंदर जाम लग चुका है। ऐसे वीडियो भी सामने आए जिनमें सुरंग के अंदर फंसे पर्यटक वहीं पर पेशाब करते दिखे।

जाम लगने की एक वजह यह भी बताई जा रही है कि ढंग से तालमेल बिठाने की कोई योजना नहीं बनाई गई है। आरोप है कि पुलिसकर्मी टनल के अंदर ओवरस्पीडिंग का चालन काटने लग जाते हैं जिससे जाम जैसी स्थिति बन जाती है। कई बार ऐसा भी देखने को मिला है कि सुरंग के दूसरे सिरे पर हिमपात के कारण ट्रैफिक थमता है, तब भी दूसरी ओर से वाहनों को सुरंग में दाखिल होने दिया जाता है। इससे अंदर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं।

इस अव्यवस्था के परेशान पुलिसकर्मी भी खीझे हुए नजर आते हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नियमों के अनुसार कार्रवाई करने के बजाय हिंसा का रास्ता अख्तियार कर लेते हैं। एक वीडियो ऐसा भी सामने आया जिसमें पुलिसकर्मी किसी शख्स को टनल के अंदर मुर्गा बनाकर सिर पर लात मार रहे थे। अगर किसी चोट से उस व्यक्ति की मौत हो जाती हिमाचल प्रदेश की भारी बदनामी हो सकती थी। जिस पर्यटन उद्योग पर हिमाचल के हजारों लोगों की रोजी-रोटी टिकी है, वहां पर इस तरह की घटना अच्छा संदेश नहीं देती।

दरअसल इस सुरंग में सेना, बीआरओ और हिमाचल प्रदेश पुलिस की अलग-अलग जिम्मेदारियां है। अगर इसके संचालन में किसी तरह की दिक्कत आती है तो ये सभी की साझी जिम्मेदारी बनती है कि उसे दूर करे। जब तब आपस सही तालमेल नहीं बिठाया जाएगा, तब तक जाम लगने, हुड़दंग मचाने और दुर्घटनाओं आदि का खतरा बना रहेगा। यह काम जल्द से जल्द हो जाना चाहिए वरना जिस निर्माण को इंजीनियरिंग की मिसाल बताया जा रहा है, उसे कुप्रबंधन की मिसाल बनते देर नहीं लगेगी।

हिमाचल: कौन है वोटर लिस्ट से लोगों के नाम गायब करने वाला?

आई.एस. ठाकुर।। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव के दौरान यह देखने को मिल रहा है कि बड़ी संख्या में लोगों का नाम मतदाता सूचियों से गायब है। कई पंचायतों में यह संख्या दहाई के आंकड़े तक को पार कर गई है। कई लोगों को तो उस समय झटका लग गया जब उन्होंने चुनाव लड़ने की तैयारी कर ली मगर बाद में पता चला कि उनका भी नाम मतदाता सूची में नहीं है। इस कारण वे न तो वोट दे पाएंगे और न ही चुनाव लड़ सकेंगे। अगर अपनी समस्या को लेकर कोर्ट जाएंगे तो फैसला शायद तब आएगा, जब पांच साल बीत गए हों।

सवाल उठता है कि ऐसे हालात पैदा क्यों होते हैं? यह पहली बार नहीं है जब ऐसा हो रहा है। हर बार पंचायत चुनावों से पहले ऐसी खबरें आने लगती है कि फ्लां जगह पर बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से बाहर कर दिए हैं। कुछ समय पहले होने वाले लोकसभा और विधानसभा में वोट डालने वाले लोग यह बात नहीं समझ पाते कि आखिर चंद महीनों में ऐसा क्या हो गया कि उनका नाम ही लिस्ट से गायब हो गया।

