होशियार मामले की CBI जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन

मंडी।। करसोग में संदिग्ध हालात में मृत पाए गए वनरक्षक होशियार सिंह मामले की जांच सीबीआई से करवाने को लेकर एक बार फिर लोगों ने मांग उठाई है। बुधवार को जंजैहली में लोगों ने सराज मंच के बैनर के तहत एकजुट होकर चक्का जाम कर दिया। लोगों ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ भी नारेबाजी की।

सराज मंच के अध्यक्ष ने कहा कि होशियार सिंह मामले की भी सीबीआई जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि  राज्य सरकार इस मामले में अनदेखी कर रही है। लोगों का कहना है कि सीबीआई जांच को लेकर वे एसडीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजेंगे।

पेड़ से उल्टा लटका पाया गया था शव

बता दें कि पिछले महीने फॉरेस्ट गार्ड होशियार सिंह का शव एक पेड़ पर उल्टा लटका पाया गया था। इसके बाद पुलिस ने कई जांच टीमें बदलीं। पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों ने सवाल उठाए थे और मामले की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की थी। पुलिस ने केस को सीआईडी को सौंपा है। पिछले दिनों हाई कोर्ट में न्याय मित्र ने पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए थे।

संसद में वीडियो बनाने के आरोप पर अनुराग ठाकुर ने मांगी माफी

नई दिल्ली।। कांग्रेस ने हमीरपुर से बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर पर लोकसभा में कार्यवाही के दौरान वीडियो बनाने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। बुधवार को मामला संसद में उठा। इसके बाद स्पीकर सुमित्रा महाजन ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह की चूक दोबारा नहीं होना चाहिए। उन्होंने अन्य सदस्यों को भी आगाह किया। इस मामले में अनुराग ठाकुर ने खेद प्रकट किया और कहा कि अगर मोबाइल से किसी को आपत्ति है तो मैं माफी मांगता हूं।

कांग्रेस नेता मल्लाकार्जुन खड़के ने आसन से यह जानना चाहा कि अनुराग ठाकुर के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उनका कहना था कि इसी तरह के मामले में आम आदमी पार्टी सांसद भगवंत मान को दो सत्र के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया था।

कारगिल दिवस: कागरिल में शहीद हुए थे हिमाचल के ये वीर

आज विजय दिवस है। 1999 में तीन महीनों तक कारगिल में चले युद्ध के बाद आज ही के दिन यानी 26 जुलाई 1999 को भारत ने जीत हासिल की थी। उसी की याद में हर साल 26 जुलाई को विजय दिवस के तौर पर मनाया जाता है। यह दिन है शहीदों को याद करने का, उन्हें श्रद्धांजलि देने का और प्रण लेने का कि हम कोई भी ऐसा काम न करें जिससे देश को कोई नुकसान हो।

18 साल पहले हुए कारगिल युद्ध में भारत ने अपने 527 जवान खोए थे और 1300 से ज्यादा जख्मी हुए थे। देश के लिए लड़के हुए शहीद होने वालों में हिमाचल प्रदेश के भी 52 बेटे शामिल थे। आइए जानें, कौन-कौन थे वे वीर:

कांगड़ा
1. परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बतरा
2. लेफ्टिनैंट सौरभ कालिया
3. राइफलमैन राकेश कुमार
4. ग्रेनेडियर बजिंद्र सिंह
5. लांस नायक वीर सिंह
6. राइफलमैन अशोक कुमार
7. राइफलमैन सुनील कुमार
8. सिपाही लखवीर सिंह
9. नायक ब्रह्म दास
10. सिपाही संतोख सिंह
11. राइफलमैन जगजीत सिंह
12. हवलदार सुरिंद्र सिंह
13. लांस नायक पदम सिंह
14. ग्रेनेडियर योगिंद्र सिंह
15. ग्रेनेडियर सुरजीत सिंह

मंडी
1. नायब सूबेदार खेम चंद राणा
2. हवलदार कृष्ण चंद
3. नायक सरवन कुमार
4. सिपाही टेक सिंह मस्ताना
5. सिपाही राकेश चौहान
6. सिपाही नरेश कुमार
7. सिपाही हीरा सिंह
8. ग्रेनेडियर पूर्ण चंद
9. लांस नायक गुरदास सिंह
10. नायक मेहर सिंह
11. लांस नायक अशोक कुमार

