शिमला।। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एचआरटीसी की तरफ द्वारा 500 कंडक्टरों की भर्ती को चुनौती देने वाली याचिका में निगम के एमडी से जवाब तलब किया है। याचिका में प्रार्थियों ने आरोप लगाया था कि एचआरटीसी ने कंडक्टरों की भर्ती में नियमों को दरकिनार किया था।
गौरतलब है कि भर्ती प्रक्रिया के रिजल्ट पर ट्रिब्यूनल ने रोक लगा रखी थी। इस मामले के खारिज होने के बाद एचआरटीसी ने इन पदों के लिए हुई भर्ती का नतीजा निकाल दिया था।
एचआरटीसी ने साल 2015 में 500 कंडक्टरों की भर्ती की थी। इसे 2016 में हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक प्राधिकरण ने प्रक्रिया को असंवैधानिक पाते हुए रद्द कर दिया था। एचआरटीसी ने ट्रिब्यूनल के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए मामले को प्रशासनिक प्राधिकरण को फिर से कुछ पहलुओं पर अपना फैसला देने के लिए मामले को रिमांड कर दिया था। इसे ट्रिब्यूनल ने प्रर्थियों की दलीलों से असहमति जताते हुए याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने आदेश दिए हैं कि ये भर्तियां उसके अंतिम आदेशों पर निर्भर करेंगी।
हमीरपुर।। हिमाचल प्रदेश हर रोज चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। यौन अपराध से जुड़ी एक ऐसी घटना सामने आई है जो इंसानियत को शर्मसार कर देती है। हमीरपुर के टौणी देवी में एक शख्स पर भैंस के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा है।
एक समाचार पोर्टल ‘समाचार फर्स्ट’ के मुताबिक टौणी देवी में एक महिला ने 40 साल के एक पुरुष पर आरोप लगाया है कि उसने उसकी भैंस के साथ दुष्कर्म किया। महिला ने इसका मामला भी दर्ज करवाया है।
खबर के मुताबिक भोरंज थाने के SHO सीआर चौधरी ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा है कि भैंस के साथ दुष्कर्म के आरोप में एक शख्स पर आईपीसी की धारा 377 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
शिमला।। अगर आप हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों में अध्यापक हैं या आपको कोई परिचित है तो यह खबर आपके लिए है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने निरीक्षण दस्तों को इस बात का इंस्पेक्शन करने के आदेश दिए हैं कि स्कूल आ रहे अध्यापक फॉर्मल ड्रेस पहन रहे हैं या नहीं। जो अध्यापक ऐसा नहीं करेंगे, उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे।
प्रदेश सरकार के आदेशानुसार स्कूलों में फॉर्मल ड्रेस नहीं पहनकर आने वाले शिक्षकों को नोटिस जारी किए जाएंगे। जिला उपनिदेशकों को भी हाईकोर्ट के आदेशानुसार सरकार द्वारा लिए गए फैसले का पालन सुनिश्चित करवाने को कहा गया है।
खबर के मुताहिक उच्च शिक्षा के निदेशक बीएल विंटा ने बताया है कि जो शिक्षक फार्मल ड्रेस पहनकर स्कूलों में नहीं आएंगे, उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे। इसके बाद भी अगर शिक्षकों ने आदेशों का पालन नहीं किया तो अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद उठाया गया यह कदम
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने सभी कर्मचारियों और अधिकारियों पर जींस और टी-शर्ट में ऑफिस आने पर रोक लगाई है। कार्मिक विभाग ने इस संदर्भ में सभी विभागाध्यक्षों को आदेश जारी किए हैं। सरकार ने हाईकोर्ट की फटकार के बाद यह फैसला लिया है। हाईकोर्ट में एक मामले की सुनवाई में हाजिर हुई एक महिला कर्मचारी के पहनावे पर आपत्ति होने के बाद सरकार ने यह फैसला लिया है।
अध्यापक संघ ने जताई थी आपत्ति
गौरतलब है कि 6 महीने पहले भी सरकारी स्कूलों के अध्यापकों के लिए ड्रेस कोड लागू करने प्रस्ताव तैयार किया गया था मगर शिक्षक संघ ने इसका विरोध किया था। इसके बाद इस प्रस्ताव को ड्रॉप कर दिया गया था। मगर हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद यह काम किया जा रहा है।
