दिल्ली में रह रहे हिमाचलियों के बीच भावुक हुए रामस्वरूप शर्मा

नई दिल्ली।।

रविवार को दिल्ली में रहने वाले हिमाचल प्रदेश के लोगों की सोसाइटी ‘हिमाचल कल्याण सभा, दिल्ली’ का 44वां सालाना समारोह मनाया गया। प्रदेश के तीन सांसदों ने इसमें शिरकत की। सभी ने अपने विचार लोगों के साथ साझा किए। आखिर में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मंडी के सांसद रामस्वरूप शर्मा ने लोगों को संबोधित किया।

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पं. रामस्वरूप शर्मा ने  हिमाचल प्रदेश, और खासकर मंडी क्षेत्र के लोगों को से यह वादा किया कि कुछ सालों बाद जब भी आप मंडी में अपने घर आएंगे तो पठानकोट -मंडी और कीरतपुर-मंडी हाइवे  आपका स्वागत करेंगे।  उन्होंने साथ ही साथ यह भी जोड़ा कि शांता कुमार से मिलकर वह पठानकोट-लेह रेलवे लाइन का मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री समेत अन्य संबंधित मंत्रालयों के साथ उठा रहे हैं।  उन्होंने कहा कि जल्द ही ये कोशिशें धरातल पर भी दिखने लगेंगी।

मंडी के सांसद का स्वागत करते सभा के पदाधिकारी।

अंत में रामस्वरुप शर्मा ने कार्यक्रम में बुलाने के लिए उपस्थित जनमानस और सभा के लोगों का हार्दिक धन्यवाद किया। सभा में उस समय कुछ देर तक खामोशी छा गई और हर किसी की आंखों में भावनओं से छल गईं, जब सांसद भावुक हो गए। शर्मा ने भावुक होकर कहा, ‘मैं कई बरसों से अख़बारों में पढ़ा करता था कि दिल्ली में हिमाचल से जुड़ी एक सभा है, जो हिमाचली संस्कृति को कई वर्षों से संजोए हुए है। सभा का कार्यक्रम होता है बड़े-बड़े नेता शिरकत करते हैं।  परन्तु  आज मंडी क्षेत्र के लोगों के आशीर्वाद से  मेरे जैसा साधरण कार्यकर्ता, गांव का व्यक्ति आज यहां सांसद के रूप में सम्मानित किया गया।’

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शर्मा ने कहा, ‘आज तक मंडी में राजा-रजवाड़ों और बड़े-बड़े नेताओं ने राज किया है, परन्तु अब मंडी की सेवा का मौका एक आम व्यक्ति, साधारण कार्यकर्ता को मिला है। आपको विश्वास दिलाता हूं कि मंडी छोटी काशी का वैभव जरूर प्राप्त करेगी।’

कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी सांसद वहां रुके रहे और अपने क्षेत्र के हर व्यक्ति से रूबरू हुए।

मंत्री न बनाए जाने से नाखुश नहीं हूं: अनुराग ठाकुर

रायपुर।।
भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हमीरपुर लोकसभा सीट से सांसद अनुराग ठाकुर का कहना है कि हाल में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में जगह न मिलने से वह निराश नहीं है। उन्होंने इस तरह की खबरों को गलत बताया कि वह पीएम मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने नाखुश हैं।

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रायपुर में एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे अनुराग ठाकुर ने कहा, ‘मैं भाग्यशाली हूं कि पार्टी में मुझे लगातार तीसरी बार सांसद बनने का मौका दिया और भाजयुमो का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाया।’ उन्होंने कहा कि वह संगठन के लिए काम कर रहे  हैं इसे जारी रखेंगे।

गौरतलब है कि मंत्री बनाए जाने के लिए अनुराग ठाकुर के नाम पर भी अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन वह फाइनल लिस्ट में जगह नहीं बना सके। वहीं हिमाचल प्रदेश से ही पार्टी के सीनियर नेता जे.पी. नड्डा को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।