हमीरपुर
1. हवलदार कश्मीर सिंह वीर चक्र विजेता
2. हवलदार राजकुमार
3. सिपाही दिनेश कुमार
4. हवलदार स्वामी दास चंदेल
5. सिपाही राकेश कुमार
6. सिपाही सुनील कुमार
7. राइफलमैन दीप चंद जिला

सिरमौर
1. राइफलमैन कुलविंद्र सिंह
2. राइफलमैन कल्याण सिंह सेवा मैडल

बिलासपुर
1. हवलदार उधम सिंह वीर चक्र विजेता
2. नायक मंगल सिंह
3. राइफलमैन विजय पाल
4. हवलदार राजकुमार
5. नायक अश्विनी कुमार
6. हवलदार प्यार सिंह, गांव खतेड़ घुमारवीं
7. नायक मस्त राम

ऊना
1. कैप्टन अमोल कालिया वीर चक्र विजेता
2. राइफलमैन मनोहर लाल

सोलन
1. सिपाही धर्मेंद्र सिंह
2. राइफलमैन प्रदीप कुमार

चंबा
1. सिपाही खेम राज जिला

कुल्लू
1. हवलदार डोला राम सेवा मेडल

शिमला
1. ग्रेनेडियर यशवंत सिंह
2. राइफलमैन श्याम सिंह वीर चक्र विजेता
3. ग्रेनेडियर नरेश कुमार
4. ग्रेनेडियर अनंत राम

अनुराग ठाकुर पर कांग्रेस ने लगाया संसद की कार्यवाही के दौरान वीडियो बनाने का आरोप

नई दिल्ली।।  कांग्रेस ने बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर पर लोकसभा की कार्यवाही के दौरान ‘वीडियो बनाने’ का आरोप लगाया है। आरोप है कि अनुराग ठाकुर उस वक्त वीडियो बना रहे थे जब मॉब लिंचिंग के मामलों को लेकर बहस हो रही थी। कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव ने इस दौरान की कार्यवाही की बिना एडिट की हुई फुटेज की मांग की है। साथ ही लोकसभा में कांग्रेस विप के.सी. वेणुगोपाल ने स्पीकर सुमित्रा महाजन को लेटर लिखकर शिकायत की है।

गौरतलब है कि एक दिन पहले ही हंगामे के दौरान कांग्रेस के सांसदों ने लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन की तरफ कागज फेंके थे। इसके बाद 6 सांसदों को 5 दिन के लिए सस्पेंड कर दिया गया था।

अनुराग ठाकुर पर कार्यवाही के दौरान वीडियो बनाने का आरोप लगाया गया है

सुमित्रा महाजन को लिखे लेटर में के.सी. वेणुगोपाल ने लिखा है कि नियमों के मुताबिक सदन की कार्यवाही का वीडियो बनाने पर प्रतिबंध है। उन्होंने लिखा है, ‘हम गुजारिश करते हैं कि सदन की मर्यादा बनाए रकने के लिए कार्रवाई की जाए। बहुमत का इस्तेमाल करके बीजेपी जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने से कांग्रेस को नहीं रोक सकती।’

कांग्रेस सांसद ने मांगी अनएडिटेड फुटेज
कांग्रेस की सांसद सुष्मिता देव ने भी लोकसभा की कार्यवाही की बिना एडिट की हुई फुटेज की मांग की है। उन्होंने कहा, ‘बीजेपी सरकार बार-बार विपक्ष को नियम सिखाती रहती है मगर असली लोकतंत्र विपक्ष की आवाज के बिना पूरा नहीं हो सकता। वे अपने आप को इस मामले में बहुत पाक साफ नहीं दिखा सकते।’

कांग्रेस सांसद सुष्मिता ने कार्यवाही की बिना एडिट की गई फुटेज मांगी है

देव ने आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान के मामले का जिक्र किया जिनके खिलाफ जांच का आदेश दिया गया थआ। भदवंत मान ने संसद के अंदर फिल्मिंग की थी। देव ने मांग की है कि संसद की सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए ठाकुर के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

