किसी के साथ जबरदस्ती होली खेलना आपको जेल पहुंचा सकता है

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इन हिमाचल डेस्क।।
होली पर लोगों की जुबान पर ‘बुरा न मानो होली है’ का जुमला चढ़ा रहता है, मगर किसी का बुरा मानना आपको जेल तक पहुंचा सकता है। किसी की इच्छा के खिलाफ जाकर उससे जबरन होली खेलना आपको जेल पहुंचा सकता है। किसी पर जबरन रंग डालना, पानी गिराना, पानी के गुब्बारे फेंकना और उसे किसी भी तरह से परेशान करना न सिर्फ गलत है, बल्कि इसके लिए कानूनन सजा भी मिल सकती है।
देखने को मिलता है कि होली के कई दिन पहले से ही लोग अपने घरों में छिपकर नीचे सड़क से होकर आ-जा रहे लोगों पर पानी के गुब्बारे फेंकते रहते हैं। ऐसा करने वालों में बच्चों की तादाद ज्यादा होती है मगर पैरंट्स भी चुपचाप खड़े यह सब देखकर मजा लेते रहते हैं। होली के बहाने अक्सर कुछ किशोर लड़कियों को ज्यादा टारगेट बनाकर रखते है। लेकिन यह सब करना महंगा पड़ सकता है। अगर आपकी किसी हरकत से किसी को चोट पहुंचती है या उसे असुविधा होती है, तो वह आपको कोर्ट ले जा सकता है, जहां से आपको कड़ी सजा मिल सकती है।
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साभार; CNN
ईस्ट ऑफ कैलाश में रहने वाले अटल गुलानी बताते हैं कि पिछले साल होली से एक दिन पहले उन्हें खबर मिली कि उनके दोस्त का ऐक्सिडेंट हो गया है। वह जैसे ही हॉस्पिटल जाने के लिए अपनी बाइक पर निकले, किसी ने उनपर पानी से भरा गुब्बारा फेंक दिया। यह गुब्बारा सीधा उनकी आंख में आकर लगा और वह बाइक से गिरकर घायल हो गए और कलाई में फ्रैक्चर आ गया।
इसी तरह से अमर कॉलोनी के एक गर्ल्स पीजी में रहने वाली रिचा वर्मा को होली से नफरत हो चुकी है। वह बताती हैं, ‘पिछले हफ्ते मैं रिक्शा पर ऑफिस से लौट रही थी। जैसे ही मैं गली में दाखिल हुई, सड़क के दोनों ओर बने घरों से पानी भरे गुब्बारों की बरसात होने लगी। ये सब करने वाले 13-14 साल के लड़के थे। मैं उन्हें रोकती रही, लेकिन वे दूर से गुब्बारे फेंकते रहे। मैं पूरी तरह से भीग चुकी थी। रोना सा आ रहा था। इन लड़कों के पैरंट्स उन्हें रोकने के बजाय वहां पर खड़े हंस रहे थे।’
जो कुछ अटल और रिचा के साथ वह हुआ, वह गलत होने के साथ-साथ गैरकानूनी भी था। अगर उन्होंने पुलिस से इसकी शिकायत की होती उनके साथ ऐसी हरकत करने वालों को कोर्ट से सजा और जुर्माना दोनों हो सकता था। कानून के जानकार बताते हैं कि होली के नाम पर किसी भी तरह की बदतमीजी कानूनन अपराध है। गुब्बारे फेंकना, अचानक से पानी गिराना, रंग लगा देना या छूना एक तरह से दूसरों को चोट पहुंचाने वाले ऐक्शन है, जिसके लिए आईपीसी में सजा का प्रावधान है। अगर किसी को पकड़कर रंग लगाया जाता है तो मामला और भी गंभीर हो जाता है।
1. अगर रंग, पानी या गुब्बारे फेंकने से किसी को चोट लगती है तो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 319 के तहत मामला दर्ज हो सकता है। अगर चोट गंभीर हो तो धारा 323 भी लगेगी। इसके साथ ही धारा 268 के तहत सार्वजनिक स्थान पर लोगों के लिए असुविधा पैदा करने का मामला भी लग सकता है।
2. अगर लड़कियों के साथ ये सब हरकतें की जाएं, तो इसे ईव-टीजिंग यानी छेड़छाड़ की कैटिगरी में रखा जा सकता है। इसके लिए आईपीसी की धाराओं 509, 294 और 354 के तहत मामला दर्ज होगा।
 
3. ऊपर सभी बताई गई बातों के अलावा अगर और किसी तरह का नुकसान होता है तो उससे जुड़ी धाराओं का मामला भी दर्ज किया जा सकता है।
 
4. अगर ये सब हरकतें करने वाले आरोपी नाबालिग हैं, तो मुकदमा जुवेनाइल कोर्ट में चलेगा और उनके पैरंट्स को सह-आरोपी बनाया जा सकता है।
 
इसलिए होली उसी के साथ खेलें, जो आपके साथ खेलना चाहता हो। पैरंट्स को भी ख्याल रखना होगा कि उनके बच्चे कुछ ऐसा ही तो नहीं कर रहे, वरना उन्हें खुद भी सह-आरोपी बनना पड़ सकता है। किसी भी व्यक्ति को आपके द्वारा पहुंचाया गया नुकसान कानून की नजर में नुकसान ही है, कम से कम कोर्ट में तो ‘बुरा न मानो होली है’ की दलील नहीं चलेगी।

कार्यकरणी गठन से नाखुश वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता ने अमित शाह को लिखा पत्र