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जानिए, कौन हैं जे.पी. नड्डा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माहिर रणनीतिकार और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के विश्वासपात्र जगत प्रकाश नड्डा को कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी मिली है। उन्हें सरकार में जगह मिलना दिखाता है कि उनकी संगठन क्षमता और पर्दे के पीछे रहकर काम करने की खूबी को पुरस्कृत किया गया है।
अपने कॉलेज के दिनों में प्रभावी छात्र नेता रहे 53 साल के नड्डा बेहद मृदुभाषी हैं। मुश्किल से मुश्किल कामों को आसानी से सुलझाने में माहिर नड्डा बीजेपी के अध्यक्ष पद की रेस में भी थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपना समर्थन अमित शाह को दे दिया था।

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नड्डा आज मोदी और शाह के साथ बीजेपी की सबसे शक्तिशाली तिकड़ी का हिस्सा हैं। वह पार्टी के हर बड़े फैसले में शामिल रहते हैं, साथ ही पार्टी और सरकार के बीच में कड़ी की भूमिका भी निभाते हैं।  उन्हें आरएसएस से भी समर्थन मिलता है और बीजेपी से सभी बड़े नेताओं से उनके अच्छे रिश्ते हैं।
उन्हें हिमाचल प्रदेश में बीजेपी के अगेल सीएम कैंडिडेट के तौर पर देखा जा रहा है।
2 दिसंबर, 1960 को बिहार के पटना में उनका जन्म हुआ था। उनके पिता पटना यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर थे। नड्डा जेपी आंदोलन से प्रभावित होकर छात्र राजनीति में आए थे।  उन्होंने हिमाचल प्रदेश आने से पहले अपनी जवानी के दिन बिहार में भी बिताए थे।
नड्डा कॉलेज के दौर में छात्र राजनीति से जुड़े और एबीवीपी के सक्रिय मेंबर बनए। वह साल 1977 में पटना यूनिवर्सिटी में एबीवीपी के सचिव चुने गए। 1977 से लेकर 1990 तक वह एबीवीपी में करीब 13 सालों तक विभिन्न पदों पर रहे। 31 साल की उम्र में नड्डा साल 1991 में बीजेपी के युवा मोर्चा के नैशनल प्रेजिडेंट बन गए।

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राज्यसभा के लिए चुने जाने से पहले वह हिमाचल प्रदेश में विधायक थे। नड्डा 1993 से 1998, 1998 से 2003 और 2007 से 2012 तक बिलासपुर सदर से हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। साल 1998 से 2003 तक वह राज्य से स्वास्थ्य मंत्री रहे और 2008 से 2010 तक वन एवं पर्यावरण, विज्ञान एवं तकनीकी मंत्री रहे। अप्रैल 2012 में उन्हें राज्यसभा के लिए चुना गया और कई सारे संसदीय कमिटियों में जगह दी गई।
मई 2010 से नड्डा बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव हैं। पिछले सालों में हिमाचल प्रदेश में वह बेहद कद्दावर नेता बनकर उभरे। कम उम्र में ही बीजेपी के साथ उनका जुड़ाव रहा। जमीनी स्तर से उठकर उन्होंने यहां तक का सफर किया है, जिससे उनका व्यक्तित्व कुछ ऐसा बन गया है कि वह हर राजनीतिक समस्या को बेहद शांति से सुलझा सकते हैं।

(टीम इन हिमाचल)

बिलासपुर गम में डूबा है और हमीरपुर में बीजेपी मना रही है जीत का ‘जश्न’

हमीरपुरबस हादसे से  बिलासपुर के करीब डेढ़ दर्जन गांवों में  मातम छाया है।  हर तरफ दुख का माहौल है। नवरात्रों में मां दुर्गा के नाम की ज्योति की जगह चिता की आग कई परिवारों के दिलों और उनके अरमानों को जला  रही है। एक तरफ कई लोग अभी भी झील में डुबकियां लगाकर बदहवासी में अपने खोए हुए परिजनों तलाश रहे हैं, मगर दूसरी तरफ हमीरपुर में बीजेपी लोकसभा चुनावों में मिली जीत का जश्न मना रही है।

अभी तक हादसे में 30 के करीब शव निकल पाए हैं, लेकिन हादसे में बचे लोग बता रहे हैं बस में अधिकांश महिलाएं और स्कूल के बच्चे थे।  बच्चों का अभी तक गोविन्द सागर की लहरों  में कोई सुराग नहीं लग पाया है।  हादसे में शिकार लोग और उनके बच्चे मुख्यता उन पंचायतों से सबंधित थे, 60 साल पहले  जिनकी जमीनें गोविन्द सागर में समा गई थीं। इतिहास तो गोविन्द सागर में डूब ही गया था पर मासूम बच्चों के रूप में उनका भविष्य भी गोविन्द सागर लील गई।

