देवता ने दो हफ्ते पहले ही कहा था कि खाली करो मकान: ग्रामीण

मंडी।। कोटरोपी के ग्रामीणों का कहना है कि इस साल नड़ उत्सव काहिका में देवता ने भविष्यवाणी की थी कोई अनहोनी हो सकती है। यही नहीं, उन्होंने इस गांव के 7 परिवारों को घर खाली करने को कहा था। लोग मकान खाली भी करने लग गए थे, मगर इससे पहले कि वे पूरी तरह से हट पाते, यह आपदा आ गई।

 

शनिवार रात को भूस्खलन आया और उनकी जमीन को बहा ले गया। लोगों के मकान बाल-बाल बचे हैं, जिसे वे देवता की कृपा मान रहे हैं। लोगों ने देवता की भविष्यवाणी को लेकर पंजाब केसरी अखबार को जानकारी दी है।

 

पढ़ें: कोटरोपी में हर 20 साल बाद अगस्त में होता रहा है भूस्खलन

 

क्या है हिमाचल की देव पंरपरा
हिमाचल प्रदेश को देवभूमि कहा जाता है। यहां पर बहुत से गांवों में देवता होते हैं। ये देवता हिंदुओं के स्थापित देवी-देवता नहीं होते बल्कि वे ऋषि, तपस्वी या महात्मा होते हैं, जिन्होंने उस क्षेत्र में किसी वक्त निवास किया था। उन देवताओं के अपने मंदिर होते हैं और इन देवताओं की मूर्तियां भी अलग होती हैं। धातु के मुखौटों से बनी मूर्तियां पालकी पर स्थापित होती हैं और इन पालकियों पर देवता को उठाकर गांव या अन्य स्थानों पर ले जाया जाता है।

 

इन देवताओं पर लोगों की गहरी आस्था है। माना जाता है कि देवता अपने गुर (पुजारी) के माध्यम से जनता से संवाद भी करते हैं। समाधि की अवस्था में गए गुर के मुंह से बोल आते हैं, उन्हें देवता की ही बात माना जाता है। सदियों से यह परंपरा चली आ रही है। जब पुजारी का देहांत हो जाता है तो देवता ही खुद अपना नया पुजारी चुनते हैं। यानी इंसान की कई पीढ़ियां  बदल गईं, देवता वही रहे।

 

इन देवताओं का मान इसलिए ज़्यादा है क्योंकि लोगों का विश्वास है कि वे बहुत बार अपने पुजारी के माध्यम से भविष्यवाणियां भी करते हैं। अक्सर ये भविष्यवाणियां सटीक होती हैं और यही वजह है कि विज्ञान के इस दौर में भी लोगों की आस्था इन देवताओं पर बनी हुई। काहिका देवता के लिए समर्पित उत्सव होता है जिसका समापन कुछ ही दिन पहले हुआ था(विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)। पंजाब केसरी अखबार के मुताबिक लोगों का कहना है कि इसी में देवता ने भविष्यवाणी की थी।

 

भले ही बाहर के लोग इसे अंधविश्वास के तौर पर देखें और हिमाचल में भी बड़ा तबका इस पर यकीन न करता हो, मगर बड़ी संख्या उनकी ज़्यादा है जो मानते हैं इन देवताओं के पास कोई न कोई शक्ति तो है। बहरहाल, कहावत भी है कि राजनीति और आस्था पर चर्चा का कोई निष्कर्ष नहीं निकलता।

ग्रामीणों का दावा- कोटरोपी में हर 20 साल बाद होता रहा है भूस्खलन

मंडी।। क्या कुदरत भी कोई पैटर्न फॉलो करती है? यानी क्या ऐसा होता है कि कोई घटना किसी खास अंतराल बात ही होती हो? हालांकि ऐसा होता नहीं है मगर कई बार कमाल के संयोग बन जाते हैं। और इस तरह के संयोगों पर नज़र डालें तो लगता है कि शायद कुदरत वाकई एक ख़ास डिजाइन पर काम करती है।

 

