चंबा: अग्निकांड की भेंट चढ़ गया हंसता-खेलता परिवार


चम्बा।। मंगलवार सुबह चम्बा जिला में आगजनी की एक बड़ी घटना सामने आई है। एक घर में आग लगने से परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई। वहीं, एक महिला बुरी तरह आग में झुलसी है। महिला को उपचार के लिए चंबा अस्पताल ले जाया गया है। मृतकों में एक युवक व तीन बच्चे शामिल हैं।

मिली जानकारी के अनुसार सुबह करीब चार बजे चंबा जिला के तीसा उपमंडल के तहत जुंगरा के करातोट गांव में एक घर में आग लग गई। उस समय परिवार के सभी सदस्य सोए हुए थे। ऐसे में उन्हें भागने की मौका ही नहीं मिला और आग में झुलसने से चार लोगों की मौत हो गई।

मृतकों की पहचान 26 वर्षीय मोहम्मद रफी पुत्र नूरदीन, 6 वर्षीय जैतून पुत्र मोहम्मद रफी, 4 वर्षीय समीर पुत्र मोहम्मद रफी और डेढ़ वर्षीय जुलेखा पुत्री मोहम्मद रफी के रूप में हुई है। वहीं, आग में झुलसने से 26 वर्षीय थुना पत्नी मोहम्मद रफी गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे अस्पताल उपचार के लिए पहुंचाया गया है।

फिलहाल आग लगने के कारणों का भी कोई पता नहीं लग पाया है। पुलिस टीम मौके पर पहुंची है। हादसे की जांच की जा रही है। लेकिन एक ही झटके में पूरा हंसता खेलता परिवार खत्म हो गया, इससे हर कोई स्तब्ध है।

अब स्टेट CID करेगी ज्योति मौत मामले की जांच

मंडी।। जोगिंदर नगर की ज्योति की संदिग्ध हालात में मौत मामले की जांच अब सीआईडी करेगी। डीजीपी हिमाचल प्रदेश संजय कुंडू ने मामले की जांच स्टेट सीआईडी (क्राइम) को सौंपी है। इस संबंध में सोमवार शाम को जारी आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो चुके हैं।

जारी आदेश के मुताबिक, सीआईडी-क्राइम के आईजी अतुल फुलझले जांच के लिए एसआईटी गठित करेंगे। ये एसआईटी एसपी-क्राइम वीरेंद्र कालिया के नेतृत्व में होगी। इसमें सीआईडी के डीएसपी मुकेश कुमार व मंडी में सीआईडी के डीएसपी सुशांत शर्मा को शामिल किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि आईजी-क्राइम इस जांच पर बारीकी से नजर रखेंगे।

पिछले कल एसपी मंडी शालिनी अग्निहोत्री ने भी प्रेस वार्ता कर मामले की पूरी जानकारी दी थी। एसपी ने कहा था कि पूरी निष्पक्षता के साथ जांच की जा रही है। एसपी ने फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर जांच को आगे बढ़ाने की बात कही थी।

बता दें कि ज्योति की मौत मामले में न्याय के लिए शनिवार को बड़ी सँख्या में लोग सड़कों पर उतर आए थे। जिसके बाद डीआईजी और एसपी को मौके पर जाना पड़ा था। मंगलवार को भी लोग न्याय की मांग करने वाले थे। उससे एक दिन पहले ही डीजीपी द्वारा मामले की जांच सीआईडी को सौंपने के आदेश जारी हो चुके हैं।