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इसी बीच राजनीति शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के बयान ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।  आंकड़ों के आधार पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।  किसकी सरकार में कितने हादसे हुए, यह सफलता-असफलता का पैमाना बताया जा रहा है। लेकिन किसने कितना सबक सीखा और रोकथाम के लिए क्या नए प्रावधान किए, इसका किसी के पास जबाब नहीं है।

अपनी बच्ची का कोई पता न चल पाने पर बदहवास हुई एक महिला को संभालते लोग।

हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत ही बिलासपुर जिला भी आता है। संसदीय क्षेत्र का यह हिस्सा  मातम की चादर ओढ़े हुए है,  लाशों को ढूंढने के लिए अभी भी  कार्य चल रहा है,  लोग भूखे-प्यासे टकटकी लगाए  झील को देख रहे हैं। दूसरी तरफ बीजेपी हमीरपुर में लोकसभा चुनाव  में जीत का जश्न मना रही है। हमीरपुर के बरोहा में उन बूथों को सम्मानित किया जा रहा है, जिन्होंने लोकसभा चुनाव में बीजेपी को लीड दिलवाई थी। यहां पर बिलासपुर के बूथ भी सम्मानित होंगे।  पर क्या बिलासपुर के नेता और कार्यकर्ताओं में इतनी हिम्मत और गैरत  है कि वे इस घड़ी में सम्मानित होने के लिए जाएंगे?

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सूत्रों से पता चला है कि बिलासपुर के कद्दावर नेता जगत प्रकश नड्डा हादसे की खबर सुनते ही दिल्ली से बिलासपुर के लिए कल ही निकल गए थे। वह हमीरपुर के जलसे में शामिल नहीं हो रहे हैं। यह हादसा उसके घर से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर हुआ है।

In Himachal का नजरिया:
बात यह नहीं है कि कौन जाएगा कौन नहीं,  बात यह है कि जब बिलासपुर भी हमीरपुर संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है, इसके सांसद भी अनुराग ठाकुर हैं औरआज यहां मातम पसरा है तो क्या उसी सांसद की जीत का जश्न और कार्यकर्ता सम्मान दिवस इस माहौल में मनाना तर्क संगत है? क्या बिलासपुर की संवेदनाओं  का फर्क बीजेपी नेतृत्व को नहीं पड़ता? कल तक यह भी पता चल जाएगा कि दुःख की इस घड़ी में भी हमीरपुर दरबार में हाजिरी लगाने और निष्ठा दिखाने के लिए बिलासपुर बीजेपी के कौन-कौन नेता जश्न में शामिल होने पहुंचे।

बीजेपी के शीर्ष नेता और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीनगर में आई बाढ़ पर अपना जन्मदिन नहीं मनाकर नैतिकता का उदाहरण दिया था। मगर हमीरपुर में पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में पार्टी बिलासपुर के जख्म को अनदेखा करते हुए जीत का जश्न और   सम्मान  दिवस मना रही है।  हालांकि माननीय सांसद को जिताने में बिलासपुर ने भी शत प्रतिशत योगदान दिया था। खैर…

कपड़े उतारकर बचाव कार्य में जुटे रहे बिलासपुर के विधायक बम्बर ठाकुर

बिलासपुर
बिलासपुर में घटी बस दुर्घटना ने त्योहारों के इस सीजन में बिलासपुर के कई गांवों को गम के अंधेरे में डुबो दिया। घटनास्थल पर चीख-पुकार का आलम था। ऑफिस जाने के लिए निकले लोग, स्कूल-कॉलेज के लिए निकले छात्र और भी न जाने कितने लोग उस अभागी बस में सवार थे, जो  गोविन्द सागर में समा गई।

जैसे ही प्रशासन को इस बात का पता चला, पूरा सरकारी अमला घटना स्थल पर पहुंच गया। जहां पर बस गिरी थी, वह कोई गहरी खाई नहीं थी, लेकिन पानी में गिर जाने की वजह से लोग बाहर नहीं निकल सके। नावों का सहारा लेकर पहले बस को पानी में टटोला गया और फिर क्रेन फंसाकर उसे बाहर निकाला गया।