इन हिमाचल डेस्क 

बीजेपी प्रसिडेंट सतपाल सत्ती ने अपनी कार्यकरणी का विस्तार कर दिया है जिसमे कई नए पुराने चेहरों को जगह दी गई है।  कुछ लोग और पुराने कार्यकर्ता अपना नाम न देखकर नाराज भी पाए गए हैं।  जो भी है यह पार्टी का आंतरिक मामला है पर इन हिमाचल को ऐसे ही किसी नाराज वरिष्ठ कार्यकर्ता का मेल प्राप्त हुआ जिसमें उन्होंने अमित शाह को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी अलग ही तरीके से व्यक्त की है। यहाँ आपको हम वो पत्र लिखने वाले की भाषा में ही  दिखा रहे हैं पढ़ें और अपनी प्रतिक्रिया दें

” आदरणीय
श्री अमित भाई शाह जी
राष्ट्रीय अद्यक्ष भारतीय जनता पार्टी

सादर प्रणाम आपके संज्ञान में अवश्य यह बात आई होगी की हिमाचल प्रदेश भाजपा  अध्य्क्ष श्री सतपाल सिंह सत्ती जी ने अपनी कार्यकरणी का गत दिवस गठन कर लिया है।  मेरी तरह और अन्य लोगों की तरह आप देखेंगे तो यह नयी कार्यकरणी सिर्फ पुरानी बोतल में नई शराब की तरह है या यूँ कहें की लक्सेरी बस में बैठे लोगों की बस सीट बदल दी गई है। 
महोदय मैं 1985 से पार्टी का निष्ठावान कार्यकर्ता हूँ इससे पहले के विद्यार्थी परिषद के जीवन को तो मैं गिन ही नहीं रहा हूँ।  महोदय मेरे जैसे सैंकड़ों कार्यकर्ता लोगों की  उम्मीद  हर बार की तरह इस बार भी टूट  गयी है की उन्हें भी कभी संग़ठन में किसी पद पर  बिठाया जाएगा।   आखिर हम जैसे लोगों के साथ ऐसा क्यों हो रहा है हम लोग न पार्टी टिकट चाहते हैं न लाल बत्ती के सपने देखते हैं बस दिन रात पार्टी के कार्यों में लगे हुए हैं की देश में भाजपा का परचम हो।  आखिर हैं तो हम भी इंसान एक चपरासी भी लम्बी नौकरी के बाद सोचता है उसे कलर्क प्रोमोट कर दिया जाए  ऐसे ही हम भी सोचते हैं की  पार्टी सरकार में न सही संग़ठन में ही हमें  जिम्मेदारी सौंपे  पर यहाँ तो हमारा प्रोमोशन चैनल ही अवरूद्ध है।  
 
यहाँ  मास्टर आफ आल हैं  हमारा नंबर आता ही नहीं  जिन्हे विधायक बनना है  वही संग़ठन में भी हैं।  जिन्हे चेयरमैन बनना है वो भी संग़ठन में है।  जनाब  जब यही लोग सब कुछ घूम घूम कर होते रहेंगे तो  हमारा क्या होगा।  
  बहुत क्रांतिकारी विचारों से राजनीति में आए  थे  भले जमाने में पिताजी ने  खेती के दम पर शहर  पढ़ने भेजा था अपने गावं के इकलौते लड़के थे जो  कालेज की देहलीज़ तक पहुंचे थे  पार्टी के लिए मार खाई गावं गावं घूमे पोस्टर लगाए  पढ़ाई लिखाई सब चौपट की।  
उस जमाने में  तुरंत नौकरी लग जाती थी  एक इंटरव्यू  में लगभग फाइनल  काम था  पर जिस दिन इंटरव्यू था उस दिन हम   जोशी आडवाणी के  साथ कारसेवक बनकर आयोध्या पहुँच गए थे।  पिताजी ने बहुत रोका नहीं माने  पार्टी के लिए चले गए।  पर मिला क्या  पाव के पंजे भी घिसट  घिसट के छोटे  हो गए हैं पर हम उस समय भी कार सेवक थे आज भी कार सेवक ही हैं।  मोदी जी तो चाय बेच के प्रधानमंत्री बन गए पर हम तो  चाय बेचने के लायक भी आज नहीं रहे।  
 
इस बारे में  जब बड़े नेता से बात करो तो कहा जाता है की  ” अभी कार्य करते रहिये संग़ठन में जल्द ही आपको लिया जाएगा ”  धूमल साब हमारे सामने सामने  आए  थे सांसद बने  फिर मुख्यमंत्री हो गए  एक दिन पता चला उनका कोई बेटा भी है ” अनुराग ठाकुर ” अभी नाम ही सुना था की वो फुर्र से सांसद भी हो गए और राष्ट्रीय मोर्चा के अद्यक्ष भी बन गए , बरागटा जी का बेटा  आज  सुना है कोई इंचार्ज बना हुआ है  दिल्ली में  , कुल्लू  में पढ़ने वाले गोविन्द ठाकुर हमारे दौर के थे  जब तक हमें शादी के लिए लड़की  मिली तब तक वो  दो बार विधायक  भी हो गए।   रैली के लिए लोगों को ढोते रह गए  गावँ गावं से।  अब तो बीवी भी ताने मारती है  नेता तो तुम क्या बनते पर ठेकदार तक नहीं बन पाए।  जब जब पार्टी की सरकार आई लोगों ने सरकार आने पर  ट्रांसफर करवा के पैसे कमाए  कुछ ठेकदार हो गए  और हम  दीन दयाल जी का   “एकात्म मानवतावाद ”  और शांता कुमार का अंतोदय पाठ  रटते रह  गए।   
 