CBI ने दोबारा करवाया नेपाली आरोपी के शव का पोस्टमॉर्टम

शिमला।। शिमला में हुए रेप ऐंड मर्डर केस की जांच कर रही सीबीआई की तीन सदस्यों की टीम ने पुलिस हिरासत में मारे गए आरोपी सूरज के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम करवाया है। सीबीआई ने इस पोस्टमॉर्टम के लिए दिल्ली एम्स से 3 स्पेशलिस्ट्स बुलाए थे।

सीबीआई ने कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच शव को शवगृह से निकाला और पोस्टमॉर्टम के लिए ले गए। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को दोबारा अस्पताल प्रशासन को सौंप दिया गया है।

क्रिकेटर सुषमा वर्मा को DSP बनाएगी हिमाचल सरकार

शिमला।। भारत की महिला क्रिकेट टीम से खेलने वालीं और वर्ल्ड कप में हिस्सा ले चुकीं क्रिकेटर सुषमा वर्मा को हिमाचल प्रदेश सरकार ने पुलिस में डीएसपी रैंक का पद देने का प्रस्ताव दिया है। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के सुन्नी से संबंध रखने वालीं सुषमा अभी रेलवे में नौकरी कर रही हैं। अब इस पद को लेना सुषमा पर निर्भर करता है।

प्रदेश के मुख्यमत्री वीरभद्र सिंह ने फेसबुक पेज पर पोस्ट डाली है और कहा है कि इस बेटी पर गर्व है और साथ ही उसे डीएसपी बनाया जाएगा।

इस ऑफर से सुषमा के परिजन बेहद खुश लग रहे हैं। सुषमा के पिता भोपाल सिंह ने सरकार का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में बेटियों को खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

शिमला केस में उठ रहे सवालों पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने साफ किया अपना रुख

शिमला।। शिमला में हुए रेप ऐंड मर्डर केस को लेकर आलोचनाओं में घिरी प्रदेश सरकार के मुखिया वीरभद्र सिंह ने इस मामले में उठ रहे सवालों के जवाब दिए हैं। उन्होंने कहा है कि मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने अपने फेसबुक पेज से शेयर हुई पोस्ट को गलत माना और अन्य पार्टियों पर राजनीति करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने यह भी कहा मेरी चार बेटियां हैं, ऐसे में मैं गुड़िया के माता-पिता का दर्द समझ सकता हूं।

मुख्यमंत्री के दिल्ली से जारी बयान में कहा गया है कि इस गंभीर मामले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए मैंने खुद सीबीआई को लेटर लिखा था और पीएम से निवेदन करने के साथ-साथ गृहमंत्री से भी बात की थी।

मुख्यमंत्री ने आपराधिक घटनाओं को लेकर विवादित बयान के संबंध में कहा कि मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया था। उन्होंने कहा कि मैंने सिर्फ यह कहा था कि आपराधिक घटनाएं होती हैं और हमारी कोशिश होती है कि कानून के तहत तुरंत इन घटनाओं पर कार्रवाई हो। मगर मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस मामले को बीजेपी और सीपीएम ने सियासी रंग दिया है। उन्होंने कहा कि मैं अपील करता हूं कि ऐसे संगीन मामले को गलत तरीके से न उठाएं। आंदोलन करना जायज है मगर शांति भंग करना सही नहीं है। सोशल मीडिया में भी तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।

फेसबुक अकाउंट पर कथित आरोपियों के फोटो अपलोड होने पर सीएम ने कहा कि मैं निजी अकाउंट को नहीं चलता हूं, कुछ लोग इसे चलाते हैं, जिन्होंने कुछ सेकंड के लिए फोटो डाले मगर बाद में हटा दिए। मगर उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था।

सरकार ने वापस लिया गुड़िया के असली नाम पर स्कूल के नामकरण का फैसला

शिमला।। गुड़िया मामले को लेकर विभिन्न मोर्चों पर बैकफुट पर आई सरकार को अब एक और कदम पीछे लेना पड़ा है। गुड़िया के गांव के स्कूल को सरकार ने अपग्रेड करते हुए उसका नामकरण गुड़िया के असली नाम पर करने का फैसला किया था। मगर कानून और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स के मुताबिक रेप विक्टिम की पहचान और नाम को उजागर नहीं किया जा सकता। ऐसे में भारी आलोचना के बीच सरकार ने अपने इस फैसले को वापस ले लिया है। यानी अब गांव के स्कूल का नाम गुड़िया के असली नाम पर नहीं रखा जाएगा।

