भूस्खलन की चेतावनी देने वाला सिस्टम सही से नहीं कर रहा काम

मंडी।। मंडी जिला के कोटरोपी में हुए भयावह हादसे के बाद आईआईटी मंडी ने भूस्खलन की चेतावनी देने वाले सेंसर लगाए थे, लेकिन उनके परिणाम बेहतर नहीं आए हैं। 13 अगस्त 2017 को हुए इस हादसे में 46 लोगों की जान चली गयी थी। ऐसा हादसा दोबारा न हो, इसके लिए यह तकनीक ईजाद की गई थी।

भूस्खलन से संवेदनशील क्षेत्रों में ऐसे अलार्मिंग सिस्टम लगाए जाने थे। जमीन पर किसी तरह की हलचल को भांपकर सेंसर ने अलर्ट भेजना था। लाल बत्तियां जलते हुए सायरन बजना था। साथ ही लैंडस्लाइड के खतरे वाले क्षेत्र के लोगों को मैसेज के माध्यम से इसकी सूचना मिलनी थी। लेकिन अफसोस यह तकनीक ज़मीनी स्तर पर काम करती नहीं दिख रही है।

Photo Credit : IIT Mandi

अमर उजाला के अनुसार, कोटरोपी में लगाये गए अलार्मिंग सिस्टम से चार साल में करीब एक या दो बार ही सायरन बजा है, जबकि यहां समय-समय पर भूस्खलन होता रहा है। कोटरोपी घटनास्थल का क्षतिग्रस्त भाग अभी भी कच्चा है। पठानकोट की ओर सड़क के दूसरे छोर पर अलार्मिंग स्टेशन लगा है। बरसात को देखते हुए यहाँ होमगार्ड जवान की ड्यूटी भी लगाई गई है। लेकिन अलार्मिंग सिस्टम से सायरन बजे, इसकी गारंटी नहीं।

एक व्यक्ति ने जानकारी दी कि कुछ दिन पहले यहाँ साफ मौसम में ही सायरन बज गया था। जिला परिषद सदस्य रवि चंद ने बताया कि साफ मौसम में सायरन बजने की सूचना प्रशासन को दे दी गई थी।

इस बारे डीसी मंडी अरिंदम चौधरी ने कहा कि हाल ही में ज्वाइन किया है। सिस्टम को दोबारा रिव्यू किया जाएगा। सेंसर और इसके संचालन में क्या परेशानी है, इस पर मंथन होगा।

मानसून सत्र के दौरान प्राइवेट स्कूल फीस बिल की संभावना नहीं

शिमला।। राज्य सरकार के आगामी मानसून सत्र के दौरान फीस संरचना के मुद्दे पर निजी स्कूलों पर लगाम लगाने के लिए बिल लाने की संभावना नहीं है। क्योंकि शिक्षा विभाग सभी निजी स्कूलों के साथ परामर्श कर सकता है, जो एक लंबा मामला साबित हो सकता है।

हिमाचल प्रदेश स्कूल (फीस और अन्य संबंधित मामलों का विनियमन) विधेयक 2021 पर शिक्षा विभाग द्वारा 25 आपत्तियां और सुझाव प्राप्त हुए हैं। सूत्रों से पता चला है कि शिमला, सोलन और कांगड़ा में स्थित प्रमुख रेसिडेंशियल स्कूलों में से अधिकांश अपनी आपत्ति दर्ज करा चुके हैं।

यह उम्मीद की जा रही थी कि 2 अगस्त से शुरू होने जा रहे विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में यह बिल पेश किया जाएगा। लेकिन अब राज्य भर के निजी स्कूलों के साथ विचार-विमर्श करने का निर्णय लिया गया है ताकि उनके दृष्टिकोण को स्पष्ट किया जा सके। इसमें स्पष्ट रूप से समय लगेगा और मानसून सत्र के दौरान कानून लाना संभव नहीं होगा।

निजी स्कूलों ने पहले ही प्रस्तावित बिल को “मनमाना” बताते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की है। निजी स्कूलों का कहना है कि इससे स्कूलों की स्वायत्तता को खतरा होगा।