 
 
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 अंत में  सब तरफ से हारकर  भलेमानस लोगों के कहने पर हमने  भी अपनी शैली बदली  यानी  भाजपा से हटकर  नेता के पीछे लगने लगे  कई  गुट बदले पर कोई मेहरबान नहीं हुआ।    ये शांता जी भी बड़े जालिम निकले  सोचा था कभी हमारा  उद्धार करेंगे पर  इन्हे भी  कपूर  निक्का , परमार  परवीन जी ही भाए।   धूमल जी की आँख में कभी हम सुहाए ही नहीं और नड्डा  जी से जादू की जफ्फी  और प्यारी मुस्कान  के अलावा हमारे हिस्से में कुछ आया नहीं।  
 
महोदय  अब  किसी  छोटे पद  की लालसा  भी करो  तो बड़े नेता प्यार से समझाते हुए कह देते हैं  की ” अरे भाई पुराने आदमी हो पार्टी के अब इस  छोटे पद पर अच्छे थोड़ी लगेगा।  दिल तो करता है यह बोल दे पुराने हैं तो अद्यक्ष क्यों नहीं बना देते  छोटे बड़े के बहाने क्यों बनाते हो जब नहीं देना है कुछ तो सीधे बोलो  / 
  
आज के  विधायकों के और पार्टी के कारदारों के घरों का यह हाल है की  अभी  बाप पीछे हटा नहीं उनके स्कूल जाने वाले बच्चे  सफ़ेद कपडे पहनकर अपनी राजनीति पुष्ट करने में लगे हैं।  युवा मोर्चा तो  भारतीय जनता युवा मोर्चा नहीं  बल्कि  भाजपा  नेता पुत्र  एडजस्टमेंट मोर्चा हो गया है।   महोदय आखिर हममे और कांग्रेस में फिर क्या फर्क रह गया है ? कांग्रेस तो एक  पप्पू को एडजस्ट करने में लगी है।  यहाँ तो सप्पू , टप्पू , नप्पु  झप्पू  आदि बहुत  बच्चे लाइन में हैं।  
1985  से पार्टी मे घिसटते हुए कार्यकर्ता  का टैग लगाये हुए  मेरे जैसे कई लोग अभी भी राज्य कार्यकारणी में नाम आने की राह देख रहे हैं। और कुछ लोग हवाई सफर करते हुए  मीलों आगे चले गए हैं   अब यह टैलेंट है या सेटलमेंट कौन  जाने  
हर बार  कार्यकरणी  बनने से पहले  बड़े नेता लोगों के चक्कर लगाते थे  की इस बार कुछ होगा इस बार पक्का होगा उस बार पक्का होगा परन्तु  अब तो टुकुर टुकुर उम्मीदों को ढोती  यह आँखे भी अंधी हो चली हैं।  
दुखी हूँ पर अनुशाशन का पक्का हूँ।  क्या करूँ पुराना आदमी हूँ  संस्कार समेटे हुए हूँ।  आपको खीज में पत्र लिखा उसमे नाम भी लिख दिया मीडिया को भी दे रहा हूँ पर वहां नाम नहीं दूंगा। नहीं तो बड़े नेता  जो कार से उतरते चढ़ते हुए जरा सा देखकर मुस्कुरा देते हैं नाम ले के पुकार देते हैं तो वो भी बंद हो जाएगा।  अब इसी सहारे तो समाज में टिके हुए हैं।   चार ज्ञान की बाते कहीं चौक पर पेल देते हैं तो लोग सुन लेते हैं की जानकार आदमी है पार्टी का बड़े लोग जानते हैं इसे।  अगर यह भी बंद हो गया तो गावं मोहल्ले में वही इज़्ज़त रह जाएगी जो घर में बीवी  बच्चों के सामने है।  इसलिए मीडिया में  नाम देने का रिस्क नहीं ले सकता 
इसी के साथ  शब्दों को विराम देता हूँ आपके पत्र का इंतज़ार रहेगा।  मेरा वक़्त तो गया पर उम्मीद है मेरी भावनाओं को पढ़कर आप उन नौजवानों के लिए भविष्ये में कोई एंट्री स्कीम पार्टी संग़ठन में लेकर आएंगे जिनका कोई माई बाप गॉडफादर पार्टी में नहीं है।  “
 
धन्याबाद 
 
एक भड़का हुआ  भाजपाई 
पद -कार्यकर्ता 
अनुभव – 31 वर्ष  ” 
 
 
 
 
 
 

आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक से फलों की बागवानी करने लगे है अब लाहौल-स्पीति के किसान

केलांग।।
 
जिला में बागबानी के प्रति युवा किसानों का रुझान बढ़ रहा है और इस क्षेत्र में नए फलदार सेब के पौधे लगाने के साथ-साथ किसानों द्वारा आधुनिक तकनीक को भी अपनाया जा रहा है। जिला में पिछले एक दशक में कई हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में फलदार पौधे लगाए गए हैं और हज़ारों टन सब्जियों का उत्पादन भी दर्ज किया है। पट्टन घाटी के युवा किसान और बागवान आशीष ने बताया कि पिछले दस बर्ष में जिला के हज़ारों हेक्टेयर क्षेत्र में सरकारी मदद और अपने आप किसानों बागवानों ने फलदार सेब के पौधे लगाए हैं और इन पौधों से फलों का उत्पादन शुरू भी हो चूका है। इसी प्रकार कई हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों द्वारा ऑर्गेनिक सब्जियां उगाई गई हैं और इस क्षेत्र में पिछले सालों में टनों के हिसाब से सब्जियों का उत्पादन हुआ है। किसानों द्वारा कई हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती भी की जा रही है और इनसे हज़ारों के हिसाब से स्टीक्स का उत्पादन किया गया है।
 