इस बात को लेकर कांगड़ा के डीसी राकेश प्रजापति एक समाचार पत्र से कहते हैं, “पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों में हिस्सा लेने के लिए मतदाताओं का नाम राज्य चुनाव आयोग की ओर से जारी मतदाता सूचियों में होना जरूरी है। अगर मतदाता का नाम इन सूचियों में नहीं है तो वह वोट नहीं डाल पाएगा। राज्य और राष्ट्रीय चुनाव आयोग अलग-अलग तरीके से मतदाता सूचियां तैयार करता है।”

डीसी साहब की ओर से कही गई आखिरी लाइन पर गौर कीजिए। वह कहते हैं- राज्य और राष्ट्रीय चुनाव आयोग अलग-अलग तरीके से मतदाता सूचियां तैयार करता है। मगर आम जनता क्यों खामिजाया भुगते? राज्य और राष्ट्रीय चुनाव आयोग क्या मतदाताओं को अलग-अलग मतदाता पहचान पत्र जारी करते हैं? जब एक ही मतदाता पहचान पत्र के आधार पर वोट डालने की अनुमति दी जाती है तो फिर अलग-अलग लिस्ट बनाने की क्या जरूरत? और क्यों नहीं दोनों लिस्टों को एक जैसा बनाया जाता, क्यों आपस में डेटा शेयर नहीं किया जाता?

इस तरह के सवाल उठने पर अधिकारी कहते हैं- यह मतदाता का फर्ज है कि वह अपना नाम मतदाता सूची में चेक करे और अगर वह इसमें नही है तो आयोग की ओर से समय भी दिया जाता है ताकि वह अपना नाम शामिल करवा सके। अधिकारी कहते है कि अपना नाम चेक करना मतदाता की जिम्मेदारी है। लेकिन क्या अधिकारी यह जवाब देंगे कि वे अपनी जिम्मेदारी कैसे निभाते हैं? वे अपडेट की गई मतदाता सूची को किस माध्यम से जनता तक पहुंचाते हैं ताकि लोग अपना नाम चेक कर सकें? क्या सभी के पास इंटरनेट ऐक्सेस या उसे इस्तेमाल करके अपना नाम ऑनलाइन चेक करने के स्किल हैं? और कोरोना काल में, जब लोगों को बाहर निकलने से बचने के लिए कहा गया है, तब वे कहां जाकर यह काम करते?

पंचायती राज विभाग क्यों नहीं अगले चुनाव करवाने से पहले पिछले जन प्रतिनिधियों की ड्यूटी लगाता है कि वे अपने इलाके में लोगों के नाम चेक करें।

जब वर्तमान में मौजूद मतदाता ही वोट डालने के अधिकार से वंचित रहते हैं तो चुनाव आयोग किस आधार पर 18 वर्ष की आयु पूरी कर लेने वाले नए मतदाताओं को पंजीकरण के लिए प्रोत्साहित करने का अभियान चलाता है?

जनता को मतलब नहीं कि मतदाता सूची राज्य आयोग बनाए, राष्ट्रीय चुनाव आयोग बनाए या फिर कोई अंतरराष्ट्रीय चुनाव आयोग बनाए। उसे मतलब है कि अगर वह वोट देने का अधिकार हासिल कर चुका है, वह वोट देता रहा है, उसने अपना पता नहीं बदला है और वह मरा नहीं है तो उसे हर बार होने वाले चुनाव में मतदान का अवसर मिलना चाहिए।

मतदाता सूची को अपडेट करने का मतलब है- मृत व्यक्तियों का नाम हटाना, कहीं और अपना पंजीकरण करवाने वालों का नाम हटाना और नए मतदाताओं का नाम जोड़ना। सूची अपडेट करने का मतलब यह नहीं कि बिना किसी वजह से किसी का नाम हटा देना। यूं आपको कहीं किसी सरकारी कागज से किसी का नाम बदलवाना हो तो पच्चीस तरह के कागज मांगे जाते हैं। मगर चुनाव आयोग के अधिकारी आंख मूंदकर नाम हटा देते हैं।

