ऊना।। प्रदेश में जमीन को लेकर एक और विवाद सामने आया है। विवाद इतना बढ़ गया कि एक व्यक्ति ने दूसरे पर गोली चलाकर लहूलुहान कर दिया। मामला ऊना जिला से सम्बंधित है। जिले के अंब उपमंडल के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत के त्याई गांव में दो व्यक्तियों में जमीन को लेकर यह विवाद हुआ है।
घायल व्यक्ति को प्राथमिक उपचार के लिए ऊना अस्पताल ले जाया गया। जहाँ डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया।
पुलिस ने घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचकर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की पुष्टि करते हुए डीएसपी सृष्टि पांडे ने बताया कि पुलिस ने आर्म्ज़ एक्ट व धारा 307 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार यह घटना शुक्रवार दोपहर की बताई जा रही है। यहां ज़मीनी विवाद को सुलझाने के लिए अधिकारियों को भी बुलाया गया था। लेकिन इसी बीच दोनों पक्षों में बहस हो गई। बहस इतनी बढ़ गयी कि एक व्यक्ति ने दूसरे पर गोली चला दी। हालांकि व्यक्ति को गोली नहीं लगी। लेरिन छर्रे लगने के कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
आरोपी शख्स की पहचान गोपाल कृष्ण के रूप में हुई है। वहीं इस घटना में घायल हुए शख्स की पहचान सुरजीत सिंह पुत्र बलवंत सिंह निवासी त्याई के तौर पर हुई है। फिलहाल सुरजीत की हालत नाजुक बताई जा रही है।
इन हिमाचल डेस्क।। किसी भी समाज में अलग-अलग तरह के लोग होते हैं। उनकी शिक्षा, अनुभव और समझ का स्तर अलग हो सकता है। मगर पत्रकारिता जैसे पेशे की बात करें तो पत्रकार का शिक्षित, अनुभवी और समझदार होना बहुत जरूरी है। वरना वह अफवाह और सही सूचनाओं के बीच फर्क नहीं कर पाएगा और खुद भी गलत सूचनाओं का प्रसार करने लग जाएगा। भारत में पिछले कुछ समय से ऐसा ही देखने को मिल रहा है क्योंकि कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान यह दावा करने लगे हैं कि बाजार में प्लास्टिक के चावल, प्लास्टिक की सब्जियां और प्लास्टिक के अंडे मिल रहे हैं। लोग भी इस तरह के भ्रामक वीडियो खूब शेयर करते हैं मगर बाद में यही मीडिया संस्थान एक भी खबर नहीं छापते कि प्रयोगशाला में जांच करने पर सैंपल का नतीजा क्या रहा।
हिमाचल प्रदेश के चंबा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा है। कुछ तथाकथित मीडिया पोर्टल्स के साथ-साथ प्रतिष्ठित अखबारों ने भी खबर छापकर दावा किया है- डिपुओं में प्लास्टिक के चावल की मिलावट। दावा किया जा रहा है कि कुछ चावल पानी में डालते ही तैरने लगे और नरम होकर फूल गए। बस, इसी आधार पर दावा कर दिया कि चावल प्लास्टिक के हैं।
अब चंबा वाले मामले में चावल की गुणवत्ता पर सवाल तो उठाए जा सकते हैं। क्योंकि यह बिल्कुल संभव है कि सप्लाई करने वाले ने ताजा चावल के साथ कई साल पुराने चावल की मिलावट की हो या फिर दो अलग-अलग किस्मों के चावल मिला दिए हों। यही वजह है कि पुराने वाले दाने डूब नहीं रहे और तुरंत फूल गए। दो अलग किस्में होने के कारण दोनों के पकने में समय में भी अंतर रहेगा। चावल की दुनिया में चालीस हजार से ज्यादा किस्में है। इनकी दिखावट, आकार, स्वाद और पकने के समय में बहुत अंतर है। चंबा वाले मामले में भी यही एक वैज्ञानिक वजह नजर आती है। लेकिन यह तो बिल्कुल बेतुकी बात है कि चावल प्लास्टिक के हों।