वहीं निजी स्कूल प्रबंधन और अभिभावक हमेशा फीस संरचना और हर साल कुछ स्कूलों द्वारा की जा रही भारी फीस बढ़ोतरी को लेकर आमने-सामने रहे हैं।

सरकारी कर्मचारियों पर सरकार की सख्ती, सभी को देना होगा अपनी संपत्ति का ब्योरा

शिमला।। अब हिमाचल प्रदेश में अपनी चल-अचल संपत्तियों का समय से ब्योरा न देने वाले कर्मचारियों की खैर नहीं। ऐसे कर्मचारियों पर अब राज्य सरकार सख्ती करने जा रही है। कार्मिक विभाग ने क्लास ए, बी, सी और डी श्रेणी के अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने कई ऐसे मामले सामने आने के बाद यह सख्त निर्देश जारी किए हैं।

अतिरिक्त मुख्य सचिव कार्मिक प्रबोध सक्सेना की ओर से यह निर्देश जारी किये गए हैं। निर्देशों में कहा गया है कि सभी अधिकारी व कर्मचारी निर्धारित तिथि से पहले अपनी संपत्तियों का ब्योरा देना सुनिश्चित करें वर्ना उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

इन निर्देशों में सभी विभागों के अध्यक्षों को अपने नियंत्रण में आने वाले हर कार्यालय में एक नोडल अधिकारी तैनात करने के लिए कहा गया है। हर कर्मचारी और अधिकारी से निर्धारित प्रारूप में संपत्ति की जानकारी लेकर विभाग को भेजना नोडल अधिकारी सुनिश्चित करेगा। अगर कोई अधिकारी-कर्मचारी ब्योरा उपलब्ध न कराता है तो उसकी जानकारी तत्काल विभागाध्यक्ष से साझा करनी होगी। इस जानकारी के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

वहीं यह भी कहा गया है कि ऐसे किसी भी अधिकारी-कर्मचारी को पदोन्नति या अन्य किसी विषय पर विजिलेंस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट मुहैया नहीं कराया जाएगा। विभाग ने इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, जिला उपायुक्तों, बोर्ड, निगम, विश्वविद्यालय, प्रबंध निदेशकों को निर्देश जारी कर दिए हैं।

पीएमआईएस सॉफ्टवेयर में ऑनलाइन माध्यम से इन एसेट और लायबिलिटी रिटर्न से संबंधित फार्म एक से पांच में जानकारी भरकर एक महीने में जमा करवाने को कहा गया है। लोकायुक्त एक्ट में हर साल सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारियों को अपनी संपत्तियों और देनदारियों की जानकारी देनी होती है।

भारत में एक और वैक्सीन का सफल क्लीनिकल ट्रायल, बच्चों पर भी कारगर

शिमला।। देश की एक और स्वदेशी वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल में खरी उतरी है। यह जायडस कैडिला कंपनी की जायकॉव-डी वैक्सीन है जिसका सफल क्लीनिकल ट्रायल हुआ है। खास बात यह है कि यह वैक्सीन 12 साल और इससे ज्यादा उम्र के बच्चों समेत सभी पर कारगर है।

जायकॉव-डी ने क्लीनिकल ट्रायल पास किए हैं। वैक्सीन को मान्यता देने वाली सेंट्रल ड्रग्स लैबोरेटरी (सीडीएल) कसौली ने बाकायदा अपनी वेबसाइट में इसकी पुष्टि की है। कंपनी ने क्लीनिकल ट्रायल के लिए वैक्सीन के बैच कसौली भेजे थे।

जायडस कैडिला कंपनी ने क्लीनिकल ट्रायल के बाद ड्रग्स कंट्रोलर जरनल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मांगी है। अब कंपनी डीसीजीआई से इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिलते ही वैक्सीन के पब्लिक बैच जांच के लिए दोबारा सेंट्रल ड्रग्स लैबोरेटरी भेजेगी। कंपनी ने लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया है। इसके साथ ही कुछ औपचारिकताओं के बाद इस वैक्सीन को जल्द ही बाजार में उतारने की भी तैयारी है।