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जाहलमा गाँव के एक युवा किसान ने बताया कि किसानों को सब्जियों के उत्पादन को वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीक के साथ भी जोड़ा जा रहा है। अब तक किसानों द्वारा कई हेक्टेयर क्षेत्र में पोलीहाउस की स्थापना की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि बाकि जिलों में सरकार सब्जी और फल उत्पादक किसानों को विभाग द्वारा प्लास्टिक क्रेट 50 से 80 प्रतिशत अनुदान पर दिए जाते हैं । लाहौल में भी सब्जी उत्पादक किसानों को आधुनिक कृषि के लिए मिनी किट भी उपलब्ध करवाई जानी चाहिए।
 
उदयपुर उपमंडल के एक युवा किसान वीरेंदर बताते हैं ” कैसे अधिकारी और बड़े अफसरों ने (जिसमें डी सी भी परिवार के साथ शामिल था) किसानों के नाम पर 25-30 लाख खर्च कर हवाई जहाज में सफ़र कर बड़े बड़े स्टार होटलों में केरल घूम कर आये हैं अगर इस पैसे से लाहौल के किसानों को हिमाचल और पंजाब में स्थित एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी या हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी में ट्रेनिंग देते तो कुछ लाभ होता मगर अफसरों ने नेताओं के चमचों के साथ किसानों का पैसा मौज मस्ती में उड़ा लिया, हैरानी पूछने वाला कोई नहीं है।”
 
किसानों ने मांग की है की आलू और मटर के बीज पर सरकार को अनुदान देना चाहिए और बागबानी अधिकारियों को निर्देश दिए जाने चाहिए कि वे जिला में सेब,अखरोट व भौगोलिक स्थिति में मुताबिक अन्य फलों के बाग लगाने के लिए लोगों को प्रेरित करें।
उन्होंने यह भी कहा कि बागवानी अधिकारी अधिक से अधिक किसानों को संपर्क करें और उनके बीच बैठकर विभाग की योजनाओं की जानकारी दें और उन्हें फलों और सब्जियों की आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक अपनाने के लिए भी प्रेरित करें।
 

यह क्रिकेट का राजनीतिकरण नहीं, राजनीति का क्रिकेटीकरण है

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  • सर्वेश वर्मा

हिमाचल प्रदेश पिछले दिनों से चर्चा में है। चर्चा ही वजह है धर्मशाला में मैच को लेकर हुआ बवाल। मेरा मानना है कि यह मैच होना चाहिए था और इसके विरोध की कोई वजह नहीं थी। जिन लोगों ने भी इसका विरोध किया, वे ठोक वजह नहीं बता सके। नेताओं से पूछा गया कि आप क्यों विरोध कर रहे हैं, तो उनका कहना था कि शहीदों के परिवार विरोध कर रहे हैं, इसलिए उनकी भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। शहीदों के परिजनों के मन में गुस्सा क्यों था, यह बात समझ आती है। उन लोगों की भावनाओं पर सवाल नहीं उठाया जा सकता, क्योंकि उन्होंने अपना खोया है। पूर्व सैनिक होने के नाते मैं इस बात को समझ सकता हूं।

मैच रद्द होने के बाद एक अलग ही हाल सोशल मीडिया पर देखने को मिल रहा है। बीजेपी और कांग्रेस के दो खेमे आपस में पहले बहस किया करते थे, अब मैच समर्थनक और मैच विरोधी खेमे हो गए हैं। क्रिकेट ने राजनीति की दूरियों को पाट दिया है। अब मैच एक बड़ा मु्द्दा हो गया है। प्रदेश के नेताओं पर छींटाकशी हो रही है, अभद्र भाषा इस्तेमाल हो रही है। गिरने के चरम स्तर तक गिरकर आरोप लगाए जा रहे हैं। छुटभैय्ये नेता तो छोड़िए, बड़े नेताओं के परिजन तक इस कीचड़ में कूद चुके हैं।

आज मैंने हिमाचल के पूर्व मुख्यमंंत्री प्रेम कुमार धूमल के छोटे बेटे और BCCI सचिव अनुराग ठाकुर के छोटे भाई अरुण की फेसबुक पोस्ट देखी तो विचलित हो गया। मैच रद्द होने से मैं भी आहत हुआ हूं, मगर जिस तरह की भाषा अरुण ने इस्तेमाल की है, वह चौंकाने वाली है। राजनीति में आने के लिए डेस्परेट दिखने वाले अरुण कई बार पहले भी वीरभद्र सिंह के प्रति असंयमित होकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं। मगर इस बार उन्होंने अपनी ही पार्टी के सीनियर नेता पर निशाना साधा है।

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अरुण ठाकुर (फेसबुक टाइलाइन से साभार)

अरुण ठाकुर के पिता प्रेम कुमार धूमल जिस नेता की उंगली पकड़कर राजनीति में आए थे, आज अरुण उसी पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। वह लिखते हैं-