जो रोज चावल बनाता होगा, वह जानता है कि पानी में डालने पर शुरू में कुछ चावल तैरते ही हैं। यह पानी की सरफेस टेंशन के कारण होता है। इसीलिए जब तैरने वाले चावल भिगो दिए जाएं तो वे डूब जाते हैं। लेकिन अगर बहुत पुराने चावल हों तो उनमें से कुछ तैरते रह जाते हैं क्योंकि वे बेहद हल्के हो चुके होते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि कई बार अनाज को गोदामों में खुले में रखा जाता है। भीषण गर्मी और बारिश तक में वे भीगते हैं। इस कारण उनके अंदर की केमिकल संरचना में बदलाव आ जाते हैं जिससे वे हल्के हो जाते हैं और अपने स्वाभाविक गुण खो देते हैं। वैसे भी दालों या अन्य तरह के अन्न को धोते वक्त यही प्रक्रिया अपनाई जाती है। जो दाने तैरने रह जाते हैं, उन्हें खराब समझकर अलग कर दिया जाता है।
चावल ही हजारों किस्में हैं। सबका रंग, स्वाद और बनावट अलग है।
प्लास्टिक के चावल की बात बेतुकी भारत और चीन जैसे देश में धान की भरपूर खेती होती है। इतनी ज्यादा पैदावार होती है कि मंडियों और गोदामों तक में धान रखने की जगह नहीं मिलती। इस कारण थोक में धान की कीमत बहुत गिर जाती है। इसलिए किसी को प्लास्टिक के चावल बनाने की जरूरत ही नहीं रहती। वैसे भी, प्लास्टिक एक ऐसा पदार्थ है जो रसायनों से बनाया जाता है। पारदर्शी और चावल की तरह उच्च गुणवत्ता वाले प्लास्टिक के चावल बनाने हों तो उसमें ‘वर्जिन’ प्लास्टिक इस्तेमाल करना पड़ेगा जो बहुत महंगा होता है। मिलावटखोर मिलावट करते हैं ताकि उन्हें मुनाफा हो। भला कोई मिलावटखोर ज्यादा महंगा प्लास्टिक का चावल क्यों मिलाएगा?
मान भी लिया जाए कि ये प्लास्टिक के चावल हैं तो क्या प्लास्टिक पानी में उबालने पर चावल की तरह नरम हो जाता है और फिर ठंडा होने पर भी नरम रहता है? यह हर कोई जानता है कि प्लास्टिक न तो पानी में घुलता है और न उसे पकाकर नरम किया जा सकता है। साथ ही, प्लास्टिक सख्त रहता है, रबर की तरह उछलता नहीं। इसी बात से उन दावों की भी पोल खुल जाती है, जिनमें कहा जाता है कि कुछ होटल वाले प्लास्टिक के चावल बना रहे हैं। आए दिन ऐसे वीडियो सामने आते हैं जिनमें लोग चावल की गेंदे बनाकर उन्हें फेंकते हैं जो उछलने लगती हैं। प्लास्टिक में ऐसा गुण नहीं होता। गेंदें उछलती हैं चावलों के अंदर मौजूद स्टार्च के कारण होता है। गांव के लोग जानते होंगे कि पितरों को चढ़ाने के लिए चावल के ऐसे ही पेड़े बनाए जाते हैं। मगर जिन लोगों का खेती या किचन से कभी वास्ता नहीं रहता, वे अज्ञान में प्लास्टिक की थ्योरी गढ़ने लगते हैं।
प्लास्टिक ग्रैन्यूल्स से फैला भ्रम इस तरह की अफवाहों को बल मिला एक वायरल वीडियो से, जिसमें चीन के कुछ लोग एक फैक्ट्री में मशीन के ऊपर प्लास्टिक डाल रहे थे और नीचे चावल की तरह दिखने वाले दाने निकल रहे थे। मगर वास्तव में वह वीडियो ऐसी फैक्टरी है, जो प्लास्टिक को छोटे टुकड़ों में बदलती है। प्लास्टिक के इन कणों (ग्रैन्यूल्स) का इस्तेमाल आगे पिघलाकर तरह-तरह की चीज़ें बनाने में होता है। यानी अलग-अलग तरह के टुकड़ों को पिघलाने की बजाय इन चावल की तरह दिखने वाले प्लास्टिक ग्रैन्यूल्स को पिघलाकर नई वस्तु का आकार दिया जाता है। बस, देखादेखी में लोगों ने इस वीडियो को शेयर किया और फिर एक के बाद एक लोग दावा करने लगे कि प्लास्टिक के चावल आ रहे हैं। और तो और कुछ मीडिया संस्थानों गैरजिम्मेदाराना ढंग से इस बात पर फैक्ट चेक कर दिया कि प्लास्टिक और असली चावल में फर्क कैसे करें।
वर्जिन प्लास्टिक के ग्रैन्यूल जिनसे बाकी चीज़ें बनाई जाती हैं।
इसी तरह वैक्स की मदद से दिखावटी सब्जियां बनाने वाली एक कंपनी के वीडियो यह कहकर प्रचारित किया गया कि अब नकली पत्ता गोभी बन रही है। फिर कुछ लोगों ने गोभी को जलाना शुरू कर दिया, यह कहकर कि ये तो प्लास्टिक की है। इसी तरह कुछ लोग अंडों को प्लास्टिक का अंडा बताने लगे। जबकि भारत में पोलट्री उद्योग काफी विकसित है और अगर किसी को प्लास्टिक का अंडा बनाना हो तो वह असली अंडे से कई गुना महंगा बनेगा। तो कोई ऐसा क्यों करेगा? कोलकाता में ऐसे ही एक परिवार ने दावा किया था कि उसे प्लास्टिक के अंडे बेचे गए। जांच में पता चला कि वे बत्तख के अंडे थे और कई दिनों से फ्रिज में रखे हुए थे। इसी कारण उनकी दिखावट में अंतर था।