पढ़ें: विक्टिम की पहचान को लेकर क्या कहता है कानून

पढ़ें: लेख- पहचान न छिपाई जाए तो बार-बार होता है ‘रेप’

(कवर इमेज फाइल फोटो है और प्रतीकात्मक है)

लेख: शर्म करें हिमाचल के नेता, हद हो गई फोटोबाजी की

आई.एस. ठाकुर।। जितना दुख शिमला में एक बेटी के साथ हुए जघन्य अपराध से पहुंचा, उससे कहीं ज्यादा दुख पहुंचाया है इस मामले को लेकर फोटोशूट करवाने और खबरों में छपने का लालच रखने वाले लोगों ने, जिनमें जनता से लेकर राजनेता तक शामिल हैं। मुख्यमंत्री के उस बयान से भी ठेस पहुंची कि ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। हताशा यह देखकर हुई जब गुड़िया को इंसाफ दिलाने की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए तो उनमें बहुत से लोग बत्तीसी निकालते हुए नजर आए तो कुछ सेल्फी लेते नजर आए। और अफसोस कि इन लोगों में वे लोग भी शामिल थे जिन्हें हम अपना नेता कहते हैं, अपना प्रतिनिधि कहते हैं।

गुड़िया के घर पहुंचने से पहले फोटो सेशन
आज हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में बीजेपी नेताओं, जिनमें विधायक भी थे, का एक समूह पीड़िता के घर पहुंचा। और अफसोस कि पूर्व मुख्यमंत्री समेत कई नेताओं ने फेसबुक पर कुछ तस्वीरें शेयर कीं, जिन्होंने यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि हमारे नेताओं का स्तर क्या है। फेसबुक पेज पर तस्वीरें शेयर की गई हैं उनमें दिख रहा है कि कुछ लोग रास्ते में जा रहे हैं। दो चार लोग इन फोटो में भी आपको हंसते हुए नजर आ जाएंगे।

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क्या हम किसी के यहां सामान्य तौर पर शोक व्यक्त करने जाते हैं तो क्या अपने फोटो खिंचवाते हैं और फेसबुक पर डालते हैं कि फ्लां जगह फ्लां बंदा नहीं रहा और मैं वहां शोक व्यक्त करने गया? फिर ऐसी क्या जरूरत आ गई कि इस तरह से खींचे गए फोटो शेयर किए गए? क्या आप शो ऑफ नहीं करना चाहते कि मैं गुड़िया के घर गया? हद यह थी कि वहां एक विडियोग्राफर घूम-घूमकर वीडियो बना रहा था। अगर वह मीडिया पर्सन भी हो, तो क्या उसे भी संवेदनशीलता नहीं बरतनी चाहिए?

अगर कोई बड़ा नेता कहीं शोक व्यक्त करने जाता है तो तस्वीरें मीडिया के लोग खींचते हैं और यह खबर होती है कि फ्लां नेता वहां गए और उन्होंने ऐसा किया। यह बेहूदगी की हद है कि कोई नेता खुद ही इन तस्वीरों को शेयर करे। गुड़िया मामला छोड़िए, अगर कोई नेता किसी शहीद के यहां श्रद्धांजलि देने जाता है तो उसे यह काम मीडिया अटेंशन पाने के लिए नहीं बल्कि दिल से करना चाहिए। तस्वीरें खींचकर छापने का काम उसे मीडिया के लिए छोड़ देना चाहिए। मगर हमारे हिमाचल के नेता इतने संवेदनहीन हैं कि खुद को संवेदनशील दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते।