सीडीएल कसौली से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद कंपनी तीसरी भारतीय वैक्सीन को बाजार में उतारेगी। अभी तक भारत में दो स्वदेशी वैक्सीन को-वैक्सीन, कोविशील्ड उपलब्ध हैं। इसके अलावा रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-वी को भी सीडीएल कसौली ने मान्यता दी है।

बता दें कि सीडीएल कसौली से मंजूरी मिलने के बाद ही भारत में उत्पाद, आयात व निर्यात होने वाली वैक्सीन को बाजार में उतारा जाता है।

कैसी है जायकॉव-डी वैक्सीन

जायकॉव-डी डीएनए आधारित वैक्सीन है। इसमें कोरोना वायरस का जेनेटिक कोड है जो टीका लगवाने वाले के शरीर में इम्यून सिस्टम को सक्रिय करता है। जायकॉव-डी तीन डोज वाला टीका है। पहला टीका लेने के 28वें दिन दूसरी और 56वें दिन तीसरी डोज लेनी होगी।

पालमपुर में इंडोर स्टेडियम बनाने को लेकर अनुराग ठाकुर से मिलीं इंदु गोस्वामी

धर्मशाला।। राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी ने कारगिल दिवस के अवसर पर कैबिनेट मंत्री अनुराग ठाकुर से मुलाक़ात कर पालमपुर विधानसभा क्षेत्र में एक इंडोर स्टेडियम बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि यह स्टेडियम पालमपुर के शहीद सैनिकों के नाम समर्पित होगा।

उन्होंने कहा अनुराग से मिलकर प्रदेश के विकास और योजनाओं को लेकर चर्चा हुई है। पालमपुर विधानसभा के लिए भी उनकी तरफ से पर्यटन की दृष्टि से क्या नया हो सकता है और सर्दियों की खेलों के लिए नए स्टेडियम, इंडोर स्टेडियम जैसे विषयों पर उन्होंने गंभीरता दिखाई है। उन्होंने कहा है कि जल्दी ही धरातल पर काम नज़र आएगा।

इंदु ने कहा पालमपुर का पर्यटन और खेलों की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है। प्रदेश और केंद्र के सहयोग से पालमपुर में नए रोजगार और स्वरोजगार के संस्थान भी तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कहीं न कहीं पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार का भी यही सपना है।

वनस्पत्ति जगत पर आधारित इलेक्ट्रोहोमियोपैथी चिकित्सा पद्धति को मान्यता प्रदान करने की मांग

धर्मशाला।। धर्मशाला में प्रदेश स्तरीय इलेक्ट्रोहोमियोपैथी डॉक्टरर्स एसोसिएशन के सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस मौके पर काँगड़ा सहकारी बैंक के चेयरमैन राजीव भारद्वाज तथा धर्मशाला के विधायक विशाल नेहरिया विशेष रूप से उपस्थित हुए।

बैठक में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने विधायक विशाल नेहरिया से वनस्पत्ति जगत पर आधारित इलेक्ट्रोहोमियोपैथी चिकित्सा पद्धति को मान्यता प्रदान करने की मांग उठाई है। विधायक विशाल नेहरिया एसोसिएशन के पदाधिकारियों को आश्वस्त किया कि उनकी मांग को मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर जी के समक्ष रखकर पूरा करवाएंगे।

वहीं हिमाचल इलेक्ट्रोहोमियोपैथी डॉक्टरर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष डाॅ सुरेंद्र ठाकुर ने इलेक्ट्रोहोमियोपैथी की जरुरत और फायदों पर विस्तार से चर्चा की और सरकार से इलेक्ट्रोहोमियोपैथी को मान्यता देने के लिए विधायक के माध्यम से मांगपत्र भी सौंपा।

इस मौके पर विधायक विशाल नेहरिया ने कहा कि इलेक्ट्रोहोमियोपैथी पद्धति लंबे समय से हमारे समाज में नेचुरल और जड़ी बूटीयों के माध्यम से लोगों की चिकित्सा कर रही है। उन्होंने कहा कि ये जरुरी है कि इस पद्धति को भी सरकारी तौर पर मान्यता मिले तथा इनका पंजीकरण आयुष विभाग के अंतर्गत हो। वह इस मांग को विशेष रूप से मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे।