12 अगस्त की रात को मंडी के कोटरोपी में अचानक भूस्खलन आने से दर्जनों लोगों की मौत हो गई। यह हादसा आज 2017 में हुआ, लेकिन कहा जा रहा है कि इससे ठीक 20 साल पहले और उससे भी 20 साल पहले इसी जगह पर भूस्खलन हो चुका है। पहले 1977 में और फिर 1997 में और वह भी अगस्त महीने में, जब बारिश चरम पर होती है।

 

हिंदी अखबार पंजाब केसरी के मुताबिक स्थानीय लोगों का कहना है कि 13 अगस्त की सुबह को साल 1997 में ठीक इसी जगह पर पहाड़ी दरक गई थी। उस भूस्खलन की चपेट में एक पुलिया भी आई गई थी। इस घटना के ठीक 20 साल बाद 12 अगस्त की रात को फिर यहीं भूस्खलन आया।

 

लोगों का तो यहां तक कहना है कि उनके बड़े-बुजुर्ग बताते रहे हैं कि 1977 में भी बरसात में मौसम में इसी जगह पर बड़ा भूस्खलन आया था। इस दावे पर यकीन करें तो लगता है कि कुछ तो संयोग है। मगर लोग कई बार बातें भी बनाते हैं।

 

1977 वाली बात को गलत मानें तो 1997 और 2017 में भूस्खलन आना महज संयोग हो सकता है। अगस्त के महीने में ही होना संभव भी है क्योंकि इस दौरान बारिश ज्यादा आती है। मगर एक ही दिन (12-13 अगस्त की रात) ऐसा होना गजब का संयोग है।

 

बहरहाल, यह तो गांववालों को ही पता होगा कि वे सच बोल रहे हैं या झूठ या फिर कहीं उन्हें डेट्स को लेकर गलतफहमी तो नहीं हुई।

गहरे घाव दे गई कुदरत, दिल पर पत्थर रख अपनों का इंतजार करते रहे परिजन

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, मंडी।। कोटरोपी में आए भूस्खलन में दबे लोगों को निकालने के लिए सर्च ऑपरेशन चल रहा था। जिन लोगों के परिजन इस रूट पर यात्रा कर रहे थे और लापता थे, वे बदहवास होकर कोटरोपी पहुंचे हुए थे।

 

चारों तरफ तबाही का मंजर देखकर समझ आ जाता था कि दबे हुए लोगों के बचने की कोई उम्मीद नहीं है। मगर कोई ऐसे ही कैसे मान ले कि उसका अपना अब इस दुनिया में नहीं है। इसलिए परिजनों की उम्मीदें कायम थीं। रुलाई को रोके हुए आंखें लाल थीं, गला रुंधा हुआ था, बेचैन थे, कांप रहे थे मगर मन में दुआ कर रहे थे कि उनका अपना ज़िंदा हो।

 

बहुत मुश्किल हालात से जूझ रहे इन लोगों में एक मां भी थी जो बिलख रही थी। पहले एक सड़क हादसे में इस महिला ने अपने पति को खो दिया था और उसकी दो बेटियां और बेटा मलबे में लापता था। उसकी हालत देख हर कोई दुआ करता कि काश कोई चमत्कार हो और इसके बच्चे सुरक्षित हों। मगर अफ़सोस, होनी को कुछ और ही मंजूर था। दिन खत्म होने तक चंबा-मनाली बस से 43 यात्रियों के शव निकाले गए।

 

कुल्लू के रामशिला में रह रही माली देवी अपने बच्चों का इंतजार कुल्लू बस स्टैंड पर कर रही थी। उसे नहीं पता था कि वह बस कभी आएगी ही नहीं। मूल रूप से वह चंबा से हैं और कुल्लू में एलआईसी में नौकरी करके परिवार का पेट पाल रही थीं। उनकी बेटियां मुस्कान और पलक अपने भाई अरमान के साथ छुट्टियां मनाने के लिए अपने दादा-दादी के पास चंबा गए हुए थे।

 

ये बच्चे अपनी चाची गीता ेक साथ चंबा से मनाली आ रही एचआरटीसी की बस से अपनी मां के पास वापस आ रहे थे। मां कुल्लू बस स्टैंड पर अपने बच्चों को लेने पहुंची थी। बहुत देर हुई और बस आई नहीं तो लगा पता लगाने की कोशिश की कि कहीं बस मनाली तो नहीं चली गई। मगर किसी ने बताया कि बस तो कोटरोपी में भूस्खलन की चपेट में आ गई है।