गुड़िया के परिजनों की पहचान सार्वजनिक कर दी
जिस तरह से गुड़िया के असली नाम पर उसके स्कूल का नाम रखना कानूनन गलत है, उसी तरह से उसकी या उसके परिजनों की पहचान किसी भी रूप मे जाहिर करना गलत है। दूसरों को नसीहतें देने वालों ने आज फोटो सेशन करवाकर गुड़िया के घर में तस्वीरें खिंचवाकर फेसबुक पर डाली हैं और उनमें गुड़िया के पिता समेत कई परिजनों का चेहरा नजर आ रहा है। आप यह क्यों भूल जाते हैं कि नाम ही नहींं, फोटो या कोई और पहचान जाहिर करना भी गैरकानूनी है। मगर सोशल मीडिया पर तो इसका वीडियो भी शेयर किया जा रहा है।

यह सोचकर दिल बैठता कि किसी के घर में कोई हादसा हो जाए, वह शोक में डूबा हो और कोई शोक व्यक्त करने आए और उसके साथ आए लोग फोटो खींचते रहें तो कैसा लगेगा। मीडिया यह काम करे तो समझ आता है। बाद मे पता चले कि शोक व्यक्त करने आया आदमी अपनी फेसबुक पर उन तस्वीरों पर डाल चुका है तो परिजन कैसा महसूस करेंगें?

खैर, कई तस्वीरें ज्ञापन देने वालों की ऐसी भी दिखीं जो बार-बार फोटो खिंचवा रहे थे गुड़िया को इंसाफ की मांग के लिए ज्ञापन देकर। ज्ञापन क्या चुपचाप नहीं दिया जा सकता? फोटो खिंचवाना जरूरी है? क्या ज्ञापन देते हुए नॉर्मल मोड मे ंपत्रकार फोटो खींच दे, यह काफी नहीं? बत्तीसी निकालकर कैमरे पर देखकर फोटो खिंचवाना जरूरी है? शर्म आती है ऐसे नेताओं पर जो अखबारों के लिए हर काम करते हैं। दिखावे के लिए हर काम करते हैं।

नेताओं को थोड़ा संवेदनशील होना चाहिए क्योंकि वे समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। राजनीति अपनी जगह है, जमकर करें। आपका काम है राजनीति करना, मगर संवेदनशील होत हुए राजनीति करें।

(लेखक हिमाचल प्रदेश से संबंध रखते हैं और इन दिनों आयरलैंड में हैं। पिछले कुछ समय से हिमाचल प्रदेश से जुड़े विषयों पर लिख रहे हैं। उनके kalamkasipahi@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

लेख: पहचान न छिपाई जाए तो विक्टिम का बार-बार ‘रेप’ करते हैं लोग

प्रेक्षा शर्मा।। शिमला में एक स्कूल जाने वाली बच्ची के साथ बलात्कार हुआ और उसकी हत्या कर दी गई। ऐसा नहीं कि हमारे देश में यह अपनी तरह का मामला है, ऐसी दर्ज़नों घटनाएं आए दिन देशभर में होती रहती हैं। महिलाओं के साथ जुड़े अपराधों के मामले में हिमाचल बाकी कई राज्यों से बहुत बेहतर है। प्रदेश की राजधानी शिमला में हुए इस वीभत्स कांड के कारण स्थानीय स्तर पर काफी जनाक्रोश है। लोग सरकार और पुलिस के ख़िलाफ़ विरोध कर रहे हैं। जनता के दबाव की एक जीत तो यह है कि इस घटना की जांच CBI को सौंप दी गई है। इसमें कोई शक नहीं कि पुलिस कार्रवाई में चूक हुई है और उसपर खड़े हो रहे सवाल वाजिब हैं। लेकिन इस मामले में जनता की ओर से भी एक गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। लोग सोशल मीडिया पर गुड़िया की तस्वीरें साझा कर रहे हैं। उन लोगों की असंवेदनशीलता का स्तर देखिए जो उस बच्ची की नंगी लाश की तस्वीरें बेहिचक लोगों के सामने परोस रहे हैं।

हमारे देश के कानून में बलात्कार पीड़िताओं की पहचान गोपनीय रखने का प्रावधान है। भारतीय दंड संहिता (IPC) के सेक्शन 228 ए में कुछ विशेष अपराधों के शिकार हुए पीड़ितों की पहचान सार्वजनिक न करने का नियम है। बलात्कार भी ऐसा ही एक अपराध है। यह कानून अपने आप हवा में नहीं बनाया गया। ऐसा नहीं कि कानून बनाने वालों ने बिना किसी संदर्भ-प्रसंग के बस शून्य में यह प्रावधान बना दिया। यह कानून उस समाज को ध्यान में रखकर बनाया गया जिसमें आप और हम रहते हैं। एक ऐसा पुरुष प्रधान समाज जहां महिलाओं के सम्मान की परिभाषा भी पुरुषों की सोच और उनके बनाए मापदंडों के मुताबिक तय होती है। और यही कारण है कि बलात्कार की शिकार हुई पीड़िता पर समाज का दबाव बलात्कारी के मुकाबले कहीं ज़्यादा होता है।