गंदी जगह क्वारन्टीन करने के आरोप वाले वायरल वीडियो को पुलिस ने बताया गलत


धर्मशाला।। हिमाचल पुलिस की सेकंड बटालियन सकोह (धर्मशाला) के एक कर्मी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो में कर्मी द्वारा गंदगी भरे कमरों में क्वारन्टीन करने के आरोप लगाए गए हैं।

वायरल वीडियो में उक्त कर्मी कमरे के उखड़े स्विच बोर्ड, बाथरूम, शौचालय, कमरे के बाहर पड़ी गंदगी को दिखा रहा है। कर्मी का यह भी कहना है कि यहां लगे नल में भी पानी नहीं आ रहा है।

वायरल वीडियो के संबंध में इन हिमाचल ने जब एएसआई दिलबाग सिंह से बात की तो उनका कहना है कि इस वीडियो में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा, “यह वीडियो पूरी तरह से झूठा है। जिस कमरे में उक्त कर्मी को ठहराया गया था यह उस कमरे की वीडियो नहीं है। यह किसी अन्य कमरे की वीडियो है।”

उन्होंने बताया कि ‘वीडियो वायरल करने वाला कर्मी शराब पीने का आदी है। यहाँ ट्रांसफर होकर आया है और नौकरी से अब्सेंट चल रहा था। अपनी नौकरी बचाने के लिए झूठी वीडियो वायरल कर रहा है। वीडियो में ज़रा भी सच्चाई नहीं है।’

हालांकि, सूत्रों के मुताबिक अंदर कई ऐसी जगहों पर व्यवस्था करनी पड़ी है, जो लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हुई। ऐसा इसलिए क्योंकि क्वारन्टीन करने के लिए जगह कम पड़ गई है। मगर बटालियन के अधिकारियों का कहना है वीडियो में जो दिखाया जा रहा है, वह सच नहीं है।

किन्नौर हादसा : डॉक्टर दीपा का भारत के अंतिम गांव से अंतिम पोस्ट और अंतिम सफर

किन्नौर। छितकुल-सांगला मार्ग पर बटसेरी में पहाड़ों से चट्टान बीते रोज कहर बनकर टूटे। बीते रोज किन्नौर जिला में हुए इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई। सभी पर्यटक बताए थे और हिमाचल की शांत वादियों का आनंद लेने के लिए पहुंचे थे, लेकिन इन्ही वादियों के पहाड़ों से इन सैलानियों पर मौत बरसी। ये सैलानी देश के आखिरी गांव और छोर को निहार कर लौट रहे थे, लेकिन इनका ये सफर भी आखिरी साबित हुआ। मृतकों में सबसे ज्यादा चर्चा डॉक्टर दीपा शर्मा की हो रही। दीपा आयुर्वेद की डॉक्टर थीं।

यह एक संयोग ही है कि डॉक्टर दीपा शर्मा जीते जी तो एक आम इनसान बनकर छाई रहीं, लेकिन मौत के बाद भी नेशनल मीडिया तक में सुर्खियां बना रही हैं। जीवन काल में वो अपने अच्छे कार्यों, सीएए, केबीसी को लेकर चर्चा में रहीं तो जाने के बाद अपने आखिरी ट्विट के जरिए चर्चा में हैं।

केबीसी में अमिताभ बच्चन के साथ डॉक्टर दीपा शर्मा (फाइल फोटो)

राजस्थान के जयपुर के श्याम नगर की रहने वाली डॉक्टर दीपा आयुर्वेद डॉक्टर के अलावा सोशल पॉलिटिकल ऑब्जर्वर, राइटर भी थीं और उन्हें घूमना, फोटोग्राफी करना और लोगों से मिलकर उनके राजनीतिक और सामाजिक विचार जानना उन्हें अच्छा लगता था। साथ ही दीपा सोशल वर्क भी करती रहती थीं।