मौसमी फल व सब्जियां बेच परिवार की आर्थिकी को मजबूती दे रही महिलाएं

मंडी।। ग्रामीण महिलाएं बच्चों व परिवार की देखरेख के साथ-साथ अब परिवार की आर्थिकी का भी सहारा बन रही हैं। हमारे ग्रामीण परिवेश में महिलाएं न केवल खेती-बाड़ी व पशुपालन के साथ बड़े पैमाने पर जुड़ी रहती हैं, बल्कि बच्चों के पालन-पोषण में भी अहम भूमिका अदा करती हैं। लेकिन बदलते वक्त के साथ आज ग्रामीण महिलाएं न केवल घर की दहलीज से बाहर निकल परिवार की आर्थिकी को मजबूती प्रदान कर रही हैं, बल्कि काम करने से भी परहेज नहीं कर रही है।

महिलाओं की इस बदलती सोच का ही नतीजा है कि कोरोना महामारी के इस कठिन दौर में वे परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए मनरेगा में दिहाड़ी-मजदूरी के साथ-साथ मौसमी फल व सब्जियों को बेचने में भी अब पीछे नहीं हैं। ग्रामीण महिलाओं की इस बदलती सोच का ही नतीजा है कि पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर जोगिन्दर नगर से लेकर गुम्मा तक ऐसी दर्जनों महिलाएं सडक़ किनारे मौसमी फल व सब्जियां बेचते हुए नजर आ जाएंगी।

जब इस संबंध में इन स्थानीय महिलाओं जिनमें कमला देवी, रती देवी, कलू देवी, पुष्पा देवी, प्रीतो देवी आदि से बात की गई, तो इन महिलाओं ने बताया कि वे प्रतिदिन बरसाती मौसम के दौरान तैयार मौसमी फल व सब्जियों को बचने का काम कर रही हैं। इससे न केवल उन्हें परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए धनराशि प्राप्त हो जाती है, बल्कि घर में प्राकृतिक तौर पर तैयार इन मौसमी फल व सब्जियों को एक मार्केट भी उपलब्ध हो रही है।

महिलाओं का कहना है कि प्रतिदिन इस राष्ट्रीय उच्च मार्ग से सैंकड़ों वाहन गुजरते हैं, ऐसे में राहगीर प्राकृतिक तौर पर तैयार इन फलों व सब्जियों को खरीदना अधिक पसंद करते हैं। उनक कहना है कि इससे उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी आर्थिकी का इंतजाम भी हो जाता है।

इसी बीच सब्जियां खरीदने के लिए रूके कुछ यात्रियों से बात की गई, तो उनका भी कहना है कि ग्रामीण महिलाओं द्वारा बेचे जा रहे ये उत्पाद जहां पूरी तरह से प्राकृतिक तौर पर तैयार हुए हैं, तो वहीं इनकी कीमत बाजार भाव से भी कम है। जिसका सीधा असर उनकी सेहत के साथ-साथ आर्थिकी पर भी पड़ता है। साथ ही कहना है कि प्राकृतिक तौर पर तैयार सब्जियां बाजारों में आज मुश्किल से ही मिल पाती हैं, लेकिन आज वे यहां से भिंडी, तोरी, काकड़ी, करेला, कद्दू, प्याज, अदरक, लहुसन इत्यादि खरीद कर ले जा रहे हैं, जो पूरी तरह से प्राकृतिक तौर पर उगाए गए हैं और इनकी पौष्टिकता भी अधिक है।

ऐसे में कह सकते हैं कि आज हमारे ग्रामीण परिवेश की महिलाओं ने परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी को अपने कंधों पर उठाकर पशु पालन व खेती बाड़ी के साथ-साथ परिवार की आर्थिकी को मजबूती प्रदान करने की दिशा में अहम कदम बढ़ाया है, जो निश्चित तौर पर महिलाओं के सशक्तीकरण में एक अहम कदम साबित हो रहा है।

हिमाचल में भी रातों-रात बदल सकता है सीएम: विक्रमादित्य सिंह

कुल्लू।। पिछले कुछ समय में भाजपा शासित कुछ राज्यों के सीएम बदले गए हैं। शिमला ग्रामीण के विधायक विक्रमादित्य सिंह ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पहली बार सरकार की नाकामियों का ठीकरा मुख्यमंत्री के सिर फोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में भी रातों-रात सीएम बदला जा सकता है।