बिलासपुर।। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने नड्डा पर शिलान्यास करवाने में देरी को लेकर निशाना साधा है। वीरभद्र सिंह ने कहा कि बिलासपुर में खुलने वाले एम्स के लिए केंद्र सरकार देरी कर रही है। उन्होंने कहा कि जमीन का इंतकाल भी एम्स के नाम कर दिया है। उन्होंने कहा कि मैं मुख्यमंत्री हूं और चुनाव भी नजदीक हैं, इसीलिए बीजेपी शिलान्यास नहीं करवा रही।
मुख्यमंत्री ने कहा ऐसा इसलिए है क्योंकि एम्स का शिलान्या हुआ तो मुख्यमंत्री के तौर पर शिलान्यास की पट्टी में मेरा भी नाम आ जाएगा। इससे बिलासपुर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की अहमियत घट जाएगी।
सीएम ने कहा कि विकास में राजनीति को नहीं लाना चाहिए।अगर केंद्र सरकार इसी डर से एम्स का शिलान्यास नहीं कर रही है तो मैं खुद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को शिलान्यास का निमंत्रण दूंगा और पट्टिका में उनका नाम लिखवाने के साथ उन्हीं से शिलान्यास करवाया जाएगा।
शिलान्यास न होने से प्रदेश को हो रहा नुकसान
हिमाचल प्रदेश में एम्स बनने को लेकर ऐलान हुए और बजट में भी जिक्र हुए अरसा बीत गया है मगर अब तक शिलान्यास नहीं हुआ है। हमीरपुर में इसके लिए जमीन का चयन भी हो चुका है मगर अभी तक नींव का पत्थर तक नहीं रखा गया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा इसे लेकर ‘टेक्निकल पेच’ होने की बात कहकर सवाल टाल चुके हैं।
हमीरपुर।। हमीरपुर में भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने आक्रोश रैली के दौरान डीसी और एसपी को कार्यालय में डेढ़ घंटे तक अंदर बंद रखा। यही नहीं उन्होंने बाहर से ताला भी लगा दिया। हमीरपुर केडीसी, एडीसी, एसपी, एएसपी, डीएसपी और एसडीएम समेत सैकड़ों अफसर डेढ़ घंटे तक मिनी सचिवालय में कैद रहे। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कानून व्यवस्था ख़राब होने के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए यह काम किया।
खास बात यह है कि इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के बेटे और हमीरपुर के सांसद अनुराग ठाकुर के छोटे भाई अरुण कर रहे थे। यही नहीं, भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर हमीरपुर-सुजानपुर-सरकाघाट मुख्य सड़क मार्ग को भी बंद कर दिया जिससे ट्रैफिक जाम लग गया।
नहीं हुई कोई कार्रवाई
एसडीएम ने लाउडस्पीकर से पार्टी कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी जिसके बाद ताला खोला गया। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन मूकदर्शक बना रहा और कोई कार्रवाई नहीं की। मिनी सचिवालय में अपने काम करवाने आए लोग भी खासे परेशान हुए।
परमिशन गांधी चौक तक यात्रा की थी
डीसी मदन चौहान ने कहा कि भाजयुमो को रैली की परमिशन सिर्फ मात्र गांधी चौक तक थी लेकिन कार्यकर्ताओं ने कार्यालय में घुसकर नियमों का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन से आम जनता को भी भारी परेशानी हुई है जिससे कानून कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के बेटे और बीजेपी नेता अरूण धूमल ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ चुकी है। हालांकि सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं कि अधिकारियों को बंधक बनाकर सरकारी संस्थान के गेट पर ताला लगाकर उनके कार्यकर्ताओं ने खुद कानून व्यवस्था का कितना सम्मान किया है।
विजय शर्मा।। बरसात की मूसलाधार बारिश से हिमाचल में नदियाँ पूरे उफान पर हैं। लगातार होती बारिश से जगह-जगह भूमि कटाव एवं मलबा गिरने से चारों तरफ यातायात आवागमन अवरोधित हो रहा है और इस सब के बीच प्रदेश की जनता में भय का माहौल बना हुआ है.