डॉक्टर दीपा के ट्विटर पर 16 हजार फॉलोअर्स थे और जाहिर तौर उन्होंने कई यात्राओं की यादें ट्विटर पर साझा की थी, लेकिन उनकी पोस्ट से वो चर्चा में है। दीपा का आखिरी ट्विट भी भारत के आखिरी छोर से ही था। दीपा ने ट्विट कर लिखा था ‘भारत के अंतिम बिंदु पर खड़ी हूं जहां नागरिकों को अनुमति है। इस बिंदु से लगभग 80 किलोमीटर आगे तिब्बत के साथ हमारी सीमा है जिस पर चीन ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है।’

इस दुर्भाग्य ही कहेंगे कि भारत के आखिर गांव के लिए किया गया सफर उनका आखिरी सफर बन गया। वैसे डॉक्टर दीपा बीते साल नागरिकता संशोधन कानून को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान भी काफी चर्चा में रही थीं। दीपा ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर बताया था कि जब वे शाहीन बाग में लोगों से उनके मुद्दे के बारे में जानने गई थीं, तो वहां मौजूद कुछ लोगों ने उनपर हमला कर दिया था.

दीपा टीवी के चर्चित शो कौन बनेगा करोड़पति में भी हिस्सा ले चुकी थीं। इसमें उन्होंने 6 लाख रुपए जीते थे। इतना ही नहीं दीपा ने इस कार्यक्रम में होस्ट अमिताभ बच्चन के साथ कई तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर पोस्ट की थीं।

22 साल के इस हिमाचली जवान ने दी थी कारगिल में पहली शहादत

 

22 साल के इस हिमाचली जवान ने दी थी कारगिल में पहली शहादत

कैप्टन सौरभ कालिया कारगिल युद्ध के वो हीरो जिन्होंने सबसे पहले देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। महज़ 22 साल उम्र थी। 22 दिनों तक दुश्मन का बेहिसाब दर्द झेला, पर देश के खिलाफ एक भी शब्द न बोले और अपनी शहादत दे दी। जब मौत की खबर आई तो सेना जॉइन किए मुश्किल से चार महीने हुए थे। यहाँ तक कि परिवार ने तो उन्हें सेना की वर्दी में भी नहीं देखा था।

22 साल पहले हुए कारगिल युद्ध में भारत ने अपने 527 जवान खोए थे और 1300 से ज्यादा जख्मी हुए थे। कारगिल युद्ध के पहले शहीद कैप्टन सौरभ कालिया के बलिदान से युद्ध की शुरुआती इबारत लिखी गई।

3 मई 1999 को ताशी नामग्याल नाम के एक चरवाहे ने सेना को खबर दी थी कि उसने कारगिल की ऊंची चोटियों पर कुछ हथियारबंद लोगों को देखा है। 14 मई को कैप्टन कालिया पांच जवानों के साथ पेट्रोलिंग पर निकल गए। जब वे बजरंग चोटी पर पहुंचे तो उन्होंने वहां हथियारों से लैस पाकिस्तानी सैनिकों को देखा।

कैप्टन कालिया की टीम के पास न तो बहुत हथियार थे न अधिक गोला बारूद। और साथ सिर्फ पांच जवान। वे तो पेट्रोलिंग के लिए निकले थे। दूसरी तरफ पाकिस्तानी सैनिकों की संख्या बहुत ज्यादा थी और गोला बारूद भी। उन्होंने चारों तरफ से कैप्टन कालिया और उनके साथियों को घेर लिया।

कालिया और उनके साथियों ने जमकर मुकाबला किया लेकिन जब उनका एम्युनेशन खत्म हो गया तो पाकिस्तानियों ने उन्हें बंदी बना लिया। फिर उनके साथ जो किया उसे लिखना भी मुश्किल है। उन्होंने कैप्टन कालिया और उनके पांच सिपाही अर्जुन राम, भीका राम, भंवर लाल बगरिया, मूला राम और नरेश सिंह की हत्या कर दी और भारत को उनके शव सौंप दिए।

9 जून 1999 को सौरभ कालिया का शव उनके घर पहुंचा था। अंतिम दर्शन के लिए पूरा शहर उनके घर पहुंचा था। कैप्टन सौरभ कालिया और उनके साथियों के साथ जिस तरह की अमानवीय क्रूरता और बर्बरता की गई, वो साफ तौर पर जंग के नियमों की धज्जियां उड़ा रही थी। इस ख़बर ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हल्ला मचाया था।