पत्रकारों की जिम्मेदारी क्या? अब फिर आते हैं चावल पर। आंध्र प्रदेश में भी इस तरह की खबरें आई थीं जबकि आंध्र में भरपूर चावल पैदा होते हैं। जांच में प्लास्टिक के चावल होने के सारे दावे फर्जी पाए गए। लेकिन जिन मीडिया कर्मियों ने ऐसी अफवाहों वाली खबरें छापीं, बाद में उन्होंने यह खबर नहीं छापी कि जांच की रिपोर्ट क्या आई। वे अफवाहें फैलाकर लोगों को गुमराह करने में लगे रहे। इसीलिए, पत्रकारों की यह जिम्मेदारी बनती है कि कोई व्यक्ति अगर किसी तरह का दावा करता है तो उसे अपनी समझ के आधार पर परखें और अगर खुद कोई बात पता न हो तो एक्सपर्ट की मदद लें। ऐसा नहीं कि खुद भी अफवाहों को हवा देने में जुट जाएं।
चंबा वाले मामले में डिपो से सप्लाई किए गए चावल के सैंपल की जांच होनी चाहिए। अगर उन्होंने खराब चावल मिलाए हैं तो कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन क्या उन लोगों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए जो अफवाहें फैलाने में योगदान दे रहे हैं?
शिमला।। प्रदेश में एक बार फिर कोरोना संक्रमण के मामलों का ग्राफ बढ़ने लगा है। इस बार छोटे बच्चों के संक्रमित होने के मामले भी अधिक आ रहे हैं। शिमला जिला में हर दिन बच्चों के संक्रमित होने के मामले सामने आ रहे हैं। ऊपरी शिमला में अब तक काफी बच्चे कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। वहीं, जिले के कोटखाई में एक हफ्ते में सात बच्चे कोरोना से संक्रमित हुए हैं।
कोविड सैंपल इंचार्ज कोटखाई डॉ. अमन चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया कि कोरोना संक्रमित बच्चों की उम्र डेढ़ से बारह साल के बीच है। उन्होंने कहा कि बच्चों के अलावा अन्य लोग भी संक्रमित हुए हैं। सभी को सावधानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा पिछले कुछ दिनों में ऊपरी शिमला और रोहड़ू में भी कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ें हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों में रोजाना एक बच्चा पॉजिटिव आ रहा है।
इस बारे डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों की इम्युनिटी कम होती है, जोकि बच्चों के कोरोना पॉजिटिव होने का एक मुख्य कारण है। डॉक्टरों का यह भी मानना है कि पहले बच्चों के पैरंट्स को यह बीमारी हुई होगी, लेकिन उनकी इम्युनिटी मजबूत होने के कारण बीमारी का पता नहीं लगा होगा। ऐसे में इम्युनिटी कमजोर होने की वजह से छोटे बच्चे इसकी चपेट में आ रहे हैं।
शिमला।। पशुओं को बेसहारा छोड़ने वालों पर अब 5000 रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। पहले यह जुर्माना राशि 500 रुपये थी जिसे अब बढ़ाया जा रहा है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने विधानसभा में विधायक रमेश धवाला और पवन काजल द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में यह जानकारी दी है।
कंवर ने कहा कि लोग पशुओं को बेसहारा न छोड़ें, इसके लिए जुर्माना राशि को बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार नियमों में सख्ती करने जा रही है। इस संबंध में हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 2006 में जल्द संशोधन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पशुओं को लावारिस छोड़ने की स्थिति में पंचायत के पास 500 से 700 रुपये जुर्माना करने का अधिकार है। लेकिन राजनीतिक कारणों से वह इस पर अमल नहीं करते हैं। इसलिए सरकार अब एसडीएम और तहसीलदार को भी पशुओं को लावारिस छोड़ने वालों पर जुर्माना करने का अधिकार देने जा रही है।
मंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में कोटला बड़ोग, थानाकलां थाना खास और हांडा कुंडी में तीन गौ अभयारण्य खोले गए हैं। इनमें 867 गौवंश को आश्रय प्रदान किया जा रहा है। गौसेवा आयोग के गठन के बाद अब तक 198 गौसदनों में से 101 आयोग से पंजीकृत हैं। उस समय 7500 पशु गौसदनों में थे। अब 17407 गौवंश गौसदनों और गौ अभयारण्य में रखे गए हैं। प्रत्येक पशु के रखरखाव के लिए 500 रुपये दिए जा रहे हैं।
गौ अभयारण्यों के निर्माण पर 7.7 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। कई बड़े गौ अभयारण्य का कार्य तेजी से चला है। अभी तक लुथान में 3.57 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसमें 800 से 1000 पशु रखे जाएंगे। गौसदनों को लाभ में लाने के लिए कार्य किया जा रहा है। अब खेती के लिए बैलों का प्रयोग बंद होने से दिक्कत बढ़ी है। इस समस्या से निजात पाने के लिए एक प्रोजेक्ट केंद्र को भेजा है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से किसानों को सस्ती दर पर फीमेल सीमन उपलब्ध करवाया जाएगा।
वीरेंद्र कंवर ने कहा कि सिरमौर जिला को बेसहारा पशु मुक्त किया गया है। कांगड़ा जिला में कई गौ अभ्यारण्य बन रहे हैं और इनके बनने पर समस्या काफी हद तक दूर होगी। जून 2022 तक अधिकांश गौवंश को सड़क से हटाकर गौ अभयारण्य में ले जाने का लक्ष्य है। इसके लिए सरकार तेजी से कार्य कर रही है। बंगाणा में गोकुल ग्राम बन रहा है। गोकुल ग्राम बनने पर वहां भारतीय नस्ल के अच्छे गौवंश रखे जाएंगे।
कैसे होगी पशुओं को लावारिस छोड़ने वालों की पहचान
भले ही सरकार ने पशुओं को लावारिस छोड़ने वालों पर जुर्माना राशि बढ़ा दी हो। तहसीलदार और एसडीएम को जुर्माना करने की शक्तियां दे दी हों। मगर पशुओं को आवारा छोड़ने वालों की पहचान कैसे होगी, इस पर कोई भी रणनीति तैयार नहीं है।
नई दिल्ली।। केंद्र सरकार ने राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कर दिया है। सरकार ने हॉकी के “जादूगर” कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद के नाम पर पुरस्कार का नाम रखने का फैसला किया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।
पीएम मोदी ने ट्वीट में लिखा, “देश को गर्वित कर देने वाले पलों के बीच अनेक देशवासियों का ये आग्रह भी सामने आया है कि खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद जी को समर्पित किया जाए। लोगों की भावनाओं को देखते हुए, इसका नाम अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया जा रहा है। जय हिंद!”
देश को गर्वित कर देने वाले पलों के बीच अनेक देशवासियों का ये आग्रह भी सामने आया है कि खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद जी को समर्पित किया जाए। लोगों की भावनाओं को देखते हुए, इसका नाम अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया जा रहा है।
पीएम मोदी ने एक अन्य ट्वीट में यह भी कहा कि मेजर ध्यानचंद भारत के पहले खिलाड़ी थे, जो देश के लिए सम्मान और गर्व लाए। देश में खेल का सर्वोच्च पुरस्कार उनके नाम पर रखा जाना ही उचित है।
Major Dhyan Chand was among India’s foremost sportspersons who brought honour and pride for India. It is fitting that our nation’s highest sporting honour will be named after him.