पढ़ें: रेप विक्टिम की पहचान जाहिर करने को लेकर क्या कहता है कानून

बलात्कार शायद ऐसा इकलौता अपराध है जहां अपराधी से कहीं ज़्यादा थू-थू पीड़ित की होती है। तभी तो बलात्कार का शिकार होना ‘इज़्ज़त लुटना’ माना जाता है। और कौन सा अपराध है जहां अपराधी की नहीं, बल्कि पीड़ित की इज़्ज़त जाती है? हम जिस समाज में रहते हैं, वहां बलात्कार एक दाग माना जाता है। केवल बलात्कार की शिकार पीड़िता को ही नहीं, उसके पूरे परिवार को अपमान की नज़र से देखा जाता है। विरले ही होंगे जो ऐसी पीड़िताओं के साथ हुए हादसे का सच जानकर भी उनके साथ शादी करने का फैसला लें। अमूमन तो अगर किसी परिवार की लड़की के साथ बलात्कार हुआ है, तो उसके परिवार की बाकी लड़कियों की शादियों में भी दिक्कत होती है। शादी होती भी है, तो अच्छे घर-परिवार में नहीं होती। कई बार अपनी उम्र से काफी बड़े, बालबच्चेदार विधुर से होती है।

बलात्कार करने वाले का सामाजिक बहिष्कार हो या न हो, लेकिन पीड़िता का हो जाता है। एक और भी पहलू जुड़ा है इस मानसिकता के साथ। बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर हो जाने पर लोग उसके बारे में धारणाएं बना लेते हैं। उसके चरित्र और व्यवहार में कमियां खोजी जाने लगती हैं, मानों इन कथित कमियों के कारण ही बलात्कार हुआ हो। और मानो बलात्कार होना स्वाभाविक और न्यायसंगत हो। कुछ समय पहले दिल्ली में एक 5 साल की बच्ची के साथ रेप हुआ। पुलिस की जांच में सामने आया कि अपराधी ने उस बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर अपने पास बुलाया था। इस देश में लोग इतने अधिक मानसिक दिवालियेपन का शिकार हो चुके हैं कि उस बच्ची के साथ हुए जघन्य अपराध के पक्ष में तर्क गढ़ने लगे। कुछ लोगों ने कहा कि वो लालची थी, इसीलिए ऐसा हुआ। मतलब 5 साल की बच्ची का चॉकलेट और खिलौनों के प्रति स्वाभाविक झुकाव लालच करार दे दिया गया।

समाज का बड़ा हिस्सा ऐसा भी है जो पीड़ित को ही जज करने लग जाता है।

दिल्ली में हुआ निर्भया गैंगरेप बहुत सुर्खियों में रहा था। बहुत बड़े स्तर पर इस घटना का विरोध हुआ, लेकिन उस मामले में भी अपराध का दोष और उसकी जिम्मेदारी पीड़िता के कंधों पर डालने वाले लोग कम नहीं थे। ‘इतनी रात को बाहर क्या कर रही थी, बॉय फ्रेंड के साथ क्यों घूम रही थी’ जैसे घटिया तर्क दिए जा रहे थे। अपराधियों के वकील ने अपनी दलील में ऐसी ही बात कही। उसने कहा कि निर्भया और उसका बॉयफ्रेंड ‘अश्लील, आपत्तिजनक’ हरकतें कर रहे थे। इन तर्कों की मानें तो देर रात घर से बाहर रहना, पुरुष मित्रों के साथ घूमना-फिरना और कुछ विशेष तरह के कपड़ों से अलग कपड़े पहनना बलात्कार को आमंत्रण देता है। कि ऐसा करने वाली लड़कियों और महिलाओं को अपने साथ हुए ऐसे अपराध के लिए तैयार रहना चाहिए, बलात्कार हो जाने पर इसे अपनी ग़लती मानते हुए चुप रहना चाहिए।