‘जिन लोगों के विक्रम कुछ नहीं कर पाए उनके गठबंधन ने एक फ़्रॉड विनय को गोद लेके इस प्रदेश के साथ इतना बड़ा धोखा कर दिया । इस प्रदेश में यह ना हो वो ना हो, क्या यही राजनीति होगी या है कोई इस बात की भी चिंता करेगा कि क्या हो सकता है। प्रदेश के लोग तय करें जो लोग केवल अपना या अपने परिवार का कायाकल्प करते हैं वो लोग चाहिए या वो जो इस प्रदेश का कायाकल्प करने का मादा रखते हैं वो ।।
इन चार पंक्तियों में प्रदेश की राजनीति का सार है ।। उम्मीद है आप सब समझ गए होंगे। आप सब के विचार आमंत्रित हैं । जय हिंद जय हिमाचल ।।’


ऊपर जो शब्द मैंने बोल्ड किए हैं, वे पालमपुर में शांता कुमार द्वारा चलाए जा रहे ट्रस्ट के नाम की तरफ इशारा करते हैं। गौरतलब है कि शांता कुमार ने इस मैच का विरोध किया था। जिस तरह से मैच के समर्थन या विरोध को लेकर हम सभी की अपनी राय हो सकती है, उसी तरह से शांता कुमार की राय भी हो सकती है। मगर जब आर राजनीति में एक पार्टी का सहारा लेकर आने की इच्छा रखते हैं, उसी पार्टी के पितामहों पर निशाना साधना आपको शोभा नहीं देता।

जिन लोगों के विक्रम कुछ नहीं कर पाए उनके गठबंधन ने एक फ़्रॉड विनय को गोद लेके इस प्रदेश के साथ इतना बड़ा धोखा कर दिया । …
Posted by Thakur Arun Singh on Wednesday, March 9, 2016

ऐसी ही एक पोस्ट नीरज भारती की देखी। उस पोस्ट में नीरज भारती ने अनुराग ठाकुर को छक्का कहा है। आपत्ति इस बात से नहीं है कि अनुराग ठाकुर को छक्का कहा गया। छक्का कहना दिखाता है कि नीरज भारती की समझ का स्तर कितना है। छक्का शब्द हिंदुस्तान औऱ पाकिस्तान में उस तबके के लिए अपमानजनक रूप से कहा जाता है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने तृतीय लिंग या थर्ड जेंडर की पहचान दी है। वे हमारी और आपकी ही तरह इंसान हैं। अब तक वे उपेक्षित होते रहे, उस बात के लिए, जिसमें उनकी कोई गलती नहीं। उन्हें छक्का कहना और उनका उपहास उड़ाना सभ्य समाज को शोभा नहीं देता। इसी तरह से किसी और इसी तरह के शब्द संबोधित करना मानसिक दिवालियेपन की ही निशानी है। वैसे भी नीरज भारती के बारे में कुछ कहना भी बेकार लगता है। मुख्मंत्री ने उन्हें हिमाचल कांग्रेस का ब्रैंड ऐंबैसडर बना रखा है।

कुछ भारतीय जनता पार्टी के अंधभक्त भौंकु इस छक्के को HPCA का शेर कह रहे हैं बिल्कुल ठीक कह रहे हो अंधभक्त भौंकुऔं ये सिर…
Posted by Neeraj Bharti on Tuesday, March 8, 2016

मैं कभी राजनीति में नहीं पड़ा, न ही मेरी रुचि रही कभी। मगर मैंने सजग नागरिक होने के नाते प्रदेश की राजनीति पर नजर रखी है। वीरभद्र और शांता कुमार में लाख बुराइयां सही। इन बुुजुर्ग नेताओं ने हिमाचल के मौजूदा स्वरूप को आकार देने में महत्वूर्ण भूमिका निभाई है। शांता कुमार ने जो नीतियां बनाईं, उनमें से बहुतायत आज भी प्रदेश में फॉलो की जा रही हैं। वीरभद्र ने भी उन नीतियों को सराहा है और उन्हें जारी रखा है। इन नेताओं को पसंद करना या न करना आपके वश में है। उनकी आलोचना भी होनी चाहिए, मगर तथ्यों एवं तर्कों के आधार पर। व्यक्तिगत लांछन लगाकर नहीं।

यह अफसोस की बात है कि प्रदेश में लाँछन लगाने की राजनीति चरम पर है। अरुण ठाकुर की ही बात की जाए तो वह बीजेपी के मंच से कभी कुछ नहीं बोलते। कभी नीतियों पर चर्चा नहीं, फैसलों पर राय नहीं। मगर जब उनके पिता या भाई को लेकर कोई सवाल उठे, तो हिमाचल भाजपा उन्हें आगे कर देती है और पार्टी के मंच से वह वीरभद्र पर निशाना साधते हैं। फिर दोबारा गायब हो जाते हैं। अब एक कदम बढ़कर उन्होंने उस शख्त पर हमला कर दिया, जिसने प्रदेश में पार्टी को स्थापित किया है।

मैच तो एक बहाना है। प्रदेश में क्रिकेट के नाम पर जिस तरह से राजनीति हो रही है, वह अफसोसनाक है। असल मुद्दे गायब हैं। बजट पर कोई चर्चा नहीं, लोगों की समस्याओं का कोई जिक्र नहीं, बस मैच की चिंता है। अफसोस, उम्मीद थी कि राजनीति बदलेगी। मगर यह नहीं पता था कि राजनीति का क्रिकेटीकरण हो जाएगा।

(लेखक पूर्व सैनिक हैं और इन दिनों एक निजी यूनिवर्सिटी में अध्यापन कार्य कर रहे हैं।)