किसी का नाम हटना मानवीय भूल नही हो सकती। खासकर कंप्यूटर के इस दौर में तो इसकी बिल्कुल गुंजाइश नहीं। ऐसे में, सरकारी अधिकारी फालतू के नियमों का हवाला देकर अपनी अक्षमता के कारण होने वाली असुविधा का ठीकरा जनता पर नहीं फोड़ सकते। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि अगर किसी व्यक्ति का नाम अकारण मतादाता सूची से हटता है और वह इस कारण वोट नहीं दे पाता तो इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि उसने एक शख्स को उसके संवैधानिक अधिकार से वंचित किया है।

(लेखक लंबे समय से हिमाचल प्रदेश से जुड़े विषयों पर लिख रहे हैं)

ये लेखक के निजी विचार हैं

पुलिस ने निकाले बर्फ से अटल टनल के पास फंसे 300 पर्यटक

कुल्लू।। हिमाचल प्रदेश पुलिस ने अचानक हुई बर्फबारी के बाद रोहतांग में अटल सुरंग के निकट फंसे 300 से अधिक पर्यटकों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला।

कुल्लू के पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने पत्रकारों को बताया कि शनिवार सुबह कुछ पर्यटक सुरंग पार कर गए थे लेकिन शाम में उन्हें बर्फबारी की वजह से लाहौल में रुकने की कोई जगह नहीं मिली और फिर मनाली लौटने के दौरान वे रास्ते में फंस गए।

एसपी गौरव सिंह ने बताया कि लाहौल-स्पीति पुलिस ने कुल्लू पुलिस के साथ तालमेल बैठाकर पर्यटकों को वहां से निकालने के लिए शाम में सुरंग से वाहनों को भेजा लेकिन ये वाहन बर्फ और फिसलन भरी सड़क होने की वजह से रास्ते में ही फंस गए।

करीब 70 वाहनों को पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकालने के कार्य में लगाया गया, इसमें 48 सीट वाली बस, 24 सीट वाली पुलिस बस और पुलिस त्वरित प्रतिक्रिया दल भी शामिल था।

कुल्लू प्रशासन की बनाई वेबसाइट का डोमेन खरीदकर किसी ने डाल दी अश्लील सामग्री

शिमला।। पिछली सरकार के दौरान कुल्लू प्रशासन की ओर से बनाई गई वेबसाइट गोकुल्लू डॉट कॉम का डोमेन खरीदकर किसी ने अरबी भाषा में अश्लील सामग्री डाल दी है। जब यूनुस खान कुल्लू के डीसी थे, तब भारी भरकम रकम खर्च कर इस वेबसाइट को पर्यटकों के लिए फायदेमंद बताते हुए जगह जगह इसका खूब प्रचार किया था। 2017 में तत्कालीन सीएम वीरभद्र सिंह ने इसे लॉन्च किया था। मगर प्रशासन ने इसका डोमेन रिन्यू नहीं करवाया, किसी और ने खरीद लिया और अब अश्लील सामग्री डाल दी।

टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार सुरेश शर्मा ने इस सम्बंध में अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर पोस्ट डाल कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया है कि कैसे इसका झूठा प्रचार किया गया था और अब सारा पैसा बर्बाद हो गया है। उन्होंने जो लिखा है, आगे पढ़ें-

“किसी को पॉर्न (porn) वेबसाइट देखनी है? कुल्लू प्रशासन की तीन साल पहले बनाई वेबसाइट http://gokullu.com पर क्लिक करो (18 + only)…

ये वो “झूठी” वेबसाइट है जिसके लिए कुल्लू प्रशासन को कई राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। दावा किया था की इस वेबसाइट पर कुल्लू आने वाले पर्यटक (खासकर ट्रैकर) अपना रेजिस्ट्रेशन करें (मोबाइल नंबर डालकर) तो अगर वो रास्ता भटक जाते हैं/गुम हो जाते हैं तो कुल्लू प्रशासन उन को ढून्ढ निकालेगा। बकवास.