 

इसके बाद इस मां की हालत क्या हुई होगी। अपने रिश्तेदारों के साथ वह कोटरोपी पहुंचीं और बिलखते हुए इंतज़ार करने लगीं। शायद उन्हें अहसास था कि वह जिन बच्चों का इंतज़ार कर रही है, वे अब इस दुनिया में नहीं हैं। मगर मां तो मां होती है।

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यह तो माली देवी की कहानी है। इस हादसे ने दर्जनों परिवारों को हिलाकर रख दिया था। कुछ अपने बच्चों का इंतजार कर रहे थे, कुछ बच्चे अपने मम्मी-पापा का इंतजार कर रहे थे तो कहीं किसी और का इंतजार हो रहा था। मगर होनी को कुछ और ही मंजूर था। बड़े गहरे घाव दिए हैं कुदरत ने। भरने में वक्त लगेगा।

मंडी भूस्खलन: 46 शव बरामद, सर्च ऑपरेशन जारी

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, मंडी।। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में जोगिंदर नगर के पास कोटरोपी में हुए भयंकर भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। रविवार रात पौने 10 बजे तक मलबे से 46 शव निकाल लिए गए हैं। सोमवार सुबह से सर्च ऑपरेशन फिर शुरू हो गया है।

 

माना जा रहा है कि मलबे से लगभग सभी शव निकाल लिए गए हैं। 43 शव एक बस के अंदर से ही निकाले गए। फिर भी प्रशासन एक बार तलाश कर लेना चाहता है कि कहीं कोई और तबा तो नहीं रह गया।

रविवार को 46 शव बरामद किए गए (Image: Samachar First)

हिमगौरव बस से दो मृतकों को रविवार सुबह ही निकाल लिया गया था। दूसरी बस, जो कि चंबा से मनाली जा रही थी, पर सवार 43 यात्रियों की मौत हुई है। इसके यात्रियों के बचने की उम्मीद कम थी क्योंकि मलबा इसे हाइवे से डेढ़ किलोमीटर दूर तक बहा ले गया था। 12 से 14 घंटों की मेहनत के बाद ही इस बस तक पहुंचा जा सका था। एक अन्य बाइक सवाल भी मलबे की चपेट में आ गया था।

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मंडी के डीसी संदीप कदम ने 46 लोगों की मौत की पुष्टि की है। इस हादसे में 8 लोग जख्मी हुए हैं जिनमें से 2 को शिमला रेफर किया गया है।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत पब्लिश की गई है)

नुकसान झेलकर भी दूसरों की सेवा में जुटे स्थानीय लोग

मंडी।। कोटरोपी में देर रात हुए दर्दनाक हादसे ने कई लोगों की जिंदगियां तबाह कर दी हैं। NDRF और आर्मी की टीम के साथ-साथ स्थानीय लोग भी घटनास्थल पर मोर्चा संभाले हुए हैं और पीड़ितों को हर संभव मदद दे रहे हैं।

 

 

घटना में स्थानीय लोगों ने भी अपने घरों को खो दिया है लेकिन फिर भी इसकी परवाह किए बिना वह लोगों की मदद में जुटे हैं। स्थानीय महिलाएं रात भर से राहत कार्य में जुटी टीमों को पानी पीला रही हैं तो वहीं स्थानीय युवा बचाव दल की रस्सियां आदि खींचकर मदद दे रहे हैं।

 

 

‘समाचार फर्स्ट’ की रिपोर्ट के मुताबित इनमें से कुछ ने इस भयंकर लैंडस्लाइड में अपने घरों को खो दिया है, लेकिन इनकी सिर्फ यहीं इच्छा है कि वह किसी को जिंदगी को बचा पाएं। इससे पहले स्थानीय महिलाओं ने मलबा भी उठाया था।

मंडी लैंडस्लाइड: सेना ने संभाला मोर्चा, बचाव कार्य जारी

मंडी।। उरला के पास कोटरोपी में भूस्खलन से मची तबाही के बीच राहत और बचाव कार्य के लिए सेना पहुंच गई है। जवान उस जगह की तलाश में है जहां पर एचआरटीसी की बस दबी हो सकती है। चंबा से मनाली जा रही इस बस में 45 लोग हो सकते हैं।