मैच कैंसल होने से धर्मशाला में सुधीर शर्मा के प्रति रोष

कागड़ा।।

भारत और पाकिस्तान के बीच टी-20 वर्ल्ड कप मुकाबले को धर्मशाला से कोलकाता शिफ्ट होने को लेकर कांगड़ा जिले में बहुत से लोगों, खासकर युवाओं में नाराजगी देखी जा रही है। धर्मशाला में व्यापारी वर्ग में खासा रोष देखने को मिल रहा है। लोग न सिर्फ कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को कोस रहे हैं, बल्कि स्थानीय विधायक और शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा को भी बराबर जिम्मेदार बता रहे हैं।

धर्मशाला में एक वर्ग का मानना है कि मुख्यमत्री वीरभद्र सिंह द्वारा खुलकर धर्मशाला मैच का विरोध करने के पीछे दरअसल सुधीर शर्मा का ही हाथ है। कहा जा रहा है कि सुधीर नहीं चाहते थे कि धर्मशाला में मैच हो और अनुराग ठाकुर के प्रति समर्थन जुटे। इसीलिए उन्होंने मुख्यमंत्री के करीबी होने का फायदा उठाते हुए उन्हें इस मुद्दे पर गुमराह किया और मैच का विरोध करवाया। चर्चा है कि इसी वजह से मैच को लेकर सुधीर निजी राय व्यक्त करते रहे और खुलकर मैच का समर्थन नहीं किया।

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व्यापारी वर्ग में इस बात को लेकर गुस्सा है कि खुद को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का करीबी बताने वाले सुधीर शर्मा ने इस मैच को लेकर खुलकर कोई स्टैंड क्यों नहीं लिया। लोगों का मानना है कि सुधीर चाहते तो वह मुख्यमंत्री को मना सकते थे और समझा सकते थे कि यह मैच धर्मशाला के लिए कितना महत्वपूर्ण है। यही नहीं, उन्हें शहीदों के परिजनों से भी बात करनी चाहिए थी और समझाने की कोशिश करनी चाहिए थी। लोगों का कहना है कि सुधीर को अभी भी बताना चाहिए कि वह मैच के समर्थन में थे या पक्ष में।

गौरतलब है कि सुधीर शर्मा ने कहा था कि यह उनकी निजी राय है कि मैच होना चाहिए। मगर इसके अलावा वह सक्रिय रूप से कुछ भी कहते या करते नजर नहीं आए थे। धर्मशाला के लोगों में इस बात को लेकर भी गुस्सा है कि कांग्रेस ने इस मामले में राजनीतिक रंजिश के लिए शहीदों के परिवारों को ढाल बनाया। वहीं एक बड़ा तबका यह भी मानता है कि पाकिस्तान के साथ मैच नहीं होना चाहिए था और अच्छा हुआ कि यह कोलकाता शिफ्ट हो गया।

बाहर दवाई के तौर पर उगाई जाती है द्रागल या गाजल बेल

पहचाना?

ये है द्रागल बेले या गाजल बेल. एक ऐसा पौधा जिसका फल भयंकर खुजली पैदा करता है. इसका वैज्ञानिक नाम है- Mucuna pruriens. इसे velvet bean या cowitch समेत कई सारे नामों से जाना जाता है. ये अफ्रीका, कैरेबियाई द्वीपों और भारत में पाई जाती है.

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हमारे हिमाचल में तो ये झाड़ियों और जंगलों में ही उगती है लेकिन बाहर इसकी खेती की जाती है. एक तो इसलिए क्योंकि ये नाइट्रोजन फिक्सेशन करके जमीन को उपजाऊ बनाती है. इसे Green manure यानी कि Cover crop के तौर पर उगाया जाता है. साथ ही इसकी बिक्री भी की जाती है क्योंकि इसे आयुर्वेदिक दवा के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. अफ्रीका में इसे सांप के काटने पर इलाज के लिए इस्तेमाल करते हैं.

इससे भयंकर खुजली होती है क्योंकि पकी हुई बीन्स के बाहर महीन बाल की तरह कांटे होते हैं जो त्वचा से चिपककर खुजली पैदा करते हैं. खुजली को कम करने के लिए या तो गोबर मला जाता है या फिर तंबाकू के पौधे की पत्तियां रगड़ी जाती हैं. साथ ही इनकी गुठली को बच्चे घिसकर गर्म करते हैं और शरारत के तौर पर दूसरे बच्चों से छुआते हैं. कई बार लोग दुर्भावना या शरारत के तौर पर इसका इस्तेमाल लोगों को परेशान करने के लिए करते हैं.

क्रिकेट की रार के बीच शिमला में अनुराग -वीरभद्र की मीटिंग !

  • इन हिमाचल डेस्क 
पाकिस्तान क्रिकेट टीम के धर्मशाला आगमन से पहले चल रही किचकिच के बीच बीसीसीआई सचिव अनुराग ठाकुर अभी अभी हिमाचल विधानसभा पहुंच गए हैं। यहां पहुंचते ही उन्होंने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से विधानसभा परिसर में मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री को धर्मशाला में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप के मैच के लिए न्यौता दिया। अनुराग का मुख्यमंत्री से मिलना इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि धर्मशाला में मैच को लेकर प्रदेश की वीरभद्र सरकार हाथ खड़े कर चुकी है। बीते कल ही मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा था कि केंद्र सरकार चाहती है कि प्रदेश में हंगामा हो तो मैच करवा लें। उन्होंने एचपीसीए पर भी हमला बोला था। वहीं,अनुराग ठाकुर ने ट्वीट कर कहा था कि क्रिकेट मैच को राजनीतिक रंग देने वाले अपने कमियां और अक्षमता को दर्शा रहे हैं। मैच रद होने से प्रदेश और देश की छवि पर दाग लगेगा। दूसरे ट्वीट में उन्होंने क्रिकेट फैन, पर्यटकों और आयोजकों का हवाला दिया हैं। इसमें उन्होंने कहा है कि सभी मैच कार्यक्रम के अनुसार काफी पहले अपने यात्रा प्लान बना चुके होते हैं। तीसरे ट्वीट में उन्होंने मैच रद करने या स्थान बदलने की संभावनाओं पर विराम लगाया था। इसी बीच आज उनका शिमला स्थित विधानसभा पहुंचना बड़ी बात है। क्योंकि बजट सत्र के दौरान अनुराग ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मुलाकात कर नया दांव खेल दिया है। यह अलग बात है कि वीरभद्र सिंह धर्मशाला में होने वाले टी-20 मुकाबलों के लिए आए या नहीं।
 सूत्रों की माने तो  कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला इस मामले में बीच बचाव में आये हैं।  राजीव शुक्ला पहले भी कह चुके हैं की मैं इस मामले में वीरभद्र सिंह से बात करूँगा।  राजीव शुक्ला की कांग्रेस आलाकमान से भी ठीक पैठ है इसलिए माना जा रहा है की वीरभद्र को मनाने में उनकी  तरफ से भी कोशिश की जा रही है।