दाएं कपड़े उतारकर बैठे बिसापुर के एमएलए बम्बर ठाकुर

इसी बीच बिलासपुर के स्थानीय विधयक बंबर ठाकुर वहां पहुंचे। खुद को किनारे पर खड़े होकर राहत कार्यों का जायजा लेते महसूस कर वह बेचैन दिखे। वह खुद को रोक नहीं पाए और तुरंत कपड़े उतारकर इस कार्य में जुट गए। बंबर ठाकुर नाव में बैठ कर गहरे पानी में शाम तक लाशों को ढूंढने में मदद करते रहे।  विधायक का यह जज्बा क्षेत्र की जनता के लिए चर्चा का विषय रहा।

यह हादसा यूं तो साथ लगते घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र में हुआ, लेकिन बम्बर ठाकुर का पैतृक निवास  भी हादसे के साथ लगते गावं में है। बम्बर ठाकुर की छवि एक दबंग और आम नेता की मानी जाती है।  गोविन्द सागर के किनारे गांव होने के कारन उन्हें झील में तैराकी  का भी काफी अनुभव है।  विधायक बनने से पहले भी वह जनहित के कार्यों में हमेशा उत्सुक रहते थे। कुछ समय पहले हुए  बंदला बस हादसे में भी उन्होंने  लोगों की मदद को हाथ बढ़ाए थे।  एक विधायक का यह जज्बा वाकई काबिले तारीफ़ है।

ज्योति मर्डर केस: दून के विधायक राम कुमार चौधरी बरी

चंडीगढ़।।

ज्योति मर्डर केस में फंसे हिमाचल प्रदेश के दून विधानसभा क्षेत्र से विधायक राम कुमार चौधरी समेत 12 आरोपी सबूतों के अभाव में रिहा हो गए हैं। कोर्ट ने इस मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि विधायक और अन्य पर लगाए गए आरोपों को पुलिस साबित नहीं कर पाई है, इसलिए इन्हें बरी किया जाता है।

अदालत का फैसला आने के बाद कोर्ट परिसर में काफी संख्या में विधायक चौधरी के समर्थक जमा हो गए और नारेबाजी करने लगे। फैसला आने के बाद विधायक चौधरी ने कहा कि जब मैंने कोई अपराध किया ही नहीं है तो वह साबित कैसे होगा।
चौधरी ने ज्योति के साथ करीबी संबंधों की बात कबूल की थी
 
गौरतलब है कि पंचकुला के बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में हिमाचल के दून विधानसभा क्षेत्र से विधायक राम कुमार ने पुलिस के सामने ज्योति रानी की हत्या का गुनाह कबूल लिया था, जिसके बाद से वह रिमांड पर थे।

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क्या था मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राम कुमार चौधरी ने पुलिस को बताया था कि वह जून, 2010 में ज्योति के संपर्क में आए थे और दोनों के बीच अन्तरंग संबंध विकसित हो गए। इसके बाद से दोनों सहमति से एक-दूसरे के साथ व्यक्तिगत रूप से तथा फोन पर संपर्क में रहे।

ज्योति की तस्वीर दिखाते उसके परिजन

 

पंजाब केसरी में छपी खबर के मुताबिक इस बीच ज्योति गर्भवती हो गई और चंडीगढ़ के सेक्टर-20 में जिंदल नर्सिंग होम में उसका अबॉर्शन करवाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान राम कुमार चौधरी वहां पर ज्योति के पति के हैसियत से मौजूद थे।

ज्योति की बहन की शादी की एक तस्वीर

 

रिपोर्ट्स के मुताबिक राम कुमार होशियारपुर में ज्योति की बहन की शादी में भी शामिल हुए थे और उन्होंने ज्योति के बैंक अकाउंट में बड़ी रकम  भी जमा करवाई थी।

आडवाणी पर भारी पड़े उनकी आधी से भी कम उम्र के अनुराग ठाकुर

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नई दिल्ली
बीजेपी के संसदीय बोर्ड से लालकृष्ण आडवाणी को बाहर करके मार्ग दर्शक मंडल में भेजने के बाद अब उन्हें इन्फर्मेशन ऐंड टेक्नॉलजी मिनिस्टरी की उस स्टैडिंग कमिटी का सदस्य बनाया गया है, जिसके चेयरमैन उनसे आधी से भी कम उम्र के अनुराग ठाकुर हैं। उधर, बीजेपी के दूसरे दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी और विपक्षी कांग्रेस के लिए सिर्फ इतनी राहत है कि जहां जोशी को एस्टीमेट कमिटी का चेयरमैन बनाया गया है, वहीं विपक्ष का नेता पद खोने के बाद कांग्रेस के नेताओं को पांच मंत्रालयों की स्टैडिंग कमिटियों के चेयरमैन का पद मिला है।