इसके साथ ही पीएम ने ओलंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के प्रयासों की भी सराहना की है। पीएम ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “ओलंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रयासों से हम सभी अभिभूत हैं। विशेषकर हॉकी में हमारे बेटे-बेटियों ने जो इच्छाशक्ति दिखाई है, जीत के प्रति जो ललक दिखाई है, वो वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है।”
ओलंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रयासों से हम सभी अभिभूत हैं। विशेषकर हॉकी में हमारे बेटे-बेटियों ने जो इच्छाशक्ति दिखाई है, जीत के प्रति जो ललक दिखाई है, वो वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है।
हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को प्रयागराज में हुआ था। भारत में इस दिन को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। 16 साल की उम्र में ध्यानचंद ने भारतीय सेना जॉइन कर ली थी। वे ड्यूटी के बाद चांद की रोशनी में हॉकी की प्रैक्टिस करते थे, इसलिए उन्हें ध्यानचंद कहा जाने लगा। वैसे उनका नाम ध्यान सिंह था।
उनके खेल की बदौलत ही भारत ने 1928, 1932 और 1936 के ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीता था। 1928 में एम्सटर्डम ओलिंपिक में उन्होंने सबसे ज्यादा 14 गोल किए। तब एक स्थानीय अखबार ने लिखा, ‘यह हॉकी नहीं, जादू था और ध्यानचंद हॉकी के जादूगर हैं।’ जिसके बाद उन्हें हॉकी का जादूगर कहा जाने लगा।
राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार की शुरुआत
राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार की शुरुआत साल 1991-92 में हुई थी। यह पुरस्कार भारतीय खेलों का सर्वोच्च पुरस्कार है। जो खिलाड़ी इस पुरस्कार को अपने नाम करता है उसे प्रशस्ति पत्र, अवॉर्ड और 25 लाख रुपए की राशि दी जाती है। सबसे पहला खेल रत्न पुरस्कार पहले भारतीय ग्रैंड मास्टर विश्वनाथन आनंद को दिया गया था।
अब तक 45 खिलाड़ियों को यह पुरस्कार दिया जा चुका है। हाल ही में क्रिकेटर रोहित शर्मा, पैरालंपियन हाई जम्पर मरियप्पन थंगवेलु, टेबल टेनिस प्लेयर मनिका बत्रा, रेसलर विनेश फोगाट को ये अवॉर्ड दिया गया है। अगर हॉकी की बात करें तो अब तक 3 खिलाड़ियों को यह पुरस्कार मिला है। इसमें धनराज पिल्ले, सरदार सिंह और रानी रामपाल शामिल हैं।
शिमला।। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक बार फिर तेंदुए का आतंक देखने को मिला है। गुरुवार रात को राजधानी के कनलोग इलाके में बने एक ढारे (अस्थायी घर) से तेंदुआ एक बच्ची को उठाकर ले गया। घटना देर रात करीब साढ़े 10 बजे की बताई जा रही है। रात तक बच्ची का कोई पता नहीं चल पाया। हालांकि, शुक्रवार सुबह बच्ची का शव मिल गया है। शव का सिर और धड़ अलग-अलग मिले हैं।
जानकारी के अनुसार करीब सात साल का यह बच्ची यहां अपने परिवार के साथ रहती थी। यहां कार शोरूम के साथ लगती जमीन पर कई मजदूरों के ढारे हैं। इनमें से कई मजदूरों के पास पालतू कुत्ते भी हैं। अंदेशा है कि यह तेंदुआ कुत्ते के लिए घात लगाए बैठा था। लेकिन जैसे ही एक ढारे से बच्ची बाहर निकली तो तेंदुए ने इसे ही उठा लिया।
बच्ची के परिजनों ने पता चलते ही शोर मचाया, लेकिन तब तक तेंदुआ जंगल में भाग चुका था। कई लोगों के सामने ही तेंदुआ साथ लगते जंगल में गायब हो गया। बाद में इसकी सूचना न्यू शिमला पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने वन विभाग को इसकी सूचना दी। अब पुलिस और वन विभाग ने बच्चे का शव बरामद कर लिया है।
