मंदिरों में मत्था टेकने भी सरकारी हेलिकॉप्टर से जाते थे वीरभद्र

शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से किए गए नए करार के तहत अब अधिक सीटों वाला हेलिकॉप्टर आ रहा है जिसका किराया पांच लाख दस हजार रुपये प्रति घंटा है। यानी एक घंटे में इतना खर्च जितना एक परिवार के कई सदस्य एक साल में भी नहीं कमा पाते। जब प्रदेश की आर्थिक हालत खराब हो, हर काम कर्ज पर हो रहा हो, 60 हजार करोड़ रुपये का कर्ज हो गया हो, कोरोना काल में हालात इतने खराब हो गए हों कि सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों को देने वाले पैसों से कुछ हिस्सा काटना पड़ रहा हो, उसी दौरान महंगे हेलिकॉप्टर के आने की खबर से जनता में नाराजगी होना लाजिमी है।

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विपक्ष भी इस मामले पर सरकार को घेर रहा है कि यह फिजूलखर्ची है। हालांकि सरकार का कहना है कि सीटें ज्यादा हैं, हेलिकॉप्टर बड़ा है मगर दरें वही हैं, पुरानी वाली। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया कि ट्राइबल इलाके के लोगों के रेस्क्यू आदि के लिए भी यह हेलिकॉप्टर मददगार होगा और ऐसे ऑपरेशनों पर होने वाले खर्च का आधा हिस्सा केंद्र सरकार चुकाएगी। यह बात सही है, लेकिन बाकी समय इस हेलिकॉप्टर को सीएम इस्तेमाल करेंगे। लेकिन क्या इस हेलिकॉप्टर का सही इस्तेमाल होगा?

गजब का दुरुपयोग
यह देखा गया है कि राजनीतिक कार्यक्रमों, जिनका सरकार और जनता के हित से कोई संबंध नहीं, उनके लिए भी सभी सीएम सरकारी हेलिकॉप्टर इस्तेमाल करते रहे हैं। वीरभद्र सिंह के ऊपर तो उनके पूर्व सहयोगी मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने हेलिकॉप्टर पर 111 करोड़ खर्च कर देने का आरोप लगा दिया था।

वैसे भी यह बात छिपी नहीं है कि जब भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे वीरभद्र सिंह को केंद्रीय जांच एजेंसियों के सामने पेश होने के लिए दिल्ली जाना पड़ता था, तब भी वह सरकारी हेलिकॉप्टर इस्तेमाल करते थे। हालांकि नैतिकता कहती है कि उन्हें ऐसा करने का अधिकार बिल्कुल नहीं था और अगर उन्हें जाना ही था उन यात्राओं का खर्च अपने पैसे से चुकाते। लेकिन उनकी ऐसी प्रवृति नहीं रही है। अपना पैसा खर्च तो वह तब भी खर्च कर सकते थे जब डेढ़ वर्ष पहले पीडीआई में इलाज के बाद उन्हें हिमाचल आना था। मगर तब अपना हेलिकॉप्टर खर्च करने के बजाय वह जयराम ठाकुर द्वारा भेजे सरकारी हेलिकॉप्टर पर शिमला आए थे।

जब वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री थे, तब वह निजी यात्राएं भी सरकारी चॉपर पर करते थे। यहां तक मंदिरों में जाने के लिए भी। और साथ में परिजन भी होते थे। जैसे कि अप्रैल 2017 में वह अचानक शिमला से पत्नी प्रतिभा सिंह और बेटे विक्रमादित्य सिंह के साथ हेलिकॉप्टर में उड़े और रामपुर बुशहर पहुंच गए। क्यों? क्योंकि उन्हें अपने मंदिर में पूजा करनी थी। डेढ़ घंटे पूजा करने के बाद वह वापस चले गए। इस यात्रा पर भी लाखों खर्च हो गए और वह पैसा जनता का था।