विक्रमादित्य ने हाल ही में हुई जन आशीर्वाद यात्रा का ज़िक्र करते हुए कहा कि तथाकथित जन आशीर्वाद यात्रा सत्ताधारी मुख्यमंत्री का पद छीनने का लिए निकाली गई है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे ही समीकरण बने रहे तो रातों-रात हिमाचल का मुख्यमंत्री बदला जा सकता है।

विक्रमादित्य सिंह ने ढालपुर में आयोजित कांग्रेस की जन आक्रोश रैली में शामिल होने से पहले पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही है। उन्होंने कहा कि आईबी की एक रिपोर्ट सरकार के पास गई है। इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इस समय सरकार की हालत नाजुक है। इसलिए सरकार ने उपचुनाव टलवा दिए हैं। विक्रमादित्य सिंह ने कहा अगर सरकार में हिम्मत है तो उपचुनाव करवाएं। कांग्रेस उपचुनावों के लिए पूरी तरह से तैयार है।

सरकार ने बताया, कोविड मौत का कारण कब माना जाएगा

नई दिल्ली।। अब कोरोना के चलते जान गंवाने वाले लोगों के डेथ सर्टिफिकेट पर मौत का कारण कोविड-19 ही दर्ज किया जाएगा। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि मौत का कारण कोविड-19 कब माना जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने यह भी बताया है कि स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर ने कोविड डेथ सर्टिफिकेट को लेकर गाइडलाइंस जारी कर दी हैं।

गाइडलाइंस के मुताबिक, अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आने के 30 दिन के भीतर मौत हो जाती है तो उसे कोविड डेथ माना जाएगा। आरटीपीसीआर, मॉलिक्यूलर, रैपिड एंटीजन या किसी दूसरे टेस्ट से संक्रमण की पुष्टि होती है तो उसे कोविड केस माना जाएगा। सरकार ने बताया है कि आईसीएमआर की स्टडी में सामने आया है कि 95% मौतें रिपोर्ट पॉजिटिव आने के 25 दिन के भीतर हो जाती हैं।

कब मानी जाएगी कोविड डेथ

सरकार ने बताया है कि रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद अगर 30 दिन के भीतर किसी मरीज की मौत हो जाती है, तो उसे कोविड डेथ माना जाएगा। फिर वो मौत भले ही अस्पताल में हुई हो या घर पर। ऐसे मरीजों की मौत का कारण कोरोना मानकर डेथ सर्टिफिकेट में इसकी जानकारी दी जाएगी। हालांकि, सरकार ने यह भी बताया कि अगर किसी कोरोना मरीज की अस्पताल या घर में भर्ती रहते हुए 30 दिन के बाद मौत होती है, तो इसे भी कोविड डेथ ही माना जाएगा।

कब नहीं मानी जाएगी कोविड डेथ

अगर किसी कोरोना मरीज की मौत जहर से, आत्महत्या से, हत्या से या किसी दुर्घटना से हो जाती है तो उसे कोविड डेथ नहीं माना जाएगा।

गाइडलाइंस के मुताबिक, जिला स्तर पर एक कमेटी का गठन भी किया जाएगा। अगर मृतक के परिजन डेथ सर्टिफिकेट में लिखे मौत के कारण से संतुष्ट नहीं होते हैं, तो वे इस कमेटी को सूचित करेंगे। इस कमेटी में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, सीएमओ, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल या मेडिसिल विभाग के हेड और सब्जेक्ट एक्सपर्ट होंगे जो ‘कोविड-19 डेथ का आधिकारिक दस्तावेज’ जारी करेंगे।