कैप्टन कालिया और उनके साथियों के शवों पर ऐसे घाव थे, जिसने न केवल भारतीयों को बल्कि पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया था। चेहरे पर न आंख थी, न कान। जब शव घर पहुँचा तो परिवार वाले भी नहीं पहचान पा रहे थे।

कारगिल दिवस: कारगिल में शहीद हुए थे हिमाचल के ये वीर

आज विजय दिवस है। 1999 में तीन महीनों तक कारगिल में चले युद्ध के बाद आज ही के दिन यानी 26 जुलाई 1999 को भारत ने जीत हासिल की थी। उसी की याद में हर साल 26 जुलाई को विजय दिवस के तौर पर मनाया जाता है। यह दिन है शहीदों को याद करने का, उन्हें श्रद्धांजलि देने का और प्रण लेने का कि हम कोई भी ऐसा काम न करें जिससे देश को कोई नुकसान हो।

22 साल पहले हुए कारगिल युद्ध में भारत ने अपने 527 जवान खोए थे और 1300 से ज्यादा जख्मी हुए थे। देश के लिए लड़के हुए शहीद होने वालों में हिमाचल प्रदेश के भी 52 बेटे शामिल थे। आइए जानें, कौन-कौन थे वे वीर:

कांगड़ा
1. परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बतरा
2. लेफ्टिनैंट सौरभ कालिया
3. राइफलमैन राकेश कुमार
4. ग्रेनेडियर बजिंद्र सिंह
5. लांस नायक वीर सिंह
6. राइफलमैन अशोक कुमार
7. राइफलमैन सुनील कुमार
8. सिपाही लखवीर सिंह
9. नायक ब्रह्म दास
10. सिपाही संतोख सिंह
11. राइफलमैन जगजीत सिंह
12. हवलदार सुरिंद्र सिंह
13. लांस नायक पदम सिंह
14. ग्रेनेडियर योगिंद्र सिंह
15. ग्रेनेडियर सुरजीत सिंह

मंडी
1. नायब सूबेदार खेम चंद राणा
2. हवलदार कृष्ण चंद
3. नायक सरवन कुमार
4. सिपाही टेक सिंह मस्ताना
5. सिपाही राकेश चौहान
6. सिपाही नरेश कुमार
7. सिपाही हीरा सिंह
8. ग्रेनेडियर पूर्ण चंद
9. लांस नायक गुरदास सिंह
10. नायक मेहर सिंह
11. लांस नायक अशोक कुमार

हमीरपुर
1. हवलदार कश्मीर सिंह वीर चक्र विजेता
2. हवलदार राजकुमार
3. सिपाही दिनेश कुमार
4. हवलदार स्वामी दास चंदेल
5. सिपाही राकेश कुमार
6. सिपाही सुनील कुमार
7. राइफलमैन दीप चंद जिला

सिरमौर
1. राइफलमैन कुलविंद्र सिंह
2. राइफलमैन कल्याण सिंह सेवा मैडल

बिलासपुर
1. हवलदार उधम सिंह वीर चक्र विजेता
2. नायक मंगल सिंह
3. राइफलमैन विजय पाल
4. हवलदार राजकुमार
5. नायक अश्विनी कुमार
6. हवलदार प्यार सिंह, गांव खतेड़ घुमारवीं
7. नायक मस्त राम

ऊना
1. कैप्टन अमोल कालिया वीर चक्र विजेता
2. राइफलमैन मनोहर लाल

सोलन
1. सिपाही धर्मेंद्र सिंह
2. राइफलमैन प्रदीप कुमार

चंबा
1. सिपाही खेम राज जिला

कुल्लू
1. हवलदार डोला राम सेवा मेडल

शिमला
1. ग्रेनेडियर यशवंत सिंह
2. राइफलमैन श्याम सिंह वीर चक्र विजेता
3. ग्रेनेडियर नरेश कुमार
4. ग्रेनेडियर अनंत राम