CM Virbhadra Singh Paid Obeisance At Bhimakali Temple In Sarahan

उसी साल जून में वीरभद्र सिंह सरकारी हेलिकॉप्टर पर उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम पहुंचे। पत्नी प्रतिभा सिंह उनके साथ थीं। यह यात्रा निजी यात्रा थी और इसके लिए हेलिकॉप्टर का किराया निजी जेब से भरा जाना चाहिए था। मगर वह तो हुआ नहीं, तत्कालीन सीएम ने एक और एलान कर दिया। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार मंदिर समिति को एक क्विंटल चंदन की लकड़ी देगी। यह एलान अपनी ओर से करते तो भी बात थी, हिमाचल सरकार क्यों चंदन की लकड़ी देगी?

himachal chief minister virbhadra singh in badrinath dham

ये तो कुछ घटनाएं हैं, वीरभद्र सिंह और प्रेम कुमार धूमल के कार्यकाल में भी इस तरह से सरकारी हेलिकॉप्टर के उन कामों में इस्तेमाल के कई उदाहरण मिल जाएंगे, जो का या तो निजी प्रकृति के थे या फिर इतने महत्वपूर्ण नहीं थे कि उनके लिए सरकारी खर्च पर हेलिकॉप्टर इस्तेमाल किया जाता।

अब वीरभद्र सिंह के पुत्र और शिमला ग्रामीण के विधायक विक्रमादित्य ने सोशल मीडिया पर जयराम सरकार के कार्यकाल में आ रहे नए चॉपर को लेकर बचाव किया है। उनका कहना है कि यह बहुत जरूरी है और पहले भी हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल जनजातीय इलाकों के लोगों की मदद में हुआ है। लेकिन सवाल ये है कि ऐसे मौके कितनी बार आए? आम लोगों के लिए तो कभी कभार ही यह चॉपर इस्तेमाल हुआ मगर मुख्य्मंत्रियों की गैरजरूरी यात्राओं पर ज्यादा इस्तेमाल हुआ।

अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं समझते नेता?
कई राज्यों के मुखिया हेलिकॉप्टर सेवाएं लेते हैं। दूर-दराज के इलाकों में पहुंचने के लिए कम समय लगे और सड़क मार्ग पर जनता को असुविधा न हो, इसलिए हवाई यात्राएं की जाती हैं। साथ ही, सड़क यात्राओं पर प्रोटोकॉल के तहत जो अधिकारियों आदि को मूवमेंट करना पड़ता है, उसमें भी भारी भरकम खर्च हो जाता है। तो एक तरह से इन परिस्थितियों में मुख्यमंत्रियों का हवाई यात्रा करना व्यावहारिक नजर आता है मगर अहम सवाल ये है कि क्या उनकी सभी यात्राएं अपरिहार्य होती हैं? यानी इतनी महत्वपूर्ण होती हैं कि वहां पर हेलिकॉप्टर से ही जाना पड़े?

इस सवाल का जवाब है- नहीं। होना यह चाहिए कि सीएम तभी हेलिकॉप्टर इस्तेमाल करे, जब जरूरी हो। उदाहरण के लिए दिल्ली में केंद्र के साथ किसी बैठक में जाना हो, तब इस्तेमाल किया जा सकता है। किसी जगह का दौरा इमर्जेंसी में करना पड़े, तब इस्तेमाल कर लिया। वरना बाकी समय आप प्रोग्राम ऐसे बनाइए कि आप पहले से ही वहां सड़क मार्ग पर पहुंचें।

वैसे भी सीएम को गैर जरूरी उद्घाटनों, प्रदर्शनियों में जाने के लिए हेलिकॉप्टर की क्या जरूरत? उद्घाटन और शिलान्यास प्रोग्राम भी आप जिला मुख्यालयों पर कीजिए और एक-साथ लगते जिलों में एक-साथ कार्यक्रम रखिए। हमीरपुर से बिलासपुर जाने में भी अगर हेलिकॉप्टर इस्तेमाल करना पड़े तो यह अजीब बात है क्योंकि आपके हेलिकॉप्टर के ऊपर खर्च हो रहा पैसा जनता का है और आपकी जिम्मेदारी बनती है कि उसे बचाएं। मगर ऐसा किया नहीं जाता। जब प्रदेश लगातार कर्ज में डूब रहा हो और आपकी आमदनी इतनी न हो कि आप उस कर्ज को चुका पाएं तो फिलूजखर्ची को घटाने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन अफसोस, किसी में दूरदृष्टि नहीं कि इस बारे में सोचे। इसका नुकसान आने वाले समय में हर हिमाचली को भुगतना पड़ सकता है।