पिछले ही महीने आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को संसदीय बोर्ड से हटाने के बाद ही राजनीतिक क्षेत्रों में यह सवाल उठा था कि क्या आडवाणी को बिलकुल अलग-थलग किया जा रहा है। लेकिन अब आडवाणी को एक कमिटी में सदस्य बनाए जाने पर एक बार फिर इस मामले में विवाद खड़ा हो सकता है। दिलचस्प यह है कि जिस कमिटी में आडवाणी हैं, उसी में ही वरुण गांधी, हेमामालिनी, जया बच्चन और सचिन तेंदुलकर को भी रखा गया है। इससे पहले आडवाणी गृहमंत्रालय की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य थे लेकिन उस वक्त केंद्र में यूपीए की सरकार थी।

आडवाणी के साथ दूसरे दिग्गज मुरली मनोहर जोशी को एस्टीमेट कमिटी का चेयरमैन बनाया गया है। हालांकि उन्हें भी डिफेंस मंत्रालय की कमिटी में सदस्य रखा गया है। गौरतलब है कि स्टैडिंग कमिटियों के सदस्यों और चेयरमैन के नाम की सिफारिश राजनीतिक दल ही भेजते हैं। जिन कमिटियों का चेयरमैन कांग्रेसी नेताओं को बनाया गया है, उनमें विदेश मामलों की कमिटी का चेयरमैन शशि थरूर होंगे जबकि फाइनैंस कमिटी के वीरप्पा मोइली होंगे। इसी तरह से होम के लिए बनी कमिटी के चेयरमैन पी. भट्टाचार्य होंगे। साइंस ऐंड टेक्नॉलजी मंत्रालय की स्टैंडिंग कमिटी के चेयरमैन अश्विनी कुमार होंगे।

इसी तरह केवी थामस को पहले ही पीएमसी का चेयरमैन बनाया जा चुका है। महत्वपूर्ण है कि राहुल गांधी विदेश मामलों की कमिटी के सदस्य होंगे लेकिन सोनिया गांधी को किसी भी कमिटी में नहीं रखा गया है। रेलवे की कमिटी के चेयरमैन टीएमसी के दिनेश त्रिवेदी होंगे जबकि शहरी विकास मंत्रालय की कमिटी का चेयरमैन बीजेडी के पिनाकी मिश्रा को बनाया गया है। केडी सिंह को ट्रांसपोर्ट का चेयरमैन बनाया गया है और ग्रामीण विकास के लिए पी वेणुगोपाल चेयरमैन होंगे। अन्य कमिटियों में सतीश चंद्र मिश्रा (हेल्थ), बीसी खंडूरी (डिफेंस) को चेयरमैन बनाया गया है।

करप्शन के आरोपों पर सीबीआई को नहीं मिले वीरभद्र के खिलाफ सबूत

नई दिल्ली
सीबीआई ने मनी लॉन्डरिंग और घूस केस में एक तरह से हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को क्लीन चिट दे दी है।

दिल्ली हाई कोर्ट में ऐफिडेविट फाइल करते हुए सीबीआई ने कहा है, ‘हमे करप्शन के आरोपों की जांच करते हुए ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि आरसी(रेग्युलर केस) रजिस्टर किया जाए।’

हालांकि, सीबीआई ने कहा है कि अगर कोर्ट कहे तो हम एफआईआर कर सकते हैं, लेकिन बेहतर होगा कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इस मुद्दे की जांच करे। हम ऐसे मामलों की जांच करने के लिए अधिकृत नहीं हैं।

FB पर पाकिस्तानी महिला एजेंट के चक्कर में फंसकर देश से गद्दारी कर बैठा हिमाचली जवान