पहले भी शहर के कई रिहायशी इलाकों में तेंदुए को घूमते देखा गया है। जिसके कई वीडियो भी सामने आए हैं। विकासनगर, नवबहार में दर्जनों लावारिस कुत्तों को तेंदुआ अपना शिकार बना चुका है। खलीनी, कनलोग में कई बार तेंदुआ लोगों पर भी झपट चुका है। अब इस ताजा घटना से लोग दहशत में आ गए हैं। लोअर कनलोग में तेंदुआ बीते साल भी कई बार भवनों के बीच घूमता देखा गया था।
शिमला।। हिमाचल सरकार के मुख्य सचिव रहे अनिल खाची ने रिटायरमेंट ले ली है ताकि वह हिमाचल प्रदेश राज्य चुनाव आयुक्त बन सकें। गवर्नर हिमाचल प्रदेश के आदेश के बाद उनके रिटायरमेंट आर्डर जारी हो गए हैं और साथ ही चुनाव आयुक्त बनने के भी।
1986 बैच के आईएएस अधिकारी अनिल कुमार खाची को दिसंबर 2019 में मुख्य सचिव नियुक्त किया था।
अधिसूचना में कहा गया है कि अनिल खाची की रिक्वेस्ट पर ही उनके रिटायरमेंट आर्डर जारी किए गए हैं और उनकी गुजारिश पर ही तय अवधि से पहले उन्हें सेवामुक्त कर दिया है।
क्या है इस्तीफे के पीछे की वजह
अनिल खाची को चुनाव आयुक्त के पद पर तैनाती दी गयी थी, जोकि एक संवैधानिक पद है। किसी भी व्यक्ति की चुनाव आयुक्त के पद पर तैनाती पांच साल के लिए होती है। अनिल खाची का सेवाकाल सिर्फ डेढ़ साल का ही बचा था। ऐसे में अनिल ने प्रशासनिक सेवा को अलविदा कह दिया ताकि नई जिम्मेदारी संभाल सकें।
अनिल खाची के बाद अब 1987 बैच के आईएएस अधिकारी राम सुभाग सिंह अब हिमाचल प्रदेश सरकार का नया मुख्य सचिव बनाया गया है। जिसकी अधिसूचना जारी हो चुकी है।
शिमला।। 1987 बैच के आईएएस अधिकारी राम सुभाग सिंह अब हिमाचल प्रदेश सरकार के नए मुख्य सचिव होंगे। प्रदेश सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। वहीं मौजूदा मुख्य सचिव अनिल खाची को राज्य का चुनाव आयुक्त बनाया गया है। पिछले लगभग छह महीनों से ऐसी अटकलें थीं कि मुख्य सचिव को बदला जा सकता है। अब जाकर यह परिवर्तन हुआ है।
इस संबंध में कार्मिक विभाग की ओर से बुधवार को फाइल्स राजभवन भेजी गई थीं जो देर रात को मंजूर हो गईं। उम्मीद की जा रही थी कि इस संबंध में देर रात को ही अधिसूचना जारी कर दी जाएगी मगर ऐसा हुआ नहीं। गुरुवार को इसकी अधिसूचना जारी की गई है।
‘आरएसएस’
1987 बैच के आईएएस अधिकारी राम सुभाग सिंह के लिए कई राजनेता, अधिकारी और पत्रकार ‘आरएसएस’ नाम इस्तेमाल करते हैं। अभी वह अतिरिक्त मुख्य हैं। पिछले कई महीनों से ऐसी जानकारियां सामने आ रही थीं कि ढीली पड़ी अफसरशाही पर लगाम लगाने के लिए सरकार मुख्य सचिव को बदल सकती है। नए मुख्य सचिव के लिए राम सुभाग के नाम पर चर्चा तो हो रही थी मगर चर्चाओं का यह दौर लंबा खिंच गया था। अब अचानक लिए गए इस फैसले ने सबको चौंका दिया है।
दरअसल मौजूदा सरकार का कार्यकाल खत्म होने में डेढ़ साल से भी कम समय बचा है। इससे पहले के कार्यकाल के दौरान कई मुख्य सचिव बदल गए। जयराम सरकार के कार्यकाल की शुरुआत में मुख्य सचिव वीसी फारका थे। फिर सरकार ने उनकी जगह विनीत चौधरी को मुख्य सचिव बनाया जो जे.पी. नड्डा के करीबी माने जाते हैं।
उनके रिटायर होने के बाद बी.के. अग्रवाल मुख्य सचिव बनाए गए जो पहले केंद्र की प्रतिनियुक्ति पर थे। फिर वे दोबारा सेंट्रल डेप्युटेशन पर चले गए। फिर श्रीकांत बाल्दी मुख्य सचिव बने जो 31 दिसंबर 2019 को रिटायर हो गए। उसके बाद 1 जनवरी 2020 को अनिल खाची मुख्य सचिव बने जो 1986 बैच के अधिकारी हैं।
बदलाव की वजह?