हिमाचल: शिमला के बाद अन्य शहरी क्षेत्रों में भी इलेक्ट्रिक वाहन चलाने की तैयारी

शिमला।। हिमाचल सरकार सरकारी क्षेत्र में पेट्रोल-डीजल की बजाए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर विचार कर रही है।शहरी क्षेत्रों में अब 30 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहन चलाने की तैयारी है। प्रदेश सरकार ने इस संबंध में परिवहन विभाग को प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

बताया जा रहा है कि सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदने पर छूट भी दी जाएगी। सड़क के साथ दुकानों और पेट्रोल पंपों में चार्जिंग पॉइंट स्थापित किए जाएंगे। इस समय हिमाचल में सरकारी क्षेत्र में 120 छोटे-बड़े इलेक्ट्रिक वाहन चल रहे हैं।

इसके अलावा खाद्य आपूर्ति निगम द्वारा भी इलेक्ट्रिक वाहन बेचने का फैसला लिया गया है। इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के इच्छुक व्यक्ति खाद्य आपूर्ति निगम के पास आवेदन कर सकते हैं। उसके बाद निगम द्वारा कंपनी से संपर्क किया जाएगा और लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध करवाया जाएगा। परिवहन विभाग इसलिए भी इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर जोर दे रहा है, ताकि हिमाचल में पर्यावरण प्रदूषित न हो।

इस बारे परिवहन मंत्री बिक्रम सिंह का कहना है कि शिमला जिला में इलेक्ट्रिक बसों के साथ अन्य छोटे वाहन भी चल रहे हैं। यहां एक बसें कामयाब हुई हैं। इसके चलते ही धर्मशाला और अन्य शहरों के लिए भी इलेक्ट्रिक बसें खरीदी जा रही हैं। उन्होंने बताया कि लोगों को भी इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए जागरूक किया जाएगा। इसको लेकर शिविर आयोजित किए जाएंगे।

जनमंच में भड़के जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह

मंडी।। प्रदेश भर में रविवार को छह महीने बाद जनमंच आयोजित किये गए। मंडी जिला के करसोग में भी जनमंच का आयोजन किया गया। जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर इस कार्यक्रम में मौजूद रहे। कार्यक्रम में जब एक शख्स लोल गांव में प्रस्तावित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का विरोध कर रहा था तो मंत्री ने फटकार लगा दी। इसके बाद दोनों के बीच थोड़ी देर के लिए जुबानी जंग छिड़ गई, जिससे कार्यक्रम का माहौल भी कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया।

दरअसल, इस सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का विरोध करने वाले फरियादी का नाम गुरबख्श सिंह है और वह एक कांग्रेस नेता भी है। उन्होंने विरोध जताते हुए कहा कि प्लांट नगर परिषद क्षेत्र में बने, क्योंकि यहां उठाऊ पेयजल योजनाएं हैं। जिससे यहां पर प्रदूषण फैलेगा। अगर प्लांट में लीकेज हुई तो पानी दूषित होगा।

गुरबख़्श सिंह ने इसके बाद जलशक्ति मंत्री के विधानसभा क्षेत्र का ज़िक्र करते हुए कहा कि 2015 में धर्मपुर बस स्टैंड भी बह गया था। उसके बाद सरकार ने खड्ड किनारे सरकारी संपति का निर्माण बन्द किया है। अपने विधानसभा क्षेत्र का नाम सुनते ही जलशक्ति मंत्री भड़क गए।

जलशक्ति मंत्री ने कहा कि ओ मिस्टर सरकारी मंच है, कोई पार्टी का मंच नहीं। इसमें कोई बाधा न पहुंचाई जाए। मंत्री ने कहा कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट सरकारी जमीन पर बन रहा है। अगर निजी भूमि होगी, तो सरकार भूमि अधिग्रहण करेगी और उसके बदले में मुआवजा देगी।