बड़ा हेलिकॉप्टर लेने पर बोले सुरेश भारद्वाज- इसमें जनता का ही हित है

शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा सीएम जयराम ठाकुर के लिए लाए जा रहे बड़े हेलिकॉप्टर को लेकर शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा है कि विपक्ष बिना वजह हंगामा कर रहा है। उन्होंने कहा कि बड़े हेलिकॉप्टर को लेना जनहित में है। उन्होंने दावा किया कि ‘नया हेलिकॉप्टर 2013 वाले रेट पर ही लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 17 सितंबर, 2019 को इस संबंध में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। मंत्री ने कहा कि सरकार ने नेशनल स्काई वन एयरवेज लिमिटेड से करार किया था।

दरअसल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के लिए आने वाला नया हेलिकॉप्टर 24 सीटर होगा। अभी सीएम जयराम ठाकुर जो हेलिकॉप्टर इस्तेमाल कर रहे हैं वो छह सीटर है। इसे लेकर विपक्ष सवाल कर रहा है जबकि सरकार का कहना है कि इस हेलिकॉप्टर को जनजातीय इलाके के लोगों के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा और इसका आधा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी।

शहरी विकास मंत्री ने कहा कि हेलिकॉप्टर का दुरुपयोग पिछली सरकार में सीएम वीरभद्र करते ते और वह अपने ऊपर चल रहे मुकदमों की सुनवाई के लिए हेलिकॉप्टर से दिल्ली जाते थे। उन्होंने कहा, “पवन हंस का जो इससे पहले हेलिकॉप्टर 2013 के मॉडल का था यह पुराना हो गया था। यह एक दिन आता था और डेढ़ महीने मरम्मत में रहता था। इसका पांच लाख 10 हजार रुपये प्रति घंटे पुराने को भी देना होता था। नए का रेट पांच लाख 10 हजार रुपये प्रति घंटे ही है।”

बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप ने भी कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर अगले महीने नए हेलिकॉप्टर का उपयोग सरकार की सेवाओं के लिए करेंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार हेलीकाप्टर का इस्तेमाल सरकारी सेवाओं एवं कोविड-19 के समय जनसेवा के लिए कर रही है, जबकि कांग्रेस सरकार के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री सरकारी हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल दिल्ली में पेशियों एवं निजी कार्यों के लिए करते थे।

देखें, उन्होंने और क्या कहा-

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अस्पतालों में बेड की कमी नहीं, घर पर कोविड सेंटर बनाना संभव नहीं: डीसी कांगड़ा

कांगड़ा।। जिला कांगड़ा के उपायुक्त राकेश कुमार प्रजापति ने कहा है कि कोरोना के मरीजों की देखभाल के लिए प्रशासन पूरी तरह से तैयार है और अस्पतालों में न तो जगह की कमी है और न ही बिस्तरों की। उन्होंने लोगों से घबराए बिना पूरी सावधानी बरतने और कोरोना संक्रमण फैलने से रोकने के लिए बनाए नियमों के पालन के लिए कहा है।

दरअसल, हिमाचल प्रदेश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच धर्मशाला के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने अपने घर के परिसर को कोविड सेंटर के तौर पर इस्तेमाल करने की पेशकश की है। सोशल मीडिया पर डाले गए इस संदेश से जनता के बीच यह संदेश भी जा रहा है कि कांगड़ा में हालत इतनी खराब हो गई है कि सरकार के पास जगह और संसाधनों की कमी हो गई है जो उसे कोविड संक्रमित लोगों की देखभाल के लिए और जगह लेनी पड़े।

पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा के इस पोस्ट के कारण सोशल मीडिया में कुछ लोगों के बीच चिंता का माहौल भी देखा जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या वाकई कांगड़ा जिले में हालत इतनी खराब हो गई है प्रशासन के पास अस्पतालों में जगह नहीं बची है? इस तरह की चिंताओं को दूर करने के लिए ‘इन हिमाचल’ ने कांगड़ा के डीसी राकेश कुमार प्रजापति से बात की। उन्होंने आश्वस्त किया कि अस्पतालों में जगह और बिस्तरों की कमी नहीं है।

‘प्रशासन की तैयारी पूरी’
कांगड़ा के उपायुक्त ने बताया कि प्रशासन की तैयारी पूरी है और किसी भी तरह के हालात से निपटने के लिए पहले से ही इंतजाम किए गए हैं। क्या किसी के घर या अन्य परिसर में कोविड केयर सेंटर बनाए जा सकते हैं? इस सवाल पर कांगड़ा के उपायुक्त ने बताया, “कोरोना के मरीजों की देखभाल के लिए ऐसी जगह चाहिए होती है जहां पर आधुनिक मेडिकल उपकरणों और पाइप्ड ऑक्सीजन आदि की व्यवस्था हो सके। किसी के घर या अन्य परिसर में ऐसा करना संभव नहीं होता।”

कर्मचारियों का वेतन काटने के बाद मंत्रियों की सैलरी काटने की भी घोषणा

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में बढ़ते जा रहे कोरोना के मामलों को लेकर सरकार ने आदेश जारी किया है कि प्रदेश के सरकारी अफसरों, निगमों-बोर्डों के अधिकारियों की दो दिन की पगार कटेगी। इनमें क्लास 1 और क्लास 2 अधिकारी शामिल हैं। वहीं, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की एक दिन की तनख्वाह कोविड फंड में जमा होगी।

क्लास-वन और क्लास-टू अफसरों का दो दिन, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों का एक दिन का वेतन कटेगा। इसके लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से आदेश जारी हुए हैं। छोटा शिमला स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और एचडीएफसी बैंक में धनराशि जमा होगी। इसके अलावा हेल्थ केयर वर्करों से एक दिन का वेतन कोष में जमा होगा।

इसके कुछ घँटों बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बुधवार को कहा कि वह खुद और उनके मंत्रिमंडल के सदस्य सीएम कोविड फंड में एक महीन का वेतन देंगे। मंत्री गुरुवार को होने जा रही कैबिनेट की बैठक में चेक मुख्यमंत्री को भेंट करेंगे। इसके अलावा प्रदेश के सभी विधायकों का दो दिन का वेतन काटकर कोविड फंड में जमा किया जाएगा।

पिछले साल कोरोना फैलने के साथ ही जयराम सरकार ने सभी विधायकों और कैबिनेट सदस्यों के वेतन में 30 प्रतिशत कटौती का फैसला लिया था। सरकार के उस समय के आदेश में यह था कि वेतन कटौती 31 मार्च, 2021 तक लागू रहेगी। अब यह तारीख बीतने के बाद विधायकों और मंत्रियों के लिए पूरा वेतन दिए जाने के लिए सचिवालय प्रशासन और सामान्य प्रशासन विभाग ने कवायद शुरू की ही थी कि अब सरकार ने फिर फंड जमा करने के नए आदेश जारी कर दिए हैं।

हिमाचल में तेजी से फैल रहा संक्रमण, एक दिन में 16 की मौत

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में कोरोना की स्थिति बिगड़ती जा रही है। बीते दिन पिछले 24 घंटों में 1340 नए मामले सामने आए जबकि 16 संक्रमितों की मौत हो गई।

इसके साथ ही हिमाचल में कोविड-19 के ऐक्टिव केस 10,027 हो गए हैं। राज्य में अब तक कुल 79,410 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

पिछले चौबीस घंटों में जान गंवाने वाले 16 संक्रमितों में छह कांगड़ा, चार शिमला, तीन ऊना के थे। हमीरपुर, सिरमौर और मंडी में भी एक-एक मरीज की जान गई है।

पिछले दिन सबसे ज्यादा मामले सोलन में आए। यहां 265, ऊना में 173, शिमला में 164, सिरमौर में 155, हमीरपुर में 138, मंडी में 107, बिलासपुर में 104, लाहौल-स्पीति में 78, कांगड़ा में 68, कुल्लू में 36, किन्नौर में 35 और चंबा में 17 लोग संक्रमित पाए गए।