वहीँ इस मामले में वीरभद्र सिंह ने मीटिंग के बाद कहा है की  अच्छा होता अनुराग ठाकुर पहले आते जो पहल अब की है उसे पहले करने की है जरूरत
वहीं  परिवहन मंत्री ने जीएस बाली अनुराग ठाकुर से अपील की है की  भूतपूर्व सैनिकों की भावनाओं का ख्याल रखते हुए मैच स्थानांतरित करें
 शिमला धर्मशाला में भारत-पाक मैच का मामला शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा मैच भूतपूर्व सैनिकों की भावनाओं के खिलाफ

सोचा नहीं था कि कोई नेता ऐसे मां-बहन की गाली देगा और मुख्यमंत्री चुप बैठेंगे

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आई.एस. ठाकुर।।

कभी नहीं सोचा था कि एक विधायक पहले तो अभद्र भाषा इस्तेमाल करेगा और फिर उसे टोका जाएगा तो वह हमारी मां **** की बातें करेगा। (पूरी बात पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)। इसकी भी कल्पना नहीं की थी कि यह सब खुलेआम होगा और कोई मंत्री, मुख्यमंत्री या नेता कुछ नहीं करेगा।

यही नहीं, वह खुलेआम कहता है कि यह मेरी ही आईडी है। मीडिया में भी कह चुका है कि मैं लोगों को उनकी भाषा में ही जवाब देता हूं। फिर भी कार्रवाई नहीं हो रही।

मुख्यमंत्री से शिकायत की जाती है तो वह कहते हैं कि पहले बीजेपी वाले अपने को सुधारें। हम तो बीजेपी वाले हैं, न कांग्रेस वाले। हम हिमाचल के नागरिक हैं। हमारे लिए हिमाचल सत्ता का जरिया नहीं, हमारी जान और मान है। हमारे यहां का नेता अगर हमारी मां और बहन **** की बातें करेगा तो यह हमसे बर्दाश्त नही ंहोगा।

पिछली बार नीरज भारती नाम के इस शख्स ने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को B…..C और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर M…. C  को लिखा था। तब विवाद हुआ था, मगर बीजेपी ने इस मुद्दे को जोर-शोर से नहीं उठाया। सब जानते हैं कि इसका अर्थ क्या होता है। ऊपर से जनाब ने सफाई दी थी कि BC मतलब Before Christ और MC मतलब Mahan Chanakya. ये शब्द वाक्य में कैसे फिट बैठते हैं, इसे समझाने में वह नाकाम रहे थे। (पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


अफसोस की बात यह है कि कोई जनप्रतिनिधि इस तरह की भाषा इस्तेमाल कर रहा है, मगर कांग्रेस के मुख्यमंत्री और तमाम सीनियर नेता उसके खिलाफ मुंह नहीं खोलते। माना जा सकता है कि कांग्रेस के लोग अपने लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करना चाहते, मगर अनुराग ठाकुर और प्रेम कुमार धूमल के छींक मारने पर भी हंगामा कर देने वाली बीजेपी नेता क्यों खामोश हैं।

ये राजनेता खामोश रहते हों तो रहें, हम आम लोग खामोश नहीं बैठेगें। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को जवाब देना होगा कि उन्होंने क्यों ऐसे घटिया इंसान को CPS एजुकेशन बनाया है। क्या उन्हें इनकी भाषा में कुछ गलत नजर नहीं आता। और कहां गए मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार, जो आए क्रांतिकारी बातें करते हैं। क्या वे बता सकते हैं कि आईटी की कौन सी धारा के तहत यह अपराध हो रहा है? क्या वे बता सकते हैं कि उनकी पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे इस शख्स के खिलाफ कार्रवाई की मांग क्यों नहीं करते वह?

काली पीली भेड़ों की बातें करने वाली पार्टी आज इंसानों में फर्क करना भूल गई है। यह शर्मनाक है। अगर कांग्रेस खुद कार्रवाई नहीं करती है तो सभ्य नागरिकों को आगे आना होगा। हिमाचल को यूं बदनाम करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। 

(लेखक इन हिमाचल के नियमित स्तंभकार हैं, इन दिनों आयरलैंड में हैं।)

नीरज भारती ने पार कीं बदतमीजी की हदें, शर्मसार हुआ हिमाचल

शिमला।।
बदतमीजी के लिए पहचाने जाने वाले कांगड़ा के ज्वाली से कांग्रेस विधायक और शिक्षा विभाग के मुख्य संसदीय सचिव नीरज भारती ने सोशल मीडिया पर सारी हदें पार कर दी हैं। देश की कई दिग्गज हस्तियों के प्रति अपशब्द इस्तेमाल कर चुके और महिलाओं के प्रति अभद्र भाषा इस्तेमाल कर चुके नीरज भारती ने अब जिस तरह की भाषा इस्तेमाल की है, उससे पूरे हिमाचल सा सिर शर्म से झुक जाता है।

पढ़ें: क्या हिमाचल के लोग नेता से मां-बहन की गालियां बर्दाश्त करेंगे?