नई दिल्ली
पाकिस्तान  की खुफिया एजेंसी आईएसआई को सेना की गुप्त जानकारी देने के आरोप में हिमाचल प्रदेश एक नौजवान को यूपी एसटीएफ ने अरेस्ट किया है। कांगड़ा जिले के अंद्रेटा का रहने वाला यह युवक साल 2012 से सेना की कोर ऐंड सप्लाई डिविज़न में तैनात है। उसकी गिरफ्तारी उसके गांव अंद्रेटा से ही हुई, जहां इन दिनों वह छुट्टियां मना रहा था।प्राप्त जानकारी के अनुसार विनीत(बदला हुआ नाम) नाम का यह बीस साल का युवक फेसबुक पर पाकिस्तान की ISI  एजेंट पूनम नाम की किसी महिला के झांसे में आ गया था। उसने इसे सेना से जुड़ी कुछ जानकारी देने के एवज में लैपटॉप देने का वादा दिया था। आरोप है कि लैपटॉप के लालच में विनीत ने उस महिला को सेना से जुड़ी कुछ गुप्त जानकारियां मुहैया करवा दी हैं।

पिछले दिनों मेरठ से आसिफ नाम के एक आईएसआई एजेंट को गिरफ्तार किया गया था। उसी की निशानदेही पर  विनीत को अरेस्ट किया गया है। यूपी एसटीएफ ने हिमाचल प्रदेश पुलिस के साथ तालमेल कर के इंटेलिजेंस की खबर पर रात को उसे उसके घर से अरेस्ट कर लिया। इसके बाद यूपी एसटीएफ उसे अपने साथ ली गई है। ट्रांजिंट रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ के बाद ही इस मामले में और जानकारी सामने आ पाएगी। विनीत के लैपटॉप, सीडी और मोबाइल को कब्जे में लेकर जांच के लिए भेज दिया गया है।

गांव और परिवार के लोग सकते में
इन हिमाचल ने विनीत के व्यवहार को जानने के लिए गांव के कुछ लोगों से बात की।  लोगो का कहना है की  विनीत ऐसा लड़का नहीं है और वह जाने-अनजाने में किसी षड़यंत्र का शिकार हो गया है। उसने आर्मी में जाने के लिए बहुत मेहनत की थी। सुनीत के पिता भी आर्मी से सूबेदार की पोस्ट से रिटायर हुए हैं। पूरा परिवार इस घटना के बाद सदमे में है।

फेसबुक के जरिए शिकार बन रहे फौजी

फेसबुक पर महिला की फर्जी आईडी बनाकर पाकिस्तानी एजेंटों द्वारा भारतीय सेना के जवानों का फंसाने का यह पहला मामला नहीं है। कुछ दिन पहले ही हैदराबाद से एक सैनिक को पाकिस्तान को खुफिया जानकारी देने के आरोप में अरेस्ट किया गया था।

फेसबुक पर आपको ऐसी कई फर्जी प्रोफाइल्स मिलेंगी। इनसे सावधान रहें। ये अक्सर अलग-अलग सुंदर लड़कियों की तस्वीरें शेयर करती हैं।

फेसबुक पर एक महिला उसे भारतीय सेना की अहम जानकारियां देने के लिए कहती थी और बदले में अपनी नंगी तस्वीरें और विडियो भेजती थी। इसके अलावा उसे मुफ्त में लंदन की सैर करवाने का भी वादा किया गया था। इसी बात से फिसलकर वह जवान देश से गद्दारी कर बैठा था। बाद में साफ हुआ था कि वह महिला नकली थी और उसके भेजे विडियो भी किसी और के थे।

आप भी रहें सावधान
अक्सर लोग फेसबुक पर कोई अनजाना मगर खूबसूरत सा चेहरा देखकर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज देते हैं और वह झट से स्वीकार भी हो जाती है। कई बार ऐसी फ्रेंड रिक्वेस्ट्स भी आती हैं। इनमें से ज्यादातर प्रोफाइल्स फर्जी होती हैं। अक्सर युवक और पुरुष महिलाओं की ऐसी फेक प्रोफाइल्स से बातचीत करने लगते हैं। बातों ही बातों में ज्यादा करीब आने के चक्कर में वे अपनी महत्वपूर्ण जानकारियां बता देते हैं।