यह स्थिति तब है जब पिछले कुछ हफ्तों में कोरोना की टेस्टिंग बढ़ी नहीं है। लगभग उतने ही टेस्ट हो रहे हैं लेकिन अब पॉजिटिव सैंपल ज्यादा पाए जा रहे हैं। यह बताता है कि संक्रमण तेजी से फैल रहा है।

हिमाचल में मामले बढ़े तो कर्फ्यू लगा सकती है सरकार: जयराम

जरूरत पड़ी तो निजी अस्पतालों को एक्वायर करेगी सरकार: सुरेश भारद्वाज

शिमला।। शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा है कि सरकार जरूरत पड़ने पर कोरोना के मरीजों को भर्ती करने के लिए शिमला के निजी अस्पतालों का इस्तेमाल कर सकती है।

मंत्री ने कहा कहा, “हम शिमला में बेड बढ़ा सकते हैं। आईजीएमसी और डीडीयू के अलावा आयुर्वेदिक अस्पताल को भी कोरोना के मरीजों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें 50 बिस्तर हो सकते हैं। जरूरत पड़ी तो निजी अस्पतालों को भी एक्वायर किया जाएगा।”

सुरेश भारद्वाज कहा, “आईजीएमसी हालात से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है, फिर चाहे बात बिस्तरों की हो या फिर ऑक्सीजन या दवाइयों की। फिर भी मामले बढ़े तो रोहड़ू और रामपुर के अस्पतालों को भी डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल बनाया जा सकता है ताकि डीडीयू पर मरीजों का ज्यादा भार न पड़े।”

हिमाचल में मामले बढ़े तो कर्फ्यू लगा सकती है सरकार: जयराम

जयराम ठाकुर ने हिमाचल की खराब वित्तीय सेहत के लिए कांग्रेस को बताया जिम्मेदार

हमीरपुर।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश की खराब आर्थिक हालत के लिए वे जिम्मेदार हैं जिन्होंने राज्य में सबसे ज्यादा समय तक शासन किया। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “राज्य में आर्थिक दीवालियापन की हालत होती जा रही है और इसके लिए वो लोग जिम्मेदार हैं जो ज्यादा समय तक सत्ता में रहे।”

प्रदेश की माली हालत पर चिंता जताते हुए सीएम ने कहा कि सीएम ने कहा, “सवा तीन साल पूर्व जब हमने प्रदेश की बागडोर संभाली तो प्रदेश पर 48 हजार करोड़ का कर्ज था। ऋण लेना किसी भी सरकार की विवशता है।” उन्होंने कहा कि प्रदेश की इस आर्थिक हालत के लिए वह राजनीतिक दल जिम्मेदार है, जो लंबे समय तक सत्ता में रहा।

भले ही सीएम का इशारा कांग्रेस की ओर रहा हो लेकिन ऐसा नहीं है कि बीजेपी को बहुत कम समय के लिए सत्ता मिली है। अगर शांता कुमार के नेतृत्व में जनता पार्टी सरकार के कार्यकाल को भी शामिल कर दिया जाए तो अब तक लगभग 20 साल तक बीजेपी का शासन रहा है जो कम अरसा नहीं होता।

हिमाचल में सरकारें बदलने का चलन रहा है और पिछले कुछ दशकों से कांग्रेस और बीजेपी की सरकारें बारी-बारी से बनती रही हैं। बेशक शुरुआती कुछ सालों में कांग्रेस लगातार सत्ता में बनी रही मगर पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद से हिमाचल में सरकारें बदलती रही हैं।

1971 के बाद से राज्य में पांच बार कांग्रेस के मुख्यमंत्री बने और पांच बार बीजेपी के (मुख्यमंत्री शांता कुमार के नेतृत्व में जनता पार्टी सरकार का कार्यकाल शामिल)। इस दौरान दो मौके ऐसे रहे हैं जब कांग्रेस और बीजेपी की सरकारें अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाईं। रही बात सबसे अधिक समय तक शासन चलाने की, डॉक्टर यशवंत सिंह परमार और वीरभद्र सिंह कांग्रेस की ओर से सबसे ज्यादा समय तक सीएम बने जबकि  बीजेपी की ओर से प्रेम कुमार धूमल सबसे अधिक समय तक सीएम रहे।