कलकत्ता में रहने वाली उस महिला का केस भी शायद आपको याद हो, जिसके साथ बार से निकलने के बाद चलती कार में सामूहिक बलात्कार हुआ था। उस महिला ने ख़ुद सामने आने की हिम्मत दिखाई। उसकी हिम्मत के बदले हमारे समाज ने उसे कैसा जवाब दिया? वह अपने पति से अलग होकर अपनी 2 बेटियों की ख़ुद परवरिश करती है, यह उसकी चरित्रहीनता ठहराई गई। शराब पीती है, यह भी उसे चरित्रहीन साबित करने का जरिया हो गया। और तो और, किसी पर भरोसा करके देर रात लिफ़्ट ले लेना तो उसे कैरेक्टरलेस साबित करने का सबसे बड़ा हथियार माना गया। सब कुछ अहम हो गया, बस उसके साथ हुआ बलात्कार गौण पड़ गया। उसका चरित्र टटोलने में जुटे लोग उसके साथ हुए अपराध की गंभीरता को भूल गए।

एक बड़ा हिस्सा पीड़ित का चरित्र टटोलने लग जाता है।

ये सारे मामले अनोखे नहीं। इन मामलों में समाज के एक बड़े हिस्से ने जैसी सोच दिखाई, वह एक देश के तौर पर हमारी बहुसंख्यक आबादी की सोच है। हम मानसिक तौर पर न तो इतने गंभीर हुए हैं और न ही इतने जिम्मेदार कि रेप विक्टिम की पहचान उजागर करने की पहल की जा सके। इस मामले में हम बिल्कुल भी संवेदनशील नहीं हैं। हम में से ज़्यादातर लोग दिमागी तौर पर पीड़िता के दर्द को समझ ही नहीं सकते। न तो हमारी ऐसी परंपरा रही है और न ही ऐसी चेतना ही आई है। और इन्हीं कारणों से बलात्कार की शिकार हुई बच्ची, लड़की, युवती और महिलाओं की पहचान गुप्त रखी जाती है। किसी भी तरीके से उसकी पहचान उजागर करने वाले लोग कानून का उल्लंघन करते हैं और इसके लिए उन्हें सज़ा भी दी जा सकती है।

एक स्कूल जाने वाली बच्ची के साथ हुआ इतना नृशंस अपराध समाज के तौर पर हमारे लिए शर्मनाक है। इससे भी शर्मनाक है उस बच्ची की तस्वीरें साझा करना, उसकी नंगी लाश की फोटो सोशल मीडिया पर डालना। ये न केवल गैरकानूनी है, बल्कि अमानवीय भी है। गुड़िया का परिवार अपनी बच्ची के साथ हुए हादसे से गहरे सदमे में है। इन तस्वीरों को देखकर उनकी पीड़ा और बढ़ेगी। ऐसा करने वाले गुड़िया के परिवार का दुख और बढ़ा रहे हैं। न्याय देने की जिम्मेदारी तंत्र की है, व्यवस्था की है। आप उनके लिए कुछ बेहतर नहीं कर सकते, अच्छा होगा कुछ बदतर भी मत करिए। रेप पर चुटकुले बनाने वाले और उन्हें पढ़कर हंसी से लोटपोट होने वाले लोग भी हमारे बीच ही रहते हैं। बलात्कार के विडियो देखकर उत्तेजित होने वाले लोग भी हमारे ही बीच हैं। रेप पॉर्न को चाव से देखने और इसमें मज़ा खोजने वाले भी तो हम में से ही हैं। ऐसे लोगों की पहचान कीजिए। मौजूदा परिस्थितियों में यही हमारा योगदान होगा।

(लेखिका उत्तर प्रदेश से हैं और सामाजिक विषयों पर लिखती रहती हैं। उनके मुताबिक ‘इन हिमाचल’ पर ‘विक्टिम की पहचान क्यों जाहिर नहीं करनी चाहिए’ वाले लेख पर लोगों की टिप्पणियां पढ़ने के बाद उन्होंने यह लेख भेजा है।)