हर वर्ष भारी बारिश से बाढ़, भूमि कटाव एवं बादल फटने से हजारों करोड़ रूपए का जान-माल का नुकसान हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों से वायुमंडल में भारी उथल-पुथल के कारण कभी अत्यधिक गर्मी पड़ती है तो कभी भारी बारिश से तबाही का मंजर देखने के मिलता है लेकिन इस सब के बावजूद ऐसा लगता है कि राज्य सरकार ने प्रदेश की जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानि एनडीएमए ने गत वर्ष ही प्रदेश सरकार को भूकंप के बड़े खतरे से आगाह किया था और चेतावनी दी है कि प्राकृतिक आपदाओं से हिमाचल में भारी तबाही हो सकती है। प्राधिकरण ने चेतावनी देते हुए कहा है कि राजधानी शिमला, सुंदरनगर और धर्मशाला सहित हिमाचल के निचले इलाकों मसलन कांगड़ा, हमीरपुर, मंडी आदि में भूकंप के जोरदार झटकों के साथ ही भूस्खलन हो सकता है। इसके अलावा ऊपरी हिमाचल की चोटियों पर स्थित बर्फ के पिघलने से ग्लेशियर से बनने वाली झीलें भी बड़ी आपदा की कारण बन सकती हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि कि राजधानी शिमला, सुंदर नगर और धर्मशाला पर भूकंप का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। राज्य पर दूसरा बड़ा खतरा ग्लेशियर से पिघलने वाली झीलें हैं। एनडीएमए की मानें तो हिमाचल के उपरी इलाके में इस वक्त 11 ऐसी झीलें हैं जो कभी भी टूट सकती हैं और ये पहले से मौजूद नदियों और नालों में मिलकर भारी तबाही मचा सकती हैं।
भू वैज्ञानिकों के मुताबिक हिमाचल में भूकंप हजारों सालों से आ रहा है। झीले भी हजारों सालों से बनती बिगड़ती रहती हैं। लेकिन 20 से 30 साल पहले खतरा इतना बड़ा नहीं था जितना अब है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए गत वर्ष एक मॉक ड्रिल का भी आयोजन किया गया था लेकिन सरकारी तंत्र की असली असली परीक्षा तो आपदा के समय ही होती है। वैसे भी हिमाचल को अन्य हिमालयी राज्यों के साथ विशेषकर भूकंप की दृष्टि से जोन-4 और जोन-5 में रखा गया है। कांगड़ा, हमीरपुर, मंडी, कुल्लू और चम्बा सर्वाधिक संवेदनशील इलाकों में शामिल हैं, जहां भूकम्प भारी तबाही मचा सकता है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
राज्य आपदा प्रबंधन की एक रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल में अब तक 80 बार धरती भूकम्प के कारण हिली है और चार बार व्यापक स्तर पर नुकसान हुआ है। ऐसी परिस्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित बल के साथ-साथ आमजन का जागरूक होना भी आवश्यक है। हालांकि सरकार यह बार-बार दावा करती है कि सरकार हर संभावित आपदा से निपटने में सक्षम है लेकिन एक या दो दिन की भारी बारिश ही सरकार के दावों की पोल खोल देती है।
इतने गंभीर खतरे और राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण की चेतावनी को बावजूद वर्ष 2012-13 के अनुमोदित स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान के बावजूद स्टेट डिजास्टर रिजर्व फोर्स का गठन ही नहीं हो सका है। यही नहीं पांच सालों से जिलों में क्विक रिस्पांस टीमों तक का गठन नहीं किया गया।
जब स्टेट प्लान बनाया गया था, उस दौरान यह ऐलान किया गया था कि एसडीआरएफ में पुलिस, फायर, होमगार्ड व अन्य संबंधित महकमों के अधिकारियों व कर्मचारियों को शामिल किया जाएगा। स्टेट प्लान के मुताबिक नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट फोर्स के तहत भी प्रदेशों को संबंधित दिशा-निर्देश दिए गए हैं। यही वजह है कि आवश्यक ढांचा न होने से बरसात व बर्फबारी के दौरान प्रदेश की जनता एवं हजारों पर्यटक रास्ते में फंस जाते हैं। हालांकि खतरे को भांपते हुए प्रदेश सरकार एवं उसके प्रतिनिधि बार-बार जनता को सब कुछ ठीक होने का आश्वासन देते रहते हैं और लोगों से चौकन्ना रहने के लिए कहा जाता है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में हर पचास साल में एक बार बड़ा भूकंप जरूर आता है। लेकिन इस बार 111 साल हो गए लेकिन ऐसा कोई भूकंप इस राज्य में नहीं आया। पिछला भूकंप 1905 में कांगड़ा में आया था। इस भूकंप ने अकेले कांगड़ा जिले में 20,000 लोगों की जान ले ली थी और अब हिमाचल एक बार फिर घोर संकट में है क्योंकि चेतावनी को बावजूद रिजर्व टॉस्क फोर्स एवं विशेषज्ञ समितियों का गठन नहीं किया गया है।