देखें, क्या कहता है हिमाचल का अब तक का इतिहास-

कार्यकाल काउंसिल/असेंबली दल मुखिया/मुख्यमंत्री
1952-1957 सी-श्रेणी के राज्य हिमाचल प्रदेश की विधानसभा कांग्रेस यशवंत सिंह परमार
1957-1962 टेरिटोरियल काउंसिल कांग्रेस ठाकुर करम सिंह
1962–1967 पहली विधानसभा कांग्रेस वाई.एस. परमार
1967–1972 दूसरी विधानसभा कांग्रेस वाई.एस. परमार
1972–1977 तीसरी विधानसभा कांग्रेस वाई.एस. परमार
1977–1982 चौथी विधानसभा जनता पार्टी शांता कुमार
1982–1985 पांचवीं विधानसभा कांग्रेस पहले राम लाल ठाकुर, फिर वीरभद्र सिंह
1985–1990 छठी विधानसभा भारतीय जनता पार्टी वीरभद्र सिंह
1990–1992 सातवीं विधानसभा भारतीय जनता पार्टी शांता कुमार
1993–1998 आठवीं विधानसभा कांग्रेस वीरभद्र सिंह
1998–2003 नौवीं विधानसभा भारतीय जनता पार्टी प्रेम कुमार धूमल
2003–2007 दसवीं विधानसभा कांग्रेस वीरभद्र सिंह
2007-2012 ग्यारहवीं विधानसभा भारतीय जनता पार्टी प्रेम कुमार धूमल
2012–2017 बारहवीं विधानसभा कांग्रेस वीरभद्र सिंह
2017-अभी तक तेरहवीं विधानसभा भारतीय जनता पार्टी जयराम ठाकुर

हिमाचल में मामले बढ़े तो कर्फ्यू लगा सकती है सरकार: जयराम

प्रदेश के अस्पताल सक्षम हैं, बाकी बाहर इलाज करवाना लोगों की चॉइस है: सीएम

हमीरपुर।। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार और वीरभद्र सिंह के प्रदेश से बाहर के निजी अस्पतालों में इलाज करवाने पर सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि किसने कहां इलाज करवाना है, यह व्यक्तिगत निर्णय होता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के अस्पतालों में सुविधाओं की कमी नहीं, पहले वीरभद्र सिंह समेत अन्य व्यवस्था के तहत सरकारी अस्पतालों में इलाज करवा चुके हैं।

हमीरपुर में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के चिह्नित सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट का कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वेंटिलेटर की कोई कमी नहीं है। वर्तमान में केवल पांच से छह वेंटिलेटर ही प्रयोग में लाए जा रहे हैं।

हिमाचल में मामले बढ़े तो कर्फ्यू लगा सकती है सरकार: जयराम

उन्होंने कहा कि होम आइसोलेट किए जा रहे मरीजों को अस्पतालों में सीधे डॉक्टरों से जोड़ने के लिए भी काम किया जा रहा है। सीएम ने कहा कि गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष प्रदेश में कोरोना डेथ रेट ज्यादा है। इस महामारी से निपटने के लिए प्रदेश के अस्पतालों में वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने अपील की कि गत वर्ष की तरह सामाजिक संस्थाएं भी सरकार का सहयोग करें।

बकौल सीएम, कोरोना से निपटने के लिए सूबे में 1650 बिस्तरों की व्यवस्था है। इसे बढ़ाकर दो से तीन हजार किया जाएगा। उन्होंने प्रदेश में खराब आर्थिक स्थिति पर चिंता जताई। कहा कि इसके लिए वह राजनीतिक दल जिम्मेदार है, जो लंबे समय तक सत्ता में रहा।

सीएम ने कहा, “सवा तीन साल पूर्व जब हमने प्रदेश की बागडोर संभाली तो प्रदेश पर 48 हजार करोड़ का कर्ज था। ऋण लेना किसी भी सरकार की विवशता है।”