गुरबख्श सिंह ने कहा कि वहां तो जमीन ही नहीं है तो फिर भूमि अधिग्रहण कहाँ से करेंगे। इस पर मंत्री और भड़क उठे और बोले- “हम करेंगे, सरकार करेगी, तू थोड़ी करेगा। आप रोकने वाले कौन होते हैं।” गुरबक्श सिंह ने फिर कहा कि जब लोग जमीन देना ही नहीं चाहेंगे तो सरकार कैसे ले लेगी जबरदस्ती तो कर नहीं सकते। अगर जबरदस्ती हुई तो हम कोर्ट जाएंगे। इस पर मंत्री बोले कि अगर नहीं देंगे तो जबरदस्ती ले ली जाएगी। उसकेबाद चाहे कोर्ट जाओ या कहीं और।

पूरे घटनाक्रम के बाद यह चर्चा बनी रही कि जानबूझकर धर्मपुर बस अड्डे का ज़िक्र किया गया था, जिसे सुनकर मंत्री भड़क गए। माहौल को तनावपूर्ण होता देख पुलिस कर्मी गुरबख्श सिंह को साइड में ले गए। तब जाकर मामला शांत हुआ।

यह है हिमाचल में ‘लक्ष्य’ से ज्यादा वैक्सीनेशन की वजह

शिमला, विनोद भार्गव फॉर इन हिमाचल।। हिमाचल प्रदेश सरकार ने कहा है कि जल्द ही वह पात्र आबादी को कोविड वैक्सीन की दोनों डोज लगाने के लक्ष्य को हासिल कर लेगी। हाल ही में राज्य सरकार ने पात्र आबादी को कम से कम एक डोज लगाने का लक्ष्य हासिल किया है। हिमाचल पहला ऐसा राज्य है जिसने अपने यहां इस लक्ष्य को न सिर्फ पूरा किया है बल्कि इससे भी अधिक लोगों को पहली डोज लगाई है।

राज्य के आर्थिक और सांख्यिकी विभाग ने अनुमान दिया था कि हिमाचल प्रदेश में 18 वर्ष या इससे अधिक आयु के 53 लाख 77 हज़ार 820 लोग हैं जिन्हें वैक्सीन लगानी होगी। इस अनुमान के आधार पर ही राज्य वैक्सीन की मांग तय करते हैं। मगर अब तक इस लक्ष्य से भी ज्यादा 55 लाख 78 हजार 348 लोगों को पहली डोज़ लगाई जा चुकी है।

इस बीच लोगों के बीच यह भी चर्चा हो रही है कि लक्ष्य से अधिक वैक्सीनेशन कैसे हो रहा है और जब कुछ लोगों ने वैक्सीन लगवाई ही नहीं तो शत प्रतिशत लक्ष्य कैसे प्राप्त हुआ। इसकी कई वजहें हैं। मुख्य कारण तो यह बताए जा रहे हैं कि 18+ आयु वर्ग में हर दिन नए लोग शामिल हो रहे हैं और प्रवासियों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

अधिकतर युवा आबादी वाले हिमाचल प्रदेश में हर रोज हज़ारों किशोर 18 वर्ष की आयु पूरी करते हैं। इस तरह से देखें तो टीकाकरण अभियान शुरू होने के समय दिए गए वयस्कों के प्रारंभिक आंकड़े में ही अब तक हज़ारों नए वयस्क जुड़ चुके हैं। हर दिन सामने आने वाले फर्स्ट डोज़ के आंकड़ों में इनकी संख्या भी शामिल रहती है।

इसके अलावा पड़ोसी राज्यों के भी कई लोगों ने हिमाचल प्रदेश में आकर वैक्सीन लगवाई। हिमाचल घूमने आने वाले कई पर्यटक भी यहां वैक्सीन उपलब्ध होने के कारण डोज़ लगवाकर लौट रहे हैं। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में रहने वाले प्रवासी श्रमिकों को भी वैक्सीन दी जा रही है। अन्य राज्यों में रहने वाले हिमाचलवासी भी घर लौटकर वैक्सीन लगवा रहे हैं।