प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं से निपटने के लिए प्राधिकरण की गठन करते समय राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर विशेष बलों के गठन को मंजूरी दी गई है और राज्यों को शुरूआत में एक बटालियन आपदा बल गठित करने का निर्देश दिया गया है लेकिन हिमाचल सहित कई राज्यों ने विशेष बलों का गठन ही नहीं किया है।
राजनैतिक नियुक्तियों के चलते राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं समितियां मात्र ऐशगाह बनकर रह गई हैं। हिमाचल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का उपाध्यक्ष कांग्रेस के एक पूर्व एम. एल. ए. को बनाया गया है, जो पहले भाजपा के कार्यकर्ता थे लेकिन चुनावों से ठीक पहले भाजपा से विद्रोह करके आजाद उम्मीदवार के रूप में जीतकर कांग्रेस में शामिल हुए थे और लोकसभा चुनाव में भाजपा के अनुराग ठाकुर से बुरी तरह पराजित हो गए थे, जिसके फलस्वरूप उन्हें राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बना दिया गया है जबकि प्राधिकरण के गठन की प्रक्रिया में प्राधिकरण का उपाध्यक्ष कोई चुना हुआ प्रतिनिधि हो सकता है।
इन्हीं महोदय का गत वर्ष सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हुआ था, जिसमें वे मंडी जिले में आपदा की जायजा लेने गये थे और रास्ते में जूते पानी से भीग न जाएं, इसलिए एक युवक की पीठ पर बैठकर उन्होंने वह रास्ता पार किया था।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की सलाहकार समिति का अध्यक्ष दिल्ली निवासी किसी के. सी. चौहान को बनाया गया है और इसके अधिकतर सदस्य कांग्रेस के ही वफादार रिटायर अधिकारी या सदस्य हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य आपदा प्रबंधन कितना कारगर होगा।
हालांकि राज्य सरकार की ओर से संबंधित विभागों को मानसून पूर्व तैयारी के लिए 135 करोड़ रूपए का राशि जारी की गई है और आपदा प्रबंधन निधि तथा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन निधि से उपायुक्तों तथा संबंधित विभागों को 63.23 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है। इसमें लोक निर्माण विभाग को 25 करोड़ रुपए, सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग को पांच करोड़, विद्युत बोर्ड को दो करोड़, कृषि व बागबानी विभागों को 1.2 करोड़ रुपए की राशि सहित कुल 35 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि उपायुक्तों को तत्काल राहत, अनुग्रह राशि, पेयजलापूर्ति तथा शहरी स्थानीय निकायों को सहायता के लिए 28.23 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। सरकार का कहना है कि आपदा प्रबंधन के लिए सभी जिला मुख्यालयों पर कंट्रोल रूम 24 घंटें खुले रखने के दिशा निर्देश दिए गए हैं और सभी जिलों के आपदा प्रबंधन प्लान भी तैयार किए गए हैं तथा उसी के हिसाब से कार्य भी किया जा रहा है।
आपदा प्रबंधन को लेकर आवश्यक उपकरण जिला मुख्यालयों तथा उपमंडल मुख्यालयों में उपलब्ध करवाए गए हैं ताकि आपदा के दौरान राहत तथा पुनर्वास के कार्य त्वरित प्रभाव से आरंभ किए जा सकें। पंचायत स्तर पर भी आपदा प्रबंधन समितियां गठित की गई हैं तथा आपदा प्रबंधन को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों को भी प्रशिक्षण दिया गया है जबकि स्कूलों में बच्चों को आपदा प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।
(लेखक हमीरपुर जिले के हिम्मर के दरब्यार से हैं। उनके vijaysharmaht@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)
DISCLAIMER: ये लेखक के अपने विचार हैं, इनके लिए वह स्वयं उत्तरदायी हैं।
धर्मशाला।। धर्मशाला में मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखा रहे लोगों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर बीजेपी ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा है कि वीरभद्र और सुधीर शर्मा के इशारे पर यह कार्रवाई लोकतंत्र की हत्या है। उन्होंने कहा कि घायलों को तुरंत मेडिकल सेवाएं भी नहीं दी गईं।
वहीं पूर्व सीएम और कांगड़ा के सांसद शांता कुमार ने कहा है कि मैं गद्दी समुदाय के लोगों पर हुए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा करता हूं। उन्होंने कहा कि इस लाठीचार्ज से कहीं कोटखाई प्रकरण का दोहराव न हो। उन्होंने कहा कि वीरभद्र को बेतुके बयान देने से पहले सोचना चाहिए।