अनिल खाची राज्य चुनाव आयुक्त पद पर क़रीब डेढ़ साल रहेंगे, उसके बाद उनकी सेवानिवृति होनी है। खाची को मुख्य सचिव पद से हटाकर चुनाव आयुक्त के पद पर भेजे जाने को लेकर सरकार के जुड़े सूत्रों का कहना है कि मंत्रियों तक में इस बात को लेकर नाराजगी देखी जा रही थी कि कोरोना काल के दौरान सरकारी योजनाओं और फैसलों को धरातल पर उस तरह से नहीं उतारा गया, जिस तरह से उतारा जाना चाहिए था। हाल में एक बैठक के दौरान मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर और अनिल खाची के बीच तनातनी की खबरें भी सामने आई थीं।
मुख्य सचिव प्रदेश का सबसे बड़ा नौकरशाह होता है और सरकार के फैसलों और योजनाओं को जमीन पर लागू करवाने वाले अधिकारियों में सबसे शीर्ष पर होता है। ऐसे में सरकार का इरादा शायद यह है कि आखिर के बचे कुछ महीनों में काम में तेजी लाई जाए और इसी इरादे से राम सुभाग सिंह को मुख्य सचिव बनाया गया है।
हमीरपुर।। सीटू के राष्ट्रीय सचिव व सीपीएम के वरिष्ठ नेता कश्मीर सिंह ठाकुर ने अनिल मनकोटिया द्वारा लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया है। अनिल मनकोटिया ने सीटू व सीपीएम नेताओं पर आउटसोर्स कर्मचारियों से लाखों रुपये ऐंठने के आरोप लगाए थे, जिन्हें कश्मीर ठाकुर से सिरे से खारिज किया है।
कश्मीर ठाकुर ने मनकोटिया पर पलटवार करते हुए कहा कि इस मामले में अनिल मनकोटिया पर मानहानि का दावा किया जाएगा। उन्होंने कहा की वह पार्टी को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं।
कश्मीर ठाकुर ने कहा कि बिजली बोर्ड के आउटसोर्स कर्मचारियों से जिस व्यक्ति ने पैसे लिए थे, उसके खिलाफ विभिन्न थानों में केस दर्ज हुए हैं और पुलिस कार्रवाई कर रही है। उस व्यक्ति को पार्टी से भी निष्कासित कर दिया गया है। अनिल मनकोटिया पर जो आरोप लगाए जा रहे हैं वो तथ्यहीन हैं। मनकोटिया पर मानहानि का दावा किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वह इससे पहले भी पुलिस को शिकायत सौंप चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मनकोटिया उन पर दो बार गाड़ी चढ़ा कर मारने की कोशिश कर चुका है।
शिमला।। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के 2463 रुट घाटे में चल रहे हैं। कोरोना से बंदिशें हटने के बाद एचआरटीसी ने अपनी बस सेवा दोबारा शुरू की थी। लेकिन सवारियां न मिलने के कारण कई रूटों पर बस सेवा बंद कर दी गई हैं, तो कई अभी भी घाटे पर चल रहे हैं। यह जानकारी परिवहन मंत्री बिक्रम सिंह ने दी है।
सदन में विधायक इंद्र दत्त लखनपाल ने लिखित में यह प्रश्न पूछा था। जिसके जवाब में परिवहन मंत्री ने यह जानकारी दी। मंत्री ने कहा कि 1752 ऐसे रुट हैं, जहाँ परिचालन लागत भी पूरी नहीं हो रही हैं। प्रदेश में एचआरटीसी के 2463 रुट घाटे पर चल रहे हैं।
मंत्री ने बताया कि सवारियां न मिलने के कारण प्रदेश में 13 रूट बंद भी किए गए हैं। बंद हुए रूटों में धनेटा-गलोड़-शिमला रुट भी शामिल है। मंत्री ने यह भी बताया कि कोरोना से पहले प्रदेश में 3460 रूट घाटे में चल रहे थे।