हिमाचल में मामले बढ़े तो कर्फ्यू लगा सकती है सरकार: जयराम

हिमाचल में टूटा रिकॉर्ड, एक दिन में 1928 मामले, 14 की मौत

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में पहली बार 24 घंटों में कोरोना के रिकॉर्ड 1928 नए मामले सामने आए है। कांगड़ा जिले में रिकॉर्ड 526, सोलन 412 , मंडी 184, सिरमौर 134, शिमला  195, ऊना 162, हमीरपुर 105, बिलासपुर 73, कुल्लू 64, किन्नौर 37, चंबा 34 और लाहौल-स्पीति में दो नए मामले आए हैं। कुंभ से लौटे अर्की के बातल गांव से 15 लोग भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।

सोमवार शाम तक पिछले 24 घंटों में प्रदेश में 14 और कोरोना संक्रमितों की मौत हो गई है। कांगड़ा जिले में पांच संक्रमितों की मौत हो गई। हमीरपुर, शिमला और ऊना में दो-दो संक्रमितों की मौत हुई है। वहीं, किन्नौर, चंबा और मंडी में एक-एक संक्रमित की मौत हो गई है।

सुंदरनगर के कोविड-19 अस्पताल बीबीएमबी में रविवार देर रात एक कोरोना संक्रमित महिला ने दम तोड़ दिया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर समय पर इलाज ना देने के आरोप लगाए हैं जबकि स्वास्थ्य विभाग ने आरोपों को नकार दिया है।

BBMB अस्पताल में कोविड पीड़ित महिला की मौत, वीडियो वायरल, उठे गंभीर सवाल

इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 78070 पहुंच गया है। सक्रिय मामले अब 9783 हो गए हैं। अब तक 67072 संक्रमित ठीक हो चुके हैं और 1190 की मौत हुई है।

सभी शिक्षण संस्थान बन्द
हिमाचल प्रदेश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों सहित सभी शिक्षण संस्थानों को अब एक मई तक बंद कर दिया गया है। पहले 21 अप्रैल तक विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक संस्थान बंद किए गए थे जबकि स्टाफ को बुलाने का फैसला संस्थान के मुखिया पर छोड़ा गया था। अब विद्यार्थियों सहित शिक्षकों को भी छुट्टी दे दी गई है। हालांकि, मेडिकल कॉलेज और नर्सिंग प्रशिक्षण संस्थान खुले रहेंगे। गैर शिक्षकों व कोचिंग सेंटरों पर अलग से फैसला लिया जाएगा।

हिमाचल में मामले बढ़े तो कर्फ्यू लगा सकती है सरकार: जयराम

हिमाचल में मामले बढ़े तो कर्फ्यू लगा सकती है सरकार: जयराम

बिलासपुर।। देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच हिमाचल सरकार भी प्रदेश में कर्फ्यू लगाने पर विचार कर रही है। हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इसके संकेत दिए हैं।

सोमवार को सीएम ने कहा, “प्रदेश में अभी लॉकडाउन लगाने जैसी स्थिति नहीं है। अन्य राज्यों की तुलना में प्रदेश की स्थिति बेहतर है लेकिन इस महामारी पर अंकुश लगाने के लिए और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है।”

सीएम ने कहा कि कोरोना के बढ़ते हुए मामलों को देखते हुए सरकार कर्फ्यू लगाने पर विचार कर सकती है। उन्होंने कहा, “अभी तक प्रदेश में कोरोना पीक पर नहीं पहुंचा है। पीक पर पहुंचने के बाद इसे रोकने के लिए सरकार पूरी तैयारी करेगी।”

जयराम ठाकुर ने कहा, “होम आइसोलेट किए जा रहे मरीजों को अस्पतालों में सीधे डॉक्टरों से जोड़ने के लिए भी काम किया जा रहा है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष प्रदेश में कोरोना डेथ रेट ज्यादा है। इस महामारी से निपटने के लिए प्रदेश के अस्पतालों में वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की कमी नहीं आने दी जाएगी।”