सोशल मीडिया पर लोगों का बिहेवियर स्टडी करने वाले एक्सपर्ट और अमृत तिवारी बताते हैं, ‘पुरुषों की इसी कमजोरी का फायदा खुफिया एजेंसियां भी उठाती हैं। वे महिलाओं की फेक प्रोफाइल्स बनाकर सेना या अन्य महत्वपूर्ण विभागों में बैठे लोगों से दोस्ती करती हैं, उनसे गर्मागर्म बातें करती हैं और अपने जाल में फंसा लेती हैं। पुरुष समझ नहीं पाते कि जिससे वे बात कर रहे हैं, वह वाकई में महिला है या नहीं और उसका इरादा क्या है। इस चक्कर में वे फंसते चले जाते हैं। ऊपर से रुपयों का लालच मिले तो उनकी सोचने समझने की क्षमता और खत्म हो जाती है।’

कैसे बचें फर्जीवाड़े से?
अमृत बताते हैं कि कॉमन सेंस इस्तेमाल करके ही इससे बचा जा सकता है। उनका कहना है कि हमारी जान-पहचान वाली महिलाएं या युवतियां अपनी  फेसबुक प्रोफाइल्स की सिक्यॉरिटी सेटिंग्स कठोर रखती हैं। वे अपनी अपनी सुरक्षा के लिए अपनी तस्वीरों को भी प्रॉटेक्ट करके रखती हैं। ऐसे में सोचना चाहिए कि क्यों कुछ लड़कियां अपनी प्रोफाइल्स धड़ाधड़ अपनी तस्वीरें शेयर करती हैं। अगर ऐसी कोई अनजान खूबसूरत लड़की झट से आपकी फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करे या अचानक आपको भेजे, तब भी सावधान रहिए। कोई भी लड़की इस तरह का व्यवहार सोशल मीडिया पर नहीं अपनाती। ऐसी फेक प्रोफाइल्स को उनकी तस्वीरों से भी पकड़ा जा सकता है। वे अलग-अलग सुंदर लड़कियों की तस्वीरें अपनी प्रोफाइल में लगाती रहती हैं।

वॉकआउट कर-करके विधानसभा का मजाक बना दिया है विपक्ष ने

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विधानसभा में पक्ष-विपक्ष के विधायकों का एक जगह पर एकत्रित होने का एक महत्व है। साल में होने वाले 3 सेशंस में जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है और प्रदेश के तरक्की से सबंधित कोई कानून पास किया जा सकता है। इसे भारतीय सविंधान और लोकतंत्र की सुंदरता ही कहा जा सकता है कि विधानसभा के अंदर विपक्ष सरकार से भी ज्यादा महत्वपूर्व और अनिवार्य हो जाता है। यानी पक्ष और विपक्ष को विधानसभा की छत बराबरी पर लाकर खड़ा कर देती है ताकि सरकार कोई भी फैसला लेने में मनमर्जी न कर सके। यह सत्ता को निरंकुश होने से रोकने और सबको साथ लेकर चलने का एक बहुत ही शानदार जरिया है।

विधानसभा सत्र एक ऐसा प्लैटफॉर्म है जहां विधायक अपने अपने क्षेत्र से जुड़ी समस्याएं उठा सकते हैं। विपक्ष के विधायकों के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां वे लंबित मामलों और योजनाओं पर जबाबदेही ले सकते हैं। सत्ता पक्ष अगर विपक्ष की बात को अनसुनी करता है तो विपक्ष वॉक आउट करके अपना विरोध दर्ज करा सकता है। विपक्ष के न होने से सरकार को भी कई फैसले लेने में दिक्कत आती है।

परन्तु बीते कुछ वर्षों से यह देख कर मन बहुत निराश हो जाता है कि शांत माने जाने वाले हिमाचल प्रदेश के विधानसभा सत्र अशांत चल रहे हैं। यह देखने में आ रहा है की नेता जनहित के मुद्दों के लिए नहीं बल्कि अपने व्यक्तिगत मुद्दों के लिए वॉकआउट को ढाल बना रहे हैं। विधानसभा में विधायकों का शोर शराबा सिर्फ अपने अपने राजनितिक आकाओं को खुश करने तक सीमित है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के कुछ सत्र हिमाचल प्रदेश क्रिकेट असोसिएशन पर लगे आरोपों की भेंट चढ़ गए।

मामला कोर्ट में है जांच एजेंसिया अपना कार्य कर रही हैं परन्तु सत्ता पक्ष फैसला आने से पहले ही भाजपा नेताओं को दोषी बता चुका है। विपक्ष भी कम नहीं है। 2 सत्र से इस मामले पर वॉकआउट करना बहुत ही निंदनीय है। क्या विधानसभा का सत्र सिर्फ इन्ही मुद्दों के लिए है? क्या सत्तर लाख की जनसंख्या वाले प्रदेश में जनता को कोई और समस्या ही नहीं है? रोजगार , शिक्षा सुधार आदि से जुड़े मसले प्रदेश में खत्म हो गए हैं?