नीरज भारती ने न सिर्फ अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर मां-बहन की गालियां निकाली हैं, बल्कि खुलेआम चुनौती दी है कि यह मेरी ही आईडी है, मैं ही इसे ऑपरेट करता हूं और जो उखाड़ना है, उखाड़ लो। क्या कॉमेंट नीरज भारती ने किए हैं, हम उस भाषा को दोहराना पसंद नहीं करते। मगर स्क्रीनशॉट हम नीचे दे रहे हैं, ताकि आप खुद पढ़ लें। सत्ता के नशे में चूर नीरज भारती लगातार ऐसी भाषा इस्तेमाल कर रहे हैं और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह उनका बचाव करते नजर आते हैं। बुद्धिजीवी कांग्रेस कार्यकर्ता आंखें मूंद लेते हैं और विपक्षी बीजेपी नेता इसपर सतही धमकियां देने के अलावा कुछ नहीं करते।

मगर यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की प्रतिष्ठा से जुड़ा विषय है। हिमाचल प्रदेश में शिक्षा जैसा अहम विभाग संभाल रहा शख्स इस तरह की भाषा इस्तेमाल करे तो यह शर्म की बात है। छक्का शब्द इस्तेमाल करने का विरोध करने पर आरटीआई ऐक्टिविस्ट देवाशीष भट्टाचार्य के खिलाफ अपमानजनक भाषा इस्तेमाल की गई। गौरतलब है कि देवाशीष ने ही शिमला में प्रियंका वाड्रा द्वारा किए जा रहे भवन निर्माण को लेकर आरटीआई से जानकारी मांगी थी। इसससे बौखलाए नीरज भारती ने क्या कहा, नीचे देखिए…

कब तक लाहौल-स्पीति की अनदेखी करती रहेंगी हमारी सरकारें?

इन हिमाचल डेस्क।।

लाहौल स्पीति के मडग्राम में होने वाला योर मेला 28 फरवरी से शुरू होने जा रहा है। लाहौल-स्पीति से जुड़े मुद्दे उठाने वाले पेज Lahaul Spiti ने अपनी पोस्ट में बताया है कि जनजातीय विकास विभाग और डिस्ट्रिक्ट ऐडमिनिस्ट्रेशन लाहौल की लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। आलम यह है कि लोगों में प्रसिद्ध इस मेले पर सरकार पैसा नहीं खर्च करती है। स्थानीय लोग ही अपने दम पर कई सालों से इस मेले का आयोजन कर रहे हैं।

फेसबुक पेज ने जो पोस्ट शेयर की है, उसका टेक्स्ट हम नीचे यथावत दे रहे हैं:

‘लाहौल स्पीति के अंचल-अंचल में लोक संस्कृति, लोक नृत्य, लोक गीत और लोक साहित्य अनन्य आयामों में बिखरा पड़ा है। शायद इसी परिप्रेक्ष्य में कहा भी गया है, ‘चार कोस पे पानी बदले, आठ कोस पे वाणी।’ यही बदलती हुई वाणियां, मसलन वे बहु बोलियां हैं, जो सांस्कृतिक विविधता के विविध लोकरूपों में आयाम रचती हैं।

मगर जनजातीय विकास विभाग और जिला प्रशासन लाहौल के लोक संस्कृति और लोक नृत्य के संरक्षण के लिए कुछ भी नहीं कर रहे हैं। मङ्ग्राम योर में सरकार ने एक रुपया भी आजतक नहीं खर्च किया मगर गाँव के लोग अपने दम से इतने सालों से योर मेला आयोजित कर रहे हैं।

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हमें अपनी ज्ञान परंपरा और इतिहास बोध भी इसी लोक संस्कृति से होता है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजनेताओं और नौकरशाहों की सांस्कृतिक चेतना विलुप्त हो रही है। इन दोनों ने लाहौल में जो सांस्कृतिक बहुलता है, उसे सर्वथा नजरअंदाज कर सांस्कृतिक सरोकारों का मुंबइया फिल्मीकरण कर दिया। वैचारिक विपन्नता का यह चरम, इसलिए और भी ज्यादा हास्यास्पद व लज्जाजनक है, क्योंकि जिलें में ज्यादातर जनजातीय अधिकारी हैं, जो जनजातीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ध्वजा फहराने का दंभ भरती हैं।

हमारी लोक संस्कृतियां ही हैं, जो अवाम को संस्कृति के प्राचीनतम रूपों और यथार्थ से परिचित कराती हैं। हजारों साल से अर्जित जो ज्ञान परंपरा हमारे लोक में वाचिक परंपरा के अद्वितीय संग्रह के नाना रूपों में सुरक्षित है, उसे उधार की छद्म संस्कृति द्वारा विलोपित हो जाने के संकट में डाला जा रहा है। इस संकट को भी वे राज्य सरकारें आमंत्रण दे रही हैं, जो संस्कृति के संरक्षण का दावा करने से अघाती नहीं हैं।’