मैंने लॉन्चिंग के दिन ही प्रशासन (कुछ साल पहले) को चैलेन्ज किया था कि मैंने अपनी डिटेल डाल दी हैं। ज़रा मेरी लोकेशन ट्रेस करके बताना तो। कहाँ से करते। मैंने अपनी जिओलोकेशन और नेटवर्क रीच ऑफ़ कर रखी थी।

मैंने कई प्रश्न पूछे थे जैसे कि जब कोई ट्रेकर गायब होता है तो दो चार दिन में अक्सर उसका फ़ोन डेड (बैटरी ड्रेन) हो जाता है। और अगर डेड नहीं भी हुआ तो उसके फोन में नेटवर्क नहीं होगा।

जिओलोकेशन या नेटवर्क लोकेशन बेस्ड ये वेबसाइट गायब होने वाले की लास्ट लोकेशन ही बताएगी जबकि बन्दा शायद कई किलोमीटर आगे या इधर उधर निकल चुका होगा। अगर उसके फोन में नेटवर्क होगा तो इस एप्लिकेशन की ज़रूरत उसे नहीं पड़ेगी, वो खुद फोन कर सकता है या अपनी लोकेशन भेज सकता है। इस बेकार वेबसाइट को पॉलिटिकल लेवल पर इतना प्रोमोट किया कि ईनाम मिल गया।

मोबाइल (नंबर) से किसी की लोकेशन पता करने के आमतौर पर 2 तरीके होते हैं। एक तो होता है जीपीएस लोकेशन पता लगाना जो बहुत आसान है। लेकिन इसके लिए फ़ोन से जीपीएस सिग्नल एमिट होना ज़रूरी है। दूसरी टेक्निक है मोबाइल में इस्तेमाल होने वाली सिम और आसपास के टावर्स से ट्रांसमिट/रिसीव होने वाली मोबाइल रेडियो वेब्स के इंटरसेक्शन पॉइंट का पता लगाना, मतलब multilateration of mobile radio signals between phone and mobile towers.

इस तकनीक का इस्तेमाल पुलिस करती है। gokullu.com इन दोनों टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ट्रेकिंग में गायब होने वाले केस में कर ही नहीं सकता।

अब wordpress पर बनी ये below एवरेज सिक्योरिटी वाली इस वेबसाइट को प्रशासन ने renew नहीं किया और किसी दूसरे ने gokullu.com खरीद लिया है। ऐसा नहीं है कि प्रशासन के पास इसको रिन्यू करने को दो चार हज़ार रुपए नहीं थे, बात ये है कि कमर्शियल एक्सटेंशन (.com) वाली इस बेवसाइट का सारा क्रेडिट कोई और ले गया था, इसलिए शायद आगे किसी को इसमें कोई दिलचस्पी ही नहीं थी।

अरबी भाषा में एडल्ट कंटेंट डाल दिया है इस में. इंग्लिश में ट्रांसलेट करके पढोगे तो शर्म आएगी। इस एडल्ट कंटेंट से कुल्लू प्रशासन का कोई लेना देना नहीं है क्यूंकि ये इसके नए मालिक ने डाला है लेकिन मुद्दा ये है कि राष्ट्रीय पुरस्कार लेने वाली और दूसरों की जान बचाने का दावा करने वाली इस वेबसाइट की अपनी जान कई दिनों से आफत में पड़ी हुई है तो अब इसको कौन बचाएगा।
चूंकि अपनी फ्रस्ट्रेशन निकालने और इन लोगों को बेइज़्ज़त करने के बदले ये लोग मुझे परेशान ज़रूर कर सकते हैं इसलिए कुछ स्क्रीनशॉट्स और डंप डाटा डाउनलोड कर दिया है।

यहाँ कुल्लू प्रशासन से मेरा मतलब कोई एक अफसर नहीं बल्कि बहुत सारे अफसर है जो कुल्लू में ईमानदार और कमरतोड़ मेहनत करके जिले के विकास के लिए उत्तरदाई हैं ना कि लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए हमने इन को दफ्तरों में सजा रखा है। उस वक्त भी कुल्लू में एक महनती अफसर था जिसको हमेशा इग्नोर किया जाता रहा। ये पोस्ट पढ़ कर वो भाई खुश बहुत होगा।”

‘सजल नेत्रों से हमने एक दूसरे को देखा, बहुत कह नहीं सके मगर…’

इन हिमाचल डेस्क।। मंगलवार की सुबह दुख भरी खबर लेकर आई। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार की पत्नी सन्तोष शैलजा का निधन हो गया। जिस कोरोना वायरस ने दुनिया भर में न जाने कितने लोगों की जान ले ली, संतोष शैलजा भी उसी से संक्रमित थीं।

 

कुछ दिन पहले शांता कुमार एवं उनकी पत्नी के कोरोना संक्रमित होने की खबर आई थी। टांडा मेडिकल कॉलेज में दोनों का इलाज चल रहा था। जब वे इस बीमारी से जूझ रहे थे, तब उनका अलग-अलग भवनों में इलाज चल रहा था।

तीन दिन पहले जब राज्य की भाकपा सरकार तीन साल पूरे होने पर कार्यक्रम का आयोजन कर रही थी, शांता कुमार ने उसमें सम्मिलित न हो पाने के सम्बंध में सोशल मीडिया पर कुछ बातें साझा की थीं।

इसी दौरान उन्होंने पत्नी सन्तोष का भी जिक्र किया था और लिखा था कि कैसे उनके बीच संक्षिप्त मुलाकात हुई, फिर अपने मन में घुमड़ती आशंकाओं के बीच उन्होंने भरोसा दिलाया कि ‘हम जल्द स्वस्थ होकर पालमपुर लौटेंगे।’ मगर होनी को कुछ और ही मंजूर था।

आगे पढ़ें, क्या लिखा था उन्होंने-

“मेरा पूरा परिवार कॅरोना संकट के मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। मैं ही क्यों, आज पूरा विश्व इस अभूतपूर्व त्रासदी से जूझ रहा है। विश्व इतिहास का यह पहला संकट पता नहीं कब टलेगा।

मेरी धर्मपत्नी तीन दिन से करोना पीड़ित टांडा अस्पताल में है। आज मैं भी यही उसके पास आ गया। तीन दिन के बाद मुझे देखकर मुस्कुराई। सजल नेत्रों से हमने एक दूसरे को देखा। उसका उपचार चल रहा है। कई उपकरण उसकी सेवा में हैं।

लगभग एक घंटा उसके पास बैठा। हम दोनों एक दूसरे को देखते रहे। अधिक कह ना सके परंतु बिना कहे भी ना जाने कितना कुछ कहते और सुनते रहे। मैं अब दूसरे भवन में वहीं पर उपचाराधीन हूं।पता नहीं कितना समय यहां रहेंगे और क्या कुछ होगा।”

(शांता कुमार द्वारा 26 दिसम्बर शाम लगभग 5 बजे किये गए ट्वीट्स से)

कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन से निपटने को तैयार है हिमाचल: सीएम

शिमला।। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि कोरोना के नए स्ट्रेन से निपटने के लिए तैयार है। हिमाचल प्रदेश के सीएम ने कहा कि इस स्ट्रेन को लेकर हिमाचल सतर्क है।

उन्होंने कहा कि विदेशों से हिमाचल आ रहे नागरिकों पर पूरी निगरानी रखी जा रही है। सीएम के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश सरकार केंद्र सरकार की एडवाजरी के मुताबिक एहतियात बरत रही है।

उन्होंने कहा, “हिमाचल में स्वास्थ्य विभाग ने ट्रेसिंग का अभियान चलाया हुआ है। नए स्ट्रेन को लेकर सभी नियमों और गाइडलाइंस का पालन करने के लिए कहा गया है।”