 

मौके पर पहुंची सेना ने पूरे इलाके को अपने नियंत्रण में ले लिया है और आम लोगों को वहां से हटाया जा रहा है। इस हादसे का अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि पहाड़ी के टॉप से शुरू हुआ भूस्खलन करीब एक किलोमीटर इलाके में तबाही मचा चुका है। यहां पहुंचने के बाद चारों तरफ कीचड़, पत्थर, ठूंठ और मलबा ही नजर आ रहा है।

इससे पहले परिवहन मंत्री जी.एस. बाली ने जानकारी दी थी कि रात से ही बचाव कार्य चल रहे थे और सेना को बुलाया गया है। बताया जा रहा है कि वह खुद भी दिल्ली से घटनास्थल की तरफ रवाना हुए हैं। इस बीच मौके पर बचाव और राहत कार्य में तेजी आई है और लोगों को लाउड स्पीकर के जरिए इलाके से दूर रहने के लिए कहा जा रहा है।

पढ़ें: मंडी में भूस्खलन से मची भारी तबाही

दरअसल मिट्टी अभी कच्ची है और कुछ जगहों पर कच्चा मलबा भी धंस सकता है। ऐसे में हालात और खराब हो सकते हैं।

मंडी भूस्खलन: मृतकों और घायलों की सूची जारी

मंडी।। पठानकोट-मंडी एनएच पर पद्धर के पास कोटरोपी में हुए भूस्खलन में अब तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है। डीसी मंडी ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर इसकी जानकारी दी है। अभी मृतकों में 2 लोगों की ही पहचान हो पाई है।

पढ़ें: मंडी के कोटरोपी में भयंकर भूस्खलन से तबाही

डीसी मंडी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक मृतकों में 2 लोगों की पहचान हुई है। इनमें एक जोगिंदर नगर की सुरुचि ठाकुर और दूसरी सरकाघाट की नेहा हैं। अन्य पांच लोगों की शिनाख्त अभी नहीं हो पाई है।

इसके अलावा हादसे में घायल पांच लोग मंडी जोनल हॉस्पिटल में ऐडमिट किए गए हैं। इनमें मंजू (20) करसोग, शुभम (21) शिमला, सुचित्रा (19) शिमला ज्योति शर्मा (18) शिमला और अनीता (23) जोगिंदर नगर शामिल है।

पढ़ें: एचआरटीसी के इन रूटों की बसें आई चपेट में

प्रशासन की तरफ से हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं।उपायुक्त कार्यालय मंडी पर इन नंबरों पर फोन किया जा सकता है- 01905-226201, 02, 03, 04. एचआरटीसी ने भी दो नंबर जारिए किए हैं- 01905 235538 और 9418001051.

 

मंडी में भूस्खलन से भारी तबाही, तस्वीरें और वीडियो

मंडी।। हिमाचल प्रदेश के मंडी में भारी बारिश के बाद पहाड़ी दरकने से भारी नुकसान हुआ है। पठानकोट मंडी NH पर पद्धर से 5 किलोमीटर दूर कोटरोपी में बहुत बड़ा लैंडस्लाइड हुआ है। इससे NH का करीब 300 मीटर हिस्सा बह गया है। एचआरटीसी की दो बसें इस लैंडस्लाइड की चपेट में आई हैं जिससे 50 यात्रियों के दब जाने की आशंका है। जोगिंदर नगर से मंडी के बीच कोई यात्रा न करें, सड़क बंद है। (अपडेट की गई ताज़ा ख़बर यहां क्लिक करके पढ़ें)

पढ़ें: HRTC के इन रूटों की बसें आईं लैंडस्लाइड की चपेट में

कोटरोपी में रात करीब साढ़े 12 बजे यह भूस्खलन उसी जगह पर हुआ है जहां से चुक्कू के लिए सड़क जाती है। पहाड़ी का मलबा बहुत ऊपर से गिरा है और जैसा कि आप तस्वीर में देख सकते हैं, मलबा बहुत ज्यादा है। इसकी चपेट में एक मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग भी आई है। कोटरोपी का रेन शेल्टर भी गायब है। घटनास्थल पर पहुंचे स्थानीय निवासी हेमसिंह ठाकुर ने फेसबुक पर वीडियो बनाया है, जिसे आप नीचे देख सकते हैं:

परिवहन मंत्री जी.एस. बाली ने बताया है कि निगम की दो बसें इस लैंडस्लाइड की चपेट में आई हैं- मनाली-कटड़ा और मनाली चंबा। एचआरटीसी की जिस बस से 4 शव बरामद होने की बात कही जा रही है, उससे ज्यादातर सवारियां पहले ही उतर चुकी थीं।

भूस्खलन की चपेट में आई बस

मगर दूसरी बस, जो सवारियों से पूरी भरी थी, मलबे में दबी हुई है। परिवहन मंत्री ने 50 यात्रियों के दबने की आशंका जताई है।

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साथ ही आशंका यह भी है कि कुछ और वाहन और लोग भी इस मलबे में दबे हो सकते हैं।

अभी तक मौतों और नुकसान के बारे में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है मगर राहत और बचाव कार्य की कोशिश जारी है और खबर लिखे जाने तक एक जेसीबी वहां काम कर रही थी।

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और संसाधन जुटाए जा रहे हैं और प्रशासनिक अमला और आसपास के लोग भी मदद के लिए आगे आए हैं।हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं जो इस तरह से हैं- प्रशासन: 01905 226201, 226202, 226203 HRTC: 01905 235538 और 9418001051

तस्वीरें: देखें, कितने बड़े इलाके में हुआ लैंडस्लाइड 

(यह खबर अपडेट की जा रही है)

 

मंडी लैंडस्लाइड: इन रूटों की 2 बसों से 50 यात्री बहे

मंडी।। मंडी जिले के कोटरोपी में आई प्राकृतिक आपदा में हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम की दो बसों के दबने की पुष्टि हुई है। परिवहन मंत्री जी.एस. बाली ने बताया है कि मनाली-कटड़ा और चंबा-मनाली रूट की बसें इस लैंडस्लाइड की चपेट में आई हैं और करीब 50 लोगों के बह जाने की खबर है।

पढ़ें: मंडी के कोटरोपी में बहुत बड़ा भूस्खलन, भारी नुकसान

परिवहन मंत्री ने फेसबुक पेज पर डाले स्टेटस में लिखा है, ”मंडी जिले के कोटरोपी में रात को बारिश के बाद हुए भूस्खलन में परिवहन निगम की दो बसें भी चपेट में आ गईं। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में करीब 50 लोगों के बह जाने की आशंका है। इनमें एक बस चंबा-मनाली और दूसरी मनाली-कटड़ा है।”

आगे वह लिखते हैं, ”रात 2 बजे से राहत व बचाव कार्य जारी हैं और मैं खुद लगातार जिला प्रशासन व अन्य संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हूं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सेना को भी बुलाया गया है। जल्द ही हेल्पलाइन नंबर इसी स्टेटस पर अपडेट किया जाएगा।”

इस हादसे में एचआरटीसी की एक बस दब गई थी। ज्यादातर सवारियां उतर गई थीं। बाद में कुछ को बचाया गया। 4 शव भी निकाले गए हैं।

वहीं जानकारी मिल रही है कि मनाली-कटड़ा बस से कुछ यात्रियों को बचाया गया है मगर दुर्भाग्य से मनाली-चंबा बस का कुछ पता नहीं चल पा रहा है। बताया जा रहा है कि यह बस यात्रियों से पूरी तरह भरी हुई थी।

तस्वीरें: देखें, कितने बड़े इलाके में हुआ लैंडस्लाइड

इस संबंध में हेल्पलाइन नंबर या अन्य जानकारी मिलने पर हम अपडेट करेंगे।

तस्वीरें देखें और जानें, कितना बड़ा है मंडी में हुआ लैंडस्लाइड

पहली तस्वीर पर क्लिक करने के बाद स्वाइप करें, ठीक उसी तरह जैसे स्मार्टफोन की गैलरी में तस्वीरों को देखने के लिए करते हैं।

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