यही वजह है कि हर रोज फर्स्ट डोज लगवाने वाले नए लोगों की संख्या सामने आ रही है। हालांकि, हिमाचल में कई लोग ऐसे भी हैं जो पर्याप्त डोज उपलब्ध होने के बावजूद वैक्सीन लगवाने नहीं जा रहे। इनमें कई जाने-माने चेहरे भी हैं जो जनता के लिए मिसाल बनने के बजाय उन्हें गुमराह करने में जुटे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना महामारी पर पूरी तरह विजय तभी पाई जा सकती है जब सभी लोगों में वैक्सीन के माध्यम से इम्यूनिटी पैदा हो जाए।

ज्योति की संदिग्ध हालात में मौत: पुलिस के खिलाफ लोगों की नारेबाजी, मंडी-पठानकोट हाईवे किया जाम

मंडी।। जोगिंद्रनगर में ज्योति की संदिग्ध हालात में मौत का मामला तूल पकड़ने लगा है। पुलिस की कार्यप्रणाली से खफा लोगों ने शनिवार को शहर में प्रदर्शन किया और नेशनल हाईवे जाम किया। थाने के बाहर प्रदर्शन कर लोगों ने ज्योति के लिये न्याय की मांग की। प्रदर्शन को शांत करने में पुलिस नाकाम रहीं। पुलिस के साथ लोगों की धक्का-मुक्की भी देखने को मिली।

शनिवार को लोगों ने भारी संख्या में एकत्रित होकर हराबाग से जोगिंद्रनगर बाजार तक रोष रैली निकाली। जैसे ही रैली पुलिस थाना जोगिंद्रनगर के पास पहुंची तो लोगों ने नेशनल हाईवे-154 जाम कर दिया। इस मौके पर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुलिस थाने का घेराव करने की भी कोशिश की गई। पुलिस जवानों द्वारा लोगों को रोका गया।

पुलिस ने एक प्रतिनिधिमंडल को बातचीत से साथ बातचीत कर दो हफ्ते का समय मांगा है। लोगों ने ज्योति की संदिग्ध मौत मामले की पूरी सच्चाई जगजाहिर करने के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर दो हफ्ते में आरोपी नहीं पकड़े गए, तो वे सड़कों पर उतरकर चक्का जाम कर देंगे, जिसकी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी।

लंबे इंतजार के बाद अब मिलेंगे विद्यार्थियों को स्कूल बैग

शिमला।। आखिरकार स्कूल बैग का टेंडर फाइनल हो गया है। लंबे समय से यह टेंडर अटका हुआ था जो शुक्रवार को फाइनल हो गया। आठ कम्पनियों ने टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया था। जिस कंपनी का रेट सबसे कम पाया गया, उसे यह टेंडर मिला है। दिल्ली की यह कंपनी स्कूल बैग में पहली बार शामिल हुई है। कंपनी को दो महीने के भीतर सप्लाई देने को कहा गया है।

बता दें हिमाचल प्रदेश के पहली, तीसरी, छठी और नौवीं कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्कूल बैग दिए जाने हैं। खाद्य आपूर्ति निगम ने कंपनी को दो महीने के भीतर स्कूलों में सप्लाई देने का टारगेट किया है।

खाद्य आपूर्ति निगम ने तीन बार स्कूल बैग के लिए कंपनियों से निविदाएं मांगी थीं। पहली बार छह कंपनियों ने टेंडर में भाग लिया। इनमें पांच कंपनियों के सैंपल फेल हो गए। दूसरी बार भी 6 में से 4 कंपनियों के सैंपल फेल हुए थे। इसके चलते टेंडर रद्द किया गया।

इस बार 8 कंपनियों ने टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया। बताया जा रहा है कि इसमेें अधिकांश कंपनियों के सैंपल पास हुए। शुक्रवार को फाइनेंशियल बिड खोली गई। सबसे कम रेट वाली कंपनी को टेंडर दिया गया।