विधानसभा का मॉनसून सत्र सब से महत्वपूर्ण माना जाता है। क्योंकि यह सब से लंबा चलता है। जनता के चुने हुए नुमइंदों को इस सत्र में जनहित से जुड़ी बात करने के लिए लगभग एक महीने का समय मिलता है। पिछले कल मॉनसून सत्र के पहला दिन था। अभी कार्यवाही सही ढंग से शुरू भी नहीं हुई थी कि विपक्ष ने फिर वॉकआउट कर दिया। मांग क्या थी कि कांग्रेस की प्रदेश में चार लोकसभा सीटों और एक विधानसभा उपचुनाव में हार हुई है, इसलिए मुख्यमंत्री नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दें। क्या यह एक जनहित से जुड़ा मुद्दा है कि जिस पर वॉकआउट किया जा सके? किसी पार्टी की हार पर कौन नेता इस्तीफा दे या न दे, यह उस पार्टी संगठन  का निजी मामला है या विपक्ष का? अगर विपक्ष को आपत्ति है तो उसका संगठन सड़क पर जाकर विरोध करे।

विधानसभा सत्र के लिए लाखों रुपये हर दिन के खर्च होते हैं। वहां कौन से मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए यह जानकारी हर विधायक को होनी चाहिए और उसका पालन करना उसका कर्तव्य है। यही सही मायनों में नैतिकता है। क्या हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सत्र कांग्रेस और बीजेपी नेताओं की व्यक्तिगत इच्छा पूर्ति और विरोध दर्ज करवाने के लिए हैं?

पिछले कुछ वर्षों से यही देखा गया है आज बीजेपी की यह नीति है। जब बीजेपी की सरकार थी और केंद्र में वीरभद्र सिंह के ऊपर आरोप लगे थे तब कांग्रेस की भी यही नीति थी। कांग्रेस विधायक भी अपने नेता के प्रति निष्ठा दिखाने के लिए सदन छोड़कर वॉकआउट करने चले जाते थे। इन वर्षों में ऐसा कोई भी बिल या चर्चा सदन के पटल पर नहीं आए है जिसमे जनता से सीधे कुछ जुड़ा हो और जिस पर पक्ष विपक्ष में गहमा-गहमी हुए हो। हिमाचल प्रदेश विधानसभा की गहमा गहमी सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट असोसिएशन और वीरभद्र सिंह के ऊपर लगे आरोपों तक सीमित हो गए है। क्यों न यही नेता अपने अपने क्षेत्रों की लंबित योजनाओं के लिए इस तरह उग्र हों ताकि अपने विधायक की निष्ठा देख कर क्षेत्र की जनता का सीना भी गर्व से फूल सके। परन्तु नहीं, विधानसभा सत्र की हालत और वहां के मुद्दे देखकर नहीं लगता यहां प्रदेश के चुने हुए प्रतिनिधि बैठे हैं।

सत्र और मुददे देख कर लग्गता है यह हिमाचल विधानसभा नहीं कांग्रेस और बीजेपी की कोई कंबाइंड मीटिंग है, जहां वो आपस में आरोप-आरोप खेल रहे हैं। यह सचमुच निराशाजनक है। यही सब चलता रहा तो हिमाचल प्रदेश आने वाले समय में सम्पनता से गरीबी की आवर चला जाएगा। राजनीति मात्र आपसी रंजिश और गुंडागर्दी बन कर रह जाएगी। प्रदेश की जनता को अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए  कूछ सोचना होगा। विधान सभा में बैठा विधायक सिर्फ एक चुना हुआ प्रतिनिधि होता है। वह अपने क्षेत्र की समस्या वहां उठाता है जवाबदेही लेता है। वो सिर्फ किसी पार्टी का नुमाइन्दा नहीं होता यही नैतिकता है।

लेखक: आशीष नड्डा, ईमेल: aksharmanith@gmail.com

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