वहीं मुख्यमंत्री के काफिले में गाड़ी घुसाने के आरोप में घिरे बीजेपी नेता किशन कपूर ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री का काफिला रोकने का प्रयास करके यह पूछा कि शांतिप्रिय आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज क्यों किया गया। समुदाय के खिलाफ पहले अभद्र टिप्पणी और अब प्रदर्शन पर लाठीचार्ज करना लोकतंत्र की हत्या है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र कह चुके हैं कि उन्होंने ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की, मीडिया ने उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया है।
एमबीएम न्यूज नेटवर्क, शिमला।। यह खबर हैरान करने वाली भी है और हिमाचल प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं का मनोबल तोड़ने वाली भी। साथ ही प्रदेश में चल रही भर्तियों पर भी सवाल खड़े होते हैं। सुन्नी की रहने वाली होनहार बेटी योगिता ने अंग्रेजी विषय के स्कूल लेक्चरर की लिखित परीक्षा में 100 में से 73 अंक हासिल किए। वह 2800 आवेदकों में टॉपर बन गई। मगर इसके आगे जो हुआ, वह योगिता के लिए दुख भरा है।
पीजीटी पद की चयन प्रक्रिया में 7 जुलाई को टॉपर बनने वाली योगिता को अयोग्य करार दे दिया जाता है। चंद रोज पहले आयोग की वेबसाइट पर योगिता को पता चला कि लिखित परीक्षा में वो टॉपर थी। मगर इंटरव्यू में उसे मात्र 45 अंक मिले। लिखित परीक्षा व साक्षात्कार के बाद प्रक्रिया में योगिता की रैंकिंग 83वें स्थान पर चली गई। इस प्रक्रिया में पीजीटी के 47 पद भरे जाने थे और इसमें अनारक्षित वर्ग के लिए 21 पद थे। योगिता सामान्य वर्ग की आवेदक थी।
योगिता ने तमाम दस्तावेजों के साथ फेसबुक पर दर्द साझा किया है। एमबीएम न्यूज नेटवर्क से विशेष बातचीत के दौरान मेधावी योगिता ने कहा कि वह कानूनी राय ले रही है। उन्होंने कहा कि लिखित परीक्षा में कम अंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों को साक्षात्कार में कहीं बेहतर अंक दिए गए। इसी कारण अंतिम मैरिट सूची में उनका स्थान 83वां रहा।
28 वर्षीय योगिता ने पोर्टमोर स्कूल से पढ़ाई करने के बाद सैंट बीटस कॉलेज से ग्रैजुएशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से पीजी की पढ़ाई पूरी की है। बहरहाल योगिता के इस मामले के कारण हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की कार्यशैली पर संदेह जरूर पैदा हो गया है। इस खबर में आयोग का पक्ष नहीं आया है। यदि आयोग द्वारा एमबीएम न्यूज नेटवर्क को स्थिति स्पष्ट की जाती है तो पक्ष प्रकाशित किया जाएगा।
(यह मूलत: एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और इसे सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित किया गया है)
शिमला।। मंडी के वनरक्षक होशियार सिंह और शिमला की बच्ची गुड़िया के मामले को लेकर बुधवार को न्याय मंच ने सचिवालय का घेराव किया। इस प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे लोगों ने डीसी ऑफिस से लेकर छोटा शिमला तक रैली निकाली और सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया।
न्याय मंच ने इन दोनों ही मामलों में पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया और डीजीपी को बर्खास्त करने की मांग की। मंच के पदाधिकारी विजेंद्र मेहरा ने आरोप लगाया कि दोनों मामलों में सरकार की कार्य प्रणाली शक के घेरे में है।
प्रदर्शनकारियों ने होशियार सिंह की मौत के मामले को भी सीबीआई को सौंपने की मांग की। गौरतलब है कि शिमला के गुड़िया केस की जांच सीबीआई कर रही है।
शिमला।। भले ही गद्दी समुदाय को लेकर हुई टिप्पणी पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने स्पष्टीकरण जारी कर दिया है मगर गद्दी समुदाय की नाराजगी कम होती नहीं दिख रही। मुख्यमंत्री के धर्मशाला दौरे के दौरान उनके काफिले के आगे नारेबाजी कर रहे लोगों को काबू करने में पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि लाठीचार्ज नहीं हुआ है मगर वीडियो सामने आया है जिसमें पुलिसकर्मी धर्मशाला में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठी भांजते दिख रहे हैं। देखें:
इससे पहले प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच खींचतान भी हुई। बड़ी मुश्किल से पुलिस काले झंडे दिखाते हुए ‘गो बैक’ के नारे लगा रहे प्रदर्शनकारियों रोककर मुख्यमंत्री के काफिले के लिए रास्ता बना पाई। बाद में प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए पुलिस से उलझते नजर आए और आखिर में पुलिस को डंडे बरसाने पड़े। पूरा वीडियो देखें: